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स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह का निर्देश: सरकारी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण हो उच्च गुणवत्ता का

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि शैक्षणिक सत्र वर्ष 2026-27 में पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित की जाने वाली किताबें उच्च गुणवत्ता की हों। उन्होंने कहा कि मुद्रण कार्य से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय समय-सीमा में पूरी की जायें। उन्होंने कहा कि पाठ्य पुस्तकों का वितरण शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पूरा किया जाये। यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह  मंत्रालय में पाठ्य पुस्तक निगम की गवर्निंग बॉडी की बैठक ली। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, वित्त, माध्यमिक‍ शिक्षा मंडल के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी विनय निगम ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में करीब 9 करोड़ पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण होगा। इसके लिये ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत निविदा की प्रक्रिया होगी। निगम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 10 मार्च 2026 तक सभी पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण कार्य पूरा कर लेगा। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल 2025 में शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग सभी पाठ्य पुस्तकों का वितरण विद्यार्थियों को किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि निगम ने कुछ सरकारी स्कूलों को खेल-कूद मैदान, अतिरिक्त कक्ष और नवीन कक्ष निर्माण के लिये अनुदान राशि मंजूर की है। किताबों की पांडुलिपि डेढ़ माह में मिलेगी बैठक में भी बताया गया कि राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा अगले शैक्षणिक सत्र के लिये एनसीईआरटी और एससीईआरटी से किताबों की पांडुलिपि सितंबर 2025 अंत तक पाठ्य पुस्तक निगम को उपलब्ध करा दी जायेंगी। मध्यप्रदेश, देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें सत्र शुरू होते ही वितरित की गयीं।   स्थानीय भाषा में सामग्री विकास स्कूल शिक्षा विभाग ने 8 स्थानीय भाषाओं- बुन्देली, बघेली, मालवी, निवाड़ी, गोंडी, भीली, बारेली और कोरकू भाषाओं में सामग्री का विकास किया है। विभाग का यह प्रयास बच्चों में स्थानीय भाषा के प्रति लगाव के उद्देश्य से किया गया है।

दांतों की बीमारियों से परेशान MP: एम्स सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

भोपाल  एम्स भोपाल ने मध्यप्रदेश में दांत और मुंह की बीमारियों पर अब तक का सबसे बड़ा राज्यव्यापी सर्वेक्षण पूरा किया है। 2002-03 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट को हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साउथ-ईस्ट एशिया जर्नल आफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया है। यह सर्वेक्षण एम्स भोपाल के दंत विभाग और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फार ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ के नोडल अधिकारी डा. अभिनव सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने सहयोग दिया। अध्ययन में प्रदेश के 41 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों से करीब 48 हजार लोगों को शामिल किया गया। नतीजे चौंकाने वाले सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में दांतों में कीड़े लगना 40 से 70 प्रतिशत लोगों में पाया गया। मसूड़ों की बीमारी 50 से 87 प्रतिशत और मुंह के कैंसर दो से 17 प्रतिशत तक देखी गईं। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि 70 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग और लगभग 50 फीसद 5 साल के बच्चे दांतों की सड़न यानी कैविटी से जूझ रहे हैं। देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक एम्स भोपाल ने केवल सर्वे ही नहीं किया, बल्कि इसके आधार पर देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक भी बनाया है। डब्ल्यूएचओ माडल पर आधारित इस डेटा बैंक में जिलेवार मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति और सेवाओं का ब्योरा दर्ज है। सरकार और नीति-निर्माता अब इस आधार पर नई योजनाएं बना सकेंगे। तकनीक से आई पारदर्शिता सर्वेक्षण को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए मोबाइल एप और जीपीएस तकनीक का उपयोग किया गया। साथ ही एम्स भोपाल ने अपने ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलरों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी शुरुआत की है, ताकि रोकथाम और उपचार की सुविधाएं सीधे समाज तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों की राय डॉ. अभिनव सिंह का कहना है कि अब जब मौखिक स्वास्थ्य की वास्तविक तस्वीर सामने आ चुकी है तो जनजागरुकता बढ़ाने, बचाव और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यह सर्वे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मौखिक स्वास्थ्य को नई दिशा देगा।     दांतों में कीड़े (कैविटी) – 40% से 70%     मसूड़ों की बीमारी (गम डिजीज) – 50% से 87%     मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाएं – 2% से 17%     बुजुर्गों में दांतों की सड़न – 70% से अधिक     5 साल के बच्चों में कैविटी – लगभग 50%  

BJP की रणनीति: हिंदुत्व एजेंडे को धार, OBC को साधने के लिए कल्याण सिंह की विरासत का सहारा

अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी मिशन-2027 का आगाज करने जा रही है. कल्याण सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर गुरुवार को अलीगढ़ में बीजेपी एक बड़ा कार्यक्रम कर रही है, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और बृजेश पाठक शिरकत करेंगे. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह शामिल होंगे. कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को बीजेपी 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मना रही है. इस तरह बीजेपी 2027 के चुनाव से पहले यूपी की सियासत में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने और सपा की पीडीए पॉलिटिक्स को काउंटर करने की कवायद में है. योगी सरकार के करीब दो दर्जन मंत्री गुरुवार को कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने अलीगढ़ पहुंचेंगे. इस दौरान सीएम योगी सहित बीजेपी के दिग्गज नेता अलीगढ़ में दो घंटे तक रहकर कल्याण सिंह के बहाने 2027 का एक तरह से पश्चिम यूपी में आगाज करेंगे. बीजेपी 2024 में पश्चिम यूपी की हारी हुई लोकसभा सीटों पर लोधी समुदाय के वोटरों को साधकर 2027 को फतह करने की रणनीति अपनाएगी. कल्याण सिंह के बहाने हिंदुत्व के एजेंडे को धार कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा में बीजेपी के दिग्गज नेताओं के अलीगढ़ पहुंचने के पीछे सियासी मकसद साफ है. कल्याण सिंह को हिंदुत्व की राजनीति करने वाले राम मंदिर आंदोलन का नायक माना जाता है. नब्बे के दशक में कल्याण सिंह बीजेपी के हिंदुत्व का चेहरा बनकर उभरे थे. कल्याण सिंह के यूपी सीएम रहते हुए 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया था. कल्याण सिंह बीजेपी के इकलौते नेता थे, जो राम मंदिर के लिए जेल गए और अपनी सत्ता की बलि दे दी थी. इस तरह कल्याण सिंह की पहचान राम भक्त और हिंदुत्व की कट्टर छवि वाले नेता की रही, जिसे बीजेपी 2027 में भुनाने की कवायद में है. इसीलिए बीजेपी कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मनाकर यूपी की सियासत में हिंदुत्व के एजेंडे को धार दे रही है. सपा के PDA का क्या काउंटर प्लान है? उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के रूप में बीजेपी के पास एक ऐसा ऑलराउंडर चेहरा था, जिसके सहारे पार्टी ने जातीय समीकरण को मजबूत करने के साथ-साथ हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति को धार दी थी. यही वजह है कि बीजेपी कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि का कार्यक्रम ऐसे समय कर रही है, जब 2027 के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. सपा-कांग्रेस मिलकर बीजेपी के खिलाफ ओबीसी-दलित पॉलिटिक्स का सियासी नैरेटिव सेट करने में जुटी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में ही सपा अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और राहुल गांधी के संविधान और आरक्षण वाले दांव के ज़रिए बीजेपी को मात देने में सफल रही है. बीजेपी अब कल्याण सिंह के बहाने सपा की रणनीति को काउंटर करने की कवायद में जुटी है. पूजा पाल के साथ खड़े होकर बीजेपी ओबीसी के तहत पाल-गड़रिया और बघेल समुदाय को साधने का दांव चल रही है, तो कल्याण सिंह के बहाने लोध समुदाय को साधे रखने की रणनीति है. कल्याण सिंह ओबीसी समुदाय की लोध जाति से आते हैं. ओबीसी में पाल और लोध दोनों अहम जातियां हैं. इस तरह बीजेपी पाल और लोध समाज के ज़रिए सपा की पीडीए राजनीति में सेंधमारी का प्लान बना रही है. बीजेपी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे रहे बीजेपी अपने शुरुआती दौर में ऊंची जातियों की राजनीति वाली पार्टी की पहचान रखती थी और उसे ठाकुर, ब्राह्मण, बनियों की पार्टी कहा जाता था. बीजेपी की इस छवि को बदलने का काम कल्याण सिंह ने किया था. तब गुड गवर्नेंस के ज़रिए उन्होंने तमाम ओबीसी जातियों को जोड़कर मंडल वाली सियासत पर कमंडल का पानी फेर दिया था. कल्याण सिंह ओबीसी की लोध बिरादरी से थे और उत्तर प्रदेश में लोध समाज का वोट भी निर्णायक है. ओबीसी में एक और बड़ा वोट बैंक लोध जाति का है. कल्याण सिंह के चलते लोधी समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह योगी सरकार में मंत्री हैं. यही नहीं बीजेपी ने लोधी समुदाय के नेताओं को राज्यसभा और विधायक बना रखा है, लेकिन 2027 की चुनावी तपिश के साथ पार्टी कल्याण सिंह के ज़रिए लोधी ही नहीं बल्कि गैर-यादव ओबीसी वोटों को सियासी संदेश देने की कवायद शुरू कर रही है, ताकि 2024 में हुए सियासी नुकसान की भरपाई कर सके. पिछले दिनों लोध समुदाय की बीजेपी से नाराजगी का सवाल उठा था. पश्चिम यूपी के किले को दुरुस्त करने में जुटी बीजेपी पहले से यूपी के जाट लैंड कहे जाने वाले पश्चिमी यूपी की मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर, नगीना और मुरादाबाद जैसी सीटें 2024 में गंवा चुकी है. इसके अलावा लोधी समाज के प्रभाव वाली कासगंज, बदायूं, आंवला, संभल, मैनपुरी, रामपुर, हमीरपुर और कन्नौज जैसी सीट हार चुकी है. इसके अलावा फर्रुखाबाद और अलीगढ़ की सीट बहुत मुश्किल से जीती है. ऐसे में बीजेपी कल्याण सिंह के बहाने लोध प्रभाव वाले इलाके में अपनी सियासी जड़ें मजबूत करने का दांव चल रही है, क्योंकि ओबीसी वोटों को साधे बिना बीजेपी यूपी में सत्ता की हैट्रिक नहीं लगा पाएगी. यूपी में करीब 3 फीसदी लोधी समुदाय के लोग हैं, लेकिन बृज और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में इनकी निर्णायक भूमिका है. यूपी के करीब 23 जिलों में लोध वोटरों का दबदबा है. रामपुर, ज्योतिबा फुले नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, पीलीभीत, लखीमपुर, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा ऐसे जिले हैं, जहां लोध वोट बैंक पांच से 10 फीसदी तक है. लोधी समुदाय ओबीसी की पहली जाति है, जो कल्याण सिंह के चलते बीजेपी के साथ जुड़ गई थी. बीजेपी अब कल्याण सिंह के निधन के बाद भी उसे अपने साथ पहले की तरह ही जोड़े रखना चाहती है. इसीलिए कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सीएम योगी से लेकर बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ही नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी पहुंच रहे हैं. उत्तर प्रदेश में OBC पॉलिटिक्स उत्तर प्रदेश की सियासत ओबीसी मतदाताओं के इर्द-गिर्द सिमट गई है, जिसके चलते कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी की लोधी समुदाय के … Read more

टाइम-लैप्स और पांच साल की मेहनत: राम मंदिर निर्माण पर बनेगी विशेष डॉक्यूमेंट्री

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहा भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा. दिसंबर तक शेष काम भी समाप्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही जनवरी में होने वाले भव्य उद्घाटन के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं. राम मंदिर निर्माण की यह ऐतिहासिक यात्रा करीब पांच साल की रही है. खास बात यह है कि इस पूरे निर्माण कार्य को पांच टाइम-लैप्स कैमरों के माध्यम से लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है. खुदाई से लेकर सॉइल टेस्टिंग और चरणबद्ध निर्माण की यह पूरी कहानी भविष्य में डॉक्यूमेंट्री के रूप में दुनिया के सामने लाई जाएगी. ट्रस्ट ने इस रिकॉर्डिंग को बौद्धिक संपदा घोषित किया है और इसे कुछ शर्तों के साथ सीबीआरआई (रुड़की) को सौंपा जाएगा. डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य आगे की पीढ़ियों को यह दिखाना है कि कैसे तकनीकी विशेषज्ञता, वास्तुशिल्पी विशेषताएं और श्रमिकों का समर्पण मिलकर इस भव्य धरोहर को साकार कर पाया. मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना ट्रस्ट की प्राथमिकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सजावट और अन्य तकनीकी काम किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर में फसाड लाइटिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अनुमानित 8 से 10 करोड़ रुपये की लागत से इस लाइटिंग का काम होगा. तीन प्रमुख कंपनियों ने प्रजेंटेशन दी है और चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में है. रात के समय इन लाइट्स से मंदिर की अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला और भी भव्य दिखाई देगी. इसके साथ ही मंदिर की कलात्मकता को और विशेष बनाने के लिए थ्री-डी म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं. कुल 90 म्यूरल्स में से 85 अयोध्या पहुंच चुके हैं. इनमें से 70 से अधिक को मंदिर की दीवारों पर स्थापित कर दिया गया है. शेष म्यूरल्स लगाने का काम 15 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. राम मंदिर न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय शिल्प, संस्कृति और इंजीनियरिंग का भी उदाहरण बनेगा. नृपेंद्र ने बताया कि सुबह 9:30 बजे तीन कंपनियों की ओर से फसाड लाइटिंग का प्रजेंटेशन किया गया। इसमें हाइब्रिड मॉडल, प्रोजेक्टर और लीनियर लाइटिंग जैसे विकल्प प्रस्तुत किए गए। अंतिम चयन के बाद इस पूरी व्यवस्था पर लगभग आठ से 10 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस लाइटिंग से रात में भी मंदिर की अद्भुत नक्काशी झलकेगी। थ्री डी म्यूरल के निर्माण में एक माह की हुई देरी उन्होंने बताया कि राम मंदिर के लोअर प्लिंथ में लगने वाले 90 म्यूरल्स में से 85 तैयार होकर अयोध्या पहुंच चुके हैं। इनमें से 70 से अधिक लगाए भी जा चुके हैं। थ्री डी मूर्तियों के निर्माण में तकरीबन 15 से 30 दिन की देरी दर्ज की गई है। यह काम अब 15 सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।  दिसंबर तक सभी काम पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि समीक्षा के दौरान अस्थायी मंदिर और शहीदों की स्मृति में लगाए गए ग्रेनाइट पिलर के स्वरूप पर भी विस्तार से विचार किया गया। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। निर्माण कार्य की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि अक्तूबर के अंत तक अधिकांश काम पूरे हो जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि दिसंबर तक शेष काम भी लक्ष्य के अनुसार पूरा कर लिया जाएगा। अयोध्या राम मंदिर; शेषावतार और परकोटा के 6 मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु, 15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू   राम मंदिर परिसर में सभी 6 मंदिरों के साथ सप्त मंडप, कुबेर टीला और शेषावतार मंदिर के दर्शन की व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 9 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें एक नए ट्रस्टी के नाम को भी शामिल करने पर मुहर लग सकती है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति की भी बैठक 7, 8 और 9 सितंबर को होगी. मंदिर निर्माण समिति की बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. पूरी उम्मीद है कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य इस वर्ष पूरे कर लिए जाएंगे. मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन आगामी तैयारियों को देखते हुए निर्माण कार्य को पूरा करने और दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर मंथन किया गया. लगभग 6 घंटे तक लगातार चल इस बैठक के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह तय कर लिया गया है कि परकोटा के 6 मंदिर और शेषावतार मंदिर में दर्शन की व्यवस्था अक्टूबर माह से प्रारम्भ हो जाएगी. लेकिन सप्त मंडपम में दर्शन की व्यवस्था शुरू किए जाने पर विचार किया जा रहा है. राम मंदिर परिसर में निर्माण. हालांकि, इसके पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की व्यवस्था में सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट की मानें तो दर्शन व्यवस्था प्रारंभ होने के बाद प्रतिदिन सुरक्षा के जवानों को परिसर में हर कोने की तलाशी न करनी पड़े, इसके लिए ट्रस्ट सुरक्षा एजेंसी के साथ अध्ययन कर रहा है. वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए लगेंगी तीन लिफ्ट: राम मंदिर में आने वाले अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की व्यवस्था भी सितंबर तक पूरा कर की ली जाएगी. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर में तीन लिफ्ट लगाई जानी हैं. इसमें उत्तर दिशा में दो और एक पश्चिम दिशा में होगी. अक्टूबर में इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा. एक दिन में एक लाख श्रद्धालु करेंगे शू सेंटर का उपयोग: राम मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी में तेज धूप का जलना पैरों में बर्दाश्त नहीं हो पता इसके चलते अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पास परकोटा के बाहर शू सेंटर का निर्माण कराया गया. चंपत राय ने बताया कि इसमें एक साथ लगभग 12000 से अधिक लोग एक साथ इसके अंदर अपने जूता और चप्पल को रख सकेंगे. एक दिन लगभग एक लाख श्रद्धालु इस सुविधा … Read more

रेलवे बोर्ड का फैसला: टीटीई लॉबी में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू, अब आधार से दर्ज होगी हाजिरी

भोपाल  रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने टीटीइ लॉबी में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने की मंजूरी दे दी है। रेलवे की ओर से अपने टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) की ड्यूटी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में ये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब टीटीइ ड्यूटी शुरू करने के लिए आधार बेस्ड बायोमेट्रिक पर साइन इन करेंगे और ड्यूटी एंड होने पर साइन आउट कर सकेंगे। दर्ज होगा उपस्थिति का रियल टाइम रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से न केवल कर्मचारियों की रियल टाइम अटेंडेंस दर्ज होगी, बल्कि ड्यूटी रिकॉर्ड में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे ड्यूटी साइन-इन और साइन-आउट की प्रक्रिया तेज, सरल और सुरक्षित हो जाएगी। तीन फिंगरप्रिंट डिवाइस का सफल परीक्षण बता दें कि टीटीई लॉबी एप्लिकेशन (TTE Lobby Application) को सी-डैक (केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वैज्ञानिक संस्था) के पोर्टल से जोड़ा गया है। इस प्रणाली का परीक्षण नई दिल्ली में किया गया, जहां मंतरा, एक्सेस और आइडीएमआइए के तीन प्रमुख ओईएम फिंगरप्रिंट डिवाइस का सफल प्रयोग किया गया। ये सभी डिवाइस यूआईडीएआई-एसटीक्यूसी प्रमाणित हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह से देशभर में होगी लागू रेलवे का लक्ष्य है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह से इस बायोमेट्रिक फीचर को एमपी समेत देशभर की सभी टीटीई लॉबी सर्वरों पर लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी जोनल रेलवे को बायोमेट्रिक डिवाइस की खरीद, स्थापना और कॉन्फिगरेशन के निर्देश भी जारी किए गए हैं। पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम मामले में रेलवे बोर्ड जनरल मैनेजर पीएमएस सीएल सह के मुताबिक बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों की उपस्थिति पर निगरानी संभव होगी। इससे ड्यूटी रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। यह कदम रेलवे की डिजिटल इंडिया और स्मार्ट रेलवे पहल को मजबूती देगा और प्रशासनिक कामकाज में भी सुधार लाने में मददगार साबित होगा।

झारखंड में 50 हजार राशन कार्ड रद्द, प्रशासन ने बताई ये वजह

जमशेदपुर  झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में अधिकारियों ने 50,000 से अधिक ऐसे राशन कार्ड धारकों के नाम हटा दिए हैं, जिन्होंने पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से अपने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार सत्यापन अभियान के दौरान कुल 1,64,237 निष्क्रिय राशन कार्ड धारकों में से 50,323 के नाम हटा दिए गए हैं। बयान में कहा गया कि 576 कार्ड धारक लाभ पाने के योग्य पाए गए, जबकि 1,13,338 अन्य के नामों की जांच की जा रही है। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश पर, सत्यापन के बाद अपात्र राशन कार्ड धारकों के नाम सूची से हटाने के लिए व्यापक अभियान जारी है। बयान में कहा गया कि जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों से 20,067 नाम हटाए गए, क्योंकि उनके आधार कार्ड नंबर संदिग्ध पाए गए। ऐसे 2,500 से अधिक राशन कार्ड धारकों की जांच की जा रही है। बयान में कहा गया कि अधिकारियों ने 18 वर्ष से कम या 100 वर्ष से अधिक आयु के 2,274 एकल-सदस्यीय कार्ड धारकों के नाम हटा दिए हैं, जबकि 13,332 अन्य का सत्यापन किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक निष्क्रिय कार्ड धारक जमशेदपुर के शहरी क्षेत्र (68,565) और जमशेदपुर एवं गोलमुरी क्षेत्र में पाए गए, जहां यह आंकड़ा 46,703 है। उपायुक्त ने बताया कि सत्यापन अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र लोगों को ही राशन मिले। सत्यार्थी ने प्रखंड स्तर के अधिकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए।  

मध्य प्रदेश: संजय टाइगर रिजर्व में बिजली करंट से बाघ की दर्दनाक मौत

सीधी, मध्य प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व में एक बाघ की बिजली करंट की चपेट में आने से मौत हो गई, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मृत बाघ की पहचान टी-43 के रूप में हुई है और यह घटना दुबरी रेंज के खरबर जंगल में हुई। वन अधिकारियों के मुताबिक, जंगल में हाई-वोल्टेज बिजली के तार बिछाए थे, जिसमें बाघ फंस गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। संजय टाइगर रिजर्व के एसडीओ सुधीर मिश्रा ने बताया कि रात करीब 12 बजे उन्हें सूचना मिली कि जंगल में एक बाघ मृत पाया गया है। इसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है। तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और टाइगर के विसरा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित थे। पोस्टमार्टम के बाद एनटीसीए प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में शव को जला दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि बाघ की मौत बिजली के तारों की चपेट में आने से हुई, जो शायद किसानों ने फसल बचाने के लिए लगाए थे। हालांकि, शिकारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “संजय टाइगर रिजर्व में लगातार वन्यजीवों की मौत बिजली के जाल में फंसने से हो रही है।” उन्होंने बताया कि जांच में जो साक्ष्य मिलेंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अगर कहीं पर किसी भी प्रकार की लापरवाही है, तो तत्काल दुरुस्त किया जाए। हमारा कर्तव्य है कि हर जानवर की हिफाजत सुनिश्चित की जाए। किसी को भी कोई क्षति नहीं पहुंचे।  

पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की पारदर्शी पहल: पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारम्भ पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 23 अगस्त तक चलेगी ऑनलाइन काउंसिलिंग, अंतिम दिन अनुपस्थितों को मिलेगा अवसर संचालक लोक शिक्षण की उपस्थिति और मार्गदर्शन में कराया जा रहा काउंसिलिंग ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारंभ : पदोन्नत प्राचार्यों को ऑनलाइन काउंसिलिंग से मिलेगा पदस्थापना स्थल 845 नव पदोन्नत प्राचार्यों के पदांकन हेतु ओपन काउंसिलिंग प्रारंभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज से राजधानी रायपुर स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्यालय परिसर, शंकर नगर में पदोन्नत प्राचार्यों के लिए ऑनलाइन ओपन काउंसिलिंग की शुरुआत हो गई है। इस प्रक्रिया में कुल 845 नव पदोन्नत प्राचार्य शामिल होंगे। संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में काउंसिलिंग 20 अगस्त से 23 अगस्त 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में क्रमशः 150-150 प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा। पदोन्नति आदेश एवं रिक्त पदों की सूची पूर्व में ही स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुगम हो। सरकार द्वारा तय नियमावली एवं वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद महिला और फिर पुरुष अभ्यर्थियों को वरिष्ठता क्रम से संस्था चयन का अवसर मिलेगा। एक वर्ष से कम अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्यों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। काउंसिलिंग हेतु वेटिंग हॉल और काउंसिलिंग कक्ष निर्धारित कर दिए गए हैं, जहाँ केवल अभ्यर्थियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। सभी पदोन्नत प्राचार्यों को अपने सेवा प्रमाण पत्र और मान्य फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे। काउंसिलिंग में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दिन 23 अगस्त को अवसर दिया जाएगा। काउंसिलिंग पूर्ण होने के पश्चात् शासन द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे तथा सभी को आदेश प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर पदग्रहण करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सरलता लाने का संकल्प लिया है। इस पहल से अब प्राचार्यों की पदस्थापना की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। पहले से ही रिक्त पदों का स्थान सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे सभी को अपने अधिकार और विकल्प स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।

मध्य प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या में इजाफा, परिसीमन से पहली सीट का नाम सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश के आगामी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि धार जिले से अलग होकर औ‌द्योगिक नगरी पीथमपुर (Pithampur) को स्वतंत्र विधानसभा सीट का दर्जा मिल सकता है। बढ़‌ती आबादी और मतदाताओं की संया को देखते हुए यह फैसला लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान में धार जिले में सात और इंदौर जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। दोनों जिलों की कुल आबादी और मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार में बनेंगी दो नई विधानसभा सीटें राजनीतिक गलियारों में 2028 के विधानसभा चुनाव (mp assembly elections 2028) से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण पर निगाह टिकी हुई है। इससे जहां नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे, वहीं दावेदारों के साथ-साथ विधायकों की संख्या में भी इजाफा होगा। औसतन एक विधानसभा में ढाई से लेकर तीन लाख मतदाता ही रहेंगे और मौजूदा विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अभी धार सहित देश-प्रदेश में विधानसभा-लोकसभा सीटों के क्षेत्रफल और आबादी यानी मतदाताओं में भारी विसंगति है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार में दो नई सीटें बन सकती हैं। इससे जहां मौजूदा विधायकों का गणित बिगड़ेगा, वहीं नए चेहरों को भी मौका मिलेगा। मुस्लिम वोट नहीं होंगे निर्णायक सूत्रों का कहना है कि धार जिले का परिसीमन विशेषज्ञता के साथ किया जाएगा कि किसी भी सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में नहीं रह सके। कांग्रेस-भाजपा के लिए चुनौती पीथमपुर को नई विधानसभा बनने पर दोनों दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कांग्रेस को संगठन खड़ा करने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा को औ‌द्योगिक मजदूरों और ग्रामीण वोट बैंक के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। अनुमान है कि नई सीट में ढाई से तीन लाख मतदाता होंगे, जिनमें मजदूर, कर्मचारी और ग्रामीण समाज की भूमिका निर्णायक रहेगी। 2026 के बाद होगा परिसीमन संविधान संशोधन के तहत 2026 तक लोकसभा और विधानसभा सीटें बढ़ाने पर रोक है। लेकिन जनगणना 2026 के बाद नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा। तब मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटें बढ़कर 280 तक हो सकती हैं, वहीं लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 35 से 40 तक पहुंचने का अनुमान है। पीथमपुर विधानसभा में आएंगे ये क्षेत्र इस समय पीथमपुर धार विधानसभा का हिस्सा है, लेकिन औ‌द्योगिक इकाइयों, मजदूर बस्तियों और ग्रामीण अंचल की वजह से यहां मतदाताओं की संया लगातार बढ़ रही है। प्रस्तावित परिसीमन के बाद प्रीति नगर, अकोलिया, बरदरी, खेड़ा, सागौर कुटी और इंडोरामा सहित आसपास के क्षेत्र नई पीथमपुर विधानसभा में शामिल किए जा सकते हैं। धार का क्षेत्रफल और मतदाता घटेंगे, जबकि पीथमपुर की अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनेगी।

धार में इमामबाड़ा सील, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; शहरभर में पुलिस बल की तैनाती

धार   धार शहर के हटवाड़ा इलाके में स्थित इमामबाड़े को लेकर प्रशासन ने अहम कदम उठाते हुए मुस्लिम समाज से खाली करा लिया गया है। बुधवार तड़के 4 बजे कार्रवाई करते हुए भवन पर लोहे का गेट ओर ताला लगाकर इसे सील किया गया। साथ ही, पीडब्ल्यूडी विभाग को सुपुर्द किया गया है। एसडीएम के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सतर्कता है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किये गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इमामबाड़े का कब्जा दिलवाने के बाद प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी अब पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंप दी है। इस कार्रवाई को लेकर शहरभर में चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस-प्रशासन की इस सक्रियता की बातें करते नजर आ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, प्रशासन सोशल मीडिया पर भी अलर्ट है। अफवाहें या भ्रामक खबरें फैलने से रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। PWD विभाग की निगरानी में रहेगा इमामबाड़ा इस मामले में अधिकारी साफ कर चुके हैं कि, सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इमामबाड़ा पीडब्ल्यूडी विभाग की देखरेख में रहेगा और पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।