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महिलाओं के लिए नई उम्मीद: नीतीश की रोजगार स्कीम लॉन्च, तेजस्वी ने किया अलग योजना का ऐलान

पटना  बिहार में तेजस्वी यादव और कांग्रेस के ‘माई बहिन मान योजना’ वादे के बाद से जिस तरह की संभावना जताई जा रही थी, उसी अनुरूप सीएम नीतीश कुमार ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ शुरू करने की घोषणा कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी और सितंबर से योजना चालू हो जाएगी। महिलाओं की मदद के लिए सरकार इस स्कीम के तहत परिवार की एक औरत को 10 हजार रुपये देगी, जिससे वो अपनी पसंद का रोजगार शुरू कर सके। छह महीने बाद उस महिला के रोजगार का आकलन करके जरूरत हुई तो सरकार 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी करेगी। ‘माई बहिन मान योजना’ में सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये नकद देने का वादा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि महिलाओं के हित में एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है, जिसके सकारात्मक दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत आवेदक महिला को पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये मिलेंगे, जिस राशि से उसे स्व-रोजगार शुरू करना है। सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया है जबकि निगर विकास और आवास विभाग को जरूरत के हिसाब सहयोग देना है। नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अगले महीने यानी सितम्बर 2025 से ही महिलाओं के खाते में फंड ट्रांसफर शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा रोजगार शुरू करने के 6 माह के बाद आकलन करते हुए 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता आवश्यकतानुसार दी जा सकेगी। इसके साथ ही सरकार गांव से शहर तक महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार विकसित करेगी। नीतीश ने उम्मीद जताई है कि इस योजना से न सिर्फ महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी बल्कि राज्य के अंदर ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और मजबूरी में काम के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नीतीश कुमार और उनकी सरकार ने इससे पहले तेजस्वी यादव के ज्यादातर चुनावी वादों पर कुछ ना कुछ ऐक्शन ले रखा है। तेजस्वी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया है तो नीतीश ने 1 अगस्त से 125 यूनिट फ्री बिजली देना शुरू कर दिया है। सरकारी नौकरी पर दोनों के बीच श्रेय की लड़ाई चल ही रही थी कि जुलाई में नीतीश कैबिनेट ने अगले पांच साल में एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का संकल्प पास कर दिया। नीतीश सरकार ने जून में वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया। तेजस्वी ने सरकार बनने पर 1500 करने का वादा किया है। तेजस्वी ने सरकारी नौकरियों में 100 फीसदी डोमिसाइल नीति का वादा किया है तो नीतीश कैबिनेट ने 5 अगस्त को शिक्षक बहाली में 84.4 फीसदी पद बिहार के निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया। 60 परसेंट जातीय आरक्षण के ऊपर नीतीश ने इससे पहले ही अनारक्षित 40 फीसदी पदों के अंदर 35 फीसदी पद बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया था, जिससे प्रभावी डोमिसाइल 74 फीसदी तक पहुंच गया था। अनारक्षित कोटे में बची 65 फीसदी सीटों पर अगस्त में 40 फीसदी पद बिहार से मैट्रिक या इंटर करने वालों के लिए रिजर्व कर दिया गया था, बोर्ड चाहे कोई भी हो।

भारत की पहली प्रदूषण-रहित ट्रेन का आगाज, हरियाणा से होगी शुरुआत

हरियाणा  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर सितंबर 2025 में ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, और यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है।  इसे भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल कदम है। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न की जाती है, जिसमें पानी और भाप खर्च होती है। इसका कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण-मुक्त है।    यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली होगी जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है. अन्य देशों (जैसे जर्मनी) की हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 500-600 हॉर्सपावर की होती हैं। ट्रेन में 8 यात्री कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है. 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। किलो हाइड्रोजन इस ट्रेन को 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देता है. 8-10 कोच खींचने के लिए 2.4 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ट्रेन में दो पावर प्लांट लगाए गए हैं।    ट्रेन का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, जो 1955 में स्थापित भारत की पहली कोच उत्पादन इकाई है. ट्रेन का डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है. भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत 35 ऐसी ट्रेनों के लिए 2,800 करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।   

बेरोजगारों के लिए खुशखबरी: MP में महीने के ₹1500 पाने का आसान तरीका

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए एमपी बेरोजगारी भत्ता योजना 2025 शुरू की है। इस योजना के तहत योग्य आवेदकों को हर महीने ₹1,500 की सहायता राशि दी जाएगी, जिससे वे नौकरी की तलाश के दौरान अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकें और कौशल विकास पर ध्यान दे सकें। योजना के मुख्य लाभ आर्थिक सहयोग से युवाओं को नौकरी की तैयारी में मदद। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और आसान। योग्य उम्मीदवारों को समय पर सीधा बैंक खाते में राशि का ट्रांसफर। पात्रता मानदंड इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदक को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी: मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। आयु 21 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास। परिवार की वार्षिक आय ₹3 लाख से कम होनी चाहिए। वर्तमान में किसी भी प्रकार की नौकरी में न हों। आवश्यक दस्तावेज़ आवेदन के समय इन कागज़ों की जरूरत होगी: आधार कार्ड पैन कार्ड निवास प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र 12वीं की मार्कशीट बैंक खाता विवरण पासपोर्ट साइज़ फोटो मोबाइल नंबर जन्म प्रमाण पत्र आवेदन की प्रक्रिया एमपी रोजगार पोर्टल पर जाएं। "नया पंजीकरण" विकल्प चुनें। मांगी गई जानकारी को सही तरीके से भरें। आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। आवेदन सबमिट कर भविष्य के लिए रसीद सुरक्षित रखें।

मानसून में बंद हवाई सफर दोबारा शुरू, भोपाल एयरपोर्ट से Indigo-Air India Express की नई उड़ानें

भोपाल  मानसून के कारण दो महीने पहले बंद हुई उड़ानें फिर से शुरू होंगी। इंडिगो ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को इसकी सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि दिल्ली, बेंगलुरू तक अतिरिक्त उड़ान फिर से शुरू होगी। रायपुर उड़ान जल्द ही प्रतिदिन संचालित होगी। उड़ानें बढ़ने से किराये में भी कमी हो सकती है। मानसून के दौरान यात्रियों की संख्या कम होने के कारण एयरलाइंस कंपनियां उड़ानों को री-शेड्यूल कर देती हैं। जहां अधिक यात्री मिलते हैं वहां अतिरिक्त उड़ानें संचालित की जाती हैं। इस बार भी दो माह पहले भोपाल से दिल्ली, बेंगलुरू तक उड़ानें कम हो गई थीं। रायपुर उड़ान को सप्ताह में सात दिन से कम कर तीन दिन कर दिया गया था। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि 21 सितंबर से दिल्ली की दोपहर की उड़ान फिर से शुरू हो जाएगी। बैंगलुरू मार्निग उड़ान इसी दिन से सप्ताह के सभी सात दिन संचालित होगी। रायपुर उड़ान भी सप्ताह के सभी सातों दिन संचालित होंगी। विंटर में बढ़ेगी एयर कनेक्टिविटीअक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लागू हो रहे विंटर शेड्यूल में भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बेंगलुरू, हैदराबाद एवं मुंबई रूट पर उड़ानें शुरू करने के साथ भोपाल में दस्तक देने की तैयारी की है। इंडिगो भी गोवा, नवीं मुंबई एवं नोएडा तक उड़ान शुरू कर सकता है। रीजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत फ्लायबिग रीवा एवं दतिया उड़ान शुरू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में भोपाल से प्रतिदिन साढ़े तीन से चार हजार यात्री सफर करते हैं। विंटर शेड्यूल में यह संख्या पांच हजार से अधिक हो सकती है।

राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन MP में, 15 खेल होंगे शामिल, शेड्यूल जारी

भोपाल स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया ने 69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के आयोजन में मध्यप्रदेश को 15 खेल विधाओं की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन का दायित्व सौंपा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल और तिथियों का निर्धारण कर दिया है। क्र. प्रतियोगिता का नाम आयु वर्ग आयोजन स्थल प्रस्तावित तिथि वर्ष 2025-26 1. वॉलीवाल 19 बालक/बालिका गाडरवाड़ा (नरसिंहपुर) 13 से 17 नवम्बर 2. मलखम्ब 14, 17, 19 बालक/बालिका उज्जैन 24 से 28 नवम्बर 3. फुटबाल 14 बालक उमरिया 01 से 06 दिसम्बर 4. एथेलेटिक्स 14 बालक/बालिका इंदौर 01 से 04 दिसम्बर 5. रायफल शूटिंग 17 बालक/बालिका इंदौर 06 से 09 दिसम्बर 6. सॉफ्ट टेनिस 14, 17, 19 बालक/बालिका देवास 11 से 14 दिसम्बर 7. स्कवॉश 19 बालक/बालिका इंदौर 11 से 13 दिसम्बर 8. कराते 14 बालक/बालिका इंदौर 15 से 19 दिसम्बर 9. स्केटिंग 11, 14, 17, 19 बालक/बालिका ग्वालियर 15 से 20 दिसम्बर 10. बैडमिंटन 14 बालक/बालिका सागर 17 से 21 दिसम्बर 11. बॉस्केटबॉल 14 बालिका शहडोल 19 से 23 दिसम्बर 12. हॉकी 14 बालक टीकमगढ़ 22 से 27 दिसम्बर 13. बॉस्केटबॉल 14 बालक जबलपुर 23 से 28 दिसम्बर 14. खो-खो 19 बालक/बालिका जबलपुर 23 से 28 दिसम्बर 15. बॉक्सिंग 14 बालक गुना 26 से 31 दिसम्बर 16. रायफल शूटिंग 14, 19 बालक/बालिका भोपाल 05 से 09 जनवरी, 2026 17. क्रिकेट 19 बालिका शिवपुरी 01 से 06 जनवरी 18. हॉकी 14, 19 बालिका ग्वालियर 02 से 07 जनवरी

अब अस्पतालों में नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज, 1 सितंबर से लागू होगा नया नियम

भोपाल  मध्यप्रदेश में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निजी बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच भुगतान को लेकर चल रहे विवाद का असर सीधे बीमाधारकों पर पड़ने वाला है। एक सितंबर से दो प्रमुख बीमा कंपनियों के बीमाधारकों का कैशलेस इलाज प्रदेश के अस्पतालों में नहीं हो पाएगा। बीमाधारकों की चिंता अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच खींचतान का खामियाजा बीमाधारक मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इलाज के लिए उन्हें अपनी जेब से नकद भुगतान करना होगा। प्रदेश में करीब 30 लाख लोग निजी कंपनियों के हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में आते हैं। इनमें ज्यादातर पॉलिसियां 3 से 5 लाख रुपए तक की हैं। क्यों मचा विवाद? हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट की दरें बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। जबकि अस्पतालों का कहना है कि इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बीमा कंपनियां भुगतान कम कर रही हैं और क्लेम सेटलमेंट में देरी भी कर रही हैं। इसी कारण एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया ने अपने 15,000 सदस्य अस्पतालों को बजाज एलायंज जैसी कंपनियों के ग्राहकों का कैशलेस इलाज रोकने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों का तर्क अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां कैशलेस इलाज के बाद क्लेम पास करने में काफी समय लगाती हैं। बीमा कंपनियां ट्रीटमेंट की लागत घटाकर या कुछ चार्जेस को नॉन-पेएबल बता कर रकम कम कर देती हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि कई बार मरीज के छुट्टी लेने के हफ्तों बाद भी बीमा कंपनी से पूरा क्लेम नहीं मिलता। कभी राशि कम मिलती है तो कभी विवाद में फंसी रहती है। इससे अस्पतालों की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है और वे कैशलेस सुविधा देने में हिचकिचाने लगते हैं। अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियों के दबाव में वे घाटे में इलाज नहीं कर सकते। सरकारी कंपनियों में राहत विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां न्यू इंडिया इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस की कैशलेस सुविधा फिलहाल जारी रहेगी। इन कंपनियों में क्लेम कटौती और देरी जैसी समस्या कम देखने को मिलती है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अक्सर अस्पताल इलाज की वास्तविक लागत और अतिरिक्त चार्जेस छिपाते हैं। वहीं, बीमा कंपनियों का टैरिफ घटाने का दबाव भी विवाद को बढ़ा रहा है। ऐसे हालात में बीमाधारकों की साख और भरोसा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं को हटाने के मामले में सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें बेदखल करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के 30 मई के फैसले पर रोक लगाते हुए दिया गया, जिसमें शरणार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शरणार्थियों की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और एक-पक्षीय अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। विष्णु शंकर जैन के मुताबिक, दिल्ली के 'मजनू का टीला' इलाके में एक हजार से अधिक पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी रह रहे थे। डीडीए ने इन परिवारों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। शरणार्थियों ने डीडीए के नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी, लेकिन राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने शरणार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने बताया, "पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार इस मामले में कोई स्पष्ट नीति नहीं बना पा रही है और नीति निर्माण कोर्ट का कार्यक्षेत्र नहीं है, इसलिए अदालत कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं कर सकती।" अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि यह सबसे अहम है कि जब यह मामला पहली बार हाईकोर्ट पहुंचा था, तो कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। अब केंद्र सरकार की नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत यह स्पष्ट नीति है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान से भारत आए सभी विस्थापित हिंदुओं को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। जैसे ही किसी को नागरिकता मिलती है, संविधान का अनुच्छेद 21, जीवन और सम्मान का अधिकार, उन पर लागू हो जाता है।

एसआरएस ग्रुप घोटाला: भगोड़े प्रमोटरों पर गुरुग्राम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई

गुरुग्राम गुरुग्राम की विशेष अदालत (पीएमएलए) ने एसआरएस ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर) को नोटिस जारी किया है। विशेष अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत एसआरएस ग्रुप की कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों को यह नोटिस जारी किया है। ईडी के अनुसार, यह नोटिस धारा 4, एफईओए, 2018 के तहत दायर एक आवेदन के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें इन आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों, सहयोगियों और उनकी 212.73 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है। एसआरएस ग्रुप रियल एस्टेट और वित्तीय व्यवसाय में सक्रिय था। इन प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति का आपराधिक दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसे अपराधों का आरोप है, जिसमें उन्होंने होमबायर्स, प्लॉट खरीदारों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को ठगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली ईओडब्ल्यू और सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज लगभग 81 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल, प्रवीण कुमार कपूर और एसआरएस ग्रुप के अन्य निदेशकों तथा प्रमुख कर्मचारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। इन लोगों ने निवेश के नाम पर जनता और बैंकों से लगभग 2200 करोड़ रुपए की भारी राशि इकट्ठा की और हाई रिटर्न का वादा करके निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। ईडी की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों और कंपनियों की पहचान की गई। जांच में पाया गया कि जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे, जिसके बाद 2022 में इस मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। ईडी ने अपराध से प्राप्त संपत्तियों की पहचान की और अब तक इस मामले में 2215.98 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया गया है। ईडी की जांच से पता चला है कि तीनों आरोपी (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार) भारत छोड़ चुके हैं, जो जॉर्जिया, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहे हैं। ये आरोपी आपराधिक मुकदमे का सामना न करने के लिए भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं। सभी भगोड़ों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट, लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। इससे पहले, 6 जून 2025 को विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित किया था। वर्तमान में जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया गुरुग्राम की विशेष अदालत में चल रही है।

बाढ़ पीड़ितों को राहत, मान सरकार ने की विशेष घोषणा

चंडीगढ़  पंजाब के कई जिले इस समय भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राहत कार्यों को तेज़ करते हुए बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में मिलेगा सुरक्षित आश्रय सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी दी कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे बुजुर्गों को तत्काल बचाकर पास के वृद्धाश्रमों में पहुँचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 41 वृद्धाश्रम हैं, जिनमें 572 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है और इस क्षमता को 700 तक बढ़ाया जा सकता है। मानसा में तैयार हुआ नया वृद्धाश्रम पहले से ही चालू कर दिया गया है, जिससे राहत कार्यों में तेजी आ सके। बच्चों के लिए अनाथालय और आंगनवाड़ी केंद्र तैयार सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के बच्चों को अस्थायी रूप से अनाथालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में रखा जाएगा। यदि कोई बच्चा अपनी माँ के साथ रहना चाहे तो उसके लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खिचड़ी और दलिया जैसी आसान पचने वाली खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए 'सखी' सेंटर खुलेंगे डॉ. कौर ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में चल रहे 'सखी – वन स्टॉप सेंटर' को गर्भवती महिलाओं के लिए खोला जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सके। साथ ही, महिलाओं को सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की अपील राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे राहत कार्यों में सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन से संपर्क करें। राहत टीमों को 24 घंटे के लिए सक्रिय रखा गया है।

हरियाणा में महंगी स्कूली पढ़ाई पर सुरजेवाला का तंज– ‘ये है सैनी का शिक्षा मॉडल’

चंडीगढ़ कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार की एजेंसी 'राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण' (NSS) की रिपोर्ट- 2025 के मुताबिक ही हरियाणा में स्कूली शिक्षा, देशभर के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा महंगी है। इस संबध में सुरजेवाला ने अपने x पर पोस्ट शेयर करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया ।  राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 80वें दौर के व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण: शिक्षा, 2025 के अनुसार, हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान स्कूली शिक्षा पर प्रति छात्र औसत खर्च 25,720 रुपये है, जो चंडीगढ़ के बाद दूसरे स्थान पर है और राष्ट्रीय औसत से दोगुना से भी ज़्यादा है। चंडीगढ़ में स्कूली शिक्षा पर प्रति शैक्षणिक वर्ष 49,711 रुपये खर्च होते हैं। पंजाब (22,692 रुपये) और हिमाचल प्रदेश (18,305 रुपये) के मामलों में, यह राशि काफी कम है। राष्ट्रीय औसत 12,616 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है।  हरियाणा में स्कूली शिक्षा पर लड़कों पर होने वाला खर्च लड़कियों की तुलना में अधिक है। लड़कों के लिए वार्षिक खर्च 27,697 रुपये और लड़कियों के लिए 23,465 रुपये है।राज्य के सरकारी स्कूलों में, बच्चों की स्कूली शिक्षा पर होने वाला खर्च काफी कम यानी 4,479 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है। हालाँकि, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह खर्च बढ़कर 48,636 रुपये हो जाता है, और निजी-गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए यह 39,015 रुपये है।   हरियाणा में निजी संस्थानों में पढ़ने वाले स्कूली छात्रों की संख्या ज़्यादा है। यहाँ 41.2 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में, 11.9 प्रतिशत निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में और 45.7 प्रतिशत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों (मान्यता प्राप्त) में नामांकित हैं। हरियाणा में प्रति छात्र औसत व्यय की मदवार जाँच करने पर पता चला कि पाठ्यक्रम शुल्क पर 16,405 रुपये (63.8 प्रतिशत) खर्च किए गए। इसकी तुलना में, परिवहन पर 3,633 रुपये (14.2 प्रतिशत) खर्च किए गए; यूनिफ़ॉर्म पर 1,966 रुपये (7.6 प्रतिशत), पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी पर 2,852 रुपये (11.1 प्रतिशत) और अन्य खर्चों पर 865 रुपये (3.4 प्रतिशत) खर्च किए गए। हरियाणा में निजी कोचिंग का चलन राष्ट्रीय औसत से कम है। हरियाणा में विभिन्न स्तरों पर, चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान केवल 11 प्रतिशत छात्र निजी कोचिंग ले रहे थे या ले चुके थे। पूरे भारत में यह आँकड़ा 27 प्रतिशत था, जबकि चंडीगढ़ में यह 32.9 प्रतिशत और पंजाब में 26.8 प्रतिशत था। हिमाचल प्रदेश में यह दर हरियाणा से कम यानी 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इस सर्वेक्षण में कौशल विकास, कला, नृत्य, संगीत कक्षाओं जैसी पाठ्येतर गतिविधियों और खेलों के लिए कोचिंग को शामिल नहीं किया गया। हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान प्रति छात्र निजी कोचिंग पर औसत खर्च 1,366 रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह और भी कम यानी 437 रुपये है। चंडीगढ़ में यह 5,650 रुपये और पंजाब में 1,732 रुपये है। अखिल भारतीय औसत 2,409 रुपये है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर, हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में निजी कोचिंग पर औसत खर्च 7,857 रुपये था, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आँकड़ा 9,950 रुपये था। चंडीगढ़ में कोचिंग के लिए यहश में एक शैक्षणिक वर्ष के लिए मात्र 1,135 रुपये थी।  20,688 रुपये, पंजाब में 2,307 रुपये और हिमाचल प्रदे