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पानी की जिम्मेदारी अब पंचायतों के हाथ: फतेहाबाद में 233 गांवों में लागू होगा नया मॉडल

फतेहाबाद. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिले की 233 ग्राम पंचायतों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई आपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के तहत अब पंचायतें खुद पानी के बिल की वसूली, जल आपूर्ति प्रबंधन और रख-रखाव का काम संभालेंगी। खास बात यह है कि पंचायत जितना राजस्व बिल के रूप में एकत्रित करेगी, सरकार भी उतनी ही अतिरिक्त राशि पंचायत के खाते में देगी। इससे पंचायतों को जल सुविधाओं के सुधार और विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे। जिले में 258 पंचायतें है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा। इस योजना के तहत चयनित पंचायतों के बैंक खाते खोले जा रहे हैं, जिन्हें मुख्यालय स्तर के सिंगल खाते से जोड़ा जाएगा। पंचायतों द्वारा एकत्रित राजस्व पहले मुख्य खाते में जमा होगा, जिसके बाद सरकार उसी राशि को जोड़कर दोगुनी रकम पंचायत को वापस देगी। इस राशि का उपयोग जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। पंचायतों को मिली व्यापक जिम्मेदारी नई नीति के तहत पंचायतें अब पानी के कनेक्शन जारी करने, बिल वसूली, शिकायत निवारण, मीटरिंग और जल गुणवत्ता की निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके अलावा पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, पंप और अन्य संसाधनों की मरम्मत व रख-रखाव भी पंचायतों के जिम्मे होगा। अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जल हानि को कम करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। पानी के बिलों की वसूली में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को जोड़ा गया है। उपभोक्ताओं से प्राप्त जल शुल्क का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में इन समूहों को दिया जाएगा। इससे न केवल वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी। पंचायतें बिस्वास पोर्टल के माध्यम से नए कनेक्शन जारी करने, कनेक्शन काटने, मीटर लगाने और शिकायतों का आनलाइन समाधान कर सकेंगी। इसके साथ ही बिल वितरण, भुगतान की निगरानी और उपभोक्ताओं को एसएमएस के जरिए सूचना देने की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी गई है। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी। योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल गुणवत्ता की नियमित जांच फील्ड टेस्ट किट से की जाएगी और वितरण के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करेगा। विभाग द्वारा जल आपूर्ति योजनाओं को अपग्रेड कर 24 घंटे जल उपलब्धता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण जल आपूर्ति अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। साथ ही पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में जिले की सभी पंचायतों को इसके दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है।

महंगाई का नया झटका: कमर्शियल LPG के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ेगा असर

अमृतसर. कमर्शियल एल.पी.जी. गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को एक बार फिर बड़े संकट में डाल दिया है। पहले ही गैस सिलेंडरों की कमी के कारण ब्लैक में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर कारोबारियों को अब सरकारी रेट में हुए इजाफे ने दोहरा झटका दिया है। इस समय एल.पी.जी. गैस सिलेंडर कमर्शियल की कीमत 3178 रुपए हो गया है, एकदम से 993 रुपए बढ़ने से इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। बढ़ती लागत के चलते होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को रोजगार का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। लेकिन गैस सिलेंडरों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ौतरी ने इस उद्योग पर भारी दबाव बना दिया है। कारोबारियों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की लागत कई गुना बढ़ गई है, जबकि ग्राहकों की संख्या और आमदनी में उस हिसाब से बढौतरी नहीं हो रही। ऐसे में मुनाफा लगातार घटता जा रहा है और कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। पिछले कुछ समय से कई इलाकों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की शॉर्टेज भी देखने को मिली थी। इस कमी के चलते कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को अपना काम जारी रखने के लिए ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़े। कई बार तो सरकारी रेट से सैंकड़ों रुपए ज्यादा देकर सिलेंडर लेने पड़े ताकि कारोबार बंद न हो। अब जब सरकारी स्तर पर ही कीमतों में बढ़ौतरी कर दी गई है, तो ब्लैक में सिलेंडर खरीदने वालों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं। होटल कारोबारी अनिल सूरी का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो छोटे और मध्यम स्तर के होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। कई छोटे कारोबारी पहले से ही बढ़ते बिजली बिल, कर्मचारियों के खर्च और अन्य महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

CM साय का जमीनी जुड़ाव: चंदागढ़ में निर्माणाधीन घर में ईंट जोड़कर दिया प्रेरणा संदेश

रायपुर. सुशासन तिहार 2026 के तहत सीएम विष्णुदेव साय के प्रदेशव्यापी दौरे की शुरुआत हो चुकी है. अभियान के पहले दिन सीएम साय का हेलीकॉप्टर जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में उतरा. प्रदेश के मुखिया के आगमन पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल बन गया. उन्होंने गमछा पहनाकर स्वागत किया. इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल उपस्थित रहे.  जनसेवा का संदेश, श्रमदान का उदाहरण  चंदागढ़ में उस वक्त मुख्यमंत्री साय की सामने आई जब, उन्होंने पीएम आवास योजना के हितग्राही के निर्माणाधीन घर में स्वंय सिमेंट लगाकर ईंट जोड़ी और हौसला बढ़ाया. वहीं उन्होंने जनता के साथ फोटो भी खिंचवाई. सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं : सीएम साय सीएम साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि हर नागरिक तक समयबद्ध समाधान पहुंचाना है. त्वरित कार्रवाई और त्वरित निदान के संकल्प के साथ सरकार जनविश्वास को और मजबूत कर रही है. पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रदेश सरकार निरंतर ऐसे निर्णय और प्रयास कर रही है, जो सीधे नागरिकों के जीवन को सरल, सुगम और सशक्त बनाते हैं. ‘सुशासन तिहार’ इसी सोच का सशक्त प्रतिबिंब है. एक ऐसा जनआंदोलन, जो जनभागीदारी को बढ़ाते हुए विकास को नई गति और दिशा दे रहा है, तथा शासन और जनता के बीच विश्वास को और प्रगाढ़ बना रहा है. 1 मई से 10 जून तक सुशासन तिहार सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी. पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं.

औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं ग्रामीण महिलाएं

छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं ग्रामीण महिलाएं  रायपुर छत्तीसगढ़ के वनांचल की गोद में छिपी अमूल्य औषधि संपदा अब केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि प्रदेश की नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन की जिस परिकल्पना को साकार कर रही है, उसे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप और  छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में धरातल पर उतार रहा है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पहचान          वनांचल में बिखरे पारंपरिक ज्ञान को महज एक स्मृति न रहने देने के संकल्प के साथ बोर्ड ने इसे वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन स्थानीय वैद्यों और जानकारों का चिन्हांकन शुरू किया गया है, जिनके पास असाध्य रोगों के उपचार का अद्भुत ज्ञान है। बोर्ड का प्रयास इन महिलाओं को एक उचित मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिले और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है जिसे ग्रामीण महिलाओं ने सदियों से सहेजकर रखा है। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक जड़ी-बूटी और जनजातीय ज्ञान को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से नई पहचान मिल रही है। राज्य के वनों में छिपे औषधीय खजाने को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित कर, उसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। संग्रहण से प्रसंस्करण तक- उद्यमिता की नई उड़ान          आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब दिखाई दे रहा है, जब जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाली महिलाएं अब संग्राहक से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में नजर आ रही हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, महिला स्व-सहायता समूहों को औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के उन्नत गुर सिखाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल औषधीय पौधों का संरक्षण कर रही है, बल्कि वनवासियों और लघु वन उपज संग्राहकों की आय में वृद्धि करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। छत्तीसगढ़ में 1500 से अधिक सक्रिय वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और जड़ी-बूटियों के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह संस्था हर्बल उत्पादों की खेती, मूल्य संवर्धन, और मार्केटिंग में तकनीकी सहायता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है। मूल्य संवर्धन (वेल्यू एडिशन)         छत्तीसगढ़ में जड़ी-बूटी मूल्य संवर्धन एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से राज्य के समृद्ध वन संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित (प्रोसेस) करके उनके आर्थिक मूल्य को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार 'छत्तीसगढ़ हर्बल्स' ब्रांड के तहत इन उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। जब ये महिलाएं वनों से प्राप्त कच्ची सामग्री को साफ कर, सुखाकर उसे चूर्ण, अर्क या तेल के रूप में परिवर्तित करती हैं, तो उत्पाद की कीमत और गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इस मूल्य संवर्धन का सीधा आर्थिक लाभ उनके बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे बिचौलियों का वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। 65 से अधिक लघु वन उपज प्रजातियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी और उनका प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख हर्बल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स को वैश्विक पहचान                   छत्तीसगढ़, जिसे 'जड़ीबूटि गढ़' भी कहा जाता है, अपने घने जंगलों, विशेषकर बस्तर में 160 से अधिक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक खजाना है। यहाँ की मिट्टी में अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी और तिखुर जैसी औषधियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। बाजार की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए बोर्ड ने विपणन (मार्केटिंग) तंत्र को पारदर्शी बनाया है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को सशक्त करने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से इन उत्पादों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'व्होकल फार लोकल' और मुख्यमंत्री के 'लखपति दीदी' अभियान को सफल बनाने में यह रणनीति संजीवनी का कार्य कर रही है। नर्सरी प्रबंधन और स्थानीय रोजगार         जड़ी बूटियों को किचिन गार्डन, होम गार्डन में खिड़की, बालकनी, टेरिस पर गमलों, या अन्य कंटेनरों में कभी भी उगाया जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग में जड़ी-बूटियां उगाने का एक फायदा यह भी है कि जड़ी-बूटी को उसकी जरूरत के आधार पर मिट्टी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और नमी के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है तथा गमलों में उगाई गई प्रत्येक जड़ी-बूटी (हर्बल) को उसकी आदर्श स्थितियां दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों की 'मदर नर्सरी' विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपी जा रही है। इससे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए बारहमासी रोजगार के द्वार खुल गए हैं, जिससे वनांचल से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगा है। समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़        राज्य शासन का यह समेकित दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड केवल एक प्रशासक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। सामूहिक नेतृत्व और संस्थागत सुधारों पर जोर देने से आज छत्तीसगढ़ की बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वनांचल की महिलाओं के चेहरे पर उपजी मुस्कान एक समृद्ध और स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की सच्ची तस्वीर पेश कर रही है।       धनंजय राठौर        संयुक्त  संचालक        अशोक कुमार चंद्रवंशी सहायक जनसंपर्क अधिकारी

रांची में नई पहल: NEP 2020 के तहत झारखंड का इंटरनेशनल एजुकेशन हब बनाने की तैयारी

रांची  झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' (Office of International Affairs) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह कार्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के तहत कार्य करेगा। उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए एक 'सिंगल विंडो' सुविधा प्रदान करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों से जोड़ना और विदेशी संस्थानों तक उनकी पहुंच को सुलभ बनाना है। एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग यह कार्यालय प्रमुख रूप से एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेगा, जिससे झारखंड के विद्यार्थी विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा और शोध (Research) कर सकेंगे। इसके साथ ही, विदेशी छात्रों को भी झारखंड के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन और शोध के अवसर दिए जाएंगे। कार्यालय की मुख्य भूमिकाएं         नामांकन में सहायता: विदेशी विश्वविद्यालयों में चलने वाले कोर्सेज और उनकी जटिल नामांकन प्रक्रिया की जानकारी विद्यार्थियों को यहां उपलब्ध होगी।         कार्यशालाओं का आयोजन: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कार्यशालाएं होंगी, जहां विदेशी संस्थानों के प्रतिनिधि छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।         झारखंड की ब्रांडिंग: विदेशों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड के संस्थानों की शोध क्षमताओं और अवसरों से दुनिया को अवगत कराया जाएगा।         वित्तीय योजनाओं का संचालन: भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए स्वीकृत होने वाली आर्थिक सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन भी इसी कार्यालय के माध्यम से होगा।   मरांगगोके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना को मिलेगा बल झारखंड सरकार वर्तमान में 'मरांगगोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना' के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को विदेश भेज रही है। हाल ही में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है।   इस योजना के तहत एसटी, एससी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों को यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड के विश्वविद्यालयों में मास्टर और एमफिल करने के लिए 100% वित्तीय सहायता दी जाती है। 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' के गठन के बाद इस योजना का संचालन और भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होने की संभावना है।   राज्य सरकार के इस कदम से न केवल झारखंड के मेधावी छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि झारखंड भी उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।

राजस्थान साइबर पुलिस का एक्शन, 17 आरोपियों की गिरफ्तारी से अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश

जयपुर राजस्थान पुलिस की साइबर यूनिट ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने महज एक व्हाट्सएप मैसेज के जरिए एक कंपनी को 5 करोड़ 30 लाख रुपये की चपत लगा दी। पुलिस ने प्रदेश के पांच अलग-अलग जिलों में कार्रवाई करते हुए कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. DP लगाकर दिया झांसा, खातों में ट्रांसफर कराए करोड़ों पुलिस उपमहानिरीक्षक (साइबर अपराध) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि यह ठगी 24 अप्रैल 2026 को हुई थी. ठगों ने कंपनी के चेयरमैन की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया और अकाउंटेंट दीपेंद्र सिंह को संदेश भेजा. अकाउंटेंट को लगा कि निर्देश सीधे मालिक की ओर से आए हैं, जिसके बाद उसने बताए गए बैंक खातों में 5.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में हकीकत सामने आने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई. तकनीकी जांच और हवाला कनेक्शन पुलिस अधीक्षक (साइबर अपराध) सुमित मेहरडा की निगरानी में गठित विशेष टीमों ने जब ट्रांजेक्शन की जांच की, तो परतें खुलती चली गईं। ठगी की राशि को दर्जनों खातों में घुमाया गया और बाद में उसे 'यूएसडीटी' (USDT) और हवाला के जरिए ठिकाने लगाया गया. चाय की थड़ियों पर होती थी डील, वकालत का छात्र भी शामिल हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों में कानून (वकालत) का एक छात्र, सैलून कर्मी और स्पेयर पार्ट्स बेचने वाला दुकानदार भी शामिल है, ये लोग किसी को शक न हो, इसलिए कमीशन के बंटवारे और पासबुक-चेकबुक के लेन-देन के लिए चाय की थड़ियों पर मिलते थे, इन जिलों से हुई गिरफ्तारियां पुलिस ने कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर पुलिस के सहयोग से छापेमारी की. गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल खान, मोहम्मद राशिद, समीर, तोहिद, नवीन सिंह (कोटा), अविनाश जैन, प्रवीण, अमित, भव्य, मुकेश (बांसवाड़ा), घनश्याम, राहुल, कमलेश (जोधपुर), दीपेंद्र, वीरेंद्र, हरीश (पाली) और सदराम (बाड़मेर) शामिल हैं. पुलिस की चेतावनी पुलिस ने आम जनता और संस्थानों से अपील की है कि व्हाट्सएप या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले वित्तीय निर्देशों की पुष्टि सीधे फोन कॉल के जरिए जरूर करें. गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन को लेकर जांच जारी है.

वीर सपूतों को आखिरी सलाम: IED ब्लास्ट में शहीद 4 जवान, गम में डूबा गांव

कांकेर छत्तीसगढ़ के कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर शनिवार को IED ब्लास्ट में DRG के 4 जवान शहीद हो गए। DRG की टीम जब छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में सर्चिंग अभियान पर निकली थी, तभी यह हादसा हुआ। आज उन चार शहीद जवानों को नारायणपुर पुलिस लाइन में गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। कैसे हुआ था हादसा ? बता दें कि शनिवार 2 मई को DRG की टीम छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इस दौरान जवानों को नक्सलियों द्वारा प्लांटेट IED मिला था, जिसे बाहर निकालकर निष्क्रीय किया जा रहा था. तभी IED विस्फोट हो गया। IED की चपेट में आकर 3 जवान इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा, कॉन्स्टेबल संजय गढपाले घटनास्थल पे शहीद हो गए। वहीं 1 घायल जवान कॉन्स्टेबल परमानंद कोर्राम को एयरलिफ्ट कर रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित अस्पताल में लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। शहीद जवानों को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब आज रविवार को शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को नारायणपुर पुलिस लाइन में लाया गया, जहां तिरंगे में लिपटे शहीद जवानों को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। सभी शहीदों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। वहीं पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसके बाद शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम के लिए रवाना किया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर से बस्तर में नक्सल चुनौती को उजागर किया है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, लेकिन वीर सपूतों इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा, कॉन्स्टेबल संजय गढपाले और परमानंद कोर्रम की शहादत ने हर दिल में देशभक्ति और सम्मान की भावना को और मजबूत कर दिया है।

हत्या केस पर सख्त रुख: अनिल विज ने एसपी से बात कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के दिए आदेश

अंबाला. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने बीती रात टुंडला के निकट गोली लगने से युवक गुरप्रीत सिंह की मौत के मामले में आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश अंबाला एसपी को दिए। विज ने सुबह छावनी सिविल अस्पताल में पहुंचकर मृतक के स्वजनों को इस मामले में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। विज ने मौके पर ही एसपी को फोन मिलाते हुए मामले में संलिप्त आरोपितों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि रात्रि गौ तस्कर थे जोकि गोवंशों को लेकर जा रहे थे और जैसे ही पुलिस को पता लगा तो हमारी पुलिस की दो जिप्सियां पीछे लगी। आरोपितों ने गोलियां चलाई जोकि उनके हलके के गांव गरनाला निवासी युवक गुरप्रीत सिंह को लगी। पोस्टमार्टम में पता चलेगा कि गोली किसकी लगी। उन्होंने इस मामले में अंबाला एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि जल्द आरोपितों को पकड़ा जाए।

50 लाख फिरौती मामले में गोल्डी बराड़ के पिता को जमानत, 30 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी

श्री मुक्तसर साहिब/चंडीगढ़. करीब एक साल पुराने फिरौती के एक मामले में श्री मुक्तसर साहिब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के पिता शमशेर सिंह की जमानत अर्जी एडिशनल सेशन जज रमन कुमार की अदालत ने मंजूर कर ली है। उल्लेखनीय है कि श्री मुक्तसर साहिब के निकटवर्ती गांव उदेकरण के रहने वाले एक सरकारी शिक्षक से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के संबंध में पुलिस ने तीन दिसंबर 2024 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसी मुकदमे की जांच के दौरान पुलिस ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के पिता शमशेर सिंह (पूर्व एएसआई) को 24 जनवरी 2026 और उसकी माता प्रीतपाल कौर को 25 जनवरी 2026 को मामले में नामजद किया था। इसके बाद उन्हें अमृतसर से गिरफ्तार किया गया था। शमशेर सिंह के वकील बाबू सिंह सिद्धू ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रीतपाल कौर की जमानत पहले ही मंजूर हो गई थी, जबकि शमशेर सिंह की जमानत याचिका अब अदालत द्वारा स्वीकार कर ली गई है।

99% लाने वाली अंशुल को मिला खास सम्मान: डिप्टी सीएम के गिफ्ट से खुशी का ठिकाना नहीं

लोरमी. छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं परीक्षा में 99 प्रतिशत लाकर टॉप करने वाले अंशुल को आज डिप्टी सीएम अरुण साव से खास उपहार मिला. डिप्टी सीएम शनिवार को अंशुल के घर पहुंचे. परिजनों ने उनका फूल भेंटकर स्वागत किया. डिप्टी सीएम ने अंशुल को मिठाई के साथ खास गिफ्ट देते हुए बधाई दी. साथ ही मेहनत और लगन से आगे भी नई उंचाइयों को छूने की शुभकामनाएं दी. दरअसल, बिलासपुर दौरे के बीच डिप्टी सीएम अरुण साव सीजीबीएसई  के 10वीं कक्षा के टॉपर अंशुल के घर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बधाई देते हुए मिठाई खिलाई. साथ ही अंशुल को खास तोहफा भी दिया. अब वायरल हो रहे वीडियो में टॉपर अंशुल अपने खास गिफ्ट को परिवार के साथ खोलते नजर आ रहा है. जैसे ही गिफ्ट का रैपर खुलता है, अंशुल की खुशी का ठिकाना नहीं रहता. वीडियो में दिख रहा उसका रिएक्शन ही सब बयां कर रहा है. अंशुल के चेहरे की मुस्कान ने यह बता दिया कि एक छात्र के लिए बड़े जनप्रतिनिधियों से मिलने वाला प्रोत्साहन कितना मायने रखता है. इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में 3 टॉपर गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 29 मार्च को 10वीं और 12वीं बोर्ड के परिणाम घोषित किया. इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में कुल 3 टॉपर बने. महासमुंद जिले की 2 लड़कियों ने 594 नंबर के साथ बाजी मारी है. इनमें एकलव्य इंग्लिश स्कूल अर्जुंदा की संध्या नायक और एकलव्य स्कूल बलोदा की परीरानी प्रधान शामिल हैं. इसके अलावा मुंगेली के अंशुल शर्मा भी टॉपर रहे. इन तीनों ने ही 99.00% अंक प्राप्त किए हैं. 42 स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है. इनमें से टॉप-10 में 8 छात्राएं शामिल है. हाई स्कूल परीक्षा की मुख्य परीक्षा 21 फरवरी 2026 से 13 मार्च 2026 तक आयोजित की गई थी, जिसमें कुल 3,20,535 छात्र शामिल हुए. इनमें 1,42,881 बालक और 1,77,654 बालिकाएं शामिल हैं. प्रदेशभर में 2,510 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. वहीं हायर सेकेंडरी परीक्षा की मुख्य परीक्षा 20 फरवरी 2026 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित हुई, जिसमें कुल 2,45,785 छात्र शामिल हुए. इनमें 1,02,975 बालक और 1,42,810 बालिकाएं शामिल हैं. इस परीक्षा के लिए 2,395 परीक्षा केंद्र निर्धारित किए थे.