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जनजातीय क्षेत्रों के लिए बड़ी पहल: नक्सल मुक्त क्षेत्रों में जल्द लागू होगा ‘नियद नेल्ला नार 2.0’

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने दिए कई आवश्यक निर्देश मुख्यमंत्री साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा – रामविचार नेताम आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मंत्री नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव मरपच्ची, विधायक रायमुनी भगत, विधायक चैतराम अटामी, विधायक विक्रम उसेंडी, विधायक उद्देश्वरी पैकरा, विधायक नीलकंठ टेकाम, विधायक आशाराम नेताम, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

बरगी डैम में बड़ा हादसा: क्रूज पलटा, 4 की मौत; 15 को बचाया गया, रेस्क्यू जारी

जबलपुर जबलपुर स्थित बरगी बांध में एक बड़ा हादसा हो गया, जहां एक क्रूज डूब गया। जानकारी के अनुसार क्रूज में करीब 40 लोग सवार थे। अब तक चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 15 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है। प्रशासन और बचाव दल अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि हादसा शाम को लगभग छह बजे घटना के आसपास हुआ है, जब क्रूज पर्यटकों को लेकर बांध में जा रहा था। तभी अचानक तेज हवा चली।  

पूछताछ के दौरान हड़कंप: बाड़मेर में आरोपी ने खुद को किया घायल, पुलिस ने कराया इलाज

बाड़मेर बाड़मेर महिला अपराध एएसपी कार्यालय में पॉक्सो एक्ट के आरोपी ने गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस उसको आनन-फानन में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पर उसका इलाज कराया. आरोपी खून से लथपथ हो गया था. आरोपी ने भी कुछ नहीं बताया. पुलिस ने आरोपी का इलाज कराया, इसके बाद जेल भेज दिया. पॉक्सो का आरोपी गिरफ्तार जानकारी के अनुसार, बाड़मेर की महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, और महिला अपराध अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभुराम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. आज एएसपी कार्यालय में जांच में पूछताछ के दौरान युवक ने अपना गला काट लिया. उसके बाद पुलिस के हाथ पांव फूल गए, और तुरंत उसको घायल अवस्था में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल ले गए. चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पतावापस ASP कार्यालय लेकर आ गई है. कुछ बोलने से पुलिस का इनकार इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल पहुंचे महिला अपराध अनुसंधान सेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभु राम ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया. आरोपी युवक भी मीड‍िया के सामने कुछ नहीं बोला.   बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निर्देश आर्य का कहना है कि महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश कुमार पुत्र दालाराम निवास गांधीनगर को गिरफ्तार किया था, जिसको आज फिंगरप्रिंट लेने के दौरान टेबल पर रखे पेपर कटर से खुद की गर्दन पार वार कर दिया था. उसके बाद जाब्ते ने उसे अस्पताल ले जाकर ईलाज करवाया, अब उसको जेल भेज दिया है. लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ जांच करवाई जा रही है.

कानून-व्यवस्था मजबूत करने को लातेहार पुलिस में व्यापक ट्रांसफर

लातेहार पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने जिले में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 29 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। जारी सूची के अनुसार हरिशंकर सिंह को छिपादोहर थाना से पुलिस केंद्र लातेहार, नागेंद्र भगत को लातेहार थाना से महुआडांड़ थाना, राम प्रसाद राम को चंदवा थाना से बारेसाढ़ थाना, शशिरंजन सिंह को चंदवा से महुआडांड़ थाना, सत्येन्द्र प्रसाद को चंदवा से गारू थाना भेजा गया है। इसी तरह संजय चौधरी को बालूमाथ से बरवाडीह, चन्द्रशेखर दुबे को बालूमाथ से महुआडांड़ थाना, द्वारिकानाथ पांडेय को बारियातू थाना से पीसीआर वैन, मिथिलेश कुमार सिंह को बारियातू से मनिका, अरुण कुमार सिंह को हेरहंज से जिला नियंत्रण कक्ष तथा नरेश राम को बरवाडीह से जिला नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित किया गया है। पंचरत्न राय यादव को बरवाडीह से बारेसाढ़ थाना, मोहम्मद अनवर को बरवाडीह से बालूमाथ, निरंजन तिवारी को छिपादोहर से पुलिस केंद्र लातेहार, सचिंदानंद सिंह को छिपादोहर से जिला नियंत्रण कक्ष तथा एमानुल टुडू को गारू से चंदवा थाना भेजा गया है। अमर कुमार को भेजा गया बारेसाढ़ से चंदवा धर्मेन्द्र कुमार को बारेसाढ़ से बरवाडीह, अमर कुमार को बारेसाढ़ से चंदवा, खुशादिल अंसारी को बारेसाढ़ से बारियातू, मधुसूदन प्रसाद प्रसाद को महुआडांड़ से लातेहार थाना, उमेश प्रसाद मेहता को महुआडांड़ से चंदवा तथा ददन प्रधान को महुआडांड़ से बालूमाथ थाना में तैनात किया गया है। भोला नाथ भंडारी को महिला थाना महुआडांड़ से पुलिस केंद्र लातेहार, दिनेश कुमार को पीसीआर वन से बारियातू, सहदेव प्रसाद वर्मा को जिला नियंत्रण कक्ष से बरवाडीह थाना, बचु राम को जिला नियंत्रण कक्ष से बारियातू थाना, मोहम्मद मुमताज अहमद को जिला नियंत्रण कक्ष से हेरहंज, रामविनय कुमार को बालूमाथ से लातेहार थाना तथा रामजी ठाकुर को पुलिस केंद्र लातेहार से छिपादोहर थाना भेजा गया है।

पैसे लेकर नहीं पहुंचे सेट पर: रियाज हुसैन के खिलाफ ग्वालियर में मामला दर्ज

ग्वालियर भोजपुरी अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा भोजपुरी पर झांसी रोड थाने में एफआइआर दर्ज हुई है। अभिनेता ने फिल्म साइन की और ग्वालियर के रहने वाले फिल्म निर्माता से दो लाख रुपये भी लिए। इसके बाद शूटिंग पर नहीं आए। कई बार संपर्क करने पर व्यस्त होने का हवाला देते रहे। तब फिल्म निर्माता द्वारा कोर्ट में गुहार लगाई गई। कोर्ट ने पांच दिन पहले एफआइआर के आदेश दिए थे। इस मामले में पुलिस ने बीते रोज अभिनेता हुसैन राजा पर एफआइआर दर्ज कर ली है। मेट्रोज प्रोडक्शन के संचालक से की धोखाधड़ी विजय नगर क्षेत्र में रहने वाले ओमप्रकाश कुकरेजा मैसर्स मेट्रोज प्रोडक्शन के संचालक हैं। वह फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने भोजपुरी फिल्म बनाने के लिए भोजपुरी अभिनेता रियाज हुसैन से संपर्क किया था। इनका पहले से परिचय था। रियाज ने फिल्म साइन कर दी। दो लाख रुपये एडवांस लिए। यह रुपये ओमप्रकाश द्वारा बैंक खाते से ही ट्रांसफर किए गए।  

जल प्रबंधन का ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लिए बना मिसाल

​रायपुर        छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन और जैव-विविधता के केंद्र बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य ने इस भीषण गर्मी में वन्यजीव संरक्षण की एक नई इबारत लिखी है। जब पारा आसमान छू रहा है और प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, तब बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक और व्यावहारिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। ​हर 5 वर्ग किलोमीटर पर पानी की उपलब्धता      ​अभयारण्य प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र का विस्तृत मानचित्रण (Mapping) कर 240 से अधिक जल स्रोतों को चिन्हित किया है। इसमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर शामिल हैं। रणनीति ऐसी बनाई गई है कि वन्यप्राणियों को पानी के लिए भटकना न पड़े। प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ​मैनेजमेंट का 'स्मार्ट' फॉर्मूला: मैपिंग से जियो-टैगिंग तक     ​ बारनवापारा का यह मॉडल केवल पानी भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा और तकनीक पर आधारित है। स्थलों का ​नियमित निगरानी का प्रबंध किया गया है। प्रत्येक 15 दिनों में जल स्तर का आकलन किया जाता है। 'स्टाफ गेज' के माध्यम से जल स्तर मापकर स्रोतों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि जहां पानी कम हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जा सके।सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है, जिससे मुख्यालय से भी इनकी स्थिति पर सटीक नजर रखी जा सके।  पानी की pH और TDS की नियमित जांच     ​वन्यजीवों को केवल पानी ही नहीं, बल्कि 'सुरक्षित पानी' मिले, इसके लिए नियमित अंतराल पर pH मान और TDS (Total Dissolved Solids) का परीक्षण किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पानी वन्यजीवों के स्वास्थ्य के अनुकूल हो। जिन दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, वहां विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। ​मिनरल्स का भी रखा ख्याल: स्थापित किए 'साल्ट लिक' ​वन्यजीवों के समग्र स्वास्थ्य और उनकी खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जल स्रोतों के पास रणनीतिक रूप से 'साल्ट लिक' (Salt Licks) बनाए गए हैं। इससे जानवरों को पानी के साथ-साथ आवश्यक मिनरल्स भी एक ही स्थान पर मिल रहे हैं, जो गर्मी के तनाव (Heat Stress) को कम करने में सहायक है। वनमंडलाधिकारी ने कहा कि एक ऐसी जवाबदेह प्रणाली विकसित की है जो केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के कारण हम जल स्तर गिरने से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करने में सक्षम हैं। यह मॉडल भविष्य के वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है।"

निवेशकों के लिए बड़ी पहल: Haryana Government का ओम्निबस बिल, खत्म करेगा नियमों का मकड़जाल

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने निवेश के मामले में प्रदेश को अग्रणी गंतव्य बनाने के मकसद से प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विनियमन में ढील (डी-रेगुलेशन) देने का अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक (ओम्निबस बिल) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा सुधारों को संस्थागत रूप देने की तैयारी है। कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक और हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में यहां हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अनुपालन में कमी और डी-रेगुलेशन फेज-2 के अन्तर्गत हुए सुधारों की समीक्षा की गई। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए प्रस्तावित हरियाणा ओम्निबस बिल विभिन्न नियामकीय बदलावों को एकीकृत विधायी ढांचे में समाहित करेगा। इससे विभागों में एकरूपता सुनिश्चित होगी और लालफीताशाही को कम करने तथा शासन को सरल बनाने वाले सुधारों को दीर्घकालिक कानूनी आधार मिलेगा। वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों ने प्रगति की समीक्षा की बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना, स्वीकृति प्रक्रियाओं में तेजी लाना तथा व्यवसायों, संस्थानों और नागरिकों के लिए एक सुगम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। अधिकांश सुधार प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं और कई लागू होने की प्रक्रिया में हैं, जो राज्य के सुधार एजेंडे में तेजी को दर्शाता है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को लंबित प्रस्तावों को शीघ्र पूरा करने, एमआईएस पोर्टल पर कार्ययोजनाएं तुरंत अपलोड करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सुधारों का जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापनीय प्रभाव दिखाई दे। उन्होंने कहा कि इन सुधारों की सफलता जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी। सुधारों के प्रमुख क्षेत्रों में भूमि और निर्माण नियमों का सरलीकरण शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (सीएलयू) की आवश्यकता नहीं है, जिससे निवेशकों और भूमि मालिकों को बड़ी राहत मिली है। सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य शेष नियंत्रित क्षेत्रों में भी सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह प्रणाली औद्योगिक क्षेत्रों में पहले से लागू है और मार्च 2027 तक इसका अन्य श्रेणियों में भी विस्तार करने की योजना है। मांग आधारित भूमि उपयोग प्रणाली में गतिविधियों की अनुमति होगी जब तक कि वे विशेष रूप से प्रतिबंधित न हों। इससे नियामकीय बाधाओं में और कमी आएगी। निर्माण क्षेत्र में कब्जा प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक अनुमोदनों को सरल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कई अनावश्यक एनओसी को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को एक सशक्त सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे सभी व्यावसायिक स्वीकृतियों के लिए एकीकृत प्रणाली उपलब्ध होगी। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। लगभग 30 दिनों में स्वीकृति देने के लक्ष्य के साथ ‘सर्विस लेवल एग्रीमेंट’ लागू किए जा रहे हैं। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्वीकृति की समय-सीमा की निगरानी की जा सकेगी। राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे में क्या? सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे के केंद्र में हैं। नए सुधारों के तहत औद्योगिक प्लॉट के उप-विभाजन, पूर्व स्वीकृति के बिना व्यवसायिक गतिविधियों में बदलाव, संपत्तियों के हस्तांतरण या सब-लीज की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। प्रस्तावित ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट’ के तहत उद्यमों को स्व-घोषणा के आधार पर कार्य शुरू करने की अनुमति होगी और शुरुआती चरण में निरीक्षणों में भी कमी की जाएगी। इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए 500 करोड़ रुपये का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित है, जिससे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन किया जाएगा। इसके अलावा, अपशिष्ट उपचार और अग्नि सुरक्षा जैसी साझा सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भी कार्य किया जा रहा है। हरियाणा अब पारंपरिक और जटिल प्रावधानों के स्थान पर वैश्विक मानकों के अनुरूप जोखिम-आधारित आधुनिक अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में साझा अग्नि सुरक्षा ढांचा विकसित करने से लागत कम होगी और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति राज्य ने अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। नगर निगम कानूनों से ट्रेड लाइसेंस पहले ही हटाए जा चुके हैं और प्रस्तावित ओम्निबस बिल के तहत अन्य लाइसेंसों को भी सरल बनाने की योजना है, जिससे विनियामक ढांचे में दोहराव खत्म होगा। बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाॅ. अमित कुमार अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जे. गणेशन तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

BSP में अब नहीं चलेगी लापरवाही: ड्यूटी छोड़ने वाले कर्मचारियों पर RFID तकनीक से रखी जाएगी नजर

भिलाईनगर. बीएसपी में ड्यूटी के दौरान संयंत्र से बाहर जाने वाले कार्मिकों पर बहुत जल्द शिकंजा कसेगा। संयंत्र गेट में आरएफआईडी यानी रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम लगेगा। इससे कार्मिकों की तत्काल शिनाख्त हो जाएगी। मैनेजमेंट को यह शिकायतें लगातार मिलती रही है कि ड्यूटी के दौरान कई कार्मिक थम्ब इम्प्रेशन से अटेंडेंस लगाने के बाद संयंत्र से बाहर निकल जाते हैं और अपने निजी काम निपटाते रहते हैं। इस समय मैनेजमेंट पर लेबर प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ मैनपावर और प्रोडक्शन कॉस्ट कम करने का दबाव है। ऐसे में वह ड्यूटी के दौरान भागने वाले कार्मिकों पर अंकुश लगाने के लिए संयंत्र के सभी गेट में मेन गेट, बोरिया गेट, जोरातराई गेट, मरोदा गेट, खुर्सीपार गेट, इस्पात भवन, एचआरडी, बीएमडीसी, नगर सेवाएं विभाग, सेक्टर 9 हास्पिटल आदि में आरएफआईडी सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है।

हरियाणा: पुलिस परिवारों के लिए शगुन योजना लागू, शादी खर्च में मिल रही मदद

चंडीगढ़ हरियाणा पुलिस द्वारा पुलिस परिवारों के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई शगुन योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो चुकी है। इस पहल के तहत अप्रैल माह में अब तक 18 पुलिसकर्मियों को उनके बच्चों की शादी के लिए 2.5-2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 12 नए आवेदन वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से पुलिसकर्मियों के बच्चों, खासकर बेटियों के विवाह के दौरान आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि पुलिसकर्मी बिना वित्तीय दबाव के अपने पारिवारिक दायित्व निभा सकें। योजना से लाभान्वित एसआई कमल चंद ने बताया कि बेटी की शादी जैसे भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन शगुन योजना से मिली सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत बनी है। अनुभव साझा करते हुए लाभार्थियों की प्रतिक्रिया एसआई कमल चंद ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेटी के विवाह जैसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है, ऐसे में शगुन योजना के तहत मिली सहायता हमारे लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इसी प्रकार, एक अन्य लाभार्थी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इस योजना ने हमें आत्मसम्मान के साथ अपने सामाजिक दायित्व निभाने की शक्ति दी है। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि विभाग की ओर से हमारे प्रति विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। कुछ कर्मियों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिस संवेदनशीलता के साथ हमारे परिवारों की जरूरतों को समझा है, वह सराहनीय है। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि विभाग हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा है।