samacharsecretary.com

निर्बाध बिजली व्यवस्था पर पंजाब सरकार सख्त, फील्ड में उतरेंगे टेक्निकल कर्मचारी

जालंधर. टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज पावरकॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके चलते आमतौर पर फाल्ट समय पर ठीक नहीं हो पाता और पब्लिक को भारी परेशानियां उठानी पड़ती है। इसके लिए पावरकॉम द्वारा टैक्निकल कर्मचारियों को दफ्तरों से निकाल कर फील्ड में तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं। पावरकॉम दफ्तरी आदेश नंबर 1296/22-5 के तहत जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक कहा गया है कि दफ्तरों में काम करने वाले स्टॉफ को फील्ड में तैनात किया जाए। बताया जा रहा है कि इन आदेशों के बाद विभाग संबंधित विभिन्न एसोसिएशनों द्वारा दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों की लिस्टें तैयार की जा रही है जोकि पटियाला हैड ऑफिस भेजी जाएगी ताकि दफ्तरों में काम करने वाले टैक्निकल कर्मचारियों की फील्ड तैनाती को यकीनी बनाया जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पावरकॉम में पोस्ट के हिसाब से बड़े स्तर पर टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज चल रही है। इनमें जे.ई., लाइनमैन, सहायक लाइनमैन इत्यादि शामिल हैं। पावरकॉम द्वारा कम स्टॉफ के साथ काम किया जा रहा है जिसके चलते फील्ड में काम करने वाले स्टॉफ पर ओवरलोड बना हुआ है। विभागीय जानकारों का कहना है कि महानगर जालंधर ही नहीं बल्कि पंजाब के सभी जोन में टैक्निकल स्टॉफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह से दूर-दराज की कई डिवीजनों में हालात बेहद नाजूक है, जिसके चलते लोगों के दिलों में विभाग का अकस खराब हो रहा है। टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज को देखते हुए पावरकॉम द्वारा ठेके पर कंपलेंट हैंडलिंग बाइक (सी.एच.बी.) कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही है। लेकिन इसके बावजूद स्टॉफ शार्टेज की समस्या का पक्का समाधान नहीं निकल पा रहा है। छोटे-मोटे फाल्ट के लिए सी.एच.बी. से काम लिया जा सकता है, लेकिन शट्डाऊन लेने, बड़ी लाइनों पर काम करने जैसी स्थिति में पक्के स्टॉफ की उपलब्धता जरूरी हो जाती है। इसी क्रम में रोजाना पड़ रहे फाल्ट को निपटाने में सी.एच.बी. व पक्के स्टॉफ को काफी मश्कत करनी पड़ रही है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है, लेकिन रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के मुकाबले भर्ती प्रक्रिया का अनुपात बेहद कम साबित हो रहा है। इसी के चलते टैक्निकल स्टॉफ की शॉर्टेज बनी हुई है। फाल्ट बढ़ने से खराब हो रहे हालात स्टॉफ शार्टेज का सबसे विपरीत प्रभाव गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। गर्मी में बिजली का इस्तेमाल बढ़ने के कारण फाल्ट बढ़ जाते है जिसके चलते टैक्निकल स्टॉफ की डिमांड में भारी बढ़ौतरी होती है। कई इलाकों में लोगों को घंटों तक स्टॉफ का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, बारिश व तूफान के मौसम में हजारों के हिसाब से शिकायतें सामने आती हैं और ऐसे समय में हालात बेहद खराब हो जाता है।

पटना चिड़ियाघर में बड़ा बदलाव: गैंडों की अदला-बदली से बढ़ेगी प्रजातियों की विविधता

पटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना जू में नए जानवरों का आगमना होने जा रहा है। दिल्ली और रोहतक चिड़ियाघर के बाद अब पटना में सिंगापुर से एक जानवर आने वाला है। उसका बेसब्री से इंताजर हो रहा है। पटना जू में दो सिंग वाला सफेद गैंडों का एक जोड़ा देखने को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक इसके बदले में पटना जू से एक सिंग वाला एक जोड़ा गैंडा सिंगापुर जाएगा। पटना आएगा गैंडा इसके लिए दोनों देशों के अधिकारी के अलावा पटना जू और वन पर्यावरण के अधिकारियों में वार्तालाप जारी है। पटना जू प्रबंधन के मुताबिक ये एक्सजेंज प्रोग्रामा के तहत जानवरों की अदला- बदली की जा रही है। ये दो सिंग वाला गैंडा पानी के जहाज से आएगा। उसके बाद समुद्र मार्ग से कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगा। जहां से गैंडा को ट्रक पर लेकर टीम पटना पहुंचेगी। ऐसी योजना तैयार की जा रही है। सिंगापुर से आएगा गैंडा हवाई मार्ग की जगह समुद्री मार्ग और सड़क मार्ग को तरजीह दी जा रही है। ध्यान रहे कि पटना जू में गैंडों की संख्या एशिया में पहले स्थान प र है। वहीं दुनिया में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। पटना जू में दस गैंडें हैं। इनमें छह मादा और चार नर गैंडा शामिल है। सभी गैंडें व्यस्क हैं और सबसे छोटे की उम्र पांच वर्ष की है। पटना जू ने दी जानकारी जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहले स्थान पर अमेरिका के कैलिफोर्निया का सेंट डिएगो जू सफारी है। इन गैंडों के पटना जू आ जाने से गैंडों की प्रजाति की विविधता बढ़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक अब दर्शन एक सिंग वाला गैंडा देखने के साथ दो सिंग वाला गैंडा भी देख पाएंगे।  

यूपी में बिजली कटौती पर हंगामा: कई जिलों में लो-वोल्टेज और सप्लाई फेल, सरकार एक्शन मोड में

लखनऊ  भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज में बीती रात बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से नाराज लोगों ने हंगामा कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक बवाल के बाद लोग शांत हुए। एफसीआई उपकेंद्र के मुनेश्वर पुरम, प्रभात पुरम सहित कई इलाकों में बिजली न आने से लोग परेशान दिखे। इस बीच बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने फील्ड कर्मचारियों को 30 जून तक अस्थायी रूप से बायोमीट्रिक अटेंडेंस के नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। निगम के निदेशक (का. प्र. एवं प्रशासन) राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, लखनऊ के अंतर्गत कार्यरत सभी फील्ड कर्मी अब अपने आवंटित कार्य क्षेत्र के बजाय, अपने जोन के किसी भी उपकेंद्र या कार्यालय में हाजिरी दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही बिजली चोरी से निपटने के लिए रात में चेकिंग अभियान चलाने की भी तैयारी है। यह चेकिंग खासतौर से ऐसे इलाकों में की जाएगी जहां रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है। बता दें कि यूपी में बिजली कटौती को लेकर योगी सरकार ऐक्शन मोड में आ गई है। शनिवार को सरकार ने ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के चार इंजीनियरों पर कार्रवाई की है। दो अधिशासी अभियंताओं को सस्पेंड किया गया है, एक अधीक्षण अभियंता को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और एक मुख्य अभियंता को चेतावनी दी गई। सीएम योगी ने भीषण गर्मी में बढ़ती मांग के बीच शहर से गांव तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। वहीं लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी बीती रात शहीद पथ किनारे चकगंजरिया (सीजी सिटी) उपकेंद्र का निरीक्षण कर बिजली आपूर्ति की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से फीडरवार सप्लाई की जानकारी ली और लॉग शीट का मिलान किया। उन्होंने अधिकारियों को भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के कड़े निर्देश दिए। वहीं मध्यांचल निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने बीती रात फैजुल्लागंज उपकेंद्र का निरीक्षण किया। अचानक लोड बढ़ा तो क्षेत्र में होगी चोरी की जांच वहीं, निर्णय लिया गया है कि जिन इलाकों में रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है, वहां रात में बिजली चोरी की जांच की जाएगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डा. आशीष गोयल ने शनिवार को समीक्षा बैठक के दौरान अभियंताओं को इसके निर्देश दिए। डा. गोयल ने कहा कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाए। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसकी समीक्षा करें। हर दिन दो घंटे ज्यादा काम करेंगे बिजली कर्मी उत्तर प्रदेश में बिजली संकट देखते हुए पावर ऑफिसर्स ऐसो, ने शनिवार को आपात बैठक में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करने का फैसला लिया है। संगठन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बैठक में फैसला लिया गया कि सभी दलित व पिछड़ा वर्ग के अभियंता अपने नियमित काम के अतिरिक्त पहले चरण में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करेंगे।

4.9 KM लंबी मुकुंदरा टनल अंतिम चरण में, जंगल के नीचे दौड़ेगी हाईस्पीड ट्रैफिक

जयपुर राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रही मुकुंदरा टनल अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कोटा और बूंदी के बीच मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजर रही यह टनल सिर्फ इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संतुलन की मिसाल भी बनने जा रही है. इस टनल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जहां नीचे से हाईस्पीड ट्रैफिक गुजरेगा, वहीं ऊपर जंगल में वन्यजीव सामान्य रूप से विचरण करते नजर आएंगे. इससे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक आवागमन भी प्रभावित नहीं होगा, और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. राजस्थान की सबसे बड़ी टनल मुकुंदरा टनल राजस्थान की सबसे लंबी सड़क टनल मानी जा रही है. इसकी कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है, जिसमें 3.3 किलोमीटर मुख्य टनल और 1.6 किलोमीटर कट एंड कवर सेक्शन शामिल है. टनल की चौड़ाई करीब 38 मीटर है.     निर्माण कार्य शुरू: 2019     निर्धारित समय सीमा: अप्रैल 2026     अनुमानित लागत: करीब 1000 करोड़ रुपए     कुल लंबाई: 4.9 किलोमीटर हाईटेक सुरक्षा सिस्टम से लैस होगी टनल टनल में फिलहाल लाइटिंग, एआई आधारित प्रदूषण डिटेक्टर सेंसर, जेट फैन, फायर सेफ्टी सिस्टम, सीसीटीवी और कंट्रोल रूम सहित अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं. सभी सुरक्षा मानकों की जांच और परीक्षण के बाद इसे आमजन के लिए खोला जाएगा. टनल की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाया जा रहा है, जो वाहनों की गति और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा. कंट्रोल रूम एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम से लैस होंगे. आपात स्थिति से निपटने के लिए दोनों सुरंगों को 12 स्थानों पर आपस में जोड़ा गया है. ये कनेक्टिविटी पॉइंट्स हर 300 से 400 मीटर की दूरी पर बनाए गए हैं, ज‍िससे दुर्घटना या आग जैसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. क्यों खास है यह प्रोजेक्ट मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व राजस्थान के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है. यहां बाघों समेत कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है. एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टनल मॉडल तैयार किया गया, जिससे जंगल का प्राकृतिक स्वरूप बना रहे. विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में वन क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए उदाहरण बन सकता है. हाड़ौती को बड़ा फायदा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. इसके शुरू होने से राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा. यह भी है खास टनल में एनएचएआई के मुताबिक, साउंड प्रूफ और वाटरप्रूफ टनल है. इसके अंदर होकर गुजरने वाले वाहनों से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को किसी तरह का डिस्टरबेंस नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया की नई तकनीक से इस टनल को बनाया जा रहा है. टनल सेंसर से लैस होगी. इसे ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर डिजाइन किया गया है. दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे हाईवे 1350 किलोमीटर लंबा है. द‍िल्‍ली से मुंबई जाने में 12 घंटे का समय लगेगा. यह हाईवे केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है. कोटा जिला सीधा दिल्ली-मुंबई से जुड़ जाएगा. ट्रैफिक जाम से राहत यात्रा में समय कम लगेगा. उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी, कृषि आधारित उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे. पर्यटन और निवेश की संभावनाएं बढ़ेगी. कोटा-बूंदी सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुकुंदरा टनल का काम जल्द पूरा होने वाला है. इससे एक्सप्रेसवे पर आवागमन आसान होगा. कोटा-झालावाड़ मार्ग पर यातायात की सुगमता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे. NHAI का दावा, अंतिम चरण में काम एनएचएआई के लाइजनिंग मैनेजर एस.के. सिंह ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बन रही टनल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. दोनों टनल का काम पूरा होते ही यहां आवागमन शुरू कर दिया जाएगा.

गुरुग्राम-मेवात में बनेगा 500 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर, हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘हरियाणा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026’ को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर उद्योगों को आकर्षित कर बड़े स्तर पर निवेश और रोजगार सृजित करना है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए नई नीति लाने की घोषणा की थी। अब इस नीति को लागू कर हरियाणा सरकार देश की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रानिक्स अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की तैयारी में है मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में उद्योगपतियों से सलाह मशविरा करने के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया। हरियाणा की नई नीति केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार देश में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का आकार वर्ष 2014 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा की नई नीति भी इन्हीं केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई है। गुरुग्राम-मेवात बेल्ट बनेगी नया इलेक्ट्रानिक्स हब हरियाणा सरकार ने आइएमटी सोहना में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, बेहतर सड़क नेटवर्क, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की उपलब्धता इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकेगी। राज्य पहले से ही आटोमोबाइल और आटो कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी है। अब सरकार इलेक्ट्रानिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी उसी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे औद्योगिक क्षेत्र इलेक्ट्रानिक्स निर्माण के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। उद्योगों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन, पूंजी सहायता मिलेगी उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि नई नीति के तहत सरकार उद्योगों को 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता देगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी सीमा 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरियाणा में निर्मित इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। रोजगार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आने से हरियाणा में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। मोबाइल कंपोनेंट, पीसीबी असेंबली, डिस्प्ले यूनिट, बैटरी पैक, आटो इलेक्ट्रानिक्स और चिप पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में एमएसएमइ इकाइयों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इसके साथ ही राज्य में डिजाइन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और इलेक्ट्रानिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से विशेष नीति तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार भी भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। ऐसे में हरियाणा भविष्य में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा से लेकर गृह विभाग तक बदलाव, कई जिलों के DDC बदले गए

 रांची  झारखंड सरकार ने प्रशासनिक महकमे में एक और बड़ा फेरबदल किया है. इस बार झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के 66 अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापन किया गया है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 23 मई 2026 को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस फेरबदल में कई जिलों के उप विकास आयुक्त (DDC) बदले गए हैं और कई प्रतीक्षारत व तैनात अधिकारियों को विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) व अन्य महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई है. शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक सेवा से जुड़े विभागों में बदलाव इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में श्रीमती स्मिता टोप्पो को संयुक्त सचिव और श्री अनवर हुसैन को निदेशक (प्रशासन) बनाया गया है. वहीं, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में श्री योगेंद्र प्रसाद और अनुज कुमार प्रसाद को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी मिली है, जबकि शशि प्रकाश सिंह को भी इसी विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात करते हुए उन्हें सीईओ आरोग्य सोसाइटी व एड्स कंट्रोल सोसाइटी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इसके अलावा, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की उप सचिव रहीं सरोजनी तिर्की को अब आईटीडीए (ITDA) लातेहार का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. जिलों में नए उप विकास आयुक्तों (DDC) की तैनाती राज्य सरकार ने कई जिलों में नए उप विकास आयुक्त (DDC)-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) की नियुक्ति की है. इसके तहत जामताड़ा जिला परिषद में असीम किसपोट्टा, पलामू में मो. सादात अनवर, पाकुड़ में श्री अरविंद कुमार लाल, लोहरदगा में राज महेश्वरम्, गढ़वा में प्रेमलता मुर्मू और खूंटी जिला परिषद में प्रवीण कुमार प्रकाश को नया डीडीसी बनाया गया है. कल्याण, श्रम, और सामाजिक सुरक्षा विभाग अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में मेनका और सुनील दत्त खाखा को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि मुमताज अली अहमद को अल्पसंख्यक आयोग के सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग में हरिवंश पंडित और मोनी कुमारी तथा प्रीती किस्कू को संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं, सुमन पाठक को महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. गृह, राजस्व, वित्त और योजना विभाग गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में बड़े पैमाने पर अफसरों की तैनाती हुई है, जिसमें संजय पांडेय, रौशन कुमार साह, ज्ञानेंद्र और विभूति मंडल को संयुक्त सचिव बनाया गया है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग में प्रणव कुमार पाल संयुक्त सचिव होंगे, जबकि श्री धीरेंद्र कुमार सिंह और विद्या भूषण कुमार को क्रमशः राजस्व परिषद रांची में सचिव और संयुक्त सचिव बनाया गया है. वित्त विभाग में मधुमिता कुमारी और ज्योति कुमारी झा को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजेश्वर नाथ आलोक और संजीव कुमार (अतिरिक्त प्रभार- निदेशक, अर्थ एवं सांख्यिकी) को योजना एवं विकास विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. जल संसाधन, नगर विकास और अन्य महत्वपूर्ण पदस्थापन जल संसाधन विभाग में बिनय मनीष आर. लकड़ा और अजय सिंह बड़ाईक को संयुक्त सचिव बनाया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग में बिजय कुमार, संतोष सिंह और रंजीत लोहरा को संयुक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है. इसके अलावा, दिनेश कुमार रंजन को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) में संयुक्त सचिव, विशालदीप खलखो को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में संयुक्त सचिव (साथ ही जैप-आईटी के ओएसडी का अतिरिक्त प्रभार) और मो. जियाउल अंसारी को खान एवं भूतत्व विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है. कृषि, पर्यटन, खेलकूद और अन्य निगमों में कमान कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में मनोज कुमार को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि अजय कुमार साव को कृषि विभाग में संयुक्त सचिव के साथ-साथ झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार मिला है. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग में रामा रविदास और सत्यवीर रजक को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी तरह, रंजीता टोप्पो को खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में संयुक्त सचिव बनाते हुए झारखंड राज्य खाद्य निगम के एमडी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वहीं, संतोष कुमार गर्ग को राज्यपाल सचिवालय में संयुक्त सचिव, प्रेम कुमार तिवारी को माडा (MADA) धनबाद का एमडी, और शैलेंद्र कुमार रजक को वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय का निदेशक (साथ ही पेंशन एवं लेखा निदेशालय का अतिरिक्त प्रभार) नियुक्त किया गया है. जनजातीय विकास में नई नियुक्तियां विभिन्न जिलों में समेकित जनजाति विकास अभिकरण (ITDA) के परियोजना निदेशकों की भी तैनाती की गई है. इसके तहत सरायकेला-खरसावां में उषा मुंडू, दुमका में मनीषा तिर्की, और गुमला में लीली एनोला लकड़ा को परियोजना निदेशक बनाया गया है. इसके साथ ही, विजय सिंह बिरुवा को झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (JTDS) रांची का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. उसी तरह मीना को लोकायुक्त कार्यालय में संयुक्त सचिव और सौरव कुमार सिन्हा को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

क्या नौतपा बना भीषण गर्मी की वजह? समझिए आखिर क्यों तप रही है धरती

 भोपाल  मई का आखिरी हफ्ता शुरू होने वाला है और जून बस आने वाला है. इसी के साथ पूरे देश में गर्मी आग उगल रही है. दोपहर में सड़कें तवे जैसी जल रही है और घरों की दीवारें भी भट्टी की तरह तप रही है. ये हाल तब है जब नौतपा नहीं आया है. नौतपा देश में 25 मई से 2 जून के बीच पड़ने वाला है. ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में आ रहा है कि आखिर नौतपा से पहले और नौतपा के समय इतनी गर्मी क्यों पड़ती है. दिलचस्प बात यह है कि इस समय पृथ्वी सूरज के सबसे करीब नहीं बल्कि उससे काफी दूर होती है. फिर भी भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के देशों में नौतपा के दौरान तापमान 45 से 48 डिग्री तक पहुंच जाता है. तो आइए जानते हैं इस खबर में पूरा खेल।  लोग मानते हैं कि इस दौरान शायद सूरज धरती के ज्यादा करीब आ जाता है, लेकिन असल वजह कुछ और ही है. वैज्ञानिकों और ज्योतिष दोनों के अनुसार यह समय प्रकृति के सबसे शक्तिशाली चक्रों में से एक माना जाता है. यही वजह है कि नौतपा शुरू होने से पहले ही देश के कई हिस्से भट्टी की तरह तपने लगे हैं और नौतपा के दौरान भीषण गर्मी पड़ती है।  दरअसल गर्मी की असली वजह सूरज और धरती के बीच की दूरी नहीं बल्कि पृथ्वी का झुकाव है. नौतपा के दौरान पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई होती है. मई और जून के दौरान उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुक जाता है. इससे सूर्य की किरणें भारत पर सीधे और लंबवत पड़ती हैं. जब किरणें सीधी पड़ती हैं तो ज्यादा ऊर्जा एक छोटे हिस्से पर जमा होती है और तापमान तेजी से बढ़ जाता है. यही कारण है कि जनवरी में सूरज अपेक्षाकृत करीब होने के बावजूद ठंड रहती है, क्योंकि तब किरणें तिरछी पड़ती हैं. नौतपा के दौरान यही सीधी धूप धरती को सबसे ज्यादा गर्म करती है।  नौतपा का संबंध ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र से भी माना जाता है. मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो पृथ्वी पर गर्मी चरम पर पहुंच जाती है. इस साल 25 मई से 2 जून तक नौतपा रहने वाला है. मौसम विभाग (IMD) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हीटवेव का असर और बढ़ सकता है. कई शहरों में रात का तापमान भी 30 डिग्री से ऊपर बना रहेगा. यानी लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी. डॉक्टरों ने दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचने की सलाह दी है।  वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो नौतपा मानसून की तैयारी का भी अहम हिस्सा है. तेज गर्मी समुद्र से ज्यादा नमी खींचती है. यही नमी बाद में मानसूनी बारिश का आधार बनती है. मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़े तो मानसून मजबूत हो सकता है. यही कारण है कि किसान भी नौतपा को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी कहा जाता है कि 'जितना तपेगा नौतपा, उतना बरसेगा सावन.' हालांकि अत्यधिक गर्मी लोगों के लिए परेशानी भी बन जाती है और बिजली-पानी की मांग अचानक बढ़ जाती है।  इन दिनों उत्तर भारत के शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. दिल्ली में गर्म हवाएं और कंक्रीट की इमारतें तापमान को और बढ़ा रही हैं. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके तो मानो आग उगल रहे हैं. कई जगहों पर सड़कें पिघलने जैसी स्थिति बन गई है. वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरों में भी लू का असर लगातार बढ़ रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में कुछ हिस्सों में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन उससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।  गर्मी से बचाव इस समय सबसे जरूरी है. डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बन सकती है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. ORS, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने चाहिए और धूप में निकलते समय सिर ढकना जरूरी है. बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उन पर हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है।  नौतपा सिर्फ मौसम नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का भी हिस्सा है. कई जगहों पर सूर्य पूजा की परंपरा निभाई जाती है. लोग जल दान और अन्न दान करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. हालांकि वैज्ञानिकों के लिए यह पृथ्वी, सूर्य और मौसम के बीच संतुलन का एक अद्भुत उदाहरण है. यही समय हमें प्रकृति की असली ताकत का एहसास भी कराता है।  आखिर में समझने वाली सबसे बड़ी बात यही है कि गर्मी का कारण सूरज का पास आना नहीं बल्कि पृथ्वी का झुकाव और सूर्य की सीधी किरणें हैं. नौतपा इस प्रभाव को और ज्यादा तीव्र बना देता है. इसलिए आने वाले दिनों में सावधानी बेहद जरूरी है. क्योंकि तपती धरती के बाद ही मानसून की राहत मिलने वाली है। 

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन व महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने कार्य हेतु भूमिपूजन

रायपुर सर्वमंगला पुल सड़क का डामरीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य प्रारंभ नगर निगम कोरबा क्षेत्र के सर्वमंगला पुल सड़क का बहुप्रतीक्षित डामरीकरण व सुदृढ़ीकरण का कार्य आज प्रारंभ किया गया है। प्रदेश के उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन व महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने डामरीकरण कार्य हेतु पूजा अर्चना की, वहीं उद्योग मंत्री  देवांगन ने नारियल तोड़कर कार्य का शुभारंभ कराया तथा कार्य प्रारंभ कर पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करते हुये कार्य को यथाशीघ्र पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिये।  नगर पालिक निगम केारबा द्वारा जिला खनिज न्यास मद से 82 लाख रूपये की लागत से निगम क्षेत्रांतर्गत सर्वमंगला पुल सड़क एवं एप्रोच सड़क के डामरीकरण चैड़ीकरण व मजबूतीकरण का कार्य कराया जाना हैं, आज प्रदेश के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन व महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने उक्त कार्य का भूमिपूजन किया, उन्होने पूजा अर्चना की तथा उद्योग मंत्री  देवांगन ने नारियल तोड़कर कार्य का शुभारंभ कराया। उन्होने तत्काल कार्य प्रारंभ कर पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करते हुये यथाशीघ्र कार्य को पूरा करने के निर्देश अधिकारियों व निर्माण एजेंसियों को दिये। इस अवसर पर उद्योग मंत्री  देवांगन ने कहा कि ईरान-इजराईल युद्ध के कारण निर्मित हुई वैश्विक परिस्थितियों व इससे उत्पन्न डामर की कमी के कारण सड़कों के डामरीकरण के कार्य में अवरोध उपस्थित हो रहा है जबकि निगम क्षेत्र की सभी प्रमुख सड़कों के डामरीकरण व मजबूतीकरण का कार्य स्वीकृत हैं, निविदा आदि की प्रक्रिया कर ली गई है, किन्तु डामर की कमी के चलते कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं जबकि प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं,  उन्होने कहा कि काफी प्रयासों के बाद संबंधित निर्माण एजेंसी से आग्रह कर सर्वमंगला पुल सड़क के डामरीकरण का कार्य आज प्रारंभ किया गया है, इस कार्य के पूरा हो जाने के पश्चात इस मार्ग पर आवागमन अधिक  सुविधाजनक हो जायेगा तथा उडने वाली धूल से राहत मिलेगी, उद्योग मंत्री  देवांगन ने कहा कि कोरबा की अन्य सड़कों का डामरीकरण कार्य भी प्रारंभ हो, इस हेतु लगातार मेरे द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं, वहीं कलेक्टर  कुणाल दुदावत व निगम आयुक्त  आशुतोष पाण्डेय द्वारा प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार प्रयास जारी हैं।    इस अवसर पार्षद चन्द्रलोक सिंह, ईश्वर पटेल, रामाधर पटेल, माधव जायसवाल, पूर्व पार्षद दीपा राठौर, मण्डल अध्यक्ष मनीष मिश्रा, केारबा मण्डल अध्यक्ष योगेश मिश्रा, रामशंकर साहू, हीरू जायसवाल, उत्तम जायसवाल, सुकेश दलाल, मनोज राठौर, अमित सिंह, वैभव शर्मा, जोन कमिश्नर सुनील टाण्डेय, सहयक अभियंता पीयूष सिंह राजपूत, उपअभियंता विनोद गोंड़, अंजय पाण्डेय, दीपक यादव, मनोज सिंह राजपूत, अनिल यादव आदि के साथ अन्य नागरिकगण उपस्थित थे।

आवेदनों के निराकरण में मुंगेली जिला प्रदेश में प्रथम, विधायक ने दी बधाई व शुभकामनाएं

रायपुर शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे गांव तक: विधायक  मोहले मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप जनसमस्याओं के निराकरण और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड मुंगेली के ग्राम ठकुरीकापा में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और विभिन्न विभागों के माध्यम से अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। शिविर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ हितग्राहियों को विभिन्न विभागों की सामग्री का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक  पुन्नूलाल मोहले शामिल हुए। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष  कांत पांडेय, जनपद अध्यक्ष  रामकमल सिंह परिहार, नगर पँचायत बरेला के अध्यक्ष  नरेश पाटले, अतिरिक्त कलेक्टर मती निष्ठा पांडेय तिवारी, जनपद पंचायत सदस्य  पवन पांडेय तथा मुंगेली एसडीएम अजय शतरंज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक  मोहले ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ गांव-गांव तक पहुंचे और लोगों की समस्याओं का समाधान समय पर हो। उन्होंने कहा कि जमीन सीमांकन, विद्युत पोल, राशन कार्ड, स्वास्थ्य, श्रम एवं कृषि विभाग सहित सभी विभागों के अधिकारी गांव के लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री की सुशासन की परिकल्पना को धरातल पर उतारते हुए योजनाओं को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों के निराकरण में जिला प्रदेश में अग्रणी स्थान प्राप्त कर रहा है, जो जिले के लिए गर्व की बात है। विधायक मोहले ने ग्रामीणों से 10 जून तक इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में मुंगेली को अव्वल दर्जा दिलाने के लिए प्रशासन और जनता दोनों की सहभागिता आवश्यक है।   जिला पंचायत अध्यक्ष कांत पांडेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लगातार सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य कर रही है। पहले लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूर-दराज कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब गांव में ही शिविर लगाकर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को भी मंच के माध्यम से अधिकारियों के समक्ष रखा और उनके त्वरित निराकरण की बात कही। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष मुंगेली ने भी आमजनों को योजनाओं का लाभ उठाने प्रेरित किया         एडीएम ने बताया कि सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जिले में कुल 24 शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुंगेली जनपद क्षेत्र में पांच शिविर प्रस्तावित हैं, जिनमें यह चौथा शिविर था। इस शिविर में लगभग 300 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका निर्धारित समय-सीमा में निराकरण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सभी आवेदनों का गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए।  शिविर के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी गई। वहीं पात्र हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण पत्रों का वितरण भी किया गया। शिविर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत 20 हितग्राहियों को चेक व प्रमाण पत्र, 20 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत आवास पूर्णता प्रमाण पत्र, स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत 20 हितग्राहियों को स्वीकृति प्रमाण पत्र, 05 हितग्राहियों को नवीन राशनकार्ड, 20 हितग्राहियों को नानी सुरक्षा प्रमाण पत्र, 04 हितग्राहियों को आइस बॉक्स एवं नाव जाल, 10 किसानों को अरहर मिनी किट, 18 किसानों को केसीसी का चेक, 10 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, 18 हितग्राहियों को श्रम कार्ड, 05 को फलदार पौधा और 05 विद्यार्थियों को गणवेश वितरण कर लाभान्वित किया गया।

मुरैना के डायल-112 हीरोज ट्रक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 02 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मुरैना जिले के थाना कैलारस क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से ट्रक के अनियंत्रित होकर पलटने से घायल दो व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। 23 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कैलारस क्षेत्र अंतर्गत निरार शीतलापुरी के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया है, जिसमें 02 व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कैलारस थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजय पाल गुर्जर एवं पायलट  मनोज धाकड़ ने पाया कि ट्रक अनियंत्रित होकर पलट जाने से दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। डायल-112 जवानों ने सभी घायलों को तत्काल एफआरव्ही वाहन की सहायता से शासकीय अस्पताल, कैलारस पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।