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जसमत ग्राम के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में उठाई अतिक्रमण हटाने की मांग

विधायक की जनसुनवाई में पहुचे जसमत ग्राम के ग्रामीण,हनुमान मंदिर के सामने किये अतिक्रमण को हटवाने की मांग की, जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याएं,जनसुनवाई में आये 48 आवेदन आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा जनपद पंचायत के ग्राम जसमत में स्तिथ हनुमान मंदिर के सामने दान की गई जमीन पर ग्राम के कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है,उक्त अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर आज ग्राम जसमत के ग्रामीण विधायक की जनसुनवाई में पहुचे ओर उक्त स्थल से अतिक्रमण हटाने की मांग का आवेदन सौपा । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रति बुधवार को आम जन की समस्याओं को सुनने आयोजित जन सुनवाई में पहुचे जसमत के ग्रामीणों ने विधायक को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि ग्राम जसमत में हनुमान मंदिर स्तिथ है,इस मंदिर को दान में मिली जमीन पर कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है उसे हटवाया जाये । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । आज जनसुनवाई में करीब 48 आवेदन ग्रामीणों की ओर से दिये गये है । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । विधायक ने जनसुनवाई में पहुचे मीडिया के साथियों से चर्चा में कहा की जनसुनवाई में जो भी आवेदन चाहे वे किसी मांग के हो या समस्या के निराकरण के हो उसकी हम साप्ताहिक समीक्षा करते है,जिन विभागों को आये आवेदन भेजे जाते है,उनसे भी कार्यवाही की जानकारी ली जाती है तथा जब विभागीय समीक्षा बैठक होती है उसमें भी भेजे गये आवेदनों पर की गई कार्यवाही की जानकारी ली जाती है । आज जनसुनवाई में कई विभागों के  आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा। विधायक कार्यालय से जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश दिलाने, पारिवारिक विवाद,रोजगार दिलाने, रास्ते से अतिक्रमण हटवाने,नगर पालिका द्वारा पुश्तैनी मकान का अन्य रिश्तेदार के नाम नामांतरण कर देने की शिकायत,परोलिया पार मैं मांगलिक भवन निर्माण,प्रधानमंत्री आवास योजना की तृतीय क़िस्त प्रदाय कराने,खेत सड़क मार्ग निर्माण बमुलिया खिंची में करवाने, स्वीकृत कॉलोनी के रास्ते के निर्माण पर आपत्ति लगाना,सास बहू का पारिवारिक विवाद हल करवाने, आर्थिक सहायता दिलाने, प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय कराने,ग्राम किल्लोद में ग्रेवल रोड निर्माण कराने, ग्राम कादूखेड़ी में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराने, सोयाबीन फसल खराब होने पर मुआवजा राशि दिलाने,सड़क पर नाली निर्माण को रुकवाने सहित अन्य 48 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2025 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई

जयपुर राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। उम्मीदवार इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर 25 जुलाई 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  बोर्ड द्वारा ग्राम विकास अधिकारी पद पर चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक नियुक्ति के दौरान निश्चित मासिक वेतन दिया जाता है। हालांकि, स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद न केवल सैलरी में बढ़ोतरी होती है, बल्कि उन्हें कई सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं। ऐसे में आइए जानें ग्राम विकास अधिकारी की सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी और स्थायी नियुक्ति के बाद मिलने वाले लाभों का विस्तृत विवरण। प्रारंभिक वेतनमान और पे स्केल राज्य सरकार द्वारा ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पद के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पे मैट्रिक्स लेवल-6 में वेतन निर्धारित किया गया है। इस स्तर पर वेतन 35,400 रुपये से शुरू होकर 1,12,400 रुपये तक जाता है। हालांकि, चयनित अभ्यर्थियों को शुरुआत में सीधे इस वेतनमान का लाभ नहीं मिलता, बल्कि उन्हें परिवीक्षा अवधि पूरी करने के बाद ही इसका लाभ मिल पाता है। फिक्स सैलरी का प्रावधान नियमानुसार, सभी चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के अंतर्गत नियुक्त किया जाता है। इस अवधि में वेतन श्रृंखला के स्थान पर केवल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) प्रदान किया जाता है। यह राशि आमतौर पर 18,000 रुपये से 23,700 रुपये के बीच होती है। इस दौरान उन्हें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता (DA, HRA, आदि) नहीं दिया जाता। चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति प्रक्रिया चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, चयनित अभ्यर्थियों की सूची राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को भेजी जाती है। वहां से जिलेवार मेरिट लिस्ट तैयार कर प्रोबेशनर ट्रेनी के रूप में अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाता है। यह प्रक्रिया विभागीय स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होती है। स्थायी नियुक्ति की शर्तें और मिलने वाले लाभ परिवीक्षा अवधि के दौरान प्रशिक्षण, मूल्यांकन और परीक्षा पास करना जरूरी होता है। सफलतापूर्वक स्थायी नियुक्ति मिलने पर अभ्यर्थी को वेतनमान, DA, HRA, चिकित्सा सुविधा, और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ मिलता है। इसके अलावा, प्रमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि भी निर्धारित नियमों के अनुसार दी जाती है।  

स्कूलों में जंक फूड पर लगाम: CBSE ने तय किए तेल-चीनी के नए नियम

ग्वालियर अब छात्रों को स्कूल में मिलने वाले समोसे, पेस्ट्री, जूस या चाय के साथ यह जानकारी भी मिलेगी कि उनमें कितना तेल और शक्कर मिला है। CBSE ने एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि कैंटीन, मेस या कैफेटेरिया में मिलने वाले खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त ऑयल और शुगर की मात्रा बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह निर्णय बच्चों में बढ़ती मोटापा, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। CBSE का मानना है कि यदि छात्र खुद यह जानेंगे कि वे क्या खा रहे हैं और उसमें कितनी कैलोरी, शुगर और फैट है, तो वे अपने खानपान को लेकर ज्यादा जागरूक होंगे। ग्वालियर के स्कूलों में भी लागू होंगे नियम ग्वालियर के सभी CBSE स्कूलों में अब कैंटीन के बाहर ऐसे बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर हर स्नैक की पोषण जानकारी दी जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी समोसे का वजन 100 ग्राम है तो उसमें लगभग 28 ग्राम तेल होता है, जिससे लगभग 362 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। इसी तरह एक 300ml कोल्ड ड्रिंक में 32 ग्राम शक्कर और 132 कैलोरी पाई जाती है। सेहत के लिए फायदेमंद पहल रिटायर्ड बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.पी.एस. जादौन का कहना है कि यह कदम खासतौर पर किशोरावस्था के छात्रों के लिए बेहद जरूरी है। इस उम्र में अनहेल्दी डाइट भविष्य में मोटापा, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है। इस तरह की पहल छात्रों को फूड अवेयरनेस के प्रति सजग बनाएगी। स्कूल प्रिंसिपल और शहरवासी भी हुए सहमत एक निजी स्कूल के प्राचार्य विनय झलानी ने CBSE की इस पहल को सराहा और कहा कि अब समय आ गया है कि हम बच्चों को पोषण से जुड़ा ज्ञान भी दें। स्कूल प्रशासन के मुताबिक वे जल्द ही इन न्यूट्रिशन बोर्ड्स को स्कूल में लगाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। वायरल अफवाह ने मचाई थी हलचल कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई थी जिसमें दावा किया गया था कि अब हलवाई और होटल संचालकों को भी जलेबी, समोसे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में प्रयुक्त तेल और शक्कर की मात्रा बतानी होगी। हालांकि यह खबर अफवाह निकली, लेकिन इसने आमजन में हलचल जरूर मचा दी। ग्वालियर के स्थानीय मिष्ठान विक्रेता दीपू गुप्ता ने बताया कि जलेबी और समोसे में आमतौर पर सरसों का तेल ही उपयोग होता है और किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती। लेकिन हर चीज में तेल और शक्कर का प्रतिशत बताना तकनीकी रूप से जटिल है।

मध्यप्रदेश के बड़े गांवों को मिलेगा नियोजित विकास का तोहफा, मास्टर प्लान की तैयारी शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 2000 से ज्यादा आबादी वाले गांवों को आदर्श गांव बनाने के लिए जल्द ही एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इसके लिए संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है. प्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि इस योजना के तहत पहले चरण में राज्य के संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है, जिन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि मास्टर प्लान का उद्देश्य 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों का विकास करना है ताकि विकास का प्रवाह अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंच सके. इस योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को लागू करके बदलाव लाया जा सके. इस मामले पर बात करते हुए पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश के गांवों को लेकर मास्टर प्लान का उद्देश्य 2,000 से अधिक आबादी वाले गांवों को विकसित करना है। इस मास्टर प्लान की विकास की धारा अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रयास ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को अमली जामा पहना कर परिवर्तन लाया जा सके। इन गांवो के विकास के लिए सरकार की तरफ से मास्टर प्लान बनाकर इनका विकास किया जाएगा। इससे लोगों को काफी सुविधाएं मिल जाएंगी मंत्री ने कहा कि दो हजार से अधिक की आबादी वाले गांवों की पहचान होनी है ताकि उन्हें आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पांच संभाग से पांच गांव लिए गए हैं, जिनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मडियादो शामिल हैं। पटेल ने कहा कि इन गांवों को आदर्श के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाने में सुविधा हो। प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों की पहचान की जानी है ताकि उन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जा सके. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पांच संभागों से 5 गांवों को चुना गया है. इनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मड़ियादोह. उन्होंने कहा कि इन गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाना आसान हो सके. 

वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू

पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए त्रि-पक्षीय अनुबंध आज 24 जुलाई को आज 24 जुलाई को होगा पेसा एक्ट पर त्रि-पक्षीय समझौता, ग्राम स्वशासन को मिलेगा बल वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू भोपाल प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आज 24 जुलाई को त्रि-पक्षीय अनुबंध होगा। अनुबंध सचिव पंचायती राज मंत्रालय, केन्द्र सरकार, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा। कार्यक्रम मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान वाल्मी, भोपाल में आज 24 जुलाई को शाम 4 बजे से होगा। कार्यक्रम में पेसा एक्ट पर बनी पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा। साथ ही देशभर से आए पेसा एक्ट पैनलिस्ट, विशेषज्ञों के बीच चर्चा होगी। प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन, उपनियमों को लागू करना, जनजातीय समुदाय को प्रशिक्षण देना, जनजातीय समुदाय की परंपराओं की रक्षा, नए शोध, जनजातीय कलाओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए और जनजातीय समुदाय के बीच हो रहे बेहतर कार्यों का प्रचार-प्रसार, के बारे में चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय सचिव पंचायती राज मंत्रालय विवेक भारद्वाज, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संचालक सह आयुक्त पंचायत राज संचालनालय छोटे सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

वर्ल्ड पॉवर चैम्पियनशिप में 10 लाख से अधिक स्कूली छात्रों ने की भागीदारी

भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। प्रशिक्षण के लिये भोपाल में एक राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान इंग्लिश लर्निंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट (ईएलटीआई) कार्यरत है। यह संस्थान राज्य के समस्त शासकीय, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षण संस्थानों में इंग्लिश भाषा संबंधी अकादमिक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मार्गदर्शन एवं सहयोग कर रहा है। ईएलटीआई संस्थान इंग्लिश भाषा अध्यापन क्षेत्र में सतत उन्नयन एवं स्तरीकरण के लिये हैदराबाद के इंग्लिश एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) से सहयोग प्राप्त कर रहा है। इंग्लिश भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी सकूलों में इंग्लिश भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। प्रशिक्षण के लिये ईएलटीआई ने शिक्षण सत्र के लिये कैलेंडर तैयार किया है। संस्थान इंग्लिश भाषा के मूल्यांकन के लिये विभिन्न स्तरों के प्रश्न-पत्रों के निर्माण और अन्य विषय के प्रश्न-पत्रों के अनुवाद कार्य में भी सहयोग कर रहा है। इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े डिप्लोमा कोर्स कराने के लिये उनकी चयन प्रक्रिया में भी सहयोग कर रहा है। प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में संस्थान विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के आकलन एवं मूल्यांकन के कार्यों को भी सतत रूप से कर रहा है। इंग्लिश ओलम्पियाड संस्थान ने पिछले वर्ष इंग्लिश विषय में कक्षा-2 से 8 के लिये संकुल, विकासखण्ड तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये ओलम्पियाड प्रश्न बैंक तथा प्रश्न-पत्रों का निर्माण किया था। पिछले वर्ष ओलम्पियाड में शामिल छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक रही। संस्थान ने माध्यमिक शालाओं में इंग्लिश विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के लिये मेन्युअल का भी निर्माण किया है। संस्थान ने राज्य द्वारा निर्मित कक्षा-1 से 8 तक की इंग्लिश की पाठ्य-पुस्तकों और एनसीईआरटी से जुड़ी कक्षा-9 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में समन्वय का कार्य भी किया है।  

कोर्ट ने जताई चिंता: ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं डिलीवरी कर्मचारी, पुलिस नहीं करती वैरिफिकेशन

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर बात की। ऑनलाइन खाने-पीने का सामान सप्लाय करने वालों को लेकर कहा कि सबसे ज्यादा रेड सिग्नल जंप डिलीवरी वाले ही करते हैं। दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं और कुछ नहीं होता। ये हमारे घरों तक पहुंच रखते हैं, लेकिन इनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। कभी इनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं जांचा। इस बारे में नीति बनानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट, उद्यान और फुटपाथ पर धड़ल्ले से धार्मिक स्थल बन रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। ये धार्मिक स्थल यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह किसी एक क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्या है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर धार्मिक गतिविधियों के नाम पर कब्जा हो रहा है। हालत यह हो जाती है कि 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है। ई-रिक्शा को लेकर कोई योजना नहीं कोर्ट ने ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा कि इस बारे में सख्ती से कार्रवाई जरूरी है। पुलिस ई-रिक्शा चालकों के पुलिस सत्यापन, ट्रेनिंग इत्यादि की व्यवस्था करे। ई-रिक्शा के चालकों की कोई सूची नहीं है। कभी उनका आपराधिक रिकार्ड नहीं जांचा जाता। इस संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए। यह कहा याचिकाकर्ता ने याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि     चौराहों पर लगे सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं।     पुलिसकर्मी चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के बजाय मोबाइल चलाते हैं। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।     वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिग्नल ग्रीन रखे जाएं।     सड़कों पर गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान हो। कोर्ट ने कहा कि     जो रेड लाइट जंप करते हैं, उन्हें वहीं दो घंटे रोकें।     जिस चौराहे पर चालान बन रहे हैं, वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।     बीमा रिन्यू करने वाली कंपनी पहले बकाया चालान जमा कराए। इसके बाद बीमा रिन्यू किया जाए।     कार पुलिंग को बढ़ावा दें। शुरुआत हाई कोर्ट से हो सकती है। एक ऑफिस से जुड़े वकील एक कार से कोर्ट आएं तो सड़क पर वाहन संख्या कम करने में मदद होगी।     आईटीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाईडेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं।     पिछले दो वर्ष में यातायात पुलिस द्वारा 12 लाख से अधिक ई-चालान किए गए हैं।     यातायात नियमन के तीनों घटकों – यातायात इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।     सरकार ने राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाता है।     किसी भी समय समस्या पर प्रतिक्रिया देने और उसका समाधान करने के लिए 40 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) बनाए गए हैं।    

उज्जैन में लगेगा मेगा सोलर प्लांट, 55 हेक्टेयर में होगा 7000 करोड़ का निवेश

उज्जैन  उज्जैन जिले में स्थित बरंडवा उद्योगपुरी को जल्द एक और बड़ी सौगात मिल सकती है। सोलर एनर्जी की कंपनी जैक्सन यहां पर 7 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर एक नई यूनिट स्थापित करने की तैयारी में है। 55 हेक्टेयर जमीन की होगी जरूरत सीएम डॉ मोहन यादव के औद्योगिक विकास के प्रयासों के बाद विक्रम उद्योगपुरी के साथ जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े निवेश आ रहे हैं। इन्हीं में से एक जैक्सन ग्रुप ने मक्सी के नजदीक बरंडवा उद्योगपुरी में सोलर उपकरण बनाने की यूनिट स्थापित करने में रुचि दिखाई है। कंपनी का यहां करीब 7 हजार करोड़ रुपए का प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। हाल ही में कंपनी की ओर से मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआइडीसी) को पत्र लिख 55 हेक्टेयर जमीन की जरूरत जताई है। एमपीआइडीसी ने भूमि आवंटन को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जेक्सन कंपनी का प्लांट यहां स्थापित होता है, तो मक्सी क्षेत्र के लिए बड़े बदलाव का आधार साबित हो सकता है। 2 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना कंपनी मक्सी में बड़ा प्लांट शुरू करने की तैयारी में है। यदि 7 हजार करोड़ के निवेश से प्लांट स्थापित होता है तो इससे करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर ने बताया कि जेक्सन कंपनी ने मक्सी के नजदीक बरंडवा में भूमि आवंटन के लिए पत्र दिया है। यहां करीब 7 हजार करोड़ रुपए से सोलर उपकरण निर्माण की युनिट स्थापित करने का प्रस्ताव है। भूमि आवंटन को लेकर कार्रवाई प्रचलित है।

हेरिटेज ट्रेन से घूमिए मध्यप्रदेश की हसीन वादियां, पातालपानी-कालाकुंड रूट फिर से होगा शुरू

इंदौर   प्रदेश की एकमात्र हेरिटेज ट्रेन, जो यात्रियों को सुहानी वादियों और प्राकृतिक नजारों का अनुभव कराती है, उसका संचालन चार माह के अंतराल के बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेन 26 जुलाई से प्रत्येक शनिवार और रविवार को पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड तक चलेगी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल द्वारा इसके संचालन के लिए विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है। हालांकि, पातालपानी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को सड़क मार्ग से ही जाना होगा। ट्रेन की यह यात्रा महू तहसील के घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों, झरनों और पक्षियों की चहचहाहट के बीच से गुजरती है, जिससे यात्रियों को अद्भुत अनुभव मिलता है। प्राकृतिक सौंदर्य और खानपान का मिलेगा लुत्फ पातालपानी का झरना, भुट्टा, मैगी और गरमा-गरम भजिए के साथ इस यात्रा का स्वाद और आनंद कई गुना बढ़ जाएगा। यह पूरा सफर सुबह से शाम तक चलेगा, जिसमें पर्यटक हर पल प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनंद उठा सकेंगे। मानसून की शुरुआत होते ही पर्यटक इस हेरिटेज ट्रेन के संचालन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। रेलवे ने हाल ही में एक ट्रायल रन भी किया है जो पूरी तरह सफल रहा। संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही टिकट बुकिंग भी शुरू की जाएगी। महू तहसील के जंगल, पहाड़ियां और उनके बीचे बहते हुए प्राकृतिक झरने, पक्षियों की चहचहाट पातालपानी के झरने और भुट्टे, मैगी, भजिए के आनंद लेने का समय आ चुका है। ये आनंद पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड रेलवे स्टेशन तक चलने वाली हेरिटेज ट्रेन के सफर में मिलेगा। सुबह से शाम तक के इस सफर में पर्यटकों प्राकृतिक नजारों को देखकर दमक उठेंगे। मानसून शुरू होते ही पर्यटक हेरिटेज ट्रेन संचालन का इंतजार करते हैं। इसके संचालन के लिए रेलवे द्वारा एक बार ट्रायल रन भी कर लिया है, जो सफल भी रहा है। अब रेलवे ने संचालन शुरू करने की सभी तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही टिकट बुकिंग शुरू की जाएगी। हेरिटेज ट्रेन का किराया और खासियत -हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन सेकंड क्लास के कोच रहेंगे। -विस्टाडोम का किराया 265 रुपये और नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपये होगा। -टाइमटेबल व स्टापेज सभी पहले की तरह ही रहेंगे। -विस्टाडोम के एक कोच में 60 सीटें हैं, दो कोच में 120 सीट रहेंगी। -विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए रहेगा। -ट्रेन में नान एसी चेयर कार के तीन कोच रहेंगे। -चेयर कार के दो कोच में 64-64 सीटें और एक कोच में 24 सीटें हैं। -नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपए प्रति सवारी होगा। हेरिटेज ट्रेन से जुड़ी अन्य विशेषताएं 2018 में शुरू हुई थी हेरिटेज ट्रेन मध्य प्रदेश की इस पहली हेरिटेज ट्रेन का संचालन 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुआ था। कुछ माह में ही इस ट्रेन ने प्रदेश सहित देशभर में अपनी पहचान बना ली थी। कोरोना काल के चलते अप्रैल 2020 में इस ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया था। चार अगस्त 2021 को ट्रेन में कई बदलाव कर दोबारा संचालन शुरू किया था। गर्मी का मौसम आते ही मार्च में इसे बंद कर दिया जाता है। विस्टाडोम कोच है आकर्षण का केंद्र रेलवे ने हेरिटेज ट्रेन में पर्यटकों के सफर को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिए एसी विस्टाडोम लगाएं हैं। इन कोच में बड़े साइज के विंडो ग्लास, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए कोच में स्वच्छ टायलेट का निर्माण भी किया गया है। कोच की बाहरी भाग को आकर्षक पीवीसी शीट से सजाया गया है। हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन नॉन एसी चेयर कार कोच होंगे। विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए होगा जबकि नॉन एसी चेयर कार का किराया मात्र 20 रुपए प्रति सवारी तय किया गया है। विस्टाडोम कोच में बड़े साइज की खिड़कियां, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री जैसी सुविधाएं होंगी। दो विस्टाडोम कोचों में कुल 120 सीटें होंगी जबकि नॉन एसी चेयर कार के तीन कोचों में कुल 152 सीटें (64+64+24) उपलब्ध होंगी। कोचों में स्वच्छ टॉयलेट और आकर्षक पीवीसी शीट से सजे बाहरी भाग पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगे। 2018 से लेकर अब तक का सफर यह हेरिटेज ट्रेन पहली बार 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी और कुछ ही महीनों में प्रदेश ही नहीं, देशभर में मशहूर हो गई थी। अप्रैल 2020 में कोरोना महामारी के चलते इसका संचालन बंद कर दिया गया था। इसके बाद 4 अगस्त 2021 को कई बदलावों के साथ इसका पुनः संचालन शुरू किया गया था। हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होते ही मार्च में इस ट्रेन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है, और अब मानसून आते ही एक बार फिर यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता की सैर कराने के लिए तैयार है। 

भोपाल को मिलने जा रहा 26 करोड़ की लागत वाला लग्जरी वृद्धाश्रम, हर महीने देना होगा 50 हजार

भोपाल  भोपाल में पहली बार ऐसा वृद्धाश्रम खुलने जा रहा है जिसकी कल्पना आपने सपने में भी नहीं की होगी. ये वृद्धाश्रम आम ओल्ड ऐज होम से बहुत अलग होने वाला है. यहां आपको 24×7 मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी, रहने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था भी की गई है. हालांकि इन 5 स्टार जैसी सुविधाओं का लुत्फ उठाने के लिए आपको हर महीने 50-82 हजार खर्ज करने पड़ेंगे. मध्य प्रदेश का पहला लग्जरी वृद्धाश्रम इस वृद्धाश्रम का नाम संध्या छाया रखा गया है जो 1 अगस्त से भोपाल में शुरू हो रहा है. संध्या छाया को एमपी का पहला पेड लग्जरी वृद्धाश्रम माना जा रहा है. इस वृद्धाश्रम को सीनियर सिटिजन की हर जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. संध्या छाया के निर्माण में करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए है जिसकी वजह से ये ओल्ड एज होम एक लग्जरी ठिकाना माना जा रहा है. क्या है लग्जरी वृद्धाश्रम की खासियत भोपाल के लिंक रोड-3 के पत्रकार कॉलोनी स्थित संध्या छाया ओल्ड एज होम में आपको सिंगल बेडरुम से लेकर डबल बेडरुम की सुविधा मिलती है. पूरा वृद्धाश्रम 5 एकड़ में फैला हुआ है. पूरे परिसर में सीसीटीवी की सुविधा है. यहां दो रेसिडेंशियल ब्लॉक के साथ लॉन भी बनाया गया है. इस वृद्धाश्रम में 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग रह सकते हैं. कितना है किराया इस वृद्धाश्रम में रहने के लिए आपको हर महीने कम से कम 50 हजार का बजट रखना होगा. सिंगल रुम का 50 हजार वहीं डबल रुम में रहने के लिए प्रति व्यक्ति को  41 हजार रुपए खर्च करने होंगे. रजिस्ट्रेशन के वक्त एक लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट भी जमा करना होगा . यहां खानापान से लेकर हर बेसिक सुविधाओं का भी खास ख्याल रखा गया है. बुजुर्ग यहां जैसे चाहे वैसे रह सकते हैं. हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर हफ्ते में एक बार विजिट करेंगे. किसके अंडर में होगा वृद्धाश्रम एमपी सरकार इस वृद्धाश्रम को चलाने की पूरी जिम्मेदारी सेवा भारती को दी है. बुजुर्ग जो अमाउंट देंगे वो राशि सेवा भारती को मिलेगी. वहीं सिक्योरिटी अमाउंट एमपी सरकार को दी जाएगी. आश्रम के मैनेजमेंट, सुविधाओं में विस्तार और स्टाफ को वेतन देने में ये सिक्योरिटी अमाउंट खर्च की जाएगी.