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शावकों का जन्म चीता संरक्षण की हमारी यात्रा में आशा, जीवटता और सफलता का सुंदर प्रतीक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीवन अपना रास्ता खुद ढूंढ ही लेता है और जीवन की यही प्रकृति इसे और भी अधिक रोमांचक बनाती है। एक वक्त था, जब मध्यप्रदेश में गिनती के चीते हुआ करते थे। आज यहां चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अत्यंत हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुई चीता पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक यात्रा अब एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कूनों में बीते दिनों जन्मे चार नन्हें शावक चीता संरक्षण की हमारी यात्रा में आशा, जीवटता और सफलता का सुंदर प्रतीक है। पुनर्स्थापना के चार वर्ष पूर्ण होने के अगले ही दिन शुक्रवार (18 सितम्बर को) भारत में ही जन्मी मादा चीता केजीपी12 ने कूनों में चार नन्हें शावकों को जन्म दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता के लिये यह ऐतिहासिक और हर्ष का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन और उनके संरक्षण के लिए अनुकूल बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता प्रोजेक्ट से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। प्रोजेक्ट चीता : 56 हुआ भारत में चीतों का कुनबा प्रमुख तथ्य     कूनो में गूंजी चीतों की नई किलकारी – भारत में जन्मी मादा KGP12 ने 4 शावकों को दिया जन्म, 52 से बढ़कर 56 हुआ भारत में चीतों का कुनबा।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रोजेक्ट चीता के संरक्षण, संवर्धन और इनकी सुरक्षा पर हो रहा है निरंतर ठोस कार्य।     भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने दिया 4 शावकों को जन्म। नई आमद के साथ चीता संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है।     चार वर्ष – चार नई जिंदगियां। प्रोजेक्ट चीता की यात्रा में यह उपलब्धि भारत में चीता संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन की सफलता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मध्यप्रदेश चीतों के संरक्षण का मजबूत केंद्र बन गया है। वर्ष 2022 से 2026 तक चीता पुनर्स्थापना का सफल सफर     17 सितंबर 2022 – नामीबिया से 8 चीते कूनो पहुंचे।     फरवरी 2023 – दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए।     फरवरी 2026 – बोत्सवाना से 9 चीते भारत लाए गए।     इन पुनर्स्थापना प्रयासों और भारत में हुए प्रजनन के परिणामस्वरूप अब कुल 56 जीवित चीते हैं।     52 से 56 – चीता परिवार में चार नए सदस्य     चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत में 52 जीवित चीते थे।     KGP12 द्वारा 18 सितम्बर 2026 को चार शावकों को जन्म देने के बाद अब संख्या 56 हो गई है। भारत में जन्मे चीतों की संख्या अब 36 हो गई है। नए शावकों के साथ भारत में जन्मी चीता पीढ़ी का विस्तार और मजबूत हुआ है। मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण का हो रहा विस्तार     वर्तमान में मध्यप्रदेश प्रोजेक्ट चीता का प्रमुख केंद्र है।     कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 49 चीते और गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य में 3 चीते थे।     चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीतों की संख्या 53 और मध्यप्रदेश में कुल चीता संख्या 56 हो गई है।     कूनो के साथ गांधी सागर में भी चीता संरक्षण का सफल विस्तार किया गया है। पुनर्स्थापना से प्रजनन तक     17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के साथ भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई थी।     इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए।     भारत में हुआ चीतों का प्रजनन। भारत में जन्मी मादा द्वारा चार शावकों को जन्म देना इस यात्रा में नई उपलब्धि है।     भारत में चीता संरक्षण पुर्नस्थापना तक ही सीमित नहीं, अब यह प्रजनन और नई पीढ़ी के संरक्षण के चरण में पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री की पहल और संरक्षक के रूप में मध्यप्रदेश शासन की भूमिका     प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की ऐतिहासिक पहल से शुरू हुए प्रोजेक्ट चीता को मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और मैदानी अमले द्वारा चीतों की सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, निगरानी एवं आवास प्रबंधन का कार्य लगातार पूरी मुस्तैदी से किया जा रहा है।  

IIM रांची की बढ़ी ग्लोबल साख, QS Business Master’s Rankings 2027 में 201+ बैंड मिला

रांची भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची ने प्रतिष्ठित QS Business Master's Rankings 2027 में जगह बनाकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत की है. संस्थान को Masters in Management कैटेगरी में वैश्विक स्तर पर 201+ बैंड में रखा गया है, जबकि एशिया में 21वां स्थान मिला है. वहीं Masters in Business Analytics (MBA-BA) कैटेगरी में भी IIM रांची को 201+ ग्लोबल बैंड में स्थान मिला है और एशिया में 16वीं रैंक हासिल हुई है. यह उपलब्धि संस्थान की प्रबंधन शिक्षा, अकादमिक गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है. पांच प्रमुख मानकों पर होती है QS रैंकिंग QS Business Master's Rankings दुनिया भर के प्रबंधन संस्थानों का मूल्यांकन पांच प्रमुख मानकों के आधार पर करती है. इनमें Employability (35 प्रतिशत), Alumni Outcomes (15 प्रतिशत), Value for Money (20 प्रतिशत), Thought Leadership (20 प्रतिशत) और Diversity (10 प्रतिशत) शामिल हैं. खास बात यह है कि रैंकिंग में कुल 50 प्रतिशत महत्व रोजगार क्षमता और पूर्व छात्रों की पेशेवर सफलता को दिया जाता है. इससे यह स्पष्ट होता है कि संस्थान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के करियर परिणामों को भी प्राथमिकता देता है. रोजगार क्षमता और करियर पर विशेष फोकस QS की रैंकिंग में Employability सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है. इसके तहत यह देखा जाता है कि किसी संस्थान के छात्र नौकरी के लिए कितने तैयार हैं और नियोक्ता उन्हें किस नजर से देखते हैं. यह पैमाना उद्योग जगत में संस्थान की स्वीकार्यता को भी दर्शाता है. वहीं Alumni Outcomes के तहत पूर्व छात्रों की पेशेवर उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और करियर ग्रोथ का मूल्यांकन किया जाता है. यह इस बात का संकेत होता है कि संस्थान से पढ़कर निकले छात्र लंबे समय में कितनी सफलता हासिल कर रहे हैं. निवेश का बेहतर प्रतिफल भी बना मजबूत पक्ष रैंकिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Value for Money भी है. इसमें यह आंका जाता है कि छात्र जिस फीस का भुगतान करते हैं, उसके मुकाबले उन्हें करियर और आय के रूप में कितना लाभ मिलता है. इसके अलावा Thought Leadership के तहत संस्थान के शोध, अकादमिक योगदान और प्रबंधन शिक्षा में उसके बौद्धिक प्रभाव का आकलन किया जाता है. वहीं Diversity में कक्षा और फैकल्टी में विविधता, समावेशिता और संतुलित प्रतिनिधित्व को महत्व दिया जाता है. दोनों श्रेणियों में मिले उल्लेखनीय अंक Masters in Management श्रेणी में IIM रांची ने Employability में 37.2, Alumni Outcomes में 20, Value for Money में 32.7, Thought Leadership में 32.5 और Diversity में 21.8 अंक प्राप्त किए. दूसरी ओर MBA-Business Analytics श्रेणी में संस्थान को Employability में 27.8, Alumni Outcomes में 20, Value for Money में 27.3, Thought Leadership में 31.1 और Diversity में 25 अंक मिले. ये स्कोर बताते हैं कि संस्थान पारंपरिक प्रबंधन शिक्षा के साथ-साथ डेटा आधारित आधुनिक प्रबंधन कार्यक्रमों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. AMBA मान्यता से और मजबूत हुई वैश्विक पहचान IIM रांची की हालिया उपलब्धियों में Association of MBAs (AMBA) की प्रतिष्ठित मान्यता भी शामिल है. AMBA दुनिया की सबसे सम्मानित बिजनेस स्कूल मान्यताओं में से एक मानी जाती है और इसे प्रबंधन संस्थानों के लिए मिलने वाले प्रतिष्ठित "ट्रिपल क्राउन" मानकों में शामिल किया जाता है. इसके अलावा, QS World University Rankings की Executive MBA श्रेणी में भी IIM रांची पहले ही 201+ ग्लोबल बैंड में जगह बना चुका है. इस श्रेणी में संस्थान को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 33वां स्थान मिला था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही संस्थान की साख लगातार मिल रही वैश्विक रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय मान्यताएं यह संकेत देती हैं कि IIM रांची तेजी से अपनी वैश्विक पहचान मजबूत कर रहा है. संस्थान उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, शोध और कौशल विकास पर जोर दे रहा है, जिससे छात्रों को बेहतर करियर अवसर मिल रहे हैं. QS Business Master's Rankings 2027 में मिली यह सफलता IIM रांची के लिए केवल एक रैंकिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में उसकी बढ़ती विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धी क्षमता का भी प्रमाण है.

अघोरेश्वर भगवान राम जी के चरणों में अर्पित की श्रद्धा, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए की प्रार्थना

रायपुर   परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के अवतरण दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज रायगढ़ जिले के ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ पहुंचे। मुख्यमंत्री श्री साय ने उपासना स्थल पर अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी की प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से भेंट कर उनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने आश्रम की परंपरा के अनुरूप सादगी के साथ पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान आश्रम का सहज, सेवाभावी और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री साय इसके पश्चात अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर के नवीन भवन के लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने नवीन विद्यालय भवन का लोकार्पण कर विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी भी देखी। बच्चों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और नवाचारों में उन्होंने विशेष रुचि दिखाई तथा विद्यार्थियों की जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता की सराहना कर उनका उत्साहवर्धन किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अघोरेश्वर भगवान राम जी का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा। उन्होंने आध्यात्मिक साधना को मानव सेवा से जोड़कर समाज के सामने ऐसा मार्ग प्रस्तुत किया, जिसमें जरूरतमंद और पीड़ित मनुष्य की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया। बनोरा अघोर गुरु पीठ इसी सेवा परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बनोरा आश्रम ने आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ मानव सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। स्वास्थ्य एवं नेत्र शिविरों के आयोजन से लेकर जरूरतमंदों की सहायता और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने तक आश्रम की अनेक सेवा गतिविधियों ने लोगों के जीवन को संबल दिया है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने की यह भावना प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का नवीन भवन इस सेवा यात्रा में शिक्षा के क्षेत्र में जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना और उनमें संस्कार, संवेदनशीलता तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी है। उन्हें विश्वास है कि इस विद्या मंदिर से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ज्ञान-विज्ञान में आगे बढ़ने के साथ सेवा और संस्कारों की परंपरा को भी आत्मसात करेंगे। उन्होंने कहा कि आज का समय तेजी से बदलती तकनीक और विज्ञान का समय है। हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें अच्छी शिक्षा, आधुनिक संसाधन और अपनी प्रतिभा को सामने लाने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की है। विद्यालय में बच्चों द्वारा प्रस्तुत विज्ञान प्रदर्शनी उनकी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का परिचय देती है। ऐसे प्रयास बच्चों में प्रश्न पूछने, नए विचार विकसित करने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकवृंद की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाते नहीं हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ते हैं। शिक्षक राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से बच्चों में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया। अघोरेश्वर भगवान राम जी से हमारे परिवार का रहा है पुराना जुड़ाव : मुख्यमंत्री श्री साय मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अघोरेश्वर भगवान राम जी और बनोरा आश्रम से अपने परिवार के पुराने आत्मीय जुड़ाव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय केदारनाथ साय जी अघोरेश्वर भगवान राम जी के परम शिष्य थे। इस कारण बचपन से ही परिवार में अघोरेश्वर भगवान राम जी के प्रति श्रद्धा और उनके सेवा-दर्शन का वातावरण रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव बगिया से रायगढ़ की ओर आने-जाने के दौरान अनेक अवसरों पर उन्हें बाबा के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से उनका स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। बनोरा आकर उन्हें सदैव आत्मीयता और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। मुख्यमंत्री ने अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट के पदाधिकारियों, संतवृंद, शिक्षकवृंद और आश्रम की सेवा गतिविधियों से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए सेवा भाव से किया गया प्रत्येक कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बनोरा आश्रम केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र नहीं है, बल्कि मानव सेवा, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सरोकारों का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अघोरेश्वर भगवान राम जी ने अपने जीवन और कार्यों से सेवा, दया, करुणा तथा सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, बनोरा आश्रम उसी परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट द्वारा वर्षों से स्वास्थ्य, शिक्षा और जरूरतमंदों की सहायता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। नवीन विद्यालय भवन के माध्यम से इस सेवा परंपरा में शिक्षा का एक और सशक्त आयाम जुड़ा है। उन्होंने पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन में आश्रम की सेवा गतिविधियों के निरंतर विस्तार की कामना की। 8 एकड़ परिसर में एक लाख वर्गफीट में बना आधुनिक विद्यालय अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा द्वारा निर्मित अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का नवीन परिसर करीब 8 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। लगभग एक लाख वर्गफीट में निर्मित जी प्लस-2 भवन में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा और सर्वांगीण विकास का विशेष ध्यान रखा गया है। विद्यालय भवन में 41 कक्षाएं और 9 आधुनिक प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय और तकनीक आधारित शिक्षा के लिए स्मार्ट क्लास की … Read more

42 साल बाद मिला पेंशन का अधिकार, हाईकोर्ट ने सेना से निकाले गए जवान की विधवा के पक्ष में सुनाया फैसला

चंडीगढ़  पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना से महज सात साल की सेवा के बाद अमान्य होकर बाहर किए गए जवान की विधवा की पेंशन का रास्ता चार दशक से अधिक समय बाद साफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि सैनिक ने दस साल की न्यूनतम अर्हकारी सेवा पूरी नहीं की थी, उसे अमान्य पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। मामले में सैनिक की होशियारपुर निवासी विधवा ने करीब 42 साल बाद अपने पति के पेंशन संबंधी अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की थी। मामला ऐसे सैनिक का है, जो 18 अगस्त 1971 को भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। वर्ष 1978 में उसे सेना से अमान्य घोषित कर सेवा से बाहर कर दिया गया था। उसे उस समय अमान्य ग्रेच्युटी और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया था।  बाद में उसकी विधवा ने अपने पति को मिलने वाले पेंशन लाभ का दावा किया। केंद्र सरकार ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि सैनिक ने दस साल की अर्हकारी सेवा पूरी नहीं की थी। इसके अलावा सरकार ने यह भी आपत्ति उठाई कि विधवा ने पेंशन के लिए करीब 42 साल की देरी से दावा किया। हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार अमान्य पेंशन के लिए दस साल की सेवा पूरी होना अनिवार्य बाधा नहीं है। अदालत ने मामले में पेंशन अधिकार को केवल देरी के आधार पर खत्म करने के बजाय लागू पेंशन नियमों और पहले से स्थापित न्यायिक सिद्धांतों को महत्व दिया।       

निवेश से निर्यात तक, एक मंच पर दिखेगा उत्तर प्रदेश का औद्योगिक सामर्थ्य

निवेश से निर्यात तक, एक मंच पर दिखेगा उत्तर प्रदेश का औद्योगिक सामर्थ्य निवेश प्रोत्साहन से लेकर एमएसएमई, ओडीओपी, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा तक की ताकत का होगा प्रदर्शन योगी सरकार के औद्योगिक विजन को वैश्विक मंच देगा चौथा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होगा भव्य आयोजन लखनऊ  उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच देने की तैयारी तेज हो गई है। निवेश से निर्यात तक प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को एक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में किया जाएगा। ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न विभागों, विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक क्षेत्रों, एमएसएमई, ओडीओपी उद्यमियों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है। योगी सरकार के औद्योगिक विजन के अनुरूप आयोजित होने वाला यह ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश संभावनाओं, स्थानीय उत्पादों की विविधता और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। आयोजन में निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत ढांचे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सेवा क्षेत्रों को अलग-अलग हॉल में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे निवेशकों, खरीदारों और उद्यमियों के बीच संवाद तथा कारोबारी साझेदारी के अवसर उपलब्ध होंगे। निवेश प्रोत्साहन से औद्योगिक विस्तार तक, एक मंच पर आएंगे प्रमुख संस्थान चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 1 में इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को स्थान दिया गया है। हॉल 3 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की भागीदारी रहेगी। हॉल 4 में ‘यूपी एट अ ग्लांस’ के माध्यम से प्रदेश की समग्र औद्योगिक एवं विकास क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। हॉल 5 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी। हॉल 6 में सिंचाई, समाज कल्याण, नगर विकास, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग शामिल होंगे। हॉल 7 में नोएडा विकास प्राधिकरण, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटी एवं आईटीईएस तथा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 8 में श्रम विभाग, स्वास्थ्य एवं अस्पताल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा तथा बैंकिंग एवं वित्त से जुड़े क्षेत्र प्रदर्शित होंगे। इन संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, मानव संसाधन और कारोबारी सुविधाओं की जानकारी निवेशकों एवं उद्यमियों तक पहुंचाने का मंच मिलेगा। ओडीओपी और एमएसएमई की ताकत से वैश्विक बाजार तक पहुंच उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ट्रेड शो में एमएसएमई और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को विशेष स्थान दिया गया है। हॉल 9 में ओडीओपी के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि हॉल 10 में नए उद्यमियों एवं एमएसएमई को स्थान दिया गया है। हॉल 11 में पशुपालन, मत्स्य, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जीआई उत्पाद, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा आयुष से जुड़े क्षेत्र शामिल होंगे। हॉल 12 में कृषि विभाग, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यान, डेयरी विकास और चीनी उद्योग की भागीदारी प्रस्तावित है। यह व्यवस्था प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, ग्रामीण उद्यमिता और आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ओडीओपी एवं एमएसएमई उत्पादों की प्रदर्शनी से उद्यमियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, संभावित खरीदारों से संपर्क और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिलेंगे। निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक उद्योगों को मिलेगा मंच ट्रेड शो में निर्यात विस्तार से जुड़े क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी गई है। हॉल 14, 15 और 16 में टाउन ऑफ एक्सीलेंस, निर्यातकों, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, वस्त्र एवं हथकरघा, खेल तथा मुख्यमंत्री युवा से जुड़े क्षेत्रों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 17 में ओडीओपी ओपन स्पेस, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के हितधारक, क्रेडाई और परिवहन क्षेत्र को शामिल किया गया है। निर्यातकों एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने से जुड़े कारोबारी अवसरों को प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। वहीं वस्त्र, हथकरघा, खेल, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के उद्यमी अपने उत्पादों तथा कारोबारी क्षमताओं को संभावित खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे। विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से दिखेगा क्षेत्रीय औद्योगिक सामर्थ्य ट्रेड शो के फोयर एरिया में प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इनमें कानपुर विकास प्राधिकरण, वाराणसी विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण, लखनऊ विकास प्राधिकरण, मेरठ विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण समेत अन्य प्राधिकरण शामिल हैं। विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास, औद्योगिक विस्तार और निवेश से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की कारोबारी संभावनाओं तथा विकास परियोजनाओं की जानकारी निवेशकों और उद्यमियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उद्योग जगत, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भेजे जा रहे आमंत्रण ट्रेड शो में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, उद्योग संगठनों, चैंबरों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों एवं विभागों को पत्र तथा आमंत्रण कार्ड भेजे जा चुके हैं। उद्योग संगठनों एवं चैंबरों को डिजिटल माध्यम से आमंत्रण भेजे गए हैं तथा डाक से आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है। संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी डिजिटल आमंत्रण भेजे जा चुके हैं। बी2बी एवं बी2सी खरीदार पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड तैयार कर प्रसारित किया जा रहा है।

भूजल स्रोतों की जांच में यूपी देश में नंबर-1, पंजाब और आंध्र प्रदेश को छोड़ा पीछे

भूजल स्रोतों की जांच में यूपी ने देश में पहला स्थान हासिल किया, पंजाब-आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ा योगी सरकार प्रदेशवासियों को भूजल की स्वच्छता सुनिश्चित कर उपलब्ध करा रही शुद्ध पेयजल भूजल स्रोतों की जांच में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत आगे 45 हजार से ज्यादा स्रोतों की जांच पूरी, यूपी जल निगम ग्रामीण ने जांच में चार राज्यों को पीछे छोड़ा लखनऊ  योगी सरकार प्रदेशवासियों के लिए जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और हर घर तक स्वच्छ व सुरक्षित जल पहुंचाने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भूजल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थिति की निगरानी को लेकर किए जा रहे परीक्षण कार्य में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जांच के अंतर्गत राज्य व जिले स्तर की प्रयोगशालाओं से प्रदेशभर में भूजल स्रोत, भूमिगत व ओवरहेड टंकी समेत पानी के अन्य स्रोतों की पड़ताल की गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 45,361 स्रोतों की जांच पूरी कर ली गई है। यह कुल लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत है। 15 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश, देश के राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है। यूपी जल निगम ग्रामीण प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि भूजल स्रोतों का नियमित परीक्षण पेयजल की गुणवत्ता और जल स्रोतों की स्थिति की निगरानी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी जल स्रोतों की गुणवत्ता, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और गहन निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर परिणाम हासिल किए हैं और भविष्य में भी प्रदेश में सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा। पंजाब और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ शीर्ष पर यूपी भूजल स्रोतों के परीक्षण की राज्यवार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर है। पंजाब ने निर्धारित लक्ष्य का 83.46 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश ने भी 83.46 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। वहीं उत्तराखंड 82.30 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे और केरल 81.13 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है। राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि यूपी जल निगम ग्रामीण अधीक्षण अभियंता एवं राज्य प्रयोगशाला प्रमुख ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि भूजल स्रोतों के परीक्षण में उत्तर प्रदेश की 94.39 प्रतिशत उपलब्धि राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत से काफी अधिक है। यानि यूपी ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि दर्ज की है। 48 हजार से अधिक स्रोतों का निर्धारित लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा हो चुका है। अब निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2,694 स्रोतों का परीक्षण शेष है। इस तरह प्रदेश ने पहली छमाही में ही निर्धारित लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है।

बिहार बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए नितिन नवीन, मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए ₹6.35 लाख

पटना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाली अपनी तीन महीने की सैलरी को बाढ़ पीड़ितों के लिए दान करने का ऐलान किया है। नितिन ने लगभग 6.35 लाख रुपये सीएम रिलीफ फंड में भेजे हैं। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी। बता दें कि बिहार में बाढ़ से 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। नितिन नवीन मूलरूप से पटना के रहने वाले हैं और वह अभी बिहार से राज्यसभा सांसद हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है। सोशल मीडिया पोस्ट में नितिन नवीन ने कहा कि राज्यसभा सांसद के रूप में वह अपने तीन महीने के वेतन की राशि 635000 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में अंशदान कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बाढ़ से प्रभावित हर परिवार को 7-7 हजार रुपये दे रही है। अब तक कुल 550 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बाढ़ पीड़ितों को दी जा चुकी है। इसके अलावा राहत शिविर, कम्युनिटी किचन, चिकित्सा सुविधाओं और पशु चारे की व्यवस्था बाढ़ प्रभावित इलाकों में की जा रही है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। किसानों की फसल क्षति का आकलन कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है। शिवराज ने किया सर्वे, केंद्र से मिलेगी मदद दो दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में दिल्ली से एक टीम ने बिहार आकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। शिवराज ने कहा था कि केंद्र सरकार बिहार की भरपूर मदद करेगी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का सही से आकलन किया जाएगा। केंद्र से एक और टीम भी बिहार आएगी। 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में बता दें कि बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, सोन समेत अन्य प्रमुख नदियों के उफान से बिहार के तटीय इलाकों में बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया। अब तक 15 से अधिक जिलों की लगभग 50 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। कई लोगों को अपने घरों को छोड़ दूसरी जगह पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। किसी ने अपने खेत-खलिहान तो किसी ने अपने घर-दुकान बाढ़ में खो दिए।

बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

रायपुर  देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है। सूर्य की रोशनी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है। सरगुजा में योजना के प्रति बढ़ा उत्साह, लक्ष्य से अधिक आए आवेदन प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं। विनोद कुमार राय की छत बनी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई। श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है। नीधि वर्मा के परिवार को बिजली खर्च में राहत अम्बिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अपने घर में सोलर बिजली संयंत्र स्थापित कराया। उनके अनुसार संयंत्र लगने से पहले घर का बिजली बिल लगभग 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह आता था। सौर ऊर्जा से घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के बाद बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है। श्रीमती वर्मा को भी योजना के तहत लगभग 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिसमें केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत से बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उनका परिवार ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बना है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से खपत पर नजर रूफटॉप सोलर व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक भी बिजली उपयोग को अधिक समझने और नियंत्रित करने में मदद कर रही है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की बिजली खपत से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। श्री विनोद कुमार राय बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से वे प्रतिदिन की बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार को अनावश्यक रूप से चल रहे विद्युत उपकरणों को बंद करने और बिजली के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता मिली है। इस तरह प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों में ऊर्जा बचत, स्मार्ट बिजली उपयोग और जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को भी बढ़ावा दे रही है। बिजली बिल में राहत के साथ पर्यावरण संरक्षण सौर ऊर्जा का महत्व केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में करने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। एक घर की छत पर स्थापित सोलर संयंत्र छोटी इकाई जरूर है, लेकिन जब हजारों और लाखों परिवार इससे जुड़ते हैं तो सामूहिक रूप … Read more

मथुरा में यूपी राइज 2026: युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की सार्थक पहल

मथुरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए शुक्रवार को नेशनल हाइवे स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वृहद आयोजन में 800 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, चीफ फाइनेंस ऑफिसर डॉ. विवेक अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह और मुख्य अतिथि सीए पलक राठी व शांतनु गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।  सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन राज्य सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी नीतियों की विस्तृत जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व सब्सिडी पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि युवा आर्थिक बाधाओं को पार कर अपने बिजनेस मॉडल को सफल बना सकें। युवाओं के 8 बेहतरीन इनोवेशन ने किया प्रभावित यूपी राइज की थीम के अनुरूप आयोजन में कुल 25 स्टार्टअप आइडिया प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 8 बेहतरीन आइडिया शॉर्टलिस्ट हुए। इनमें लॉजिस्टिक्स के लिए 'बुक माई सारथी', छात्रों के लिए कैंपस-फर्स्ट मार्केटप्लेस 'कैम्पोरा', एआई आधारित ट्रैवल सुपर-प्लेटफॉर्म 'नमस्ते एआई' और स्वदेशी ड्रोन एवियोनिक्स बनाने वाली 'क्वांटावर्स टेक्नोलॉजीज' ने खूब तालियां बटोरीं। वहीं, खदानों और सुरंगों जैसे खतरनाक माहौल में इंसानी जान बचाने के लिए 'दक्ष डायनामिक्स' द्वारा बनाया गया स्वदेशी 'रोबोडॉग' भी आकर्षण का केंद्र रहा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। 'लिटिललिंगोस' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'फिटेड' व 'धृतम' बने उपविजेता प्रतियोगिता में हर टीम को अपना आइडिया प्रस्तुत करने के लिए 7 मिनट का समय दिया गया। जूरी के समक्ष अपनी शानदार प्रस्तुति देकर बच्चों के लिए एआई-पावर्ड इंग्लिश लर्निंग प्लेटफॉर्म 'लिटिललिंगोस' (LittleLingos) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, एआई पर्सनल स्टाइलिंग ऐप बनाने वाली टीम 'फिटेड'(Fitted) और तनाव व हार्ट रेट मापने वाला स्मार्ट अंडरगारमेंट (कवच एक्स) बनाने वाली टीम 'धृतम' (Dhritam) संयुक्त रूप से उपविजेता रहीं। इस दौरान कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, डॉ. मधुरिता गुप्ता और राधिका बजोरिया ने बतौर मेंटर छात्रों का मार्गदर्शन किया। विचारों तक सीमित न रहें, उन्हें धरातल पर उतारें: कुलाधिपति इस अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप के क्षेत्र में अनेक अवसर उपलब्ध करा रही है। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने विचार और प्रतिभा के बल पर रोजगार देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि यदि उनके पास कोई नया इनोवेटिव आइडिया है, तो उसे केवल सोच विचार तक सीमित न रखें। जानकारी जुटाएं, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लें और उसे व्यावहारिक रूप देने का प्रयास करें। 25 शहरों और 30 प्रमुख कॉलेजों तक पहुंचेगा 'यूपी राइज' का कारवां छात्रों को स्वरोजगार और नवाचार की संभावनाओं से रूबरू कराने वाला यह 'यूपी राइज' कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। जीएलए विश्वविद्यालय में इस सफल आयोजन के बाद, स्टार्टअप और उद्यमिता की अलख जगाने वाले इस अभियान का अगला पड़ाव 21 सितम्बर 2026 को बरेली स्थित इनवर्टिस विश्वविद्यालय में होगा।

बिहार में जून महीने में 50.28 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन, ₹70 हजार करोड़ से ज्यादा का भुगतान

 पटना  बिहार(Bihar News) के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल लेनदेन( Bihar UPI Transaction) का चलन तेजी से बढ़ा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के दौरान राज्य में यूपीआई (UPI) के माध्यम से लगभग ₹70,130.89 करोड़ का डिजिटल भुगतान दर्ज किया गया। आंकड़ों की जुबानी बिहार का डिजिटल सफर जून 2026 में बिहार में करीब 50.28 करोड़ डिजिटल भुगतान हुए। इस दौरान यूपीआई के जरिए कुल ₹70,130.89 करोड़ का हस्तांतरण हुआ। प्रति ट्रांजैक्शन औसतन ₹1,395 का भुगतान हुआ, जो यह साबित करता है कि आम लोग किराना दुकान, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश के कुल यूपीआई वॉल्यूम में बिहार की हिस्सेदारी 2.21% और कुल वैल्यू में 2.42% रही। MDR चार्ज का प्रस्ताव और बढ़ता विवाद डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब एक नई चुनौती सामने खड़ी हो रही है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस फीस के लागू होने की खबर से छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है। क्या दोबारा बढ़ेगा कैश का चलन? छोटे दुकानदारों का मानना है कि पहले से ही कम मार्जिन पर काम करने के बाद अतिरिक्त 0.4% का शुल्क उनकी कमाई को प्रभावित करेगा। यदि यह चार्ज व्यापारियों पर डाला गया, तो वे ग्राहकों से डिजिटल के बजाय नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं। वहीं ग्राहकों को भी यह डर है कि व्यापारी इस शुल्क की भरपाई के लिए सामान के दाम बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर MDR शुल्क अनिवार्य किया गया, तो बिहार के ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में लोग एक बार फिर कैश की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन की रफ्तार धीमी हो सकती है।