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MP में विधायकों की तनख्वाह बढ़ सकती है 45% तक, विधानसभा में गूंजा प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर विधायकों की सैलरी बढ़ने के मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी 45 फीसदी बढ़ती है तो उन्हें मिलने वाली सैलरी 1 लाख से ज्यादा हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान से ज्यादा मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी हो जाएगी. जानकारी के मुताबिक सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भेजा गया है. इतना ही नहीं पूर्व विधायकों के पेंशन में भी इजाफा करने की मांग की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से भी यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा गया है. अब 3 सदस्यीय समिति इस मुद्दे पर फैसला करेगी. इस समिति के अध्यक्ष एमपी के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा हैं. इस समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि उनका चयन जल्द ही सरकार की तरफ से किया जाएगा. लंबे समय से चल रही मांग काफी लंबे वक्त से मध्य प्रदेश के विधायकों की तरफ से वेतन, भत्ते और विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी. इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है. इसकी अध्यक्षता रीवा की गुढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह कर रहे हैं. समिति ने सभी पक्षों पर चर्चा कर वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी थी.  

एमपी में वंदे भारत एक्सप्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, भोपाल रेल मंडल ने लिया अहम निर्णय

भोपाल एमपी में चल रहीं वंदेभारत एक्सप्रेस में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की पहली वंदेभारत भोपाल निजामुद्दीन और बाद में चलनेवाली इंदौर नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ऑक्यूपेंसी बेहतर होती जा रही है। रेलवे बोर्ड द्वारा वंदे भारत के संबंध में जोन और मंडलों से बुलाई गई रिपोर्ट के अनुसार भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में तो सीटों की जबर्दस्त कमी पड़ रही है। इसकी ऑक्यूपेंसी और पैसेंजर डिमांड को देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने बड़ा फैसला लिया है। मंडल ने भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मांगी गई है। एमपी की राजधानी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़नेवाली रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेन नंबर 20171 रानी कमलापति-निजामुद्दीन की ऑक्यूपेंसी जहां 94 प्रतिशत है वहीं ट्रेन नंबर 20172 निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत 112 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी से चल रही है। ट्रेन में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाए जा रहे हैं। इससे रेल यात्रियों को खासी राहत मिल सकेगी। भोपाल रेल मंडल ने रेलवे बोर्ड को वंदे भारत ट्रेन में 4 कोच बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। मंडल अधिकारियों के अनुसार बोर्ड से इसकी जल्द मंजूरी मिल सकती है। रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस अभी 16 कोच की ट्रेन है। इसमें 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच और 14 एसी चेयर कार कोच हैं। इस प्रकार कुल 1128 सीटें हैं। 4 कोच बढ़ाने पर रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत में 432 सीटें बढ़ जाएंगी। 20 कोच से रोज 1560 यात्री कर सकेंगे सफर भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने से इसमें रोज 1560 यात्री सफर कर सकेंगे। नया प्रस्ताव मंजूर होने पर ट्रेन में 2 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बढ़ जाएंगे। इस प्रकार रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 4 एग्जीक्यूटिव क्लास और 16 चेयर कार कोच हो जाएंगे। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड से जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव विद्युत कंपनियों के 1060 कर्मचारियों को देंगे नियुक्ति-पत्र मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर विद्युत कंपनियों में नई नियुक्तियाँ: सीएम डॉ. यादव बांटेंगे 1060 नियुक्ति-पत्र ऊर्जा मंत्री ने 26 अगस्त के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन भोपाल में विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में बिजली कंपनियों के लिए नवीन संगठनात्मक संरचना के तहत 51 हजार 711 नये स्थाई पदों की स्वीकृति के लिये मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया जायेगा। ऊर्जा विभाग की विभिन्न बिजली कंपनियों में रिक्त पदों की परीक्षा के बाद कर्मचारियों का चयन किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को मंत्रालय में 26 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संकल्प-पत्र के आधार पर विभिन्न पदों पर एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भर्ती की गई है। चयनित पदों में बिजली इंजीनिय़र, सिविल इंजीनियर, लेखाधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक विधि अधिकारी, लाइन अटैंड़ेंट, सिक्य़ोरिटी ऑफिसर, पॉवर प्लांट  फार्मासिस्ट, केमिस्ट, एएनएम, ट्रेसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टैक्निशियन, पब्लिसिटी ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर आदि पद शामिल हैं। भोपाल में होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी कर्मचारी हितों और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर चर्चा भी की जाएगी। बैठक में एम.डी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी अविनाश लवानिया और एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

2005-06 के बाद फिर कहर! WHO ने चेताया, दुनियाभर में फैल रहा चिकनगुनिया

भोपाल   करीब 20 साल बाद एक बार फिर चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता दिख रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर अलर्ट जारी किया है. चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह अब तक 119 देशों में पाई जा चुकी है, जिससे करीब 5.6 अरब लोग जोखिम में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 साल पहले वाले वायरस में जो म्यूटेशन देखे गए थे, वही फिर से सामने आए हैं. भारत जैसे देशों में, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां पहले से मौजूद हैं, वहां इसका खतरा और बढ़ जाता है. राजधानी की बात करें तो बीते साल अगस्त के अंत तक चिकनगुनिया के 40 मरीज मिले थे। इस साल अब तक 58 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाले मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सभी को बुखार, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायत है, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती। हमीदिया, जेपी और एम्स में एक अगस्त से अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। इसमें से 700 से ज्यादा मरीजों की जांच भी हो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बार मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत जोड़ों में दर्द की है। मरीज बताते हैं कि लगता है जैसे हड्डियां आपस में टकरा रही हों। टेस्ट रिपोर्ट 10 दिन तक पॉजिटिव नहीं आ रही, जिससे पहचान में देरी हो रही है। मरीजों के लिए यह सिर्फ बुखार नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला जोड़ों का कहर है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए यह और खतरनाक है। चिकनगुनिया के लक्षण जीएमसी के एमडी मेडिसिन डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि इस बीमारी का वायरस शरीर में आने के 4 से 7 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तीव्र दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और नसों में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पूरे शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों में सूजन और दर्द, डेंगू जैसे लक्षण होने की वजह से कई बार मरीज सही समय पर पहचान नहीं कर पाते। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन गंभीर मरीजों (अस्पताल में भर्ती) के लिए: आईवी हाइड्रेशन (ड्रिप) का प्रयोग करें। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबिन थेरेपी से बचें। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन सिर्फ तब करें जब ब्लीडिंग हो। येलो फीवर से लिवर फेलियर होने पर आईवी एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग। मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबिन और सोफोसबुविर जैसी दवाएं सिर्फ रिसर्च में। सामान्य या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए: डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ओआरएस और तरल पदार्थ दें। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल। स्टेरॉइड से बचें। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, कॉइल और स्प्रे का उपयोग करें। दरवाजों-खिड़कियों पर नेट लगाएं। भारत में कितना खतरा? पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ समीर भाटी बताते हैं कि भारत में मॉनसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम हैं और यही चिकनगुनिया के फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. हालांकि यहां चिकनगुनिया का ज्यादा रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस बात सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ भाटी कहते हैं कि चिकनगुनिया कीबीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में एंटर कर जाता है और शरीर में तेजी से फैलता है. इसका असर शरीर की जोड़ों, मांसपेशियों और नसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी का सामना करना पड़ता है. चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? चिकनगुनिया के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आते हैं. इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिन होता है यानी वायरस के संक्रमण के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे विशेष लक्षणों में तेज बुखार, तीव्र जोड़ दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यह जोड़ दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि मरीज को हिलने-डुलने में कठिनाई होती है और यह हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं. आंखों में दर्द और सूजन भी सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे मरीज को सही पहचान करने में देर हो सकती है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर डालता है. डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ऐसी ही तीन खतरनाक बीमारियां हैं जिनका अभी तक कोई स्थायी इलाज या वैक्सीन नहीं है।  यही वजह है कि डॉक्टर सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहने की सलाह देते रहते हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये जानलेवा रूप ले सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली तमाम बीमारियां हर साल लोगों के परेशान करती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगता है जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। चिकनगुनिया महीनों तक जोड़ों में दर्द देता रहता है वहीं जीका वायरस गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आजीवन खतरा बन सकता है। यानी ये सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का कारण भी हैं। डेंगू का खतरा डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलती है। दुनियाभर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू का शिकार होते हैं। भारत में मानसून के दिनों में और बरसात के बाद यह सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू के कारण रोगियों को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे और मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम का भी कारण बन सकता है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है जो शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती है।  डेंगू का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है। इसके उपचार में केवल … Read more

महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."

और सिंधिया होंगे मौजूद रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में, 29 अगस्त से दो दिन तक आयोजन

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में 29 एवं 30 अगस्त को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी की विशेष उपस्थिति होंगी। राज्यमंत्री लोधी ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ–साथ पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। ग्वालियर के पर्यटन श्रेत्र में निवेश को नया आयाम मिलेगा। 'टाइमलेस ग्वालियर: इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ लेगेसी' थीम पर आधारित ये कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।   प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्रदान किए जाएंगे, एमओयू एवं अनुबंध होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार प्राप्त होगा और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व के साथ बल मिलेगा। क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण घाेषणाएं होंगी। विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडीक्रॉफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे।  प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज्म इज अ कल्चरल ब्रिज– ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ एमपी” विषय पर पैनल डिस्कशन होगा। इसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन 'ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग– इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्जरी एंड एक्सपीरियंस' विषय पर केंद्रित होगा, इसमें विरासत, लग्जरी स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा।  

महू में होगा रण संवाद 2025, सेनाओं में नवाचार और रणनीति पर चर्चा

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार देश की तीनों सेनाओं द्वारा युद्ध पद्धति में नवाचार और रणनीतिक विमर्श को लेकर राष्ट्रीय स्तर का रण संवाद 2025 आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को महू के सैन्य संस्थान में होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister in MP) 27 की शाम कोमध्यप्रदेश में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह भी उपस्थित रहेंगे। वहीं देशभर के अन्य सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। इसको लेकर महू शहर के आर्मी क्षेत्र की मुख्य माल रोड को भी बंद किया गया है। कार्यक्रम के तहत 25 से 27 अगस्त तक यह मार्ग पूर्णत: बंद रहेगा। वहीं ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई चौराहा होते हुए चाकू चौराहे से मंडलेश्वर की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। यह है कार्यक्रम देशभर में पहली बार ट्राय-सर्विस सेमिनार रणसंवाद का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत महू से हो रही है। इसमें विशेष रूप से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-लड़ाई पर तकनीक का प्रभाव विषय पर बातचीत होगी। जिसमें प्रतिष्ठित कमांडर, रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि विचार साझा करेंगे। इसमें युद्ध पद्धति में नवाचार व नई तकनीकों पर विचार विमर्श होगा। विचार विमर्श भविष्य के लिए सशस्त्र बल तैयार करने, युद्ध के अभ्यासियों के लिए अद्वितीय मंच उपलब्ध कराने, शिक्षा जगत और रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने को ध्यान में रखकर किया जाएगा। महू के यह मार्ग होंगे बंद आयोजन के तहत महू सेना द्वारा महू में तैयारियां की जा रही है। इसको लेकर महू यातायात पुलिस ने ट्रफिक प्लान भी बनाया है। ट्रैफिक सूबेदार विनोद यादव ने बताया कि 25, 26 और 27 को माल रोड को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इसमें आंबेडकर जन्मभूमि स्मारक के पास राम मंदिर होते हुए डीएसओएमआई तक जा रहे माल रोड पर जाना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। वहीं महू शहर के किशनगंज आरओबी से होते हुए ड्रीमलैंड तक जाने वाले भायाजी मार्ग से माल रोड पर जुड़ने वाले मार्ग भी बंद रहेंगे। इसमें गर्ल्स स्कूल चौपाटी से माल रोड जाने वाला मार्ग, भायाजी मार्ग से गेटवेल अस्पताल होते हुए माल रोड, मदर मेरी स्कूल से, भायाजी मार्ग से बत्तीवाला चौराहा मार्ग और गैरिसन ग्राउंड से माल रोड जुड़ने वाले मार्ग पर आवाजाही बंद रहेगी। इसके पूर्व 23 और 24 को सांकेतिक रूप से बंद किया है ताकि सभी को पता चल सके। यह होगा वैकल्पिक मार्ग इंदौर की ओर से किशनगंज आरओबी से आने वाले मार्ग गर्ल्स स्कूल चौपाटी से भायाजी मार्ग से होते हुए ड्रीमलैंड चौराहे पर जाएंगे। ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई होते हुए चाकूल चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। इससे महू से मंडलेश्वर व मानपुर की ओर जाने मार्ग पर जा सकेंगे। इसके लिए भायाजी मार्ग पर खड़े वाहनों को हटवाया जाएगा। ताकि यातायात सुगम रहे। 26-28 अगस्त तक महू नो फ्लाईंग जोन आयोजन के दौरान 26 से 28 अगस्त तक महू को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है। महू और आसपास के इलाके में कोई ड्रोन भी नहीं उड़ा सकेंगे। पहली बार तीनों सेनाओं का साझा मंच देश में पहली बार तीनों सेनाओं का संयुक्त सेमिनार (Three Armies of India Joint Seminar) हो रहा है। इसमें थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस संवाद में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध पर आधुनिक तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें सेनाओं के अफसर बल्कि रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी विचार साझा करेंगे।

MSG स्टोर से होंगे हजारों प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री, राम रहीम का नया कदम

हिसार  डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने 40 दिन की पैरोल के दौरान एक नया ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘MSG’ ऐप लॉन्च किया है। 19 अगस्त को आयोजित एक ऑनलाइन सत्संग के माध्यम से उन्होंने ‘MSG ई-कॉमर्स स्टोर’, मोबाइल ऐप और ऑर्गेनिक सरसों तेल का उद्घाटन किया। इस मंच के माध्यम से डेरा अब अपने उत्पादों को भारत सहित विश्व भर में बेचेगा। ये मिलेगा सामान MSG स्टोर के माध्यम से हजारों प्रकार के उत्पाद बेचे जाएंगे, जिनमें ग्रॉसरी, खाद्य सामग्री, तेल, घी, कॉस्मेटिक्स, हेल्थकेयर और अन्य घरेलू आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। हर उत्पाद पर गुरमीत राम रहीम की तस्वीर लगाई गई है। कंपनी का दावा है कि ये सभी उत्पाद ऑर्गेनिक और उच्च गुणवत्ता वाले हैं।  ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स से लेकर ग्रॉसरी तक की बिक्री 19 अगस्त को ऑनलाइन मजलिस में राम रहीम ने MSG ई-कॉमर्स स्टोर, ऐप और ऑर्गेनिक सरसों का तेल एक साथ लॉन्च किया। इस मंच के जरिए हजारों की संख्या में उत्पाद बेचे जाएंगे, जिनमें ग्रॉसरी, खाने-पीने का सामान, तेल, घी, कॉस्मेटिक, हेल्थ केयर और घरेलू जरूरत की चीजें शामिल हैं। हर आइटम पर गुरमीत राम रहीम की तस्वीर लगी हुई है। कंपनी का दावा है कि ये सभी उत्पाद ऑर्गेनिक और उच्च-गुणवत्ता वाले हैं। वैश्विक पहुंच के साथ बहुभाषी वेबसाइट MSG स्टोर की वेबसाइट को विभिन्न भाषाओं में बनाया गया है, ताकि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों तक पहुंच सके। वेबसाइट में अंग्रेजी, अरबी, बंगाली, हिब्रू, हिंदी और जापानी भाषाएं शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि डेरा सच्चा सौदा का लक्ष्य केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंचाना चाहता है। कंपनी की वेबसाइट पर खास तौर पर यह बताया गया है कि MSG उत्पाद डेरा सच्चा सौदा के ही हैं। 40 दिन की पैरोल पर बाहर है राम रहीम गुरमीत राम रहीम इस समय 40 दिनों की पैरोल पर है और यह 14वीं बार है जब वह जेल से बाहर आया है, 4 अगस्त, 2025 को पैरोल पर आए राम रहीम ने अपने अनुयायियों से मिलने के लिए ऑनलाइन सत्संग और मजलिस का सहारा लिया है, क्योंकि उसे सिरसा डेरे में बड़ी भीड़ जमा करने की अनुमति नहीं है। पैरोल 15 अगस्त को 58वां जन्मदिन मनाने के लिए मिली है। इस दौरान वह ऑनलाइन माध्यम से ही अपने भक्तों को उपदेश और संदेश दे रहा है। 25 अगस्त 2017 से जेल में गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में है। उसे दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा, उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामलों में भी सजा मिली थी। हालांकि, रणजीत सिंह हत्याकांड में बाद में हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया। वर्तमान में राम रहीम हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। इस दौरान वह लगातार पैरोल पर बाहर आता रहा है, जिससे उसके अनुयायी उससे जुड़ पाते हैं। हाल ही में शुरू हुआ यह ई-कॉमर्स वेंचर, डेरा के लिए एक बड़ा कारोबारी कदम साबित हो सकता है। 

उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल

गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को दी जायेगी प्राथमिकता : अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती शमी उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल खाद्य विभाग का फैसला: गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को मिलेगी प्राथमिकता प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप भोपाल गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को प्राथमिकता दी जायेगी। जिससे उपार्जित अनाज के परिवहन में लगने वाला खर्च बच सके। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने यह बात प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप में कही। वर्कशॉप कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुई। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर मुख्य सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर, भारत सरकार में संयुक्त सचिव सुसी. शिखा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव श्रीमती शमी ने कहा कि गत रबी सीजन में लगभग 9 लाख किसानों से 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया और लगभग 20 हजार करोड़ रूपये किसानों के खाते में अंतरित किये गये। गेहूं के उपार्जन में राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया है। इसी तरह लगभग 6 लाख 50 हजार किसानों से 43.5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उपार्जन के लिये किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आधार नम्बर को भी जोड़ा गया है। उपार्जन केन्द्रों से ही मिलर्स को धान देने का प्रावधान किया गया है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पीडीएस दुकानों में अनाज ले जाने वाले वाहनों की सघन मॉनिटरिंग की जाती है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केन्द्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। वर्तमान में इंदौर में यह कार्य शुरू कर दिया गया है। उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न लेने वाले उपभोक्ताओं की ई-केवायसी कराई जा रही है। ई-केवायसी के बाद अपात्र लोगों को बाहर किया गया है और लगभग 5 लाख 70 हजार नये उपभोक्ताओं को सूची में जोड़ा गया है। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर ने आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप में उपस्थित अधिकारी अपने सुझाव जरूर दें। शंकर ने कहा कि उपार्जन की प्रक्रिया को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, इस संबंध में गहन विमर्श किया जायेगा। भारत सरकार की संयुक्त सचिव पॉलिसी एण्ड एफसीआई सुसी. शिखा ने बिलिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सब्सिडी की जानकारी प्रतिमाह भेजें। उन्होंने मध्यप्रदेश की गुड प्रेक्टिसेस के बारे में भी जानकरी दी और विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की। जनरल मैनेजर एफसीआई विशेष गढ़पाले ने प्रोक्योरमेंट सेंटर सेल्फ असेसमेंट प्रोग्राम (पीसीएसएपी) के बारे में जानकारी दी। आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा ने गेहूं और धान के उपार्जन के संबंध में बनाये गये एक्शन प्लान की जानकारी दी। उन्होंने उपार्जन प्रक्रिया के सरलीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। एमडी नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा ने उपार्जन और भंडारण की प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं से अवगत कराया। अश्विनी गुप्ता ने फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। अन्य उपस्थित अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।  

मेयर भार्गव का ऐलान: सराफा चौपाटी यथावत, 80 दुकानदारों के लिए 2000 व्यापारियों की आवाज़ अनसुनी

इंदौर  इंदौर को स्वाद की राजधानी का दर्जा दिलाने वाली सराफा चौपाटी को लेकर सोना-चांदी बेचने वाले कारोबारी विरोध में है। इसे लेकर नगर निगम में मेयर ने बैठक ली थी। जिसमें चौपाटी के दुकानदार और सराफा कारोबारी शामिल हुए। मेयर ने बैठक में कहा कि निगम यह फैसला ले चुका है कि सराफा चौपाटी नहीं हटेगी। यह इंदौर की पहचान है, लेकिन चौपाटी में सुरक्षा और लगने के समय का ध्यान रखा जाएगा। बैठक में सराफा व्यापारियों ने कहा कि पहले चौपाटी में परंपरागत व्यंजनों की दुकानें लगती थी। दुकानदार अपने घरों से व्यंजन बनाकर लाते थे, लेकिन अब वहां पर व्यंजन बनाए जाते है। इससे आग लगने का खतरा बना रहता है। दुकानों में लाखों रुपये के जेवर रखे रहते है। इसके अलावा चौपाटी लगाने के लिए दुकानदार जल्दी आ जाते है, जबकि अब सोने-चांदी खरीदने के लिए ग्राहक रात में भी आते है। महापौर बोले- सराफा चौपाटी इंदौर की परंपरा और धरोहर है बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सराफा चौपाटी केवल स्वाद का केंद्र ही नहीं, बल्कि इंदौर की परंपरा और धरोहर है। इंदौर को स्वाद की राजधानी बनाने में सराफा चौपाटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा, अनुशासन और परंपरा को बनाए रखने के लिए नगर निगम पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। महापौर ने बताया कि निगम की जन समिति में लंबे विचार-विमर्श और सुझावों के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि सराफा चौपाटी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ विश्व प्रसिद्ध है और इसे परंपरागत व्यंजनों के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जारी रखना आवश्यक है। सराफा व्यापारी बोले- हम दुकान किराए पर नहीं देंगे तो कहां लगाएंगे सराफा व्यापारी एसो. के मंत्री बसंत सोनी ने कहा कि 1 सितंबर से सराफा व्यापारी चौपाटी के दुकानदारों को किराए पर आगे की जगह नहीं देंगे तो वे दुकान कहां लगाएंगे। हमें सुरक्षा ज्यादा जरूरी है। चौपाटी के लिए जगह कहीं भी दी जा सकती है, वहां सभी पार्किंग, गैस लाइन सहित अन्य सभी सुरक्षा के इंतजाम किए जाना चाहिए। ​​​​​​ सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने कहा कि इतनी अधिक संख्या में दुकानें लगने के कारण यदि हादसा होता है तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी अंदर तक नहीं पहुंच पाएगी। अफरा-तफरी में बड़ा हादसा भी होने की आशंका है। कई बार सफाई भी नहीं करते। इस वजह से सराफा व्यापारियों को अगले दिन परेशानी होती है। इस कारण चौपाटी के कारण हमारा धंधा प्रभावित हो रहा है। हम चाहते है कि चौपाटी को सराफा के बजाए कही और शिफ्ट किया जाए। मेयर भार्गव ने कहा कि सराफा चौपाटी विश्व प्रसिद्ध है। वह इंदौर की पहचान है। वह परंपरागत व्यंजनों के साथ सुरक्षित तरह से लगे। हम यह चाहते हैै। सराफा चौपाटी हटा नहीं सकते। चौपाटी लगने का समय क्या होगा, उसे नियमित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात एक दम स्पष्ट है कि सराफा इंदौर की धरोहर है। इंदौर को स्वाद की राजधानी बनने में सराफा की बड़ी भूमिका है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए चौपाटी का संचालन होगा। उसका समय तय होगा। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि सराफा कारोबारियों का भी नुकसान न हो। हमने सराफा चौपाटी के संचालन के लिए एक कमेटी भी गठित की थी। उसकी रिपोर्ट में भी सुरक्षा पर जोर दिया गया। सुरक्षा व अन्य व्यवस्था के लिए निगमायुक्त को किया अधिकृत एमआईसी द्वारा सराफा चौपाटी की सुरक्षा व अन्य व्यवस्था के लिए निगम आयुक्त को अधिकृत किया गया है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सराफा व्यापारियों का हित सुरक्षित रहेगा और चौपाटी लगाने वालों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। दोनों पक्षों से सुझाव लिए गए हैं और उन्हीं के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। ​​​​​​बैठक में ये लोग मौजूद थे बैठक में निगम आयुक्त शिवम वर्मा, महापौर परिषद सदस्य निरंजन सिंह चौहान, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर सहित सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी, कोषाध्यक्ष अजय लाहोटी, कार्यकारी सदस्यय अविनाश शास्त्री एवं सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी व व्यापारी मौजूद थे। सराफा चौपाटी को लेकर कांग्रेस की मांग इधर, कांग्रेस ने कहा है कि इस प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र में सराफा बाजार की परंपरागत बहुमूल्य विरासत को बनाए रखना आवश्यक है। अवैध और अनुचित तरीके से चौपाटी का विस्तार न केवल व्यापारियों को प्रभावित करता है बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक पहचान को भी धूमिल करता है। वहीं सराफा व्यापारियों का कहना है कि अगर चौपाटी की दुकानें लगानी हैं तो सिर्फ उन्हें अनुमति मिले जो सालों से व्यापार कर रहे हैं। जिनमें 70 अधिक दुकानदार शामिल हैं, सिर्फ उन्हें अनुमति दी जाए या फिर सभी को हटाया जाए। ऐसे विवादों और असुविधाओं को देखते हुए नगर निगम को चाहिए कि वह सराफा क्षेत्र की साफ-सफाई, सुरक्षा व नियोजन में तत्काल सुधार करे।