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दहेज की कुरीति पर रंगमंच से प्रहार, ‘मया के मुंदरी’ ने जगाई सामाजिक चेतना

रायपुर संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का शुभारंभ बुधवार को मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस, घड़ी चौक रायपुर में हुआ। 9 से 11 सितंबर तक आयोजित इस नाट्य श्रृंखला में प्रतिदिन दो नाटकों की रंगमंचीय प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। आयोजन में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और पौराणिक कथाओं को रंगमंच के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है। रंगमंच हमारी संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है। कलाकार अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से दर्शकों को सोचने, समझने और सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को भी समृद्ध करने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। ‘मया के मुंदरी’ ने दहेज प्रथा के खिलाफ बुलंद की आवाज नाट्य श्रृंखला की पहली प्रस्तुति ‘मया के मुंदरी’ रही, जिसका मंचन रिखी क्षत्रिय एवं समूह द्वारा किया गया। नाटक ने शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर आकर्षित किया। दहेज प्रथा पर केंद्रित इस प्रस्तुति में दिखाया गया कि किस तरह धन-संपत्ति का लालच विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को रिश्ते से सौदेबाजी में बदल देता है। नाटक में दहेज के लालची पिता के चरित्र के माध्यम से यह दिखाया गया कि बेटे का विवाह उसके लिए संस्कार, प्रेम और पारिवारिक संबंधों का अवसर न रहकर धन-संपत्ति और गाड़ी हासिल करने का माध्यम बन जाता है। दहेज के लालच की यह मानसिकता केवल सामाजिक और नैतिक मूल्यों को कमजोर नहीं करती, बल्कि परिवार और रिश्तों की बुनियाद को भी प्रभावित करती है। कहानी का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह रहा कि स्वाभिमानी बेटा और उसकी मां दहेज के खिलाफ मजबूती से खड़े होते हैं। वे गरीब लड़की और उसके पिता का समर्थन करते हैं तथा विवाह को आर्थिक लेन-देन से अलग मानवीय संबंध के रूप में स्थापित करने का प्रयास करते हैं। नाटक में अंततः युवक दहेज रूपी कुरीति का विरोध करते हुए गरीब लड़की से विवाह स्वीकार करता है। ग्रामीण रीति-रिवाजों और परंपराओं के बीच विवाह संपन्न होता है। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि विवाह किसी सौदे का नाम नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता पर आधारित जीवन-संबंध है। ‘हरित सागर’ ने पौराणिक कथा को दिया रंगमंचीय स्वरूप नाट्य श्रृंखला की दूसरी प्रस्तुति 7वीं शताब्दी की संस्कृत उत्तरकथा ‘हरित सागर’ पर आधारित रही। इस नाटक के लेखक एवं निर्देशक श्री किशोर वैभव हैं। पौराणिक कथा पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को एक अलग ही रंगमंचीय संसार से परिचित कराया। नाटक की कथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को एकांत में सुनाई गई कथा से जुड़ी है। कथा को जलंधर द्वारा सुन लिए जाने के बाद घटनाक्रम आगे बढ़ता है। इसके पश्चात माता पार्वती द्वारा दिए गए श्राप और उस श्राप से मुक्ति की कथा को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने संवाद, अभिनय और रंगमंचीय प्रस्तुति के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत बनाने का प्रयास किया। कथा की प्रस्तुति ने दर्शकों को पौराणिक आख्यानों की रोचकता और रंगमंच की सृजनात्मक शक्ति से रूबरू कराया। रंगमंच के जरिए सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संवाद का प्रयास ‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का विशेष आकर्षण यह है कि इसमें मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक चिंतन और सांस्कृतिक चेतना को भी केंद्र में रखा गया है। एक ओर ‘मया के मुंदरी’ जैसी प्रस्तुति दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है, वहीं ‘हरित सागर’ जैसी प्रस्तुति पौराणिक कथा और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को रंगमंच के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाती है। तीन दिनों तक चलने वाली इस नाट्य श्रृंखला में विभिन्न विषयों और कथानकों पर आधारित नाटकों की प्रस्तुतियां होंगी। संस्कृति विभाग का यह आयोजन रंगमंच के कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ ही दर्शकों को चिंतन, संवेदना, संस्कृति और मनोरंजन का समन्वित अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के जरिए नशा मुक्ति को जन आंदोलन बनाएगी योगी सरकार, युवाओं में विकसित होगा नशामुक्त जीवन का संस्कार

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और नशामुक्त जीवन को उनके संस्कार का हिस्सा बनाने की दिशा में उच्च शिक्षण संस्थानों को अभियान का प्रमुख केंद्र बनाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के आह्वान को जन आंदोलन का स्वरूप देने और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशा मुक्ति अभियान को और प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर कक्षा में विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाने से लेकर साप्ताहिक जागरूकता व्याख्यान, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, छात्रावासों की निगरानी और रचनात्मक गतिविधियों तक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय में नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जिसके जीवन में नशा मुक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कार के रूप में विकसित हो। बैठक में प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा सहित विभागीय अधिकारी तथा राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। हर कक्षा में शपथ, हर सप्ताह नशा मुक्ति पर संवाद योगी सरकार की इस मुहिम को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने कक्षा शुरू होने से पहले नशा मुक्ति की संक्षिप्त शपथ दिलाने के निर्देश दिए। प्रतिदिन आधा से एक मिनट की शपथ के जरिए विद्यार्थियों के मन में नशे के प्रति नकारात्मक और स्वस्थ जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास होगा। इसके साथ प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक बार शिक्षकों द्वारा नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के सकारात्मक प्रभावों पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया जाएगा। इसके लिए सप्ताह का एक दिन निर्धारित किया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि नशा मुक्ति का संदेश किसी एक कार्यक्रम या दिवस तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के नियमित शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बने। विश्वविद्यालय से फैकल्टी तक बनेगा निगरानी तंत्र अभियान को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारने के लिए विश्वविद्यालयों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। महाविद्यालय और फैकल्टी स्तर पर भी नोडल अधिकारी नामित होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी देकर अभियान की नियमित निगरानी कराई जाएगी। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पूर्व में कराए गए निरीक्षणों और जांच की रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से अधिक छात्र संख्या वाले छात्रावासों में नशे की रोकथाम के लिए अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी संकलित की जाएगी। छात्रावासों पर विशेष नजर, होंगे आकस्मिक निरीक्षण युवाओं को नशे से बचाने की योगी सरकार की रणनीति में छात्रावासों की निगरानी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। बाहर से छात्रावास में आने वाली सामग्री की गेट स्तर पर आवश्यक जांच करने के साथ वार्डन और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में नशीली सामग्री के इस्तेमाल की किसी भी संभावना को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है। हालांकि विद्यार्थियों के प्रति दृष्टिकोण केवल दंडात्मक नहीं होगा। उन्हें समझाकर और जागरूक कर नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा। पोस्टर से पदयात्रा तक, विद्यार्थी बनेंगे अभियान के भागीदार योगी सरकार नशा मुक्ति अभियान को केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की भागीदारी से जनजागरूकता अभियान का स्वरूप देगी। नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के लाभ पर निबंध, कहानी, चित्रकला, पोस्टर एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों और विशेषज्ञों के व्याख्यान कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय परिसरों में छोटी नशा मुक्ति पदयात्राएं भी निकाली जाएंगी। फैकल्टी और विभाग स्तर पर भी सीमित अवधि की पदयात्राएं आयोजित की जा सकेंगी। परिसरों के अंदर और आवश्यकता के अनुसार बाहर होर्डिंग, पोस्टर और दीवार लेखन के जरिए भी नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाया जाएगा। ‘नशामुक्त युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की ताकत’ उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि नशा मुक्ति का संदेश तभी स्थायी परिणाम देगा, जब वह विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बने। लगातार शपथ, व्याख्यान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से इसे संस्कार में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी है। योगी सरकार संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्वस्थ, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। नशामुक्त और संस्कारवान युवा ही ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने की मजबूत नींव बनेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी से मिलेगा नया विस्तार

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से जीपीएम जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र नागरिकों तक पहुंचाने, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने और विकास की प्रक्रिया में प्रत्येक परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा। कलेक्टर  विजय दयाराम के. ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर समन्वय, स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्ययोजना तथा प्रभावी मैदानी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकेश रावटे को ‘सेवा संकल्प अभियान’ का जिला नोडल अधिकारी बनाया गया है। ‘आशीर्वाद का दीया’ से होगा अभियान का शुभारंभ अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। इस दिन शाम को जिले के प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलित कर अभियान से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक दीप प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति नागरिकों के आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक होगा। मैदानी अमला घर-घर पहुंचकर नागरिकों को इस पहल की जानकारी देगा तथा उन्हें दीप प्रज्वलन के माध्यम से अभियान में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेगा। इस गतिविधि का उद्देश्य विकास के संकल्प को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जन-जन और घर-घर का संकल्प बनाना है। बच्चों की कल्पनाओं में दिखेगा विकसित भारत ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के अंतर्गत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जिले के शासकीय एवं निजी विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को विकसित भारत की अपनी कल्पना और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा कार्यों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही बच्चों द्वारा तैयार की गई श्रेष्ठ कलाकृतियों एवं उनकी कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन के सामने रखा जाएगा। नुक्कड़ नाटकों के जरिए आमजन तक पहुंचेगी ‘नमो सेवा गाथा’ अभियान के दौरान ‘नमो सेवा गाथा’ के अंतर्गत 17 सितंबर से विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, उनके उद्देश्यों और योजनाओं से लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की कहानियों को रोचक एवं प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया जाएगा। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से नागरिकों को पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम छोर तक पहुंच सके। ‘आंगन का उत्सव’ में पोषण और महिला-बाल कल्याण पर जोर 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों को दी जाएगी। कार्यक्रमों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनका सम्मान भी किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। ‘कहानी बदलाव की’ में सामने आएंगी सफलता की वास्तविक कहानियां अभियान के दौरान ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियों का संकलन किया जाएगा। इन कहानियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव किस तरह आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। हितग्राहियों की सफलता की कहानियां अन्य पात्र नागरिकों को भी योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी। जनभागीदारी से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगा विस्तार ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से जिले में शासन की योजनाओं की जानकारी को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ-साथ सेवा, सहभागिता और संकल्प की भावना को जन-जन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। एक माह तक चलने वाली विभिन्न गतिविधियों में बच्चे, महिलाएं, युवा, किसान, हितग्राही और आम नागरिक सहभागी बनेंगे। इस तरह ‘सेवा संकल्प अभियान’ 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार से लेकर विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प तक की यात्रा को जनभागीदारी से सशक्त करने का व्यापक अभियान बनेगा।

विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएं: मंत्री परमार

भोपाल  उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को मंत्रालय में ई-ज्ञानसेतु यूट्यूब चैनल पर ई-कंटेंट वीडियो के अपलोड एवं प्रकाशन कार्य का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों की गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणिक एवं सत्यापित डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी। इस अवसर पर मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। ई-ज्ञानसेतु गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी सुविधा के अनुसार विश्वसनीय अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधुनिक तकनीक के साथ विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा और संस्कृति से जोड़ना भी आवश्यक है। इसी दृष्टि से ई-कंटेंट में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों को स्थान दिया जा रहा है। संस्कृत एवं मराठी सहित आंचलिक एवं क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कंटेंट तैयार किया जाना विद्यार्थियों के लिए अध्ययन को अधिक सहज और प्रभावी बनाएगा। मंत्री  परमार ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि मध्यप्रदेश का विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान और तकनीक से जुड़े, साथ ही अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जुड़ा रहे।” उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को आंचलिक एवं क्षेत्रीय भाषाओं में अधिकाधिक गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने के निर्देश दिए। डिजिटल शिक्षा से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि डिजिटल माध्यम शिक्षा की पहुंच को व्यापक बनाने का प्रभावी साधन है। e-GyanSetu के माध्यम से विद्यार्थी कहीं भी, कभी भी और अपनी सुविधा एवं अपनी गति के अनुसार पाठ्यक्रम से संबंधित अध्ययन सामग्री देख सकेंगे। विशेष रूप से दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल उपयोगी होगी।  राजन ने कहा कि डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य केवल सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणिक सामग्री पहुंचाना है, इसलिए ई-कंटेंट की गुणवत्ता एवं प्रामाणिकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने डिजिटल स्टूडियो का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करने और सत्यापन प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए। आयुक्त उच्च शिक्षा ने ई-ज्ञानसेतु की अवधारणा पर विस्तृत प्रकाश डाला और कार्यक्रम का संचालन प्रो. स्नेहा खरे ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की वर्चुअल सहभागिता रही। 10 डिजिटल स्टूडियो में तैयार हो रहे वीडियो व्याख्यान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में 10 डिजिटल स्टूडियो स्थापित किए गए हैं। इनमें शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि विद्वान एवं जनभागीदारी शिक्षक विषय विशेषज्ञ के रूप में वीडियो व्याख्यान तैयार कर रहे हैं। अब तक 2 हजार से अधिक वीडियो रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए विषय विशेषज्ञों से गठित वैलिडेशन बोर्ड द्वारा इनका परीक्षण किया जा रहा है। सत्यापन के उपरांत वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध कराया जाएगा। ई-कंटेंट कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, गृह विज्ञान, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के लिए तैयार किया जा रहा है। विद्यार्थियों को अवधारणाएं सरलता से समझाने के लिए आवश्यकतानुसार ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का भी उपयोग किया जा रहा है।  

योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में विभिन्न वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़कर स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षकों से लेकर पीआरडी जवानों, रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं तक के लिए परिवार सहित इलाज की सुविधा का विस्तार किया गया है। इन फैसलों से गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता कम होने के साथ जरूरतमंद परिवारों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।  शिक्षकों और परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य कवर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से जोड़ा गया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती, उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का खर्च योजना के तहत वहन किया जाएगा। योजना में 1900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार भी शामिल है।   पीआरडी जवानों और परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी ने हाल में प्रांतीय रक्षक दल के 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को भी प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। सरकारी और सरकार से सूचीबद्ध अस्पतालों में इस सुविधा का लाभ मिलेगा। औसत परिवार के हिसाब से 1.55 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित होंगे।  रसोइया बहनों को भी परिवार सहित कैशलेस इलाज परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की बढ़ोतरी के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए कर्ज लेने की चिंता कम होगी। विभिन्न जिलों की रसोइयों ने इसे परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ी राहत बताया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी बड़ा स्वास्थ्य कवच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये करने की घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का एलान किया। कार्यकर्ताओं ने इसे उनके श्रम और जिम्मेदारियों के सम्मान के साथ परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।

विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

लखनऊ योगी सरकार विशेष शिक्षकों समेत कार्यरत शिक्षकों के लिए निर्धारित अध्यापक पात्रता संबंधी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए उन्हें पात्रता पूरी करने का अवसर उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा स्पेशल टीईटी का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया गया है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू हो चुकी है।  प्राथमिक स्तर पर शिक्षक पात्र  पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्राथमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालय, स्थानीय निकाय तथा राज्य सरकार/बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता या सम्बद्धता प्राप्त विद्यालय, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालय और विशेष एजुकेटर्स प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के शिक्षक पात्र होंगे।  उच्च प्राथमिक में भी अवसर उच्च प्राथमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों, स्थानीय निकाय एवं मान्यता/सम्बद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा विशेष एजुकेटर्स उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के शिक्षक स्पेशल टीईटी में शामिल हो सकेंगे।  4 अक्टूबर तक शुल्क, 8 अक्टूबर तक संशोधन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार स्पेशल टीईटी के विज्ञापन प्रकाशन की तिथि 3 सितंबर 2026 है। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन 5 सितंबर से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 4 अक्टूबर 2026 तथा आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी। टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों को राहत पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी दोबारा उत्तीर्ण करना आवश्यक/अनिवार्य नहीं है। वहीं, जिन अध्यापकों ने पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें निर्धारित विज्ञापन के अंतर्गत पंजीकरण कर आवेदन करने और परीक्षा में भाग लेने की जानकारी देने के निर्देश हैं।  पात्र शिक्षकों तक सूचना पहुंचाने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित अध्यापकों को परीक्षा की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र शिक्षक निर्धारित समयसीमा में पंजीकरण एवं आवेदन पूरा कर सकें। इस व्यवस्था से विशेष शिक्षकों और अन्य पात्र कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट हुई है।

पढ़ाई से पेंशन तक एआई का सहारा, योगी सरकार ने समाज कल्याण को दिया स्मार्ट टच

लखनऊ योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सुशासन को नई गति दे रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अग्रणी विभागों में शामिल हो रहा है। विभाग ने शिक्षा क्षेत्र से इसकी शुरुआत की है और अब पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में भी एआई के उपयोग की तैयारी की जा रही है। उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए योजनाओं की निगरानी और लाभार्थियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनें। सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा समाज कल्याण विभाग ने एआई आधारित तकनीकों की शुरुआत जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों से की है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल सामग्री, 3डी वीडियो और एआई आधारित लैंग्वेज लर्निंग लैब के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। एडोब एजुकेशन इंडिया पहल के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को एडोब डिजिटल अकादमी के माध्यम से डिजिटल क्रिएटिविटी और एआई कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थी डिजिटल स्टोरीटेलिंग, रचनात्मक समस्या-समाधान और एआई-सहायित कंटेंट निर्माण जैसे भविष्य के उपयोगी कौशल सीख रहे हैं। पेंशन में एआई से प्रमाण पत्र सत्यापन वृद्धावस्था पेंशन और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में एआई आधारित प्रमाण पत्र सत्यापन के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इससे प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में मदद मिलेगी। तकनीक आधारित सत्यापन से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। छात्रवृत्ति की निगरानी होगी और मजबूत छात्रवृत्ति योजना में आवेदन और लाभ वितरण से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के लिए भी एआई के इस्तेमाल की तैयारी है। डेटा विश्लेषण के जरिए योजना की मॉनिटरिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे योजना के क्रियान्वयन की स्थिति का बेहतर आकलन और आवश्यक सुधार संभव होगा। छात्रावासों में भी एआई प्रशिक्षण की तैयारी समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजकीय छात्रावासों में विद्यार्थियों को एआई और पाठ्यक्रम आधारित प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज राज्य के सभी नगर निगमों तथा जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शहरों के विकास, स्वच्छता, राजस्व वसूली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही जवाबदेही से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजनाएं बनाने, जनसुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नागरिकों की कल्याणकारी संस्था है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा और संचालक  नीलेशकुमार क्षीरसागर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में कहा कि शहरों के विकास के काम तथा राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए अधिकारी सक्रियता से काम करें। प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाएं। उन्होंने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने और संपत्ति कर जमा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा निकायों में आनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि वे निर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा निर्माणाधीन कार्यों की कड़ाई से निरीक्षण करें। उन्होंने सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए कार्य-पद्धति विकसित करने के निर्देश दिए।  उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमणों का पता चलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं का अतिरिक्त भार निकाय पर पड़ता है। उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर साफ-सफाई की व्यवस्था और निर्माण कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। इससे कार्यों की मैदानी हकीकत पता चलने के साथ ही शहर की समस्याओं और लोगों के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।   साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना बनाने पर जोर देते हुए शहरों के सभी घरों में पेयजल आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा। भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निकायों के अधिकारी ही शहर की छवि और विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करें। शहरों की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी का अहसास हो :  सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व केवल निर्माण कार्यो और योजनाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का निर्बाध और सुचारू संचालन भी है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। उन्हें विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाना चाहिए।  प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि नगरीय निकायों का काम संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसका कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक है। नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शहरों में आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। निगम आयुक्त और सीएमओ शहरी विकास और कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों का चिन्हांकन कर वहां सघन वृक्षारोपण कराने और 'अर्बन फारेस्ट' विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का गंभीरता और सक्रियता से पालन करने को कहा। उन्होंने सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें भी समयबद्ध तरीके से नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन सभी नालंदा परिसरों को शीघ्र शुरू करने की दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने फर्नीचर, आइटी सुविधाओं, किताबों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। सूडा के सीईओ  सुमित अग्रवाल, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता  रमेश शर्मा सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों के सीएमओ, राजस्व अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता और संभागीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। इन कार्यों की हुई समीक्षा उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं की अद्यतन स्थिति, अधोसंरचना कार्यों, नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न राज्य प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स एवं गोधाम योजना, निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।

समान नागरिक संहिता (UCC) पर राजनांदगांव में बैठक सम्पन्न

रायपुर  छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के जिला पंचायत सभाकक्ष में बैठक में यूसीसी समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार एवं सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह के समक्ष विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे विषयों पर खुलकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।  बैठक की मुख्य बातें पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। UCC के पक्ष और विपक्ष दोनों में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।  बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सर्व आदिवासी समाज, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, ईसाई, साहू, कलार, लोधी, यादव, क्रिश्चयन समाज, पटेल, गड़रिया समाज और सेन समाज, अध्यक्ष गोड़ समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, उराव समाज, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने सुझाव समिति के समक्ष रखे। विभिन्न सामाजिक संगठनों दिए गए सुझाव में समान नागरिक संहिता  (Uniform Civil Code – UCC) के तहत सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसा कानून होना चाहिए। ड्राफ्ट निर्माण की प्रक्रिया समिति के सदस्यों ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों के आधार पर ही अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि आम जनता से ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। विधिक सलाहकार द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से UCC की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही आम नागरिक समिति की आधिकारिक वेबसाईट https://ucc.cgstate.gov.in/:  एवं ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in  के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। बैठक के दौरान संभागायुक्त  सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर  जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ  दुर्गा प्रसाद अधिकारी तथा अपर कलेक्टर  सी.एल. मारकंडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

वाराणसी  मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई। पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े स्टॉल भी शामिल रहे। अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई, सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की। एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों को जानने का अवसर मिजोरम से आए जोयला  ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार किए जाने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं। वहीं, उनके स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने भी मिजोरम के पोषण संबंधी प्रयोगों और व्यंजनों के बारे में जानकारी ली। राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संचालित पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं काफी जागरूक हैं और पोषण आहार प्लांट का संचालन भी कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ के साथ साझेदारी तक उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। सभी राज्यों के अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के बेहतर प्रयोगों को जाना और उन्हें अपने क्षेत्रों में अपनाने के लिए जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग काफी अच्छा लगा। वहीं, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के साथ मिलकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए किस तरह संपर्क और सहयोग किया जा सकता है।नीतू पुलारा ने बताया कि उत्तराखंड से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कई नई बातें सीखीं। इस आयोजन को लेकर उनमें काफी उत्साह देखने को मिला। मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार   वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया। गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से उन्हें कई नई जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन जानकारियों को वे अपने कार्यक्षेत्र में अमल करने का प्रयास करेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई नई बातें जानने को मिलीं। उन्होंने कहा कि अब इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा,तमिलनाडु,गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका से संवाद किया।  तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने ‘वणक्कम’ से शुरू किया संवाद, जुड़वां बच्चों की देखभाल की सुनाई कहानी कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर.रंजनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद शुरू किया। उन्होंने अपने कार्य का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उन्होंने परिवार के लोगों को समझाया और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से संभालने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी उनकी मदद की।  आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे अब दो साल से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और सामान्य रूप से बढ़ते हुए देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका केवल पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे बच्चों और परिवारों को भावनात्मक एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देती हैं।  मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आईं सहायिका से कुपोषित बच्चों के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी ली। गोरखपुर के बसियापुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। इस पर कार्यकर्ता ने सहज अंदाज में मुख्यमंत्री से कहा कि आप मेरे घर भी आए हैं।