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माँ की जान बचाने में आगे बढ़ा भारत, मध्यप्रदेश की प्रगति राष्ट्रीय औसत से दोगुनी एमएमआर में 38 अंकों की गिरावट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है। तकनीक आधारित निगरानी से प्राप्त हुए सकारात्मक परिणाम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एएनएमओएल 2.0 एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम पंजीयन, जांच और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन 24×7 उपलब्ध कराया जा रहा है। सुमन पहल के अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और प्राथमिकता आधारित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुँच के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाने के लक्ष्य की दिशा में सुगठित प्रयास जारी रहेंगे।  

मध्यप्रदेश बनेगा देश का ब्लू इकॉनमी हब: केज कल्चर के लिए डेढ़ से दो लाख प्रस्ताव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मत्स्योत्पादन को दोगुना करने के विजन को लेकर 'मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026' के सफल क्रियान्वयन की दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय 'हितधारक सम्मेलन' हुआ। इस सम्मेलन में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की उपस्थिति में मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों और निवेशकों ने उत्साह दिखाया। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि प्रदेश में पहले वर्ष 10 हज़ार केज लगाने का लक्ष्य था, लेकिन निवेशकों की ओर से लगभग 2 लाख केज लगाने के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जा रही है। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने कहा कि आज का यह समागम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार पहली बार पारंपरिक मत्स्य पालन की सीमाओं से आगे बढ़कर एकीकृत मत्स्योद्योग (हितग्राही और उद्यमी मॉडल) पर काम कर रही है। इसे केवल एक समाज आधारित योजना के रूप में न देखकर, हर वर्ग को साथ लेकर चलने और रोजगार सृजन की 'स्टार्टअप आधारित ब्लू इकॉनमी' के रूप में देखा जाना चाहिए। केज कल्चर के लिए खत्म हो आवेदन की समय सीमा:  पंवार राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केज कल्चर के प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया को किसी समय-सीमा में न बांधा जाए। इसे एक सतत प्रक्रिया बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी और हितग्राही इससे जुड़ सकें। कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य विकास के लिए 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने, हैचरी निर्माण और फिश फीड के लिए शासन द्वारा पूरी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र के हितधारकों से मत्स्य उत्पादन के आधुनिकीकरण में सहयोग की अपील की। हर निवेशक के साथ जुड़ेंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर: सचिव  सिंह मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश जलाशयों का केंद्र है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए हर निवेशक के साथ सुविधानुसार एक 'कॉन्टैक्ट ऑफिसर' नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी निवेशक के सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण, सब्सिडी और अन्य विभागीय कार्यों को पूर्ण कराने में मदद करेगा। साथ ही, विभाग द्वारा मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यमंत्री  नारायण सिंह पंवार ने केज कल्चर के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिक रूप से चयनित केज कल्चर के हितधारकों को अभिस्वीकृति पत्र वितरित किये गए। मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी ने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में निवेशकों और उद्यमियों के साथ 'राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस' भी आयोजित की गई, जिसमें स्टेक होल्डर्स से प्राप्त प्रस्तावों और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रदेश में 'केज कल्चर' को बढ़ावा देने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सीड, फीड और जाल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विक्रेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के संचालक  मनोज पथरोलिया, मत्स्य महासंघ के महाप्रबंधक  रवि गजभिए समेत प्रदेश भर से आए मत्स्य उद्यमी, निवेशक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। उप संचालक, मत्स्योद्योग  गिरीश मेश्राम ने सभी अतिथियों, निवेशकों और हितधारकों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।  

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि को वैश्विक मानचित्र पर मिलेगी विशिष्ट पहचान

आगरा  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि और 101 प्राचीन शिव मंदिरों की श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध आगरा के 'बटेश्वर धाम' को आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। भारत सरकार की एसएएससीआई (SASCI) योजना के अंतर्गत 71.50 करोड़ रुपये की लागत से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 56.11 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बटेश्वर धाम में विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधाओं का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है और इस पूरी परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। विज़िटर सपोर्ट और आधुनिक आवास क्षेत्र का निर्माण श्रद्धालुओं और देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस परिसर को बेहद आधुनिक रूप दिया जा रहा है। विज़िटर सपोर्ट एवं आवास क्षेत्र के तहत यहाँ विशाल पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय और महिला व पुरुष आगंतुकों के लिए करीब 20 कमरों की क्षमता वाले अलग- अलग सर्वसुविधायुक्त डॉरमेट्री का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए आधुनिक कैफेटेरिया, फूड कियोस्क, सोवेनियर शॉप और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक विशेष इंटरैक्टिव जोन तैयार किया जा रहा है। पर्यटक यहां के शांत और रमणीय वातावरण का आनंद ले सकें, इसके लिए ओपन सीटिंग एरिया सहित एक आधुनिक पर्यटन सुविधा केंद्र भी बनाया जाएगा। शिव पुराण, समुद्र मंथन और डिजिटल गैलरी का आकर्षण आध्यात्मिकता और संस्कृति के इस अनूठे संगम में पर्यटकों को आधुनिक तकनीक से जुड़ा एक बेहद अद्भुत अनुभव मिलेगा। यहां विकसित की जा रही इंटरैक्टिव गैलरी और थीम आधारित आकर्षण श्रद्धालुओं को भारतीय आध्यात्मिक विरासत के करीब लाएंगे। म्यूजियम गैलरी-1: इसमें चारों वेदों और शिव पुराण की पावन कथाओं को अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। म्यूजियम गैलरी-2: यहाँ मुख्य रूप से 'चार धाम गैलरी' और 'समुद्र मंथन गैलरी' बनाई जा रही हैं, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी। शिव सहस्रनाम खंड: भगवान शिव के विविध स्वरूपों और उनकी महिमा को प्रदर्शित करने के लिए विशेष थीम आधारित इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। 'ध्यान पथ' और 'शिव प्रांगण' से मिलेगी असीम शांति परियोजना का सबसे मुख्य और खूबसूरत आकर्षण इसका 'सेंट्रल लैंडस्केप क्षेत्र' होगा, जिसे अनुभवात्मक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में आकार दिया जा रहा है। यहां एक विशाल वटवृक्ष (बरगद के पेड़) के समीप भगवान शिव की ध्यानमग्न मुद्रा में एक भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस दिव्य प्रतिमा के चारों ओर एक आकर्षक 'ध्यान पथ' और भव्य 'शिव प्रांगण' विकसित किया जाएगा, जो यहाँ आने वाले लोगों के लिए श्रद्धा, शांति और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष केंद्र बनेगा। पंचभूत शिव स्कल्पचर गार्डन और शिवलिंगम पार्क धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता को नया विस्तार देते हुए इस परियोजना के अंतर्गत पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को समर्पित एक भव्य 'पंचभूत शिव स्कल्पचर गार्डन' विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही देश के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों की सुंदर प्रतिकृतियों से सुसज्जित 'शिवलिंगम पार्क' और यमुना नदी व भगवान शिव के प्राचीन आध्यात्मिक संबंध को दर्शाने वाला मनमोहक 'कालिंदी वनम' भी तैयार किया जा रहा है। इस परिसर की भव्यता को संपूर्णता देने के लिए सेवा के प्रतीक भगवान नंदी की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा यूपी बटेश्वर धाम के इस कायाकल्प और सरकार के विजन को साझा करते हुए उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा है। हमारी सरकार बटेश्वर धाम के समेकित विकास के जरिए इसकी प्राचीन विरासत को सहेजने के साथ- साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आगरा देशी- विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरा है, जहां वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 1.83 करोड़ पर्यटकों ने भ्रमण किया है। उन्होंने कहा कि बटेश्वर धाम का यह समेकित विकास उत्तर प्रदेश को वैश्विक आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगा। 'हेरिटेज रिवाइवल कॉरिडोर' के रूप में परिकल्पित यह परियोजना बटेश्वर की प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं से जोड़ेगी। इससे न केवल वैश्विक आगंतुकों को एक नया दिव्य अनुभव मिलेगा, बल्कि पर्यटन विभाग द्वारा राज्य के लोकप्रिय स्थलों के साथ-साथ ऐसे अल्पज्ञात ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक, ड्रम-जेरीकेन में बिक्री पर रोक

रायपुर पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग के अनुसार प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों पर 22 मई 2026 की स्थिति में 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है। राज्य को प्रतिदिन आपूर्ति जारी है। 21 मई को ही 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल की प्राप्ति हुई है। लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित ऑयल कंपनी डिपो से जिलों को मांग के अनुसार सप्लाई की जा रही है। रबी फसल कटाई और खरीफ की तैयारी के कारण डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे ध्यान में रखकर आपूर्ति बढ़ाई गई है। ड्रम-जेरीकेन में बिक्री प्रतिबंधित, किसानों को छूट   राज्य शासन ने 22 मई को जारी आदेश में सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल और जेरीकेन में ईंधन की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। उल्लंघन पर मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत ‘अप्राधिकृत विक्रय’ मानकर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई होगी। हालांकि रबी-खरीफ सीजन के लिए किसानों, कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों और अस्पताल, मोबाइल टावर जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके लिए अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप बिक्री की अनुमति होगी। पैनिक खरीदारी से बचने की अपील   सचिव खाद्य ने 20 मई को सभी ऑयल कंपनियों के साथ समीक्षा बैठक कर ड्राई आउट होने वाले पंपों को तत्काल स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से प्रभावित होकर पैनिक खरीदारी या संग्रहण न करें। राज्य में ईंधन की आपूर्ति सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना, कच्चे घर से पक्के मकान तक पहुंची जिंदगी

रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है। इस योजना के माध्यम से अनेक परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। सुशासन तिहार के अंतर्गत बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही मती अनीता निषाद से संवाद किया। आवास  मती निषाद की सास मती सुकलहीन निषाद के नाम से स्वीकृत हुआ है। मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश और मौसम की मार के कारण घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें कुछ समय तक आंगनबाड़ी केंद्र में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रहा है। उन्होंने कहा कि अब बारिश और अन्य मौसम की चिंता नहीं रहती तथा बच्चों के लिए भी बेहतर वातावरण मिला है। मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री  साय एवं सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को नया जीवन और नई उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है ताकि कोई भी परिवार असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर न हो।

जनजातीय विकास में एआई और नई तकनीकों की भूमिका पर हुआ मंथन

रायपुर जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 अंतर्गत आदिम जाति विकास विभाग अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आज राज्य स्तरीय एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आदिम जाति विकास विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कहा कि प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग से पारदर्शिता, समय की बचत एवं घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान संभव हुआ है। छत्तीसगढ़ जनजाति संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक के प्रयोग में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है।                प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि एआई का प्रयोग पारंपरिक ज्ञान को संजोने, रिमोट एरिया में स्वास्थ्य सुधार, लघु वनोपजों एवं कृषि मंडियों के डिजिटलीकरण, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं की अधिक सुगमता से जानकारी एवं लाभ इत्यादि में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनजातीय विकास में एआई का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। परन्तु एआई मनुष्य की संवेदनशील मानसिकता की प्रतिकृती नहीं कर सकती है। अतः आवश्यकता एवं उपयोगिता के आधार पर जनजातीय क्षेत्र में एआई का प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सबसे दूर, सबसे पहले के ध्येय वाक्य को सार्थक करना है।                 संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी ने कांकेर जेल मे बंद नक्सल आदिवासियों पर किए जा रहे उनके कौशल विकास के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनमें से 08 कैदियों द्वारा वंदे मातरम पर किए गए कार्य को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। उन्होंने सरकार को इनकी प्रतिभा पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि यदि ईमानदारी के साथ कार्य किया जाए तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी से जनजातीय विकास के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।                 टीआरटीआई के संचालक मती हीना अनिमेष नेताम ने कार्यशाला के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर अपर संचालक  संजय गौढ़, संयुक्त संचालक मती गायत्री नेताम मौजूद रही। वहीं वीडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास तथा परियोजना प्रशासक जुड़े थे।  एनआईसी डायरेक्टर के  सत्येश शर्मा ने संगोष्ठी में बताया कि यूज ऑफ टेक्नेलॉजी और सर्विस डिलवरी देना दोनों अलग-अलग तथ्य है और चुनौती भी है। उन्होंने बताया कि टेक्नेलॉजी के क्ष़्ोत्र में गुणवत्तायुक्त डाटा संग्रहण प्रमुख पहलु है। उन्होंने डेटा का वेरिफिकेशन करने के साथ-साथ डेटा की कमी को पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा का सलेक्शन सही नहीं होने पर सर्विस डिलवरी में भी समस्या आएगी। उन्होंने बताया कि अगर डेटा का इनपुट सही नहीं होने से परिणाम बायस्ड् आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि एआई मशीन में आएगा तो सारा डिसीजन मशीन ही लेने लगेगा और हमें रिप्लेस करने की कोशिश करना होगा।                 आईआईएम के  अमित कुमार जनजातीय उद्यमिता एवं र्स्टाटअप में एआई का उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने एआई के प्रयोग में स्थानीय लेग्वेंज को सबसे बढ़ी बाधा बताया। उन्होंने वास्तविक परिणाम के लिए बोली-भाषा के ज्ञान पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों में टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक तथा अनेक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता हेतु शासकीय स्तर पर भी अभियान चलाने के सुझाव दिए।  समर्थन संस्था से  देवीदास निम्जे ने कहा कि यदि हम स्थानीय स्तर पर एक गांव की बात करें तो किसान को खेती के संबंध में सब कुछ पता होता है, किन्तु नई तकनीकी की जानकारी के अभाव में गांव के दो-तीन लोगों पर ही केन्द्रित होना पड़ता है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के लोगों विशेषकर टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करते हुए नेटवर्क बढ़ने पर बल दिया।               एनआईटी के डॉ. राकेश त्रिपाठी ने संगोष्ठी में एआई से स्थानीय ज्ञान को बढ़ाने, ज्ञान सैद्धान्तिक इस्तेमाल करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा ज्ञान को सुदृढ़ कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एआई के माध्यम से अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।                आईआईआईटी नवा रायपुर के डॉ. रामाकृष्ण ने ड्रॉपआउट और पास पर्सनल, क्वालिटी ऑफ टीचिंग और लर्निंग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा मेनटेन करने साथ-साथ आम आदमी तक टेक्नोलॉजी की पहंुच पर जोर दिया। उन्होंने एआई युजर को प्रोटेक्ट करने बायस्ड् इंफॉरमेशन न मिले इस पर भी अपना विचार व्यक्त किया।                 जनजातीय विशेषज्ञ  अश्वनी कांगे ने “जनजातीय नेतृत्व आधारित सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर अपना वक्तव्य दिया गया।  कांगे अंदरूनी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी की पहुंच पर जोर दिया उन्होंने कहा कि जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को एक टूल में बाधंना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग के हर पहलु जैसे बीजा पण्डुम, कृषि रस्मों-रिवाज में ज्ञान समाहित है, जिस पर वृहद रूप से चर्चा करने की आवश्कता है।                  संगोष्ठी अंतर्गत विशेषज्ञों के द्वारा मुख्य रूप से गुणवत्तायुक्त डॉटा के संकलन पर जोर दिया। विशेषज्ञों को मानना है कि किसी विषय पर जितना ज्यादा डेटा उपलब्ध होगा, उतनी ही विश्वसनीयता और सहजता के साथ एआई को डाटा विश्लेषण कर सही प्रमाण देने में ज्यादा सक्षम होगा।                   साथ ही एआई की मदद से जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा स्वास्थ्यगत समस्याओं के निवारण में बेहतर कार्य होगा। क्योंकि अंतिम छोर में माने जाने वाले जनजातीय समुदाय से विकास की गति को प्रारंभ करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में उनके ज्ञान को मूल रूप में सहेजते हुए उनकेे विचारों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक मूल्यों और आधुनिक तकनीकों में सामंजस्य बना रहे। संगोष्ठी में शामिल अन्य विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

राजधानी में विकास को रफ्तार, जाम से निजात दिलाने की बड़ी तैयारी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में कचना रेलवे ओवरब्रिज का लोकार्पण कर इसे आम जनता को समर्पित किया। साथ ही 22.79 करोड़ रुपये की लागत से बने शंकर नगर-खम्हारडीह-कचना मार्ग के चौड़ीकरण कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह ओवरब्रिज उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कचना रेलवे फाटक में लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई थी, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ओवरब्रिज के शुरू होने से अब लोगों को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुविधा मिलेगी। इससे विशेष रूप से कचना, खम्हारडीह एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की केंद्रीय सड़क निधि योजना के अंतर्गत इस परियोजना को स्वीकृति मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कचना, खम्हारडीह और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए खुशी का दिन है। जनता की वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। अब यहां ट्रैफिक जाम और वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी। इससे कार्यालय, स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापारी एवं व्यवसायियों को भी बड़ी सुविधा होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त निधि के माध्यम से इस ओवरब्रिज का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूर्ण करने के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि इस ब्रिज की लंबाई 787 मीटर एवं चौड़ाई 13 मीटर है तथा 48.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस ओवरब्रिज के बनने से रायपुर शहर की यातायात व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा समय की बचत भी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क, पुल और अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने निर्माण कार्य में जुड़े अधिकारियों एवं एजेंसियों को बधाई देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार अपने कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने के साथ ही सीधे लोगों के बीच जाकर योजनाओं और विकास कार्यों का फीडबैक भी ले रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाकर वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है। वे स्वयं अचानक गांवों में पहुंचकर पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि लोग शासन की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं और राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर क्षेत्र विकास से वंचित रहा, लेकिन अब नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। नियद नेल्लानार 2.0 के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। अब तक 20 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है तथा 55 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है और उसी के अनुरूप सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने कहा कि कचना क्षेत्र में लगभग 25 बड़ी कॉलोनियां स्थित हैं और यह रेलवे ओवरब्रिज इन सभी कॉलोनियों को रायपुर शहर से बेहतर तरीके से जोड़ने में अत्यंत प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि कचना का यह ओवरब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि रायपुर और कचना को जोड़ने वाली जीवनरेखा है। इससे न केवल कचना और आसपास के रहवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बिलासपुर और बलौदाबाजार की ओर आने-जाने वाले लोगों को भी यातायात में बड़ी सुविधा प्राप्त होगी।  साव ने कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। पहली बार लोक निर्माण विभाग को 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मिली है। राज्य सरकार के गठन के बाद रिकॉर्ड संख्या में पुलों का निर्माण किया गया है। यातायात को सुगम बनाने और प्रदेशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार द्रुतगामी सड़कों का निर्माण कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे गांवों तक भी सड़क पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, जहां आज तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, महापौर मती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, पार्षद मती पुष्पा साहू, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त  संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बुजुर्ग रोगियों के लिए वयोमित्र कार्यक्रम एक आदर्श मॉडल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानों पर आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा व्यवस्था और वेलनेस केन्द्र स्थापित करने की पहल सराहनीय है। अन्य प्रदेशों में हुए ऐसे सफल प्रयोगों और नवाचारों का अध्ययन कर बेहतर कार्य करते हुए उन्होंने जन-जन तक इनकी जानकारी और इनका लाभ पहुंचाने के आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वृद्ध नागरिकों की डोर टू डोर आयुष देखभाल के लिए वयोमित्र कार्यक्रम उपयोगी है। इसी तरह कारूण्य के अंतर्गत असाध्य रोगों का कष्ट झेल रहे रोगियों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने का कार्य भी प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयुष विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के साथ किए गए एमओयू के अंतर्गत प्रदेश में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें विश्व धरोहर स्थल खजुराहो जिला छतरपुर के साथ ही ओंकारेश्वर जिला खण्डवा, चंदेरी जिला अशोकनगर, चित्रकूट जिला सतना, पचमढ़ी जिला नर्मदापुरम, ओरछा जिला निवाड़ी के अलावा उज्जैन, दतिया, मंदसौर, आलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी के साथ ही ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का प्रोत्साहन आवश्यक है जो भारतीय परम्परा से जुड़ी हैं। प्रदेश के अनेक स्थानों पर प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य कार्यरत हैं। इनकी सेवाओं से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित होते हैं। उज्जैन सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ लेकर शल्य चिकित्सा के बिना रोगियों को लाभान्वित करने के उदाहरण मिलते हैं। सामान्य प्रसव करवाने वाले अस्पताल भी प्रदेश में संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजीवन आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ लेने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहन कार्यक्रमों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुक्रम में प्रदेश के जिला स्तरीय चिकित्सालयों में विकल्प के रूप में आयुष चिकित्सा के लिए पृथक विंग स्थापित करने का कार्य चल रहा है। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यों की गति बढ़ाई जाए। बैठक में बताया गया कि जिलों में आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के व्यापक संचालन के अंतर्गत सुप्रजा, आयुर्विद्या, वयोमित्र, मस्कुलर-स्केलेटल प्रिवेंटिव कार्यक्रम और कारूण्य का लाभ नागरिकों को दिलवाया जा रहा है। जनजातीय बहुल और सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जिलों में आयुर्वेद औषधियों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 22 जिलों के एलोपैथी चिकित्सालयों में आयुष विंग की स्थापना की कार्यवाही चल रही है। पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित करने और 12 जिलों में 50 बिस्तर क्षमता के आयुष अस्पताल प्रारंभ करने का कार्य चल रहा है। भारत सरकार से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत गत दो वर्ष में नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर जिला शाजापुर में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय के निर्माण की मंजूरी मिली है। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के परिसर में 29 करोड़ की लागत से प्रशासनिक और अकादमिक भवन का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 6 जिला आयुष कार्यालय बन कर तैयार हो गए हैं। इसी तरह 80 आयुष औषधालयों के भवन बनाए जाने थे, जिनमें से 53 का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। आयुष विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेश के सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को फर्स्ट रेफेरल यूनिट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सभी 9 आयुष महाविद्यालयों में हॉस्टल बनाने, सीट क्षमता का 100 तक उन्नयन करने, यूनानी पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध करवाने, आयुष महाविद्यालयों में शोध कार्य बढ़ाने और बालाघाट में आयुष शोध केन्द्र का संचालन प्रारंभ करने का भी लक्ष्य है। श्रम विभाग से समन्वय कर प्रदेश के लगभग 13 लाख कर्मचारी राज्य बीमा में पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा पद्धति की कैशलेस सुविधा दिलवाने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य बीमा में आयुष को शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 7 आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी विभाग स्थापित करने, आयुष विश्वविद्यालय की पहल और एक प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय स्थापित करने तथा ऐसे जिलों जहां आयुष चिकित्सा सुविधा नहीं है, वहां 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ करने के कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। बैठक में आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

कांग्रेस की टिप्पणी पर सीएम योगी का तीखा प्रहार, प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी को बताया कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों का प्रमाण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विषय में की गई अभद्र, असंसदीय और अक्षम्य टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को उजागर करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की भाषा और व्यवहार लगातार लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले कांग्रेस के “युवराज” भी अपनी टिप्पणियों के जरिए अपने कुसंस्कारों का परिचय दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस आज हताशा, निराशा, कुंठा और मानसिक दिवालियेपन के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुकी है। जनता का समर्थन लगातार घटने के कारण कांग्रेस के नेताओं में राजनीतिक संयम और शालीनता भी समाप्त होती जा रही है।  उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग कांग्रेस नेताओं द्वारा किया जा रहा है, वह भारतीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थिति अब ऐसी हो चुकी है कि वह देशवासियों से क्षमा मांगने की नैतिक स्थिति में भी नहीं बची है।