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त्विषा मर्डर केस: CBI के शिकंजे में सास गिरिबाला, अस्पताल ले जाकर होगा मेडिकल; आज कोर्ट में पेशी

नई दिल्ली.  त्विषा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। त्विषा की सास गिरबाला सिंह को गुरुवार को सीबीआई ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही है।  यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद किए जाने और 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई राहत को खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई है। बता दें आज ही सिंह को कोर्ट ने सामने पेशा किया जाएगा।  एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने क्या कहा? इस मामले में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा, 'हाई कोर्ट ने इस मामले में कुछ बातों को गंभीरता से लिया है, जैसे त्विषा शर्मा के शरीर पर मौत से पहले की सात चोटें, जो एक गंभीर अपराध की ओर इशारा करती हैं। इसके साथ ही कई नोटिसों के बावजूद गिरिबाला सिंह का जांच में मदद न करना और WhatsApp चैट, जो त्विषा के मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती हैं। इन सभी बातों को देखते हुए, हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब यह CBI को तय करना है कि हिरासत में पूछताछ की जानी चाहिए या नहीं।' बेटे ने 10 दिन बाद किया था सरेंडर इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने उन आरोपों का भी गंभीरता से संज्ञान लिया कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए किया हो सकता है। पिछले हफ्ते, गिरिबाला के बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने 10 दिनों तक फरार रहने के बाद एक अदालत के सामने सरेंडर किया था। बता दें गिरिबाला सिंह की सास रिटायर्ड जज हैं और उनके वकील बेटे समर्थ पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोप हैं। CBI ने सोमवार को औपचारिक रूप से 12 मई को हुई त्विषा शर्मा की मौत की जांच अपने हाथ में ले ली। सीबीआई ने दर्ज की थी FIR सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले से दर्ज की गई FIR को फिर से दर्ज किया था। CBI की FIR के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने विदाई के समय त्विषा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे पीड़िता के परिवार ने उनके जोर देने पर दे दिया था। सुनवाई के दौरान, त्विषा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता कथित तौर पर मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी। हाई कोर्ट ने पाया कि त्विषा के माता-पिता और रिश्तेदारों के दर्ज बयानों में जांच के पहले ही दिन से लगातार यह आरोप लगाया गया है कि समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह, दोनों ही त्विषा का उत्पीड़न कर रहे थे।

भोजशाला मामले में कानूनी लड़ाई तेज, SC में दाखिल हुई तीसरी याचिका

धार धार भोजशाला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका लगी है। सुप्रीम कोर्ट अब भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। तीसरी याचिका जिब्रान अंसारी ने प्रस्तुत की है। तीनों याचिकाओं पर अब तक कोर्ट ने सुनवाई शुरू नहीं की है। उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके। भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। पिछली याचिकाओं पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात साढ़े आठ बजे कोर्ट में याचिका लगाई थी। आधी रात दाखिल हुई नई याचिका भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार “Jebran Ansari Vs Union of India” नाम से यह याचिका डायरी नंबर 33643/2026 के तहत दर्ज की गई है। बताया गया कि याचिका 26 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे दाखिल की गई, जिससे यह स्पष्ट माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में कानूनी तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती नई याचिका में इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने भोजशाला विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया था। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मामले की एंट्री सुप्रीम कोर्ट में होते ही दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई है। धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में नई याचिका के बाद धार्मिक संगठनों और विभिन्न पक्षों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ सकती है। विवाद को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश का माहौल फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं। कानूनी लड़ाई अब नए चरण में सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब यह विवाद नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ अदालत में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकरण की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। संवेदनशील मामले पर बढ़ी निगरानी भोजशाला विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने धार सहित प्रदेश की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को फिर केंद्र में ला दिया है। कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण हैं, जिनके आधार पर हम सुप्रीम कोर्ट में साबित करेंगे कि धार का परिसर मंदिर नहीं, मस्जिद है। हाईकोर्ट ने एएसआई की जिस रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर बताया, वही पूर्व की रिपोर्ट में भोजशाला को मस्जिद बताती रही है।

कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत: बिहार में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलेगी पीरियड लीव

 पटना बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की कामकाजी महिलाओं के हित में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार की इस नई पहल के बाद अब राज्य की संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को एक बहुत बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार ने इन महिलाओं के लिए एक विशेष नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत इन्हें हर महीने 'स्पेशल लीव' की सौगात दी जाएगी। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य की लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिला कर्मियों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। हर महीने मिलेगी 2 दिनों की स्पेशल लीव, बिहार बना देश का पहला राज्य इस नई नीति के लागू होने के बाद अब बिहार की तमाम संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को हर महीने 2 दिनों की स्पेशल लीव दी जाएगी। गौरतलब है कि नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों की तरह ही इन संविदा कर्मियों को भी लंबे समय से इस सुविधा की दरकार थी। अब बिहार पूरे देश में ऐसा पहला और इकलौता राज्य बन गया है, जिसने संविदा और आउटसोर्सिंग स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को प्रति माह 2 दिनों की विशेष छुट्टी देने की घोषणा की है। पीरियड लीव का पुराना इतिहास और अन्य राज्यों की स्थिति क्या है? बिहार में महिला कर्मचारियों को मिलने वाली यह विशेष छुट्टी असल में 'पीरियड लीव' के तौर पर जानी जाती है। इस व्यवस्था की सबसे पहली शुरुआत 34 साल पहले साल 1992 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान की गई थी, जब नियमित महिला कर्मियों के लिए 2 दिनों की विशेष छुट्टी का प्रावधान लागू हुआ था। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी अपने राज्य में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर्स की महिलाओं के लिए पीरियड लीव की नीति घोषित की है, लेकिन वहां केवल एक ही दिन की छुट्टी का प्रावधान है। वहीं बिहार अब संविदा और आउटसोर्सिंग महिलाओं के लिए भी पूरे 2 दिनों की छुट्टी लागू कर देश में सबसे आगे निकल गया है। ड्यूटी टाइमिंग के विवाद के बीच महिला कर्मियों के लिए बड़ी राहत बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मुख्य सचिव के एक पत्र को लेकर काफी घमासान मचा हुआ था। दरअसल, नए आदेश के मुताबिक नियमित महिला कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक तय है, जबकि संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को शाम 6 बजे तक यानी एक घंटा अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इस टाइमिंग को लेकर भले ही अभी थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन इसी बीच बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ट्वीट कर इस 2 दिनों की 'स्पेशल लीव' की घोषणा ने महिलाओं के चेहरे पर बड़ी खुशी ला दी है। महिला संगठनों का कहना है कि यह नई व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगी।

पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे कनेक्टिविटी, 33 लाख का सर्वे स्वीकृत

बालोतरा राजस्थान में बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. रेलवे ने बालोतरा से पचपदरा को जोड़ने वाली नई लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी के लिए बालोतरा से पचदरा तक 11 किमी नई लाइन के सर्वे के लिए 33 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी. साथ ही क्षेत्र का जोधपुर और अहमदाबाद व दिल्ली-जयपुर की ओर भी सम्पर्क स्थापित होगा. सर्वे काम पूरा होने के बाद बनेगी DPR बालोतरा से पचपदरा तक प्रस्तावित रेल रूट इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस नई रेल लाइन के निर्माण से पचपदरा स्थित रिफ़ाइनरी तक रेल मार्ग के माध्यम से पहुंच और सुगम होगी. साथ ही रोज़गार, व्यापार, कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए नए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा. 11 किलोमीटर नई लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद परियोजना की वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर DPR तैयार कर कार्य स्वीकृत रेलवे बोर्ड स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी. 35 साल पहले इस मार्ग पर चलती थी ट्रेन इस मार्ग पर लगभग 35 साल पहले ट्रेन चला करती थी, जिसे 1992 में बंद कर दिया गया था और बाद में रेलवे ट्रैक भी हटा लिया गया था. इस पुरानी ट्रेन की कहानी पचपदरा के नमक उद्योग से जुड़ी है. सैकड़ों सालों से नमक उत्पादन का केंद्र रहे पचपदरा में, स्थानीय नगर सेठ गुलाब चंद के आग्रह पर तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार ने 1939 में बालोतरा से पचपदरा साल्ट तक एक रेलवे ट्रैक बिछाया था. इस ट्रेन में नमक लदान के लिए वैगन के साथ दो यात्री कोच भी जोड़े गए थे. पचपदरा साल्ट की नमक खदानों से हज़ारों टन नमक रोज़ाना इसी ट्रेन से ढोया जाता था.1990 की बाढ़ में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ट्रेन बंद कर दी गई थी.

बोरवेल अनुमति के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, हरियाणा सरकार ने तय की 45 दिन की समयसीमा

चंडीगढ़. हरियाणा में अब 45 दिन के अंदर बोरवेल लगाने की अनुमति दी जाएगी। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण ने भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति देने से जुड़े कार्यों को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पदाभिहित अधिकारी के रूप में मुख्य तकनीकी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित समयावधि में अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति जारी कर दी जाए। 45 दिन में बोरवेल की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी मुख्य जल विज्ञानी के पास अपील की जा सकेगी। अगर फिर भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मामले को निपटाएंगे। वहीं, प्रदेश में अब भी 57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें से 13 हजार 360 किसान पूरा शुल्क जमा करा चुके हैं, जिन्हें अगस्त अंत तक ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। 31 दिसंबर 2023 तक किए गए आवेदनों के लिए मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पूरी लागत राशि जमा करा चुके उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 4241 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 9119 किसानों को छह महीने में बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जाएंगे। 10 बीएचपी तक आवेदन करने वालों को आफ-ग्रिड सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच आवेदन करने वाले 43 हजार 527 किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 16 हजार 323 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 27 हजार 204 किसान शामिल हैं।

किसानों को साधने की बड़ी कोशिश! भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लो ने खेला ‘MSP कार्ड’

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा सियासी दांव खेलते हुए Kewal Singh Dhillon को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पद संभालते ही केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि 2027 में पंजाब में भाजपा का कमल खिलेगा और राज्य में पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि वह पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह जैसा सुशासन और विकास वाला दौर वापस लाना चाहते हैं। नियुक्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ढिल्लों ने किसानों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब के किसानों को केंद्र द्वारा सूचीबद्ध सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करेगी। ढिल्लों ने कहा, “अगर Haryana में 21 फसलों पर MSP दी जा सकती है, तो पंजाब में क्यों नहीं?” उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों के हितों को प्राथमिकता देगी और खेती से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करेगी। उन्होंने कहा, “पंजाब थका जरूर है, लेकिन टूटा नहीं है। हम पंजाब को फिर से विकास की राह पर लाएंगे और इसे देश का नंबर-1 राज्य बनाएंगे।” ढिल्लों ने विपक्ष पर भी निशाना साधा इस दौरान केवल सिंह ढिल्लों ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो चुटकुले सुनाने आते हैं और न ही शेरो-शायरी करनी आती है। वह ड्रामेबाजी में नहीं बल्कि मेहनत और जमीनी स्तर पर काम करने में विश्वास रखते हैं। उनका कहना था कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब का विकास और राज्य को दोबारा खुशहाल बनाना है। ढिल्लों ने कहा कि आज पंजाब नशे, बेरोजगारी और गैंगस्टरवाद जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब है और कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए केवल भाषणों या दिखावे से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर मेहनत करनी होगी।

चार TI समेत पांच SI और दो ASI का ट्रांसफर, जांजगीर SP का बड़ा प्रशासनिक फैसला

जांजगीर-चांपा. पुलिस महकमे की कार्यशैली में कसावट के लिहाज से जांजगीर-चाम्पा पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने कई अहम तबादले किए हैं. पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, चार निरीक्षकों के थानों बदलाव किया गया है. इसके साथ पांच उपनिरीक्षकों और दो सहायक उप निरीक्षक का तबादला किया गया है. इनमें शिवरीनारायण थाना प्रभारी राजीव श्रीवास्तव को बिर्रा थाना का प्रभार दिया गया है, वहीं बिर्रा थाना प्रभारी जय साहू को यातायात शाखा भेजा गया है.               इनका किया गया तबादला निरीक्षक राजीव श्रीवास्तव को थाना प्रभारी शिवरीनारायण से थाना प्रभारी बिर्रा। निरीक्षक जय कुमार साहू को थाना प्रभारी बिर्रा से यातायात शाखा। निरीक्षक कमलेश कुमार शेन्डे को रक्षित जांजगीर से थाना प्रभारी अजाक। निरीक्षक रंजीत सिंह कंवर थाना प्रभारी अजाक से चौकी प्रभारी नैला। उप निरीक्षक कृष्णपाल सिंह थाना प्रभारी बम्हनीडीह को थाना प्रभ्ज्ञारी शिवरीनारायण। उप निरीक्षक दिलीप कुमार सिंह चैकी प्रभारी पंतोरा से थाना प्रभारी बम्हनीडीह। उप निरीक्षक कृष्ण कुार साहू थाना पामगढ़ से चौकी प्रभारी पंतोरा। उप निरीक्षक विनोद कुमार जाटवर थाना अकलतरा को पुसके प्रभारी कोटमी सोनार, थाना अकलतरा। उप निरीक्षक कमलदास बनर्जी को थाना जांजगीर से थाना अकलतरा। सउनि कुष्ण कुमार कोशले रक्षित केंद्र जांजगीर से थाना पामगढ़। सउनि प्रतीभा राठौर को पुसके कोटमी सोनार, थाना अकलतरा से महिला थाना।

‘गाय खाने वाले भी अब राष्ट्र माता की मांग कर रहे’, धीरेंद्र शास्त्री का बयान चर्चा में

खजुराहो पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। यह अभियान आगामी 27 जुलाई को भारत के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसमें ज्ञापन सौंपने और हस्ताक्षर अभियान शामिल होगा। पंडित धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में उत्तराखंड स्थित श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर हैं। 21 दिवसीय कठिन साधना पूरी करने के बाद उन्होंने बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण भगवान की पांच दिवसीय कथा का शुभारंभ किया। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से उन्होंने देशभर के सनातनियों, गौ सेवकों और संत समाज से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया। पंडित शास्त्री बोले-गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए। साथ ही, सड़कों पर भटक रही गौ माताओं को सम्मानपूर्वक गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी। उन्होंने गौ सेवकों और सनातनियों से अपने-अपने जिलों में एकत्र होकर गौ संरक्षण के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया। व्यासपीठ से संबोधित करते हुए बागेश्वर सरकार ने एक समाचार का उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में सामने आ रहे हैं। बाबा बोले-गाय को खाने वाले भी राष्ट्र माता बनाने की मांग कर रहे उन्होंने मौलाना मदनी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी भारत सरकार से यह मांग की है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हम लोग गाय को रोटी खिलाते हैं, कुछ लोग रोटी के साथ गाय खाते हैं, लेकिन अब वे भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में आगे आ रहे हैं। देश बदल रहा है।” उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि सभी संत महात्मा और सनातनी दिल्ली पहुंचकर गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग को मजबूती प्रदान करें। बद्रीनाथ धाम में चल रही श्री सत्यनारायण कथा के दौरान यह घोषणा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और देशभर के गौ भक्तों में इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

पराली धुआं और PM2.5 से बढ़ रहा हाइपरटेंशन, डॉक्टरों की चेतावनी

नई दिल्ली  हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा पराली के धुएं और प्रदूषण से जहरीली हो जाती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि दिल और ब्लड प्रेशर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने कहा है कि पराली जलाने और बढ़ते एयर पल्यूशन का सीधा संबंध हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से जुड़ा पाया गया है। एम्स और IIT दिल्ली की संयुक्त स्टडी का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि जिन इलाकों में पराली जलाने का असर ज्यादा था, वहां रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा करीब 15 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं PM2.5 प्रदूषण में हर 10 माइक्रोग्राम की बढ़ोतरी की स्थिति में हाइपरटेंशन का खतरा लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ता देखा गया।  एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अंबुज कुमार ने बताया कि स्टडी में उत्तर भारत के चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, यूपी और बिहार के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए 2015-16 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के डेटा का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने पिछले 30 दिनों में 100 से ज्यादा फायर इवेंट वाले क्षेत्रों में रहकर धुएं का सामना किया, उनमें हाइपरटेंशन का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा पाया गया। शोध में बताया गया कि हाई इंटेंसिटी बायोमास बर्निंग वाले इलाकों में रहने वालों में हाइपरटेंशन की संभावना लगभग 15% तक बढ़ जाती है। डॉक्टर अंबुज ने कहा कि स्टडी में यह भी सामने आया कि हवा की दिशा में आने वाले यानी डाउनविंड क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर इसका असर और ज्यादा गंभीर होता है। 'बायोमास बर्निंग को रोका जाए' डॉक्टर ने कहा कि खासकर बुजुर्गों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि यदि बड़े स्तर पर बायोमास बर्निंग को रोका जाए तो उत्तर भारत में अगले पांच वर्षों में करीब 1.73 से 2.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर (PPP आधार पर) की आर्थिक बचत भी संभव है। हाई BP से सालाना 16 लाख मौतें डॉक्टर अंबुज ने बताया कि भारत में हर साल करीब 16 लाख लोगों की मौत हाइपरटेंशन के कारण होती है। यह संख्या टीबी से होने वाली मौतों से पांच गुना ज्यादा है और टीबी, मलेरिया, डेंगू व एचआईवी जैसी कई संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों से भी अधिक है।  इसके बावजूद बड़ी चिंता यह है कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। हाइपरटेंशन को 'साइलेंट लेकिन घातक बीमारी' कहा जाता है, क्योंकि 90 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। कई लोग यह मानते हैं कि सिरदर्द या गुस्सा नहीं आता तो ब्लड प्रेशर नहीं होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग बिना जांच के बीमारी के साथ जी रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चार में से एक और शहरी क्षेत्रों में हर तीन में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार है।

1.25 लाख उपभोक्ताओं को फायदा: लखनऊ में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से मिलेगा छुटकारा

 लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के पारा क्षेत्र के लोगों को अगले महीने से बड़ी राहत मिलने जा रही है। इलाके में रहने वाले करीब 1.25 लाख उपभोक्ताओं को जल्द बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। पिछले लंबे समय से बिजली संकट की मार झेल रहे निवासियों को अगले महीने समस्या से राहत मिल जाएगी। लेसा द्वारा निर्माणाधीन न्यू एफसीआई उपकेंद्र अगले माह तक यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इससे पारा, प्रभातपुरम, मुनेश्वरपुरम, चौधरीटोला, चिलौली, रेवरी, सलेमपुर पतौरा, नरौरा, वादरखेड़ा, जनता विहार, बुद्धेश्वर विहार, पिंक सिटी, भटपामऊ सहित आसपास की करीब तीन दर्जन से अधिक कॉलोनियों की बिजली व्यवस्था सुधर जाएगी। आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके वर्तमान में पुराने एफसीआई उपकेंद्र की कुल क्षमता 25 एमवीए है, जिसमें 10-10 एमवीए के दो और 05 एमवीए का एक पावर ट्रांसफार्मर लगा है। इस उपकेंद्र पर लगभग 26 हजार उपभोक्ताओं का भार है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग बढ़ते ही ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं, जिससे आए दिन ट्रिपिंग और घंटों की कटौती होती है। इस समस्या के कारण क्षेत्र के आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके हैं। 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे लेसा ने इसी समस्या के समाधान के लिए पुराने उपकेंद्र परिसर में ही नया केंद्र बनाने का निर्णय लिया। इसमें 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इस विस्तार के बाद क्षेत्र के लगभग 1.25 लाख लोगों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी। अधिकारी बोले अमौसी जोन में मुख्य अभियंता के राम कुमार ने बताया कि न्यू एफसीआई उपकेंद्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अगले महीने तक यह चालू हो जाएगा। इससे प्रभातपुरम और मुनेश्वरपुरम जैसे बड़े इलाकों को बेहतर वोल्टेज और निर्बाध सप्लाई मिलेगी। साथ ही पुराने उपकेंद्र का भार कम होने से तकनीकी खामियां भी कम होंगी। कहीं केबल में आग, कहीं ट्रांसफार्मर फुंके उधर, राजधानी में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली विभाग की जर्जर व्यवस्था ने आम जनता को बेहाल कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। मंगलवार रात से बुधवार शाम तक शहर के विभिन्न हिस्सों में केबल फाल्ट, ट्रांसफार्मर खराबी और अंडरग्राउंड केबल में आग लगने की घटनाओं से हाहाकार मचा रहा। लोग पूरी रात सो नहीं सके और सड़कों पर टहलकर वक्त काटने को मजबूर हुए।