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नमक वाला पानी पीने के 6 चौंकाने वाले फायदे, जानें कैसे बदल सकता है सेहत

सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि जान है तो जहान है। अगर आपने स्वस्थ जिंदगी जीनी है तो रोज सुबह काला नमक और पानी मिलाकर पीना शुरू कर दें। इसे सोल वॉटर कहते हैं, जिससे आपकी ब्लड शुगर, ब्लाड प्रेशर, ऊर्जा में सुधार, मोटापा और अन्य  तरह की बीमारियां झट से ठीक हो जाएंगी। लेकिन ध्यान रहे कि सादे नमक का प्रयोग नहीं करना है। यह लाभ नहीं करेगा। काले नमक में 80 खनिज और जीवन के लिए वे सभी आवश्यक प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो जरूरी हैं। नमक वाला पानी बनाने की विधि-हलके गरम पानी में एक तिहाई छोटा चम्मीच काला नमक मिलाइए। इस गिलास को प्लानस्ट्कि के ढक्कयन से ढंक दीजिए। फिर गिलास को हिलाते हुए नमक मिलाइए और 24 घंटे के लिए छोड़ दीजिए। जब आपको लगे कि पानी में नमक अब नहीं घुल रहा है तो, समझिए कि आपका घोल पीने के लिए तैयार हो गया है। पाचन दुरुस्तव करें: नमक वाला पानी मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिए करने में मदद करता है। अच्छें पाचन के लिए यह पहला कदम बहुत जरूरी है। पेट के अंदर प्राकृतिक नमक, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने वाले इंजाइम को उत्तेेजित करने में मदद करता है। इससे खाया गया भोजन टूट कर आराम से पच जाता है। नींद: नमक, कोर्टिसोल और एड्रनलाईन, जैसे दो खतरनाक सट्रेस हार्मोन को कम करता है इसलिए इससे रात को अच्छीम नींद लाने में मदद मिलती है। शरीर करे डिटॉक्स:  नमक में काफी खनिज होने की वजह से यह एंटीबैक्टींरियल का काम भी करता है। इसकी वजह से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीयरिया का नाश होता है। हड्डी की मजबूती: कई लोगों को नहीं पता कि हमारा शरीर हमारी हड्डियों से कैल्शिलयम और अन्यभ खनिज खींचता है। इससे हमारी हड्डियों में कमजोरी आ जाती है, इसलिए नमक वाला पानी उस मिनरल लॉस की पूर्ती करता है और हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। त्वचा की समस्या: नमक में मौजूद क्रोमियम और सल्फनर त्वडचा को साफ और कोमल बनती है। इसके अलावा नमक वाला पानी पीने से एक्जिममा और रैश की समस्या् दूर होती है। मोटापा: यह पाचन को दुरुस्तद कर के शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कम करने में मदद मिलती है।  

इन ट्रिक्स को रोज अपनाएं और बनें खूबसूरत

  हर किसी लड़की को खूबसूरत दिखना अच्छां लगता है। इसके लिए वो ना जानें कितनी ट्रिक्सा को अपनाती है लेकिन कई बार उसे असफलता ही हाथ लगती है। ये पांच ट्रिक्स् अपनाकर दिखें और खूबसूरत… हो सकता है आप अपना कंसीलर डॉट्स बनाकर यूज करते हैं लेकिन सबसे अच्छा तरीका है कि आप आंखों के नीचे एक ट्राइएंगल फॉर्म कर लें। इसे अपनी लैशलाईन के ठीक नीचे लगाएं। अब साफ फिंगर से या मेकअप ब्रश से इसे ब्लेंड कर लें। ऐसा करने से आपके चेहरे को एक लिफ्टेड लुक मिलेगा। शियर या लाईट आइशैडो आपकी आंखों में ज्यादा कलरफुल नजर आते हैं। एक वाईट आइलाइनर पेंसिल लें और अपनी लिड पर लगाएं। आपके चेहरे पर ये कलर अलग से ही नजर आएगा और बहुत खूबसूरत भी लगेगा। सुपर ईजी स्मोकी आंखों के लिए आय पेंसिल से आंखों के बाहरी कॉर्नर पर एक पाउंड सिंबल बनाएं। अब एक स्मजिंग टूल से इसे दूसरे एंड पर ब्लेंड करें। अपने लिपस्टिक के ही शेड का लिप लाइनर लें और क्युपिड्स बो पर एक्स का निशान बना लें। अब नॉर्मल तरह से अपनी लिपस्टिक लगाएं। ये परफेक्ट पाउट पाने का सबसे आसान तरीका है। मस्कारा कोट लगाने से पहले ट्रांसलूसेंट प्रेस पाउडर पलकों पर लगाएं। ऐसा करने से मस्कारा अच्छे से चिपक जाएगा।  

सस्ते में शानदार: लावा का नया 5G फोन, बड़ा स्क्रीन और पावरफुल बैटरी केवल ₹6749

नई दिल्ली भारतीय देसी ब्रैंड लावा ने एक नया स्‍मार्टफोन Lava Bold N1 5G लॉन्‍च किया है। ऑफर्स के साथ इस फोन को सिर्फ 6749 रुपये में खरीदा जा सकता है। नए लावा फोन में 4 जीबी रैम दी गई है। फोन में 5 हजार एमएएच की बैटरी है। यह फोन बड़े डिस्‍प्‍ले के साथ आता है और यूनिसॉक का प्रोसेसर इसमें दिया गया है। कंपनी का कहना है कि लावा का नया स्‍मार्टफोन देश के सभी 5जी नेटवर्क के साथ काम करेगा और यूजर्स को सुपरफास्‍ट इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी मिलेगी। कंपनी का कहना है कि इस फोन के साथ 30एफपीएस पर 4K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकेगी। Lava Bold N1 5G के भारत में प्राइस Lava Bold N1 5G स्‍मार्टफोन को शैंपेन गोल्‍ड, रॉयल ब्‍लू कलर्स में लाया गया है। इसकी सेल, एमेजॉन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल में अर्ली डील्‍स के दौरान होगी। फोन के 4GB + 64GB मॉडल के दाम 7499 रुपये हैं। इसमें 750 रुपये का बैंक डिस्‍काउंट लगा दिया जाए तो कीमत 6749 रुपये हो जाती है। यह डिस्‍काउंट एमेजॉन सेल का हिस्‍सा होगा। इसी तरह से 4GB + 128GB मॉडल जिसकी कीमत 7999 रुपये है, उसे डिस्‍काउंट के बाद 7249 रुपये में ल‍िया जा सकेगा। Lava Bold N1 5G के फीचर्स , स्‍पेसिफ‍िकेशंस Lava Bold N1 5G में 6.75 इंच का एचडी प्‍लस नॉच डिस्‍प्‍ले दिया गया है। डिस्‍प्‍ले में 90Hz का रिफ्रेश रेट मिल जाता है। परफॉर्मेंस की बात करें तो फोन में UNISOC T765 ऑक्‍टा कोर चिपसेट है। उसके साथ 4 जीबी रैम मिलती है और अधिकतम स्‍टोरेज 128 जीबी दिया गया है। Lava Bold N1 5G में 13 मेगापिक्‍सल का एआई डुअल कैमरा दिया गया है। इसकी मदद से 4K रिकॉर्डिंग 30fps पर की जा सकती है। फोन में सेल्‍फी के लिए 5 मेगापिक्‍सल का फ्रंट कैमरा मिल जाता है। कंपनी ने एसडी कार्ड लगाने का स्‍लॉट भी इसमें दिया है, जिसकी मदद से स्‍टोरेज को 1 टीबी तक एक्‍सपेंड क‍िया जा सकता है। Lava Bold N1 5G में बैटरी और ओएस Lava Bold N1 5G में 5 हजार एमएएच की बैटरी दी गई है। यह टाइप-सी पोर्ट के साथ आती है और 18 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। नया लावा फोन लेटेस्‍ट एंड्रॉयड 15 पर चलता है और इसमें लगने वाले दोनों सिम 5जी नेटवर्क को सपोर्ट करते हैं। इसके अलावा Wi-Fi, ब्‍लूटूथ 4.2, ओटीजी सपोर्ट दिया गया है। Lava Bold N1 5G को आईपी54 रेटिंग मिली है, जो इस फोन को धूल और पानी से सुरक्षा दे सकती है। फोन में साइड फ‍िंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक की सुविधा भी दी गई है। कंपनी फ्री होम सर्विस के साथ 1 साल की वॉरंटी फोन पर दे रही है। साथ में 2 एंड्रॉयड अपग्रेड और 3 साल के सिक्‍योरिटी अपडेट्स दिए जा रहे हैं।

रोज सुबह सिर्फ 5 मिनट, पेट हो जाए पतला और हेल्थ में बढ़ेगा सुधार—Gym की जरूरत नहीं

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण मोटापे की समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। वजन कम करने के लिए सुबह की आदतों में बदलाव करना जरूरी है। इससे आपका द‍िन भी अच्‍छा जाएगा और वजन कम करना भी आसान हो जाएगा। आपको ज‍िम जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। लाइफस्‍टाइल डेस्‍क‍, नई द‍िल्‍ली। आजकल की भागदौड़ भरी ज‍िंदगी में लाेग खराब खानपान और अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल को फॉलो कर रहे हैं। अल्‍ट्रा प्रॉसेस्‍ड फूड को तवज्‍जो दे रहे हैं। ये आसानी से बनकर तैयार भी हो जाता है, साथ ही स्‍वाद से भी भरपूर होता है। लेक‍िन ये हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इससे मोटापा तो बढ़ ही रहा है, साथ ही डायब‍िटीज और द‍िल की बीमार‍ियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। मोटापे की बात करें तो ज‍ितनी तेजी से वजन बढ़ता है, इसे कम करना उतना ही मुश्किल होता है। हालांक‍ि, वजन कम करने के ल‍िए लोग ज‍िम जाकर घंटों पसीना बहाते हैं। साथ ही कई तरह की डाइट भी फॉलो करते हैं। इसके लि‍ए आपको ज्‍यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। लेक‍िन सुबह की आदतों में अगर थोड़ा बदलाव कर ल‍िया जाए तो वजन कम करना आसान हो जाता है। आज का हमारा लेख भी इसी व‍िषय पर है। हम आपको सुबह‍ की कुछ अच्‍छी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, ज‍िसे अपनाने पर मेटाबॉल‍िज्‍म तो बूस्‍ट होगा ही, वजन भी तेजी से कम होगा। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से – सुबह जल्‍दी उठें अगर आपको अपना वजन तेजी से कम करना है तो सुबह जल्‍दी उठना होगा। इससे आपको एक्सरसाइज करने और हेल्दी नाश्ता करने का पूरा समय म‍िलेगा। रात को जल्‍दी सोएंगे और सुबह जल्‍दी उठेंगे तो इससे आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म भी तेज होता है। गुनगुना पानी प‍िएं सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी पि‍एं। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्‍ट होता है। फैट बर्निंग प्रोसेस भी तेज होता है। आप चाहें तो नींबू-पानी, जीरा पानी या अदरक-शहद वाला पानी भी पी सकते हैं। इससे डाइजेशन बेहतर होता है। मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पेट की सूजन भी कम होती है। वजन कम करने के ल‍िए एक्‍सरसाइज करना बहुत जरूरी है। सुबह के समय योग या कार्डियो एक्सरसाइज करेंगे तो इससे तेजी से कैलोरी बर्न होती है। साथ ही मसल्‍स भी स्‍ट्रॉन्‍ग बनते हैं। इसे आपको न‍ियम‍ित रूप से करना है। हेल्‍दी नाश्‍ता करें आपको हमेशा पोषण से भरपूर नाश्‍ता करना चाह‍िए। अगर आप नाश्‍ता स्‍क‍िप कर देते हैं तो इससे मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। इस कारण वजन कम करना मुश्क‍िल हो जाता है। प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर नाश्ता मेटाबॉलिज्म को बूस्‍ट करता है। साथ ही ये ओवरईट‍िंग से भी बचाता है। अच्छी नींद लें अगर आप अच्‍छी नींद लेते हैं और स्‍ट्रेस नहीं लेते हें तो इससे भी वजन कम करना आसान हो जाता है। दरअसल, नींद न लेने से और तनाव में रहने से हमारे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है। इससे फैट जमने लगते हैं। रोजाना आठ घंटे की अच्‍छी नींद लेना जरूरी है।  

हेल्थ अलर्ट: दो शहरों में ब्रेस्ट कैंसर के केस सबसे ज्यादा, पूर्वोत्तर में लंग कैंसर बढ़ा

 नई दिल्ली हाल ही में एक रिसर्च स्टडी में यह दावा किया गया है कि देश के दक्षिणी राज्यों में कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। JAMA ओपन नेटवर्क में प्रकाशित राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तो देश भर में स्तन कैंसर की राजधानी के रूप में उभरा है, जहाँ प्रति 100,000 महिलाओं में 54 इस असाध्य रोग के दंश से पीड़ित हैं जो देशभर में सर्वोच्च घटना दर है, जबकि बेंगलुरु का स्थान दूसरे नंबर पर आता है, जहां एक लाख महिलाओं में औसतन 46.7 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मार झेल रही हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के महानगर न केवल ओवरऑल कैंसर संकट का सामना कर रहे हैं, बल्कि वहां विशिष्ट प्रकार का कैंसर महामारी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में इस पर कंट्रोल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। स्तन कैंसर के मामले में टॉप पर साउथ के शहर वर्ष 2015 से 2019 के दौरान देशभर में 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों (PBCR) को कवर करने वाले इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्तन कैंसर दर वाले शीर्ष छह क्षेत्रों में से चार दक्षिण भारत के हैं। इनमें चेन्नई क्षेत्र में प्रति 100,000 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर 45.4 है, जबकि केरल के अलाप्पुझा और तिरुवनंतपुरम में यह क्रमशः 42.2 और 40.7 है। यह पैटर्न दक्षिण भारत, विशेषकर इसके शहरी केंद्रों को भारत में स्तन कैंसर महामारी का केंद्र बनाता है। 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 238,085 महिलाओं के स्तन कैंसर से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है। रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट में इन कैंसर मामलों के बढ़ने के पीछे विशिष्ट स्थानीय कारकों की ओर भी इशारा किया गया है। लंग्स कैंसर पर क्या रिपोर्ट? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्तन कैंसर के मामले में जहां दक्षिण भारतीय शहर आगे हैं, वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में पूर्वोत्तर के राज्य आगे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मणिपुर की राजधानी आइज़ोल में प्रति 100,000 महिलाओं में 33.7 इससे ग्रसित हैं जबकि इस राज्य का औसत दर 24.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, दक्षिण भारतीय शहरों में भी लंग्स कैंसर की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती हैं, जहाँ हैदराबाद में प्रति 100,000 पर 6.8 और बेंगलुरु में प्रति 100,000 में 6.2 केस दर्ज किए गए हैं। ओरल कैंसर के मामले में कौन सा शहर आगे? पुरुष फेफड़ों के कैंसर के पैटर्न के मामले में दक्षिण भारत में केरल सबसे आगे है, जहाँ को कई जिलों में यह दर बेहद ऊँची हैं। धरती पर का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी लंग्स कैंसर के मामले में उच्चतम दर (39.5 प्रति 100,000) पर हैं, जबकि केरल के जिले उसके बाद के स्थान पर हैं। केरल के कन्नूर में यह दर 35.4, मालाबार में 32.5, कासरगोड में 26.6, अलप्पुझा में 25.3 और कोल्लम में प्रति 100,000 पर 24.2 है।ओरल कैंसर के मामलों में भी हैदराबाद, बेंगलुरु सबसे आगे है, जबकि अहमदाबाद इस मामले में सबसे ऊपर है।

सिर्फ 99 रुपये में घर के हर कोने में मिलेगा WiFi, Airtel का झकास ऑफर

नई दिल्ली एयरटेल एक ऐसा कमाल का ऑफर लेकर आई है जिसकी वजह से सिर्फ 99 रुपये में आपके घर का कोना-कोना WiFi नेटवर्क से भर जाएगा। दरअसल अगर आप भी अपने घर में WiFi का इस्तेमाल करते हैं, तो डेड जोन की समस्या से वाखिफ होंगे। घर में कुछ ऐसी जगहें होती हैं, जहां तमाम तिकड़म भिड़ाने के बावजूद WiFi का नेटवर्क नहीं पहुंचता। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ही एयरटेल Coverage+ Wi-Fi Extender सर्विस लेकर आया है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि Airtel आखिर 99 रुपये में क्या ऑफर कर रहा है और इससे आपको क्या फायदा होगा। Mesh WiFi टेक्नोलॉजी पर आधारित Airtel, Mesh टेक्नोलॉजी पर आधारित WiFi एक्सटेंडर की सर्विस ऑफर कर रहा है। इससे आपका घर एक स्मार्ट डिजिटल हब बन जाएगा। दरअसल Mesh पर आधारित एक्सटेंडर्स साधारण एक्सटेंडर की तरह काम नहीं करते। यह टेक्नोलॉजी ज्यादा एडवांस होने के साथ-साथ यूजर फ्रेंडली भी है। इससे न सिर्फ आपके इंटरनेट कनेक्शन की क्वालिटी बेहतर हो जाती है बल्कि पूरे घर में स्टेबल इंटरनेट कनेक्शन मिल पाता है। किन लोगों को फायदा? अगर आपका घर बड़ा है और एक सिंगल WiFi राउटर पूरे घर को कवर नहीं कर पाता या फिर अलग-अलग फ्लोर पर रहने की वजह से आपका WiFi कनेक्शन कमजोर पड़ जाता है, तो Airtel की नई सर्विस आपके लिए ही है। Airtel की मेश आधारित नई सर्विस में पॉड्स को इस तरह से घर में रखा जाता है कि कोई भी डेड जोन न बचे। ये पॉड्स मेन राउटर और आपस में लगातार बात करते रहते हैं। इससे एक सेल्फ हीलिंग अडैप्टिव नेटवर्क बन जाता है। यह 4,000 sq ft तक के एरिया मेंमजबूत कवरेज दे सकता है। इसका प्रीमियम वर्जन और भी बड़ी प्रॉपर्टीज के लिए बनाया गया है। कीमत सिर्फ 99 रुपये Airtel इस प्रीमियम सर्विस को अपने ग्राहकों को सिर्फ 99 रुपये में ऑफर कर रहा है। इस सर्विस के लिए आपको 1000 रुपये का रिफंडेबल डिपॉजिट भी जमा कराना होगा। बता दें कि इसके लिए आपके पास पहले से एक एक्टिव Airtel WiFi कनेक्शन होना चाहिए। इसके बाद आप अगर Airtel Thanks ऐप पर जाकर Mesh सर्च करेंगे, तो आपके सामने इस सर्विस से जुड़ा मेन्यु खुल जाएगा। यहां आप रिफंडेबल डिपॉजिट जमा करवा कर 99 रुपये प्रति महीने की दर एक्सटेंडर मेश पॉड ऑर्डर कर सकते हैं। ध्यान रहे कि अगर आपके घर में एक से ज्यादा पॉड की जरूरत पड़ती है, तो आपको उसी के अनुसार डिपॉजिट और मंथली फीस चुकानी होगी।

डेंगू: बचाव और इलाज की हर जानकारी

कोई मच्छर काट ले तो टेंशन में न आएं। हर मच्छर डेंगू वाला नहीं होता। बुखार आ जाए तो भी घबराने की जरूरत नहीं। हर बुखार डेंगू का नहीं होता। डेंगू हो भी जाए तो पैनिक न हों। डेंगू में सिर्फ 1 फीसदी माले ही रिस्की होते हैं। बुखार का मैनेजमेंट घर में करें। डॉक्टर से इलाज कराएं। जब तक डॉक्टर न कहे, अस्पताल में भर्ती न हों। एक्सपर्ट्स से बात करके डेंगू से बचाव और इलाज पर जानकारी दे रहे हैं हम… क्या है बुखार जब हमारे शरीर पर कोई बैक्टिरिया या वायरस हमला करता है तो हमारा शरीर अपने आप ही उसे मारने की कोशिश करता है। इसी मकसद से शरीर जब अपना टेम्प्रेचर बढ़ाता है तो उसे ही बुखार कहा जाता है। जब भी शरीर का टेम्प्रेचर नॉर्मल (98.3) से बढ़ जाए तो वह बुखार माना जाएगा। आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ-पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट से उनका बुखार चेक किया जाता है। कई बार बुखार 104-105 डिग्री फॉरनहाइट तक भी पहुंच जाता है। कहीं यह बुखार डेंगू तो नहीं डेंगू वाले मच्छर के किसी इंसान को काटने के बाद डेंगू का वायरस इंसान के ब्लड में 2-7 दिनों तक रहता है। डेंगू बुखार के लक्षण मच्छर के काटने के 4-7 दिनों में दिखते हैं। कभी-कभी इसमें 14 दिनों का वक्त भी लगता है। बुखार अक्सर तेज होता है और दिन में 4-5 बार आता है। डेंगू बुखार तकरीबन 7-10 दिनों तक बना रहता है और अपने आप ठीक हो जाता है। बुखार से प्रभावित कुल लोगों में से 10 फीसदी को ही हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत होती है। डेंगू के सामान्य लक्षण हैंः बुखार, तेज बदन दर्द, सिर दर्द खास तौर पर आंखों के पीछे, शरीर पर दाने आदि। डेंगू ऐसा भी हो सकता है कि इसके लक्षण न उभरें। ऐसे मरीज का टेस्ट करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है लेकिन वह खुद-ब-खुद बिना किसी इलाज के ठीक हो जाता है। दूसरी तरह का डेंगू बीमारी के लक्षणों वाला होता है। यह भी तीन किस्म का होता हैः क्लासिकल डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम। क्लासिकल डेंगू फीवर एक नॉर्मल वायरल फीवर है। इसमें तेज बुखार, बदन दर्द, तेज सिर दर्द, शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है। डेंगू हेमरेजिक फीवर थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और डब्लूबीसी की संख्या कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकत्ते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका बीपी और नब्ज एकदम कम हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है। …ताकि पैदा न हों मच्छर डेंगू के बचाव के लिए मच्छरों को पैदा होने से रोकना और काटने से रोकना, दोनों जरूरी हैंः कहीं भी खुले में पानी रुकने या जमा न होने दें। साफ पानी भी गंदे पानी जितना ही खतरनाक है। पानी पूरी तरह ढककर रखें। कूलर, बाथरूम, किचन आदि में जहां पानी रुका रहता है में दिन में एक बार मिट्टी का तेल डाल दें। ऐसा करने से उनमें मच्छरों के अंडे डिवेलप नही होंगे। एसीः अगर विंडो एसी के बाहर वाले हिस्से के नीचे पानी टपकने से रोकने के लिए ट्रे लगी हुई है तो उसे रोज खाली करना न भूलें। उसमें भी ब्लीचिंग पाउडर डाल कर रख सकते हैं। कूलरः इसका इस्तेमाल बंद कर दें। अगर नहीं कर सकते तो उसका पानी रोज बदलें और उसमें ब्लीचिंग पाउडर या बोरिक एसिड जरूर डालें। गमलेः ये चाहे घर के भीतर हों या बाहर, इनमें पानी जमा न होने दें। गमलों के नीचे रखी ट्रे भी रोज खाली करना न भूलें। छतः छत पर टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें या उलटा करके रखें। पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें। पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करके साफ करने के बाद पानी भरें। किचन, बाथरूमः सिंकध्वॉशबेसिन में भी पानी जमा न होने दें। हफ्ते में एक बार अच्छी तरह से सफाई करें। पानी स्टोर करने के बाद बर्तन पूरी तरह ढक कर रखें। बेहतर तो यह है कि गीले कपड़े से ऐसे बर्तनों को ढकें ताकि मच्छर को जगह न मिले। नहाने के बाद बाथरुम को वाइपर और पंखे की मदद से सुखा दें। ड्रॉइंगरूमः घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें। डाइनिंग टेबल में सजाने के लिए रखे फूलों या फूलों के बर्तन में पानी रोज बदलें …ताकि न काटें मच्छर आउटडोर में पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। खासकर बच्चों के लिए इस बात का जरूर ध्यान रखें। मच्छर गाढ़े रंग की तरफ आकर्षित होते हैं इसलिए हल्के रंग के कपड़े पहनें। तेज महक वाली परफ्यूम लगाने से बचें क्योंकि मच्छर किसी भी तरह की तेज महक की तरफ आकर्षित होते हैं। कमरे में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें। मस्किटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इन्हें जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिए बंद कर दें। सोने से पहले खिड़की-दरवाजे खोल लें। खिड़की, दरवाजे बंद रखेंगे तो सांस की बीमारी हो सकती है। घर की मेन एंट्रेंस के बाहर लगी ट्यूब लाइट के पास मस्किटो रेपलेंट (गुडनाइट, ऑलआउट आदि) जलाकर रखें। इससे गेट खुलने पर अंदर आनेवाले मच्छरों को रोका जा सकेगा। आजकल इसे 24 घंटे जलाकर रखें ताकि मच्छर को जगह न मिले। सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर विक्स लगाएं। इससे मच्छर पास नहीं आएंगे। एक नीबू को बीच से आधा काट लें और उसमें खूब सारे (6-7) लौंग घुसा दें। इसे कमरे में रखें। मच्छर भाग जाएंगे। मच्छरों को भगाने और मारने के लिए गुग्गुल जलाएं। लैवेंडर ऑयल की 15-20 बूंदें, 3-4 चम्मच वनीला एसेंस और चैथाई कप नीबू रस को मिलाकर एक बोतल में रखें। शरीर के खुले हिस्सों पर लगाने से पहले अच्छी तरह मिलाएं। इसे लगाने से मच्छर दूर … Read more

फेसबुक खाता बार-बार बंद, मार्क जुकरबर्ग ने META पर किया कानूनी हमला

वॉशिंगटन अमेरिका में एक वकील ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ केस किया है। अब केस करने की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, क्योंकि वकील का नाम मार्क जुकरबर्ग है। उनका कहना है कि फेसबुक बार-बार उनका अकाउंट सस्पेंड कर रहा है, जिसके चलते बिजनेस में हजारों डॉलर का नुकसान हुआ है। खबर है कि मामला कोर्ट पहुंचने के बाद कंपनी ने माफी मांगी है। खास बात है कि फेसबुक को फाउंडर का नाम भी मार्क जुकरबर्ग है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंडियाना के रहने वाले वकील जुकरबर्ग का कहना है कि कंपनी ने उनका अकाउंट गलत कारणों से ब्लॉक किया है। वह 38 सालों से कानूनी पेशे में हैं। उनका आरोप हैं कि फेसबुक ने बीते 8 सालों में 5 बार उनका खाता ब्लॉक किया है और हर बार उनपर आरोप लगाए गए कि वह किसी और के होने का नाटक करने के आरोप लगाए हैं। वकील के ये भी आरोप हैं कि बार-बार बैन होने के कारण उनकी प्रैक्टिस पर असर पड़ा है। उन्होंने मैरियन सुपीरियर कोर्ट में केस किया और दावा किया है कि मेटा ने 11 हजार डॉलर की कीमत के विज्ञापन हटाकर अपनी एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। जुकरबर्ग का कहना है कि उन्होंने फोटो आईडी, क्रेडिट कार्ड और खुद की कई फोटोज समेत कई पहचान दे दी हैं। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझसे जो भी कहा मैंने किया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपको लगता है कि निलंबन उचित नहीं है तो आप अपील कर सकते हैं, तो मैंने अगले ही दिन अपील की। इसपर मुझे उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला और इस बात को अब 4 महीने हो गए हैं।' वकील ने कहा, 'उन्होंने आखिरी बार जब ऐसा किया था, तब खाता चालू करने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग गया था। तो मुझे नहीं पता कि मैं और उनका ध्यान किस तरह आकर्षित करूं।' आखिरी बार उनका खाता मई में बंद किया गया था और केस करने के बाद ही उसे बहाल किया गया था। कंपनी ने इसे गलती बताया था और कहा था, 'हम जुकरबर्ग के धैर्य की सराहना करते हैं और भविष्य में इस तरह की किसी घटना से बचने के लिए काम कर रहे हैं।' वकील ने कहा है कि इस बैन के चलते उनके बिजनेस पर असर हुआ है।  

ब्लैकहेड्स बनाम व्हाइटहेड्स: क्या है फर्क और कैसे करें इलाज?

 जब भी चेहरे पर ब्रेकआउट्स यानी क‍ि पिंपल्स होते हैं तो आपका पूरा लुक ब‍िगड़ जाता है। अक्सर ये ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की तरह दिखाई देते हैं। दोनों ही काफी जिद्दी होते हैं और आसानी से खत्म नहीं होते हैं। साथ ही ये दर्दनाक भी होते हैं। कई बार इन्हें हटाने की कोशिश करने से आपको ज्‍यादा नुकसान हो सकता है। कई लोग इन्‍हें नोचने या दबाने लगते हैं। ये तरीका ब‍िल्‍कुल भी सही नहीं है। अगर आप भी ब्‍लैकहेड्स और व्‍हाइट हेड्स को लेकर कन्‍फ्यूज हैं तो आपको हमारा ये लेख जरूर पढ़ना चाह‍िए। हम आपको इन दोनों के बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी देने जा रहे हैं। साथ ही ये भी बताएंगे क‍ि क‍िससे ज्‍यादा परेशानी होती है। आइए जानते हैं- व्‍हाइट हेड्स असल में छोटे-छोटे दाने जैसे दिखते हैं। इन्हें क्लोज्‍ड कॉमेडोन भी कहा जाता है। ये तब बनते हैं जब पोर्स पूरी तरह से ऑयल और डेड स्किन सेल्स से बंद हो जाते हैं। ये स्‍क‍िन पर ऊपर से सफेद या हल्के रंग की छोटी गांठ जैसी दिखाई देती है। ये नाक, होंठ के नीचे और माथे पर ज्‍यादा होते हैं। ब्लैक हेड्स क्या हैं? ब्लैक हेड्स भी पोर्स बंद होने की वजह से ही बनते हैं। बस इनमें फर्क ये है कि इनमें पोर्स का मुंह खुला रहता है और अंदर जमी गंदगी और ऑयल हवा लगने से काले रंग के हो जाते हैं। इसी वजह से इन्हें ब्लैक हेड्स कहा जाता है। ये भी ज्‍यादातर नाक और होंठ के नीचे होते हैं। क्‍याें होते हैं ब्‍लैक और व्‍हाइट हेड्स? ब्‍लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स के पीछे की सबसे बड़ी वजह है स्‍क‍िन का ऑयली होना। जब ये ऑयल डेड स्‍क‍िन सेल्‍स के साथ म‍िलकर पोर्स को ब्‍लॉक कर देते हैं। तब जाकर ब्लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स बनते हैं। कई बसार बैक्टीरिया का जमा होना और हार्मोनल चेंजेस भी इसकी एक बड़ी वजह बन सकती हैं। कैसे करें कंट्रोल? ब्लैक हेड्स और व्हाइट हेड्स की समस्या से छुटकारा पाने के ल‍िए आप बेकिंग सोडा और नींबू के रस को एक साथ मिक्स करें। इसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। आपको इससे छुटकारा तुरंत म‍िलेगा। आप दो बार द‍िन में ये काम कर सकते हैं। वहीं दूसरा तरीका ये है क‍ि आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। रोजाना चेहरे पर एलोवेरा लगाने से स्‍क‍िन पर कील मुंहासे की समस्‍या से छुटकारा म‍िलेगा। फर्क भी समझें ब्लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स दोनों ही नॉन-इंफ्लेमेटरी पिंपल्स हैं यानी इनमें सूजन नहीं होती। फर्क बस इतना है कि व्‍हाइटहेड्स छोटे दाने जैसे लगते हैं और बाद में बड़े पिंपल में बदल सकते हैं। वहीं ब्लैक हेड्स आसानी से पहचान में आ जाते हैं क्योंकि ये काले रंग के होते हैं।  

हार्ट अटैक का कारण बन सकती है B12 की कमी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली इन दिनों हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। बात जब भी हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट में प्लाक की आती है, तो डॉक्टर अक्सर उनकी डाइट, स्ट्रेस लेवल, एक्सरसाइज और नींद की कमी को इसका जिम्मेदार बताते हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ पोषक तत्वों की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विटामिन-बी12 की कमी वर्षों से ब्लड प्रेशर और हार्ट रिस्क को चुपचाप बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी के मुताबिक शरीर में विटामिन-बी12 की कमी कई तरह आपकी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं कैसे हार्ट अटैक का कारण बन सकती है शरीर में विटामिन-बी12 की कमी-   स्टडी में हुआ खुलासा एक शोध में इस बारे में एक दिलचस्प संबंध सामने आया है। जब शरीर में विटामिन बी12 का लेवल कम होता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जो समय के साथ हार्ट वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है। यह संबंध हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम और उपचार के लिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया भर में करोड़ों लोगों में विटामिन बी12 की कमी पाई जाती है। क्यों जरूरी है विटामिन-बी12? विटामिन-B12 हमारे शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, तो रेड ब्लड सेल्स को बनाने, नर्वस सिस्टम के काम और डीएनए सिंथसिस के लिए जरूरी है। इन सबके अलावा, यह ब्लड में अमीनो एसिड, होमोसिस्टीन के रेगुलेशन का भी काम करता है। जब होमोसिस्टीन का लेवल बढ़ जाता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल के दौरे का रिस्क फैक्टर बन जाता है। विटामिन B12 और हार्ट अटैक में कनेक्शन जब बी12 का लेवल कम होता है, तो शरीर होमोसिस्टीन को जरूरी कंपाउंड में बदल नहीं कर पाता है। ऐसे में हाई होमोसिस्टीन ब्लड वेसल्स के लिए टॉक्सिक होता है, जिससे वे कठोर और कम लचीली हो जाती हैं। इससे सूजन होती है और आर्टरीज की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस या प्लाक जमने की प्रोसेस तेज हो जाती है। हाई होमोसिस्टीन खून के थक्के बनने की संभावना को भी बढ़ा सकता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनते हैं। इसलिए खतरनाक है विटामिन-बी12 की कमी विटामिन-बी12 यूं तो कई वजहों से सेहत के लिए जरूरी होता है, लेकिन यह हार्ट हेल्थ के लिए भी काफी अहम है। दरअसल, विटामिन B12, होमोसिस्टीन को कंट्रोल में रखने के लिए फोलेट और विटामिन B6 के साथ मिलकर काम करता है। ऐसे में अगर इन तीनों में से किसी भी एक की कमी रिस्क फैक्टर को कई गुना बढ़ा सकती है, जिससे ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। ऐसे में करें विटामिन-बी12 की कमी के पहचान     बहुत थकान या कमजोरी महसूस     मतली, उल्टी या दस्त होना     सामान्य से कम भूख लगना     वजन कम होना     मुंह या जीभ में दर्द     त्वचा का पीला पड़ना     हाथों और पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी होना     विजन संबंधी समस्याएं     चीजों को याद रखने में कठिनाई होना     बोलने में कठिनाई होना     उदास महसूस करना     चिड़चिड़ापन महसूस करना