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ग्लोइंग स्किन का राज: घर पर बनाएं कोलेजन बढ़ाने वाली हेल्दी ड्रिंक

 हर कोई चाहता है कि वह खूबसूरत दिखे और स्किन हमेशा ग्लोइंग नजर आए. लेकिन अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत खान-पान, प्रदूषण और स्किन की सही देखभाल न करने की वजह से स्किन अपनी चमक खोने लगती है. साथ ही, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेजन का बनना भी कम हो जाता है, जिससे झुर्रियां, रूखापन और स्किन की इलास्टिसिटी कम होने लगती है. कोलेजन एक तरह का प्रोटीन होता है जो स्किन, बाल, नाखून और जोड़ों को मजबूत और हेल्दी रखने में मदद करता है. अगर शरीर में इसका लेवल सही रहे तो स्किन ज्यादा टाइट और यंग दिखती है. ऐसे में डाइट में कुछ हेल्दी चीजें शामिल करके कोलेजन को बढ़ाया जा सकता है. आज हम आपको एक ऐसी हेल्दी ड्रिंक के बारे में बताएंगे जो आपके शरीर में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाकर ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी मदद कर सकती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 कप ताजा संतरे का रस 1/2 कप स्ट्रॉबेरी 1/2 कप अनानास 1 चम्मच चिया सीड्स 1 चम्मच शहद 1 कप पानी या नारियल पानी कोलेजन ड्रिंक घर पर बनाएं कैसे?     सबसे पहले स्ट्रॉबेरी को अच्छे से धो लें और उसके डंठल हटा दें. फिर अनानास को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें.     अब एक ब्लेंडर लें और उसमें संतरे का रस, स्ट्रॉबेरी, अनानास, चिया सीड्स और शहद डाल दें. जरूरत के हिसाब से इसमें पानी या नारियल पानी भी मिला लें.     अब सभी चीजों को अच्छे से ब्लेंड करें जब तक मिश्रण पूरी तरह स्मूद और एक जैसा न हो जाए.     तैयार ड्रिंक को एक गिलास में निकाल लें. चाहें तो इसमें बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें और पी लें. क्यों फायदेमंद है यह ड्रिंक? इस ड्रिंक में मौजूद संतरा और स्ट्रॉबेरी विटामिन C से भरपूर होते हैं जो शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करते हैं. अनानास डाइजेशन को बेहतर करता है और स्किन हेल्थ को सपोर्ट करता है. चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो स्किन को हेल्दी रखता है और सूजन कम करता है. वहीं शहद शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करता है और नारियल पानी हाइड्रेशन बनाए रखता है. अगर इसे रोजाना लिया जाए तो स्किन ज्यादा फ्रेश, हेल्दी और ग्लोइंग नजर आ सकती है.

Artificial Intelligence बन रही जल संकट की वजह? डेटा सेंटरों की खपत पर वैश्विक प्रदर्शन तेज

 नई दिल्ली दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके खतरनाक असर भी सामने आने लगे हैं. कई देशों में एंटी एआई प्रोटेस्ट जमीन पर देखने को मिल रहे हैं। यूएन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल उर्जा, पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर बड़ा दबाव डाल रहा है. यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है, बल्कि अब यह पर्यावरण और फ्यूचर की स्थिरता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।  अगर सिर्फ बिजली की बात करें तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटर करीब 945 टेरावॉट-आवर बिजली खपत कर सकते हैं. यह आंकड़ा समझने के लिए इसे आसान तरीके से समझिए।  एक देश के बराबर बिजली की खपत!  945 टेरावॉट-आवर बिजली का मतलब है जापान जैसे पूरे देश की सालाना बिजली खपत के बराबर. यानी जो बिजली एक पूरा विकसित देश इस्तेमाल करता है, उतनी बिजली सिर्फ AI और डेटा सेंटर खा जाएंगे. यह ग्लोबल बिजली खपत का करीब 3 प्रतिशत तक हो सकता है।  अब इसे और आसान भाषा में समझें तो अगर एक आम भारतीय घर साल भर में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उसी बिजली में हजारों घर चल सकते हैं. लेकिन उतनी ही बिजली AI के सर्वर कुछ ही सेकंड में इस्तेमाल कर देते हैं जब लाखों लोग एक साथ AI से सवाल पूछ रहे होते हैं। पहले बिजली फैक्ट्री, घर और ट्रांसपोर्ट में खर्च होती थी. अब एक बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया खा रही है, जो दिखती नहीं लेकिन असर बहुत बड़ा डालती है।  लेकिन असली संकट पानी है. Earth.Org की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक AI डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खपत कर सकते हैं. यह पानी सर्वर को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होता है, क्योंकि AI मॉडल्स को चलाने वाले चिप्स बेहद ज्यादा गर्म होते हैं।  1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी अब इस आंकड़े को समझना जरूरी है. 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी का मतलब है करीब 1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी. यानी जितना पानी भारत जैसे देश की पूरी आबादी को चाहिए, उतना पानी सिर्फ मशीनों को ठंडा रखने में खर्च हो सकता है।  अगर इसे और आसान तरीके से समझें तो सोचिए एक शहर में रोज पानी की किल्लत होती है, लोग टैंकर मंगाते हैं, पानी बचाने की अपील होती है. वहीं दूसरी तरफ डेटा सेंटर लाखों लीटर पानी सिर्फ अपने सर्वर को ठंडा रखने में खर्च कर रहे हैं. यानी एक तरफ इंसान पानी के लिए जूझ रहा है और दूसरी तरफ मशीनें वही पानी इस्तेमाल कर रही हैं।  अब इस मुद्दे पर सिर्फ एक्सपर्ट ही नहीं, आम लोग भी विरोध करने लगे हैं. खासकर अमेरिका में AI डेटा सेंटर के खिलाफ विरोध तेजी से बढ़ रहा है।  अमेरिका में डेटा सेंटर्स का विरोध रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई शहरों में लोगों ने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विरोध किया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पानी और बिजली की भारी खपत. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन डेटा सेंटर की वजह से उनके इलाके में पानी की कमी और बिजली पर दबाव बढ़ सकता है।  कुछ जगहों पर तो प्रोजेक्ट्स को रोकना भी पड़ा. अमेरिका में पिछले साल करीब 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स विरोध के चलते या तो रोक दिए गए या देरी का शिकार हुए. यह दिखाता है कि यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अब यह पब्लिक इश्यू बन चुका है।  लोगों को डर है कि कंपनियां उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके AI चला रही हैं, लेकिन उसका फायदा आम जनता को उतना नहीं मिल रहा. खासकर पानी की कमी वाले इलाकों में यह चिंता और ज्यादा गहरी है।  यूनाइटेड नेशन्स से जुड़ी रिपोर्ट्स में भी साफ चेतावनी दी गई है कि AI का यह बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर पानी, जमीन और क्लाइमेट तीनों पर दबाव बना रहा है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से पानी की कमी है, वहां डेटा सेंटर का विस्तार बड़ी समस्या बन सकता है।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI की ज्यादातर बिजली खपत ट्रेनिंग में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में होती है. IEA के विश्लेषण के मुताबिक करीब 80 से 90 प्रतिशत ऊर्जा खपत ‘इंफेरेंस’ में होती है, यानी जब आप और हम AI से सवाल पूछते हैं।  मतलब हर बार जब आप ChatGPT से सवाल पूछते हैं, फोटो बनाते हैं या AI वीडियो जनरेट करते हैं, तो उसके पीछे सर्वर चालू होते हैं, बिजली खर्च होती है और उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी भी लगता है. यानी AI जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतना ही ज्यादा संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा।  इसका कोई समाधान है? टेक कंपनियां अब ग्रीन एनर्जी, रीसायकल पानी और नए कूलिंग सिस्टम पर काम कर रही हैं. कई कंपनियां दावा करती हैं कि वे अपने डेटा सेंटर को सोलर या विंड एनर्जी से चलाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन असली चुनौती यह है कि AI की डिमांड इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये प्रयास पीछे छूट सकते हैं।  आज AI हमारी जिंदगी आसान बना रहा है, लेकिन अगर यही टेक्नोलॉजी भविष्य में पानी और बिजली की कमी की वजह बन जाए, तो यह एक नई समस्या पैदा कर सकती है. AI का फ्यूचर जितना स्मार्ट दिखता है, उसका पर्यावरण पर असर उतना ही गंभीर होता जा रहा है।  क्या दुनिया AI और नेचर के बीच बैलेंस बना पाएगी, या फिर टेक्नोलॉजी की यह रफ्तार हमें एक नए संकट की तरफ ले जा रही है? 

सफेद, ब्राउन या रेड राइस: सेहत के लिए कौन सा चावल सबसे बेहतर?

भारत के लगभग हर घर में चावल के बिना लंच या डिनर अधूरा रहता है और इसके लिए लोग चावल को किसी न किसी रूप में अपने खाने में शामिल करते हैं. लेकिन जब बात हेल्थ की आती है तो अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि सफेद, ब्राउन या रेड राइस में से कौन सा ऑप्शंस चुनें. कोई सफेद चावल को ब्लड शुगर बढ़ाने वाला मानता है तो कोई ब्राउन राइस को अच्छा मानते हैं. इसके साथ ही मार्केट में रेड राइस का भी ट्रेंड जोरों पर है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि सेहत के लिए कौन सा चावल अधिक फायदेमंद है. प्रोसेसिंग से बदल जाती है न्यूट्रिशन वैल्यू न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर सीमा गुलाटी के अनुसार, इन तीनों ही चावलों की अपनी खासियत और न्यूट्रिशन वैल्यू है. सफेद चावल रिफाइन और प्रोसेस किया जाता है जिससे इसकी बाहरी परत पूरी तरह निकल जाती है. इस वजह से चावल में सिर्फ स्टार्च वाला हिस्सा ही बचता है और इसके विपरीत ब्राउन राइस में केवल ऊपरी छिलका हटाया जाता है जिससे इसके न्यूट्रिएंट्स और फाइबर बरकरार रहते हैं. वहीं रेड राइस में भी उसकी बाहरी परत बनी रहती है जिसके कारण इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अच्छी होती है. शुगर स्पाइक और कैलोरी सफेद चावल में फाइबर कम होने के कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है इसलिए यह शरीर में ग्लूकोज लेवल को तुरंत बढ़ा देता है. यही वजह है कि राजमा-चावल या बिरयानी खाने के बाद अचानक सुस्ती आने लगती है. दूसरी ओर ब्राउन और रेड राइस स्लो बर्न फूड हैं जो धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करते हैं और शुगर को कंट्रोल में रखते हैं. वैसे 100 ग्राम पके हुए सफेद चावल में करीब 130 कैलोरी होती है जबकि ब्राउन और रेड राइस में लगभग 110 कैलोरी होती है. न्यूट्रिएंट्स के मामले में कौन सा चावल बेस्ट? सफेद, ब्राउन और रेड राइस तीनों ही वैरायटी मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन से भरपूर होते हैं. हेल्थशॉर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रेड राइस में मौजूद एंथोसायनिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट इसे खास लाल रंग देता है जो हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने और सूजन को कम करने में मदद करता है. WebMD का कहना है कि लाल चावल में मौजूद कंपाउंड बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में मदद करते हैं. हालांकि, सफेद चावल भी पूरी तरह खराब नहीं है और यह पचाने में सबसे आसान होता है. कौन सा चावल खाएं? अगर आपको डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या नहीं है और आप आसानी से पचने वाला खाना चाहते हैं तो लिमिट में सफेद चावल खा सकते हैं. लेकिन यदि आपका गोल ज्यादा फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स वाले चावल खाना हैा तो ब्राउन या रेड राइस बेहतर ऑप्शंस हैं. यदि घर में केवल सफेद चावल ही बनता है तो प्लेट को बैलेंस करने के लिए उसमें फाइबर से भरपूर सब्जियां और दाल की मात्रा बढ़ा दें.

क्या खत्म होगा फ्री 5G डेटा? टेलीकॉम कंपनियों के बड़े बदलाव के संकेत

भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो चुका है और करोड़ों यूजर्स अब हाई-स्पीड इंटरनेट का फायदा उठा रहे हैं. लेकिन जल्द ही वह दौर खत्म हो सकता है जब टेलीकॉम कंपनियां अनलिमिटेड 5G डेटा मुफ्त में देती थीं. हालिया इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और टेलीकॉम एक्सपर्ट्स की राय से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में 5G डेटा के लिए अलग चार्ज लिया जा सकता है या मौजूदा रिचार्ज प्लान्स में बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में करोड़ों मोबाइल यूजर्स के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब फ्री 5G डेटा की सुविधा बंद होने वाली है? क्यों उठ रही है फ्री 5G डेटा बंद करने की मांग? टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखने वाले फिनांशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियां अब भी बड़ी मात्रा में 5G डेटा मुफ्त उपलब्ध करा रही हैं, जबकि नेटवर्क पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान में ज्यादातर कंपनियां रोजाना 2GB या उससे ज्यादा डेटा वाले प्लान्स पर अनलिमिटेड 5G ऐक्सेस देती हैं. इससे यूजर्स को फायदा जरूर मिल रहा है, लेकिन कंपनियों के लिए नेटवर्क निवेश की लागत वसूलना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि 5G इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश के बाद कंपनियां अब उससे बेहतर कमाई करना चाहती हैं. ऐसे में फ्री डेटा मॉडल लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल माना जा रहा है. 5G यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी देश में 5G नेटवर्क की पहुंच बढ़ने के साथ इसका इस्तेमाल भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. बड़ी संख्या में स्मार्टफोन यूजर्स अब 5G नेटवर्क पर शिफ्ट हो चुके हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार कई टेलीकॉम ऑपरेटर्स के आधे से ज्यादा ग्राहक अब 5G सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं. तेज इंटरनेट स्पीड की वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्लाउड सर्विसेज और वायरलेस ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि प्रति यूजर मासिक डेटा खपत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. क्या रिचार्ज प्लान्स महंगे हो सकते हैं? टेलीकॉम कंपनियों की कमाई बढ़ाने के लिए सबसे बड़ा पैमाना ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व माना जाता है. कंपनियां लंबे समय से इसे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में 5G डेटा के लिए अलग श्रेणी के प्लान्स पेश किए जा सकते हैं या मौजूदा रिचार्ज पैक्स की कीमतों में बदलाव किया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में इस कीमत वृद्धि की वजह पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को बताया जा रहा है. चूंकि मोबाइल टावर चलाने की कुल परिचालन लागत में बिजली और ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है. ऐसे में डीजल की बढ़ती कीमतें टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, क्योंकि कई मोबाइल टावरों में बैकअप पावर के लिए अब भी डीजल का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नेटवर्क संचालन का खर्च बढ़ने की आशंका है, जिसका असर भविष्य में टेलीकॉम कंपनियों की लागत और रणनीति पर पड़ सकता है. दुनिया के कई देशों में ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है. जबकि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में यूजर्स अनलिमिटेड 5G डेटा का लाभ उठा रहे हैं. ऐसे में टेलीकॉम कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मॉडल की तरफ बढ़ सकती हैं. Jio, Airtel और Vi पर क्या होगा असर? अगर फ्री 5G डेटा बंद करने या सीमित करने का फैसला लिया जाता है तो इसका असर सबसे पहले उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो भारी मात्रा में इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और वायरलेस ब्रॉडबैंड सेवाओं पर निर्भर यूजर्स को नए प्लान्स चुनने पड़ सकते हैं. हालांकि फिलहाल किसी भी टेलीकॉम कंपनी ने आधिकारिक तौर पर फ्री 5G डेटा बंद करने की घोषणा नहीं की है. लेकिन इंडस्ट्री में चल रही चर्चाएं यह संकेत जरूर दे रही हैं कि आने वाले महीनों में रिचार्ज प्लान्स और 5G ऑफर्स में बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल ग्राहकों को मौजूदा योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन भविष्य में 5G सेवाओं के लिए अलग कीमत चुकानी पड़े तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. टेलीकॉम सेक्टर की अगली बड़ी रणनीति अब इसी दिशा में जाती दिखाई दे रही है.

Motorola Edge 70 Pro+ Review: 50MP कैमरा और 6500mAh बैटरी के साथ आया पावरफुल ऑलराउंडर फोन

Motorola ने अपने नये मॉडल Motorola Edge 70 Pro+ में सिर्फ बड़े-बड़े स्पेसिफिकेशन्स देने पर फोकस नहीं किया है, बल्कि इसे एक ऐसा ऑलराउंडर स्मार्टफोन बनाने की कोशिश की है जो नॉर्मल इस्तेमाल से लेकर मल्टीमीडिया और फोटोग्राफी तक हर चीज में अच्छा एक्सपीरियंस दे. आकर्षक डिजाइन, बेहतरीन डिस्प्ले और दमदार हार्डवेयर के साथ यह फोन अपने प्राइस सेगमेंट में मजबूत दावेदारी पेश करता नजर आ रहा है. आइए जानते हैं इसके बारे में. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिजाइन Motorola Edge 70 Pro+ की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रीमियम डिजाइन है. फोन का Satin-Luxe फिनिश लुक देता है, जबकि इसका डीप रेड कलर इसे भीड़ से अलग पहचान देता है. खास बात यह है कि फोन में बड़ी 6500mAh बैटरी होने के बावजूद इसकी थिकनेस सिर्फ 7.19mm है. क्वाड-कर्व्ड डिजाइन और पतले बॉडी प्रोफाइल की वजह से यह फोन देखने में काफी आकर्षक लगता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिस्प्ले फोन में 6.8 इंच का क्वाड-कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1.5K रेजोल्यूशन, 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. स्क्रीन पर वीडियो, गेम्स और सोशल मीडिया कंटेंट काफी शार्प और कलरफुल दिखाई देंगे. अककगी पीक ब्राइटनेस के कारण तेज धूप में भी डिस्प्ले अच्छे से दिखाई देगी. वहीं फोन में दिए गए स्टीरियो स्पीकर्स मल्टीमीडिया एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: कैमरा फोटोग्राफी के लिए फोन में तीन 50MP रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. खास बात यह है कि इसमें 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस भी मौजूद है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करता है. सेल्फी के लिए भी 50MP का ऑटोफोकस कैमरा दिया गया है. इस कीमत के स्मार्टफोन्स में इतनी हाई-रिजोल्यूशन सेल्फी कैमरा और पेरिस्कोप लेंस कम ही देखने को मिलता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: परफॉर्मेंस Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर दिया गया है. यह 12GB LPDDR5X RAM और 256GB UFS 4.1 स्टोरेज को सपोर्ट करता है. फोन गेमिंग, मल्टीटास्किंग और भारी ऐप्स को आसानी से संभाल सकता है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में सोशल मीडिया, मल्टीटास्किंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान फोन बिना किसी लैग के काम करेंगे. Motorola Edge 70 Pro+ Review: सॉफ्टवेयर मॉडल Android 16 पर बेस्ड Hello UI पर काम करेगा. साथ ही कंपनी की ओर से तीन बड़े Android अपडेट्स 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा किया गया है. इसमें Moto AI, Circle to Search, Gemini इंटीग्रेशन और कैमरा व नोट्स से जुड़े कुछ काम के फीचर्स मिलते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: बैटरी और चार्जिंग Motorola Edge 70 Pro+ में 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है. फोन नॉर्मल इस्तेमाल में अच्छा खासा बैकअप देता है. खरीदें या नहीं? करीब 48,000 रुपये की कीमत में Motorola Edge 70 Pro+ एक बेहद बैलेंस्ड स्मार्टफोन दिखाई देता है. जहां इस प्राइस रेंज में कई फोन सिर्फ कैमरा या परफॉर्मेंस पर फोकस करते हैं, वहीं Motorola ने एक ऐसा पैकेज पेश करने की कोशिश की है, जो लगभग हर फीचर्स में मजबूत है. ऐसे में अगर आपको 50 हजार से कम में ऐसा ऑलराउंडर प्रीमियम बजट स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें बड़ी बैटरी स्मूद डिस्प्ले, बढ़िए डिजाइन और फास्ट परफॉर्मेंस हो तो फिर मोटोरोला का यह स्मार्टफोन आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन हो सकता है.

झुर्रियों और फाइन लाइन्स से छुटकारा, चावल-अलसी का मास्क देगा त्वचा को निखार

 बढ़ती उम्र, प्रदूषण और तनाव के कारण चेहरे पर समय से पहले महीन रेखाएं (Fine Lines) और झुर्रियां नजर आने लगती हैं. ऐसे में त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है और स्किन ढीली पड़ने लगती है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं और अपनी त्वचा को फिर से जवां, कसावदार और गुलाबी निखार से भरपूर बनाना चाहते हैं, तो एक सही स्किन केयर आपके रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा होना चाहिए. रात के समय हमारी त्वचा खुद को रिपेयर करती है, इसलिए इस दौरान सही पोषण मिलने से त्वचा तेजी से रिकवर होती है. चावल और अलसी का मास्क करेगा कमाल हमारी त्वचा धूप, धूल और प्रदूषण से लड़ती है. ऐसे में अगर आप रेगुलर चावल और अलसी से बना मास्क या क्रीम अपने चेहरे पर यूज करते हैं तो इसके एक्टिव इंग्रीडिएंट्स त्वचा की गहरी परतों में जाकर ढीली हो चुकी कोशिकाओं में कसाव लाते हैं और महीन रेखाओं को धीरे-धीरे कम करते हैं. बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका इसके लिए सबसे पहले एक कटोरी में पानी गर्म करें. फिर इसमें चावल का आटा डालें. इसके बाद अलसी के बीज मिलाएं और सभी को अच्छी तरह उबालें. चेहरे को किसी माइल्ड क्लींजर या फेस वॉश से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद चेहरे पर ये मास्क ठंडा करके लगाएं. मास्क जब सूख जाए तो हल्का पानी लेकर अपने चेहरे और गर्दन पर ऊपर की दिशा में हल्के हाथों से मसाज करें. नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने पर कुछ ही हफ्तों में त्वचा टाइट होने लगती है और चेहरे पर गुलाबी चमक दिखाई देने लगती है.

मूंग दाल पकौड़े बनेंगे खस्ता और कम तेल वाले, जानें सीक्रेट ट्रिक

बारिश का मौसम हो या शाम की चाय, गरमा-गरम पकौड़े मिल जाएं तो मजा आ जाता है. लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि मूंग दाल के पकौड़े या तो बहुत ज्यादा तेल सोख लेते हैं या फिर कढ़ाई से निकलते ही मुलायम पड़ जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो अब चिंता छोड़ दीजिए. आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दाल के बैटर में मिलाते ही आपके पकौड़े एकदम करारे, खस्ता और ऑयल-फ्री बनेंगे. आइए जानते हैं क्या है वो सीक्रेट चीज और कैसे बनाएं परफेक्ट मूंग दाल पकौड़े. ये है वो सीक्रेट चीज अगर आप बैटर में चावल का आटा या बारीक सूजी मिलाते हैं तो इससे ये करारे बनते हैं. इसके अलावा बैटर में थोड़ा सा गर्म तेल मिलाने से भी पकौड़े तेल नहीं पीते और लंबे समय तक क्रिस्पी रहते हैं. सामग्री धुली या छिलके वाली मूंग दाल – 1 कप (3-4 घंटे भीगी हुई) चावल का आटा या सूजी – 2 बड़े चम्मच (सीक्रेट सामग्री) हरी मिर्च – 2-3 (बारीक कटी हुई) अदरक – 1 इंच टुकड़ा (घिसा हुआ) हरा धनिया – आधा कप (बारीक कटा हुआ) साबुत धनिया और सौंफ – 1 छोटा चम्मच (दरदरा कुटा हुआ) हींग – 1 चुटकी लाल मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच गरम तेल – 1 बड़ा चम्मच (बैटर में मिलाने के लिए) नमक – स्वादानुसार तेल – तलने के लिए बनाने का तरीका भीगी हुई मूंग दाल का पूरा पानी निकालकर उसे मिक्सर में बिना पानी (या सिर्फ 1-2 चम्मच पानी) डाले दरदरा पीस लें. ध्यान रहे, पेस्ट को एकदम बारीक नहीं करना है. पिसी हुई दाल को एक बड़े बर्तन में निकालें और 3-4 मिनट तक एक ही दिशा में अच्छी तरह फेंटें. इससे दाल हल्की हो जाएगी और पकौड़े अंदर से जालीदार बनेंगे. अब इस बैटर में 2 चम्मच चावल का आटा मिलाएं. साथ ही इसमें 1 बड़ा चम्मच गर्म तेल डालें. यह ट्रिक पकौड़ों को बाहर से क्रिस्पी बनाएगी और वह एक्स्ट्रा तेल नहीं सोखेंगे. अब बैटर में कटी हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, कुटा हुआ साबुत धनिया-सौंफ, हींग, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. एक कढ़ाई में तेल गरम करें. तेल मध्यम से तेज गरम होना चाहिए. अब हाथों से या चम्मच से छोटे-छोटे पकौड़े तेल में डालें. पकौड़ों को मीडियम आंच पर अलट-पलट कर सुनहरा और करारा होने तक तल लें. आंच को बहुत धीमा न रखें, नहीं तो पकौड़े तेल सोख सकते हैं. तैयार हैं आपके एकदम करारे, बिना तेल पिए और क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े. इन्हें तीखी हरी चटनी और गरम चाय के साथ सर्व करें.

Women’s T20 World Cup 2026: Doodle से लेकर लाइव स्ट्रीमिंग तक, जानें पूरी डिटेल्स

ICC Women’s T20 World Cup शुरू होने से पहले Google ने एक खास Doodle जारी किया है. 12 जून को लॉन्च किए गए इस रंग-बिरंगे डूडल में क्रिकेट स्टंप्स, बेल्स और गेंद को दिखाया गया है, जो टूर्नामेंट के पहले दिन का जश्न मनाते हैं. Google ने डूडल के साथ बताया कि 2026 ICC Women’s T20 World Cup शुरू हो चुका है. टी20 क्रिकेट की एनर्जी और रोमांच से जुड़ा है. यह डूडल उन जरूरी क्रिकेट के सामान को दर्शाता है, जिनके साथ दुनिया की बेहतरीन टीमें खिताब जीतने की कोशिश करेंगी. इन देशों में दिखेगा Doodle यह खास डूडल भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा. इनमें श्रीलंका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, जमैका, गुयाना, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, त्रिनिदाद और टोबैगो, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस, एंटीगुआ और बारबुडा और डोमिनिका शामिल हैं. Google का यह डूडल महिला क्रिकेट के सबसे बड़े मंच की शुरुआत को और भी खास बना रहा है. इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच होगा टूर्नामेंट का पहला मुकाबला 12 जून को यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर होगा. टूर्नामेंट का पहला मैच इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा. यह मुकाबला एजबेस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा, लेकिन मैच शुरू होने से पहले दर्शकों को शानदार ओपनिंग सेरेमनी का भी मजा मिलेगा. इस खास मौके पर मशहूर वेस्ट एंड म्यूजिकल ‘Wicked’ की 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया जाएगा. म्यूजिकल की कलाकार एम्मा किंग्स्टन और जिजी स्ट्रेलन, जो एल्फाबा और ग्लिंडा की भूमिका निभाती हैं, पूरी कास्ट के साथ शानदार परफॉर्मेंस देंगी. टूर्नामेंट के आगाज से पहले सभी 12 टीमों के कप्तानों ने लंदन के ऐतिहासिक वाटरलू ब्रिज पर आयोजित ‘कैप्टेन्स कार्निवल’ में हिस्सा लिया. मैच स्थानीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा, जबकि भारतीय क्रिकेट फैंस इस मुकाबले का लुत्फ रात 11:00 बजे से उठा सकेंगे. भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मैच कहां देखें? अगर आप भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मुकाबलों का मजा लेना चाहते हैं, तो मैचों का लाइव टेलीकास्ट Star Sports के चैनलों पर देखा जा सकता है. वहीं, मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर लाइव स्ट्रीमिंग के लिए JioHotstar ऐप सबसे आसान ऑप्शन रहेगा. भारतीय टीम अपना पहला मैच 14 जून को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगी. इसके बाद टीम इंडिया ग्रुप स्टेज में कई अहम मैच खेलेगी, जबकि उसका आखिरी ग्रुप मुकाबला 28 जून को लंदन के आइकोनिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होगा.

गर्मी में चावल या रोटी? एक्सपर्ट्स ने बताया दोपहर के लिए क्या है बेहतर विकल्प

देश में गर्मी अभी भी अपने चरम पर है और उमस भी लगातार बनी हुई है. गर्मी में अक्सर लोगों का डाइजेशन कमजोर या सुस्त हो जाता है और ऐसे में लोग चाहते हैं कि वो हल्का भोजन करें इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स गर्मियों में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाने की सलाह देते हैं. भारतीय घरों में चावल और रोटी, दोनों ही थाली का अहम हिस्सा हैं. लेकिन जब बात भयंकर गर्मी की हो तो अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि क्या खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं चावल और रोटी में से क्या खाना अधिक बेहतर है. डाइजेशन में क्या बेहतर? गर्मियों में भारी भोजन पचाना शरीर के लिए एक बड़ा टास्क होता है. मेडिकल रिपोर्ट्स का कहना है कि चावल में फाइबर की मात्रा गेहूं की रोटी के मुकाबले काफी कम होती है. कम फाइबर होने की वजह से चावल को पचाना आसान है. ऐसे लोग जिन्हें गर्मी के दिनों में ब्लोटिंग, गैस या बदहजमी की शिकायत रहती है, उनके लिए दोपहर के समय चावल खाना रोटी की तुलना में अधिक हल्का साबित होता है. वॉटर कंटेंट और बॉडी टेम्परेचर हेल्थलाइन का कहना है कि पानी से भरपूर फूड्स शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं. चावल को पकाते समय वह पानी की भारी मात्रा को सोखता है. दोपहर में चावल खाने से शरीर को थोड़ा एक्स्ट्रा हाइड्रेशन मिलता है जबकि रोटी सूखी होती है और इसे पचाने के लिए शरीर को अपने अंदर के पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसलिए वॉटर कंटेंट के मुताबिक, चावल खाना सही माना जाता है. न्यूट्रिशन और फाइबर भले ही चावल पचाने में आसान हो लेकिन न्यूट्रिशन वैल्यू के मामले में रोटी को कम नहीं आंका जा सकता. हेल्थलाइन का कहना है साबुत गेहूं की रोटी में फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स जैसे फास्फोरस और मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होते हैं. रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चावल से कम होता है यानी कि यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक नहीं बढ़ाती. हालांकि, गर्मी के लंच में अगर आप चावल खा रहे हैं तो इसके साथ दाल और हरी सब्जियां जरूर खाएं ताकि न्यूट्रिशन बैलेंस बना रहे. दोपहर के लिए क्या है बेस्ट? समर सीजन में दोपहर के खाने के लिए स्लीपिंग और हेल्थ एक्सपर्ट्स चावल को थोड़ा बेहतर मानते हैं क्योंकि यह पेट को ठंडक देता है. लेकिन अगर आप वेट लॉस जर्नी पर हैं या डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको चावल की मात्रा पर कंट्रोल रखना होगा. आप चाहें तो दोपहर में ब्राउन राइस का ऑपशन भी चुन सकते हैं. सबसे बेस्ट तरीका यह है कि आप अपनी फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से डाइट तय करें, लेकिन गर्मियों के लंच को जितना हो सके हल्का खाना खाएं.

भारतीय पुरुषों में बढ़ती तोंद का बड़ा कारण, खराब डाइट और लाइफस्टाइल जिम्मेदार

भारत में पुरुषों का मोटापा और बाहर निकली हुई तोंद आज के समय में काफी कॉमन समस्या बन चुकी है. जहां पहले कुछ लोग ही ओवरवेट होते थे, वहीं आजकल कम उम्र के लोगों में भी पेट बाहर आने की समस्याएं दिख रही हैं, जबकि वेस्टर्न देशों के पुरुष बढ़ती उम्र में भी काफी फिट और मस्कुलर नजर आते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कोई जेनेटिक जादू नहीं बल्कि हमारी रोजाना की खराब आदतें और डाइट पैटर्न जिम्मेदार हैं. यदि समय रहते इन गलत आदतों को सुधार लिया गया तो आप भी तोंद कम कर सकते हैं और बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन उससे पहले भारतीयों की तोंद निकलना का कारण समझ लीजिए. कम प्रोटीन और ज्यादा कार्ब्स की आदत भारतीय पुरुषों के मोटे होने का सबसे बड़ा कारण उनका खानपान है. दरअसल, भारतीयों की डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे रोटी, चावल) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. वहीं इसके विपरीत वेस्टर्न पुरुष हाई प्रोटीन और एक बैलेंस्ड डाइट को फॉलो करते हैं. इसके अलावा भारतीय पुरुष दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट और नमकीन खाते हैं जो शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी स्टोर करता है. वेस्टर्न लाइफस्टाइल में प्रोसेस्ड फूड और मीठे का सेवन काफी सीमित मात्रा में किया जाता है. खराब ईटिंग टाइमिंग और सिटिंग लाइफस्टाइल भारतीय वर्किंग कल्चर में ज्यादातर पुरुषों की लाइफस्टाइल बैठने वाली हो चुकी है जिसमें फिजिकल मूवमेंट बहुत कम होता है. सबसे बड़ी गड़बड़ी रात के खाने के समय में होती है. भारतीय घरों में अक्सर देर रात 10 या 11 बजे हैवी डिनर किया जाता है और लोग तुरंत सो जाते हैं. वहीं, वेस्टर्न देशों में लोग शाम को 7 से 8 बजे तक अपना लाइट डिनर पूरा कर लेते हैं. देर से खाने और कम एक्टिविटी के कारण कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और वह सीधे पेट के आसपास फैट के रूप में जमा होने लगती है. कम नींद, भारी स्ट्रेस और पानी की कमी मोटापे का सीधा कनेक्शन मेंटल हेल्थ और स्लीपिंग पैटर्न से भी है. भारतीय पुरुष अक्सर काम के प्रेशर में ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं और मात्र 5-6 घंटे की अधूरी नींद लेते हैं, जिससे हार्मोनल इंबैलेंस होने लगता है. वहीं वेस्टर्न लाइफस्टाइल में बेहतर स्ट्रेस मैनेजमेंट और 7-8 घंटे की गहरी नींद को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा भारतीय पुरुषों की डाइट में फाइबर और पानी की भारी कमी देखी जाती है जिससे डाइजेशन सुस्त हो जाता है. तोंद कम करने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट्स का कहना है, यदि आप भी बाहर निकलती तोंद को अंदर करना चाहते हैं तो सिर्फ क्रैश डाइट करने से काम नहीं चलेगा. इसके लिए आपको अपनी आदतें बदलनी होंगी. हर मील में अंडे, पनीर या दाल जैसे प्रोटीन के ऑप्शंस शामिल करें. रोजाना कम से कम 8 से 10 हजार स्टेप्स पैदल चलने की आदत डालें. चीनी, मीठी चाय और जंक फूड को अपनी लाइफ से तुरंत कम करें. रात का डिनर हर हाल में 7-8 बजे तक खत्म कर लें और 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें. इसके साथ ही हफ्ते में 4 से 5 दिन वर्कआउट जरूर करें.