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16 सितंबर से शहडोल में बास्केटबॉल का रोमांच, 10 टीमों के 240 खिलाड़ी खेलेंगे 48 मुकाबले

शहडोल  शहडोल जिले में एक बार फिर से बास्केटबॉल का महाकुंभ लगने वाला है. जिसमें प्रदेश भर की 10 टीम में शामिल होंगी. वहीं, कई बड़े मुकाबले खेले जाएंगे. राज्य स्तरीय इस आयोजन की तैयारी के लिए आज शहडोल जिला मुख्यालय में बैठक का आयोजन किया गया. जिसमें कई आला अधिकारी शामिल हुए और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई. क्योंकि इसमें प्रदेश के अलग-अलग संभाग की कई टीमें शामिल होंगी।  बास्केटबॉल के महाकुंभ की तैयारी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''70वीं शालेय राज्य स्तरीय बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया जाना है. जिसके तैयारी के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक ली गई है. बैठक में उन्होंने बताया कि विराट नगरी शहडोल में 70वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा बास्केटबाल प्रतियोगिता 16 से 19 सितम्बर 2026 तक आयोजित होगी. प्रतियोगिता में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले 17 साल के बालक एवं बालिकाएं अपना जौहर दिखाएंगी. बास्केटबॉल टूर्नामेंट में 120 बालक एवं 120 बालिका खिलाड़ी शामिल होंगे।  कहां-कहां खेले जाएंगे मुकाबले संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''शहडोल के कान्वेंट स्कूल का खेल मैदान, महात्मा गांधी स्टेडियम एवं बीटीआई कॉलेज के खेल मैदान में सभी मुकाबले खेले जाएंगे. इस दौरान टोटल 48 मैच आयोजित किए जाएंगे. प्रतियोगिता में शहडोल, जबलपुर, सागर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, नर्मदापुरम, रीवा, भोपाल एवं जनजातीय कार्य विभाग सहित 10 टीमों के खिलाड़ी शामिल होंगे।  तैयारी बैठक में सौंपी गई जिम्मेदारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश तो दिए ही गए. साथ ही बास्केटबॉल टूर्नामेंट की तैयारी को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी भी सौंपी गई. उमेश कुमार धुर्वे ने कहा कि, ''प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों एवं कोचों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। 

CIMS को बड़ी मंजूरी: 19 PG कोर्स रिन्यू, MD-MS की 91 सीटों पर दाखिले शुरू

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सिम्स के 19 स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण को अस्थायी स्वीकृति प्रदान कर एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों की कुल 91 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है। एनएमसी की स्वीकृति के अनुसार, एमडी के 14 पाठ्यक्रमों में 69 सीटें तथा एमएस के 5 पाठ्यक्रमों में 22 सीटें शामिल हैं। यह स्वीकृति सिम्स में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति मिलना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिम्स परिवार, विशेषकर पीजी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी लोगों के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति मिलना संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशिक्षण व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक एवं चिकित्सकीय प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और प्रदेश को भविष्य में अधिक संख्या में दक्ष एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति सिम्स के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक उपलब्धि है। इन विभागों में मिली सीटों की स्वीकृति एमडी पाठ्यक्रमों में सामुदायिक चिकित्सा में 5, फॉरेंसिक मेडिसिन में 2, एनाटॉमी में 3, बायोकेमिस्ट्री में फार्माकोलॉजी में 5 माइक्रोबायोलॉजी में 5 पीडियाट्रिक्स में 6, एनेस्थीसियोलॉजी में 8 त्वचा रोग में 3, जनरल मेडिसिन में 8, मनोचिकित्सा में 3, पैथोलॉजी में 9, रेडियो डायग्नोसिस में तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन में 2 सीटों को स्वीकृति मिली है वहीं एमएस पाठ्यक्रमों में ईएनटी की 4. नेत्र रोग की 3, प्रसूति एवं स्त्री रोग की 6, ऑर्थोपेडिक्स की 6 तथा जनरल सर्जरी की 6 सीटें शामिल हैं। चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार एनएमसी की यह स्वीकृति सिम्स की शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति देने वाली मानी जा रही है। विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में पीजी सीटों की उपलब्धता से न केवल चिकित्सकीय शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को विभिन्न विशेषज्ञताओं के प्रशिक्षित चिकित्सक भी मिलेंगे। एनएमसी ने अपने स्वीकृति पत्र में स्पष्ट किया है. कि, वास्तविक सीटों की संख्या मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड द्वारा स्वीकृत संख्या के अनुसार ही मान्य होगी सिम्स प्रशासन ने इस उपलब्धि संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, पीजी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया है।

Chhattisgarh Land Use Rules: डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ घटाने नियमों में किया गया बड़ा बदलाव

रायपुर : विकास को गति देने छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ की नई पहल Negative List आधारित व्यवस्था से भूमि उपयोग होगा अधिक लचीला और व्यावहारिक, निवेश एवं विकास गतिविधियों को मिलेगी सहजता रायपुर छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी। मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है। प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी। आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी। वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है। वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा। नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी। नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल … 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CM साय के सख्त निर्देश: हर पात्र परिवार को समय पर और पूरा राशन मिले, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

रायपुर : हर पात्र परिवार को समय पर और पूरा राशन मिले, किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों में राशन वितरण की नियमित निगरानी के निर्देश आमानारा में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर ली जानकारी, पात्र परिवारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के निर्देश शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान निलंबित, चिड़ोडी की राशन दुकान से की गई वैकल्पिक व्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा – ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, खाद्य विभाग और जिला प्रशासन सुनिश्चित करें रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को उसके अधिकार का पूरा राशन समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। राशन वितरण में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर तत्काल कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नियमित निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा खाद्यान्न वास्तविक हितग्राही तक निर्धारित मात्रा में और समय पर पहुंचे, यह संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों में अधिकारी अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ राशन की उपलब्धता और वितरण की निगरानी करें। मुख्यमंत्री साय ने रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आमानारा गांव में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली और प्रभावित पात्र परिवारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से कहा कि शिकायत से जुड़े वितरण अभिलेखों की समुचित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र परिवार अपने हक के खाद्यान्न से वंचित न रहे। ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण और हितग्राहियों को वास्तव में दिए गए खाद्यान्न का मिलान कर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जिला कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि शिकायत सामने आते ही मामले की जांच कराई गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पहाड़ी कोरवा परिवारों एवं अन्य हितग्राहियों को राशन मिलने में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में चिड़ोडी की राशन दुकान से संबद्ध किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि इस प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई के साथ ही जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सतत निगरानी की जाए, ताकि ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। हर हितग्राही को समय पर और गुणवत्ता के साथ राशन वितरण सुनिश्चित हो।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सहज, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुंचाना हमारी सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। प्रत्येक पात्र परिवार को उसका अधिकार बिना किसी बाधा के मिले, इसके लिए अधिकारी संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।

राजस्थान सेट परीक्षा 2026: 7 संभागों के 429 केंद्रों पर 1.77 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल

 कोटा  कोटा विश्वविद्यालय की ओर से 13 सितम्बर को सहायक आचार्य के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (सेट)-2026 आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 7 संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर व भरतपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक एक पारी में ऑफलाइन मोड पर होगी। इसमें 37 विषयों में इस वर्ष 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। सात संभागीय मुख्यालयों में कुल 429 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जयपुर में सबसे अधिक 78 हजार तो भरतपुर में सबसे कम 8 हजार से अधिक अभ्यर्थी बैठेंगे। इसके अलावा जोधपुर में 22,609, बीकानेर 22,281, उदयपुर 17,320, कोटा 14839, अजमेर संभाग में 13,753 अभ्यर्थी शामिल होंगे। कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि परीक्षा का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कोटा विश्वविद्यालय में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और संवेदनशीलता से जुड़े सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अपील की। प्रवेश के लिए ये दस्तावेज जरूरी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश-पत्र की रंगीन प्रति, मूल फोटोयुक्त पहचान-पत्र के रूप में केवल आधार कार्ड तथा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से मेल खाती एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी। अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सुबह 9 से 10 बजे तक होगी। 10 बजे बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा समन्वयक प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रवेश-पत्र पर अंकित परीक्षा केंद्र और रोल नंबर के कोड को केवल सांकेतिक न मानते हुए परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन पहले से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए परीक्षा से एक दिन पूर्व केंद्र पर जाकर स्थान की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित 1- परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पुस्तक, नोट्स आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। 2- अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के हल्के रंग के कपड़े तथा कम हील वाली चप्पल या सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है। 3- धार्मिक, पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के दौरान विशेष रूप से तलाशी ली जाएगी। अभ्यर्थी अपने साथ केवल काले या नीले बॉल पेन लेकर आएं। 4- ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड अथवा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। 5- अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था परखी

रायपुर : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण, बच्चों की सीखने की गतिविधियों और पोषण व्यवस्था का लिया जायजा जालबांधा में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम में शामिल हुईं मंत्री, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का कराया अन्नप्राशन रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज खैरागढ़ जिले के ग्राम जालबांधा एवं सलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण एवं देखभाल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी सीखने की प्रक्रिया और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली तथा बच्चों के उत्साह एवं आत्मविश्वास की सराहना की। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जालबांधा एवं सलोनी आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों की आयु के अनुरूप खेल-खेल में सीखने, गतिविधि आधारित शिक्षा तथा बच्चों के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास की मजबूत नींव प्रारंभिक अवस्था में ही तैयार होती है और इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन जालबांधा आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हुईं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म में शामिल होकर उन्हें सुपोषण किट वितरित किए। साथ ही बच्चों का अन्नप्राशन कराते हुए उनके स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सक्षम योजना के अंतर्गत दो महिलाओं को ऋण सहायता के चेक भी प्रदान किए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण को कम करने के लिए गर्भावस्था से ही माताओं के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को प्रोटीन एवं पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देने, अभिभावकों द्वारा बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने, उनसे बातचीत करने तथा मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचाने की अपील की। ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक आयोजित 9वां राष्ट्रीय पोषण माह केवल आंगनबाड़ी केंद्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पोषण का संदेश प्रदेश के प्रत्येक घर तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को बढ़ावा देने की अपील करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मुनगा, हरी सब्जियों एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बच्चों के भोजन में शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने महिलाओं से स्वयं पोषण के प्रति जागरूक होने और परिवार तथा आसपास की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चे का आधार तैयार होता है और स्वस्थ बच्चे ही सशक्त समाज एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव बनते हैं। आगामी तीज पर्व के अवसर पर भी पोषण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात उन्होंने कही। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री विक्रांत सिंह सहित जनप्रतिनिधि, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं, गर्भवती महिलाएं एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित थीं।

छत्तीसगढ़ मेमन एसोसिएशन में रफीक मेमन को मिली अहम जिम्मेदारी, नायब सदर चुने गए

समाजसेवा की नई जिम्मेदारी, रफीक मेमन बने छत्तीसगढ़ मेमन एसोसिएशन के नायब सदर मनेन्द्रगढ़/एमसीबी समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान करते हुए मनेन्द्रगढ़ निवासी रफीक मेमन (रज्जू भाई) को छत्तीसगढ़ मेमन एसोसिएशन (CGMA) का नायब सदर (उपाध्यक्ष) मनोनीत किया गया है। उनकी इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से मनेन्द्रगढ़ सहित प्रदेशभर के मेमन समाज में खुशी और उत्साह का माहौल है। समाज के लोगों ने इसे न केवल रफीक मेमन का सम्मान, बल्कि मनेन्द्रगढ़ के लिए भी गौरव का क्षण बताया है। छत्तीसगढ़ मेमन एसोसिएशन की संगठनात्मक बैठक में समाज को और अधिक संगठित, मजबूत एवं जनसेवा के कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। एसोसिएशन के सदर हाजी इदरीश लोया के मार्गदर्शन में विभिन्न पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इसी क्रम में रफीक मेमन को नायब सदर की जिम्मेदारी मिलना उनकी सामाजिक सक्रियता और संगठन के प्रति योगदान पर विश्वास की मुहर माना जा रहा है। बैठक में समाज के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय पर भी सहमति बनी। एसोसिएशन के पास पिछले तीन वर्षों से उपलब्ध जमीन का उपयोग करते हुए वहां हॉस्टल निर्माण किया जाएगा। इस हॉस्टल में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि वे रायपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में बेहतर शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को संवार सकें। समाज के जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए उठाया गया यह कदम संगठन की सामाजिक सोच और दूरदर्शिता को दर्शाता है। नई कार्यकारिणी में हाजी इब्राहिम भाई मेमन एवं हाजी फारूक भाई वारसी को संरक्षक, हाजी अब्दुल गफ्फार (गप्पू भाई), गरियाबंद को संयोजक, हाजी दिलावर भाई रोकड़िया को सचिव तथा हाजी हनीफ भाई उमरानी को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं हनीफ भाई शेखवानी (कांकेर), रफीक भाई मेमन (मनेन्द्रगढ़) और अनवर भाई शेखवानी (बिलासपुर) को नायब सदर की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा शाहिद भाई (केशकाल) को सहसचिव, फिरोज भाई वाघडिया (बसना) को सह-कोषाध्यक्ष, यूनुस भाई (कोरबा) को लीगल एडवाइजर तथा यासीन भाई कलावाडिया को मीडिया प्रभारी बनाया गया है। कार्यकारिणी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से समाज के सक्रिय सदस्यों को भी शामिल किया गया है। मनोनयन के बाद एसोसिएशन के सदर हाजी इदरीश लोया ने सभी नवमनोनीत पदाधिकारियों एवं सदस्यों को मुबारकबाद देते हुए संगठन को मजबूत बनाने तथा समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती तभी सार्थक होगी, जब पदाधिकारी और सदस्य तन, मन और धन से समाजहित में अपनी भूमिका निभाएंगे। रफीक मेमन के नायब सदर बनने से मनेन्द्रगढ़ के मेमन समाज में विशेष उत्साह है। समाज के लोगों ने उन्हें मुबारकबाद देते हुए उम्मीद जताई कि उनकी सक्रियता, अनुभव और समाज के प्रति समर्पण से छत्तीसगढ़ मेमन एसोसिएशन को नई ऊर्जा मिलेगी और संगठन प्रदेशभर में समाजसेवा की दिशा में और मजबूती से आगे बढ़ेगा। यह जिम्मेदारी रफीक मेमन के लिए सम्मान के साथ-साथ समाज के प्रति सेवा और दायित्व का एक नया अवसर भी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर : विकास कार्यों में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं, तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित  करने के दिए निर्देश खामभाठा में निर्माणाधीन पुल से बच्चों और ग्रामीणों को हो रही परेशानी को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया गरियाबंद कलेक्टर से दूरभाष पर ली जानकारी, निश्चित समयसीमा में पुल निर्माण पूरा कराने के निर्देश स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने कहा सुनिश्चित निर्माणाधीन स्थल पर खुले सरिए, गड्ढे एवं अन्य जोखिमों को तत्काल दूर करने के निर्देश रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में जनसुविधा से जुड़े विकास एवं निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी निर्माणाधीन कार्यों की नियमित निगरानी करें और जहां भी कार्य की गति धीमी है, वहां बाधाओं को तत्काल दूर कर काम में तेजी लाएं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। विशेष रूप से सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लेटलतीफी को गंभीरता से लिया जाएगा और अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत खामभाठा क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल के कारण स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी की जानकारी मिलते ही इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा से दूरभाष पर चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली और निश्चित समयसीमा तय कर पुल का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण पूरा होने तक स्कूली बच्चों और क्षेत्रवासियों को किसी भी परिस्थिति में जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन तत्काल सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री साय ने निर्माणाधीन पुल स्थल पर सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रबंध तत्काल करने के निर्देश दिए। उन्होंने खुले एवं खतरनाक तरीके से लगे सरियों को सुरक्षित करने, गहरे गड्ढों और अन्य जोखिमपूर्ण स्थानों को दुरुस्त करने तथा आवश्यकता के अनुसार बैरिकेडिंग सहित सभी जरूरी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा यह सुनिश्चित करें कि स्वीकृत विकास कार्यों का लाभ नागरिकों को निर्धारित समय पर मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुविधा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

कुपोषण पर कड़ा प्रहार: नारायणपुर के 13 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को अब रोज मिलेगा मुफ्त पौष्टिक नाश्ता

​रायपुर : कुपोषण पर कड़ा प्रहार : नारायणपुर के 13 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को अब रोजाना मिलेगा मुफ़्त पौष्टिक नाश्ता आंगनबाड़ियों में लड्डू योजना का भी आगाज़ ​रायपुर नारायणपुर के 13 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को अब रोजाना मिलेगा मुफ़्त पौष्टिक नाश्ता छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।         ​यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।          ​यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सेवा संकल्प अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियों की समीक्षा की

रायपुर : सेवा संकल्प अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियों की मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने की समीक्षा प्रदेश के सभी जिलों में जनभागीदारी और पोषण संबंधी गतिविधियों को प्रभावी बनाने दिए निर्देश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज खैरागढ़ स्थित कलेक्ट्रेट सभाकक्ष से महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार एवं संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव सहित प्रदेश के सभी जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय बैठक ली। बैठक में सेवा संकल्प अभियान तथा 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत प्रदेशभर में संचालित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अभियानों को जनभागीदारी से जोड़ते हुए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। सेवा संकल्प अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियों की मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने की समीक्षा मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य जनसेवा की भावना को मजबूत करने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास और सेवा कार्यों से जोड़ना है। उन्होंने अधिकारियों को अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने तथा सेवा की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत “हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की भावना के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास की गतिविधियों का प्रभावी केंद्र बनाने पर जोर दिया। मंत्री ने बच्चों, माताओं एवं महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार के लिए आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित आहार एवं स्थानीय पोषण स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि पोषण संबंधी अभियानों की सफलता केवल विभागीय गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदाय को जोड़कर पोषण जागरूकता की गतिविधियों को व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। बैठक में जिलों में संचालित पोषण एवं जनभागीदारी संबंधी गतिविधियों की प्रगति की जानकारी ली गई तथा आगामी दिनों में आयोजित होने वाली गतिविधियों की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दोनों अभियानों की गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए इनके उद्देश्यों और संदेश को प्रदेश के प्रत्येक गांव और परिवार तक पहुंचाया जाए।