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इन फ्री एप्स से अपने एंड्रायड स्मार्टफोन को बनाएं सुरक्षित

एप्लीकेशन वह सॉफ्टवेयर हैं, जो आपके स्मार्टफोन की स्मार्टनेस को और बढ़ा देता हैं। आपके एंड्रायड फोन में आपकी प्राइवेसी से संबंधित बहुत सा डाटा होता है, जो अगर गलत हाथ में चला जाएं, तो बैठे-बिठाएं लेने के देने पड़ सकते हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप अपने एंड्रायड की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। इस काम के लिए गूगल प्ले स्टोर पर बहुत से फ्री एप्स दिए गए हैं, इनकी हेल्प से आप अपनी एंड्रायड डिवाइस को प्रोटेक्ट कर सकते हैं, इनमें से तीन बेस्ट फ्री एंड्रायड प्रोटैक्शन ऐप्स के बारे में हम आज आपको बता रहे हैं.. परफेक्ट एप प्रोटैक्टर:- यह एप जैसा कि नाम से ही जाहिर है एप्लीकेशन्स को बहुत परफेक्ट तरीके से प्रोटेक्ट करता है। यह आपके सेलेक्टेड ऐप्स को एक पासवर्ड या पैटर्न के साथ लॉक करता है, स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करता है और जिन एप्स का आप चयन करते हैं उनके स्क्रीन रोटेशन को कंट्रोल करता है। इसका साइज 3.7एमबी है। एप्लीकेशन प्रोटेक्शन:- इस एप की उपयोगिता यह है कि इसकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन पर डाटा और एप्लीकेशन्स को आसानी से एक पासकोड के साथ प्रोटेक्ट कर सकते हैं, ताकि अनआॅथराईजड यूजेस से बचाया जा सकें। इसका साइज 328केबी है। एप लाॅक:- इस हैंडी एप से आप अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल्ड एप्स को एक नंबर या फिर पैटर्न लॉक से प्रोटेक्ट कर सकते हैं। यह एक बहुउपयोगी एप है। इसके साथ आप इंस्टॉल और अनइंस्टॉल फंक्शन्स, इनकमिंग कॉल्स, सेटिंग्स, एप लॉक आइकन को छिपाना और दोबारा अनलॉक किए बिना शार्ट एक्जिट कर सकते हैं। इसका साइज 638 केबी है।  

BenQ ने लॉन्च किया स्मार्ट मीटिंग सॉल्यूशन, अब बिना सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए करें स्क्रीन शेयरिंग

 नई दिल्ली मीटिंग से पहले अक्सर HDMI केबल लगाना, अलग-अलग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना और सेटअप करना पड़ता था. इस परेशानी को दूर करने के लिए ताइवान की कंपनी BenQ ने भारतीय मार्केट में अपना नेक्स्ट-जेनरेशन InstaShow लाइनअप  WDC20 और WDC15 स्क्रीन मिररिंग डिवाइस लॉन्च किए हैं. इन डिवाइस की मदद से यूजर्स सिर्फ प्लग-एंड-प्ले के जरिए आसानी से स्क्रीन शेयर कर सकते हैं। WDC20 हाइब्रिड कॉन्फ्रेंसिंग का पावरहाउस इस प्रोडक्ट को खास तौर पर मॉडर्न हाइब्रिड मीटिंग्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसका सबसे बड़ा फीचर BYOM (Bring Your Own Meeting) सपोर्ट है. यह एक प्लग-एंड-प्ले डिवाइस है, जिसमें किसी भी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती। इसके Wireless Media Bridge फीचर की मदद से आप अपने मीटिंग रूम के कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर्स को मल्टीमीडिया हब से कनेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद इन डिवाइस को Microsoft Teams या Zoom मीटिंग में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, बिना बार-बार अलग-अलग डिवाइस प्लग करने की जरूरत के। परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें Wi-Fi 6 सपोर्ट मिलता है, जिससे 4K 60FPS तक का हाई-क्वालिटी प्लेबैक संभव है. इस डिवाइस की मदद से एक साथ 4 प्रेजेंटर स्क्रीन शेयर कर सकते हैं. साथ ही Talkback फीचर की मदद से लैपटॉप से इंटरैक्टिव डिस्प्ले को कंट्रोल भी किया जा सकता है। कीमत की बात करें तो यह डिवाइस लगभग ₹1,75,000 में उपलब्ध है और इसके साथ 3 साल की वारंटी मिलती है। । यह प्रोडक्ट BenQ के पॉपुलर वायरलेस प्रेजेंटेशन सिस्टम का एक रिफ्रेश्ड वर्जन है. यह खास तौर पर छोटे मीटिंग रूम्स के लिए परफेक्ट माना जाता है। इसमें भी प्लग-एंड-प्ले फीचर मिलता है. यूजर्स को बस डिवाइस को अपने लैपटॉप में प्लग करना है और तुरंत स्क्रीन शेयरिंग शुरू हो जाती है. इसमें किसी भी एक्सटर्नल सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह एक सिक्योर और स्टेबल डिवाइस है, जो बजट सेगमेंट में होने के बावजूद एंटरप्राइज-ग्रेड सिक्योरिटी के साथ आता है. इसमें WPA3 और CVSS 4.0 जैसे सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन मिलते हैं। इसके साथ स्विचेबल प्लग्स (HDMI + USB + USB-C) मिलते हैं, जिससे इसे पुराने और नए दोनों तरह के लैपटॉप्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी कीमत लगभग ₹75,000 रखी गई है और इसके साथ 1 साल की वारंटी मिलती है । कुल मिलाकर, BenQ के ये नए InstaShow डिवाइस मीटिंग से पहले होने वाली तकनीकी परेशानियों को काफी हद तक खत्म कर सकते हैं. अब यूजर्स सिर्फ प्लग-एंड-प्ले के जरिए आसानी से अपनी मीटिंग शुरू कर सकते हैं।

स्टाइल के चक्कर में आंखों से न करें समझौता

आंखों की रोशनी धूमिल होने या किसी अन्य प्रकार की समस्या होने पर विशेषज्ञ चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते हैं। कई लोगों को तेज धूप की वजह से भी आंखों से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं, ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस लगाने की जरूरत होती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग फैशन में भी यह फिर आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए भी तरह-तरह के लेंसेस या फिर कोई भी सनग्लास आंखों पर लगा लेते हैं। इससे फैशनेबल दिखने का उद्देश्य तो पूरा हो जाता है लेकिन आंखों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डेकोरेटिव लेंसेस होते हैं खतरनाक… आंखों के कलर को बदलने के लिए कॉस्मैटिक उद्देश्य से लगाए जाने वाले लेंसेस आंखों के लिए नुकसादायक होते हैं। इन्हें नियमित रूप से लगाने से आंखें स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इन्फेक्शन: कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से सबसे सामान्य प्रकार का इन्फेक्शन कैराटिटिस कहलाता है। लेंसेस को बिना साफ किए लगातार लगाए रहने से भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। किसी और का कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या किसी और को अपना कॉन्टैक्ट लेंस लगाने देने से आई इन्फेक्शन की समस्या को बढ़ावा मिलता है। कॉर्नियल इन्फेक्शन वायरल, बैक्टीरियल या पैरासिटिक हो सकता है। स्वीमिंग करने के दौरान कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से या उसे धोने से भी आंखों का इन्फेक्शन हो सकता है। ये होते हैं लक्षण: आंखों के इन्फेक्शन के प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, लगातार आंसू बहना, धुंधलापन, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता। कैराटिटिस की परेशानी बढ़ने पर इन्फेक्शन की गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके लक्षणों के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। कॉर्नियल अल्सर: यदि कॉर्नियल इन्फेक्शन को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो अल्सर की समस्या हो सकती है, जो कि कॉर्निया में अत्यधिक सूजन पैदा कर सकता है। खो जाती है आंखों की रोशनी: कलरफुल कॉन्टैक्ट लेंसेस के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है। कॉर्नियल अल्सर के कारण होने वाली क्षति आंखों को स्थाई रूप से खराब कर सकती है। यदि इन्फेक्शन को बढ़ने के लिए छोड़ दिया जाए तो अल्सर के कारण आंखों के कई हिस्सों में छेद जैसे बन जाते हैं। सस्ते चश्मे आंखों के दुश्मन… गर्मी के दिनों में या फिर धूप की तेज किरणों से बचने के लिए सनग्लासेस लगाते हैं लेकिन उसकी क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले या खराब क्वालिटी वाले सनग्लासेस लगाने से आंखों से जुड़े कई सारे इन्फेक्शन और रिफ्रेक्टिव एरर हो जाती है। इस प्रकार के सनग्लासेस लगाने से आंखों में खुजली, पानी निकलना, धुंधलापन, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक लेंस वाले विभिन्न रिफ्रेक्टिव इंडेक्स वाले, असमान ग्लास कलर वाले सनग्लासेस जो सस्ते कीमतों पर उपलब्ध होते है, इन्हें लगातार पहने रहने से आंखों से जुड़ी कई सारी परेशानियां और मायोपिया की समस्या हो सकती है। इस प्रकार के चश्मे आमतौर पर ग्लास या फाइबर से बने होते हैं, खराब क्वालिटी के सनग्लासेस से रंगों को ना पहचान पाने की परेशानी पैदा हो सकती है।  

चिड़चिड़ापन और थकान से छुटकारा: गर्मियों में अच्छी नींद के लिए अपनाएँ ये एक्सपर्ट टिप्स

मौसम में बदलाव का असर नींद पर पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि गर्मी में लोग सर्दी के मुकाबले कम सोते हैं और इसका सीधा असर उनकी दिनचर्या पर होता है। आखिर क्यों गर्मी में नींद कम होती है और कैसे पाएं सुकून की नींद, बता रहे हैं एक्सपर्ट… गर्मी में स्लीप साइकल में परिवर्तन और तापमान बढ़ने के कारण नींद कम आती है। लंबे समय तक रोशनी रहने से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा आती है, जिससे सोने और उठने का शरीर का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है। स्वास्थ्य के लिए सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है। ऐसे में नींद पूरी न होने पर कई लोगों को मानसिक तनाव, थकान व चिड़चिड़ेपन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्मी में होती है कम नींद गर्मी में नींद कम होना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। दरअसल, गर्मी में दिन लंबे और रात छोटी होती हैं और अंधेरा होने के बाद ही मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है। चूंकि अंधेरा देर से होता है, इसलिए रात हार्मोन कम बनने से नींद कम हो जाती है। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त क्या कहती है स्टडी? बर्लिन में सेंट हेडविग हास्पिटल में नींद पर हुई स्टडी बताती है कि नींद का पैटर्न सकैंडियन रिदम (जैविक घड़ी) के हिसाब से बदलता है। जो शरीर में 24 घंटे सूरज के हिसाब से चलती है। कैसे पाएं गुणवत्ता वाली नींद?     प्राकृतिक धूप लें और शारीरिक गतिविधियां करें।     सही समय पर सोने-जागने का अभ्यास करें।     सोते समय कमरा ठंडा और शांत हो। कमरे में अंधेरा हो।     सोने जाने से पहले चाय- कॉफी न पिएं।     बिस्तर पर जाने से एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बना लें।     सोने से पहले नहा लें और आराम के लिए सूती कपड़े पहनें।     जब सोने का वक्त हो तभी बिस्तर पर जाएं, उससे पहले नहीं।     रात में ज्यादा भारी खाना खाकर सोने से परहेज करें। बदलता मौसम बिगाड़ रहा है आपकी 'बायोलॉजिकल क्लॉक' यह सच है कि मौसम में बदलाव और सूर्योदय सूर्यास्त के समय में परिवर्तन नींद पर असर जरूर डालते हैं, क्योंकि मानव शरीर की जैविक घड़ी सूरज के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे हो सकती है। इसलिए गर्मी में लोग देर से सोने के बावजूद जल्दी उठ जाते हैं और नींद पूरी नहीं हो पाती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रात की अच्छी नींद के लिए दिन मैं अपनी गतिविधियों पर ध्यान रखें। अगर आपकी दिनचर्या सही रहेगी तो रात की नींद भी पर्याप्त होगी। दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य के बहुत जरूरी है। लाइफस्टाइल बनी नींद की दुश्मन आजकल लोगों की बदलती लाइफस्टाइल भी नींद की दुश्मन बन गई है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक आफिस का काम करते हैं, लेकिन सुबह उन्हें जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में नींद पूरी नहीं होती और पूरे दिन थकान लगती है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक मोबाइल देखते हैं, लेकिन सुबह काम की वजह से जल्दी उठना होता है। ऐसे लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती और फिर मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।  

उपवास में स्वास्थ्य का रखें ख्याल: नवरात्र में BP और शुगर कंट्रोल करने के टिप्स

नवरात्र केवल आस्था और आध्यात्मिक साधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह शरीर को हल्का और शुद्ध करने का भी अवसर होता है। बहुत से लोग पूरे नवरात्र व्रत रखते हैं, लेकिन अक्सर व्रत के दौरान तली-भुनी चीजें या मिठाई वाली या फिर अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट ले लेते हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अगर व्रत के दौरान हमारा आहार संतुलित रहे तो यह बहुत लाभकारी होता है। व्रत में पोषण का महत्व मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट व चीफ डायबिटीज एजुकेटर में डॉ. शुभदा भनोत बताती हैं कि उपवास के दौरान शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और खनिजों की आवश्यकता बनी रहती है। व्रत के दौरान अगर आप केवल आलू, साबूदाना या तली हुई चीजों पर निर्भर रहेंगे, तो ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) तेजी से बढ़ और घट सकता है, जिससे कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए व्रत के आहार में संतुलन रखना जरूरी है। व्रत में क्या खाएं प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें व्रत के दौरान अक्सर प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए पनीर, दही, दूध, मूंगफली, कुट्टू, राजगीरा और मखाने अच्छे विकल्प हैं। ये लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखते हैं। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं मौसमी फलों और सब्जियों के साथ ही सेब, पपीता, अमरूद, नारियल पानी, खीरा और टमाटर आदि शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और आवश्यक विटामिंस और मिनरल्स प्रदान करते हैं। स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट चुनें साबूदाना या आलू के अलावा कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगीरा बेहतर विकल्प हैं। इनमें फाइबर अधिक होता है। इनसे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती रहती है। स्वस्थ वसा का सेवन भीगे हुए बादाम, अखरोट, कद्दू और सूरजमुखी के बीज ऊर्जा और अच्छे फैट प्रदान करते हैं। ये हार्मोन संतुलन और हृदय के लिए भी लाभकारी हैं। पर्याप्त पानी पिएं व्रत के दौरान पानी, छाछ, दही और नींबू पानी का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है साथ ही थकान से भी बचाता है। व्रत में किन चीजों से बचें      अत्यधिक तले हुए पकवान जैसे साबूदाना वड़ा, व्रत वाली पकौड़ी आदि     अधिक मिठाई या मीठे पेय     सेंधा नमक का अधिक सेवन     लंबे समय तक भूखे रहना और फिर बहुत अधिक खाना डायबिटीज वाले बरतें सावधानी जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। व्रत रखने से पहले अपने डाक्टर की सलाह से इंसुलिन/टैबलेट के डोज के बारे में बदलाव की जानकारी लें। लंबे समय तक एकदम खाली पेट न रहें। हर दो-तीन घंटे में थोड़ी मात्रा में फल, मखाना, भुने हुए नट्स, दही, छाछ या समा के चावल/राजगिरा जैसी हल्की चीजें लेते रहें। बहुत मीठे फल (अधिक पके केले, चीकू, अंगूर आदि) और अधिक शक्कर, गुड़ या तले हुए साबूदाने से बचें। इनकी जगह पपीता, सेब, अमरूद, नारियल पानी जैसे विकल्प लें। खाने की प्लेट में हमेशा फाइबर और प्रोटीन का संयोजन रखें, जैसे समा के चावल की थोड़ी मात्रा में रायता, सलाद लें, ताकि ब्लड शुगर बढ़े नहीं। दिन में तीन-चार बार ब्लड शुगर मानिटर करें। खासकर चक्कर आना, अधिक पसीना, घबराहट, धड़कन तेज होना या अधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत कुछ खा लें और शीघ्र ही डाक्टर से संपर्क करें। अगर ब्लड प्रेशर हाइ रहता है अगर आपका ब्लड प्रेशर हाइ रहता है तो सेंधा नमक का सीमित मात्रा में सेवन करें। व्रत में अनजाने में ही शरीर में नमक अधिक मात्रा में पहुंच जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। नमक की मात्रा का ध्यान रखते हुए तले हुए खाद्य पदार्थ भी कम लें। व्रत करने से पहले ब्लड प्रेशर की नियमित दवाएं कैसे लेनी हैं, यह अपने चिकित्सक से स्पष्ट कर लें, दवा बिना पूछे न छोड़ें। बहुत तला हुआ, ज्यादा घी-तेल वाला और पैकेज्ड नमकीन (उपवास चिप्स, फराली मिक्स आदि) कम से कम खाएं, उबली, ग्रिल्ड या हल्की तली हुई चीजें बेहतर हैं। पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू-पानी (कम नमक/शक्कर के साथ) जैसे तरल पर्याप्त मात्रा में लें ताकि डिहाइड्रेशन के कारण बीपी अचानक न गिरे या बढ़े। दिन में कम से कम दो बार बीपी जांचें, सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना, सीने में दर्द, टांगों में सूजन या बहुत थकान हो तो तुरंत आराम करें और मेडिकल मदद लें। देर रात भारी भोजन न करें; रात में हल्का, प्रोटीन और फाइबर युक्त खाना लें ताकि नींद अच्छी रहे और शुगर-बीपी संतुलित रहे। हल्की वाक, प्राणायाम, ध्यान जैसे शारीरिक गतिविधियां बहुत फायदेमंद होती हैं। भारी कसरत या धूप में अधिक देर तक खाली पेट न रहें।  

3.5 अरब लोगों के लिए गूगल का चेतावनी अलर्ट, ‘जीरो डे’ संकट से बचने के लिए करें ये जरूरी कदम

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी Google का क्रोम ब्राउजर दुनियाभर में पॉपुलर है और भारत समेत दुनियाभर में इसके 3.5 अरब से ज्यादा यूजर हैं. अब अधिकतर यूजर्स पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जो असल में दो कमजोरियों हैं, जिनको गूगल ने जीरो डे कैटेगरी की कमजोरियों में रखा है. हैकर्स इनका फायदा उठाकर क्रोम ब्राउजर यूजर्स को शिकार बना सकते हैं. ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। खतरे को भांपते हुए क्रोम की तरफ से इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी किया है और यूजर्स को तुरंत ब्राउजर को अपडेट करने की जानकारी शेयर की है. ब्राउजर को अपडेट करने के बाद यूजर्स अपने डिवाइस और डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। वल्नरेबिलिटी को लेकर ज्यादा डिटेल्स नहीं दी वल्नरेबिलिटी को लेकर अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी का मानना है कि जब तक अधिकतर यूजर्स लेटेस्ट अपडेट के साथ ब्राउजर की कमजोरियों को फिक्स नहीं कर लेते हैं तब तक इनकी डिटेल्स को सीमित रखा जाएगा, जिससे हैकर्स इनका फायदा ना उठा सकें. इन कमजोरियों को CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। क्यों ब्राउजर्स को निशाना बना रहे हैं हैंकर्स ?  इंटरनेट यूजर्स किसी भी इंफॉर्मेशन को सर्च करने के लिए ब्राउजर पर ही सर्चिंग करते हैं. हर एक स्मार्टफोन और पीसी यूजर्स के पास ब्राउजर होता है, जिसमें क्रोम सबसे ज्यादा मार्केट शेयर वाला ब्राउजर है. ऐसे में हैकर्स ब्राउजर को निशाना बनाते हैं ताकि वह यूजर्स कि डिटेल्स को आसानी से हैकर कर सकें। यहां एक पुरानी रिपोर्ट के बारे में बताते हैं, Omdia की 2025 की रिपोर्ट है, जो Palo Alto Networks के लिए तैयार की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 95 परसेंट ऑर्गनाइजेसन को एक ऐसा साइबर सिक्योरिटी का सामना करना पड़ा, जिसकी शुरुआत कर्मचारियों के कंप्यूटर से हुई थी। ब्राउजर हैकिंग पर साइबर एक्सपर्ट का क्या कहना ब्राउजर हैकिंग को लेकर साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अब हैकर्स सीधा ब्राउजर को निशाना बनाते हैं. इसमें हैकर्स चोरी हुए टोकन के जरिए सेशन हाइजेकिंग और ऐसे एजवांस्ड एडवांस्ड फिशिंग अटैक शामिल हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन को भी बायपास कर सकते हैं।  

गर्मी से राहत सस्ती! Flipkart-Amazon पर 1.5 टन AC की सबसे बड़ी डील, Voltas-Godrej भी शामिल

नई दिल्ली गर्मी का मौसम शुरू होने ही वाला है और अब एयर कंडीशनर की डिमांड भी तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में अगर आप भी अपने घर या ऑफिस के लिए नया 1.5 टन AC खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह टाइम आपके लिए सबसे अच्छा हो सकता है। दरअसल, Flipkart और Amazon इस समय कई ब्रांडेड एयर कंडीशनर पर बड़ी छूट दे रहे हैं। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर Voltas, Godrej और Lloyd जैसे पॉपुलर ब्रांड्स के 1.5 टन AC पर भारी डिस्काउंट, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील मिल रही हैं। कुछ मॉडल्स पर हजारों रुपये तक की कीमत कम हो गई है, जिससे आप काफी ज्यादा कम बजट में बेहतर कूलिंग वाला AC खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं 1.5 टन AC पर मिल रही 5 सबसे बड़ी डील्स के बारे में… लिस्ट का पहला AC गोदरेज का है जो अमेजन पर फ्लैट 30% डिस्काउंट के बाद सिर्फ 29,490 रुपये में मिल रहा है जो काफी शानदार डील लग रही है। AC पर खास बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card EMI ऑप्शन से 1250 रुपये और HDFC Bank Credit कार्ड EMI ऑप्शन के जरिए 750 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। AC पर खास 4,800 रुपये तक का एक्सचेंज डिस्काउंट भी मिल रहा है। Voltas 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter 4-IN-1 लिस्ट का अगला AC Voltas का है जो फ्लिपकार्ट पर फ्लैट 47% डिस्काउंट के बाद सिर्फ 30,990 रुपये में मिल रहा है। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card और ICICI Bank Credit कार्ड पर 2000 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। Lloyd 1.5 Ton 3 Star Inverter Split AC 5 in 1 Convertible इस लिस्ट का अगला AC Lloyd का 1.5 टन 3 Star Inverter Split AC है जो अभी अमेजन पर काफी सस्ते में मिल रहा है। 47% डिस्काउंट के बाद इस AC की कीमत सिर्फ 30,990 रुपये रह गई है। HDFC Bank Credit Card EMI और Non-EMI ऑप्शन पर 1500 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। AXIS Bank Credit कार्ड EMI ऑप्शन के साथ भी 1500 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। ONIDA 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter फ्लिपकार्ट पर ONIDA का ये AC भी इस वक्त काफी ज्यादा कम कीमत पर मिल रहा है। AC पर 36% तक फ्लैट डिस्काउंट के बाद इसकी कीमत सिर्फ 26,990 रुपये रह गई है। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card और ICICI Bank Credit कार्ड पर 1500 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। Daikin 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter AC लिस्ट का आखिरी AC भी इस वक्त काफी ज्यादा कम कीमत पर मिल रहा है। Daikin के इस AC को आप 36% तक फ्लैट डिस्काउंट के बाद सिर्फ 34,490 रुपये में खरीद सकते हैं। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card के साथ 2500 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट ले सकते हैं।

सनबर्न और टैनिंग से परेशान हैं? एलोवेरा जेल ऐसे करें इस्तेमाल

गर्मियों का मौसम त्वचा के लिए काफी मुश्किल भरा होता है। चिलचिलाती धूप, गर्म हवाएं और पसीना त्वचा के नेचुरल मॉइश्चर को छीन लेते हैं, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और टैन दिखने लगता है। ऐसे में एलोवेरा जेल एक नेचुरल स्किनकेयर के रूप में बेहद फायदेमंद साबित होता है। एलोवेरा में विटामिन-ए, सी, ई, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो स्किन को ठंडक पहुंचाने, धूप के असर को कम करने और स्किन को डीप नरिशमेंट देने में मदद करता है। आइए जानें गर्मी से त्वचा को राहत दिलाने के लिए एलोवेरा जेल का कैसे इस्तेमाल करें। कैसे करें एलोवेरा जेल का इस्तेमाल?     चेहरे की सफाई करें- सबसे पहले अपने चेहरे को माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर से धोकर साफ करें। यह जरूरी है जिससे स्किन के पोर्स में जमी धूल, गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल हट जाए और एलोवेरा जेल अच्छे से काम कर सके।     एलोवेरा जेल तैयार करें- अगर आपके पास ताजा एलोवेरा पत्ती है तो उसे काटकर उसका जेल निकाल लें। नहीं तो मार्केट में मिलने वाला शुद्ध, बिना खुशबू और रंग वाला ऑर्गेनिक एलोवेरा जेल लें।     चेहरे पर लगाएं- अब एलोवेरा जेल को उंगलियों की मदद से पूरे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं। आप सर्कुलर मोशन में मसाज करें जिससे जेल स्किन में अच्छी तरह समा जाए। यह प्रक्रिया स्किन में ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाती है।     थोड़ी देर छोड़ दें- एलोवेरा जेल को 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें। यह स्किन को ठंडक देगा, जलन कम करेगा और पोषण भी देगा। गर्मियों में यह सनबर्न और टैनिंग के इलाज में भी कारगर होता है।     वॉश करें या या छोड़ दें- आप चाहें तो इसे नॉर्मल पानी से वॉश कर सकते हैं या फिर रातभर स्किन जेल की तरह छोड़ सकते हैं। रातभर लगाकर छोड़ना ड्राई और सेंसिटिव स्किन के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। कुछ जरूरी टिप्स     DIY फेस पैक- एलोवेरा में नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर टैनिंग के लिए पैक बनाएं।     टोनर के रूप में- एलोवेरा जेल और गुलाब जल मिलाकर नेचुरल टोनर तैयार करें।     एक्ने कंट्रोल- एलोवेरा में टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें मिलाकर लगाएं। गर्मियों में एलोवेरा जेल स्किन को ठंडक, पोषण और सुरक्षा देने वाला सबसे आसान और नेचुरल उपाय है। नियमित इस्तेमाल से आपकी स्किन साफ, निखरी और हेल्दी बनी रहती है।  

भारत में धूप की कमी नहीं, फिर भी लोग विटामिन-डी से वंचित क्यों? जानिए वजह

भारत एक ऐसा देश है जहां साल के ज्यादातर महीनों में सूरज की भरपूर रोशनी रहती है। इसके बावजूद, ज्यादातर भारतीयों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिलती है। यह चौंकाने वाला जरूरी है, लेकिन सच है। इसलिए यह सवाल करना जरूरी है कि ऐसा क्यों है? जिस देश में धूप की कोई कमी नहीं है, वहां लोगों में विटामिन-डी की कमी क्यों पाई जा रही है। आइए जानें इसके पीछे छिपे कारणों के बारे में। भारतीयों में विटामिन-डी की कमी के कारण     मेलानिन– भारतीयों की त्वचा का रंग प्राकृतिक रूप से गेहुआं या गहरा होता है। हमारी त्वचा में मेलानिन नाम का पिगमेंट ज्यादा मात्रा में होता है। मेलानिन सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो त्वचा को जलने से तो बचाता है, लेकिन विटामिन-डी के निर्माण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। गोरी त्वचा की तुलना में गहरी त्वचा को उतना ही विटामिन-डी बनाने के लिए धूप में ज्यादा समय बिताना पड़ता है।     बदलती लाइफस्टाइल- आज की ज्यादातर आबादी घर के अंदर रहने लगी है। सुबह 9 से शाम 6 की डेस्क जॉब, बंद दफ्तर और एसी के कमरों ने हमें सूरज से दूर कर दिया है। शहरी इलाकों में ऊंची इमारतों के कारण घरों तक सीधी धूप नहीं पहुंच पाती।     प्रदूषण- महानगरों में बढ़ता वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है। हवा में मौजूद धूल के कण और धुएं के कारण सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों हम तक पहुंच नहीं पाती हैं, जिसके कारण विटामिन-डी बनाने की प्रक्रिया रुक जाती है। खान-पान में बदलाव- खान-पान में विटामिन-डी के नेचुरल सोर्स बहुत सीमित हैं, जैसे- फैटी फिश, अंडे की जर्दी और डेयरी प्रोडक्ट्स। भारत की एक बड़ी आबादी शाकाहारी है, जिससे खाने के जरिए इस विटामिन की पूर्ति करना मुश्किल हो जाता है।  

दवाओं की ताकत बढ़ाने का ‘सीक्रेट’ मिला, कैंसर उपचार में बड़ी कामयाबी

क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी बाहरी गर्मी, रोशनी या केमिकल के कोई रासायनिक प्रतिक्रिया अपने आप सेकंडों में पूरी हो सकती है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ही अद्भुत और दुर्लभ खोज की है। इस नई खोज ने दवा निर्माण, प्रोटीन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं। आइए, इस अहम वैज्ञानिक खोज को डिटेल में समझते हैं। क्या है यह नई रिसर्च? शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह से नई रासायनिक प्रक्रिया की खोज की है, जिसे 'ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस प्रतिक्रिया' नाम दिया गया है। इसके बारे में मशहूर विज्ञान पत्रिका 'नेचर केमिस्ट्री' में प्रकाशित किया गया है। इस प्रतिक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य कमरे के तापमान पर, बिना किसी बाहरी एजेंट या उत्तेजना (जैसे गर्मी या रोशनी) के अपने आप काम करती है। यह प्रतिक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाती है और इसके परिणाम बेहद साफ, सटीक और कुशल होते हैं। सल्फर-सल्फर बांड्स का खेल इस पूरी खोज के केंद्र में 'सल्फर-सल्फर बांड' हैं। ये बांड पेप्टाइड्स, प्रोटीन, दवा के अणुओं और वल्कनाइज्ड रबर जैसे पॉलिमर्स में मौजूद होते हैं। बता दें, ये प्रोटीन को उसकी संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता देने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अब तक, बिना किसी बाहरी रसायन या गर्मी के इन बांड्स को अपनी मर्जी से बनाना या तोड़ना बहुत मुश्किल माना जाता था, लेकिन यह नई प्रतिक्रिया इसे स्वचालित रूप से कर सकती है। कैसे हुई यह खोज? इस अनोखी खोज की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर और यूके के लिवरपूल विश्वविद्यालय के उनके सहयोगी टॉम हैसेल के काम से हुई। उन्होंने शुरुआत में कुछ खास सॉल्वेंट्स में S-S बांड्स के अजीब और हैरान करने वाले व्यवहार पर ध्यान दिया। इसके बाद, उन्होंने एक मॉडल तैयार किया जो यह समझाता है कि ये बांड कैसे टूटते हैं, कैसे फिर से बनते हैं और यह हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकता है। भविष्य के लिए इसके शानदार उपयोग फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रतिक्रिया के कई बेहतरीन फायदे बताए हैं, जिनकी मदद से कई क्षेत्रों में क्रांति आ सकती है:     कैंसर की दवाओं में सुधार: चाल्कर लैब के शोधकर्ता हर्षल पटेल के अनुसार, इस प्रतिक्रिया का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कैंसर रोधी दवाओं और दवाइयों की खोज से जुड़े केमिकल को संशोधित करने के लिए किया गया है।     रीसायकल होने वाला प्लास्टिक: इस तकनीक से ऐसे नए और बेहतरीन प्लास्टिक बनाए जा सकते हैं जिन्हें आसानी से आकार दिया जा सकता है, इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रीसायकल करने के लिए तोड़ा जा सकता है। दवा और विज्ञान में तेज विकास: प्राकृतिक उत्पादों और दवाओं के अणुओं को बदलने में यह बेहद काम आ रही है। इसके उच्च प्रतिक्रिया दर की वजह से चिकित्सा से जुड़े यौगिकों को तेजी से तैयार किया जा सकता है। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर के शब्दों में कहें तो, किसी पूरी तरह से नई प्रतिक्रिया की खोज होना अपने आप में बहुत दुर्लभ है। और यह उससे भी ज्यादा दुर्लभ है कि एक ही खोज इतने सारे अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो। शोधकर्ताओं की टीम इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि आने वाले समय में इस रसायन विज्ञान को उन तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकी अभी हमने कल्पना भी नहीं की है।