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गेहूं उत्पादन पर संकट, शिवराज बोले- जलवायु परिवर्तन और गर्मी है बड़ी वजह

ग्वालियर   एक तरफ देश में गेहूं का उत्पादन बढ़ रहा है. भारत गेहूं उत्पादन में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है. लेकिन अब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बयान देकर देश के गेहूं उत्पाादकों को चौंका दिया है. शिवराज के अनुसार "देश में गेहूं का उत्पादन घट सकता है. इसका सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान." ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय में गेहूं पर सेमिनार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही. शिवराज का कहना है "भले ही हम गेहूं के क्षेत्र में नए मुकाम स्थापित कर रहे हैं लेकिन बदलते माहौल में नई चुनौतियों पर चर्चा करना जरूरी हो जाता है." राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 64वें अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी कार्यक्रम में शामिल होने शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर पहुंचे. लाल गेहूं पर आत्मनिर्भर बन रहा भारत केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा " एक जमाना था जब हम अमेरिका से PL480 लाल गेहूं आयात कर खाते थे, लेकिन हमारे किसान और वैज्ञानिकों की बदौलत और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत उत्पादन फसलों का बढ़ा है. गेहूं के उत्पादन में भी भारत ने नए रिकॉर्ड बनाये हैं." शिवराज ने कहा "आने वाले समय में चुनौतियां हमारे सामने हैं. उनका मुक़ाबला करते हुए हम ऐसी किस्मों को विकसित करें, जिससे गेहूं का उत्पादन लगातार बढ़े. गेहूं की कई नई किस्मे भी वैज्ञानिकों ने विकसित की हैं, जिनमे बायो फोर्टीफाइड फ़सलें भी शामिल हैं, जो पोषण के लिए भी बहुत उपयुक्त है. ग्लूटिन की मात्र कम करने पर भी काम किया जा रहा है." अगले महीने दिल्ली में होगी रबी फसलों पर कॉन्फ्रेंस शिवराज ने बताया "फसल चक्र के अनुसार अब रबी की फ़सलें आने वाली हैं. रबी फसलों में कैसे बेहतर उत्पादन कर सकें, इस पर मंथन के लिए दिल्ली में आने वाली 14-15 सितंबर को रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमे कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही राज्य सरकारों के कृषि मंत्री, कृषि विशेषज्ञ और केंद्र सरकार के सभी अधिकारी और वैज्ञानिक इस पर विचार करेंगे." अक्टूबर में विकसित कृषि संकल्प अभियान होगा शुरू केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आने वाले समय में कृषि संकल्प अभियान के बारे में भी जानकारी दी. लैब में जो अनुसंधान होते हैं, उन्हें सीधा किसान तक किस तरह लेकर जाएं, इसके लिए आने वाले 3 अक्टूबर से खरीफ की तरह ही अब रबी फसलों के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं. भारत में गेहूं का उत्पादन लगातार बढ़ा दुनिया में भारत गेहूं उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर है. हाल के वर्षों में देश में गेहूं उत्पादन लगातार बढ़ा है. रबि की गेहूं मुख्य फसल मानी जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में भारत में गेहूं उत्पादन 112.18 मिलियन टन तो 2023-24 में बढ़कर लगभग 114 मिलियन टन तक पहुंचा. भारत गेहूं उत्पादन का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में इस्तेमाल करता है. विश्व के गेहूं उत्पादक प्रमुख देश अमेरिकी कृषि विभाग की फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस (FAS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार चीन दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन करता है. दुनियाभर में गेहूं उत्पादन का 18 फीसदी हिस्सा चीन में होता है. दूसरे नंबर पर आता है यूरोपीय यूनियन (EU). इनमें कई विकसित देश शामिल हैं. यहां अगर विश्व पटल से तुलना करें तो कुल मिलाकर गेहूं का उत्पादन 15 फीसदी होता है. दुनिया में गेहूं उत्पादन में भारत तीसरे नंबर तीसरे नंबर पर आता है भारत. गेहूं भारत की मुख्य फसल मानी जाती है. अगर विश्व पटल से तुलना करें तो भारत की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी है. चौथे नंबर पर आता है रूस. रूस ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर लगभग 10 फीसदी गेहूं का उत्पादन किया. वहीं, अमेरिका का स्थान दुनिया में 5वां है. इससके बाद कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, यूक्रेन और फिर तुर्की का स्थान आता है. 

धार्मिक धरोहरों को मिलेगी आधुनिक पहचान! बक्सर, रोहतास, कैमूर को सीएम नीतीश की नई सौगात

गंगा तट पर भव्य प्रतिमा और बोटहाउस कैंप! बिहार के धार्मिक पर्यटन को मिला नया आयाम पटना बिहार की पहचान अब केवल इतिहास और परंपराओं तक सीमित नहीं रहने वाली है! बल्कि ये आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को संजोने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नीतीश सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। जिसका नतीजा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक साथ कई बड़े धार्मिक-पर्यटन प्रोजेक्ट्स की नींव रखी है। जो आने वाले समय में बिहार के पर्यटन मानचित्र को नई ऊंचाई देंगे। सोन नदी के किनारे स्थापित होगी महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा इसी चरण में बक्सर जिले में “महर्षि विश्वामित्र पार्क” के निर्माण का काम शुरू भी हो चुका है। इसका शिलान्‍यास पर्यावरण मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने किया था। सोन नहर के किनारे विकसित होने वाला यह पार्क न केवल बक्सर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेगा बल्कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित भी होगा। यहां वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम, योगा पार्क, एम्फीथिएटर, जेन गार्डन, बच्चों का जोन और ग्रामीण हाट जैसी सुविधाएं होंगी। सबसे खास आकर्षण होगा गंगा तट पर स्थापित महर्षि विश्वामित्र की भव्य प्रतिमा और “सिद्धाश्रम म्यूजियम” होगा। धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित होगा बाबा गुप्ताधाम इसके अलावा रोहतास जिले के पौराणिक बाबा गुप्ताधाम में भी 14.91 करोड़ की लागत से ईको-पर्यटन का विकास किया जा रहा है। जहां लोग शहर के शोर शराबे से दूर शांति की तलाश में आ सकेंगे। यहां श्रद्धालुओं को धर्मशाला, फूड कोर्ट, शौचालय और सोलर एनर्जी से संचालित सुविधाएं मिलेंगी। इतना ही नहीं, धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए यहां शिवलिंग का लाइव टेलीकास्ट भी एक बड़े एलईडी स्क्रीन पर होगा। मां मुण्डेश्वरी धाम परिसर का होगा जीर्णोद्धार कैमूर जिले में भी बिहार सरकार बड़े पैमाने पर धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से विकास कर रही है। कैमूर के मां मुण्डेश्वरी धाम परिसर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। वहीं, दुर्गावती जलाशय स्थित करमचट डैम में नया कश्‍मीर बसाने की कोशिश की जा रही है। यहां बिहार का पहला बोटहाउस कैंप बनाया जा रहा है। जहां लोग पानी की लहरों के बीच सुंदर वादियों और एक दर्जन झरनों का आनंद ले पाएंगे। जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन जाएगी। राजगीर की सफलता के बाद उत्‍साहित सरकार बिहार प्राचीन काल से से धार्मिक और पर्यटन का केंद्र रहा है। जो हमेशा स्थायी है। ऐसे में डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि “लोगों की आस्था से जुड़ी जगहों को विकसित करना हमारी प्राथमिकता में है। राजगीर में जो सफलता मिली है, उसी को देखते हुए अब कई जिलों में इस तरह का काम किया जा रहा है।”

राजस्व महा-अभियान : विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की हड़ताल के बीच सरकार ने की वैकल्पिक व्यवस्था

सीएससी को मिली जिम्मेदारी, राजस्व महा अभियान हेतु 11549 सीएससी कर्मियों की सेवा लेने के प्रस्ताव पर लगी मंत्रिपरिषद की मुहर राजस्व महा–अभियान के दौरान त्वरित समाधान की दिशा में बड़ा कदम ⁠अबतक कुल जमाबंदी पंजियों में से 42 फीसदी का वितरण हुआ पूर्ण हड़ताल पर गये विशेष सर्वेक्षण कर्मियों का क्रमिक निलंबन शुरू पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि संबंधी मामलों में आम रैयतों को त्वरित राहत दिलाने और संविदा सर्वेक्षण कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद राजस्व महा-अभियान को गति देने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। विभाग संविदा सर्वेक्षण कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद एक वैकल्पिक व्यवस्था के लिये विचार कर रहा था। विभाग के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने आज मुहर लगा दी।  राज्य मंत्रिपरिषद ने मंगलवार को सीएससी, ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली को गैर-परामर्शी सेवाओं के तहत नामित करने की मंजूरी दे दी है। अब महा–अभियान के तहत आयोजित शिविरों में सीएससी के प्रशिक्षित कर्मी मौजूद रहेंगे और नागरिकों के आवेदन की तत्काल इंट्री सुनिश्चित करेंगे।  सर्वे अमीनों की हड़ताल के बीच सरकार का फैसला राज्य में 16 अगस्त से 20 सितंबर तक चलने वाले राजस्व महा-अभियान का मुख्य उद्देश्य डिजिटाइज्ड जमाबंदी की त्रुटियों को सुधारना, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करना, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारा नामांतरण करना है। लेकिन विशेष सर्वेक्षण अमीनों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से कर्मियों की कमी हो गई थी। ऐसे में विभाग द्वारा सीएससी की सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु आज विभाग द्वारा कैबिनेट में , वित्त विभागीय संकल्प संख्या-12888, दिनांक-03.12.2024 के आलोक में राजस्व महा अभियान के सुगम क्रियान्वयन हेतु गैर-परामर्शी सेवाओं की अधिप्राप्ति के लिये CSC के कर्मियों की सेवा लिये जाने का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसपर राज्य मंत्रीपरिषद की बैठक दिनांक-26.08.2025 के मद संख्या-25 के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य के कुल 38 जिलों के 8481 हलका में सीएससी के माध्यम से कुल 11,549 कर्मियों की सेवा ली जायेगी। इनमें कुल 10936 कंप्यूटर ऑपरेटर, अंचल और जिला स्तर पर क्रमशः कुल 537 तथा 76 पर्यवेक्षक होंगे। साथ ही विभाग द्वारा हड़ताल पर गये विशेष सर्वेक्षण कर्मियों का क्रमिक निलंबन शुरू कर दिया गया है। सीएससी पहले से ही राज्य में जमाबंदी देखने, लगान भुगतान, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और भू-मापी जैसी ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराती रही है। अब इसके हजारों वीएलई (Village Level Entrepreneur) शिविरों में भी सक्रिय रहेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतवार आयोजित राजस्व महा अभियान शिविर में रैयतों को आसानी होगी और कर्मियों की कमी होने वाली भीड़ से बचेंगे। •प्रशासनिक मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन इस प्रस्ताव को विभागीय स्थायी वित्त समिति और विभागीय मंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद 26 अगस्त को मंत्रिपरिषद की बैठक (मद संख्या–25) में मंजूरी दी गई। अब यह संकल्प तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। राज्य में अबतक कुल जमाबंदी पंजियों में से 42 फीसदी का वितरण किया जा चुका है। CSC के माध्यम से 11,549 कर्मियों की नियुक्ति के पश्चात राजस्व महा-अभियान में और तेजी आयेगी।

त्योहारों में यात्रियों की सुविधा के लिए चालकों-संवाहकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

*      बीएसआरटीसी अगले महीने देगा प्रशिक्षण •    सभी बसों पर बीएसआरटीसी का लोगो स्टीकर लगाना अनिवार्य पटना बिहार में आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान अंतर्राज्यीय बस परिचालन को सुगम बनाने के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फुलवारीशरीफ स्थित निगम परिसर में सोमवार को प्रशासक अतुल वर्मा की अध्यक्षता में बस ऑपरेटरों के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए। प्रशासक ने जानकारी दी कि अगले महीने(सितम्बर) में सभी बस चालकों और संवाहकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सेवा मिल सके। साथ ही, पर्व-त्योहारों के दौरान बिहारवासियों को सस्ती दरों पर टिकट उपलब्ध कराया जाएगा। 20 सितंबर से शुरू होगा बसों का परिचालन दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ के अवसर पर 20 सितंबर से 30 नवंबर तक दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लिए लोक-निजी भागीदारी के तहत बसों का परिचालन किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए 1 सितंबर 2025 से ऑनलाइन सीट बुकिंग शुरू होगी। बिना ऑनलाइन बुकिंग वाले यात्रियों को बस में ई-टिकटिंग मशीन से टिकट उपलब्ध कराया जाएगा. बस संचालकों के लिए सख्त निर्देश  सभी बसों पर बीएसआरटीसी का लोगो स्टीकर या पेंट से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। बस के शीशे पर परमिट चिपकाना और चालकों को एकरारनामा की प्रति रखना जरूरी है। इसके साथ ही दिल्ली और हरियाणा के लिए दो चालकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। बसों में किराया और सरकारी छूट की जानकारी स्टीकर को चिपकाना होगा। अधिक किराया वसूलना दंडनीय अपराध माना जाएगा। राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी के तहत बसों में शराब लाना, रखना या सेवन करना प्रतिबंधित होगा। बस के सभी कागजात जैसे टैक्स, पीयूसी, बीमा और परमिट अनिवार्य होंगे और चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन होगा।

बिहार में 36 हजार 7 सौ कि.मी. से अधिक ग्रामीण सड़कों का हुआ कायाकल्प

•    20 हजार करोड़ रूपये से बदल रही है सूबे के ग्रामीण सड़कों की तस्वीर •    कुल 16,171 ग्रामीण सड़कों में 15,104 की मरम्मति का काम पूर्ण पटना बिहार में गांव की गलियों से होकर खेत-खलिहान तक जाने वाली सड़कों की सूरत बदल चुकी है। बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों की कुल 16,171 सड़कों की, जिसकी कुल लम्बाई 40,259.35  किलोमीटर है, की मरम्मति और रखरखाव का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें अबतक कुल 15,104 सड़कों की जिसकी कुल लम्बाई 36,757.22 किलोमीटर है, को चकाचक किया जा चुका है। गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बाज़ार, अस्पताल, स्कूल और रोज़गार तक पहुंचने का सुगम मार्ग है। इस योजना के तहत 16,171  सड़कों की मरम्मति की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। जिनकी कुल लंबाई 40,259.35 किलोमीटर है। इन पर 20 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि खर्च की जा रही है। इनमें से 15,104 ग्रामीण सड़कों की मरम्मति का काम पूरा किया जा चुका है, जिनकी कुल लंबाई 36,757.22 किलोमीटर बताई गई है। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के दिशा-निर्देश के तहत बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 का उद्देश्य केवल ग्रामीण सड़कों का निर्माण करना ही नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक दुरुस्त रखना भी है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य की ग्रामीण सड़कों और पुलों का नियमित रख-रखाव किया जा रहा है, ताकि पूरे साल हर मौसम में गांव के लोग इन रास्तों से आसान सफर कर सकें। जिसका लाभ गांव के किसानों से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों तक को मिल सके। किसानों के लिए अब अपनी फसल को बाजार तक पहुंचाना आसाना हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों को इससे स्कूल आने-जाने में सुविधा हो रही है। साथ ही, बीमार लोगों को अब कच्चे रास्तों से अस्पतालों तक नहीं पहुंचाना पड़ता है। बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इन ग्रामीण सड़कों के माध्यम से लोगों तक राहत पहुंचाना भी अब आसान हो गया है। इतना ही नहीं, ग्रामीण सड़कों का चेहरा बदलने से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीवनस्तर भी बेहतर हुआ है। सबसे अधिक पूर्वी चंपारण मेंबदली है ग्रामीण सड़कों की सूरत अनुरक्षण यानी सड़कों की मरम्मति के मामले में राज्य का पूर्वी चंपारण जिला सबसे आगे है। यहां चयनित कुल 957 सड़कों में 905 सड़कों की मरम्मति का काम पूरा कर लिया गया है। जिसकी कुल लम्बाई 2,384.03 किलोमीटर है। इसके बाद दूसरे नंबर पर मुजफ्फरपुर जिला है। मुजफ्फरपुर जिले की कुल 718 सड़कों में 657 सड़कों की मरम्मति का काम पूरा हो चुका है। मुजफ्फरपुर में कुल 1861.52 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों की मरम्मति का लक्ष्य तय किया गया था। जिसके विरुद्ध 1680.458 कि.मी. सड़क की मरम्मति का काम पूरा कर लिया गया है। ग्रामीण सड़कों के कायाकल्प के मामले में पश्चिम चंपारण जिला तीसरे स्थान पर है। यहां कुल 617 ग्रामीण सड़कों को चकाचक करने का लक्ष्य निर्धारित था। जिसकी कुल लम्बाई 2091.32 कि.मी. है। इस लक्ष्य के विरुद्ध 597 सड़कों का कायाकल्प किया जा चुका है। जिसकी कुल लम्बाई 1994.23 कि.मी. है। इसके अलावा सारण में 1,583.90 कि.मी., समस्तीपुर में 1,404.90 कि.मी., गयाजी में 1,370.45 कि.मी. और वैशाली 1,354.41 कि.मी. हैं।

श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड की द्वितीय गवर्निंग बैठक हुई सम्पन्न

जयपुर श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामगोपाल सुथार की अध्यक्षता में मंगलवार को बोर्ड कार्यालय झालाना में श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड की द्वितीय गवर्निंग बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड के सीईओ श्री राघवेन्द्र सिंह, सलाहकार श्री बद्री लाल मीणा तथा विभिन्न विभागों से जुड़े बोर्ड सदस्यगण उपस्थित रहे। बैठक में यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि कौशल विकास योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक युवाओं और प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुँचे। इस दौरान अध्यक्ष श्री सुथार ने कहा कि युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देकर उन्हें रोज़गार व स्व-रोज़गार की दिशा में सशक्त बनाना ही बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य है। बैठक में आगामी कार्ययोजनाओं, प्रशिक्षण मॉड्यूल्स तथा उद्योगों से बेहतर तालमेल के लिए रोडमैप पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक का समापन आयुक्त, कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग, श्री ऋषभ मण्डल द्वारा सभी सदस्यगण का धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ हुआ।

निषाद पार्टी की जड़ें गोरखपुर से निकलीं, पर कुछ नेता इसे बदनाम करने में लगे हैं: डॉ संजय कुमार निषाद

“आरक्षण देना भाजपा की जिम्मेदारी है, सहयोगी के तौर पर हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” – डॉ संजय कुमार निषाद “त्रेता से ही हम प्रभु श्रीराम की विचारधारा से जुड़े हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे।” – डॉ संजय कुमार निषाद “संजय निषाद के विरोध में जिन्हें सांसद और सुरक्षा मिली, उन्होंने समाज का आरक्षण कितनी बार उठाया?” – डॉ संजय कुमार निषाद “अगर भरोसा है तो गठबंधन निभाइए, नहीं है तो साफ कह दीजिए – हम तैयार हैं।” – डॉ संजय कुमार निषाद “सहयोगियों की ताकत को कम मत आंकिए, जीत अकेले की नहीं, सबकी साझी है।” – डॉ संजय कुमार निषाद “प्रवीण की हार पर सवाल हमसे नहीं, भाजपा नेतृत्व की रिपोर्ट से पूछिए।” – डॉ संजय कुमार निषाद गोरखपुर कैबिनेट मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने आज अपने जनपद गोरखपुर दौरे के दौरान एनेक्सी भवन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी की नींव गोरखपुर से रखी गई है, लेकिन अफसोस की बात है कि गोरखपुर और प्रदेश के कुछ नेता लगातार पार्टी और मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण का निर्णय भारतीय जनता पार्टी को लेना है, क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी ही सरकार है, और निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी है। केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों ही स्तर पर इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल हो रही है। मगर कुछ तथाकथित निषाद नेता समाज और पार्टी को गुमराह कर केवल कड़वाहट फैलाने का काम कर रहे हैं। श्री निषाद ने कहा कि हमारा रिश्ता त्रेता युग से ही मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के साथ रहा है और हम उसी आदर्श को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। पत्रकारों द्वारा भाजपा नेता के इस बयान पर प्रश्न पूछे जाने पर कि भाजपा निषाद समाज को अधिक टिकट देगी, डॉ. निषाद ने कहा – “क्या ये वही लोग हैं जो ‘हाथी’ से आए और इम्पोर्ट होकर भाजपा में शामिल हुए? मैंने अखबारों में पढ़ा कि वे कह रहे थे भाजपा निषाद समाज को टिकट देगी। इसका तो हम स्वागत करते हैं। हम तो चाहते हैं कि पूरा विधानसभा ‘निषादमय’ हो जाए और 403 में से 403 विधायक निषाद जीत कर आएं। लेकिन एक सवाल है – जो लोग निषादों को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे हैं, क्या वे भाजपा से यह गारंटी लेकर आए हैं कि 2027 में उन्हें टिकट मिलेगा? 2024 में भी तो वे खाली हाथ ही रह गए। कभी एक कुंभ, कभी दूसरा सम्मेलन… नतीजा क्या? ज़ीरो बट्टा सन्नाटा।” उन्होंने आगे कहा कि डॉ संजय निषाद जी के विरोध जिन्हें सांसद की कुर्सी और सुरक्षा दी गई है, वे यह बताएं कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कितनी बार मछुआ समाज के आरक्षण की आवाज़ उठाई? यदि नहीं उठाई, तो समाज सब देख रहा है और समय आने पर उचित फैसला भी करेगा। सहयोगी दलों के सम्मान को लेकर पूछे गए सवाल पर श्री निषाद ने कहा – “हम भाजपा के सहयोगी दल हैं – सुभासपा, अपना दल, निषाद पार्टी और रालोद। अगर भाजपा को हम पर भरोसा है कि हम अपने समाज को सही दिशा में ले जा रहे हैं और इसका राजनीतिक लाभ भी भाजपा को मिल रहा है, तो यह रिश्ता आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन यदि भरोसा नहीं है तो साफ कह दें और गठबंधन खत्म कर दें।         राजभर भाई के लिए बीजेपी के बड़े इम्पोर्टेड राजभर नेता, रालोद के लिए मथुराबड़े जाट नेता, और हमारे लिए? गोरखपुर में हर समय यही कोशिश रहती है कि हमें कैसे नीचे गिराया जाए। भाई आशीष पटेल जी के मामले में तो खुलासा हो ही गया है। सवाल यह है कि भाजपा नेतृत्व सीधे क्यों नहीं बोलता और छुटभैया नेताओं से ऐसे बयान क्यों दिलवाता है?”         डॉ. निषाद जी ने कहा कि किसी को इस बात का घमंड नहीं होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की जीत केवल भाजपा की थी। यह जीत सभी सहयोगी दलों के योगदान से मिली है। आशीष भाई पटेल समाज को, राजभर भाई राजभर समाज को, रालोद जाट समाज को और निषाद पार्टी मछुआ समाज को भाजपा से जोड़कर खड़ी है। 2018 की जीत सबको याद रखनी चाहिए। 2022 के चुनाव में जब रालोद और राजभर भाई समाजवादी पार्टी से जुड़े, तो उनकी संख्या समाजवादी पार्टी की संख्या 45 से बढ़कर 125 हो गई थी। बाकी आप सभी समझदार हैं।”         संतकबीरनगर चुनाव हारने पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा – “बार-बार ये सवाल उठता है कि प्रवीण चुनाव कैसे हारे। इस संसदीय क्षेत्र के भाजपा नेतृत्व ने क्या किया और क्या नहीं, इसकी पूरी रिपोर्ट भाजपा के पास है। उसे सार्वजनिक कर दिया जाना चाहिए।”         डॉ. निषाद जी ने कहा कि “यदि वास्तव में निषाद समाज के लिए संघर्ष की भावना है तो वे इंपोर्टेड नेता और भाजपा के निषाद नेता आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का घेराव करें। मैं उनके साथ और पीछे चलने के लिए तैयार हूँ। यदि वे ऐसा नहीं करते तो यह माना जाएगा कि वे समाज और पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।”

जनवितरण प्रणाली के डीलरों के कमीशन में 52 फीसद की बढ़ोतरी

–    राज्य मंत्रिमंडल ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव पर लगाई मुहर  –    अब खाद्यान्न डीलरों को प्रति क्विंटल मिलेगी 258.40 रूपये की कमीशन राशि   पटना  राज्य में खाद्य वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत डीलर कमीशन की राशि में वृद्धि के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाकर जनवितरण प्रणाली के डीलर कमीशन की राशि में करीब 52 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।  अबतक डीलर कमीशन मद में केन्द्रांश के रूप में प्रति क्विंटल 45 रूपये तथा राज्यांश के रूप में 45 रूपये यानी कुल 90 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। राज्य मंत्रिमंडल ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार कमीशन की राशि को सितंबर, 2025 से प्रभावी करते हुए राज्य योजना से अतिरिक्त 47 रूपये प्रति क्विंटल कमीशन में वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के साथ ही कुल दर (केन्द्रीय सहायता, राज्यांश व राज्य योजना मद) 211.40 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 258.40 रूपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से राज्यभर के लगभग 50 हजार जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत कार्यरत डीलरों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, राज्य में इससे खाद्यान्न वितरण की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी पहले से बेहतर होगी। राज्य की खाद्य एवं उप्प्भोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद करते हुए कहा कि बिहार सरकार गरीब एवं जरुरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न की समय पर और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि डीलर कमीशन दर में वृद्धि से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं तक खाद्यान्न अधिक सुगमता से पहुंच सके। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले से जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों की एक बहुत पुरानी मांग पूरी हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए किया आमंत्रित

राज्य में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा  होगी स्थापित: कृषि मूल्य शृंखला और रोजगार को मिलेगा नया आयाम रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका स्थित एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कंपनी को छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये परियोजनाएँ न केवल कृषि मूल्य शृंखलाओं को मज़बूत करेंगी बल्कि उच्च-तकनीकी विनिर्माण को भी प्रोत्साहित करेंगी और राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार अवसर सृजित करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण, सुगम प्रक्रिया और प्रत्येक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आशा व्यक्त की कि एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड की प्रस्तावित खाद्य प्रसंस्करण इकाई से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई मजबूती प्राप्त होगी। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा राज्य को उच्च-तकनीकी उत्पादन का नया केंद्र बनाएगी और युवाओं को आधुनिक उद्योगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि ये निवेश परियोजनाएँ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की समृद्धि, युवाओं का भविष्य और निवेशकों का विश्वास है, और इसी संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

धार्मिक पर्यटन को मिली नई उड़ान, कई परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

महर्षि विश्वामित्र पार्क, मां मुंडेश्वरी धाम परिसर का जीर्णोद्धार, गुप्ताधाम आदि परियोजनाएं शामिल   पटना बिहार की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने सोमवार को बक्सर जिले में “महर्षि विश्वामित्र पार्क” निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। सोन नहर के स्केप चैनल के दोनों ओर विकसित होने वाला यह पार्क बक्सर की सांस्कृतिक विरासत और पौराणिक महत्व को नए अंदाज में प्रस्तुत करेगा।  पार्क में वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम, योगा पार्क, ओपन एयर एम्फीथिएटर, केबल-आधारित हैंगिंग ब्रिज, ग्रामीण हाट, जेन गार्डन, कैफेटेरिया और बच्चों के खेलने का जोन जैसी सुविधाएं होंगी। गंगा तट पर महर्षि विश्वामित्र की आदमकद प्रतिमा और “सिद्धाश्रम म्यूजियम” पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होंगे। दूषित जल और कचरे के निस्तारण के लिए मिनी एसटीपी और बायो-रेमेडिएशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसी क्रम में मंत्री ने हाल ही में रोहतास जिले के पौराणिक स्थल बाबा गुप्ताधाम में 14.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली “गुप्ताधाम ईको-पर्यटन विकास योजना” का शिलान्यास भी किया। इस योजना के तहत दुकानों का उन्नयन, नए प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, खान-पान क्षेत्र, शौचालय और बिजली-पानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी। शिवलिंग का लाइव टेलिकास्ट बड़े एलईडी स्क्रीन पर होगा और सभी व्यवस्थाएं सौर ऊर्जा से संचालित होंगी। इसके अलावा, हाल ही में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ सुनील कुमार ने  कैमूर जिले के मां मुण्डेश्वरी धाम परिसर के जिर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया। इसके तहत मंदिर तक जाने वाले रास्ते का चौड़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही रोहतास के दुर्गावती जलाशय स्थित करमचट डैम में बिहार की पहली बोटहाउस कैंप परियोजना का शुभारंभ भी किया गया। इस बोटहाउस में पर्यटकों के लिए एसी युक्त कमरे के साथ  किचन और 10 लोगों के बैठने की क्षमता है।  पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ सुनील कुमार ने कहा कि इसके पीछे हमारा उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है क्योंकि हमारा मानना है कि धार्मिक पर्यटन क्षेत्र लॉंग लास्टिंग होते हैं। लोगों की आस्था को देखते हुए इसमें बहुत काम करने की जरूरत है। हम बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में भी कई योजनाएं शुरू करने वाले हैं ताकि रिजनल इम्बैलेंस ना हो। राजगीर में हमारे विभाग ने बहुत काम किया है जहां का रिजल्ट भी काफी अच्छा देखने को मिल रहा है। इसी से प्रेरित होकर कई अन्य जगहों पर भी विकास करने का प्रयास किया जा रहा है।