samacharsecretary.com

बिजली घोटाले और गड़बड़ियों पर लगाम, पंजाब पावरकॉम ने उठाए कड़े कदम

लुधियाना  पावरकॉम की सिटी वैस्ट डिवीजन के अंतर्गत पड़ते चौड़ा बाजार कार्यालय में तैनात जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ बाजवा नगर इलाके के रमन चोपड़ा व मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पंजाब केसरी द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद उच्चाधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।  उक्त मामले को लेकर आम जनता में पावरकॉम अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली के खिलाफ सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। उक्त मामले में शिकायतकर्त्ता रमन चोपड़ा और मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक उनकी बाजवा नगर इलाके में स्थित फैक्टरी में लगा बिजली का मीटर शॉर्ट सर्किट होने के कारण जलकर खराब हो गया जिसकी शिकायत उनके द्वारा विभाग को लिखित में देने सहित पावरकॉम की ऑनलाइन साइट पर भी की गई लेकिन शिकायत का समाधान नहीं हुआ। जब मामले संबंधी जे.ई. दीपक कुमार से बात की गई तो कर्मचारी द्वारा उनके साथ कथित बदसलूकी की गई। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ विजीलैंस जांच करवाने और उसे तुरंत सस्पैंड करने की अपील की है। पावरकॉम विभाग के चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ लगे आरोपों की विभागीय जांच की जा रही है। आरोप सही पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक सवाल के जवाब में चीफ इंजीनियर ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ इससे पहले भी उपभोक्ताओं की कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। 

सांसद उम्मेदाराम ने खेत सिंह हत्या मामले में किया बड़ा बयान, मांग की कड़ी सजा

जोधपुर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल आज जोधपुर प्रवास पर रहे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि खेत सिंह की जिस तरीके से हत्या की गई, वह निंदनीय है। दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी घटना करने का दुस्साहस न करें। उन्होंने कहा कि घटना के बाद जो हालात सामने आया, वह और भी निंदनीय है। जिला प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा और स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ। उससे भी अधिक निंदनीय यह रहा कि जिस तरह भाजपा नेताओं का वहां जमावड़ा होता गया और प्रशासन तमाशबीन बनकर स्थिति बिगड़ते देखता रहा। यह प्रशासन की 100% विफलता रही। घटना को तूल देने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश की गई। 'प्रशासन मूकदर्शक बना रहा' बेनीवाल ने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से शांतिप्रिय और आपसी भाईचारे का प्रतीक रहा है, लेकिन भाजपा ने जलती आग में घी डालने का काम किया। वहां जाकर भाजपा नेताओं ने जनता को भड़काया और अलग-अलग तरीके से दिए गए भाषणों से स्थिति और बिगड़ गई। परिणामस्वरूप लोगों के घर जला दिए गए, दुकानों को तोड़ दिया गया और उनमें आग लगा दी गई, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने बताया कि समय रहते उन्होंने एसपी को कॉल किया। एसपी मौके पर पहुंच गए, लेकिन कलेक्टर भी वहां पहुंचे और उनकी मौजूदगी में ही स्थिति को जानबूझकर बिगाड़ा गया। मैंने आईजी साहब से बात की, वे मौके पर गए, लेकिन तब भी हालात नहीं संभले। आखिरकार मैंने फिर आईजी साहब से फोन कर स्थिति को नियंत्रित करवाया। उनकी निगरानी में ही मामला शांत हुआ। 'इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो' सांसद बेनीवाल ने कहा कि हालात बिगड़ने के पीछे भाजपा का हाथ है। भाजपा ने भोली-भाली जनता को भड़काकर स्थिति को खराब किया। मैंने अधिकारियों से मांग की है कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। हत्या में शामिल लोगों के साथ-साथ जिन्होंने कानून अपने हाथ में लेकर स्थिति को बिगाड़ा, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं है' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां की स्थिति सामान्य बनी रहनी चाहिए। लेकिन भाजपा की राजनीति शुरू से ही लोगों को भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की रही है। जब जिम्मेदार नेता ही जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करें और उन्हें भड़काएं, तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। कानून सबके लिए है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और कानून हाथ में लेना बिल्कुल गलत है। भाजपा एक तरफ "डबल इंजन की सरकार" की बात करती है, वहीं कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ती हैं। सबको कानून के दायरे में रहकर चलना चाहिए। मैं हमेशा शांति का पक्षधर रहा हूं। घटना के वक्त भी देखा गया कि राजनीतिक फायदे के लिए अशांति फैलाने की कोशिश की गई। जानें क्या था डांगरी गांव यह चर्चित मामला  जैसलमेर जिले का सीमावर्ती गांव डांगरी पिछले तीन दिनों से मानो युद्धक्षेत्र बना हुआ था। 2 सितंबर की रात पर्यावरण प्रेमी और किसान खेत सिंह की बेरहमी से हत्या के बाद गांव गुस्से और आक्रोश से सुलग उठा। गांव की गलियों से लेकर खेतों तक हर जगह मातम और गुस्से का माहौल था। हालात इस कदर बिगड़े कि प्रशासन को पूरे गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा। आखिरकार 48 घंटे की जद्दोजहद और कई दौर की वार्ता के बाद गुरुवार देर रात समझौता हुआ और शुक्रवार सुबह खेत सिंह की अंतिम यात्रा शांति के बीच निकली।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से मनेंद्रगढ़ के लोगों की बड़ी मांग पूरी होने की कगार पर

चिरमिरी नागपुर रोड हॉल्ट परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने दावा आपत्ति के बाद 198 भूखंडों के अधिग्रहण के लिए जारी किया अधिसूचना अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण,  जल्द ही शुरू होगा मुआवजा वितरण का कार्य रायपुर,  स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल का प्रयास जिले में यात्री सुविधाओं और रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए  रंग ला रहा है। उनकी कोशिशों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी नागपुर हॉल्ट रेल परियोजना के लिए दावा आपत्ति के बाद भू अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी की है।  केंद्रीय सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चिरमिरी नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत 36.392 हेक्टेयर रकबे की कुल 198 भूमि खंडों को परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही अब शीघ्र ही प्रभावितों को मुआवजा वितरण का कार्य शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट पर सहमति प्रदान करते हुए अंतिम रूप से भूमि अधिग्रहण की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि अब भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के नाम दर्ज होगी और परियोजना कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में मंजूरी दी गई थी। भूमि अर्जन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 32 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 5 आपत्तियां सही पाई गईं। सक्षम प्राधिकारी द्वारा शेष आपत्तियों का निराकरण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई।

जालंधर में मचा बवाल: सांसद चन्नी लापता, लोग सड़कों पर, Video हो रही तेजी से वायरल

जालंधर  जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जनता उन्हें "लापता सांसद" कहकर पुकार रही है। वजह साफ है कि जालंधर के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। शहर में भी बाढ़ जैसे हालात बने रहे, सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लोग सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, मगर उनके सांसद खुद कहीं और अपनी सक्रियता दिखाते नजर आते हैं। आम जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिस जनता ने 2024 में उन्हें रिकॉर्ड मतों से जीताकर लोकसभा भेजा, उस जनता की सुध लेने में चन्नी पीछे क्यों हैं? यूं तो चरणजीत चन्नी का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले चन्नी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब और भदौर से एक साथ चुनाव लड़ा, मगर दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार साफ संदेश दिया कि मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन हालातों के चन्नी का चमकौर साहिब हलके से लगाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि हाल के दिनों में वे लगातार उसी हलके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बोरियों में मिट्टी भरते, ट्रैक्टर चलाते और राहत कार्यों का हिस्सा बनते नजर आते हैं। दूसरी ओर, जालंधर की जनता इसे "ड्रामा" मान रही है। लोगों का कहना है कि सांसद चन्नी को जालंधर की जनता ने जिताया, मगर वे अभी भी चमकौर साहिब से ही राजनीति चमकाने में लगे हैं। मतदाताओं का कहना है कि चुनावों के दौरान चन्नी ने हर समय जनता के साथ खड़े रहने का वादा किया था, मगर आज जब जनता संकट में है तो वे नदारद हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस पदाधिकारी तक उनसे मिलने को तरस रहे हैं। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (ऑर्गेनाइजेशन) कैप्टन संदीप संधू ने द्वारा हाल ही जारी किए पत्र में विशेषकर सांसद चन्नी का जिक्र किया गया और उनसे आग्रह किया गया कि वे हाईकमान के फैसले के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र जालंधर में सक्रिय रहें। यह आदेश इस बात का संकेत है कि पार्टी भी चन्नी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यदि सांसद की यह कार्यप्रणाली जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जालंधर में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस किस मुंह से 9 विधानसभा हलकों में वोट मांगने जाएगी। भले ही सांसद चन्नी पत्र जारी होने के बाद विगत पिछले दिनों नकोदर व शाहकोट हलकों का हवाहवाई दौरा कर बाढ़ के हालातों में काम करने की अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर खानापूर्ति कर गए है। चन्नी को जालंधर से मिली राजनीतिक संजीवनी, मगर फिर भी जनता से दूरी 2022 में करारी हार झेलने के बाद चन्नी का राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जा रहा था। मगर जून 2024 में जालंधर की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर एक नई राजनीतिक संजीवनी दी। इस जीत ने चन्नी को फिर से राजनीतिक परिदृश्य में स्थापित किया। अब अफसोस है कि चुनाव जीतने के बाद चन्नी का जनता से रिश्ता लगातार कमजोर होता चला गया। वे कब जालंधर आते हैं और कब चले जाते हैं, कहां रहते है, इसका पता गिने-चुने लोगों को ही रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में जालंधर के विभिन्न हिस्सों में "सांसद लापता" के पोस्टर तक लगाए गए। बाढ़ त्रासदी पर सांसद की चुप्पी जालंधर में हाल ही में बाढ़ के हालातों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घर गिर गए, लोग बेघर हुए और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में सांसद का फर्ज था कि वे राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते। मगर चन्नी की चुप्पी और गैरमौजूदगी ने लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। जालंधर के कई ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों का कहना है कि यदि उनके सांसद खुद प्रभावित गांवों व शहर के क्षेत्रों में जाकर हालात देखते तो प्रशासन पर भी काम करने का दबाव बढ़ता। जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी जालंधर की जनता का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्होंने जिस नेता को दोबारा राजनीति की मुख्यधारा में लाया, वही नेता आज उनकी तरफ पीठ फेर चुका है। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि उन्होंने चन्नी साहब को अपना सांसद बनाया ताकि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं, मगर वे तो खुद ही गायब हो गए। फिल्लौर के एक युवक ने तंज कसते हुए कहा, सांसद को खोजने के लिए अब शायद गुमशुदगी का इश्तहार देना पड़ेगा। वहीं शहर में बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घर टूट गए, खेत बर्बाद हो गए, मगर सांसद साहब को यहां आने की फुर्सत नहीं। लोगों का कहना है कि जालंधर की जनता ने उन्हें जिताया, मगर वे आज मात्र चमकौर साहिब के सांसद बने बैठे है।  

महिला आरक्षक दुष्कर्म मामला: अनिला भेड़िया ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप, डीजी और आईजी से करेंगे शिकायत

बालोद बीजापुर डिप्टी कलेक्टर पर महिला आरक्षक ने गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में एफआईआर के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने, FIR के 22 दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने और मुख्य सचिव सहित बीजापुर कलेक्टर को पीड़िता द्वारा निलंबन कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक अनिला भेड़िया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को बचाने के उद्देश्य से बालोद पुलिस पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता ने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके के खिलाफ शादी का झांसा देकर लगातार आठ वर्षों से शारीरिक शोषण करने, तीन बार जबरदस्ती गर्भपात कराने और लाखों रुपए लेने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर डौंडी थाने में लिखित शिकायत भी की है। बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध पंजीबद्ध होने के 22 दिन गुजर जाने के बाद भी आरोपी डिप्टी कलेक्टर फरार है। वहीं पीड़िता द्वारा बैंक स्टेटमेंट जमा करने के बाद भी आज पर्यंत तक आर्थिक शोषण किए जाने की धारा भी नहीं जोड़ी गई है। इस मामले को लेकर पूर्व महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अनिला ने उक्त पीड़िता समेत पूरे प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और अनाचार के दोषियों को संरक्षण देने का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया है। अनिला भेड़िया ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली भाजपा सरकार महिलाओं के साथ अनाचार करने वालों को बचाने के लिए अपराधियों के साथ खड़े होकर ऐसे ही सम्मान करती है। अभी तक इतने दिन बीत जाने के बाद भी डिप्टी कलेक्टर को जमानत का लाभ दिलाने जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पुलिस भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रही है इसीलिए पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पीड़िता से मिलेगी पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने कहा कि वो पीड़िता से मिलेगी। पीड़िता को न्याय दिलाने और बालोद जिले की लचर पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर डीजी और आईजी से भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा, डिप्टी कलेक्टर के शोषण की शिकार युवती सहित प्रदेश की हर महिला के साथ वे खड़ी हैं।

परीक्षा देने पहुंची छात्रा ने किया खुदकुशी प्रयास, भोपाल में कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हड़कंप

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब 6वीं कक्षा की छात्रा ने अचानक फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगा दी। यह घटना सुबह 7:30 बजे की बताई जा रही है। छात्रा उस समय स्कूल आई थी क्योंकि आज उसका 6th क्लास का एग्जाम था।  अचानक बच्चों के बीच हुई इस घटना से पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। छलांग लगाने के बाद छात्रा के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।  स्कूल परिसर में लगे CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि छात्रा ने खुद ही छलांग लगाई। घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गई, फिलहाल गोविंदपुरा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और इस कदम के पीछे की वजहों की पड़ताल में जुटी है  स्कूल की पहली मंजिल से गिरी छात्रा, हालत गंभीर जानकारी के मुताबिक, घटना के वक़्त छात्रा बहुत सारे बच्चों के साथ थी. हालांकि वो अचानक पहली मंजिल से गिरते हुई नजर आई. पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताया, जबकि पिता बोले- 'मैं नहीं कह सकता कैसे ये हादसा हुआ?' निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती  बच्ची के पिता ने बातचीत में कहा कि बच्ची का अस्पताल में इलाज जारी. उन्होंने बताया कि स्कूल से बच्ची की गिरने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मैं स्कूल पहुंचा था. अभी तक स्कूल प्रबंधन से बात नहीं हुई है.  उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने सीसीटीवी दिखाया था, जिसमें बच्ची गिरते हुए नजर अजर आ रही थी.   छात्रा की कराई जा रही सीटी स्कैन जांच घायल छात्रा को पिपलानी स्थित बालाजी अस्पताल में भर्ती कराया है। उसकी सीटी स्कैन आदि जांच भी कराई जा रही हैं। फिलहाल उसकी मौसी ही वहां मौजूद हैं। छात्रा को कितनी चोट आई हैं, इसकी पूरी जानकारी शाम तक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पांच बहनों में सबसे छोटी है छात्रा छात्रा की मौसी पिंकी के अनुसार, पिता गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वहीं उसकी मां फिलहाल चेन्नई गई हुई हैं। घायल छात्रा पांच बहनों में सबसे छोटी है। उसकी अन्य चार बहनों में दो बड़ी बहनें एलएलबी कर रही हैं। वहीं, एक बहन 8वीं और दूसरी 11वीं में है। बच्ची के पिता ने क्या बताया? पिता का कहना है कि बच्ची ने छलांग लगाई है या गिर गई है… कुछ कह नहीं सकते. मेरी बच्ची को खेलने कूदने का शौक है. हो सकता है उस कारण ये हादसा हुआ. मामले की हो रही जांच-एडिशनल डीसीपी एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि बच्ची के गिरने की सूचना मिली है. मामले की जांच की जा रही है. फिलहाल निजी अस्पताल में बच्ची का इलाज जारी है. पूछताछ करने के बाद ही पूरा मामला सामने आ पाएगा. उन्होंने बताया कि बच्ची पहली मंजिल से गिरी है. पूछताछ के बाद ही साफ होगा कि बच्ची गिरी  है या छलांग लगाई है… गौतम सोलंकी ने बताया कि एग्जाम शुरू होने के पहले ये घटना हुई है. 

गेरसा बांध टूटने से किसानों की चिंता बढ़ी, 30 एकड़ में फैली फसलें खतरे में

सरगुजा छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश के बाद नदियों नालों का जलस्तर बढ़ गया है. सरगुजा के लुंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत गेरसा में आज सुबह अचानक तेज बहाव के और अधिक जलस्तर के चलते गेरसा बांध टूट गया है, जिससे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल है. बांध के टूटने से नीचे की ओर लगभग 30 एकड़ फसल पानी में डूबकर खराब होने की आशंका जताई जा रही है. सूचना मिलते ही कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे जब चरवाहे अपने मवेशी चराने जंगल की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें पानी की तेज आवाज सुनाई दी. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बांध के एक साइड गेट के पास सुराख बन गया था, जो धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते लगभग 3 मीटर चौड़ा हो गया और बांध का हिस्सा टूट गया. अचानक पानी फैल जाने से किसान और ग्रामीण परेशान हैं. मौके पर पहुंची प्रशासन और एरिगेशन विभाग की टीम घटना की जानकारी मिलते ही एरिगेशन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पानी की अधिकता के चलते कोई ठोस बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिट्टी का कटाव जारी रहा तो पूरा बांध क्षतिग्रस्त हो सकता है. अधिकारियों ने बताया कि पानी का स्तर कम होने के बाद ही बांध को दोबारा बांधने या मरम्मत का कार्य किया जा सकेगा. कब बना था गेरसा बांध? गेरसा जलाशय बांध का निर्माण 1991-92 में किया गया था. तीन दशक पुराने इस बांध की मजबूती पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब टूटने से बड़ी समस्या सामने आ गई है. बांध के टूटने से ग्रामीणों की फसलों पर भी खतरा मंडरा रहा है.

पैसे नहीं, समय से करें लेन-देन! कानपुर का नया टाइम बैंक और इसके फायदे

कानपुर  जब भी बैंक का नाम आता है, हमारे मन में पैसों के लेन-देन की तस्वीर उभरती है. लेकिन कानपुर शहर में पहली बार ऐसा बैंक खुला है, जहां रुपये-पैसे का कोई काम नहीं होगा. यहां हर सदस्य अपने खाते में समय जमा करेगा और जरूरत पड़ने पर समय ही निकाल सकेगा. इस अनोखे प्रयोग का नाम है- टाइम बैंक. इस बैंक की खासियत यह है कि इसमें सदस्य अपनी सेवाओं के बदले घंटे जमा करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई सदस्य किसी बुजुर्ग की सेवा में दो घंटे लगाता है, तो उसके खाते में उतने घंटे दर्ज हो जाते हैं. बाद में जब उसे खुद किसी काम में मदद चाहिए होगी, तो वह उन्हीं घंटों को अपने खाते से निकाल सकता है. जानकारी के अनुसार, टाइम बैंक की शुरुआत सबसे पहले जापान में हुई थी. वहां बुजुर्गों की देखभाल के लिए परिवारजन समय नहीं निकाल पाते थे, तो समाज के लोगों ने मिलकर यह व्यवस्था बनाई. धीरे-धीरे यह मॉडल कई देशों में फैल गया. आज भारत में भी सात हजार से अधिक लोग टाइम बैंक से जुड़े हुए हैं और अब कानपुर भी इस पहल का हिस्सा बन गया है. कानपुर के महेश कुमार, जो इस प्रयोग के सक्रिय सदस्य हैं, बताते हैं कि यह बिल्कुल सेविंग अकाउंट की तरह है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें रुपये की जगह घंटे जमा होते हैं. विदेशों में तो सरकारें टाइम बैंक को समर्थन भी देती हैं और सदस्यों को सेवा कार्यों के लिए निर्देशित करती हैं. कानपुर में फिलहाल इसे समाजिक पहल के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. करवानी पड़ेगी रजिस्ट्रेशन महेश कुमार बताते है कि इस सेवा की प्रक्रिया वेबसाइट और ऐप से शुरू होती है. सबसे पहले अपने रजिस्ट्रेशन कराना होता है और ई-केवाईसी होती है. इसके बाद आप एक दूसरे की सेवा या समय ले सकते है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई अस्पताल में भर्ती है और उसको दो घंटे या इससे ज्यादा भी सेवा करने के लिए किसी की आवश्यकता है तो वह अपनी डिमांड भेज सकता है. जो इस सेवा के लिए राजी हो जाएगा उसको सेवा करनी होगी. सेवा खत्म होने के बाद जितने घंटे सेवा की उतने उसके खाते में जुड़ जाएंगे जिसका इस्तेमाल वो अपनी सेवा के लिए कभी भी कर सकता है. यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है. कानपुर में करीब 25 लोगों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. अब जैसे ही एडमिन की नियुक्ति होगी वैसे ही यहां भी सेवा शुरू हो जाएगी. बैंककर्मी और डॉक्टर भी जुड़े कई रिटायर्ड बैंककर्मी और डॉक्टर भी इस बैंक से जुड़ चुके हैं. उनका कहना है कि यह पहल सेवानिवृत्त लोगों और अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है. इससे न केवल मदद मिलती है, बल्कि समाज में आपसी जुड़ाव और सेवा की भावना भी मजबूत होती है. सदस्य बनने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है, जिसमें आधार, पैन या अन्य पहचान पत्र देना होता है. इसके बाद सदस्य का खाता खोला जाता है और उसमें समय दर्ज होने लगता है. खास बात यह है कि यहां हर व्यक्ति के समय की बराबर कीमत है. कानपुर का टाइम बैंक अब धीरे-धीरे और लोगों को जोड़ने की तैयारी में है. इसका उद्देश्य सिर्फ सेवा देना ही नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश फैलाना है कि असली दौलत समय है और हर व्यक्ति का समय समान रूप से मूल्यवान है.  

चैतन्य बघेल केस अपडेट: न्यायिक हिरासत में बढ़ोतरी, अगली सुनवाई 15 सितंबर तक

रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आरोपी बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आज राजधानी रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चैतन्य की पेशी हुई, जिसके बाद उन्हें अब 15 सितंबर तक के लिए न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि 15 सितंबर को ED इस मामले में चालान दाखिल कर सकती है। ED ने चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार 21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई। चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले ईडी की जांच से पता चला है कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की पीओसी प्राप्त हुई थी। उन्होंने उक्त पीओसी को मिलाने के लिए अपनी रियल एस्टेट फर्मों का इस्तेमाल किया था। यह पता चला है कि उन्होंने पीओसी की उक्त नकद राशि का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विकास में किया था। पीओसी का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान, त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया। 1000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का संचालन इसके अलावा, उन पर शराब घोटाले से उत्पन्न 1000 करोड़ रुपये से अधिक के पीओसी (POC) को संभालने का भी आरोप है। वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को पीओसी हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ समन्वय करते थे। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि इस शराब घोटाले से प्राप्त धनराशि को आगे निवेश के लिए बघेल परिवार के प्रमुख सहयोगियों को भी सौंप दिया गया था। इस धनराशि के अंतिम उपयोग की आगे जांच की जा रही है। पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे ईडी ने इससे पहले पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को इस मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। ED की कार्रवाई के खिलाफ चैतन्य ने HC में लगाई याचिका गौरतलब है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में ED द्वारा उनकी गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका लगाई थी। याचिका में चैतन्य ने कहा था कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर हाई कोर्ट में ED की कार्रवाई के खिलाफ याचिका लगाई, जिस पर 12 अगस्त को हाई कोर्ट ने सुनवाई की और ईडी को नोटिस जारी कर 26 अगस्त तक जवाब मांगा है। जेल अधीक्षक को भी दिए निर्देश चैतन्य बघेल के वकील ने कोर्ट में बताया कि चैतन्य को जेल में पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल रहा। जिस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।

GST सुधारों से मिलेगा लाभ! हरियाणा CM सैनी बोले- महंगाई पर लगेगी लगाम

हरियाणा  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में लिए गए निर्णय आम जनता, किसानों, उद्योग और मध्यम वर्ग के लिए ऐतिहासिक साबित होंगे। उन्होंने बताया कि अब केवल दो मानक जीएसटी दरें (5 और 18 प्रतिशत) रहेंगी। रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान, खाद्य पदार्थ, दवाइयां, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर टैक्स कम किया गया है। वे शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थ। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने सीमेंट, ट्रैक्टर और कारों पर भी दरें घटाई गई हैं। वहीं हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुधारों से महंगाई कम होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।   दो स्लैब में सिमटा जीएसटी जीएसटी काउंसिल ने कर ढांचे को सरल बनाते हुए 12 और 28 प्रतिशत की दरें खत्म कर दी हैं। अब केवल 5 और 18 प्रतिशत की मानक दरें लागू होंगी। अहितकारी वस्तुओं जैसे तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला और कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि इससे कर प्रणाली सरल होगी और मुकदमेबाजी कम होगी। रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती काउंसिल ने आम आदमी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं पर टैक्स दरें कम की हैं। कुछ उत्पादों पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। कपड़ा और उर्वरक पर ड्यूटी समाप्त कर दी गई है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाकर तीन दिन में स्वत: पंजीकरण की सुविधा दी गई है। साथ ही प्रोविजनल रिफंड भी समय पर मिलेगा। बैठक में पैकेट दूध और पनीर पर जीएसटी हटा दिया गया है। घी, मक्खन और सूखे मेवों पर दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। रोटी और परांठे पर भी टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेंगे। किसानों को बड़ी राहत कृषि प्रधान हरियाणा के लिए काउंसिल के फैसले अहम रहे। सिंचाई और जुताई उपकरणों पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। उर्वरक इनपुट्स पर भी 5 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। 1800 सीसी तक की क्षमता वाले ट्रैक्टर पर दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है जबकि इससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर पर 28 से घटाकर 18 प्रतिशत। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों की लागत घटेगी और कृषि का आधुनिकीकरण होगा। नवीकरणीय ऊर्जा और वस्त्र उद्योग को फायदा सौर और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। वस्त्र उद्योग में धागे और कपड़े जैसे इनपुट पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। सिलाई मशीन पर भी टैक्स 18 से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। सैनी ने कहा कि इन फैसलों से उत्पादन लागत घटेगी और रोजगार बढ़ेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं पर राहत जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। डायग्नोस्टिक किट पर 5 प्रतिशत और स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे इलाज की लागत कम होगी और गरीब व मध्यम वर्ग को सीधी राहत मिलेगी। वाहन और मकान बनेंगे सस्ते काउंसिल ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए छोटी कारों (पेट्रोल 1200 सीसी और डीजल 1500 सीसी तक) पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। 350 सीसी से अधिक बाइक पर भी दर 18 प्रतिशत कर दी गई है। सीमेंट पर टैक्स 28 से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। इससे मकान और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की लागत कम होगी। हरियाणा में बढ़ा कर संग्रह मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा का शुद्ध जीएसटी संग्रह 2018-19 में 18,910 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 39,743 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य अब देश में जीएसटी संग्रह करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संग्रह 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जीएसटी सुधार ‘वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट’ की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं। इन फैसलों से महंगाई पर नियंत्रण होगा, आमजन की बचत बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य और मजबूत होगा।