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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसल,आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत खारिज

 जयपुर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. सरकार ने साफ कहा कि आरोपी का आचरण बेहद गंभीर है और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने राज्य के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राहत देने से मना कर दिया. डमी अभ्यर्थी बनकर दी कई परीक्षाएं जांच में सामने आया कि हनुमाना राम ने तीन लोगों के लिए डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दी. इसके अलावा उसने कई अन्य परीक्षाओं में भी प्रॉक्सी के तौर पर हिस्सा लिया. इनमें पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 और पटवार भर्ती परीक्षा 2021 शामिल हैं. आरोपी हनुमाना राम पढ़ाई में तेज माना जाता था. उसने आरएएस 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी लाई थी. इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. जांच में सामने आई गहरी संलिप्तता शुरुआती एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं था लेकिन जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई. इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा था और लगातार ऐसे अपराधों में शामिल रहा. अदालत ने बताए गंभीर प्रभाव राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे कृत्य से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है. अगर जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ही ऐसा करें तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है. साथ ही राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि याचिकाकर्ता आरएएस अधिकारी नियुक्त हुआ है तो वह राज्य को बेच देता. आगे अदालत ने कहा कि आरोपी का व्यवहार एक बार की गलती नहीं बल्कि लगातार किया गया अपराध है. ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है.

हर छात्र बनेगा बच्चों के अधिकारों का प्रहरी – डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर द्वारा “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। “रक्षक” पाठ्यक्रम एक विशेष शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह एमओयू राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और सुरक्षा संबंधी विषयों में प्रशिक्षित किया जा सके। इसी क्रम में आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे एवं आयोग की डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद द्वारा उपस्थित कुलपतियों, कुलसचिवों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। जिसके पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हम सभी का सामूहिक प्रयास है कि इस पहल को अंतिम स्वरूप देकर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित एवं जागरूक बन सके। इस बैठक में राज्य के तीन शासकीय और तीन प्राइवेट विश्वविद्याल शामिल हुए जिसमें पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी एवं अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और अधिकृत प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षक पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार किए गए उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना रहा, ताकि पाठ्यक्रम को आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को अपने सुझाव एवं विचार साझा करने हेतु आमंत्रित किया गया तथा पाठ्यक्रम का गहन मूल्यांकन किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पाठ्यक्रम की उपयोगिता, संरचना एवं व्यवहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।  बैठक में उपस्थित सभी कुलपतियों, कुलसचिव, एवं प्रतिनिधि प्रोफेसर्स ने आयोग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया और इसके सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम को शीघ्र ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग बनेगा हाईटेक: सीएम डॉ. यादव करेंगे 972.16 करोड़ के प्रोजेक्ट की शुरुआत

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 16 अप्रैल को सिवनी मालवा में नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग (राज्य राजमार्ग-67) का इंटरमीडिएट से 2-लेन पक्के शोल्डर सहित हाइब्रिड एन्यूटी  मॉडल (एच ए एम) का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य का भूमि-पूजन करेंगे। नर्मदापुरम से टिमरनी मार्ग की लंबाई 72.18 किलोमीटर है तथा इसकी लागत 972,16 करोड़ रुपए है। निर्माण कार्य एमपीआरडीसी द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन कर रोड शो करेंगे। रोड शो रेंज ऑफिस चौराहा, कल्लू चौक, नर्मदा मंदिर चौक, सराफा बाजार, गांधी चौक, जय स्तंभ चौक होते हुए पुराना बस स्टैंड पर समाप्त होगा। कृषि उपज मंडी सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 106,34 करोड़ के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 48.65 करोड़ के 45 तथा 57.69 करोड़ के 51 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी करेंगे।

पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से शिक्षा के अधिकार को मिला नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो। पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।

10वीं 12वीं का रिजल्ट घोषित बच्चों ने मारी बाजी

बड़वानी. आज घोषित माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षा परिणाम में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1, बड़वानी ने एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी परंपरा को कायम रखा है। सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 100% रहा। कुल 190 छात्र-छात्राओं में से 189 छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में तथा 1 छात्र द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ। इसी प्रकार कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 93% रहा। कक्षा 12वीं में 189 छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में तथा 4 छात्र-छात्राएं द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इस वर्ष 115 छात्र-छात्राओं ने 75% से अधिक अंक प्राप्त किए, जिससे वे शासन की लैपटॉप योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र बने हैं। संस्था के विज्ञान संकाय के छात्र आर्यन मनोहर कानासे ने शासकीय विद्यालयों में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए 92.2 प्रतिशत अंक अर्जित किए, जो विद्यालय के लिए गौरव का विषय है। संस्था के प्राचार्य अनिल मिश्रा ने सभी सफल छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की लगन, अनुशासन एवं शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन का परिणाम है। विद्यालय परिवार ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार श्रेष्ठ परिणाम देने का संकल्प लिया है।

सियासी बयानबाजी तेज: अनिल विज ने राहुल गांधी पर किया तीखा पलटवार

अंबाला. हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि राहुल गांधी कई चुनाव हार चुके हैं। अगर राहुल गांधी बब्बर शेर होते तो ढेर न होते। इस दौरान नगर निगम चुनावों को लेकर कहा कि विपक्षी पार्टियां केवल चुनावों के समय ही सक्रिय होती हैं, जबकि बीजेपी कार्यकर्ता 365 दिन जनता के बीच रहता है। वही परिसीमन के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से डर नहीं लगता, बल्कि मोदी जी को कांग्रेस से डर लगता है क्योंकि बब्बर शेर उन्हें पकड़ लेगा और कार्रवाई होगी, जिस पर तंज कसते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि यही कारण है कि राहुल गांधी जी हर प्रदेश में ढेर हो रहे हैं, राहुल गांधी कई चुनाव हार चुके हैं। विज बोले कि अगर राहुल गांधी बब्बर शेर होते तो ढेर न होते। नगर निगम चुनावों की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल विज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहती है। विज ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां केवल चुनावों के समय ही सक्रिय होती हैं, जबकि बीजेपी का कार्यकर्ता 365 दिन जनता के बीच रहता है। अनिल विज ने दावा किया कि जिस तरह प्रदेश की जनता ने विधानसभा और पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में पीएम मोदी की नीतियों और राज्य सरकार के विकास कार्यों पर मुहर लगाई थी, उसी तरह आगामी नगर निगम चुनावों में भी कमल खिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंबाला समेत प्रदेश के सभी नगर निगमों में विकास कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा और जनता विपक्ष के झूठे वादों में आने वाली नहीं है। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विज ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर क्षेत्रों का संतुलन बनाना है, ताकि हर नागरिक को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। अनिल विज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे निष्पक्ष तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि परिसीमन से लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी तथा विकास कार्यों में भी संतुलन आएगा। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के विभागो में तबादलों को लेकर एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस पत्र में विभाग के भीतर हुए सीधे तबादलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। अब इस पूरे मामले पर खुद अनिल विज ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम के मुताबिक, विभाग में किसी भी स्तर पर होने वाले तबादले विभागीय मंत्री के संज्ञान में होने चाहिए और उनके कार्यालय के माध्यम से ही आगे बढ़ने चाहिए। अनिल विज ने कहा बताया कि उन्हें कुछ ऐसी शिकायतें मिली थीं जहाँ नियमों को ताक पर रखकर सीधे तबादले किए गए थे। इसी को देखते हुए उन्होंने लिखित निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में सभी प्रक्रियाएं तय सिस्टम के तहत ही हों। विज ने साफ कर दिया कि व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

क्रेडा विभाग की योजनाओं से दो वर्षों में आमजन के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

रायपुर.  अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में क्रेडा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आमजन के जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे विकास की गति को नई दिशा मिली है। विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप अब लोगों को बुनियादी सुविधाएं अधिक सरलता और सहजता से उपलब्ध हो रही हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल और सिंचाई व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिना बिजली बिल के निरंतर रोशनी सुनिश्चित हो रही है। इससे न केवल लोगों का दैनिक जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है, बल्कि उनके जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 114 सोलर ड्यूल पंप से पेयजल और सिंचाई सुविधा सुदृढ़ ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  क्रेडा विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में जल जीवन मिशन अंतर्गत जशपुर जिले में 114 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए हैं। इनसे पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई के लिए सस्ती एवं सुलभ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता कम हुई है, जिससे उनकी लागत में कमी आई है और आय में वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसान वर्षभर खेती कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। वहीं घर के समीप जल उपलब्ध होने से महिलाओं को दूर से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है।       80 सोलर हाई मास्ट से रोशन हुए गांव और शहर जशपुर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर हाई मास्ट योजना के तहत ग्रामों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौक-चौराहों पर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में 80 सोलर हाई मास्ट लगाए जा चुके हैं। इन सौर ऊर्जा आधारित लाइटों से रात्रिकालीन आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। साथ ही, दुर्घटनाओं और अपराधों में भी कमी आई है। जहां बिजली आपूर्ति सीमित या बाधित रहती है वहां भी ये हाई मास्ट निर्बाध रूप से रोशनी प्रदान कर रहे हैं। 800 सोलर पंप से किसानों को मिली बड़ी राहत कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों में  800 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिनसे सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। साथ ही कृषि उत्पादन में वृद्धि, भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन, तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

कैब ड्राइवरों का सरकार से आग्रह: एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 और फेयर नोटिफिकेशन जल्द लागू हो

चंडीगढ़. चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के हजारों कैब और ऑटो ड्राइवरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ट्राइसिटी ड्राइवर यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 25 अप्रैल तक एग्रीगेटर पॉलिसी रूल्स-2025 और किराया नोटिफिकेशन को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो वे चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के बाहर बड़ा आंदोलन करेंगे। यूनियन के प्रधान अमनदीप सिंह ने बताया कि ड्राइवर पिछले कई महीनों से 7 जुलाई 2025 को जारी किराया दरों के नोटिफिकेशन को लागू करवाने के लिए प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन ओला, उबर, रैपिडो और इनड्राइवर जैसी कंपनियां नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से काम कर रही हैं। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से की अपील ड्राइवरों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उनमें भारी रोष और निराशा है। उनका कहना है कि लगातार आर्थिक शोषण के कारण परिवार का पालन-पोषण, रोजमर्रा के खर्च और बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो गया है। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से अपील की है कि वह तुरंत ड्राइवरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान करें, ताकि उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हजारों ड्राइवर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

कॉलेजों में शुरू होगी ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पढ़ाई, बाल सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राज्य में “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। इसी क्रम में बुधवार को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप देने हेतु विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद आयोग के सचिव प्रतीक खरे और डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हमारा प्रयास है कि इसे प्रभावी रूप से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाया जाए।” बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों—पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी—के कुलपति, कुलसचिव, प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोग की सराहना की और इसके सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम जल्द ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

कोरबा जिले के तीन उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण में अनियमितताएं पाए जाने पर एफआईआर दर्ज

रायपुर.  कोबरा जिले में राशन वितरण कार्य में अनियमितता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए कई उचित मूल्य दुकानों के संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। शिकायतों पर खाद्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। जांच में ग्राम पंचायत कोरकोमा, खोड्डल एवं पटपरा की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जिन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में अनियमितताएं पाई गई है उन संचालकों के विरूद्ध प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज कराया गया है।  कोरकोमा स्थित दुकान में संचालक संस्था द्वारा लगभग 197.45 क्विंटल चावल एवं 22.82 क्विंटल नमक का व्यपवर्तन किया जाना सामने आया है। साथ ही लगभग 435 राशन कार्डधारियों को निर्धारित अवधि में राशन वितरण नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी प्रकार खोड्डल की उचित मूल्य दुकान में 334.98 क्विंटल चावल एवं 6 क्विंटल शक्कर के व्यपवर्तन का मामला सामने आया है। यहां दुकान का नियमित संचालन नहीं होने एवं सीमित दिनों में ही वितरण किए जाने की शिकायतें भी सही पाई गईं। इस पर छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं पटपरा (विकासखंड पाली) की दुकान में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 422 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण होने के बावजूद उन्हें राशन वितरित नहीं किया गया। इस प्रकरण में संचालकों के विरुद्ध थाना पाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है । विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2026 में भंडारण में विलंब एवं एई-पीडीएस सर्वर मेंटेनेंस के कारण कुछ स्थानों पर समय पर वितरण प्रभावित हुआ। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवितरित राशन के वितरण के लिए अप्रैल माह में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं तथा बैकलॉग वितरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।