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महिला सुरक्षा पर सवाल: नारी 2025 रिपोर्ट ने खोली हेमंत सरकार की नाकामी – प्रतुल शाहदेव ने कसा तंज

रांची राष्ट्रीय महिला आयोग के द्वारा जारी नारी रिपोर्ट 2025 पर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह रिपोर्ट हेमंत सरकार की संवेदनहीनता और नाकामी को उजागर करती है। शाहदेव ने कहा कि ‘‘देश के 31 शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर हुए सर्वे में राजधानी रांची की महिलाएं सबसे असुरक्षित बताई जाती हैं। सरकार के लिए सबसे शर्मनाक पहलू है कि राजधानी की 27त्न महिलाएं छेड़खानी के कारण अपना घर बदलने को मजबूर होती हैं।'' प्रतुल शाहदेव ने आगे कहा कि लोगों का पुलिस पर अविश्वास इतना बढ़ गया है कि ‘‘9त्न महिलाएं अपने साथ हुए अपराध को छुपा लेती हैं और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि सर्वे के अनुसार 85त्न महिलाओं को प्रशासन पर भरोसा ही नहीं है। इससे साफ है कि झारखंड में महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही हैं।'' शाहदेव ने आरोप लगाया कि ‘‘रांची ही नहीं, पूरे झारखंड में यही स्थिति है। हेमंत सरकार पार्ट 1 और पार्ट 2 में अब तक 8000 से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज हो चुके है। बलात्कारियों को सजा दिलाने का सरकार का रिकॉर्ड भी फिसड्डी है। आदिवासी बालिकाएं लगातार ट्रैफिकिंग की चपेट में आ रही हैं, लेकिन हेमंत सरकार पिछले 6 वर्षों से राज्य महिला आयोग का गठन तक नहीं कर पाई। यह उसकी महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के प्रति संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है।'' प्रतुल ने कहा कि ‘‘हेमंत सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है जो सरकार महिला आयोग तक नहीं बना पाई, उससे महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है।''  

अरविंद सैनी का बयान: प्रधानमंत्री मोदी ने GST सुधारों से बदल दी देश की टैक्स व्यवस्था

हरियाणा देश की मोदी सरकार ने जी.एस.टी दरों में कमी करके जहां देश के विभिन्न वर्गों को राहत देते हुए विपक्ष को मुद्दाविहीन कर दिया है तो वहीं महंगाई को कम करने की दशा में एक बड़ी पहल की है । अहम बात ये है कि भारत पर टैरिफ लगाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से जितना अमेरिका मुखर था, उतनी ही मुखरता से भारत के अंदर विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगे थे। विपक्षी नेताओं ने अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे में महंगाई और बेरोज़गारी की नकारात्मक हवा भर इसे और बड़ा बनाने की कोशिश की, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने नए जी.एस.टी रिफार्म्स से न केवल अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे को फोड़ा, बल्कि विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे मंहगाई और बेरोज़गारी बढ़ने के नैरेटिव को भी धराशाई कर दिया। सच तो यह है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार देखा है। जी.एस.टी और अब नेक्स्ट जेन जी.एस.टी सुधारों ने आम उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों को सरलता और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है। यह सुधार व्यवस्था में सरलीकरण लाएगा जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।  हालांकि विपक्ष (खासकर कांग्रेस) मोदी सरकार के इस एतिहासिक नए जीएसटी रिफार्म्स को पचा नहीं पा रहा है और बिहार चुनाव को इससे जोड़कर दिखाना चाह रहा है। इसी चाह में कांग्रेस बीड़ी और बिहार की तुलना भी कर चुकी है। ये बात और है कि जब कांग्रेस का यह दांव उलटा पड़ गया तो केरल कांग्रेस ने ट्वीट कर इस पर माफ़ी भी मांगी है। खैर ये कांग्रेस और विपक्षी दलों की मानसिकता बन गई है। विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इतने अंधे हो चुके हैं कि अब उन्हें पता ही नहीं चलता कि मोदी सरकार का विरोध करते-करते कब देश का विरोध करने लग जाते हैं। ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गांधी का भारत को डेड अर्थव्यवस्था कहना इसका ताजा उदाहरण है। अमेरिकी टैरिफ लागू होने के दौरान भी भारत की बढ़ती जी.डी.पी भारत को डेड इकोनोमी कहने वालों के मुंह पर तमाचा है। इसी तरह नए जीएसटी रिफार्म्स जहां आम जनता को राहत और बचत देते दिख रहे हैं, वहीं विपक्षी पार्टियों को इसके बाद वोटों में चपत लगती दिख रही है।  जीएसटी में नेक्स्ट जेन रिफॉर्म्स का तोहफा 22 सितंबर, नवरात्रि के पहले दिन से मिलने जा रहा है। जीएसटी में यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। मोदी सरकार के इस दावे पर देश विश्वास करता दिख रहा है कि उद्योग जगत जीएसटी दरों में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाएंगा।    हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी अरविंद सैनी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने केवल वादे किए, लेकिन सुधार कभी लागू नहीं कर पाई। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को भरोसा दिया, घाटा होने पर क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया। दैनिक रोज़मर्रा की कई वस्तुओं, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। कपड़े, जूते, दवाइयाँ, फ्रिज-टीवी, कृषि उपकरण, घर निर्माण की सामग्री तक सब सस्ते हुए हैं। इस बदलाव से हमारे देश के युवा-युवतियों, महिलाओं, किसानों, कृषि उत्पादन, एमएसएमई क्षेत्र, उपभोक्ताओं, दुकानदारों और उद्योग चलाने वाले उद्यमियों सहित हर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा। 2014 से पहले कांग्रेस की सरकारों के दौरान उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर जितना बोझ था, चाहे वह टैक्स का हो या कागजी झंझटों का, वह 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद लगातार कम होता गया। आज भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत स्थिति में है कि बैंक के ब्याज दरों में कमी आई है, महंगाई दर में भारी गिरावट आई है और विकास दर ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर पहुँची है। जब पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती से जूझ रही है, तब भारत 7.8% की दर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी। जीएसटी सुधारों का यह निर्णय देश को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की ओर ले जाता दिख रहा है। वैसे इन परिस्थितियों में नए जीएसटी रिफार्म्स कर पाना आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने घाटा होने पर राज्यों को क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया।  रोज़मर्रा की वस्तुएँ, कपड़े, जूते, दवाइयाँ, बीमा, टू-व्हीलर से लेकर फ्रिज-टीवी तक सब सस्ते हुए हैं। मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। आजादी के बाद पहली बार देश के टैक्स ढांचे में इतना बड़ा परिवर्तन किया गया है। व्यवस्था में सरलीकरण आएगा, जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।    15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री ने देश से वादा किया था कि अब भारत रुकेगा नहीं, झुकेगा नहीं, बल्कि आगे बढ़कर बड़े कदम उठाएगा। जो क्षमता देश में अब दिखाई दे रही है, वो क्षमता 2014 से पहले नहीं थी। उस समय देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हालत में थी।  कांग्रेस के 10 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार तो खूब हुआ, लेकिन कोई ठोस और परिवर्तनकारी सुधार नहीं किए गए।  श्रद्धेय अटल जी ने एक राष्ट्र-एक कर की परिकल्पना की थी। उस समय देश में लगभग 30-35 तरह के टैक्स, ड्यूटी और लेवीस लागू थे। अटल जी चाहते थे कि इन सबको समेटकर एक टैक्स बने, लेकिन 2004 में वे दोबारा चुनकर नहीं आए और इसके बाद यूपीए सरकार सिर्फ वादे करती रही। कांग्रेस के वित्त मंत्री बार-बार घोषणा करते रहे कि वे एक टैक्स लाएंगे, लेकिन राज्य सरकारें उन पर विश्वास नहीं करती थीं। तब राज्यों को भरोसा नहीं था कि अगर इस सुधार से उनका राजस्व घटा या घाटा हुआ, तो केंद्र उनकी मदद करेगा।  लेकिन मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में राज्यों को विश्वास दिलाया कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि किसी राज्य के राजस्व में कमी आती है या उसकी वृद्धि दर 14% से कम रहती है, तो केंद्र सरकार उसे कंपनसेशन के माध्यम से पूरा करेगी, वह भी पूरे 5 साल तक। यही विश्वास और यह गारंटी इस ऐतिहासिक सुधार को सफल बनाने में निर्णायक … Read more

सिवान को नीतीश सरकार का तोहफ़ा, 558 करोड़ से 9 विकास परियोजनाओं की हुई शुरुआत

पटना  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज सिवान जिला के नारायणपुर मोड़, पचरुखी में आयोजित कार्यक्रम स्थल से 558 करोड़ 35 लाख रुपये लागत की 9 विकासात्मक योजनाओं का शिलान्यास एवं कार्यारंभ किया। इसके अंतर्गत 222 करोड़ 1 लाख रुपये की लागत से 220/132/33 केवी ग्रिड, उपकेन्द्र मैरवा एवं सम्बद्ध लाईन 'बे' का निर्माण, 120 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से पचरुखी बाईपास मोहम्मदपुर मोड़ (एन० एच०-531) से छपिया-टेढ़ी घाट-गोपालपुर (एनएच-227) पथ का चौड़ीकरण, 92 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से राज्य उच्च पथ स० 89 (बबुनिया सिसवन रोड) पर सिवान यार्ड (सिवान रेलवे स्टेशन से पचरुखी रेलवे स्टेशन के बीच अवस्थित लेवल क्रॉसिंग संख्या-91 एसपीएल पर रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शामिल है। CM नीतीश ने जीविका दीदियों एवं अन्य लाभुकों के साथ किया संवाद साथ ही मुख्यमंत्री ने 67 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से सिवान आंदर पथ का चौड़ीकरण, 18 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से भण्टापोखर जीरादेई पथ का भाया जामापुर बाजार तक चौड़ीकरण, 10 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से सोनकारा, आन्दर में 33/11 के०वी० विद्युत शक्ति उपकेंद्र का निर्माण, 9 करोड़ 83 लाख की लागत से माधोपुर, महाराजगंज में 33/11 केवी विद्युत शक्ति उपकेंद्र के निर्माण, 9 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से मशरख-महाराजगंज 132 के०वी० संचरण लाइन का द्वितीय सर्किट स्ट्रिगिंग एवं सम्बद्ध लाईन 'बे' के निर्माण, 8 करोड़ 49 लाख की लागत से सिवान ग्रिड उपकेन्द्र में 80 एमवीए ट्रांसफार्मर के अधिष्ठापन कार्य का शिलान्यास/कार्यारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिवान के नारायणपुर मोड़, पचरूखी स्थित कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में उपस्थित पेंशनधारी लाभुकों, जीविका दीदियों एवं अन्य लाभुकों के साथ संवाद किया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। वहां उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि वृद्धजनो, दिव्यांगजनों एवं विधवा महिलाओं की पेंशन राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया गया है। इससे सभी लोग खुश हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली फ्री करने से लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। वे लोग बचत राशि का उपयोग अन्य विकास कार्यों में कर रहे हैं। जीविका दीदियों ने महिलाओं के उत्थान की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान ममता बहनों ने प्रोत्साहन राशि में दो गुना बढ़ोतरी किये जाने पर तथा आशा कार्यकर्ताओं ने प्रोत्साहन राशि तीन गुना वृद्धि किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मिड डे मील रसोइया, गृह रक्षा वाहिनी के लोगों ने भी मानदेय में वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। आप सभी बुलंदी के साथ रहिए और आगे बढ़िए- CM Nitish लाभार्थियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी बुलंदी के साथ रहिए और आगे बढ़िए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी आप सभी जीविका दीदियां बहुत अच्छा काम कर रही हैं। आप लोग मन लगाकर काम करें, सरकार आप लोगों की हर संभव मदद कर रही है। अपने परिवार की तरक्की कीजिए और बिहार के विकास में अपना अहम योगदान दीजिए।

यूपी में ऐतिहासिक फैसला: बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार, जानें कैसे होगा लागू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब तक शादीशुदा बेटियों को पिता की कृषि भूमि में हिस्सा नहीं मिलता था, लेकिन जल्द ही यह स्थिति बदल सकती है. राजस्व परिषद ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसी माह इसे शासन को भेजा जाएगा. फिलहाल उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 108 (2) के तहत किसी पुरुष भूमिधर के निधन के बाद जमीन का नामांतरण केवल उसकी विधवा, पुत्र और अविवाहित पुत्री के नाम किया जाता है. शादीशुदा बेटियों को इस अधिकार से बाहर रखा गया है. यही कारण है कि लंबे समय से इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण मानते हुए संशोधन की मांग उठ रही थी. कया बदलेगा नियम सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन में धारा-108 से विवाहित और अविवाहित जैसे शब्द हटा दिए जाएंगे. इसके बाद शादीशुदा बेटियों को भी उतना ही अधिकार मिलेगा जितना बेटों या अविवाहित बेटियों को मिलता है. यानी विरासत दर्ज करते समय विवाह के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. इतना ही नहीं, मृतक भूमिधर की बहनों के अधिकार में भी यह फर्क खत्म कर दिया जाएगा.   अन्य राज्यों में पहले से लागू मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह व्यवस्था पहले से लागू है. वहां विवाहित बेटियों को पिता की कृषि भूमि में पुत्रों के बराबर अधिकार मिलता है. यूपी सरकार का यह कदम भी उसी दिशा में माना जा रहा है. आगे की प्रक्रिया प्रस्ताव शासन स्तर पर परीक्षण के बाद कैबिनेट में जाएगा. इसके बाद विधानसभा और विधान परिषद की मंजूरी मिलने पर यह कानून का रूप ले लेगा. इसे महिलाओं को बराबरी का हक़ दिलाने और महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में नक्सली दहशत: सुकमा में हुई निर्मम हत्याओं की हकीकत

बस्तर  बस्तर एक बार फिर माओवादी हिंसा की चपेट में आ गया है. छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में रविवार देर रात हथियारबंद नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की निर्मम हत्या कर दी. यह घटना केरलापाल थाना क्षेत्र के सिरसेटी के नंदापारा में हुई. मृतकों की पहचान पदम पोज्जा और पदम देवेंद्र के रूप में हुई है. सूचना पर पुलिस दल मौके पर पहुंच गए हैं और बस्तर पुलिस जल्द ही आधिकारिक बयान जारी करेगी. सुकमा में एक हफ़्ते के भीतर माओवादियों से जुड़ी यह दूसरी हत्या है. इससे पहले जगरगुंडा के सिलगेर गांव में शिक्षादूत लक्ष्मण बारसे की हत्या कर दी गई थी.   पिछले एक पखवाड़े में माओवादियों ने बस्तर में नागरिकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं. कांकेर में स्वतंत्रता दिवस पर एक माओवादी स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 25 वर्षीय ग्रामीण मनीष नुरेती का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. खबरों के अनुसार, उसकी फांसी से पहले एक "जन अदालत" का आयोजन किया गया था. एक अन्य मामले में सुकमा के पोलमपल्ली में 40 वर्षीय सोदी देवा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. बीते दिनों तीन नक्सलियों को किया गया था गिरफ्तार नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. बीते रविवार को सुकमा जिले में विस्फोटकों के साथ तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान पोडियम जोगा (25), माडवी मासा (25) और पोज्जा माडवी (29) के रूप में हुई थी. ये तीनों प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के मिलिशिया सदस्य हैं. इनके पास से लगभग 3 किलोग्राम वजन का एक टिफिन बम, पांच डेटोनेटर, पांच जिलेटिन रॉड, चार पेंसिल सेल, बिजली के तार और डेटोनेटिंग कॉर्ड बरामद किए गए थे.

दुर्घटना ने बदली खुशियों की शाम, रायसेन में विसर्जन के दौरान दो भाइयों की गई जान

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में गणेश विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. घाटखेड़ा गांव में दो भाई डूब गए जिससे उनकी मौत हो गई. पांच लोग विसर्जन के लिए गए थे, तभी फिसलकर दो नाबालिग गहरे पानी में समा गए. एक को निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस घटना से गांव में मातम पसरा है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.   मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के घाटखेड़ा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया है. शनिवार रात करीब 8 बजे गणेशोत्सव की समाप्ति पर घर से गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले पांच युवकों में से दो की डूबने से मौत हो गई. प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा जानकारी के अनुसार, उमरावगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में एक ही परिवार के पांच युवक विसर्जन के लिए नजदीकी नाले में गए थे. सभी किशोर प्रतिमा विसर्जन के बाद एक पत्थर पर खड़े होकर पानी देख रहे थे, तभी नीचे की मिट्टी धंस गई और वो पानी में गिर पड़े. इस हादसे में 16 साल के अनुज साहू और 17 साल के नितिन साहू गहरे पानी में बह गए. दो भाइयों की डूबने से मौत गांववालों ने तुरंत शोर सुनकर बचाव कार्य शुरू किया. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अनुज का शव बरामद हुआ. वहीं नितिन को निकालकर सीपीआर (CPR) दिया गया और तत्काल भोपाल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, अन्य तीन लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया.  उमरावगंज थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि यह एक दुखद हादसा है और परिजनों को ढांढस बंधाया गया है. गांववालों ने कहा कि हर साल यहां विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने की वजह से यह हादसा हो गया. 

संस्कृत हमारी विरासत का आधार, इसे संरक्षित करना सबकी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री

रायपुर भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत भाषा व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।  सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे। सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।

UP में शिक्षा जगत में भूचाल! सुप्रीम कोर्ट ने TET को किया चुनौतीपूर्ण आदेश, कांग्रेस ने BJP पर बोला हमला

लखनऊ सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं होगा. लेकिन जिनकी सेवा 5 साल से अधिक है, उन्हें परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले यूपी के 2 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है. वहीं इस फैसले से देश के 10 लाख से ज्यादा शिक्षक प्रभावित होंगे. ऐसे में इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है. यूपी कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से अधिक शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना आवश्यक होगा. आगे कांग्रेस ने कहा, प्रदेश के 2 लाख से अधिक तो देश के 10 लाख से ज़्यादा शिक्षकों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए टीईटी परीक्षा पास करना शायद अब संभव न हो. हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन भाजपा की डबल इंजन सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह इस आदेश को लागू करने का तरीका मानवीय और व्यावहारिक बनाए. कांग्रेस पार्टी शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

देवतालाब, बनारस और प्रयागराज धार्मिक क्षेत्र का अनूठा त्रिकोण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा है कि शिव मंदिर देवतालाब अदभुत है। यहां पांच तत्वों का आभास होता है। ऐसा अद्भुत मंदिर केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं। देवतालाब, बनारस और प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक त्रिकोण हैं। देवतालाब आस्था, इतिहास और आनंद का संगम है। यह श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब के शिव का दर्शन करने पर ही चारधाम की यात्रा का फल मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मऊगंज के देवतालाब स्टेडियम में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 241 करोड़ 33 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास कर विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये और मऊगंज को विकास की अनेक सौगातें देते हुए घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन कर मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे गांव स्वावलम्बन की अद्भुत मिसाल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट है। हमारी इस सामर्थ्य के परिणामस्वरूप ही देश की कीर्ति गाथा सम्पूर्ण विश्व में गूंज रही है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कथन की "21वीं सदी भारत की होगी" साकार हो रहा है। गर्व का विषय है कि स्वामी विवेकानंद अर्थात श्रद्धेय नरेन्द्र नाथ दत्त की भावना को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने चरितार्थ किया है। देश के गरीब, युवा, अन्नदात और महिलाओं का कल्याण तथा विकास तपोनिष्ट प्रधानमंत्री  मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री  मोदी ने इसी माह प्रदेश आगमन के लिए स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए कभी भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी, इसी का परिणाम है कि प्रदेश में चहुंओर विकास का परचम लहरा रहा है। जबकि अन्य दलों की सरकारें विकास के लिए सदैव संसाधनों के अभाव का बहाना बनाती रहीं। विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत है केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयागराज और काशी विश्वनाथ के बीच बसा यह स्थान देवताओं की अभिरूचि की अभिव्यक्ति है। उनके स्वयं के लिए भी देवतालाब आगमन सदैव सुखद और भाग्यशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने विश्व को मानवता का विचार देते हुए जीवन जीने का सही मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी प्रधानमंत्री  मोदी की प्रभावशीलता के परिणाम स्वरूप विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत केंद्र बिंदु बना हुआ है। यह हम सबके लिए गर्व-गौरव और स्वाभिमान का विषय है कि अमेरिका हो या दुनिया का कोई भी अन्य बड़ा देश, सभी प्रधानमंत्री  मोदी की स्वीकार्यता के लिए उत्सुक हैं। खेत में किसान और सीमा पर जवान का सम्मान हमारी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेत में किसान और सीमा पर जवान दोनों का सम्मान हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसान सम्मान निधि तथा अन्य प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। पर्याप्त सिंचाई और बिजली की उपलब्धता प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर की गई है। जिससे रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों की एक लाख 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रीवा के सोलर प्लांट की बिजली से दिल्ली की मेट्रो रेल दौड़ रही है। मऊगंज के घुरेहटा में बाबा रामदेव के पतंजलि संस्थान द्वारा एक हजार करोड़ रुपए की लागत से कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। इससे लाखों किसान लाभान्वित होंगे। उज्ज्वला गैस योजना से 64 हजार से अधिक गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। मऊगंज में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 44 हजार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के आवास मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में जारी की जा रही राशि दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी, जिसे वर्ष 2028 तक प्रतिमाह 3 हजार रुपए किया जायेगा। मऊगंज को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज जिले और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र को अनेक सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने देवतालाब शिव मंदिर में शिवलोक के निर्माण और नईगढ़ी एवं देवतालाब में तहसील भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवतालाब के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जायेगा। देवतालाब के शासकीय महाविद्यालय में ऑडिटोरियम और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास भवन बनाए जाएंगे। बहुती जल प्रपात को पर्यटन विकास निगम के माध्यम से विकसित किया जायेगा। अष्टभुजी माता मंदिर में सौंदर्यीकरण और जनजाति अंचल में टीपा बदोर से गढ़वा रोड तक 11 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बनारस से आये लोक कलाकारों द्वारा दी गई सांगीतिक प्रस्तुति की सराहना की और लोक कलाकारों को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की। लोक नृत्य प्रस्तुत करने वाले दल के प्रत्येक सदस्य को 5-5 हजार रूपए और स्वागत गीत गाने वाली लोक गायिका राखी द्विवेदी को 50 हजार रूपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने 2 साल से कम समय में जो विकास किया है वह ऐतिहासिक है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी। आज मऊगंज को 241 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। क्षेत्र में सड़क, नहर और माइक्रो इरिगेशन परियोजना से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 6 हजार करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इससे मऊगंज जिले के हर खेत में पानी पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव और पर्यटन कान्क्लेव का आयोजन कर पूरे विंध्य में विकास के नए द्वार खोले हैं। प्रारंभ में विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गिरीश गौतम ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अतिथियों का स्वागत किया और क्षेत्र के विकास के लिये विभिन्न प्रस्ताव रखे। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी और पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, सांसद  जनार्दन मिश्र और विधायक मऊगंज  प्रदीप पटेल, विधायक त्योंथर  सिद्धार्थ तिवारी, विधायक … Read more

सुरक्षा बलों की कार्रवाई: अमित हांसदा मारा गया, 10 लाख का इनाम खत्म

झारखंड देश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है. झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस, झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के जवान बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इन्हीं प्रयासों के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा क्षेत्र में रविवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए नक्सली संगठन के कुख्यात जोनल कमांडर अमित हांसदा को ढेर कर दिया. उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। यह मुठभेड़ गोइलकेरा थाना क्षेत्र के रेलापराल जंगल और बुरजूवा पहाड़ी के पास हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ से सटे सीमावर्ती इलाकों में सर्च अभियान को और तेज कर दिया गया है। इस ऑपरेशन को नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने माओवादी संगठन के मनोबल को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुठभेड़ की पूरी कहानी चाईबासा एसपी को सूचना मिली थी कि गोईलकेरा थाना क्षेत्र के आराहासा पंचायत अंतर्गत रेलापराल गांव के पास नक्सली संगठन के कुछ सदस्य इकट्ठा हुए हैं. बताया गया कि ये नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे. इस जानकारी के आधार पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कोबरा इकाई, झारखंड पुलिस, और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने रविवार सुबह 6:30 बजे एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा बल जंगल में पहुंचे, नक्सलियों ने उन पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की और दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई। कोबरा कमांडो और झारखंड पुलिस की भारी जवाबी फायरिंग के दबाव में नक्सली पीछे हटने लगे और घने जंगल का सहारा लेकर भागने की कोशिश की। इस दौरान जोनल कमांडर अमित हांसदा मुठभेड़ में मारा गया। खबर है कि, फोर्स द्वारा घेरे मुठभेड़ खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें हांसदा का शव बरामद हुआ। उसके पास से एक सेल्फ-लोडिंग राइफल, कारतूस, माओवादी पर्चे, और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। कौन था अमित हांसदा? अमित हांसदा उर्फ अपटन भाकपा (माओवादी) का एक प्रमुख जोनल कमांडर था, जो पिछले एक दशक से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, और खूंटी जिलों में सक्रिय था। वह कई हिंसक वारदातों, सुरक्षा बलों पर हमलों, सड़क निर्माण और सरकारी परियोजनाओं में बाधा डालने, और लेवी वसूली जैसे मामलों में वांछित था। उसकी गतिविधियों ने क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बनाए रखा था। झारखंड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी या जानकारी के लिए 10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। पुलिस के अनुसार, हांसदा का मारा जाना माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह संगठन की रणनीति और ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। उसकी मौत से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।