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रायगढ़ में 50 लाख के सामुदायिक भवन का लोकार्पण, नई सुविधा से क्षेत्रवासियों को मिलेगा लाभ

रायपुर : 50 लाख की लागत से बने सामुदायिक भवन का लोकार्पण, रायगढ़ को मिली नई सौगात सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा भवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी नालंदा परिसर और नव गुरुकुल जैसी योजनाओं से शिक्षा व युवा सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा रायपुर वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने  रायगढ़ नगर निगम के वार्ड क्रमांक 6 में 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित आधुनिक सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह भवन सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनकर स्थानीय समुदाय को नई पहचान देगा। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा दिए गए विश्वास और समर्थन को विकास कार्यों के माध्यम से लौटाना उनका दायित्व है। शहर में अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि रायगढ़ में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। कला महाविद्यालय, उद्यानिकी महाविद्यालय, फिजियोथेरेपी कॉलेज, प्रयास विद्यालय, स्विमिंग पूल, विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजोन, सड़कों एवं पुल-पुलियों का निर्माण तथा गजमार पहाड़ी और बाल समुंद तालाब का सौंदर्यीकरण जैसे कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही विभिन्न वार्डों में सीसी रोड, आरसीसी नाली और बीटी सड़कों का निर्माण भी जारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए 22 स्थानों पर नालंदा परिसर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें रायगढ़ का नालंदा परिसर लगभग 40 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन है। इसके अलावा बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘नव गुरुकुल’ पहल के माध्यम से उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के समग्र विकास के लिए शासन, प्रशासन और नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इस अवसर पर नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।

अरुण साव का बड़ा कदम: रायपुर में नालंदा परिसर और 8 करोड़ के अन्य कार्यों का भूमिपूजन

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नालंदा परिसर सहित 8 करोड़ से अधिक के कार्यों का किया भूमिपूजन शहर को बनाएं स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण – अरुण साव रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने  गरियाबंद नगर पालिका में 44 विकास कार्यों का भूमिपूजन कर नगरवासियों को 8 करोड़ 15 लाख 98 हजार रुपए की सौगात दी। इनमें चार करोड़ 41 लाख रुपए की लागत का नालंदा परिसर, 2 करोड़ 91 लाख रुपए लागत के सीसी सड़कों, नालियों एवं शेड निर्माण के 30 कार्य, 83 लाख रुपए की लागत के 13 सड़कों एवं नाली निर्माण के कार्य शामिल हैं। इन निर्माण कार्यों से नगर की बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी और नागरिकों को बेहतर सड़क व जल निकासी व्यवस्था का लाभ मिलेगा। विधायक रोहित साहू और राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू भी भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस दौरान विभिन्न सामाजिक एवं सार्वजनिक संस्थाओं के लिए करीब 2 करोड़ रुपए की अतिरिक्त स्वीकृति भी दी। उन्होंने दो अलग-अलग पत्रकार भवनों के लिए 5-5 लाख रुपए, प्रजापति ब्रह्मकुमारी आश्रम भवन निर्माण के लिए 15 लाख रुपए, साहू समाज के लिए 25 लाख रुपए तथा नगर पालिका के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की स्वीकृति की घोषणा की। उन्होंने प्रस्ताव लेकर आने पर तुरंत स्वीकृति की भी बात कही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि गरियाबंद में 4 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाला नालंदा परिसर और कुल 8 करोड़ 15 लाख रुपए के विकास कार्य नगर के विकास की दिशा तय करेंगे। गरियाबंद के बच्चों को आधुनिक पढ़ाई के लिए सेंट्रल लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। वहीं सीसी सड़कों, नालियों और अन्य अधोसंरचना कार्यों से शहर को नई पहचान मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में गरियाबंद नगर के लिए 22 करोड़ 79 लाख रुपए के विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह स्वीकृतियां बताती हैं कि सरकार शहर को किस तरह विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है। कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है, ताकि शहर स्वच्छ, व्यवस्थित और सुविधाजनक बन सके। उन्होंने नागरिकों से शहर को स्वच्छ रखने की अपील करते हुए कहा कि नाली और सड़कों में कचरा नहीं फेंकें। बाहर से आने वाले लोग सबसे पहले शहर की व्यवस्था और स्वच्छता देखते हैं, इसलिए गरियाबंद को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। शहर में बुजुर्गों के लिए गार्डन, बच्चों के लिए खेल मैदान और नागरिकों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। विधायक रोहित साहू ने कार्यक्रम में कहा कि हमारी सरकार ने गरियाबंद को ग्राम पंचायत से नगर पालिका और फिर जिला बनने तक विकास की नई पहचान दी है। प्रदेश में हमारी सरकार बनने पर चहुंमुखी विकास होता है और आज 8 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन इसका प्रमाण है। उन्होंने नालंदा परिसर की तर्ज पर बनने वाली सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए उप मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।  राजिम नगर पालिका के अध्यक्ष रिखीराम यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, जिला पंचायत के उपाध्यक्ष लालिमा ठाकुर, नगर पालिका के उपाध्यक्ष आसिफ मेमन और अनिल चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे।

ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: इंदौर में 9-13 जून तक आयोजन

इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होगा ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल दो चरणों में होगा सम्मेलन, कृषि नवाचारों पर होगी वैश्विक चर्चा इंदौर केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक इंदौर के ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। समीक्षा बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़, श्रीमती उषा ठाकुर, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।  

6 साल बाद सक्रिय हुआ महिला आयोग: रेखा यादव को मिली कमान, शिकायतों के निपटारे में तेजी की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से खाली चल रहे राज्य महिला आयोग को आखिरकार नया नेतृत्व मिल गया है। सरकार ने रेखा यादव को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही साधना स्थापक को आयोग का सदस्य बनाया गया है। दोनों की नियुक्ति 3 साल की अवधि के लिए की गई है। बताया जा रहा है कि नियुक्तियों के बाद जल्द ही आयोग का कामकाज पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। दरअसल, राज्य महिला आयोग में पिछले करीब 6 साल से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े थे। इस वजह से महिलाओं से जुड़े कई मामलों में सुनवाई और कार्रवाई प्रभावित हो रही थी। कई शिकायतें लंबित थीं, जिनके निराकरण में देरी हो रही थी। प्रदेश में इन दिनों निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं। अब तक करीब कई पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और बाकी संस्थाओं में भी प्रक्रिया जारी है। सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तेजी से ये फैसले ले रही है महिला आयोग में नई नियुक्तियों को इसी कड़ी में अहम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि अब महिलाओं से जुड़े मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी और लंबित शिकायतों का जल्द निराकरण किया जा सकेगा।

27,746 करोड़ के पैकेज से आय बढ़ेगी और घटेगी लागत

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मिशन मोड में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस पूरे वर्ष किसानों को उनका वैभव लौटाने का संकल्प लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, कृषि लागत को कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके लिए 16 विभाग एक साथ समन्वय से काम कर रहे हैं। विगत दिनों बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट में 27,746 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी गई है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के 4 बड़े लक्ष्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। आय में वृद्धि के लिए दूध, फल, सब्जी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अन्य स्रोतों से भी कमाई के अवसर मिलेंगे। लागत में कमी लाने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया जाएगा और मिट्टी परीक्षण के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर अनावश्यक खर्च घटाया जाएगा। तकनीक और विपणन के क्षेत्र में किसानों को अंकीय सेवा, कृषि प्रसंस्करण, कृषि-तकनीक, ड्रोन सेवा और किसान उत्पादक संगठन प्रबंधन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए जल-कृषि जैसे आधुनिक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। सिंचाई क्षमता को विस्तार देने के लिए वर्तमान में 65 लाख हेक्टेयर के सिंचित क्षेत्र को वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। 16 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषि विभाग 3,502.48 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाओं को 31 मार्च 2031 तक चलाएगा। इसके तहत उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और फसल प्रदर्शन योजनाएं संचालित होंगी। मूंग की जगह उड़द उत्पादन पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा और सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाएगा। रोटावेटर आधी कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग 9,508 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से दूध संकलन 25 प्रतिशत तक बढ़ाएगा। पशुपालकों को मोबाइल ऐप से सेवाएं मिलेंगी और पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग 4,263.94 करोड़ रुपये की 3 योजनाओं पर काम करेगा। राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन के लिए 1150 करोड़ रुपये और पौधशाला उ‌द्यान के लिए 1,739 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता की पौध और बीज रियायती दरों पर मिलेंगे। सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रुपये से नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाई जाएंगी। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग 218.50 करोड़ रुपये की 2 योजनाएं चलाएगा। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से 3 वर्षों में 3 हजार करोड़ का निवेश और 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। एक लाख पिंजरे स्थापित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सहकारिता विभाग 8,186 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से किसानों को मजबूती देगा। सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता योजना के लिए 1,975 करोड़ रुपये और अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3,909 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे 3 लाख तक शून्य प्रतिशत दर पर फसल ऋण मिलेगा। नर्मदा घाटी विकास विभाग 2,067.97 करोड़ रुपये के 2 प्रस्तावों पर काम करेगा। बरला उद्वहन सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से 33 गांव के 15,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। जल संसाधन विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल में 2400 करोड़ रुपये से ड्रिप और फव्वारा सिंचाई पर अनुदान देगा। नई सिंचाई परियोजनाओं से खेती का रकबा बढ़ेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी सुनिश्चित करेगा। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। किसानों को खाद की घर पहुंच सेवा दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2010 करोड़ रुपये से ग्रामीण स्तर पर समूह आधारित विकास को बढ़ावा देगा, जिससे खेती के साथ जुड़े अन्य संसाधनों से भी आय के अवसर मिलेंगे। वन विभाग कृषि वानिकी पर उप-मिशन चलाएगा। “हर मेढ़ पर पेड़” के तहत फसलों के साथ वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। ऊर्जा विभाग अगले तीन साल में 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा पम्प देगा। हर साल 10 लाख किसानों को सौर पम्प देकर अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाया जाएगा। उद्योग विभाग कृषि आधारित उद्योगों में किसानों की भागीदारी बढ़ाएगा। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार अनुदान देगी और आलू, टमाटर जैसी फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की जाएंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंकीय कृषि मिशन लागू करेगा। कृषि ढांचा पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पैकेज को एकीकृत किया जाएगा और कृषि पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ेगा। बीज की गुणवत्ता के लिए नई प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी। ग्रामीण आजीविका मिशन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 1010 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह 15,000 ग्राम पंचायत समूहों में लागू होगा और 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगा। 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र स्थापित होंगे। बीज प्रमाणीकरण विभाग प्रमाणित बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। कोदो-कुटकी और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस और प्रोत्साहन दिया जाएगा। राजस्व विभाग जिला स्तर पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी को मजबूत करेगा। फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिससे पानी की अधिक खपत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आता है। किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करेंगे। इसके लिए प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। सरकार का संकल्प है कि ‘समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047’ के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।  

रेखा सरकार की योजना फेल? ‘पिंक सहेली कार्ड’ से महिलाओं ने बनाई दूरी

नई दिल्ली दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ योजना फिलहाल उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 5.56 लाख कार्ड जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 से 6 प्रतिशत यानी करीब 6,000 से 8,000 महिलाएं ही इनका इस्तेमाल कर रही हैं। पुरानी व्यवस्था से नए सिस्टम में बदलाव बना चुनौती इस योजना की शुरुआत 2 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की थी। इसका उद्देश्य पिछली आप सरकार द्वारा 2019 में शुरू किए गए पिंक टिकट सिस्टम को खत्म कर केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ (NCMC) प्रणाली लागू करना था। इसके जरिए यह सुनिश्चित करना भी मकसद था कि केवल दिल्ली में रहने वाली 12 साल से ऊपर की महिलाएं ही मुफ्त यात्रा का लाभ ले सकें। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं पुराने पिंक टिकट का ही इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित रह गया है। रोजाना 6-7 लाख महिला यात्री, फिर भी कार्ड का कम उपयोग दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के अनुसार, राजधानी में रोजाना करीब 23 लाख लोग बसों में सफर करते हैं, जिनमें 6 से 7 लाख महिलाएं शामिल होती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से आधी से भी कम महिलाएं पिंक स्मार्ट कार्ड का उपयोग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी टिकट सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा। अब होगा सर्वे और फिर सख्ती DTC अब इस कम उपयोग के पीछे के कारणों को समझने के लिए सर्वे कराने की तैयारी में है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या महिलाओं के पास कार्ड नहीं है, क्या वे अन्य राज्यों से हैं या फिर बस कंडक्टर कार्ड इस्तेमाल के लिए प्रेरित नहीं कर रहे है। इसके अलावा, बसों में औचक निरीक्षण भी की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि कार्ड का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा। जुलाई से अनिवार्य हो सकता है कार्ड अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई से पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य किया जा सकता है, और धीरे-धीरे पिंक टिकट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले मई-जून में बसों के अंदर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। 450 करोड़ का है बजट महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना पहली बार 2019 में लागू की गई थी, जिसके तहत अब तक 150 करोड़ से ज्यादा पिंक टिकट जारी किए जा चुके हैं। वहीं, मौजूदा सरकार ने इस योजना को जारी रखते हुए 2026-27 बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे यह साफ है कि सरकार इस सुविधा को और मजबूत करना चाहती है। कैसे बनता है पिंक सहेली कार्ड? फिलहाल यह कार्ड दिल्ली के 58 केंद्रों पर जारी किया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली का आधार कार्ड जरूरी है, आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए, 12 साल या उससे अधिक उम्र की कोई भी महिला आवेदन कर सकती है।

नई जल नीति से गांवों को ताकत, पंचायतें संभालेंगी पानी सप्लाई और बिलिंग

फतेहाबाद  ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिले की 233 ग्राम पंचायतों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई आपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के तहत अब पंचायतें खुद पानी के बिल की वसूली, जल आपूर्ति प्रबंधन और रख-रखाव का काम संभालेंगी। खास बात यह है कि पंचायत जितना राजस्व बिल के रूप में एकत्रित करेगी, सरकार भी उतनी ही अतिरिक्त राशि पंचायत के खाते में देगी। इससे पंचायतों को जल सुविधाओं के सुधार और विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे। जिले में 258 पंचायतें है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा। इस योजना के तहत चयनित पंचायतों के बैंक खाते खोले जा रहे हैं, जिन्हें मुख्यालय स्तर के सिंगल खाते से जोड़ा जाएगा। पंचायतों द्वारा एकत्रित राजस्व पहले मुख्य खाते में जमा होगा, जिसके बाद सरकार उसी राशि को जोड़कर दोगुनी रकम पंचायत को वापस देगी। इस राशि का उपयोग जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें पंचायतों को मिली व्यापक जिम्मेदारी नई नीति के तहत पंचायतें अब पानी के कनेक्शन जारी करने, बिल वसूली, शिकायत निवारण, मीटरिंग और जल गुणवत्ता की निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके अलावा पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, पंप और अन्य संसाधनों की मरम्मत व रख-रखाव भी पंचायतों के जिम्मे होगा। अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जल हानि को कम करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। पानी के बिलों की वसूली में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को जोड़ा गया है। उपभोक्ताओं से प्राप्त जल शुल्क का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में इन समूहों को दिया जाएगा। इससे न केवल वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी। पंचायतें बिस्वास पोर्टल के माध्यम से नए कनेक्शन जारी करने, कनेक्शन काटने, मीटर लगाने और शिकायतों का आनलाइन समाधान कर सकेंगी। इसके साथ ही बिल वितरण, भुगतान की निगरानी और उपभोक्ताओं को एसएमएस के जरिए सूचना देने की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी गई है। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी। योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल गुणवत्ता की नियमित जांच फील्ड टेस्ट किट से की जाएगी और वितरण के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करेगा। विभाग द्वारा जल आपूर्ति योजनाओं को अपग्रेड कर 24 घंटे जल उपलब्धता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण जल आपूर्ति अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। साथ ही पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में जिले की सभी पंचायतों को इस योजना के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है।

मुरैना में भय का माहौल: वन आरक्षक की हत्या और पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

मुरैना  मुरैना की जनता लंबे समय से कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित थी। बढ़ते अपराध और वन आरक्षक की हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल बना दिया था।इस समस्या का बड़ा कारण पुलिस अधीक्षक की अनदेखी अनसुनी सुस्त कार्य प्रणाली रही है।  पुलिस अधीक्षक की लापरवाह कार्य प्रणाली के बारे मे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र तिवारी ने निरन्तर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के सामने प्रमुखता से रखा था,आवश्यक होने पर आंदोलन की बात भी कही। माननीय मुख्य मंत्री महोदय अंतत श्री तिवारी की बात को गंभीरता से लिया और आज एसपी का परिवर्तन कर नए एसपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह  मुरैना जिले के हर कार्यकर्ता और आमजन की जीत है। इसके लिए श्री ……………ने श्री नागेंद्र तिवारी को बधाई धन्यवाद देते हुए माननीय मुख्य मंत्री महोदय सरकार और संगठन का हृदय से आभार व्यक्त किया है, व आशा व्यक्त की है कि नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक श्री मीणा जी के निर्देश मे  जिले मे अपराधो पर नियंत्रण होकर शान्ति सुरक्षा कायम होगी।

एम्स का कमाल: 7 माह से पैरालिसिस झेल रही महिला फिर हुई सक्रिय, स्पाइनल ट्रीटमेंट से मिला राहत

भोपाल भोपाल एम्स में एक महिला को मानो नया जीवन दिया गया है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय यह महिला पिछले सात महीनों से न चैन से बैठ पा रही थी और न ही सो पा रही थी। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' जैसी गंभीर स्थिति का शिकार थीं, जिसमें मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं। वह लकवे जैसी लाचारी और असहनीय पीड़ा जूझ रही थी। ल्बे समय से चल रहे उपचार व दवाओं के हैवी डोज के बावजूद कोई राहत नहीं मिल रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था। ऐसे में एम्स भोपाल दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीमें आगे आईं। डॉक्टर्स ने आइटीबी तकनीक अपनाकर महिला की दिक्कत दूर कर दी। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में लगनेवाला लाखों का खर्च भी बचा दिया। वरदान बनी आइटीबी तकनीक महिला कई माह से परेशान थीं। आखिरकार एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने इस जटिल चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. अनुज जैन और डॉ. सुमित राज के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी' (आइटीबी) अपनाने का निर्णय लिया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन पर सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसमें दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल क्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम खुराक में ही अधिकतम लाभ मिलता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं। उपचार की प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलते ही डॉक्टरों ने त्वचा के नीचे एक छोटा 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्रत्यारोपित कर दिया। यह डिवाइस निरंतर दवा की नियंत्रित मात्रा शरीर को पहुंचाता रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्दमुक्त है और सामान्य नींद ले पा रही है। एम्स में महज 7 लाख रुपए में उपचार: कम से कम 3 लाख रुपए बचाए निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपए से अधिक में होने वाला यह उपचार एम्स में मात्र 7 लाख रुपए में संभव हुआ। डॉ. जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं है। डॉ. सुमित राज ने इसे टीम वर्क की जीत बताया।

बड़ी राहत का ऐलान: आउटसोर्स कर्मचारियों को ₹26 हजार वेतन और स्थायी नौकरी का वादा, तारीख पर सस्पेंस

भोपाल बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।