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बीजेपी कार्यकर्ता की निर्मम हत्या: हमलावरों ने मारीं 8 गोलियां, चेहरा छलनी

अलीगढ़ तालानगरी क्षेत्र के गांव कोंडरा निवासी पेशे से प्रॉपर्टी डीलर तथा भाजपा कार्यकर्ता की गांव 200 मीटर आगे निकलते ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हत्यारे मृतक के खास परिचित थे जिन्होंने हत्या से पूर्व कई मिनट तक बातचीत की थी। परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर थाना पुलिस समेत एसओजी की आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। कोंडरा गांव निवासी 45 वर्षीय सोनू चौधरी पुत्र सरदार सिंह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे साथ ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इनके बड़े भाई देवेंद्र चौधरी ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह अपनी क्रेटा कार लेकर घर से अकेले निकले थे, गांव से करीब 200 मीटर आगे निकलते ही बाइक सवार दो लोगों ने मृतक सोनू को रोक लिया, एक अंदर जाकर सोनू की बगल वाली सीट पर बैठ गया जबकि दूसरा ड्राइवर साइड में खड़ा रहा। इस दौरान मृतक का पारिवारिक भतीजा सुमित वहां से गुजरा जिसने दोनों को देखा और सामान्य बातचीत समझकर गांव की ओर बढ़ गया। वहीं, कुछ देर बाद ही मौका देखकर बाहर खड़े व्यक्ति ने सोनू को निशाना बनाकर चार गोलियां दाग दी, साथ ही अंदर बैठे हमलावर ने भी करीब 7-9 गोलियां दागी और बाहर निकलकर बाइक लेकर फरार हो गए। इधर, गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर निकटवर्ती लोग घटना स्थल की ओर दौड़े, पहचानकर सोनू के घर सूचना दी। आनन-फानन में परिजन निजी वाहन से मृतक सोनू को लेकर क्वार्सी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सोनू को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने फील्ड यूनिट की टीम को मौके पर बुला लिया तथा साक्ष्य संकलित कराए। एसएसपी संजीव सुमन भी मौके पर पहुंचे तथा लगभग आधा घंटे तक जानकारी लेने व कार का परीक्षण करने के बाद थाना पुलिस समेत एसओजी की टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  घटना स्थल पर पुलिस कारवाई के दौरान मृतक के सबसे बड़े भाई देवेंद्र चौधरी मौजूद रहे लेकिन हत्याकांड की वजह को लेकर वह कुछ बता नहीं सके। गांव के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी पुलिस… घटना के बाद मौके पर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घटना के बाद गोलियों की आवाज सुनकर जब वह कार की ओर गया तो देखा दो लोग बाइक लेकर गांव की ओर भाग रहे थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालकर घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है। हत्याकांड में किसी खास परिचित का हाथ मान रहा परिवार… जिस तरह से सोनू की हत्या की गई उस परिस्थिति को देखकर परिवारीजन हत्याकांड में किसी खास परिचित की भूमिका मान रहे हैं। गांव से कुछ दूरी पर ही बाइक सवार युवक को मृतक सोनू ने कार में बैठाया, कार को न्यूटल (बिना गियर के) में खड़ा करके गाड़ी और एसी भी चालू रखा, जबकि सोनू काफी तेज तर्रार था। यदि कोई अपरिचित हत्यारा होता तो शायद वह उसे कार में नहीं बैठाता। हालांकि, घटना के पीछे किसी से पुरानी रंजिश को परिवार फिलहाल नहीं मान रहा है। बाकी पुलिस को भी तहरीर का इंतजार है।

शिक्षक नहीं तो पढ़ाई नहीं: बच्चों ने स्कूल में लगाया ताला, पालकों का साथ

बालोद जिले के कुसुमटोला माध्यमिक स्कूल में शिक्षक की कमी को लेकर बच्चों और पालकों ने मिलकर स्कूल में ताला जड़ दिया। बारिश के बीच बच्चों ने स्कूल के गेट के सामने बैठकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति की मांग की। जानकारी के अनुसार, स्कूल में कुल 51 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। पहले यहां तीन शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन तीन शिक्षकों में से एक प्रधानपाठक की पदोन्नति हो जाने के बाद अब सिर्फ दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, जिससे नाराज होकर बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा। वहीं तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे बच्चों और पालकों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट तो खोल दिया, लेकिन बच्चे स्कूल के भीतर नहीं गए। स्कूल के अंदर तहसीलदार और शिक्षक मौजूद थे। वहीं बच्चे और उनके अभिभावक बाहर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे।

PHE भर्ती विवाद: डिप्लोमा बनाम डिग्री की लड़ाई में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

रायपुर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया “B.Ed बनाम D.Ed” की तरह “डिप्लोमा बनाम डिग्री” विवादों से घिर गई है. लाखों डिप्लोमा धारक युवा अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की सभी तकनीकी भर्तियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा. दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों हेतु भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई थी. भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से विभागीय आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता त्रि-वर्षीय डिप्लोमा निर्धारित की गई थी. इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए डिग्री धारकों ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दाखिल की, जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आया. इसके पश्चात भर्ती प्रक्रिया पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है. वहीं दूसरी ओर, डिप्लोमा धारकों का कहना है कि इसरो, डीआरडीओ, व सार्वजनिक उपक्रमों सहित देश की तमाम अग्रणी तकनीकी संस्थाओं में शैक्षणिक अर्हता पद के अनुसार तय की जाती है. अतः पद यदि उप अभियंता (Junior Engineer) है, तो डिप्लोमा ही उपयुक्त योग्यता है. डिप्लोमा अभ्यर्थियों ने इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. उनका तर्क है कि 7 नवम्बर 2024 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता”.

न्यायिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘द्वितीय श्रेणी का व्यवहार न करें जिला जजों से’

जबलपुर  जबलपुर हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल की युगल पीठ ने अपने एक आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और जिला कोर्ट के बीच सामंत और गुलाम जैसे रिश्ते हैं। जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट जजों से मिलते हैं तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बिना रीढ़ की हड्डी वाले स्तनधारी के गिड़गिड़ाने जैसी होती है। हाई कोर्ट के जज खुद को सवर्ण और जिला कोर्ट के जजों को शूद्र समझते हैं। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक फैसले में उच्च न्यायालय और जिला न्यायपालिका के रिश्तों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच का रिश्ता सामंती व्यवस्था जैसा है, जहां उच्च न्यायालय खुद को सवर्ण और जिला न्यायपालिका को शूद्र समझता है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में व्यापमं मामले में आरोपी को जमानत देने के कारण हाई कोर्ट ने संबंधित जज को बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट के ऐसे कृत्य से जिला न्यायपालिका में संदेश जाता है कि बड़े मामलों में निर्दोष साबित करने, जमानत देने से संबंधित जज के खिलाफ के विपरीत कारवाई हो सकती है। कोर्ट ने गलत तरीके से बर्खास्त किए गए न्यायाधीश को बैकवेजेस के साथ पेंशन का भुगतान करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता जज को पांच लाख का मुआवजा प्रदान करने की निर्देश भी दिए। 2016 का है मामला, भोपाल जिला अदालत में पदस्थ थे जगत मोहन चतुर्वेदी 2016 में एससी एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश के रूप में भोपाल जिला अदालत में पदस्थ रहे जगत मोहन चतुर्वेदी की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। उन पर आरोप लगा था कि 2015 में व्यापमं मामले के आरोपी कुछ छात्रों को उन्होंने अग्रिम जमानत दी। जबकि इसी मामले में अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। अलग-अलग तथ्यों के चलते विभिन्न आदेश दिए। इस पर हाई कोर्ट प्रशासन ने उनके विरुद्ध कदाचरण की कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में अनुमोदन किया गया। याचिकाकर्ता की अपील भी निरस्त कर दी गई। यह टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की बेंच ने दी। बेंच व्यापमं केस से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका भोपाल के पूर्व एससी-एसटी कोर्ट जज जगत मोहन चतुर्वेदी ने लगाई थी। उन्हें एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के बाद बर्खास्त किया गया था। जिला जज ऐसे मिलते हैं जैसे रीढ़ हीन स्तनधारी कोर्ट ने डबल बेंच ने कहा कि जब जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट के जजों से मिलते हैं तो उनकी शारीरिक भाषा ऐसी होती है जैसे कोई रीढ़विहीन स्तनधारी गिड़गिड़ा रहा हो। रेलवे स्टेशन पर स्वागत करना, जलपान कराना आम बात हो गई है। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्त जजों को शायद ही कभी बैठने को कहा जाता है। इस मानसिकता का फैसलों पर भी असर यह रिश्ता सम्मान का नहीं, बल्कि डर और हीनता पर आधारित है। यह मानसिकता इतनी गहरी है कि असर न्यायिक फैसलों में भी दिखता है। कई बार योग्य मामलों में जमानत नहीं दी जाती या सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि हो जाती है। सिर्फ इसलिए कि आदेश ‘गलत’ न मान लिया जाए। "डर के साए में न्याय नहीं, सिर्फ दिखावा" राज्य की न्याय प्रणाली की असली तस्वीर जिला कोर्ट की स्वतंत्रता से दिखती है, न कि केवल हाई कोर्ट से। लेकिन जब हाई कोर्ट बार-बार छोटी-छोटी बातों पर सख्त रवैया अपनाता है, तो जिला जज डर जाते हैं। परिवार, नौकरी और प्रतिष्ठा के डर से वे न्याय नहीं कर पाते, बस दिखावा करते हैं। कोर्ट का आदेश- सेवा लाभ बहाल हो.. कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता जज को सिर्फ अलग सोचने और काम करने के कारण दंडित किया गया। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें सेवा समाप्ति की तारीख से सेवानिवृत्ति तक का बकाया वेतन 7% ब्याज सहित दिया जाए। पेंशन और अन्य सेवा लाभ बहाल हों। मानसिक क्षति और सामाजिक अपमान के लिए 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। तर्क दिया गया कि अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर उन्होंने जज की हैसियत से अलग-अलग आदेश दिए थे। …अब यह कहा कोर्ट ने सुनवाई के बाद कोर्ट ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों के बीच निराशाजनक संबंध की आलोचना की। इसे एक सामंत और दास के बीच का रिश्ता बताया। कोर्ट ने कहा कि एक अहंकारी उच्च न्यायालय छोटी-छोटी गलतियों के लिए जिला न्यायपालिका को फटकार लगाने की कोशिश करता है, जिससे जिला न्यायपालिका को दंड के भय में रखा जाता है। पीठ ने कहा कि इससे न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश जब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का अभिवादन करते हैं, तो उनकी शारीरिक भाषा, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने गिड़गिड़ाने जैसी होती है। जिससे जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश अकशेरुकी यानि बिना रीढ़ के स्तनधारियों की प्रजाति बन जाते हैं। जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों द्वारा रेलवे प्लेटफार्म पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनके लिए जलपान की सेवा करने के उदाहरण आम हैं। उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्ति पर आए जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कभी भी बैठने की पेशकश नहीं करते हैं। जब कभी उन्हें ऐसा मौका मिलता भी है, तो वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने बैठने में हिचकिचाते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि जाति व्यवस्था की छाया राज्य के न्यायिक ढांचे में स्पष्ट दिखाई देती है, जहां उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सवर्ण हैं और जिला न्यायपालिका के जज शूद्र व दयनीय हैं। इससे जिला न्यायपालिका मानसिक रूप से कमजोर हो जाती है, जो अंतत: उनके न्यायिक कार्यों में परिलक्षित होती है। जहां सबसे योग्य मामलों में भी जमानत नहीं दी जाती, अभियोजन पक्ष को संदेह का लाभ देकर सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि दर्ज की जाती है और आरोप ऐसे लगाए जाते हैं, मानो दोषमुक्त करने का अधिकार ही न हो। यह सब उनकी नौकरी बचाने के नाम पर होता है, जिसका खामियाजा इस मामले में याचिकाकर्ता को अलग तरह से सोचने और काम करने के कारण भुगतना पड़ा। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुका है। उसके साथ हुए … Read more

ऊर्जा विभाग की कार्यशैली पर मंथन, सीएम योगी करेंगे बिजली कटौती की समीक्षा

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई है। वह अपने आवास पर दोपहर 3:30 बजे ऊर्जा विभाग की समीक्षा करेंगे। बैठक में विभाग के सभी बड़े अधिकारी बुलाए गए हैं। सीएम को बिजली कटौती की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसको लेकर वह समीक्षा करेंगे। बताते चलें कि एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का एक वीडियो सामने आया था, इसमें वह बिजली विभाग के अफसरों से नाराज दिख रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में बिजली कटौती की समस्या कम होते नहीं दिख रही है।

विदिशा में पुरातात्विक खोज! मस्जिद के पास मिला 16वीं-17वीं सदी का शिवलिंग

गंजबासौदा  पुरातत्व की धरोहर कहे जाने वाले विदिशा जिले के उदयपुर कस्बे में मस्जिद के पास खोदाई करते समय एक 16 वीं-17 वीं शताब्दी के शिवलिंग मिलने की सूचना मिलने पर पुरातत्व विभाग सहित स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। जानकारी के अनुसार उदयपुर गांव में चौखंडी वाली मस्जिद के पास गुरुवार सुबह खोदाई के दौरान एक प्राचीन शिवलिंग मिला। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को जानकारी दी। अधिकारी पुरातत्व विभाग के साथ मौके पर पहुंचे और शिवलिंग को पूरी तरह मिट्टी से बाहर निकाला। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया की जमीन में मिला शिवलिंग 16वीं-17वीं शताब्दी का है। इसकी ऊंचाई लगभग 3 फीट है। जिस स्थान पर शिवलिंग मिला है, वहां निजाम नामक व्यक्ति अपने भवन का निर्माण करवा रहा था। इसी दौरान शिवलिंग दिखाई दिया। कई प्राचीन अवशेष भी पत्थरों पर दिखाई दिए अधिकारियों ने कहा कि अगर ग्रामीण प्राचीन प्रतिमा की जिम्मेदारी लेते हैं तो उन्हें वहीं छोड़ दिया जाएगा। अन्यथा इसे उदयपुर के प्राचीन पिसनहारी मंदिर में बनाए गए संग्रहण कक्ष में सुरक्षित रख दिया जाएगा। मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार अनुराग रावत ने बताया कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा था, वह शासकीय भूमि है। अब यह जांच की जाएगी कि निर्माण कैसे किया जा रहा था और संबंधित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण राजेश नाथ का कहना है कि शिवलिंग को उसी स्थान पर रखा जाए। ताकि लोग उसकी पूजा-अर्चना कर सकें। शिवलिंग के साथ-साथ अन्य कई प्राचीन अवशेष भी पत्थरों पर दिखाई दिए हैं। मूर्ति को सुरक्षित रखवाया गया मालूम हो कि दो वर्ष पूर्व भी खोदाई के समय एक गणेश प्रतिमा निकली थी। इसके बाद फिर खोदाई का काम शुरू हुआ तो एक नंदी की प्रतिमा भी निकली। जिसकी जानकारी ग्रामीणों द्वारा पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को दी गई। तब मौके पर पहुंची पुरातत्व अधिकारी नर्मता यादव की उपस्थिति में मूर्ति सुरक्षित रखवाया गया था।

UK के साथ मुक्त व्यापार समझौता प्रदेश के उद्योग और निर्यात को देगा नया आयाम: डॉ. यादव

UK के साथ मुक्त व्यापार समझौता प्रदेश के उद्योग और निर्यात को देगा नया आयाम: डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफटीए के लिए प्रधानमंत्री मोदी का किया अभिनंदन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते यानि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-FTA की उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, युवाओं के साथ-साथ समूचा भारत गौरवान्वित हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर जो करार किया है, यह न केवल उद्योग, व्यापार और रोजगार की दृष्टि से, बल्कि वैश्विक संबंधों की दृष्टि से भी भारत को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएगा। भारत सरकार के "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" जैसे अभियानों से वैश्विक स्तर पर मिला विस्तार देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का अतुलनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हम सभी को एफटीए के स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। मध्यप्रदेश को भी भविष्य में ब्रिटेन के साथ हुए इस मुक्त व्यापार समझौते का भरपूर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि नये मुक्त व्यापार समझौते से मध्यप्रदेश को कृषि सेक्टर, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सर्विस सेक्टर, एविएशन सेक्टर, लेदर इंडस्ट्री, प्लास्टिक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर सहित मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्रियल ग्रोथ में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।  

मध्यप्रदेश में लगातार बारिश बरगी और सतपुड़ा डैम के 7-7 गेट खोले गए

भोपाल   मध्य प्रदेश में एक बार फिर से स्ट्रांग सिस्टम  एक्टिव हो गया है, जिससे लगातार भारी बारिश का दौर चल रहा है। शुक्रवार को 19 जिलों में अति भारी औ 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात रहे। रायसेन में 2.3 इंच पानी गिरा। सिवनी में 1.6 इंच, पचमढ़ी में डेढ़ इंच, भोपाल में सवा इंच बारिश हुई। वहीं, दतिया, शिवपुरी और सागर में आधा इंच पानी गिरा। बैतूल, दतिया, नर्मदापुरम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, टीकमगढ़, उमरिया, विदिशा, बालाघाट समेत कई जिलों में बारिश हुई। शिवपुरी में अटल सागर बांध मडीखेड़ा के दो गेट खोले गए। रायसेन में बारना बांध के 4 गेट एक-एक मीटर खोलकर दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। ग्वालियर में सुबह तेज बारिश हुई। भोपाल में कभी धीमी, कभी तेज बारिश हो रही है। जबलपुर में बरगी डैम के दो गेट और खोले गए हैं। इससे पहले 5 गेट खोले गए थे। पिछले 24 घंटे के दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा 3.7 इंच पानी गिर गया। रायसेन में 2.4 इंच, पचमढ़ी में 1.9 इंच, सिवनी में 1.6 इंच, भोपाल, दतिया-मलाजखंड में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। छतरपुर के नौगांव और खजुराहो, नरसिंहपुर, गुना, बैतूल, सागर, जबलपुर, उमरिया, मंडला, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, दमोह, रतलाम, खरगोन, विदिशा, सीहोर, टीकमगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़ समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर रहा। आज इन जिलों में तेज बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को जबलपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 8 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं, ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, सागर, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, सागर, सीहोर, देवास, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश में चार सिस्टम का असर मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में दो ट्रफ और एक दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन की एक्टिविटी है। इनमें से एक मानसून ट्रफ लाइन उत्तरी हिस्से से गुजर रही है। इससे प्रदेश में तेज बारिश का दौर है। अगले चार दिन तक अति भारी बारिश का कहीं रेड, ऑरेंज तो कहीं भारी बारिश का यलो अलर्ट है। औसतन 21.8 इंच बारिश हुई  प्रदेश में इस सीजन में औसत 21.8 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि अब तक 14.6 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से 7.2 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 49% अधिक है। 3 जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 25% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर समेत 5 जिलों भी बेहतर स्थिति में है। यहां 80 से 95% तक बारिश हो चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है। 

इंजीनियर राशिद की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की कार्रवाई, एनआईए को नोटिस

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने मामले में सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है। दरअसल, सांसद इंजीनियर राशिद ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत मांगी है। विशेष एनआईए अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद को संसद के मानसून सत्र में शामिल होने के लिए 24 जुलाई से 4 अगस्त तक हिरासत में पैरोल दे दी। राशिद 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तरफ से गिरफ्तार किए जाने के बाद से 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने हिरासत में पैरोल मंजूर की थी।

दिल्ली में सड़क सुधार की रफ्तार तेज़, 1 सितंबर से चलेगा विशेष अभियान

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम (MCD) 1 सितम्बर 2025 से ‘एक सड़क-एक दिन’ नामक एक विशेष अभियान की शुरुआत करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य राजधानी की सड़कों को व्यवस्थित और स्वच्छ बनाना है. इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक ज़ोन में प्रतिदिन एक प्रमुख सड़क का सम्पूर्ण कायाकल्प किया जाएगा. यह अभियान स्थायी समिति द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद आधिकारिक रूप से लागू किया जा रहा है. स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने निगम के अतिरिक्त आयुक्तों और ज़ोनल उपायुक्तों को निर्देशित किया है कि वे इस योजना को गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू करें. उनका मानना है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को आगे बढ़ाने और 2 अक्टूबर तक दिल्ली की स्थिति में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. हर क्षेत्र में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो ‘एक सड़क – एक दिन’ योजना के निर्माण, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे. इस व्यवस्था से कार्य की गति और गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी संभव होगी. प्रत्येक क्षेत्र की सड़कों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना बनाई जाएगी. इसके लिए स्थानीय पार्षदों और विधायकों से सुझाव लिए जाएंगे, ताकि कार्य स्थानीय आवश्यकताओं और वास्तविकताओं के अनुरूप हो सके. हर जोन के उपायुक्तों को जवाबदेह ठहराया गया है, और वे हर सप्ताह नगर आयुक्त को अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिससे निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा सके. योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक बजट और संसाधनों, जैसे मैकेनिकल स्वीपर्स, फॉगिंग मशीनें, पेड़ काटने के उपकरण और स्ट्रीट लाइट्स, की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. इसके अलावा, हर दिन किए गए कायाकल्प के कार्यों की तस्वीरें और रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सकेगा. सत्या शर्मा ने जानकारी दी कि वे सड़कें, जो पीडब्ल्यूडी या अन्य एजेंसियों के अधीन हैं लेकिन जिनकी सफाई का कार्य एमसीडी द्वारा किया जाता है, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. समन्वय के लिए संबंधित विभागों को सूचित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि ‘एक सड़क – एक दिन’ अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन चयनित सड़क पर विभिन्न कार्य किए जाएंगे. इनमें मरम्मत और टॉपिंग, फुटपाथों का समतलीकरण और सुधार, मीडियन तथा किनारों की सफाई और सजावट, पेड़ों की छंटाई, ग्रिल की पेंटिंग, साइनेज की मरम्मत या प्रतिस्थापन, कूड़े और मलबे की सफाई, स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत, और अतिक्रमण को हटाने और रोकने के कार्य शामिल हैं. सत्या शर्मा ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि यह अभियान दिल्ली को एक स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित शहर में बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा. उनका कहना है कि यह योजना स्वच्छ भारत मिशन की भावना को और मजबूत करेगी और दिल्ली को एक नई पहचान प्रदान करेगी.