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सड़क निर्माण से बदलेगा बिहार का चेहरा: आठ जिलों में 675 करोड़ की परियोजनाओं को मिली मंजूरी

पटना राज्य के आठ जिलों की दस सड़कों को केंद्रीय सड़क और बुनियादी ढांचा कोष (सीआरआईएफ) को नया स्वरूप दिया जाएगा। इन परियोजनाओं पर 675 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने शनिवार को इस आशय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन सड़क परियोजनाओं के लिए सीआरआईएफ से मंजूरी मिली है। उनकी अनुशंसा राज्य सरकार ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को की थी। पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि बिहार की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने को ले केंद्र एवं राज्य सरकार संयुक्त रूप से काम कर रही है। इसी क्रम में आठ जिले क्रमश: बक्सर, सारण, नवादा, मधुबनी, भागलपुर, अररिया, पूर्णिया एवं पूर्वी चंपारण की दस परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है। इनमें पथों के मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण तथा एक पुल निर्माण की योजना शामिल है। इन परियोजनाओं को मिली मंजूरी 1. 135 करोड़ की लागत से अररिया जिले के जयनगर (भरगामा प्रखंड) से घुरना (नरपतगंज प्रखंड) भारत-नेपाल सीमा तक 30 किलोमीटर सड़क का निर्माण 2. 117.49 करोड़ की लागत से बक्सर जिले में एसएच-17 का चौसा-गोला-कोचस पथांश (बसाही पुल तक) का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण एवं एक एच.एल. पुल का निर्माण 3. 48.68 करोड़ की लागत से सारण जिले के तरैया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत राज्य राजमार्ग संख्या 104 के 12 किमी पथ का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य 4. 45 करोड़ की लागत से नवादा स्टेशन रोड से गोसाईबिगहा, जहाना, लाखमोहना, सुपौल तक की 11.6 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य 5. 72 करोड़ की लागत से मधुबनी जिले के रामनगर-मोतीपुर खैरा सड़क का 12.5 किलोमीटर तक चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य को शामिल किया गया है। 6. 80 करोड़ की लागत से भागलपुर से गोराडीह होते हुए कोतवाली तक 17.14 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य। 7. 56.70 करोड़ की लागत से 4.5 किलोमीटर तक भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग (एसएच-19) को एनएच-80 से जोड़ने का कार्य। 8. 42.50 करोड़ की लागत से मोतिहारी के ढाका-लौखान सड़क का 11 किलोमीटर तक चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य 9. 47.42 करोड़ की लागत से मोतिहारी के ही नारीगिर-चंपापुर-आदापुर सड़क का 15.55 किलोमीटर चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य 10. 29.48 करोड़ की लागत से पूर्णिया जिले के घमदाहा से कुआरी सड़क 11.2 किलोमीटर का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य को भी शामिल किया गया है।

शिक्षा विभाग की नई योजना: हरियाणा में 2026 से बदल जाएगा स्कूल सिस्टम

हरियाणा हरियाणा की एजूकेशन में शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। दरअसल, नए शिक्षण सत्र (2026) में विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिलेबस शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विभाग इसे 4 फेज में लागू करेगा। पहले फेज में, एआई सिलेबस क्लास 9 के स्टूडेंट के लिए होगी पढ़ाई।  टीचर, क्लास और टीचिंग में एआई एक्यूपमेंट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि लेसन को अधिक आकर्षक और व्यावहारिक बनाया जा सके। इस मुहिम को सफल करने के लिए शिक्षा विभाग करीब एक लाख टीचरों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग भी देगा।हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी अपने स्तर पर इस मुहिम को मॉनिटर कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि जल्द से जल्द इस पर बचा हुआ काम पूरा कर लिया जाए। 25 से 29 सितंबर तक जिला स्तरीय ट्रेनिंग होगी डाइट डिंग द्वारा 25 से 29 सितंबर तक एक जिला स्तरीय ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया जाएगा, जहां सिरसा जिले के 50 शिक्षकों को एआई की बुनियादी बातों, परियोजना-आधारित शिक्षा, प्रश्नपत्र डिजाइन और मूल्यांकन तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षा विभाग अधिकारियों ने बताया कि 5 विषयों में 40-45 मिनट की अवधि में पढ़ाए जाने वाले इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता, समस्या-समाधान कौशल और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को बढ़ाना है, जिससे उच्च शिक्षा और नौकरियों के लिए उनकी संभावनाएं मजबूत होंगी। पहले चरण में पाठ्यक्रम सिर्फ 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए शुरू होगा। इसके बाद हर साल एक-एक करके 10वीं, 11वीं फिर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए एआई पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा। एआई के एक पाठ्यक्रम में पांच पार्ट होंगे, जिनमें अलग-अलग तरह के कौशल (स्किल्स) वाले कोर्स बच्चों को पढ़ाए जाएंगे।पाठ्यक्रम की शुरुआत की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। 6वीं से 8वीं के लिए 40 मिनट का चलेगा पीरियड सरकारी स्कूलों में 6वीं, 7वीं और 8वीं कक्षा में एआई पाठ्यक्रम अभी शामिल नहीं होगा। इन तीनों कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 40 मिनट का एआई पीरियड अनिवार्य होगा। इस दौरान प्रशिक्षित शिक्षक इन तीनों कक्षा के विद्यार्थियों को एआई पाठ्यक्रम संबंधित जानकारी देंगे। पाठ्यक्रम के 100 अंक होंगे 9वीं कक्षा के एआई पाठ्यक्रम में मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क और एआई एप्लीकेशन जैसी मूलभूत श्रेणियां शामिल हैं। इसके जरिए विद्यार्थी एआई से दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले पहलू, उसमें सुधार के प्रारंभिक तरीके और परिणाम को समझेंगे। इसमें 50 अंकों की व्यावहारिक मूल्यांकन और 50 अंकों की सैद्धांतिक परीक्षाएं शामिल हैं, जो कुल 100 अंकों की होंगी। मॉडल स्कूल और पीएमश्री स्कूलों में चल रहा पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी मॉडल स्कूल और पीएमश्री स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से पाठ्यक्रम चलते हैं। इसी कारण इन स्कूलों में पहले से एआई पाठ्यक्रम चल रहे हैं। कुल 468 सरकारी मॉडल संस्कृति (जीएमएस) और पीएमश्री माध्यमिक उच्च विद्यालय और 1420 सरकारी मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल हैं।  

महिला सुरक्षा संकट: राजस्थान में आधे साल में 2966 दुष्कर्म मामले दर्ज

जयपुर राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध  के आंकड़ें चिंता बढ़ाने वाले हैं। प्रदेश में साल 2025 में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 2966 मामले थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद हत्या किया जाना भी शामिल है। विधानसभा में पूछे गए गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह आंकड़े पेश किए गए हैं। कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने विधानसभा में सरकार से सवाल पूछा है कि प्रदेश में 1 जनवरी, 2025 से 30 जून, 2025 तक महिलाओं के साथ बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या, दहेज हत्या, आत्महत्या का दुष्प्रेरणा एवं महिला उत्पीड़न (दहेज) के कितने प्रकरण दर्ज हुए हैं? इनमें से कितने प्रकरणों में चालान पेश कर दिया गया है एवं कितने प्रकरणों में अब तक अनुसंधान लम्बित हैं? इसके जवाब में गृह विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक जनवरी से 30 जून तक दुष्कर्म के कुल 2966 प्रकरण दर्ज हुए। वहीं 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद पीड़िताओं की हत्या भी कर दी गई। पुलिस की तरफ से इनमें 1387 प्रकरणों में चालान पेश कर दिए गए हैं जबकि 1187 में एफआर लगा दी गई। इनके अलावा 392 प्रकरण अभी लंबित बताए गए हैं। इसी अवधि में दहेज हत्या के 187 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 92 में चालान पेश किए गए जबकि 31 में एफआर लगा दी गई, तथा 64 प्रकरणों में अभी जांच चल रही है। महिला उत्पीड़न के कुल 6192 प्रकरण सामने आए जिनमें 3004 में चालान पेश किए गए तथा 1863 में एफआर लगा दी गई। जयपुर- अलवर में दुष्कर्म के मामले सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामलों में राजधानी जयपुर के हालात सबसे ज्यादा खबरा है। यहां कुल 293 दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 128 मामलों में कोर्ट में चालान पेश हुए हैं। इनमें 2 मामले दुष्कर्म के साथ हत्या के भी हैं। जयपुर के बाद दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले अलवर जिले में रिपोर्ट हुए हैं। यहां दुष्कर्म की 143 एफआआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 50 में चालान पेश किए गए हैं तथा 74 में एफआर लगा दी गई। गंगानगर में कुल 128 मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से  45 मामलों में चालान पेश किए गए। 187 महिलाओं की दहेज हत्या दहेज के मालले भी चौंकाने वाले हैं। प्रदेश में दहेज के मामलों में 187 महिलाओं की हत्या हुई है। इनमें से 92 मामलों में कोर्ट में चालान पेश किए गए हैं। इनके अलावा महिला उत्पीड़न के 6 हजार से ज्यादा प्रकरण थानों में दर्ज हुए हैं। घरेलू हिंसा के मामलों में भावनात्मक और मानसिक प्रताड़ना, मारपीट, घर से बाहर निकालने की धमकी जैसी शिकायतें शामिल हैं। पिछले पांच साल में जयपुर जिले में 18 हजार से अधिक महिलाएं मदद मांगने आईं।  

रेखा गुप्ता ने किया बड़ा खुलासा, पंजाब को आर्थिक सहायता में होंगे इतने करोड़ का योगदान

पटियाला दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (भाजपा) ने पंजाब के मुख्यमंत्री राहत फंड के लिए ₹5 करोड़ की राशि भेजने का ऐलान किया है। यह राशि हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित पंजाबवासियों की तुरंत मदद के लिए सीधे मुख्यमंत्री राहत फंड में दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत और राहत कार्यों में सहयोग करना है। हालिया भारी बाढ़ और उससे हुए बड़े नुकसान को देखते हुए यह मदद तत्काल सहायता के रूप में दी जा रही है। बताया गया कि यह राशि सीधे मुख्यमंत्री राहत फंड में जाएगी, ताकि राहत और पुनर्वास के कार्य जल्द और प्रभावी ढंग से हो सकें। यह सहायता आपात स्थिति में बाढ़ पीड़ित लोगों की तुरंत मदद के लिए है, जिससे राहत कैंप, भोजन-पानी, दवाइयाँ और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने में तेजी आ सकेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने एक संदेश में उम्मीद जताई कि पंजाब जल्द ही इन कठिन हालात से उबर जाएगा।  

संविदा पदों की भर्ती में जारी हुई सूची, मिशन वात्सल्य में 10 सितंबर तक करें दावा-आपत्ति

 बालोद जिले में मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और किशोर न्याय बोर्ड के संचालन के लिए संविदा पदों को लेकर प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। कुल 16 पदों (जिला बाल संरक्षण इकाई 8 और चाइल्ड हेल्पलाइन 8) पर की जा रही भर्ती में पात्र-अपात्र सूची जारी कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि आवेदन पत्रों का पुनः परीक्षण कर सूची प्रकाशित की गई है, जिसे विभागीय कार्यालय के सूचना पटल के साथ-साथ जिला बालोद की आधिकारिक वेबसाइट balod.gov.in पर देखा जा सकता है। अब विभाग ने अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का पुनः अवसर दिया है। यदि किसी आवेदक को जारी सूची पर आपत्ति है, तो वह प्रमाण और साक्ष्य संलग्न करते हुए 10 सितंबर 2025 को शाम 5 बजे तक अपनी आपत्ति भेज सकता है। आपत्ति केवल स्पीड पोस्ट, कुरियर या रजिस्टर्ड डाक से ही स्वीकार की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने साफ कहा है कि कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आवेदन स्वीकार नहीं होंगे और न ही अंतिम तिथि के बाद मिले अभ्यावेदन पर विचार किया जाएगा। इस घोषणा के बाद संविदा पदों के दावेदारों में फिर से हलचल मच गई है। कई अभ्यर्थी दस्तावेज जुटाने में लगे हैं, तो वहीं सूची में नाम न आने से असंतुष्ट उम्मीदवार आपत्ति की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि 10 सितंबर के बाद पात्र उम्मीदवारों की अंतिम सूची में किसका नाम शामिल होता है।

बड़ी कार्रवाई: हरियाणा के 1680 निजी स्कूलों को जुर्माने के साथ मान्यता संकट का सामना

चंडीगढ़ हरियाणा शिक्षा विभाग ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गड़बड़ी करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए दाखिला प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले 1680 स्कूलों पर जुर्माना ठोका है। सूत्रों के अनुसार, जिन स्कूलों ने RTE दाखिलों का ब्यौरा MIS पोर्टल पर अपलोड नहीं किया, उन पर कार्रवाई की गई है। जिसमें 1 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों पर 30 हजार रुपये और 3 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों पर 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, 3 हजार रुपये से अधिक फीस लेने वाले संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सुनवाई के बाद उन पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। 1126 स्कूलों की मान्यता पर भी खतरा इसके साथ ही, 1126 स्कूलों की मान्यता भी खतरे में है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों ने मान्यता संबंधी खामियों और अन्य आधारों पर इन्हें खारिज किया है। विभाग ने अल्पसंख्यक दर्जा रखने वाले संस्थानों से प्रमाण-पत्र जमा कराने को कहा है। सत्यापन के बाद इनकी अलग सूची तैयार होगी।   नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर होगी कार्रवाई निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को 10 सितंबर तक पूरी कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल विभाग द्वारा जारी वास्तविक और नवीनीकृत मान्यता-पत्र ही मान्य होंगे। शिक्षा विभाग ने दोहराया कि छात्रों के अधिकारों और आरटीई के प्रावधानों से समझौता नहीं किया जाएगा। नियम तोड़ने वाले संस्थानों को हर हाल में दंडित किया जाएगा।

बाढ़ से जूझते पंजाब के लिए MP में जुटी मदद, अशोकनगर सिख समाज ने प्रभावितों को दिया योगदान

अशोकनगर  उत्तर भारत में मानसून ने तबाही मचा रखी है। पूरा पंजाब बाढ़ और तबाही से जूझ रहा है। हजारों परिवार बर्बाद हो गए हैं। केंद्र और स्थानीय सरकार तो मदद कर ही रही है। की सिख समाज ने भी बाढ़ग्रस्त इलाके के दुखी और बेघर लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। पहल अशोकनगर सिख समाज ने की है, जिसने अभी तक 35 लाख एकत्रित कर लिए हैं। जल्द ही यहां से एक प्रतिनिधि मंडल पंजाब जाकर मदद देगा। देश के पंजाब में तेज बारिश से आई बाढ़ मे तबाह हुए लोगों के लिए अब जिले की सिख समाज आगे आई है जहां समाज के द्वारा ग्राम ग्राम जाकर सिख समाज के लोगों से धनराशि एकत्रित की जा रही है वहीं गुरुद्वारों से भी पंजाब के लोगों की मदद के लिए मदद मांगी गई तो महज चार दिन में ही 35 लाख रुपए इकट्ठे हो गए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पंजाब में आई बाढ़ के बाद कई जिलों में हालात बेहद खराब हैं। बाढ़ न केवल किसानों की फसलें बल्कि घर और मवेशी के साथ जान माल का भी भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों का पानी तो अभी उतरा भी नहीं है, जिसके बाद पंजाब की इस दुख की घड़ी में मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की सिख समाज आगे आई है। पंजाब में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए पैसा एकत्र किया जा रहा है। सिख समाज के लोग सामूहिक रूप से गांव गांव तक पहुंच रहे हैं। सिख परिवार एवं गुरुद्वारे से भी मदद मांग रहे हैं जिसके चलते लोगों ने दिल खोल कर दान दिया है। मदद लेकर समाज के लोग पंजाब जाएंगे सिख समाज के लोगों के अनुसार पंजाब में बाढ़ पीड़ितों के लिए चार दिन पहले ही यह अभियान शुरू किया था, जिसके बाद लोगों ने खूब सहयोग मिला और चार दिन के अंदर ही 35 लाख रुपए एकत्रित कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि यह अभियान 7 दिन और चलाया जाएगा और एक बड़ी धनराशि एकत्रित कर सिख समाज के 25 से 30 लोग पंजाब जाएंगे। वहां स्थानीय प्रशासन से मिलकर वास्तविक नुकसान वाले पीड़ित परिवारों के लिए यह धनराशि दी जाएगी, फिर चाहे वह किसी भी समाज या धर्म के लोग हो।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण: मंत्री का सख्त ऐलान, होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  शहर में शासकीय भूमि पर पक्के स्थायी निर्माण कर लाभ कमाने वाले भूमाफिया तो जेल जाएंगे ही, साथ ही जिन अधिकारियों के संरक्षण में ये पनप रहे हैं वह भी नपेंगे।पिछले दिनों कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और हथाईखेड़ा डैम के आसपास स्थित पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन के सीमांकन में 80 से अधिक पक्के अतिक्रमण मिले थे। यदि समय रहते विभाग सीमांकन करवाता और प्रशासन, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खसरा, खतौनी, बंटान आदि दस्तावेजों की जांच करवाते तो करोड़ों की जमीन पर कब्जे नहीं होते।ऐसे में इन अवैध कब्जों के लिए SDM, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी सहित अन्य अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब उनकी जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह बात प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कही है। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा की टीम द्वारा पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन किया गया तो यहां पर करीब सात एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण निकला।इसमें नगर निगम की 50 दुकानें, एसटीपी प्लांट आदि भी विभाग की जमीन पर बनाए गए हैं। ये दुकानें तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी के समय पर बनवाई गईं थीं। तब तत्कालीन भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया थे और प्रशासन ने सीमांकन कर जमीन नगर निगम को सौंपी थीं। विभाग की जमीन पर निगम की दुकानें आने के बाद से सवाल खड़े हो रहे हैं कि रिकार्ड में जब पशुपालन का रकबा था तो आरआइ, पटवारी ने किस आधार पर यह जमीन निगम की बता दी। ऐसे में अब दोनों विभागों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि पशुपालन विभाग ने जिला प्रशासन को जमीन अतिक्रमणमुक्त करवाकर सौंपने के लिए कहा है। सभी अतिक्रमणकारियों को जारी होंगे नोटिस विभाग की जमीन पर पेट्रोल पंप, स्कूल, रिसार्ट, शादी हाल, फार्म हाउस, 20 मकान, 50 दुकान, एसटीपी प्लांट, डायमंड सिटी, कोर्टयार्ड प्राइम, कोर्टयार्ड कस्तूरी, राजधानी परिसर आदि का अतिक्रमण है। इन सभी को तहसीलदार द्वारा संभवत: प्रकरण बनाकर सोमवार से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस सीमा के दौरान यदि ठोस दस्तावेज न्यायालय में नहीं दिए गए तो पक्के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाएगी। निगम की 100 एकड़ से ज्यादा जमीन तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि मेरे समय दुकानों का निर्माण कराया गया था, यह निगम की जमीन है। इसी से लगी हुई पशुपालन विभाग की जमीन है। अब सीमांकन में दुकानें उनकी जमीन में बताई गई हैं जो समझ नहीं आ रहा है। कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में नगर निगम भोपाल के पास 100 एकड़ से अधिक जमीन और कई दुकानें हैं। आलोक शर्मा (भाजपा सांसद) ने कहा, वर्जन राजधानी में शासकीय जमीनों पर भूमाफिया ने जमकर कब्जे किए हैं और यह एक दो नहीं बल्कि 50 से 100 एकड़ में कब्जे हैं। मछली हो या मगरमच्छ सभी के कब्जे से शासकीय भूमि मुक्त करवाई जाएगी। वहीं, जिन एसडीएम, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी के रहते यह सब अतिक्रमण हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लखन पटेल (राज्यमंत्री, पशुपालन एवं डेयरी विभाग) ने बताया, कोकता ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन पूरा कर लिया गया है। मुझे जानकारी मिली है यहां पर लोगों ने अतिक्रमण किए हैं। उनके दस्तावेज तक बनाए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। भूमाफिया पर कार्रवाई होगी, साथ ही अधिकारियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

भोपाल का ऐतिहासिक होटल अब 7-स्टार में विकसित, टेंडर प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रतिष्ठित होटल लेक व्यू अशोका(Lake View Ashoka Hotel Bhopal) अब शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। श्यामला हिल्स स्थित यह होटल, जो फिलहाल 3-स्टार श्रेणी में आता है। इसे अब 7-स्टार होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में लग्जरी पर्यटन को बढ़ावा देना और निगम के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना है। निजी पार्टनर की तलाश एक साल से जारी होटल के इस महत्वाकांक्षी कायाकल्प के लिए पर्यटन निगम ने एक साल से प्राइवेट पार्टनर की तलाश कर रहा है। योजना के अनुसार पीपीपी मॉडल के तहत पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें पार्टनर होटल का विकास और संचालन करेगा, जबकि इसका मालिकाना हक पर्यटन निगम के पास ही रहेगा। 150 से अधिक होंगे रूम वर्तमान में 7.16 एकड़ में फैले इस होटल में 4 सुइट्स, 39 डीलक्स रुम, एक स्वीमिंग पूल और एक रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं हैं। 7-स्टार बनने के बाद इसमें 150 से अधिक रूम होंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां से बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखता है, जो इसे और भी खास बनाता है। स्पेशल पर्पज व्हीकल के निगरानी में होगा डेवलपमेंट यह निर्णय सात साल पहले ही किया गया था, जब होटल अशोक के शेयर निगम को ट्रांसफर किए गए थे। लेक व्यू अशोक के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाई गई थी। इसी कंपनी के जरिए होटल के डेवलपमेंट की पूरी याजना को अंजाम दिया जाएगा। इसे लेकर निगम ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। इस प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार (5 सितंबर) को मंत्रालय में बैठक भी हुई। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अभी 3 स्टार कैटेगरी में शामिल है होटल श्यामला हिल्स स्थित यह होटल फिलहाल 3 स्टार की कैटेगरी में शामिल है। यह 7.16 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 4 सुइट, 39 डीलक्स रूम, स्वीमिंग पूल और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। होटल के कैंपस में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल है, जिसमें 180 लोग एक साथ आ सकते हैं। साथ ही, होटल में 8135 मीटर बिल्ट अप का एरिया लेक व्यू रेसिडेंसी कैम्पस में मौजूद है। इसमें 82 लोग बैठ सकते हैं। बड़े तालाब के पास मौजूद होने के कारण यहां से बहुत ही शानदार नजारा देखने को मिलता है। वहीं इस नई योजना के बाद होटल लेक व्यू का भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है। 40 साल पुराना है होटल अशोक होटल की शुरुआत 40 साल पहले लगभग 1985-86 के आसपास हुई थी। तब इसके लिए जमीन को 30 साल की लीज पर दिया गया था। होटल की शुरुआत के समय इसमें 51 प्रतिशत साझेदारी केंद्र सरकार की और 49 प्रतिशत शेयर मध्य प्रदेश सरकार के थे। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से होटल की सारी इक्विटी खरीद ली थी। अब इसमें केंद्र सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। होटल का लीज 2016 में समाप्त होने के बाद इसकी लीज की फाइल पेंडिंग चल रही थी। पांच साल पहले सरकार 350 करोड़ के बाजार मूल्य के साथ अशोक होटल को निजी हाथों में सौंपना चाहती थी लेकिन किसी प्राइवेट कंपनी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।  पहले भी हुई थी कोशिश यह पहला मौका नहीं है जब इस होटल को निजी हाथों में में सौंपने की कोशिश की गई हो। करीब 6 साल पहले भी इसे निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया गया था। तब इसकी कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन उस समय कोई भी निजी कंपनी इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुई थी। होटल लेक ब्यू अशोका वर्तमान में पूरी तरह से निगम के नियंत्रण में है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर समीक्षा बैठक भी हुई थी।– डॉ. इलैया राजा टी. एमडी एमपी टूरिज्म

AIIMS भोपाल में शुरू हुई अत्याधुनिक छाती कैंसर इलाज सुविधा, मरीजों को अब लंबा सफर नहीं

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग में अब विशेष रूप से छाती के कैंसर (फेफड़ों और भोजन नली) के इलाज के लिए एक 'समर्पित थोरासिक आंकोलाजी सुविधा' शुरू की गई। अब मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी, अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही एक बेहद जटिल आपरेशन को अंजाम दिया गया है। डॉक्टरों ने एक मरीज की भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाला। इसके बाद पेट के एक हिस्से से एक नई नली बनाकर उसे गले तक जोड़ा गया। यह पूरी सर्जरी दूरबीन और कैमरे वाली अत्याधुनिक थोरोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज को बड़े चीरे नहीं लगाए जाते, जिससे दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो पाता है। एम्स भोपाल का सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग पहले से ही मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लगभग 20 हजार कैंसर मरीजों का हर साल इलाज करता है। अब तक छाती से जुड़े जटिल कैंसर के ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मुश्किल होता था। अब यह विश्वस्तरीय सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञ नेतृत्व और मजबूत टीम इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व प्रो. डॉ. माधवानंद कर रहे हैं, जो न केवल एक बेहतरीन सर्जन हैं, बल्कि एक कुशल शिक्षक भी हैं। उन्होंने देश के कई एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन किया है और लगातार युवा डाक्टरों को प्रशिक्षित करते रहते हैं। उनके नेतृत्व में डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी), डॉ. अंकित, डॉ. वैशाली, डॉ. जैनब और डॉ. शिखा सहित एक विशेषज्ञ टीम ने पहली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।