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CM की अध्यक्षता में बनेगी ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद, 15 गैर सरकारी सदस्य होंगे शामिल

रांची  राज्य में वीबी-जी राम जी योजना के बेहतर क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा. ग्रामीण विकास विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है. जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होने की संभावना है. परिषद में अधिकारियों के साथ 15 गैर सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. इसका उद्देश्य योजना के संचालन, निगरानी, मूल्यांकन और शिकायत निवारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है. वीबी-जी राम जी अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है और इसके तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है. मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे. राज्य स्तरीय सामान्य सभा में पंचायती राज, वित्त, वन एवं पर्यावरण, जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, भवन निर्माण, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, कल्याण तथा श्रम एवं कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के मंत्री सदस्य होंगे. परिषद में मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव भी शामिल होंगे. योजना आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया जायेगा. इसके अलावा राज्य सरकार कम से कम 15 गैर सरकारी सदस्यों को नामित करेगी. योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करेगी परिषद परिषद का मुख्य काम योजनाओं के प्रभावी संचालन और निगरानी को सुनिश्चित करना होगा. इसके अलावा योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा तथा राज्य सरकार को योजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सुझाव भी दिए जाएगे. परिषद वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के साथ निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी. जरूरत के अनुसार इसमें सुधार के लिए सिफारिश की जाएगी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी संचालन समिति योजना के परिचालन संबंधी मार्गदर्शन, समन्वय और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति का भी गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. संचालन समिति का खाका भी तैयार किया गया है. समिति राज्य में योजना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों के साथ डिजिटल प्रणालियों, निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर मार्गदर्शन देगी.

उज्जैन में मस्जिद विवाद ने लिया तूल, सुबह कार्रवाई के दौरान पथराव; 10 लोगों पर FIR

उज्जैन कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक मार्ग चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद (Shahi Masjid Ujjain) का करीब 10 फीट बाधक हिस्सा हटाया जा रहा है। सोमवार सुबह प्रशासन और‌ मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाजजन खुद बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी हुई और कुछ समाजजन ने कार्रवाई का विरोध भी किया। उपद्रव करने की कोशिश कर रहे लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज का एक तबका आगर नाके पर जमा हो गया। दोपहर करीब 12 बजे उपद्रवियों ने फिर पत्थर फेंके। पुलिस ने लाठी चार्ज किया। 10 पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दोपहर तक लाठीचार्ज के बाद स्थिति नियंत्रण में हुई। मस्जिद के बाधक हिस्से को मस्जिद कमेटी तोड़ रही है। मस्जिद पक्ष की अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त इसके साथ ही शाही मस्जिद मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद की मामले में सुनवाई। विस्तृत आदेश देर शाम तक जारी होगा। उल्लेखनीय है कि उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा इस सड़क की निर्धारित सीमा में बाधक बन रहा था। इसी हिस्से को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। शहर काजी ने कहा- मस्जिद का मसला हल हो चुका है, अफवाहों पर ध्यान न दें उज्जैन में शादी मस्जिद का हिस्सा हटाने को लेकर उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा कि मस्जिद का मसला रात में ही हल हो चुका है। समाज के लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। बिना वजह बाजार में न खड़े हो और वहां न जाएं। ऐसी कोई बात नहीं है जिसके पीछे हम वहां जाएं। जिस बात के लिए वादा हुआ है वो काम पूरा होना है। वो लोग अपने काम को कर रहे हैं। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अफवाहों की वजह से घर से बाहर न निकलें।     उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा- शाही मस्जिद का मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं।  उज्जैन प्रशासन और शहर काजी ने भी आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। इसे लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं, मास्टर प्लान के हिसाब से मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि सभी धर्म-समुदाय के लोग स्वतः इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।  उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। https://t.co/3uv9WlGE7E#Ujjain  उनके मकान, धर्मस्थल जो भी बीच में आ रहे हैं, उन्हें वे स्वतः हटा रहे हैं। इसी क्रम में छत्री चौक पर आज शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। उपद्रवियों ने पत्थर फेंके। क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल को चोट लगी। यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए मार्ग चौड़ीकरण किया जा रहा है। शाही मस्जिद के भीतर की तोड़ाई चल रही है। समाजजन खुद इसे हटा रहे हैं। हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला, आज सुनवाई शादी मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं। आगर नाके पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे लोग। एकलपीठ में याचिका निरस्त होने के बाद इसे फिर से युगलपीठ के सामने प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने दावा किया था कि 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी। उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क है। शाही मस्जिद को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच मस्जिद पक्ष की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर युगल पीठ में सोमवार को सुनवाई होगी। एकल पीठ याचिका को 15 दिन पहले निरस्त कर चुकी है, अब सबकी नजरें युगल पीठ की सुनवाई पर लगी हुई हैं। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा (एक तरफ से चार फीट और दूसरी तरफ से नौ फीट) हटाया जा रहा है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम मस्जिद द्वारा मस्जिद 636 साल पुरानी होने का दावा करते कहा जा रहा है कि भवन का हिस्सा तोड़े जाने से पूरी संरचना को नुकसान पहुंचेगा और पूरी इमारत प्रभावित हो सकती है। वहीं, मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई को देखते हुए शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद के भीतर और बाहर एकत्रित रहे थे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी जारी रही थी। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए और पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई। औवेसी ने जताया विरोध उधर, एआईएमआइएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद को हटाने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वक्फ कानून में संशोधन इसीलिए किए गए ताकि कलेक्टर्स और राज्य सरकार को मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाए।

हरियाणा में पुलिस भर्ती को लेकर बड़ा ऐलान, अगले साल 20 हजार जवानों की होगी भर्ती

 गुरुग्राम  हरियाणा पुलिस अगले दो साल में अपने आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इस साल अब तक 5500 भर्तियां हो चुकी हैं और नवंबर में 4000 जवानों की और भर्ती होगी। अगले साल 20 हजार पुलिस भर्ती करने का लक्ष्य है। यह बात हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने सोमवार को गुरुग्राम में कही। वे सेक्टर 17-सी में नवनिर्मित सेक्टर 17-18 थाने की नई बिल्डिंग के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। साढ़े चार करोड़ में बना नया थाना डीजीपी ने बताया कि साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए थाने का निर्माण पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने किया है। अब तक थाना पुरानी बिल्डिंग से संचालित हो रहा था। इस साल पूरे प्रदेश में 8 नए पुलिस थाने, 3 पुलिस चौकियां, 9 पुलिस बिल्डिंग और 313 पुलिस आवासों का निर्माण किया गया है। इस साल पुलिस मॉडर्नाइजेशन पर साढ़े छह सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ANTF, महिला सुरक्षा के लिए 33 थाने नशे पर उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब से सबसे अधिक तस्करी हो रही है, रोकने के लिए (एएनटीएफ) एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। गृह मंत्रालय भी इस पर गंभीर है। कहा कि महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में 33 महिला थाने, सीसीटीवी नेटवर्क, 112 ऐप और स्कूल-कॉलेज के पास दुर्गा शक्ति वाहन तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए एक ऐप भी शुरू किया जा रहा है, जो कामकाजी महिलाओं को ट्रिपिंग सुविधा देगा। साइबर क्राइम पर उन्होंने कहा कि यह नया चैलेंज है, लेकिन पिछले दो सालों में इसमें कमी लाई गई है। आतंक फैलाने वालों से आतंकी जैसा सलूक बढ़ते एक्सटॉर्शन के मामलों पर डीजीपी ने सख्त लहजे में कहा कि जो व्यक्ति जनता में भय फैलाएगा, पुलिस उसके साथ वैसा ही सलूक करेगी। जो आतंक फैलाएगा, उसके साथ आतंकी जैसा ही व्यवहार होगा। विदेश में बैठे गैंगस्टरों पर भी लगाम लगाई जा रही है, पिछले दो सालों में 25 गैंगस्टरों को विदेश से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है और आगे भी प्रक्रिया जारी है। गुरुग्राम में रोडरेज पर उन्होंने कहा कि महिला बाइकर के साथ हुई घटना में आरोपी को राजस्थान से पकड़कर लाया गया है। रोडरेज की घटनाओं पर भी पुलिस गंभीर है युवराज मनचंदा मामले में पुलिस चूक की जांच दिल्ली के युवक युवराज मनचंदा की गुरुग्राम में मौत के मामले में पूछे गए सवाल पर डीजीपी ने माना कि गुरुग्राम पुलिस से चूक हुई है। उन्होंने कहा कि एसओपी के अनुसार किसी भी शव का अंतिम संस्कार तीन दिन बाद कर दिया जाता है। इस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया है। कहां-कहां लैप्स हुए हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञान भारतम मिशन: राजस्थान की 23 लाख पांडुलिपियां होंगी डिजिटल, जिला स्तर पर बनेंगे संरक्षण केंद्र

जयपुर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत राजस्थान राज्य में "पाण्डुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला" का आयोजन सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री  दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी.निवास उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ग्रन्थ नहीं हैं, ये भारत के हजारों वर्षों के साहित्य, परम्परा, इतिहास और दर्शन की धरोहर हैं। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, शोध और ज्ञान का भण्डार सुरक्षित है। एक पाण्डुलिपि केवल अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए नए मार्ग खोलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में "ज्ञान भारतम मिशन" इसी संकल्प को नई तकनीक से जोड़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि हमारा प्राचीन ज्ञान अलमारियों में बंद न रहे, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया तक पहुंचे और विकसित भारत की शक्ति बने। प्रधानमंत्री जी की सोच को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के मार्गदर्शन में साकार किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन में राजस्थान में पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत राजकीय व निजी संग्रह, पुस्तकालयों, मंदिर, मठों आदि से लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिसमें से लगभग एक लाख चौबीस हजार को डिजिटाइज्ड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान की प्रत्येक पाण्डुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए ताकि युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आम जन भी हमारे शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष और साहित्य के ज्ञान से जुड़ सकें। इसके लिए जिला स्तर पर भी संरक्षण केन्द्र विकसित किए जाएंगे और निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा। प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर -मुख्य सचिव  मुख्य सचिव वी.निवास ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं और ज्ञान भारतम मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान का इतिहास और सभ्यता बहुत समृद्ध है। मिशन को और सफल बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को साथ लेकर तालपत्रों के संरक्षण और संस्कृत शब्दावली तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और युवाओं को इस क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित किया जाए। पाण्डुलिपियों में छिपा ज्ञान यदि तकनीक के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध होगा तो यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ज्ञान परम्परा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। उक्त कार्यशाला में संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली से संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह , आयुक्त पर्यटन विभागमती रुक्मणी रियार, शासनउप सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, अनुपम कायल, निदेशक राजस्थान संस्कृत अकादमी, डॉ. लतामाली, सयुंक्त निदेशक, पुरातत्व संग्रहालय विभाग,मती कृष्णकांता शर्मा, प्रबंधक रविन्द्र मंच, कविता गोदारा, सहायक नोडल अधिकारी ज्ञानभारतम, रजनीश हर्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञानभारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने राजस्थान का प्रजेंटेशन दिया और सभी राज्य से आये हुए अधिकारीगणों को अवगत कराया कि राजस्थान किस प्रकार इस मिशन में रोल मॉडल बनकर उभरा है।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने पुलिसिंग में संवेदनशील व्यवहार, तकनीक के उपयोग और जनसेवा को बताया प्रभावी पुलिसिंग की आधारशिला

भोपाल  पुलिस मुख्यालय के कांफ्रेंस हॉल में उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भेंट कर पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराध नियंत्रण, नक्सल समस्या के समाधान तथा कानून-व्यवस्था एवं प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षुओं से संवाद किया।डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक  के.एफ. रुस्तमजी के योगदान को स्मरण करते हुए उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने चंबल क्षेत्र में डकैती की समस्या तथा उसे समाप्त करने के लिए किए गए पुलिस प्रयासों की जानकारी भी प्रशिक्षुओं से साझा की। नक्सल समस्या से निपटने से लेकर कानून-व्यवस्था प्रबंधन तक दी जानकारी डीजीपी  मकवाणा ने बताया कि मध्यप्रदेश ने नक्सल समस्या के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए अपनाई गई पुलिसिंग और रणनीति के बारे में प्रशिक्षुओं को जानकारी दी। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिसिंग तथा संवेदनशील परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया।उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लिए प्रशिक्षण एवं अधोसंरचना से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ई-समन जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं और पुलिसिंग को आधुनिक एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साइबर अपराध और नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियानों से कराया परिचित डीजीपी ने बताया कि नशा मुक्त भारत-2029 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत विभिन्न अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं संवाद को और मजबूत करना है। तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को बनाया जा रहा आधुनिक डीजीपी  मकवाणा ने पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि डायल-112 एवं एफआरवी व्यवस्था, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सहित विभिन्न तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस के माध्यम से पुलिस कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं ईएचआरएमएस में लगभग एक लाख पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा चुका है।उन्होंने पुलिस बल की कार्यक्षमता और कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि तनाव प्रबंधन के लिए पिछले वर्ष हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू किया गया है और इसके माध्यम से पुलिसकर्मियों के स्ट्रेस मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है। पुलिस अधिकारी संवेदनशील रहें, जनता की जरूरत के समय मदद करें : डीजीपी डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी का व्यवहार अच्छा और संवेदनशील होना चाहिए। जनता को जब पुलिस से मदद की आवश्यकता हो, तब उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।  कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विनीत कपूर, पीएसओ टू डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को डीजीपी  कैलाश मकवाणा के कार्यों एवं पुलिस सेवा के अनुभवों से परिचित कराया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक  रामजी वास्तव ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस की मूलभूत जानकारी एवं पुलिस व्यवस्था से परिचित कराया।  प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ जागरूकता अभियान तथा ‘सेफ क्लिक’ साइबर जागरूकता अभियान पर आधारित वीडियो प्रस्तुतियां दिखाई गईं। कार्यक्रम के दौरान उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण एवं भ्रमण के अनुभव भी साझा किए और मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एवं पुलिसिंग के विभिन्न नवाचारों के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  एन.बी. वायंगणकर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष अग्रवाल, एस.ओ. टू डीजीपी  मलय जैन एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंकित सोनी उपस्थित रहें। 

LPU में बढ़ी सुरक्षा, वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने संभाला मोर्चा; DGP की चेतावनी

जालंधर. फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में रातभर हुए हंगामे के बाद सोमवार सुबह पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली। कैंपस में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। डीजीपी गौरव यादव, स्पेशल डीजीपी प्रवीण कुमार सिन्हा और डीआइजी नवीन सिंगला समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन भी कैंपस में तैनात की गई। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम की जांच की जा रही है और जो भी व्यक्ति हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पंजाब के DGP गौरव यादव ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) कैंपस में हुए घटनाक्रम को लेकर बयान दिया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने बताया कि 26-27 सितंबर की दरम्यानी रात कैंपस के अंदर कुछ घटनाओं को लेकर देर रात अफवाहें फैलने लगी थीं. इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में बाहर आ गये. इस दौरान तोड़फोड़ की कुछ घटनाएं हुईं और गेट के एक हिस्से में आग भी लगा दी गयी. रात 1:30 बजे मौके पर पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी DGP के मुताबिक, पुलिस को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, करीब रात 1:30 बजे जालंधर रेंज के डीआइजी नवीन सिंगला, कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा, होशियारपुर के एसएसपी, जालंधर ग्रामीण के एसएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गये. पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित किया और छात्रों के साथ बातचीत शुरू की. छात्रों की शिकायतों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन से कराया संवाद गौरव यादव ने कहा कि छात्रों की यूनिवर्सिटी प्रशासन से कुछ शिकायतें थीं. पुलिस ने छात्रों और प्रशासन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत करायी. अधिकारियों ने पूरे दिन छात्रों के साथ संवाद जारी रखा, ताकि विवाद को बातचीत के जरिये सुलझाया जा सके. पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग नहीं करने का लिया फैसला DGP गौरव यादव ने कहा कि स्थिति में कुछ उकसावे और कार्रवाई की घटनाएं हुईं, लेकिन पुलिस ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का सचेत फैसला लिया. उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतें यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़ी थीं, इसलिए पुलिस ने बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया. महिला स्टाफ की मांग समेत कई मुद्दों पर बनी सहमति पंजाब DGP गौरव यादव के अनुसार, छात्रों की प्रमुख मांगों में लड़कियों के हॉस्टल में केवल महिला स्टाफ की तैनाती शामिल थी. इसके अलावा भी कुछ अन्य मुद्दे थे. पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर शिकायतों के समाधान की दिशा में काम किया. उन्होंने कहा कि बुधवार को इस मुद्दे को सुलझा लिया गया और बैठकें भी हुईं. एक और बैठक आज होने की बात कही गयी है. हिंसा की घटना पर FIR, SIT करेगी विस्तृत जांच DGP गौरव यादव ने बताया कि घटना के संबंध में एफआइआर दर्ज कर ली गयी है. मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गयी है. टीम पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी और सभी पहलुओं की पड़ताल की जायेगी. पुलिस वाहन पर पथराव का भी जिक्र DGP गौरव यादव ने कहा कि पिछले रात एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. कुछ तत्वों ने कथित उकसावे के बीच माहौल खराब करने की कोशिश की और पुलिस के वाहन पर पथराव किया. पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की पहचान कर रही है. CCTV फुटेज से होगी उपद्रवियों की पहचान पंजाब पुलिस प्रमुख ने कहा कि हिंसा और कानून हाथ में लेने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि CCTV फुटेज समेत तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों से घटनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है. जांच के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल स्थित परिसर में 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है प्रयोगशाला

भोपाल प्रदेशवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। यदि आपको घर में आने वाले दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ताओं के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनवाई गई है। शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है। 12.40 करोड़ की लागत, NABL और FSSAI से मिलेगी मान्यता यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' (NPDD) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी। 100 से अधिक मानकों पर होगी जांच प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आमजन और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस सुविधा का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आएगा, शुद्धता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।  

संकट की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री  साय ने डोंगाघाट में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावितों से बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, मकानों एवं घरेलू सामान को हुए नुकसान तथा वर्तमान में उपलब्ध कराई जा रही राहत के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचाई जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए राहत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इंद्रावती के जलस्तर और प्रभावित इलाकों का किया अवलोकन मुख्यमंत्री  साय ने इंद्रावती पुल पहुंचकर नदी के जलस्तर तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जिले में बारिश एवं बाढ़ की स्थिति, प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलस्तर में बदलाव और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहनी चाहिए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। जलस्रोतों की सफाई एवं आवश्यक उपचार के साथ जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा जाए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविर लगाने, दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता रखने और बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्य केवल बाढ़ का पानी उतरने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को सामान्य बनाने तक आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से जारी रहें। मकान, फसल और पशुधन की क्षति का शीघ्र हो आकलन मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और अन्य संपत्तियों का संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ सर्वे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर संबंधित परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुसार सहायता शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। कोई भी पात्र प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत शिविरों और प्रभावित बस्तियों में नियमित रूप से पहुंचकर लोगों की जरूरतों की जानकारी लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राहत कार्यों में मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक आवश्यक मदद समय पर पहुंचे। हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और उनके जीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। इस अवसर पर महापौर  संजय पाण्डेय, नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन,   कमलचंद्र भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह, आईजी  बी.एन. मीणा, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

PM आवास की मांग पर शिवपुरी में हंगामा, मासूम संग पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार; अफसरों के आश्वासन से माने

 शिवपुरी शहर के मनीयर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज एक युवक अपने पूरे परिवार और नौ माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर 70 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा। अंत में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने मौके पर पहुंचकर उसे पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वह नीचे उतरा। क्या है पूरा मामला? मनीयर में सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर पवन जाटव पिछले 25-30 साल से झोपड़ी बनाकर रह रहा है। नगर पालिका द्वारा सड़क बनवाने के बाद उसकी झोपड़ी सड़क से नीची हो गई, जिसमें बारिश का पानी भरने लगा। परेशान होकर पवन ने उसी जगह बुनियाद भरकर दो पक्के कमरे बनाना शुरू कर दिया। इस पर पड़ोस में रहने वाले महेश धाकड़, बाबू धाकड़ सहित अन्य लोगों ने कोतवाली में शिकायत कर दी कि सरकारी जमीन पर जबरन पक्का कब्जा किया जा रहा है। शिकायत पर पुलिस पवन के घर पहुंची और जमीन के दस्तावेज मांगे। दस्तावेज न होने पर पुलिस पूछताछ के लिए उसके मामा रामभजन को थाने ले गई। इससे आक्रोशित होकर पवन अपनी मां रामश्री जाटव, पत्नी सपना जाटव और नौ माह के बेटे इशांक को लेकर मनीयर टोल टैक्स के पास बनी जलावर्धन योजना की टंकी पर चढ़ गया। फोन पर चली दो घंटे बात, फिर माना प्रशासन का आश्वासन सूचना मिलते ही तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और टीआई रोहित दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नीचे से फोन पर पवन को समझाने का दौर शुरू हुआ। पवन का एक ही कहना था कि, "मैं 30 साल से यहीं रह रहा हूं, मुझे यहीं घर बनाने दो, नहीं तो न्याय नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा।" करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे अवैध कब्जे की जगह वैध मकान दिलाया जाएगा, तब कहीं जाकर वह नीचे उतरकर आया।   पीएम आवास की कॉलोनी में करवाएंगे आवेदन तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, "पवन जाटव सर्वे नंबर 454 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमित है। उसे समझाया गया है कि वह जितना पैसा यहां कच्चे-पक्के निर्माण में लगाएगा, उतने में मेडिकल कॉलेज के पीछे बनी पीएम आवास कॉलोनी में उसे पात्रता के अनुसार पक्का मकान मिल जाएगा। वह बीपीएल श्रेणी का है, उसके पास रहने की व्यवस्था नहीं है। कल उसका आवेदन करवा रहे हैं।" टंकियां क्यों बनीं आत्मघाती अड्डा? यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में जलावर्धन योजना के तहत 8 से 10 बड़ी पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन एक पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किसी भी टंकी की सीढ़ियों पर लोहे का गेट या ताला नहीं है। चेतावनी बोर्ड, सीसीटीवी कैमरा और चौकीदार का कोई अता-पता नहीं। इसी का परिणाम है कि, शाम होते ही इन टंकियों पर नशेड़ी और आवारा तत्वों की महफिल सजती है। जब जिसके मन में आता है, वह टंकी पर चढ़कर प्रशासन को ब्लैकमेल करता है। नगर पालिका की जिम्मेदारी क्या है? मध्यप्रदेश म्युनिसिपल एक्ट और जल प्रदाय मैनुअल साफ कहता है कि, हर जल संरचना पर लोहे का गेट, ताला, खतरे का बोर्ड, सीसीटीवी और 24 घंटे कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पानी को दूषित होने से बचाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है। लापरवाही पर सीएमओ और जल शाखा प्रभारी पर आपराधिक मामला तक दर्ज हो सकता है। शिवपुरी नपा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि, Singapore-India Growth Forum 2026 में CM साय करेंगे प्रतिनिधित्व

रायपुर. विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर दौरे पर रहेंगे। जहां वे छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 5 अक्टूबर को होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में शामिल होंगे। यह फोरम सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) की ओर से आयोजित किया जा रहा है और इसका यह पहला संस्करण है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत के प्रमुख, निवेशक और उद्यमी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं और निवेश अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। एमएसएमई और स्टार्टअप की संभावनाएं रखेंगे मुख्यमंत्री साय फोरम में छत्तीसगढ़ में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके जरिए राज्य की उपलब्धियों और कारोबारी अवसरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के लिए नए सहयोग के अवसर तलाशने का माध्यम बनेगी। ये अधिकारी भी रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार और मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।