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गोंड चित्रकला को मिलेगा वैश्विक बाजार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे कलाकार: मंत्री पटेल

गोंड चित्रकला को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिलेगा वैश्विक मंच : मंत्री पटेल अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे जनजातीय कलाकार डिंडोरी में आजीविका ग्राम संगठन और डॉट्स एंड डैशेज के बीच हुआ एमओयू भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। बुधवार को डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित 'अमेज़न ई-कारीगर' मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित विभाग एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वैश्विक पहचान और जीआई टैग पर जोर मंत्री पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को 'जीआई टैग' (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही। आर्थिक सशक्तिकरण और कला संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र डिंडौरी के पाटनगढ़ ग्राम के कलाकारों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कार्यक्रम में "आजीविका ग्राम संगठन" पाटनगढ़ और "डॉट्स एंड डैशेज" संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है। आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 'डॉट्स एंड डैशेज' के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रूपये से बढ़कर 70 हजार रूपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल डिंडौरी जिले में कला आधारित आजीविका का एक सफल उदाहरण स्थापित करेगी।  

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वां वर्ष आरंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सनातन संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा नीहित है। पांच तत्वों से बनी सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारे पूजा पाठ-भोजन और भजन की पद्धति में विद्यमान है। सनातन संस्कृति में एक पेड़ को 10 पुत्रों के बराबर माना गया है। हमारी जीवन पद्धति में पर्यावरण संरक्षण प्रकट होता है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी कार्य पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेश में नदी, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण के लिए पवित्र भाव से कार्य जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम 2.0" अभियान के राज्य स्तरीय समारोह के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण  अशोक बर्णवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। राज्य स्तरीय पुरस्कार किये प्रदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मे दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले, सभागार परिसर में स्वर्ण चंपा, सीता अशोक, रामफल और आंवला का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्यक्रम में 8 श्रेणियों में 11 राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किये। पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत् विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों को वर्ष 2024-25 के लिसे पुरस्कार प्रदान किए। 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्कुलर इकॉनॉमी से संबंधित 5 कोर्स मॉड्यूल्स और एप्को तथा इन्टैक द्वारा प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों, सर्कुलर इकोनॉमी तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वाँ वर्ष आरंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री होंगे। गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री  मोदी सतत निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में रिकॉर्ड बनाएंगे। प्रधानमंत्री का पद उनके आसीन होने से गौरवान्वित हुआ है। परमात्मा ने प्रधानमंत्री  मोदी को यश प्रदान किया है। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 24 दलों के गठबंधन की सरकार चलाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी अनेक सौगातें देश को दी और पूर्ण बहुमत की सरकार की कामना की। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कामना वर्ष 2014 में पूर्ण हुई। सुशासन और विरासत से विकास के मार्ग पर चलते हुए भारत सशक्त हुआ। वर्तमान समय में देश आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त है। भारतीय प्रतिभाएं अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा खेल सहित सभी क्षेत्रों में विश्व में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर परिस्थिति में खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया है। भारत पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मौसम के लिए अलनीनो और पश्चिम एशिया में विषम परिस्थियों के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस सहित ऊर्जा का संकट है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है। गैस त्रासदी प्रकृति से खिलवाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण थी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी आम नागरिकों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे भयावह घटना है। राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़ा कचरा 40 साल बाद सफलतापूर्वक निष्पादित करवाया है। इस तरह से भोपाल की धरती से गैस त्रासदी के कलंक को मिटाया है। अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की भूमि का समुचित प्रबंधन करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे है अनेक कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बॉयोमास और जल विद्युत परियोनाएं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सांची, खजुराहो सहित अन्य स्थानों पर ग्रीन एनर्जी के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कर रहा है प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के अलावा असम से जंगली भैंसे भी लाए गए हैं। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के साथ सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल पुरुस्कृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मे. विसाग बॉयो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड बारासिवनी बालाघाट, आर.सी.सी.पी.एल. सीमेंट मैहर, टैफे मोटर्स एंड ट्रैक्टर्स लिमिटेड मंडीदीप जिला रायसेन, रामरमा मैंगनीज और माइन्स बारासिवनी बालाघाट, केसर एग्रोटेक बारासिवनी बालाघाट, नगर पालिका परिषद सिवनी मालवा, हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल, विजेश लूनावत स्मृति फाउण्डेशन भोपाल, एक्रोपॉलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंदौर, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल सूर्य विहार सिंगरौली को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल प्रदेश की अन्य औद्योगिक इकाइयों और संस्थाओं को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगी। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान ने जन सहभागिता से नए आयाम स्थापित किए राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हवा, पानी और पेड़ बचाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान सफल हुआ है। इस अभियान में जन सहभागिता के नए आयाम स्थापित हुए हैं। अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायरमेंट का नारा दिया, जो विश्व में प्रसिद्ध हुआ। भारत सरकार का मिशन लाइफ, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि हमें प्राकृतिक … Read more

टीटी नगर स्टेडियम में दौड़ेगी फिटनेस, जुनून और ऊर्जा की नई रफ्तार

भोपाल रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में पहली बार “वेलोसिटी नाइट रन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह अनोखा नाइट रन 6 जून 2026 को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित होगा, जिसमें शहर सहित प्रदेशभर के रनर्स, फिटनेस प्रेमी एवं युवा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में फिटनेस, अनुशासन, स्वास्थ्य जागरूकता एवं खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। रात्रिकालीन वातावरण में आयोजित होने वाला यह रन प्रतिभागियों को स्टेडियम की रोशनी के बीच ऊर्जा, उत्साह और रोमांच से भरपूर अनुभव प्रदान करेगा। प्रतियोगिता में 1 घंटे, 2 घंटे एवं 3 घंटे की विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, जिनमें प्रतिभागी अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा ले सकेंगे। सभी प्रतिभागी रन शुरू होने के समय से 30 मिनट पूर्व रिपोर्टिंग करें। लेट एंट्री मान्य नहीं होगी। रन के दौरान प्रतिभागियों के लिए विभिन्न रंगों की ट्रैक लेन निर्धारित की गई हैं, ताकि प्रतियोगिता का संचालन व्यवस्थित एवं सुरक्षित रूप से किया जा सके। स्टेडियम परिसर में विशेष फिटनेस एवं रनिंग जोन भी तैयार किए जाएंगे। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि वेलोसिटी नाइट रन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने की एक प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर आत्मविश्वास एवं अनुशासन विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ संगीता जौहरी ने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों एवं युवाओं के समग्र विकास के लिए खेल, स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहा है। वेलोसिटी नाइट रन 2026 युवाओं को फिटनेस के साथ सकारात्मक ऊर्जा एवं टीम स्पिरिट का अनुभव प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिक से अधिक युवाओं, खिलाड़ियों एवं फिटनेस प्रेमियों से इस विशेष नाइट रन में सहभागिता करने की अपील की है।

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती, मंत्री भूरिया ने जताई चिंता

भोपाल विश्व पर्यावरण दिवस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रकृति के साथ हो रहे मानवीय हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा की अनियमितता, प्लास्टिक प्रदूषण और जल संकट जैसी विकराल पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। हमारे पूर्वज हमें एक बेहद समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपकर गए हैं, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। बेंगलुरु जैसे महानगरों में वर्षों पुराने वृक्ष आज भी वहां के नागरिकों की जागरूकता के कारण सुरक्षित हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 जून तक पूरे झाबुआ जिले में 1 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ पौधों को जीवित रखना और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पूरे अभियान की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग 'मेरी लाइफ' (Meri LiFE) ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने पूर्व के वर्षों में रोपे गए महुआ के पौधों की विशेष देखरेख और मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।  

राजीव स्मृति वन में बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी,  जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सु चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है। कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की बड़ी पहल, विभिन्न आय वर्गों के लिए विकसित होंगे आधुनिक मकान

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के अंतर्गत एक आधुनिक आवासीय परियोजना विकसित की जा रही है। यह परियोजना क्षेत्र में सुव्यवस्थित एवं योजनाबद्ध आवासीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथा कुनकुरी क्षेत्र की पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी होगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करने तथा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी उद्देश्य के अनुरूप मंडल द्वारा इस परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास एवं कुनकुरी वासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही जशपुर में आने वाले दिनों में शीघ्र ही अटल विहार योजना बालाछापर, पत्थलगॉव एवं अटल आवास योजना महुआ टोली, कंदोरा पर भी आवासीय योजनाए प्रारंभ की जाएगी। ज्ञात हो कि इससे पूर्व कुनकुरी में कोई व्यवस्थित कॉलोनी मण्डल अथवा प्राईवेट बिल्डर्स द्वारा विकसित नही किया गया है। आवास मंत्री एवं जिला जशपुर के प्रभारी मंत्री  ओ. पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर यह आवासीय परियोजना ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी, जिला जशपुर में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशाकीय स्वीकृति दी गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवासों का निर्माण किया जाएगा।जिसमे EWS एवं LIG  श्रेणी के 91 मकान निर्मित किये जाएंगे। अटल विहार योजना हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को  1/- रुपयें प्रति वर्गफीट के हिसाब से भूमि आबंटित की गई है तथा ई.डब्ल्यू.एस. अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रुपयें 80,000/- एवं एल.आई.जी. के पात्र हितग्राहियों को रुपयें 40,000/- का अनुदान दिया जाता है।   अनुराग सिंह देव अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा बताया गया कि विकसित की जा रही यह कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलोनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, स्वच्छ एवं हरित वातावरण, समुचित जल निकासी व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक नियोजित आवासीय परिसर के रूप में विकसित होने के कारण यह परियोजना नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की संभावना रखती है। परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-43) से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान शहर से सटा हुआ होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण संस्थानों के निकट भी है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, शासकीय कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण शासकीय भवनों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के समीप शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को गति मिलने के साथ-साथ भविष्य में भूमि का विकास एवं मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी प्रबल हैं, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है । यह परियोजना क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी, मंत्री टेटवाल ने किया जनभागीदारी का आह्वान

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है: मंत्री टेटवाल विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्लोबल स्किल्स पार्क में हुआ पौध-रोपण प्रदेश की सभी आईटीआई में 200 पौधों का होगा रोपण भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि मानव जीवन और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक है। वर्षों से हम प्रकृति से जल, वायु, भूमि और अन्य संसाधन प्राप्त करते रहे हैं, लेकिन विकास और सुविधाओं की बढ़ती आवश्यकता के बीच प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी हुआ है। इसका परिणाम आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, तापमान में वृद्धि और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाना आवश्यक हो गया है। पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित पौध-रोपण कार्यक्रम में मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि अब समय केवल प्रकृति से लेने का नहीं, बल्कि उसे लौटाने का है। पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयास किसी एक दिन, सप्ताह या अभियान तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन्हें हमारे दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार आचरण अपनाए तो बड़े सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए करें सतत प्रयास मंत्री टेटवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं है। प्रदूषण को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदियां, तालाब, जलाशय और अन्य जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए किए जाने वाले प्रयास निरंतर और आजीवन होने चाहिए। वर्तमान पीढ़ी यदि पर्यावरण और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। प्रदेशभर में चलेगा पौधरोपण अभियान मंत्री टेटवाल ने बताया कि विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर निर्माण के उद्देश्य से प्रदेश की प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में 200-200 पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क परिसर में 1000 पौधे लगाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौध-रोपण भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री टेटवाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल औपचारिक गतिविधि न मान कर इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव ही बेहतर भावी जीवन की आधारशिला है। पर्यावरण संरक्षण वर्षभर की जिम्मेदारी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश शर्मा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य केवल एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। पर्यावरण संरक्षण वर्ष के सभी 365 दिनों की जिम्मेदारी है। संस्थान द्वारा हरित परिसर निर्माण, पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और व्यवहारगत परिवर्तन ही इस दिशा में स्थायी परिणाम सुनिश्चित कर सकते हैं। कार्यक्रम में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और स्वच्छता के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया। इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।  

धर्म, अनुशासन और शौर्य का संगम: गुरुद्वारा सिंह शहीदां में जारी गुरमत-गतका प्रशिक्षण शिविर

मोहाली. बच्चों को गुरसिख धर्म, सिख इतिहास और सिख परंपराओं से जोड़ने के मकसद से गुरुद्वारा सिंह शहीदां सोहाना में 18 दिन का गुरमत और गतका ट्रेनिंग कैंप लगाया जा रहा है। यह कैंप 1 जून से शुरू हुआ है और 18 जून तक हर दिन सुबह 6 बजे से 9 बजे तक चलेगा। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रवक्ता ने बताया कि मैनेजमेंट कमेटी और गतका अखाड़े की तरफ से मिलकर लगाए गए इस कैंप में बच्चों को सिख इतिहास, पंजाबी भाषा का ज्ञान, गुरबानी कंठा, गुरमत शिक्षा, शास्त्र विद्या और गतका की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कैंप के दौरान बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट और उनके धार्मिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए कई तरह की एक्टिविटीज़ करवाई जा रही हैं। कैंप के आखिरी दो दिनों में गुरमत प्रशोंत्री कॉम्पिटिशन, गुरबानी कंठा कॉम्पिटिशन और गतका कॉम्पिटिशन होंगे। ऑर्गनाइज़र के मुताबिक, कॉम्पिटिशन में अच्छा परफॉर्म करने वाले स्टूडेंट्स को स्पेशल प्राइज़ दिए जाएंगे, जबकि कैंप में हिस्सा लेने वाले हर स्टूडेंट को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कैंप के दौरान, एक दिन स्टूडेंट्स को बसों के ज़रिए श्री चमकौर साहिब, दास्तान-ए-शहादत और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कराए जाएंगे, ताकि बच्चों को सिख इतिहास और गुरुओं की शहादत के बारे में डिटेल में जानकारी मिल सके। कैंप के दौरान रोज़ गुरु का अटूट लंगर भी परोसा जा रहा है। गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने इलाके के पेरेंट्स से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे धार्मिक और कल्चरल कैंप से जोड़ें, ताकि नई पीढ़ी सिख सिद्धांतों, गुरबानी और सिख विरासत से और मज़बूती से जुड़ सके।

पीड़ित दुकानदार को दिलासा, धमोली और SDM पहुंचे मौके पर, हालात का किया आकलन

राजपुरा.  पंजाब व्यापार आयोग के वाइस चेयरमैन गुरप्रीत सिंह धमोली और SDM राजपुरा सुखजिंदर सिंह टिवाना ने हाल ही में लगी आग से बुरी तरह प्रभावित PMN कॉलेज रोड पर स्थित दुकान का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने दुकान के मालिक पलविंदर सिंह गोलू से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी ली। दुकानदार पलविंदर सिंह ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर में मौजूद थे। पड़ोसियों ने फोन पर आग लगने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी तीन मंजिला दुकान में आग तेजी से फैल गई थी और फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने काफी मुश्किल के बाद आग पर काबू पाया। उनके मुताबिक इस घटना में करीब 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। SDMS सुखजिंदर सिंह टिवाना ने कहा कि पीड़ित दुकानदार को नियमानुसार बनता मुआवजा दिलाने के लिए सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी। इस मौके पर गुरप्रीत सिंह धमोली ने कहा कि पंजाब सरकार व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और व्यापार आयोग व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस मौके पर AAP नेता कीरत सिंह सिहरा, हरदीप सिंह टिंकू, जगमीत सिंह और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती, वन मंत्री केदार कश्यप ने बताए बड़े कदम

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती -वन मंत्री केदार कश्यप वन मंत्री ने किया राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ विशेषज्ञ देंगे वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने निवास कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय भी साथ में थे। इस कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए। संरक्षण प्रयासों से बढ़ी हाथियों की संख्या            वन मंत्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। मानव-हाथी संघर्ष कम करना सरकार की प्राथमिकता             कश्यप ने बताया कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार जनभागीदारी, सतत निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर            वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति पर कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं। विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन और संरक्षण का प्रशिक्षण          कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वन्यजीव संरक्षण में छत्तीसगढ़ बन रहा मॉडल राज्य         वन मंत्री कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का किया आभार व्यक्त        वन मंत्री ने सभी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने का आह्वान किया।