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अब UDISE+ पोर्टल पर दिखेगी छात्रों की बायोमेट्रिक अपडेट स्थिति

भोपाल प्रदेश में स्कूल के विद्यार्थियों के आधार कार्ड स्कूल में ही तैयार करने और अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) को सुगम बनाने के लिए “विद्यार्थियों के लिए आधार, अब स्कूल के द्वार” अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में अब सभी सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को UDISE+ पोर्टल पर अपने विद्यार्थियों के लंबित बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी उपलब्ध होगी। विद्यार्थियों के एमबीयू को और सुगम बनाने के लिए, यूआईडीएआई और भारत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तकनीकी टीमों ने UDISE+ पोर्टल के माध्यम से यह नया समाधान लागू किया है। यह अभियान वर्तमान में प्रदेश के 44 जिलों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और शीघ्र ही शेष 11 जिलों में भी शुरू होगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट सुनिश्चित करना है, जिसमें उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और तस्वीर शामिल हैं। अपडेटेड आधार विद्यार्थियों के लिए स्कूल प्रवेश, प्रवेश परीक्षाओं, छात्रवृत्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजनाओं जैसी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों को निर्देश जारी किये हैं कि वे इस पोर्टल का उपयोग कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों के आधार अपडेट सुनिश्चित करें। विद्यार्थी इस अभियान के तहत स्कूलों में आयोजित शिविर या निकटतम आधार सेवा केंद्र पर जाकर अपने एमबीयू पूर्ण कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आधार में पहला अपडेट तब आवश्यक है जब बच्चा 5 वर्ष का हो जाए। पहला एमबीयू 5 से 7 वर्ष की आयु के बीच पूरा होने पर निःशुल्क है। सात वर्ष से अधिक आयु होने पर शुल्क लागू होगा। दूसरा एमबीयू 15 वर्ष की आयु पर आवश्यक है। तीसरा एमबीयू 15 से 17 वर्ष की आयु के बीच निःशुल्क है, लेकिन 17 वर्ष के बाद शुल्क लागू होगा। यह अभियान विद्यार्थियों को समय पर आधार अपडेट की सुविधा प्रदान कर उनकी शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने की प्रक्रिया को और सरल बनाएगा।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: भोपाल ओवरब्रिज विवाद की जांच अब मैनिट प्रोफेसर करेंगे

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल के बहुचर्चित 90 डिग्री ओवरब्रिज मामले में ठेकेदार कंपनी मेसर्स पुनीत चड्ढा को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ओवरब्रिज की जांच मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) भोपाल के वरिष्ठ प्रोफेसर से कराई जाए और 10 सितंबर तक रिपोर्ट पेश की जाए। याचिका में ठेकेदार ने दलील दी कि निर्माण पूरी तरह से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों द्वारा दी गई डिजाइन के आधार पर हुआ। इसलिए कंपनी को दोष देना अनुचित है, जबकि विभागीय जांच में दोषी अफसरों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। कोर्ट ने भी असलियत सामने लाने के लिए स्वतंत्र तकनीकी जांच का आदेश दिया। जांच का खर्च (करीब एक लाख रुपये) फिलहाल ठेकेदार वहन करेगा।   क्या है पूरा मामला? 145 करोड़ की लागत से बने ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज को अगस्त 2023 में यातायात के लिए खोला गया। इसके बाद 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। मुख्यमंत्री के आदेश पर 8 इंजीनियर निलंबित हुए, जिनमें 2 मुख्य अभियंता भी शामिल। पुल बनाने वाली कंपनी और डिजाइन कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट किया गया। सरकार ने घोषणा की कि पुल को रीडिजाइन कर सुधारा जाएगा और रेलवे भी इसके लिए अतिरिक्त जमीन देगा।

समेकित और सतत प्रयास से मातृ और शिशु मृत्यु दर में सुधार में प्रदेश अग्रणी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के 4 करोड़ 50 लाख नागरिकों को आयुष्मान योजना ने सशक्त बनाया है। आज गरीब व्यक्ति बड़े से बड़े अस्पताल में अपना इलाज मुफ्त में करवा पा रहा है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में सुधार में प्रदेश अग्रणी है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य अमले की समर्पित सेवा और सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने के दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कृषि में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ा है, सड़कों के मामले में महाराष्ट्र गुजरात को उसी प्रकार दृढ़ संकल्प से हम स्वास्थ्य के मामले में केरल और तमिलनाडु जैसे परफॉर्मेंस वाले राज्यों के साथ अग्रणी सूची में शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दमोह के हटा में निजी चिकित्सालय का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हटा में ऐसे अस्पताल का शुभारंभ हो रहा है जो सेवा की भावना से बनाया गया है, पीड़ित मानवता की सेवा के लिए यह अस्पताल बनाया गया है। आयुष्मान धारकों के इलाज के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 9 हजार 800 करोड़ रूपये का भुगतान सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल के लिये किया है। आयुष्मान योजना से जनता की भुगतान करने की क्षमता बढ़ गयी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के साथ निजी क्षेत्र भी ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ संस्थानों का निर्माण कर सेवाओं को सुदृढ़ करने में सहभागी बन रहे हैं। उन्होने कहा कि टियर-2 तो टियर-3 शहरी क्षेत्रों में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा उपलब्ध हो इसके सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया गया है। नियमित एएनसी जाँच के लिए नागरिकों को करें जागरूक उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश बेस्ट परफॉर्मिंग राज्य के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, प्रदेश में तेजी से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर वीडियो कॉल के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से बात करके लोगों का इलाज कर रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में इस सुविधा से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से इलाज की सुविधा मिल रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर की समुचित उपलब्धता के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि जिला अस्पताल की तरह हमारे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी चलने लगे, जिससे जिला अस्पतालों में भीड़ कम होगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हर गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन और हर 3 महीने में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) आवश्यक है। इससे हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का समय से चिन्हांकन हो जाता है और समय से आवश्यक निदान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने 9 और 25 तारीख को एएनसी जांच होती है, मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक इसका लाभ लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें। पशुपालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना का सतत विस्तार कर रही है। शीघ्र ही प्रदेश में 50 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। हर क्षेत्र में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्य मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने हटा में अस्पताल खोलने के लिए बधाई दी। विधायक हटा श्रीमती उमा देवी खटीक, कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर, पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

मेरठवासियों को मिली सौगात, अयोध्या-वाराणसी तक मिलेगी वंदे भारत की तेज रफ्तार सुविधा

मेरठ मेरठ से वाराणसी और अयोध्या के लिए सफर अब और आरामदायक हो गया है, जहां इस इस रूट पर अब वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू हो गई है। इस ट्रेन को लोगों को लंबे समय से इंतजार था और उनका इंतजार अब खत्म हो गया है। राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज है, जहां 29 अगस्त के लिए इस ट्रेन की सबसे ज्यादा बुकिंग की गई है। ट्रेन नंबर 22490 वंदे भारत एक्सप्रेस बुधवार सुबह छह बजकर 35 मिनट पर मेरठ से रवाना हुई, जबकि ट्रेन नंबर 22489 वाराणसी से सुबह नौ बजकर दस मिनट पर मेरठ के लिए चली। बता दें कि पहले यह ट्रेन मेरठ से लखनऊ के लिए चलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर वाराणसी तक बढ़ा दिया गया है।   ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज मंगलवार की शाम तक 27 अगस्त के लिए मेरठ से अयोध्या के लिए 69 और बनारस के लिए 18 लोगों ने चेयरकार श्रेणी में सीटें रिजर्व कराईं। इसके अलावा मेरठ से बनारस के एग्जिक्यूटिव श्रेणी में तीन रिजर्वेशन हुए हैं। बता दें कि लखनऊ तक चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस को अयोध्या और वाराणसी से जोड़ने के लिए दैनिक जागरण ने काफी प्रयास किए थे और समय-समय पर इस मांग को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया और एक महीने पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन को अयोध्या और वाराणसी तक विस्तारित करने पर हरी झंडी दे दी थी। 29 अगस्त को सबसे ज्यादा बुकिंग मंगलवार की शाम तक पहले दिन ट्रेन में चेयरकार श्रेणी में कुल 478 सीटों में 281 सीटें बुक हुई हैं। एग्जिक्यूटिव श्रेणी में कुल 52 सीटों में 27 बुक हैं। 29 अगस्त के लिए ट्रेन में सबसे ज्यादा बुकिंग है, जहां चेयरकार में 291 सीटें बुक हैं। इसी दिन ट्रेन का एग्जिक्यूटिव कोच पूरी तरह बुक है, जिसमे एक वेटिंग चल रही है। भारतीय रेलवे ने ट्रेन का संशोधित टाइम टेबल भी जारी कर दिया है, जहां ट्रेन का मेरठ से चलने और लखनऊ पहुंचने के समय में कोई परिवर्तन नहीं है। लेकिन 27 अगस्त से ट्रेन लखनऊ से वर्तमान समय 2:45 की जगह 1:50 बजे मेरठ के लिए प्रस्थान करेगी।

आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा फैसला, 6 महीने से कम उम्र के पिल्लों पर नसबंदी नहीं

जयपुर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को आधार मानते हुए आवारा कुत्तों के मानवीय प्रबंधन हेतु नई 13 सूत्री गाइड लाइन जारी की है। स्वायत्त शासन विभाग ने इसे सभी नगरीय निकायों में 30 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं। नियमों के अनुसार अब राज्य में 6 महीने से छोटे कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाएगी। इसी तरह दूध पिलाने वाली मादा को तब तक पकड़ने पर रोक रहेगी, जब तक उनके पिल्ले प्राकृतिक रूप से दूध छोड़ न दें। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए तार, फंदा या टोंग्स का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल प्रशिक्षित कर्मचारी ही कुत्तों को सुरक्षित जाल या हाथ से पकड़ सकेंगे। प्रत्येक वार्ड में निर्धारित भोजन स्थल बनाए जाएंगे। इसके अलावा नसबंदी केंद्रों का नवीनीकरण और नई सुविधाओं जैसे टीकाकरण और डीवार्मिंग की व्यवस्था होगी। कुत्तों को पकड़ने और देखभाल का जिम्मा केवल एडब्ल्यूबीआई से मान्यता प्राप्त एनजीओ को दिया जाएगा, जिन्हें प्रति कुत्ता 200 से 1450 रुपए तक भुगतान होगा। हर नगर निकाय में निगरानी समिति बनाई जाएगी, जिसमें पशु कार्यकर्ता की मौजूदगी अनिवार्य होगी। सभी प्रक्रियाओं की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और 30 दिन का फुटेज रखना होगा। बीमार या घायल कुत्तों का पहले इलाज किया जाएगा, उसके बाद ही नसबंदी होगी। यूडीएच शासन सचिव रवि जैन ने कहा कि यह नीति लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को संतुलित करेगी। उल्लंघन करने पर पशु जन्म नियंत्रण नियम 2003 के तहत कार्रवाई होगी। नई गाइड लाइन से राज्य में आवारा कुत्तों के प्रति मानवीय व्यवहार और जनता की सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।

किला चौक से टाउन हॉल तक दतिया बाजार होगा गुलाबी, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

दतिया  दतिया शहर में किला चौक से लेकर टाउन हॉल तक का मुख्य बाजार क्षेत्र अब गुलाबी रंग (Pink Market) में नजर जाएगा। नगर पालिका के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल शहर की सुंदरता बढ़ाने और पर्यटकों व स्थानीय लोगों के लिए आकर्षक माहौल बनाने के उद्देश्य से प्रशासन एवं व्यापारियों के समन्वय से की जा रही है। स्थानीय दुकानदार मेडिकल स्टोर संचालक कृष भंवानी, रेडीमेड वस्त्र विक्रेता लक्ष्मणदास कुकरेजा, शू स्टोर संचालक बाबू सीलानी के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राजू त्यागी ने सामूहिक रूप से बताया कि इस बदलाव से नगर में रमणीकता आने के अलावा व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। शहर की बनेगी पहचान प्रशासन एवं व्यापारियों ने साफ-सुथरी सडक़ों, फुटपाथ और हरियाली बढ़ाने की योजनाओं के साथ यह रंगाई अभियान अगले एक माह में पूरा करने का निर्णय लिया है। शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है और उमीद जताई है कि दतिया का यह गुलाबी बाजार शहर की नई पहचान बनेगा। चौड़ी हुई सडकें शहर की सड़कें अतिक्रमण के चलते 10 से 12 फीट सिकुड़ गई थीं। प्रशासन द्वारा चलाए गए अभियान के बाद टॉउनहॉल से किला चौक तक सड़क के दोनों ओर से छह-छह फीट अतिक्रमण हट गया है। ऐसे में सडक़ 12 फीट चौड़ी हो गई हैं। अब लोगों के लिए आवागमन सुगम हो गया है। लिहाजा जाम में फंसे रहने की समस्या से निजात मिल गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आगामी दीपावली पर बाजार अच्छे चलने का अनुमान लगाया है। दुकानों की रंगाई शुरू इस रंगाई अभियान के साथ, बाज़ार के दुकानदारों ने यह संकल्प लिया है कि वे अपनी दुकानों का सामान तय सीमा में ही रखेंगे। नाले व नालियों पर अतिक्रमण कर सामग्री नहीं रखेंगे। इसका उद्देश्य बाज़ार में लोगों के लिए चलने-फिरने की सुविधाजनक जगह सुनिश्चित करना है। व्यापारियों द्वारा यह संकल्प पत्र कलेक्टर स्पप्निल वानखड़े को दिए जाने की तैयारी की जा रही है। दूसरे क्षेत्रों में चलाए जाएंगे अभियान- एसडीएम दतिया एसडीएम संतोष तिवारी ने कहा कि शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने की कवायद है। अतिक्रमण हटने से सड़क चौड़ी हो गई है, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। नगर के दूसरे हिस्सों में भी यह अभियान चलाए जाने की तैयारी है।

साइबर खतरा बढ़ा: मध्य प्रदेश में हर 10 मिनट में हो रहे हमले, युवा प्रभावित

भोपाल  मध्य प्रदेश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। हर 10 मिनट में एक नया मामला सामने आ रहा है। इन अपराधों में 70% शिकार युवा हैं। 2022 से 2025 के बीच 3 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। इनमें मोबाइल हैकिंग, फर्जी कॉल और ऑनलाइन पेमेंट फ्रॉड शामिल हैं। साइबर सेल लगातार निगरानी रख रहा है और जागरूकता अभियान चला रहा है। सरकार ने साइबर अपराध से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है। अलग अलग तरीकों से हो रही ठगी राज्य में ऑनलाइन शॉपिंग, क्यूआर कोड और फर्जी लोन जैसे तरीकों से ठगी हो रही है। जागरूकता अभियान चलाने के बाद भी लोग ठगों के जाल में फंस रहे हैं। साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। एसपी साइबर प्रणय नागवंशी ने कहा, 'हमारी अपील है कि लोग किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपनी बैंक डिटेल किसी को शेयर करें। साइबर सेल लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है और हम जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं। सरकार ने शुरु किया हेल्पलाइन नंबर 2022 में 1021 केस दर्ज हुए, जिनमें 717 युवा थे। 2023 में 927 मामले आये, जिनमें 700 युवा थे। 2024 में 1082 केस दर्ज हुए, जिनमें 703 युवा थे। 2025 में 511 केस दर्ज हुए, जिनमें 344 युवा शामिल हैं। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है। इसके अलावा, साइबर जोनल कार्यालय भी बन रहे हैं। पासवर्ड रखते में रखें विशेष ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि पासवर्ड कम से कम 12 अंकों का होना चाहिए और इसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। साइबर ठगी अब गांवों तक पहुंच गई है। ठग सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। सावधानी बरतने से ही बचाव हो सकता है। संदिग्ध कॉल आने पर उसे ब्लॉक करें और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। तकनीक का इस्तेमाल सावधानी से करें। जरा सी चूक से आपकी कमाई ठगों के खाते में जा सकती है।  

प्रदेश के हर कोर्ट में बंपर भर्ती की तैयारी, जांच अधिकारियों को लैपटॉप मिलेगा

भोपाल  जनता व सरकार कोर्ट में न्याय की लड़ाई न हारे, इसके लिए प्रत्येक कोर्ट में लोक अभियोजक, लोक अभियोजन अधिकार व अन्य अधिकारी, कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। ये भर्तियां 610 पदों (Bumper Recruitment in MP) पर होंगी। नए आपराधिक कानूनों के तहत मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए जीपीएस आधारित 25 हजार टैबलेट खरीदे जाएंगे, ये जांच अधिकारियों को देंगे। पहले चरण में 1732 टैबलेट की खरीदी होगी। बता दें कि प्रदेशके मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार 26 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सीसीटीएनएस पर खर्च बढ़ा क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एण्ड सिस्टम (सीसीटीएनएस) प्रोजेक्ट के तहत काम हो रहा है। पूर्व में इसकी लागत 5 वर्ष के लिए 102 करोड़ 88 लाख थी, जिसे बढ़ाकर 177 करोड़ 87 लाख 51 हजार करने की स्वीकृति दी है। इसी के तहत जीपीएस आधारित टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही मॉडर्न पुलिसिंग को लेकर भी सरकार जल्द कई नए अत्याधुनिक उपकरणों की खरीदारी करेगी। अब जनता चुनेगी अध्यक्ष: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकायों के चुनावों में अध्यक्षों को चुनने के अधिकार सीधे जनता को देंगे। बीच का झंझट ही खत्म करेंगे, ताकि कोई विरोधाभास वाली स्थिति ही पैदा न हो। कैबिनेट बैठक में सीएम डॉ. यादव ने कहा कि गणेश चतुर्थी हो या नवदुर्गा उत्सव, सभी को भव्यता के साथ मनाएंगे। इसके लिए क्षेत्र में जनता को प्रेरित किया जाए। यह तय हो कि हमारे उत्सव में हमारे प्रदेश व देश के अपने लोगों द्वारा तैयार सामग्री का ही उपयोग हो। जनता को स्वदेशी वस्तु की उपयोगिता व वर्तमान महत्व को समझाया जाए। मूर्ति निर्माण में मिट्टी और लुगदी को प्राथमिकता दी जाए। सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों सहित घरों में होने वाले पूजा-पाठ में स्वदेशी वस्त्र और साज-सज्जा की सामग्री का उपयोग हो। इससे छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। अतिरिक्त लोक अभियोजक के 185 पद, अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी के 255, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी के 100 और सहायक कर्मचारियों के 70 पदों को स्वीकृति दी है। तीन वर्ष में इन पदों पर भर्ती व वेतन आदि पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। खरीदेंगे चार हजार मेगावॉट बिजली सरकार केंद्र की ग्रीनशू चार हजार मेगावॉट बिजली खरीदेगी। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह तीन प्रस्तावित नवीन ताप विद्युत परियोजनाओं से क्रमश 800, 1600 व 800 मेगावॉट खरीदी जाएगी। बिजली की यह खरीदी प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर होगी। इसके लिए एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को अधिकृत किया है। पीएचई 100 मेगावाट का सौर ऊर्जा व 60 मेगावाट का पवन ऊर्जा प्लांट लगाएगा पीएचई सौर व पवन ऊर्जा प्लांट लगाएगा। इससे नल-जल योजना संचालित की जाएंगी। सौर ऊर्जा प्लांट 100 व पवन ऊर्जा प्लांट 60 मेगावाट का होगा।

मध्यप्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक के लिए आज 28 अगस्त को बुलाया

भोपाल  मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार ने आज 28 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट ने टॉप ऑफ द बोर्ड को भेजा है, जो 28 अगस्त के बाद रोजाना इसकी निगरानी करेगा और राज्य सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगेगा। ओबीसी आयोग द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आया कि प्रदेश की कुल आबादी में इस वर्ग की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत है। हालांकि, आरक्षण की प्रक्रिया बार-बार न्यायालय में चुनौती मिलने के कारण भर्ती और अन्य प्रक्रियाओं में इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार अब सभी दलों से सुझाव लेकर ओबीसी की सहभागिता के प्रतिशत पर स्पष्ट रुख तय करेगी और इसके आधार पर रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी जाएगी। सियासत भी हो गई तेज  ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने को लेकर दोनों ही दल श्रेय लेते हैं। अब सर्वदलीय बैठक को लेकर भी सियासत तेज हो गई हैं। कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बीते छह वर्षों से शिवराज सिंह चौहान और मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार की वजह से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए अध्यादेश विधानसभा में लाया गया था, जो बाद में कानून का रूप ले चुका है। इसके बावजूद आरक्षण लागू नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री खुद कहते हैं कि वे ओबीसी आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तब सर्वदलीय बैठक बुलाने की आवश्यकता ही क्या है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को अब और देरी नहीं करनी चाहिए बल्कि दो दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर मामला वापस लेना चाहिए, ताकि ओबीसी वर्ग को उनका हक मिल सके। 

जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी

मंडला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court)को एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन ने अवगत कराया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए जंगली हाथी को 15 दिन में छोड़ दिया जाएगा। विदेश से मंगाई गई कॉलर आइडी पहनाई जाएगी। ताकि उसकी ट्रैकिंग की जा सके। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने उक्त जानकारी को रिकार्ड पर ले लिया। साथ ही शहडोल से पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए गए हाथी की मौत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को फटकार लगाई। याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने दायर की थी। कोर्ट ने मांगा 30 साल का पूरा विवरण एमपी कोर्ट ने निर्देश दिया कि जंगली हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया में वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की गई। जंगली हाथियों को पकड़ने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है। जिसमें से दो हाथियों को विदेश से मंगवाई गई कालर आइडी पहनाकर छोड़ दिया। अब हाथियों की होगी एक पहचान अब तक आपने बाघों के अलग-अलग नाम सुने होंगे, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी बाघों के अलग-अलग नाम रखे गए हैं. उनकी एक अलग आइडेंटिफिकेशन है. उनकी पूरी हिस्ट्री प्रबंधन के पास होती है, और जरूरत पड़ने पर एक ही झटके में ये किस तरह का टाइगर है, इसका व्यवहार कैसा रहता है, कहां-कहां मोमेंट रहता है, सब कुछ जानकारी मिल जाती है. ठीक उसी तरह से अब हाथियों की भी एक अलग पहचान बनाई जा रही है. मध्य प्रदेश में बांधवगढ टाइगर रिजर्व में ही ऐसा पहली बार हो रहा है जहां हाथियों को आईडेंटिफाई किया जा रहा है. उनको एक अलग नाम दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''हाथियों को नाम देने का काम, उनकी आइडेंटिटी बनाने का काम 25 मई से शुरु कर दिया है और जब तक पूरा नहीं हो जाएगा तब तक यह काम किया जाएगा. ये इसलिए किया जा रहा है कि अब लंबे वक्त से हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में परमानेंट तौर पर निवास कर रहे हैं और वे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ही हो चुके हैं. इसलिए उनका आइडेंटिफिकेशन भी जरूरी है. उनका इतिहास, उनका डाटा तैयार करना ताकि एक क्लिक पर उनके बारे में सब कुछ जाना जा सके. इसी के लिए उनकी एक आईडी जेनरेट की जा रही है, जिससे उनकी एक इंडिविजुअल पहचान हो सकेगी. हम उन्हें एक अलग नाम दे देंगे, एक अलग आईडी दे देंगे. जैसे टाइगर का t1 T2 होता है ठीक इसी तरह से हाथियों का भी एक कोड वर्ड होगा और उनका एक अलग नाम होगा, और उसी नाम से वो जाना जाएगा.'' कैसे होगी पहचान ? बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक बताते हैं कि, ''हाथियों की पहचान करने के लिए उनके जो शरीर में मार्क्स होते हैं, उस आधार पर उनको पहचान दी जाएगी. जैसे किसी हाथी का कान फोल्ड होता है, किसी का कान कटा होता है, कोई तस्कर होता है, किसी का दांत उठा हुआ होता है, किसी का टेढ़ा-मेढ़ा होता है, किसी का टूटा हुआ होता है. इसके अलावा पीठ की पॉजीशन किसी की फ्लैट होती है, किसी का उठा हुआ होता है. किसी के पूंछ में बाल नहीं होते हैं. किसी के पूंछ कटे होते हैं, हर हाथी के कुछ ना कुछ मार्क्स होते हैं. उनकी यूनिक पहचान होती है. इस आधार पर उनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है. क्या होगा फायदा? हाथियों का आईडेंटिफिकेशन कर देने से, उनको एक अलग नाम दे देने से आखिर क्या फायदा होगा. इसे लेकर उपसंचालक बताते हैं कि, ''उनकी एक अलग पहचान हो जाने से हम उन्हें ट्रैक कर पाएंगे. उनके हर मूवमेंट पर नजर रख पाएंगे. साथ ही हमारे पास हर हाथी का डाटा होगा, उसके बारे में पूरी जानकारी होगी. साल भर किस तरह का व्यवहार करता है, कौन सा हाथी कनफ्लिक्ट में शामिल रहता है, कौन शांत रहता है, कौन किस दिशा में किस सीजन में कहां मूवमेंट करता है. कौन सा हाथी हर्ड (झुंड) के साथ ही रहता है, कौन सा हर्ड के बाहर जाता है. किस तरह का व्यवहार होता है ये सब कुछ पता रहेगा तो हाथियों की देखरेख में भी मदद मिलेगी.'' जब बांधवगढ़ के हुए हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ से होकर संजय गांधी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर वाले रास्ते से बांधवगढ़ आते जाते रहे हैं. पहले स्थाई तौर पर नहीं रहते थे, आते थे चले जाते थे. लेकिन साल 2018 में जब बांधवगढ टाइगर रिजर्व में 40 हाथियों का एक दल पहुंचा, उसके बाद से यहीं रह गए और फिर वापस नहीं गये. इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता गया और अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ही इन्होंने अपना नया ठिकाना बना लिया है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान बाघों के साथ-साथ हाथियों के लिए भी होने लगी है. बांधवगढ़ में अभी कितने हाथी ? बांधवगढ टाइगर रिजर्व में अभी कितने हाथी हैं इसे लेकर टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''40 से 50 के लगभग हाथी हैं. कुछ महीने पहले 10 साथियों की डेथ हो गई थी और 5 से 10 हाथी ऐसे हैं जिनका मूवमेंट इधर-उधर होता रहता है. कभी आते हैं, कभी चले जाते हैं. लगभग 50 हाथी परमानेंट तौर पर रह रहे हैं. अभी जब इनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है तो यह और अच्छी बात होगी कि इनका एक्चुअल डाटा भी निकल कर सामने आ जाएगा.'' हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया? आखिर हाथियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ही क्यों पसंद आया? इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ''हाथियों की मेमोरी पावर बहुत ज्यादा होती है और उन्हें पीढ़ियों की चीजें याद रहती हैं, वो अपने रास्ते कभी नहीं भूलते हैं. जब कभी भी उन्हें कहीं पर थोड़ा अनसिक्योर लगता है, जंगल में मानव दखल बढ़ने लगता है, या उनके लिए … Read more