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पंजाब पुलिस के 70 इंस्पेक्टरों को प्रमोशन, DSP पद पर हुई तैनाती; एक साल का कार्यकाल

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे इंस्पेक्टर को सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह मामलों एवं न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जिला कैडर और आर्म्ड कैडर के कुल 70 इंस्पेक्टर को पदोन्नत कर डीएसपी बनाया गया है। इन अधिकारियों को पंजाब पुलिस सेवा के वेतन स्तर-18 में पदोन्नति दी गई है, जिसमें 56,100 से 1,77,500 रुपये का वेतनमान है। सरकार की ओर से यह पदोन्नति विभागीय तरक्की कमेटी की 23 मई 2025 को हुई सिफारिशों के आधार पर की गई है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नत अधिकारियों को वरिष्ठता सूची में उनकी स्थिति और निर्धारित नियमों के तहत डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है। जिला कैडर में 50 और आर्म्ड कैडर में 20 अधिकारी पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में जिला कैडर के 50 इंस्पेक्टर शामिल हैं, जबकि आम्र्ड कैडर के 20 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाया गया है। सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जो लंबे समय से इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे रहे थे। सरकार के इस फैसले से इन अधिकारियों को न केवल उच्च पद मिला है, बल्कि वेतनमान में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। एक साल की रहेगी पदोन्नति की अवधि अधिसूचना में पदोन्नति को लेकर एक अहम शर्त भी रखी गई है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति का प्रभाव तत्काल लागू होगा, लेकिन उनकी पदोन्नति एक साल की अवधि के लिए रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार उनके प्रदर्शन तथा सेवा संबंधी मामलों को देखा जाएगा। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी की वरिष्ठता सूची में कोई बदलाव होता है अथवा किसी स्तर पर कोई आपत्ति या न्यायिक मामला सामने आता है, तो उसके अनुसार पदोन्नति पर दोबारा विचार किया जा सकेगा। डीएसपी के खाली पदों को भरने में मिलेगी मदद पंजाब पुलिस में डीएसपी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां कानून-व्यवस्था, अपराध की जांच और पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में 70 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाए जाने से विभाग को फील्ड स्तर पर भी अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासकर जिला पुलिस और आर्म्ड पुलिस में अधिकारियों की कमी को दूर करने में यह पदोन्नति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार ने यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया है। पदोन्नत अधिकारियों को अब डीएसपी स्तर की जिम्मेदारियां संभालनी होंगी और विभाग की ओर से उनके नए पदों पर तैनाती के आदेश अलग से जारी किए जा सकते हैं।

Punjab Crime: यूरोप से गैंगस्टर अमृत दलम की भारत वापसी, जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़ा नाम

                                                                                              पठानकोट पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर और पंजाब में मोस्ट वॉन्टेड अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी उसे प्रत्यर्पण करके यूरोपीय देश मोल्दोवा से भारत वापस लाए हैं. यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी किसी आरोपी को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पित कराकर वापस पंजाब लाया गया है. अमृत दलम पर 21 मामले दर्ज थे, जिसमें अमृतसर में कई व्यापारियों को धमकाने के मामले भी दर्ज थे. उसे वापस भारत लाना बड़ी सफलता माना जा रहा है।  भारत से 2024 में हुआ था फरार अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था, उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. इस पासपोर्ट में उसकी पहचान गुरपाल सिंह के नाम से बताई गई थी. भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया।  यूक्रेन भागने वाला था अमृत दलम  बताया जा रहा है कि अमृत दलम यूक्रेन भागने की फिराक में था. इसी चक्कर में वह मोल्दोवा में पकड़ा गया. अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया. पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की. इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया।  21 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड दबोचा गया गैंगस्टर, जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। पंजाब पुलिस ने विदेश भागे आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से भारत वापस ला दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है।  फर्जी पहचान से भारत से फरार हुआ था पुलिस के मुताबिक अमृतपाल सिंह करीब अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी।  भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। यूक्रेन भागने की कोशिश के दौरान मोल्दोवा में पकड़ा गया अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।   इसके बाद अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे। फर्जी पासपोर्ट और लोकेशन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया।  छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Eastern Reach’ रखा गया था। इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया।  मोल्दोवा की अदालत से मिली भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया।  चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम मोल्दोवा पहुंची प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया और उसे पंजाब वापस लाया।  पंजाब में 21 केस, कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में UAPA/Explosives, हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े 5, Arms Act के 9, NDPS का 1 और UAPA/Explosives का 1 मामला दर्ज बताया गया है।  किन जिलों में दर्ज हैं मामले? जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा 7 FIR बटाला, 4 गुरदासपुर, 2 अमृतसर कमिश्नरेट, 2 होशियारपुर, 1 लुधियाना कमिश्नरेट और 1 FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है। वहीं ट्रायल में चल रहे 4 मामले बटाला में दर्ज हैं।  यानी करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए देश से फरार हुआ अमृतपाल सिंह मोल्दोवा में पकड़ा गया। छह महीने चले अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन, कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण के बाद … Read more

पंजाब में बिजली संकट गहराया, 10-11 घंटे तक कटौती; राजपुरा में 3 तो तलवंडी साबो में 7 दिन का कोयला

जालंधर पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी। बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी। शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है।  पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही।  थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी। इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है। इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है। इन प्लांटों की यूनिटें बंद पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं। शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है। मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे। 5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं। बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले … Read more

85 करोड़ के बैंक लोन में हेराफेरी का आरोप, रामनंदी होटल्स के 17 ठिकानों पर ED की रेड

पटना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग ) मामले में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी बिहार के गया जी और बोधगया के साथ ही नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित कंपनी के विभिन्न ठिकानों पर की गयी। कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत और नितेश पर कथित धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। कंपनी से जुड़े 85 करोड़ के बैंक ऋण में कथित हेराफेरी मामले की सीबीआई पूर्व से ही जांच कर रही है। इसमें इस अपराध से हुई कथित कमाई 131.79 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में धन शोधन की आशंका को देखते हुए अब ईडी की एंट्री हुई है 58 करोड़ रुपये की हेराफेरी ईडी सूत्रों के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड मूलत: बिहार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के निदेशक गया जी के चांदचौरा निवासी अखौरी गोपाल का पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल नाम से कारोबार रहा है। उनकी कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में लगभग 58 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और डायवर्जन का आरोप है। फर्जी और जाली दस्तावेज मिल ईडी को जांच में कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से परियोजना पूरी होने की दी गयी गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले बैंक से लोन की रकम हासिल की गई। फिर लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गयीं। इनमें पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स के पक्ष में मॉर्गेज बताई गई हैं। बाद में इन संपत्तियों को बेच दिया गया। जांच एजेंसी को बिक्री में भी गड़बड़ी का संदेह है। प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका आरोप है कि संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई। रकम का एक हिस्सा नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को संदेह है कि करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले कुछ लोगों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं थी। ऐसे में उनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका है। लोन की व्यक्तिगत गारंटी दी थी प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्रों निशांत एवं नितेश के पास होने की बात सामने आई है। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह ही गया जी के चांदचौरा में अखौरी गोपाल और उनके नजदीकी रहे बोधगया के अमर बिगहा गांव में मिथिलेश राय के आवास पर छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी के अधिकारी बिहार समेत देशभर में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन करेगी। गया में 15 घंटे तक चली तलाशी ईडी की टीम ने गया जी और बोधगया में तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी करीब 15 घंटे तक चली। इस दौरान गया जी शहर की कालीबाड़ी स्थित न्यू कॉलोनी में अरविंद कुमार के घर में रह रहे किरायेदार, बाला जी नगर और बोधगया के अमर बिगहा में मिथिलेश राय के घर की जांच की गयी। जांच टीम ने दस्तावेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। तलाशी पूरी होने के बाद टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य कागजात अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने छापेमारी व बरामदगी से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया।

फरीदकोट में 22 हजार लीटर नकली देसी घी का खुलासा, ग्रेटर नोएडा से पहुंची थी खेप

फरीदकोट फरीदकोट स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटकपूरा में सूचना के आधार पर पकड़े गए 22 हजार लीटर संदिग्ध देसी घी से भरे टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही विभाग की ओर से पुलिस को शिकायत देकर आपराधिक मामला दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस मामले में फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग की ओर से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।जानकारी के मुताबिक, जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस विंग को सूचना मिली थी कि ग्रेटर नोएडा से देसी घी से भरा टैंकर कोटकपूरा आ रहा है। इस संबंध में जीएसटी विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया।  इसके बाद गुरुवार रात फूड कमिश्नर अमित जोशी के नेतृत्व में चंडीगढ़ से टीम कोटकपूरा पहुंची। टीम ने फरीदकोट के फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल के नेतृत्व वाली टीम के साथ मिलकर फरीदकोट रोड स्थित फैक्ट्री में पहुंचे टैंकर को कब्जे में लिया। टैंकर से घी के सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए भेजे गए।  .फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

तिघरा डैम का बढ़ा जलस्तर, शुक्रवार शाम खोले गए तीन गेट; सांक नदी में छोड़ा पानी

ग्वालियर तिघरा डैम का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे इसके तीन गेट खोल दिए गए। तीनों गेट नौ-नौ इंच खोले गए और इनके जरिए 1040 क्यूसिक पानी सांक नदी में छोड़ा गया। खास बात यह है कि इस सीजन में मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार तिघरा डैम के गेट खोले गए हैं। गेट खोले जाने के दौरान निगम महापौर शोभा सिकरवार, एमआइसी सदस्य, जल संसाधन विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुबह 739.40 फीट था जलस्तर, दिनभर बढ़ता रहा शुक्रवार सुबह आठ बजे तिघरा बांध का जलस्तर 739.40 फीट दर्ज किया गया था। दिन में तिघरा के कैचमेंट क्षेत्र में हुई वर्षा के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी और आगे संभावित वर्षा को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने दोपहर करीब 1:30 बजे गेट खोले जाने की सूचना जारी की। शाम पांच बजे तक बांध का जलस्तर 739.50 फीट से अधिक पहुंच गया। इसके बाद भी जलस्तर बढ़ता रहा। भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने आखिरकार तीन गेट खोलने का निर्णय लिया। शाम साढ़े छह बजे गेट नौ-नौ इंच खोलकर सांक नदी में 1040 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। इस सीजन में पहली बार खुले डैम के गेट इस बार मानसून के दौरान तिघरा डैम के गेट लंबे समय तक बंद रहे। पिछले वर्षों में जुलाई से अक्टूबर के बीच तिघरा डैम के गेट 17 बार खोले गए थे। इस बार मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार गेट खोलने की स्थिति बनी है। अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई बारिश से डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके बाद रात में और शुक्रवार दिन में हुई बारिश ने जलस्तर को और ऊपर पहुंचा दिया। इसी के चलते डैम से पानी छोड़ना पड़ा। गेट खुलने की खबर से शहरवासियों में खुशी ग्वालियर शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से तिघरा डैम पर निर्भर है। इस मानसून के आधे सीजन तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण तिघरा डैम आधा भी नहीं भर पाया था। इसका असर शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ा और लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा था। डैम के पर्याप्त नहीं भरने से आगे जलसंकट की चिंता भी बढ़ गई थी। हालांकि अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से तस्वीर बदल गई। तिघरा डैम के फुल होने के बाद अब गेट खोले जाने से शहरवासियों में खुशी है। लोगों को उम्मीद है कि अब ग्वालियर में रोजाना पानी की सप्लाई हो सकेगी। एम. विश्वेश्वरैया की देखरेख में मजबूत हुई इंजीनियरिंग तिघरा डैम का निर्माण सांक नदी पर वर्ष 1916 में कराया गया था। महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने बांध की योजना और उसकी तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को आमंत्रित किया था। 1917 में बांध के शुरुआती क्षतिग्रस्त होने के बाद इसके पुनर्निर्माण और आटोमैटिक फ्लड गेट्स की तकनीक को मजबूत बनाने में उनके सुझावों और इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। निर्माण के ठीक एक साल बाद 19 अगस्त 1917 को भारी बारिश और नींव में बलुआ पत्थर के रिसाव के कारण बांध का एक हिस्सा टूट गया था। इसके बाद इसे अधिक मजबूत संरचना के साथ दोबारा तैयार किया गया। 1927 में जीर्णोद्धार, 1970 में फिर आईं दरारें वर्ष 1927 के आसपास तिघरा डैम का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। इसके बाद 1970 में अत्यधिक जलभराव और तकनीकी वजहों से इसके कुछ हिस्सों में फिर दरारें आईं। इसके बाद सरकार ने आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसे मजबूत कंक्रीट और चुनाई संरचना में बदला। तिघरा डैम से ग्वालियर शहर को जलापूर्ति की शुरुआत वर्ष 1916 से ही हुई थी। 1916 से अब तक यह शहर की लगभग 14 लाख आबादी के लिए पेयजल का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है। मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में तिघरा का पानी साफ करने के बाद शहर की विभिन्न टंकियों तक पहुंचाया जाता है। 24 मीटर ऊंचा और 1,341 मीटर लंबा है डैम तिघरा डैम की ऊंचाई लगभग 24 मीटर और लंबाई 1,341 मीटर है। इसका निर्माण ग्वालियर शहर की जलापूर्ति के साथ आसपास के 11 गांवों की सिंचाई के उद्देश्य से कराया गया था।

जौली, गगन और नारंग को पछाड़ गुजराल ने मारी बाजी, 661 वोटों से अध्यक्ष निर्वाचित

चंडीगढ़. करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को शुक्रवार को नया प्रधान मिल गया। जिला अदालत परिसर में हुए चुनाव के परिणाम देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर एएस गुजराल ने 661 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने गगन अग्रवाल (450), रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जौली (464) और सुनील नारंग (327) को पीछे छोड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर अभय जोशी ने बाजी मारी। जोशी को 1071 वोट पड़े जबकि उनके मुकाबले धर्मिंदर सिंह को 801 वोट मिले। जोशी 270 वोट से विजयी रहे। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली थी। सचिव पद पर तेजविंदर सिंह गिल 1147 वोट हासिल कर विजयी रहे, जबकि नरेश कुमार को 733 वोट मिले। ज्वाॅइंट सेक्रेटरी पद पर पुष्पिंदर सिंह ने बाजी मारी। उन्हें 836 वोट मिले। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर प्रतीक गर्ग ने 1043 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी पुनीत छाबड़ा को 867 वोट मिले।

यूपी में तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति पर मंथन, सेवा संकल्प अभियान पर जोर

लखनऊ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष शुक्रवार की शाम दो दिनी यूपी दौरे पर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर हुई कोर कमेटी की बैठक में सरकार और संगठन से यूपी का सियासी फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सेवा संकल्प अभियान, विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव की तैयारी, राज्यसभा चुनाव पार्टी संगठन के गठन का काम जल्द करने के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले इस बड़े अभियान के जरिए हर वर्ग तक पहुंचने की रणनीति पर मंथन हुआ। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने सरकार और संगठन के बेहतर समन्वय से सेवा संकल्प अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा किएक महीने चलने वाले इस अभियान के जरिए युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और हर लाभार्थी तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। 17 सितंबर को हर बूथ पर प्रत्येक लाभार्थी परिवार आर्शीवाद का दीया जलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करेगा। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं तक पहुंचना है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर प्रभावी ढंग से प्रचार पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अभियान को लेकर सरकार के स्तर पर की गई तैयारियों पर चर्चा की। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने सांगठनिक स्तर पर की तैयारी को साझा किया। उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा कि यूपी में तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने को लेकर विस्तार से मंथन हुआ है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी जगदीश भाई पटेल,प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। चुनाव की तैयारियों पर हुई बात: पंकज प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया कि बैठक में मिशन-2027 को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराए जाने को लेकर भी कोर कमेटी में चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो पार्टी के मोर्चा-प्रकोष्ठों के जल्द गठन और संगठन की योजनानुसार प्रवास शुरू करने को कहा गया है। वहीं नवंबर में प्रस्तावित 11 विधान परिषद सीटों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित के आगामी दिनों में होने वाले दौरों-कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। महामंत्रियों संग बैठक,कानपुर जाएंगे बीएल संतोष शनिवार को सुबह प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पार्टी के प्रदेश महामंत्रियों संग बैठक करेंगे। इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे। उसके बाद कानपुर जाएंगे। वहां कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। फिर रविवार को दिल्ली रवाना होंगे। इससे पूर्व शनिवार शाम यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने पर प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजबहादुर, महामंत्री संजय राय, रामप्रताप चौहान, गोविंद नारायण शुक्ला सहित अन्य ने स्वागत किया।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व पर सजा Golden Temple, दर्शन को जुटे हजारों श्रद्धालु

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंचे रहे हैं। गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है।अमृतसर, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन हुआ शुरू। गोल्डन टेंपल को सुंदर फूलों से सजाया गया है, जो विदेश से लाए गए हैं। ये फूल थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से इंपोर्ट किए गए हैं। 100 कारीगर दिन-रात सजावट के काम में जुटे हैं। गोल्डन टेंपल को सजाने के लिए 60 टन से अधिक फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें 10 ट्रकों में लादकर अमृतसर लाया गया। सिखों के 5वें गुरु अर्जन देव जी ने सन् 1604 में दरबार साहिब में पहली बार  श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व के अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।  गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन कुछ समय बाद आरंभ होगा।  गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य, जानिए…     बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की।     बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।"     गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर इन्हें पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।”     समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं। गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित गुरुवार को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब आरंभ किए गए, जिनके भोग 12 सितंबर को डाले जाएंगे। बता दें, आज (11 सितंबर) गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित किया जाएगा। इसमें सिंह साहिबान और पंथ प्रसिद्ध रागी जत्थे संगत को गुरबाणी और गुर-इतिहास से जोड़ेंगे। श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा वहीं, 12 सितंबर को पुरातन परंपरा के अनुसार गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा। नगर कीर्तन सुबह 7 बजे रामसर साहिब से निकलेगा और स्वर्ण मंदिर पहुंचेगा। इस दौरान शिरोमणि कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी समेत सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें हाजिरी भरेंगी।  

बिलासपुर सहकारी बैंक का बजट 381.45 करोड़, खाताधारकों के खातों में 47 करोड़ से अधिक

बिलासपुर. किसानों की जरूरतों से जुड़े जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने वित्तीय मजबूती के साथ अपनी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। बैंक की 112वीं वार्षिक आमसभा में वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए 381.45 करोड़ के बजट को अनुमोदन मिला। वहीं बैंक के 47.26 करोड़ के लाभ के उपयोग का खाका भी सदस्यों के सामने रखा गया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर में शुक्रवार को आमसभा आयोजित की गई, इसके में बैंक से संबंधित सभी विषयों पर समीक्षा और जानकारी ली गई। इस दौरान पता चला कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2 लाख 53 हजार 101 किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 860.74 करोड़ का अल्पकालीन फसल ऋण दिया गया। बैंक ने खाताधारकों के लिए डिजिटल सुविधा बढ़ाते हुए 24 एटीएम शुरू किए हैं। समितियों में माइक्रो एटीएम की सुविधा भी दी गई है। सहकारी बैंक के अध्यक्ष रजनीश सिंह ने कहा कि वर्तमान में बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, गौरेला- पेंड्रा मरवाही और सक्ती क्षेत्र में बैंक की सेवाएं पहुंच रही हैं। स्थापना के बाद से बैंक का मुख्य उद्देश्य किसानों को सहकारी व्यवस्था के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना रहा है। उपाध्यक्ष रजनी साहू ने सदस्यों का आभार जताया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। नोडल अधिकारी आशीष दुबे ने वार्षिक आमसभा का संचालन किया। रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ आमसभा में बैंक के स्टाफिंग पैटर्न और रिक्त पदों पर नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव की भी पुष्टि की गई। जानकारी के अनुसार बैंक में 400 से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। 31 मार्च 2026 की स्थिति में रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। 47.26 करोड़ के लाभ में से रिजर्व फंड, कृषि सहस्तरीकरण, भवन निधि, कंप्यूटराइजेशन, जिला सहकारी संघ, समितियों के लाभांश और कैडर फंड सहित विभिन्न मदों में राशि निर्धारित की गई है। बैंक की अंश पूंजी भी बढ़कर 129.27 करोड़ हो गई है।