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समय पर जानकारी न देने का तर्क खारिज, क्लेम रोकने पर 80 हजार का भुगतान आदेश

भोपाल स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इलाज में खर्च राशि ब्याज सहित देने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला इसलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि संबंधित बीमा एक सामाजिक संस्था के माध्यम से देशभर के जैन समुदाय के लिए सामूहिक रूप से कराया गया था। जब उपभोक्ता के पिता को इलाज के बाद क्लेम राशि नहीं मिली, तो उसने बीमा कंपनी के साथ-साथ संस्था के खिलाफ भी याचिका दायर किया। ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना और इलाज का खर्च दरअसल, भोपाल के पटेल नगर निवासी सौरभ जैन ने जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 में मुंबई स्थित बीमा कंपनी और जैन इंटरनेशनल संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सौरभ के अनुसार, संस्था द्वारा जैन समाज के सदस्यों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना चलाई जा रही थी। उन्होंने “खुशहाल परिवार योजना” के तहत वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक नियमित प्रीमियम जमा करते हुए परिवार के चार सदस्यों के लिए 10 लाख रुपये का बीमा लिया था।  

बारां से होते हुए मनोहरथाना में दिखा चीता, वन विभाग अलर्ट

झालावाड़ कूनो से निकला चीता KP-3 राजस्थान में दस्तक दे चुका है. बारां होते हुए चीते की एंट्री झालावाड़ जिले के मनोहरथाना इलाके में हुई, जिससे ग्रामीणों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है. गांव के लोग डर के साए में जी रहे हैं. व‍न व‍िभाग की टीम मॉनिटरिंग कर रही है.   चंदीपुर रेंज में पहुंचा चीता कूनो नेशनल पार्क का चीता KP-3 बारां जिले के शेरगढ़ और हरनावदाशाहजी क्षेत्र से गुजरते हुए झालावाड़ जिले की मनोहरथाना चंदीपुर रेंज में पहुंचा. शाम के समय चीते की मूवमेंट 4 ग्राम पंचायत अर्जुनपुरा, खेरखेड़ा, शोरती और चंदीपुर में देखी गई. इन गांवों से होते हुए चीता पचेटा गांव तक पहुंचा. ग्रामीणों ने देखा चीता   आशंका जताई जा रही है कि चीता KP-3 मध्य प्रदेश के गुना जिले की ओर बढ़ गया है. स्थानीय ग्रामीणों ने चीते की हलचल देखे जाने की पुष्टि की है.  ग्रामीणों में डर का माहौल है, वहीं लोग सतर्क भी नजर आ रहे हैं. वन विभाग की टीम की नजर वन विभाग से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क की स्पेशल ट्रैकिंग टीम और मनोहर थाना वन रेंज की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं. चीते की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

16 साल के दलित बच्चे को थर्ड डिग्री, जयपुर अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती

 भिवाड़ी राजस्थान के भिवाड़ी में खाकी एक बार फिर सवालों में घिरती नजर आ रही है. यहां यूआईटी थाने में एक 16 वर्षीय नाबालिग दलित बालक के साथ पुलिस कस्टडी में बर्बरता और थर्ड डिग्री यातना देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस की कथित पिटाई से मासूम की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे जयपुर के निम्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है. भारी जन-आक्रोश और रातभर चले धरने के बाद पुलिस ने आरोपी थाना प्रभारी दारा सिंह सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. घर से जबरन उठाकर ले गए   परिजनों का आरोप है कि 21 अप्रैल को सिपाही गोपाल और अन्य पुलिसकर्मी नाबालिग को उसके घर से जबरन उठाकर ले गए थे. उस वक्त बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था. बाद में पीड़ित के चचेरे भाई को थाना प्रभारी का फोन आया जिस पर बच्चे ने रोते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगाई. अगले दिन जब परिवार थाने पहुंचा तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया. दोपहर में अचानक फोन आया कि बच्चा अस्पताल में भर्ती है और उसका आधार कार्ड लेकर पहुंचें. जब परिजन पहुंचे तो मासूम बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर था. वीडियो डिलीट कराने और मामले को दबाने का आरोप पीड़ित परिवार ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल में बच्चे की हालत की वीडियो बनाने की कोशिश की तो थाना प्रभारी दारा सिंह और पुलिसकर्मी पवन यादव ने उन्हें धमकाया और जबरन वीडियो डिलीट करवा दिए. आरोप है कि पुलिस इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी. यहां तक कि शुरुआत में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से भी मना कर दिया था. भारी तनाव के बीच रात 1 बजे दर्ज हुई FIR पूर्व विधायक संदीप यादव और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बाद भिवाड़ी एसपी ब्रजेश उपाध्याय मौके पर पहुंचे. तनाव बढ़ता देख एसपी के निर्देश पर रात करीब 1 बजे मुकदमा दर्ज किया गया. इस FIR में थाना प्रभारी दारा सिंह, सिपाही गोपाल, गोविंद और पवन यादव को नामजद किया गया है. मामले की जांच एससी एसटी सेल के आरपीएस अधिकारी शीशराम मीणा को सौंपी गई है.

सुखबीर सिंह बादल के बयानों पर सख्त कार्रवाई की मांग, SGPC प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन

अमृतसर में सोमवार को सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर उस समय गंभीर और संवेदनशील माहौल देखने को मिला जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मास्टर मिठू सिंह काहनेके के नेतृत्व में वहां पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने जत्थेदार साहिब को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और उनके खिलाफ सख्त धार्मिक कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि सुखबीर सिंह बादल द्वारा दिए गए बयान सिख मर्यादा, परंपराओं और धार्मिक अनुशासन के खिलाफ हैं, जिससे पूरे पंथ की गरिमा को ठेस पहुंची है। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अकाल तख्त साहिब के आदेशों को साजिश बताना बेहद गंभीर और अस्वीकार्य कदम है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सिख पंथ की सर्वोच्च मर्यादा का हवाला मीडिया से बातचीत करते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सिख इतिहास के कई उदाहरणों का उल्लेख किया, जिसमें बताया गया कि जब भी किसी ने पंथिक नियमों का उल्लंघन किया, तो उसने अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर अपनी गलती स्वीकार की और सजा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल अनुशासन नहीं बल्कि सिख पंथ की आस्था और सम्मान का मूल आधार है। प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गलत संदेश देगा और भविष्य में अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अनदेखी करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। ‘तनखैया’ घोषित करने की जोरदार मांग इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर मांगपत्र यह रहा कि सुखबीर सिंह बादल को “तनखैया” घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केवल ऐसी सख्त धार्मिक कार्रवाई ही पंथ की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रख सकती है। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरी सिख परंपरा की गरिमा से जुड़ा हुआ है। SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल इस विवाद के बीच SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना SGPC नेतृत्व की जिम्मेदारी थी, लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर मांग की गई कि SGPC अध्यक्ष को भी अकाल तख्त साहिब में तलब किया जाए और उनसे पूरी जवाबदेही तय की जाए। पंथिक एकता बनाम राजनीतिक टकराव इस पूरे घटनाक्रम ने सिख पंथ के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक तरफ पंथिक मर्यादा और अनुशासन की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी इस विवाद को और जटिल बना रही है। सख्त चेतावनी और भविष्य की चिंता प्रतिनिधिमंडल ने अंत में चेतावनी दी कि यदि अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह एक खतरनाक परंपरा स्थापित कर सकता है, जिससे भविष्य में धार्मिक संस्थाओं की शक्ति और सम्मान दोनों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंथ की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए कठोर निर्णय लेना अब अनिवार्य हो गया है।

वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन से भीषण गर्मी में वन्य जीवों को मिलेगी राहत

भोपाल भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश में वन्य जीवों को पेयजल के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के अंतर्गत वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा जंगलों में जल स्रोतों का निर्माण, संरक्षण और पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान' ‘जल ही जीवन है’ की भावना को साकार करते हुए न केवल मानव जीवन, बल्कि वन्यजीवों और प्रकृति के संतुलन को भी सुरक्षित करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है। वन्य जीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन अभियान के अंतर्गत जंगलों में तालाब, स्टॉप डैम, झिरिया और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण एवं गहरीकरण किया जा रहा है। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तालाबों के निर्माण, गहरीकरण, जल स्रोतों के विकास तथा पुराने स्रोतों के जीर्णोद्धार जैसे कार्य प्रगति पर हैं। कई स्थानों पर नए जल स्रोतों का निर्माण किया गया है, जबकि मौजूदा जल संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य भी व्यापक स्तर पर जारी है। इससे गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कार्य क्र. कार्य का विवरण निर्धारित लक्ष्य उपलब्धि वित्तीय लक्ष्य (₹) वित्तीय उपलब्धि (₹) 1 निर्माण हेतु तालाब (संख्या) 11 6 77,96,000 35,96,000 2 तालाब गहरीकरण (संख्या) 3 0.5 10,00,000 0 3 निर्माण सॉसर (संख्या) 19 0.5 10,80,000 0 4 स्टॉपडैम निर्माण (संख्या) 1 0 20,00,000 10,00,000 5 झिरिया निर्माण (संख्या) 22 0 0 0 6 डाइक निर्माण (संख्या) 0 0 0 0 7 वाटर लिफ्टिंग सिस्टम (किमी) 0 0 0 0 8 मौजूदा झिरिया की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार 50 40 5,00,000 4,00,000 कुल       1,23,76,000 49,96,000 पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का निर्माण न केवल वन्य जीवों की प्यास बुझाने का कार्य कर रहा है, बल्कि इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिल रही है। जल उपलब्धता बढ़ने से वन्य जीवों का विचलन कम होगा और मानव–वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। जन–आंदोलन के रूप में जल संरक्षण 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का एक राज्य स्तरीय जन–आंदोलन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा (नव संवत्सर) के अवसर पर इंदौर से किया। इस अभियान को ‘जनशक्ति से नवभक्ति’ के मंत्र से जोड़ते हुए आमजन को श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 100 दिवसीय राज्य व्यापी अभियान यह अभियान 19 मार्च से 30 जून 2026 तक, लगभग 100 दिनों तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इस अभियान में 18 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को सह–नोडल विभाग बनाया गया है। 2500 करोड़ रुपये के कार्य और बड़े लक्ष्य अभियान के अंतर्गत इस वर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इसमें 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अभियान में पुराने तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई , नदियों (कोलांस, शिप्रा, बेतवा) के संरक्षण के लिए कार्य योजना, जल स्रोतों के आसपास बड़े पैमाने पर पौधारोपण (लगभग 28 लाख पौधे) और अतिक्रमण हटाने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जायेंगे। जागरूकता के लिए विशेष आयोजन अभियान के दौरान जन–जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण आयोजन भी किए जा रहे हैं। इनमें 23–24 मई को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन, 25–26 मई को क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा और 30 मई से 7 जून तक भारत भवन, भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित की जायेगी।  

Haryana News: ग्रामीण जल संरक्षण को बढ़ावा, पंचायतों को मिलेगा दोगुना बजट

चंडीगढ़. हरियाणा की ग्रामीण जल व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 'ग्रामीण जल संरक्षण अभियान' के तहत पेयजल आपूर्ति और उसके बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की नई ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के साथ ही अब गांवों में पानी कब आएगा, मोटर कब चलेगी और पाइपलाइन की मरम्मत कैसे होगी, यह सब पंच-सरपंच तय करेंगे। इस कदम का सबसे क्रांतिकारी पहलू वित्तीय प्रोत्साहन है। सरकार ने ऐलान किया है कि पंचायतें जल शुल्क (Water Tax) के रूप में जितना पैसा इकट्ठा करेंगी, सरकार उतनी ही 'मैचिंग ग्रांट' उनके खाते में अलग से डालेगी। यानी गांव के विकास के लिए पंचायतों के पास अब पानी के जरिए दोहरा फंड जमा होगा। इस नई व्यवस्था में प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा गया है। सरकार ने बिल वसूली के काम में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी है। अब गांव की महिलाएं घर-घर जाकर पानी के बिल कलेक्ट करेंगी। प्रोत्साहन राशि के तौर पर, वसूली गई कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा सीधे इन महिलाओं के बैंक खातों में जाएगा। इससे जहां एक ओर विभाग की वर्षों से लंबित रिकवरी में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव में ही आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। यह मॉडल न केवल आर्थिक रूप से टिकाऊ है, बल्कि इससे जल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी। पंचायतों को अब केवल जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी शक्तियां भी दी गई हैं। नए नियम के मुताबिक, किसी भी घर में नया पानी या सीवर कनेक्शन देना हो, तो अब बिस्वास (BISWAS) पोर्टल के जरिए पंचायतों के पास ही आवेदन करना होगा। इसके अलावा, गांव में चल रहे अवैध कनेक्शनों को काटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जुर्माना लगाने का अधिकार भी पंचायत के पास होगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल मिले। शिकायतों के निपटारे के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

CCTV में कैद वारदात: एक्टिवा पर आए बदमाशों ने कारों की खिड़कियां तोड़कर की चोरी

कपूरथला. जिले में चोरी की वारदातें बढ़ती जा रही है। सुल्तानपुर लोधी और आस-पास के इलाकों में देर रात 2 अलग-अलग जगहों पर एक ही चोर द्वारा कारों की खिड़कियां तोड़कर चोरी की कोशिश का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये घटनाएं रात के समय हुईं, जहां चोर सफेद एक्टिवा स्कूटर पर सवार होकर आया था। चोर ने अपना चेहरा पूरी तरह से ढक रखा था ताकि उसकी पहचान न हो सके और स्कूटर की नंबर प्लेट भी ढकी हुई थी। गांव मेवा सिंह वाला में एक टीचर की कार की खिड़की तोड़कर कार चोरी करने की कोशिश की गई, वहीं सुल्तानपुर लोधी शहर में एक प्रॉपर्टी डीलर की कार को भी निशाना बनाया गया।  दोनों घटनाएं कैमरों में कैद हो गई हैं, जिससे चोर की हरकतें साफ दिखाई दे रही हैं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। इलाके में चोरी की बढ़ती घटनाओं से लोगों में डर का माहौल है, वहीं पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है।

Collector Office Dispute Ends: प्रशासन-संगठनों में समझौता, विवाद का हुआ पटाक्षेप

मुंगेली. कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा विवाद, जिसने बीते कुछ दिनों में जिले का माहौल गरमा दिया था और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना हुआ था, अब पूरी तरह शांत हो गया है। 26 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय मुंगेली में आयोजित शांतिवार्ता बैठक के बाद प्रशासन, जोहार पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। इस बैठक में एसडीएम अजय कुमार शतरंज, तहसीलदार शेखर पटेल, नायब तहसीलदार प्रकाश यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान 24 अप्रैल को कलेक्टर परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। अंततः सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति बन गई और भविष्य में किसी भी विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया। क्या था पूरा मामला दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 24 अप्रैल को उस वक्त हुई थी, जब कुछ लोग कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दावों में आरोप लगाया गया कि कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। इस दावे को स्थानीय भाषा और अस्मिता के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। वायरल पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि ज्ञापन जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर दिया जा रहा था, लेकिन आवेदन देने पहुंचे लोगों की बात नहीं सुनी गई और उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार हुआ। देखते ही देखते यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक घटना न रहकर सामाजिक और भावनात्मक बहस का विषय बन गया। प्रशासन ने आरोपों को बताया था निराधार हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। प्रशासन का कहना था कि कलेक्टर ने आवेदन को विधिवत स्वीकार करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय परिसर में बैठ गए थे और नारेबाजी करने लगे, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुए। इस दौरान कर्मचारियों के साथ बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी। थाने तक पहुंच गया था मामला घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 24 अप्रैल को दोपहर करीब 12:15 से 1:00 बजे के बीच कुछ लोगों ने कलेक्टर कक्ष के बाहर नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे कार्यालय का माहौल प्रभावित हुआ और आम लोगों को भी असुविधा हुई। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी।प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया था कि घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। शांतिवार्ता से मामले का पटाक्षेप इसी बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए 26 अप्रैल को शांतिवार्ता बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए विवाद को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया। लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि भविष्य में किसी भी मुद्दे को टकराव के बजाय बातचीत और समन्वय के जरिए सुलझाया जाएगा। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है। प्रशासन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना व जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदधिकारियों के बीच बनी यह सहमति न केवल तत्काल विवाद को खत्म करती है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि डिजिटल युग में किसी भी घटना के कई पहलू सामने आ सकते हैं, लेकिन सही तथ्यों, पारदर्शिता और आपसी संवाद से किसी भी विवाद का समाधान संभव है। फिलहाल, मुंगेली में स्थिति सामान्य हो चुकी है और प्रशासन व सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित हो गया है।

यूपी होमगार्ड परीक्षा में कड़ी सुरक्षा, दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानी

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होमगार्ड भर्ती परीक्षा के आखिरी दिन सोमवार को राजधानी के परीक्षा केंद्रों पर जबरदस्त सख्ती देखने को मिली। सुरक्षा और शुचिता के नाम पर हुई इस जांच के दौरान अभ्यर्थियों को कड़े नियमों से गुजरना पड़ा। केंद्रों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और चेकिंग के दौरान पुरुषों के जूते-बेल्ट तो उतरवाए ही गए, विवाहित महिलाओं के मंगलसूत्र, पायल और अन्य आभूषण तक उतरवा दिए गए। महाराजा बिजली पासी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय केंद्र पर सुरक्षा जांच के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब महिला पुलिसकर्मियों ने परीक्षार्थियों के धातु के गहने पहनने पर रोक लगा दी। हरदोई से आईं परीक्षार्थी सरिता देवी को कान की बाली, कंगन, पायल और मंगलसूत्र उतारने के निर्देश दिए गए। सरिता सहित कई अन्य महिला अभ्यर्थियों ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उनकी एक न सुनी गई। अंततः अभ्यर्थियों को अपने कीमती आभूषण केंद्र के बाहर खड़े परिजनों को सौंपने पड़े। जूते-घड़ी और बेल्ट पर भी रही पाबंदी आजमगढ़ से आए अभ्यर्थी शैलेश कुमार ने बताया कि परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले सभी के जूते और बेल्ट निकलवा दिए गए। मोबाइल, घड़ी और पेन ले जाने पर भी पूरी तरह पाबंदी रही। अभ्यर्थियों को केवल आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी गई। 300-400 किमी दूर सेंटर होने से नाराजगी परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी गाजीपुर, गोरखपुर, मऊ और देवरिया जैसे दूरदराज के जिलों से लखनऊ पहुंचे थे। परीक्षार्थियों ने विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि होमगार्ड जैसे पद की भर्ती के लिए 300 से 400 किलोमीटर दूर सेंटर आवंटित करना समझ से परे है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा, बल्कि अभ्यर्थियों को भारी मानसिक और शारीरिक थकान का सामना करना पड़ा। एसआई स्तर के कठिन सवालों ने उलझाया राजधानी के 55 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित इस परीक्षा के स्तर को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए।परीक्षार्थियों के अनुसार, होमगार्ड भर्ती के प्रश्नपत्र का स्तर उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती जैसा कठिन था। परीक्षा में सामान्य ज्ञान, हिंदी, विज्ञान, इतिहास और भूगोल विषय के सवाल शामिल किए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगभग 90 प्रतिशत प्रश्न काफी जटिल थे, जिन्हें हल करने में समय की कमी महसूस हुई।  

छत्तीसगढ़ ने मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी में किया नया कीर्तिमान, देश में अव्वल

मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान  रायपुर  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।                महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।              यह उपलब्धि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।          रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई – के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।            प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।