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एक पेड़ माँ के नाम अभियान में पर चल रहा है पौध रोपण कार्यक्रम

भोपाल  प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' पौध रोपण अभियान 5 जून 2025 से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाया गया है। अभियान में अब तक करीब 9 लाख 90 हजार पौध रोपित किये जा चुके हैं। लगाए गये पौधों को मिशन लाइफ पोर्टल पर प्रदर्शित भी किया गया है। प्रदेश में विद्यालयों के आस-पास और परिसर में पूरी योजना के साथ पौध रोपण के निर्देश दिये गये है। विद्यालयों के प्राचार्यों को लगाए गये पौधों की सुरक्षा के समुचित उपाय किये जाने के निर्देश दिये गए है। प्रदेश में 92 हजार से अधिक शासकीय स्कूल हैं जहां ये अभियान चलाया जा रहा है। पौध रोपण कार्यक्रम आगामी 30 सितम्बर तक विद्यालयों में ईको क्लब के माध्यम से संचालित होगा। मिशन लाइफ का गठन शासकीय विद्यालयों में क्लब फॉर मिशन लाइफ का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत 15 हजार से अधिक ईको क्लब का गठन किया गया है। ईको क्लब के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े विषयों, निबंध प्रतियोगिता और जल शक्ति अभियान गतिविधियाँ प्रमुख रूप से आयोजित की जा रही हैं। राज्य स्तरीय शालेय खेल कैलेण्डर जारी लोक शिक्षण संचालनालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिये शालेय खेल कैलेण्डर जारी किया है। कैलेण्डर में राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताएँ और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की तिथियाँ घोषित की गई हैं। इस संबंध में संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण और समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। खेल प्रतियोगिताएँ 8 सितम्बर से शुरू होंगी जो 10 दिसम्बर तक 2025 निर्धारित तिथियों के अनुसार चलेंगी। इन प्रतियोगिताओं में बॉक्सिंग, जूडो, व्हालीबॉल, फुटबॉल, टेनिस, किक्रेट, जिमनास्टिक, मलखंब, कराते, शतरंग, कबड्डी, तलवार बाजी, एथलेटिक्स, बास्केट वॉल, हॉकी के साथ अन्य खेल भी शामिल किये गये हैं। ये खेल प्रतियोगिताएँ आयु वर्ग के हिसाब से बालक और बालिकाओं के लिये होगी। राज्य स्तरीय जवाहर लाल नेहरू हॉकी प्रतियोगिता प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जवाहर लाल नेहरू हॉकी शालेय प्रतियोगिता की तिथियाँ भी तय कर दी गई है। जूनियर हॉकी टूर्नामेन्ट(15 वर्ष से कम आयु वर्ग) 8 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक, नेहरू बालिका हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 19 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक और नेहरू बालक हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 26 नवम्बर से 6 दिसम्बर 2025 तक तथा इससे जुड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता सिवनी में 24 से 30 अगस्त 2025 तक होंगी। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये हैं।  

55 हजार से अधिक बच्चे हुए गुम, MP के बाणगंगा और लसूड़िया में सबसे ज्यादा मिसिंग केस

भोपाल  मध्य प्रदेश में गुमशुदा बच्चों को लेकर एमपी विधानसभा से बड़ी जानकारी सामने आई है, जो हैरान करने वाली भी है. क्योंकि पिछले चार साल में मध्य प्रदेश से 55 हजार से ज्यादा बच्चों के गुमशुदा होने के आंकड़े मिले हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री सचिन यादव के सवाल के जवाब में मिली है. सरकार की तरफ से यह माना गया है कि 2021 में 4 जुलाई से 2025 तक 59 हजार 365 बच्चे मध्य प्रदेश से गुमशुदा हुए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है. यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं, इनमें सबसे ज्यादा बच्चे भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों से गायब हुए हैं. जबकि इसमें कई दूसरे बड़े जिले भी शामिल हैं.  53 हजार को खोजा गया  बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले चार साल में 48,274 लड़कियां और 11,091 लड़के गुमशुदा हुए हैं. जिससे यह आंकड़े चौंकाने वाले जरूर है. हालांकि सरकार की तरफ से यह जानकारी भी दी गई जो बच्चें गुमशुदा हुए थे, उनमें से 53 हजार बच्चों को पुलिस ने खोज निकाला है, जो कुल बच्चों का 90 फीसदी है. लेकिन 6035 बच्चों की तलाश अभी भी पुलिस को जारी है.  इंदौर में तो वह हमारे पास बहुत अच्छे से रह रही थी। 8वीं के बाद उसने पढ़ाई नहीं की। मैं अपने बच्चे का एडमिशन कराने स्कूल गई थी। पिता काम पर गए थे। उसने कुछ बोला भी नहीं और चली गई। हमारी बेटी कहीं भी रहे, बस हमें ये पता चल जाए कि वह वहां ठीक है। अगर वह दूसरी जगह भी रहना चाहती है तो हमे कोई दिक्कत भी नहीं है। दूसरी बार उसे कहा ढूंढें, कहां जाएं, किससे पूछें। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि ढूंढें तो ढूंढें कहां। मोबाइल नंबर भी नहीं है। हमारे सामने किसी से बात भी नहीं करती थी…। प्रदेश में सबसे ज्यादा गुमशुदगी के मामले इंदौर से प्रदेश का ये पहला मामला नहीं है जब कोई बच्ची अचानक ही घर से लापता हुई हो और वर्षों तो उसका कोई सुराग न मिले। दरअसल, विधानसभा में कांग्रेस विधायक सचिन यादव द्वारा पूछे गए सवाल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विधायक यादव के सवालों पर मिले जवाब के मुताबिक मप्र में बीते साढे़ चार सालों में करीब 58 हजार से ज्यादा बच्चे गुम हुए हैं। इनमें 47 हजार बेटियां और 11 हजार बेटे गायब हुए हैं। बच्चों के गुम होने की जो जानकारी विधानसभा में दी गई है। उसमें ये सामने आया है कि सबसे ज्यादा बच्चे इंदौर से गायब हो रहे हैं। इंदौर शहर के जिन थानों से बच्चे गायब हो रहे हैं उनमें, बाणगंगा थाना क्षेत्र से सबसे ज्यादा 449 बेटियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर लसूडिया से 250, चंदन नगर से 220, आजाद नगर से 178, द्वारका पुरी से 168 बेटियां गुम हुई हैं। बच्चियों के गुम होने के मामले में धार जिला दूसरे नंबर पर है। सचिन यादव ने लगाया था सवाल  मध्य प्रदेश में बच्चों के गुमशुदा होने से जुड़ा सवाल कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने लगाया था. उन्होंने कहा 'चार साल में 60 हजार से ज्यादा बच्चे मध्य प्रदेश में गुमशुदा हुए हैं, जिसमें 48 हजार के करीब बेटियां हैं. अकेले भोपाल में 2500 से 3000 के बीच यह आंकड़े हैं. कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह चिंता का विषय हैं और प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है.  क्योंकि राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं.  भोपाल-इंदौर में सबसे ज्यादा मिसिंग  बता दें कि भोपाल और इंदौर में सबसे ज्यादा बच्चों के गायब होने की बात सामने आई है. भोपाल में 2,980 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 1,804 लड़कियां और 1,174 लड़के शामिल हैं. वहीं इंदौर की बात की जाए तो यहां चार साल में 4,574 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 3,560 लड़कियां और 1,014 लड़के शामिल हैं. जबकि दूसरे जिलों में भी यह आंकड़े बढ़े हैं. ऐसे में प्रदेश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है.  बता दें कि कई गुमशुदा बच्चों की पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई हैं. लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र में निकलकर आई यह जानकारी हैरान करने वाली जरूर है. बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बीजेपी और कांग्रेस विधायकों के बीच इस बार तीखी तकरार दिख रही है.   जानिए इंदौर से लापता बच्ची के परिवार की हालत लसूडिया थाना क्षेत्र के राहुल गांधी नगर में रहने वाले एक परिवार की 16 साल की बेटी घर से अचानक लापता हो गई। परिवार ने इंदौर के साथ ही जिस गांव में वे रहते थे, वहां भी उसकी तलाश की, लेकिन बेटी का पता नहीं चला। हालत ये हो गई कि बेटी के गम में माता-पिता का खाना और काम पर जाना तक छूट गया था। उसे लापता हुए 1 महीना हो गए। मजबूरी में माता-पिता दोनों ही अपने-अपने काम पर जाने तो लगे, लेकिन उनकी आंखें हमेशा बेटी को तलाशती रहती हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना किया लापता बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की उम्र 16 साल है। उसके लापता होने का बाद उसे जहां-जहां संभव हो सकता था वहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। रिश्तेदारों के यहां भी पूछ लिया। जब उसका कहीं पता नहीं चला तो मैं पुलिस की मदद लेने के लिए थाने गया। अब जानिए किस जिले के किन 5 थाना क्षेत्रों से सबसे ज्यादा बेटियां गुम हुईं ग्वालियर जिला: (कुल गुम हुए बच्चे- 1857,लड़कियां-1268, लड़के-589) ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा ग्वालियर थाने से 106 बच्चियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर डबरा से 90, मुरार से 88 जनकगंज से 86, बहोड़ापुर से 72 बच्चियां गुम हुई हैं। शिवपुरी जिला: (गुम हुए कुल बच्चे- 960, बेटियां- 764 बेटे- 196) शिवपुरी जिले में पिछोर थाने से सबसे ज्यादा 88 बच्चियां गुम हुई हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र से 80, करेरा से 55, बैराड़ से 49 कोलारस और देहात थाना क्षेत्रों से 46- 46 बेटियां गुम हुई हैं। गुना जिला; (कुल गुम हुए बच्चे: 795, बेटियां – 662, बेटे – 133) गुना जिले में सबसे ज्यादा 98 बच्चियां कैंट थाना क्षेत्र से गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर कोतवाली से … Read more

यूपी विधानसभा में CM योगी का बयान: सपा की करतूतों से हर कोई वाकिफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर करारा प्रहार किया. सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा, "सपा और लोकतंत्र एक ही नदी के दो अलग-अलग छोर हैं. इन्हें लोकतंत्र पर भरोसा कब से हो गया? लोकतंत्र की बात करना इन्हें शोभा नहीं देता. संभल में इन्होंने क्या किया, ये सबको पता है. संभल हो, बहराइच हो या गोरखपुर, सपा की करतूतों से सब वाकिफ हैं. इन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया. अगर एनडीए सरकार विकास करना चाहती है, तो आपको (समाजवादी पार्टी) बुरा लग रहा है… हम पूरे प्रदेश के व्यापारियों को साथ लेकर काम कर रहे हैं." मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि सपा शासनकाल में व्यापारियों पर गुंडा टैक्स लगाया जाता था. इसी वजह से व्यापारी आपसे नाराज़ हैं और समाजवादी पार्टी को इसका खामियाजा बार-बार भुगतना पड़ रहा है. व्यापारियों के विकास के लिए कदम उठाने के बजाय इन्होंने (समाजवादी पार्टी ने) उनके रास्ते में रोड़े ही अटकाए हैं. समाजवादी पार्टी से ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो सुरक्षा की बात करेगी और अच्छे विकास का समर्थन करेगी." वहीं, मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ने कहा था- "इस मानसून सत्र के दौरान बाढ़, जलभराव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. स्वास्थ्य, शिक्षा और इन सभी मुद्दों पर सरकार ने पिछले 8.5 वर्षों में जो कुछ भी किया है, उस पर भी चर्चा होगी. विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को लेकर 13-14 अगस्त को 24 घंटे की चर्चा होगी. चर्चा के बाद, हम सदन में एक विस्तृत कार्ययोजना की भी घोषणा करेंगे कि कैसे सरकार नीति आयोग के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की मदद से इस विजन डॉक्यूमेंट में आम जनता के साथ-साथ हर वर्ग के नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी और उस कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, सरकार अगले 25 वर्षों की कार्ययोजना के साथ अपना विजन सदन के पटल पर रखेगी." सपा ने किया प्रदर्शन  वहीं, विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने जमकर प्रदर्शन किया. सपा विधायकों ने विधानसभा के गेट पर खड़े होकर नारेबाजी की. उन्होंने बैनर-पोस्टर आदि के जरिए सरकार पर हमला बोला. इस बीच प्रश्नकाल में विपक्ष के हंगामे के चलते स्पीकर सतीश महाना ने 15 मिनट के लिए हाउस को स्थगित कर दिया.   दरअसल, सदन शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने खुद गोरखपुर में व्यापारियों से मिलने के लिए पुलिस द्वारा रोके जाने का मुद्दा उठाया, इसके अलावा बहराइच और संभल में ना जाने को लेकर भी सीएम योगी के सामने सवाल रखा. इसके जवाब में सीएम योगी ने पूरी समाजवादी पार्टी को ही लपेट लिया और उसपर तीखा हमला बोला.  

मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में दिखे अनोखे नजारे, सदस्यों का निराला अंदाज, सदस्यों ने दिखाए अजब-गजब रूप

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज 11 अगस्त से शुरू हो चुका है, ये सत्र 16 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से कई अहम विधायी मुद्दों पर चर्चा की तैयारी की गई है तो वहीं विपक्ष की ओर से भी सत्ता पक्ष को घेरने की पूरी तैयारी है। इस बार यूपी विधानसभा का सत्र बेहद खास होने जा रहा है, एक दिन सदन लगातार 24 घंटे तक चलेगा। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र 2025 की शुरुआत से पहले दिन विधान भवन प्रांगण में सदस्य विभिन्न अंदाज में दिखे। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने पोस्टर के साथ विरोध जताना शुरु किया तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी उनको देने उतरे। विपक्षी दल के सदस्यों ने किया हंगामा विधान भवन प्रांगण में सोमवार को समाजवादी पार्टी के साथ विपक्षी दल से सदस्यों ने हंगामा शुरु किया गया तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी उनके विरोध में सामने आ गए। मानसून सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों में पोस्टर वार होने लगा। सदन में और विधानसभा से बाहर मुख्य द्वार पर प्रतिपक्ष में सपा विधायक नारेबाजी और हंगामा करते रहे। निराले अंदाज में विधानसभा पहुंचे सदस्य समाजवादी पार्टी के विधानसभा और विधान परिषद सदस्य सोमवार को विधान भवन में विभिन्न रंग रूप में दिखे। कोई काले कपड़े पहने था तो कोई अलग स्टाइल के कपड़े धारण करके आया था। किसी ने तिरछी टोपी पहनी थी तो कोई अंगौछा धारण करके सरकार का विरोध कर रहा था। विधायक अतुल प्रधान का अलग अंदाज मेरठ की सरधना सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान का एक अलग अंदाज देखने को मिला। सपा विधायक आज कांवड़ लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे। इस कांवड़ में एक तरफ लिखा था ‘हमें चाहिए पाठशाला’ और दूसरी तरफ था- ‘हमें नहीं चाहिए मधुशाला’। उत्तर प्रदेश में गांवों में बेसिक शिक्षा के स्कूल बच्चों की नींव हैं। स्कूल मर्जर पर उठाए सवाल अतुल प्रधान ने इस दौरान यूपी में स्कूल मर्जर को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सरकारी स्कूलों को बंद करने का नियम किसने बनाया है। 2019 में पहले बंद करने का काम किया। आखिर सरकारी स्कूलों में कौन पढ़ता है। यहां गरीब-मजदूर छोटा-मोटा व्यापार करने व्यापार करने वालो के बच्चे पढ़ते हैं। A फॉर अखिलेश व D फॉर डिम्पल के लगे पोस्टर मानसून सत्र के पहले दिन पोस्टर वार देखने को मिला। सपा की पीडीए पाठशाला पर भाजपा हमलावर हुई। भाजपा एमएलसी व प्रदेश महामंत्री सुभाष यदुवंश ने भाजपा मुख्यालय के बाहर समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर पोस्टर लगाया। इसमें पीडीए पाठशाला में A फॉर अखिलेश व D फॉर डिम्पल पढ़ाने पर माफी मांगने को कहा। पोस्टर में लिखा सपा के पीडीए पाठशाला का काला सच।

बस्तर दशहरा की तैयारी तेज, भूमिगत बिजली लाइन से रथ परिक्रमा मार्ग होगा जगमग

जगदलपुर बस्तर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व में अब रथ परिक्रमा मार्ग अंधेरे में नहीं, बल्कि रोशनी से जगमगाएगा. 07 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने के बहुप्रतीक्षित कार्य का आज टाऊन हॉल स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में भूमिपूजन किया गया. इस कार्य के तहत सिरहासार चौक से लालबाग आमागुड़ा चौक तक भूमिगत केबल डाली जाएगी, जिससे दशहरा के दौरान रथ परिक्रमा मार्ग पर बिजली कटने की समस्या हमेशा के लिए खत्म होगी. रथ परिक्रमा के ऐतिहासिक मार्ग दंतेश्वरी मंदिर, सिरहासार चौक, गोलबाजार, टेकरी हनुमान मंदिर, बाहर-भीतर रैनी, स्टेट बैंक चौक, सिटी कोतवाली, लालबाग और कुम्हड़ाकोट अब निरंतर बिजली सप्लाई के साथ रथ के भव्य संचालन के साक्षी बनेंगे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने बताया कि यह बस्तरवासियों की वर्षों पुरानी मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वीकार कर स्वीकृति प्रदान की. उन्होंने विभाग को समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि इस वर्ष के दशहरा पर्व में ही लोग बिना रुकावट रोशनी का आनंद ले सकें. महापौर संजय पांडे ने इसे जगदलपुर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और कहा कि इस परियोजना से न केवल दशहरा की गरिमा बढ़ेगी, बल्कि शहर की आधारभूत सुविधाओं में भी स्थायी सुधार होगा. भूमिपूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, निगम अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इस पल को और खास बना दिया. बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक भव्यता में यह परियोजना अब नई रोशनी और नई ऊर्जा का संचार करेगी.

छत्तीसगढ़ में फीका रहा विश्व आदिवासी दिवस, पूर्व मंत्री बोले – राजनीति में दब गया उत्सव

 सरगुजा विश्व आदिवासी दिवस को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है. पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजन से किनारा किया. छत्तीसगढ़ में आदवासी मुख्यमंत्री रहते हुए यहां कोई बड़ा आयोजन नहीं किया गया. अमरजीत भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बाहुल्य राज्य है और इस राज्य का मुखिया या कहें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं. ऐसे में सरकार के मंत्री और जिला प्रशासन द्वारा इस आयोजन से किनारा करते दूरी बनाए रखने से आदिवासी समाज में काफी नाराजगी है, जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस राजनीति की भेंट चढ़ गया, जिसके कारण ना किसी का सम्मान हुआ ना ही प्रदेश में कोई बड़ा आयोजन हुआ. ऐसे में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों हुआ. इन तमाम बातों को लेकर अमरजीत भगत ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ना तो मुख्यमंत्री कोई कार्यक्रम में गए ना उनका मंत्रीमंडल का कोई मंत्री गया. छत्तीसगढ़ आदिवासियों की उपेक्षा हुई है.

औषधि वाटिका विकास के लिए एम.पी. ट्रांसको में पौधारोपण

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के बिजली कंपनियों में चल रहे पौधारोपण अभियान के अंतर्गत, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के नयागांव परिसर में औषधीय पौधारोपण किया गया। पहले चरण में मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मेहरोत्रा सहित विभिन्न अधिकारियों ने त्रिफला चूर्ण निर्माण में प्रयुक्त आंवला, बहेड़ा और हरड़ जैसे औषधीय पौधे रोपे। इस अवसर पर सभी अधिकारियों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण की शपथ ली। मुख्य अभियंता राजेश द्विवेदी ने बताया कि आगामी चरणों में अन्य औषधीय प्रजातियों का भी रोपण किया जाएगा। ऊर्जा विभाग द्वारा दिए गए पौधारोपण लक्ष्य की पूर्ति के लिए, जबलपुर मुख्यालय सहित प्रदेश भर में एम.पी. ट्रांसको के सभी कार्यालयों, सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान संचालित होगा। पौधारोपण कार्यक्रम में प्रबंध संचालक सुनील तिवारी, मुख्य अभियंता संदीप गायकवाड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

MP में निर्यात ने तोड़ा रिकॉर्ड, 6% बढ़कर पहुंचा 66,218 करोड़ – जानें किन देशों में सबसे ज्यादा

भोपाल  मध्य प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का कुल निर्यात 6 प्रतिशत बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये हो गया। यह अब तक का सबसे अधिक है। निर्यात में यह वृद्धि मुख्यतः फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित उत्पादों के कारण हुई है।  रिपोर्ट के अनुसार, मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड़ रुपये का योगदान रहा, जबकि स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से आईटी कंपनियों ने 4,038 करोड़ रुपये का निर्यात किया। आर्थिक विकास और निर्यात बढ़ोतरी की बदौलत राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 15वें से 11वें स्थान पर पहुंच गया है। फार्मास्यूटिकल निर्यात सबसे ज्यादा पिछले वर्ष तक राज्य के शीर्ष निर्यात सेक्टर में फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्युमिनियम और टेक्सटाइल शामिल थे। इस साल फार्मास्यूटिकल का निर्यात 11,968 करोड़, एनिमल फीड 6,062 करोड़, एल्युमिनियम 4,795 करोड़ और मशीनरी 5,497 करोड़ रुपये रहा। अमेरिका, बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड प्रमुख निर्यात बाजार रहे।  र‍िपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद म‍िलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रत‍िमानों के अनुसार न‍िर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है. न‍िवेश म‍ित्र औद्योगिक व‍िकास की नीत‍ियां, औद्योगिकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने का प्रमुख कारण है. इसके अलावा न‍िर्यात को प्रोत्साह‍ित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है. पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे न‍िर्यात सेक्टर थे. जो प्रथम पांच न‍िर्यातकों में शाम‍िल थे. मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को न‍िर्यात का बड़ा मार्केट म‍िला है. फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है. पीथमपुर के कारण धार जिला सबसे आगे जिला स्तर पर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के कारण धार 17,830 करोड़ रुपये के निर्यात के साथ सबसे आगे रहा, जबकि इंदौर ने 13,500 करोड़ रुपये और उज्जैन ने 2,288 करोड़ रुपये का निर्यात किया। पिछले छह वर्षों से राज्य का निर्यात लगातार बढ़ा है। 2019-20 में 37,692 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 66,218 करोड़ रुपये तक पहुंचा। सरकार की निवेश मित्र नीतियों, औद्योगिक आधार के विस्तार, निर्यात प्रोत्साहन अधोसंरचना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत संबंधों को इस उपलब्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। FIEO की है रिपोर्ट फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश से 62,180 करोड़ रुपए का माल निर्यात हुआ। इसके अलावा, IT कंपनियों ने भी निर्यात में योगदान दिया है। ये कंपनियां विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में काम करती हैं। इनका योगदान 4,038 करोड़ रुपये रहा। वैश्विक बाजार में मजबूत हो रही स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश ने फॉर्मा, इंजीनियरिंग और सोया उत्पादों के कारण वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है। राज्य सरकार की नीतियों और बेहतर बुनियादी ढांचे ने भी इसमें मदद की है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों ने भी मध्य प्रदेश में रुचि दिखाई है। पिछले साल मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा निर्यात फॉर्मा, पशु आहार, मशीनरी, एल्यूमीनियम और टेक्सटाइल का हुआ था। बांग्लादेश, फ्रांस, UAE और नीदरलैंड प्रमुख बाजार थे। संयुक्त राज्य अमेरिका फार्मा और मशीनरी के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। सबसे अधिक फॉर्मा सेक्टर में निर्यात 2024-25 में मध्य प्रदेश ने 11,968 करोड़ रुपए की फार्मास्युटिकल्स, 6,062 करोड़ रुपए का पशु आहार, 4,795 करोड़ रुपए का एल्यूमीनियम, 4,656 करोड़ रुपए का टेक्सटाइल और 5,497 करोड़ रुपए की मशीनरी का निर्यात किया। धार रहा पहले नंबर पर धार जिला निर्यात में पहले स्थान पर रहा। यहां से 17,830 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इसके बाद इंदौर का नंबर आता है। इंदौर से 13,500 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इंदौर फॉर्मा, ऑटोमेशन और फूड प्रोसेसिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उज्जैन ने भी 2,288 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ अपना रिकॉर्ड तोड़ा है। यहां से औद्योगिक, कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का निर्यात होता है। जानिए कब कितना हुआ निर्यात मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का न‍िर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ. प‍िछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का न‍िर्यात लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ. इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है. धार जिला निर्यात में प्रथम है. यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ, जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ. यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ. उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृष‍ि आधार‍ित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैंय राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है. इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है.  प‍िछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात     2019-20: 37,692 करोड़ रुपए     2020-21: 47,959 करोड़ रुपए     2021-22: 58,407 करोड़ रुपए     2022-23: 65,878 करोड़ रुपए     2023-24: 65,255 करोड़ रुपए     2024-25: 66,218 करोड़ रुपए स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े     धार- 17,830 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ।     इंदौर- 13,500 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ।     उज्जैन- 2,288 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इसमें इंडस्ट्रियल, कृष‍ि आधार‍ित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं।   

माइक्रो फाइनेंस बैंक पर डकैतों का धावा, 12 किलो सोना और ₹5 लाख कैश गायब

 जबलपुर जबलपुर जिले के सिहोरा के खितौला में सोमवार की सुबह पांच बदमाशों ने कट्टे की नोक पर स्माल फायनेंस बैंक (इसाफ बैंक) को लूट लिया। बदमाशों ने बैंक के स्ट्रांग रूम को खुलवाया और उसमें रखा 12 किलो सोना और नकदी लूट कर ले गए। प्रारंभिक जानकारी है कि चार बदमाश बैंक के अंदर गए और उनका एक साथी बैंक के बाहर पहरेदारी कर रहा था। पूरी प्लानिंग से घटना को अंजाम दिया गया। आरोपियों को पकड़ने के लिए आस-पास के सभी थानों को सूचना भेज दी है। जगह-जगह नाकेबंदी की गई है। सिहोरा के खितौला स्थित इसाफ बैंक सुबह 9.30 बजे खुल गया था। कामकाज शुरू हुआ था, उसी समय दो बाइक पर पांच बदमाश पहुंचे। बैंक के भीतर प्रवेश करने के साथ ही चारों बदमाशों ने कट्टा निकाल लिया था। बैंक कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को धमकाते हुए बैंक में एक कमरे में बंद कर दिया। बैंक के मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रख दिया था और जान से मार देने की धमकी देते हुए स्ट्रांग रूम खोलने का दबाव बनाया था। स्ट्रांग रूम खुलवाकर उसमें रखा करीब 12 किलो ग्राम सोना आरोपी ने अपने थैले में भर लिया, सोने के साथ लगभग पांच लाख से अधिक के नोट भी थैले में रख लिए। इसके बाद आरोपी कट्टा लहराते हुए भाग गए। कैसे हुई वारदात? जबलपुर जिले के खितौला (सिहोरा) में यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे हुई है। पुलिस के मुताबिक, बदमाश दो बाइकों पर सवार होकर बैंक पहुंचे थे। चार लोग बैंक में घुसे और एक बाहर पहरेदारी करता रहा। बदमाशों ने बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों को डरा धमकाकर कमरे में बंद कर दिया और मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रखकर स्ट्रांग रूम खोलने को कहा। वहां से 12 किलो सोना और ₹5 लाख नकदी थैलों में भरकर फरार हो गए। पुलिस की कार्रवाई घटना के बाद पुलिस ने बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। आसपास के थानों को अलर्ट कर जगह-जगह नाकेबंदी शुरू कर दी है। लुटेरों के भागने के रूट पर चेकिंग की जा रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासे पुलिस का मानना है कि वारदात पूरी तरह से प्री-प्लान्ड थी। बदमाशों को बैंक के खुलने का समय और स्ट्रांग रूम का लोकेशन पहले से पता था। उनके पास बैंक की रूटीन गतिविधियों की भी पूरी जानकारी थी। यही कारण है कि इतनी आसानी से वह वारदात कर निकल गए। स्थानीय लोगों में दहशत दिनदहाड़े हुई इस डकैती से इलाके में दहशत और आक्रोश है। बैंक के ग्राहकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। शुरुआत में जावकारी सामने आई थी कि, अज्ञात डकैतों ने बैंक से करीब 12 किलो सोना और 5 लाख 70 हजार नकद की लूट की है। लेकिन अब मामले में पुलिस ने पुष्टि करते हुए बताया है कि, 12 नहीं 14 किलो 800 गराम सोना और कुल पांच लाख की लूट हुई है। इस प्रकार बैंक से लूटे गए सोने की अनुमानित कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि, सभी आरोपी अलग-अलग बइकों पर सवार होकर बैंक परिसर तक आए थे। सभी ने हेलमेट लगा रखा था। साथ ही, चेहरे को भी मास्क लगे थे, साथ ही उनके हाथ तक कवर थे। फिलहाल, पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल वारदात की जानकारी लगते ही मौके पर खितौला और सिहोरा पुलिस की टीमें पहुंची और छानबीन शुरू कर दी है। वहीं बैंक में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। खास बात ये है कि, किसी को ये नहीं पता कि, वारदात को अंजाम देकर पांचों बदमाश किस तरफ भागे हैं। लूट की इस सॉनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि, जिले के खितौला या सिहोरा में लगभग हर महीने चोरी की एक न एक वारदात होती रहती है। हाल ही में सिहोरा के बड़े धार्मिक के रूप में पहचान रखने वाले ज्वालामुखी मंदिर में दो दिन पहले ही चोरी की वारदात हुई है, जिसकी जांच अभी चल रही है।  

सिंधिया का जवाब: भारत को डेड इकोनॉमी कहने वालों को दिखाया प्रगति का आईना

भोपाल  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथ्यों के साथ विपक्षी दल कांग्रेस को घेरते रहते हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के हालिया बयानों पर उन्होंने पलटवार किया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डेड इकोनॉमी से लेकर चुनाव आयोग पर हो रहे हमलों तक का जवाब दिया है। देश आगे बढ़ गया है… वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिना किसी के नाम लिए हुए कहा कि जो लोग भारत को मृत अर्थव्यवस्था कह रहे हैं, उन्हें शुभकामनाएं। देश आगे बढ़ गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे कहा कि मुझे उन लोगों से बात नहीं करने दीजिए जो देश के बाहर हैं क्योंकि हर किसी की अपनी राय होती है। लेकिन मुझे लगता है कि यदि आप एक भारतीय हैं और यदि आप एक देशभक्त हैं और आप एक ही शब्द से परिभाषित होते हैं, जिसका उपयोग आप अपने देश के भीतर हर संस्थान के लिए और यहां तक कि अपने देश के लिए भी करते हैं।उन्होंने कहा कि आप चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं और इसे मृत कहते हैं, आप हमारी सशस्त्र बलों की क्षमता को कम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, आप न्यायपालिका का उपहास करते हैं, आप चुनाव आयोग का उपहास उड़ाते हैं। सिंधिया परिवार समर्पण के लिए जाना जाता वहीं, अपने और परिवार पर लगने वाले आरोपों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुझे, या मेरे पिता, या उनसे पहले मेरी दादी को कभी भी महत्वाकांक्षा से परिभाषित नहीं किया गया है। सिंधिया परिवार को हमेशा हमारे समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से परिभाषित किया गया है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आपको जो भी भूमिका सौंपी जाती है, उसे पूरी लगन और क्षमता के साथ निभाना महत्वपूर्ण है। मैंने अपने पूरे करियर में ऐसा किया है, चाहे मैं पहले कांग्रेस में था या आज भाजपा में। सिंधिया ने कहा कि सिंधिया परिवार को हमेशा समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से परिभाषित किया गया है। उन्हें जो भी भूमिका सौंपी जाती है, उसे पूरी लगन और क्षमता के साथ निभाना महत्वपूर्ण है।