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30 हजार से कम में लॉन्च हुआ फ्लिप फोन! Ai+ Nova Flip 5G ने मचाई हलचल

 क्या आप काफी समय से एक फ्लिप फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं? लेकिन इसकी ज्यादा कीमत की वजह से रुक रहे थे तो अब आपके पास शानदार मौका है। एक महीने के इंतजार के बाद, Ai+ Nova Flip 5G फोन अब भारत में खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया है। जी हां, आप इसे 30 हजार रुपये से कम कीमत में खरीद सकते हैं। कंपनी ने 2025 में Ai+ के पहले फ्लिप फोन के तौर पर टीज किया था। वहीं कुछ ही वक्त पहले कंपनी ने इसे भारत में लॉन्च किया है। अब आप बेझिझक इस फोन को खरीद सकते हैं। ये डिवाइस शानदार फीचर्स से लैस है जो महंगे स्मार्टफोन को भी टक्कर दे रहा है। फोन में MediaTek प्रोसेसर, 50-मेगापिक्सल कैमरा और AMOLED डिस्प्ले है। चलिए इसकी कीमत और इसके मुख्य फीचर्स पर एक नजर डालते हैं। Ai+ Nova Flip 5G की कीमत और ऑफर कीमत की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G की कीमत इसके एकमात्र मॉडल के लिए 29,999 रुपये है जिसमें आपको 8GB/256GB वेरिएंट मिलता है। Ai+ ने कन्फर्म किया है कि ये कीमत एक शुरुआती लॉन्च ऑफर का हिस्सा है। डिवाइस सिर्फ Flipkart पर ही खरीदने के लिए उपलब्ध है। फोन को आप सिंगल कलर Glacier White में खरीद सकते हैं।     Ai+ Nova Flip 5G के स्पेसिफिकेशन स्पेसिफिकेशन की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G में अंदर की तरफ 6.9-इंच की AMOLED मेन स्क्रीन मिलती है। इसका रिफ्रेश रेट 120Hz और PPI डेंसिटी 443 है। साथ ही डिवाइस में 1,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिल रही है। बाहर की तरफ फोन में 3-इंच की OLED डिस्प्ले मिल रही है। हालांकि इसका रिफ्रेश रेट 60Hz तक है और ब्राइटनेस 900 निट्स तक जा सकती है। फोन की मोटाई ओपन करने पर सिर्फ 7.2mm और वजन 193 ग्राम है। इसका बाहरी पैनल Nubia Flip 2 जैसा ही दिखाई देता है, जिसमें एक गोल कवर डिस्प्ले, डुअल-कैमरा रिंग और LED फ्लैश मिल रही है। इसका डिजाइन जाने-पहचाने, कॉम्पैक्ट और फोल्डेबल लेआउट पर बेस्ड है। साथ ही फोन का फ्रेम भी काफी पतला और हल्का है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें MediaTek का 4nm Dimensity 7300X चिपसेट मिल रहा है। साथ ही इसमें ARM Cortex-A78 कोर पर बेस्ड ऑक्टा-कोर CPU है। डिवाइस 8 GB तक RAM और 256 GB इंटरनल स्टोरेज ऑफर कर रहा है। इसके अलावा फोन में 4,325mAh की बैटरी मिल रही है। Ai+ Nova Flip 5G के कैमरा स्पेक्स कैमरा की बात करें तो फोन में 50 MP का प्राइमरी रियर कैमरा और उसके साथ 2 MP का सेकेंडरी लेंस मिल रहा है। जबकि सामने की तरफ फोन में प्राइमरी डिस्प्ले पर एक होल-पंच कटआउट के अंदर 32 MP का सेल्फी कैमरा मिल रहा है। सुरक्षा के लिए फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट है, जिससे फोन को जल्दी से एक्सेस किया जा सकता है।  

छाछ और लस्सी में कौन ज्यादा फायदेमंद? गर्मी में सेहत के लिए सही विकल्प जानें

 भयंकर गर्मी और धूप में शरीर को अंदर से ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय छाछ (Buttermilk) और लस्सी (Lassi) जैसे ट्रेडिशनल ऑप्शंस हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं. दही से बनी ये दोनों चीजें न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इन दोनों में से ज्यादा असरदार कौन है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. छाछ (Buttermilk) छाछ यानी मट्ठा में कैलोरी काफी कम होती है और इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है. छाछ में पोटैशियम और विटामिन B12 जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पसीने के जरिए शरीर से निकले मिनरल्स की कमी को तुरंत पूरा करते हैं. छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं. गर्मी में लू से बचने के लिए छाछ एक नेचुरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करती है. लस्सी (Lassi) लस्सी छाछ के मुकाबले काफी गाढ़ी और हैवी होती है. इसमें दही की मात्रा ज्यादा होती है जो प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है. रिपोर्ट के मुताबिक, लस्सी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है. अगर आप मीठी लस्सी पीते हैं तो यह ग्लूकोज लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वजन कम करने वालों के लिए इसकी कैलोरी अधिक हो सकती है. लस्सी मांसपेशियों की रिकवरी और हड्डियों की मजबूती के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है. पाचन के लिए कौन है ज्यादा असरदार? अगर डाइजेशन की बात करें तो छाछ को लस्सी से अधिक फायदेमंद मानी जाती है. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीने से डाइजेशन अच्छा होता है,  शरीर के तापमान कम होता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. वहीं, लस्सी को पचाने में शरीर को थोड़ा अधिक समय लगता है इसलिए इसे सुबह या दोपहर के समय पीना बेहतर होता है. रात के समय लस्सी पीने से सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? तपती धूप में जब आपका शरीर पानी खो रहा हो, तो छाछ सबसे बेहतरीन ऑप्शंस है. फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और गट हेल्थ को सुधारने में मददगार होते हैं. अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं तो मसाला छाछ आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप एक मील रिप्लेसमेंट या भारी वर्कआउट के बाद कुछ हेल्दी चाहते हैं तो लस्सी एक शानदार चॉइस हो सकती है. कुल मिलाकर हाइड्रेशन के लिए छाछ और पोषण के लिए लस्सी का अपना-अपना महत्व है.

मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, ये 5 जरूरी हेल्थ टेस्ट हैं बेहद अहम

 मदर्स डे पर मां के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट उनकी अच्छी सेहत हो सकती है क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और फिजिकल बदलाव आते हैं. अक्सर हमारी मां घर की जिम्मेदारियों को छोड़ अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन 40 और 50 की उम्र के बाद कुछ बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस मदर्स डे पर आप उन्हें हेल्थ चेकअप का तोहफा दे सकते हैं. समय पर कराए गए ये 5 जरूरी टेस्ट उन्हें भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं और उनकी लंबी उम्र सुनिश्चित कर सकते हैं.   ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ चेकअप बढ़ती उम्र में हाई ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है. क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, महिलाओं को रेगुलर ब्लड प्रेशर चेकअप और हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग करानी चाहिए ताकि स्ट्रोक या दिल के दौरे जैसी स्थिति से बचा जा सके. मैमोग्राम (ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग) महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मोया क्लीनिक हेल्थकेयर की गाइडलाइंस कहती हैं कि 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को हर 1 से 3 साल में मैमोग्राम कराना चाहिए. यह टेस्ट शुरुआती स्टेज में ही गांठ का पता लगा लेता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं. मेडिलाइन प्लस के मुताबिक, 65 साल की उम्र के बाद या मेनोपॉज के दौरान हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए DEXA स्कैन बहुत जरूरी है ताकि फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सके. सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए पैप स्मीयर और HPV टेस्ट अनिवार्य हैं. सलाह है कि 30 से 65 साल की महिलाओं को हर 5 साल में HPV के साथ को-टेस्टिंग करानी चाहिए. यह टेस्ट कैंसर बनने से पहले ही सेल्स में होने वाले बदलावों को पकड़ लेता है. लिपिड प्रोफाइल खराब लाइफस्टाइल और उम्र के कारण टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बना रहता है. हेल्थलाइन के अनुसार, 45 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में ब्लड शुगर टेस्ट और हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए ताकि शरीर में शुगर और फैट का लेवल कंट्रोल में रहे.

क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर, 3 मौतों के बाद WHO ने जारी किया अलर्ट

 कोरोना वायरस के बाद अब एक नए वायरस हंतावायरस (Hantavirus) ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. क्रूज शिप पर हंतावायरस के प्रकोप से 3 लोगों की मौत के बाद अलर्ट जारी किया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है. हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है, लेकिन इस बार इसके इंसानों से इंसानों में फैलने की आशंका ने एक्सपर्ट्स की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि यह वायरस फेफड़ों और किडनी पर सीधा हमला करता है, जिससे मरीज की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है. WHO का इस बारे में क्या कहना है और इसके लक्षण क्या हैं, इस बारे में जानना भी जरूरी है. क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार,  शिप पर अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है. यह जहाज दक्षिण अटलांटिक में था जब यात्रियों में बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण देखे गए. फिलहाल जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स पर खड़ा है और संक्रमितों को आइसोलेट किया गया है. जलवायु परिवर्तन और बढ़ता खतरा द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों का उन इलाकों में एक्सपोजर बढ़ रहा है जहां चूहे पाए जाते हैं. गर्मी बढ़ने के कारण ये जीव नए ठिकानों की तलाश में इंसानी बस्तियों या जहाजों तक पहुंच रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का रिस्क बढ़ गया है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह वायरस हवा के जरिए आसानी से नहीं फैलता, लेकिन पर्यावरण में बदलाव इसकी पहुंच बढ़ा रहे हैं. कैसे पहचानें हंतावायरस के लक्षण? आमतौर पर हंतावायरस संक्रमित चूहे के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है. हालांकि, इस बार एंडिस वायरस स्ट्रेन की पुष्टि हुई है. मायो क्लीनिक के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला यह स्ट्रेन सीमित परिस्थितियों में एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है. क्रूज शिप पर संक्रमण फैलने का यही मुख्य कारण माना जा रहा है. CDC और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हंतावायरस के लक्षण शुरुआत में आम फ्लू जैसे लगते हैं, जिससे इसे पहचानना मुश्किल होता है. इसमें मसल्स से दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और पेट की समस्याएं हो सकती हैं. संक्रमण के बढ़ने पर यह फेफड़ों को प्रभावित करता है जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है. इसका मृत्यु दर काफी अधिक है इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है. क्या नई महामारी बन सकता है? WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस ने हंतावायरस को लेकर दुनिया के डर को कम करने की कोशिश की है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कोरोना जैसी स्थिति नहीं है और आम लोगों के लिए इसका खतरा फिलहाल बहुत कम है डॉ. टेड्रोस ने कहा, 'लोग हंतावायरस की तुलना कोविड-19 से न करें. मैं और मेरे साथी विशेषज्ञ पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि इस वायरस से पब्लिक हेल्थ को होने वाला खतरा फिलहाल काफी कम है. इसे लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह कोरोना की तरह बड़े स्तर पर फैलने वाली महामारी नहीं है. संक्रमण को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जहाज पर अब कोई भी यात्री लक्षण नहीं दिखा रहा है.' बचाव ही एकमात्र इलाज हंतावायरस के लिए फिलहाल कोई विशेष वैक्सीन या सटीक एंटी-वायरल इलाज उपलब्ध नहीं है. एक्सपर्ट की सलाह है कि संक्रमण का पता चलते ही मरीज को तुरंत ICU में भर्ती करना चाहिए. ऑक्सीजन सपोर्ट और हाइड्रेशन के जरिए ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. चूहों से दूरी बनाना और साफ-सफाई रखना ही इससे बचने का सबसे कारगर तरीका है.

चीन की अदालत का बड़ा फैसला: AI के नाम पर नौकरी नहीं जाएगी

AI आएगा तो नौकरी जाएगी. ये डर अब तक सिर्फ बहस में था, लेकिन अब इस पर एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. चीन की एक अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ जाने से किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं जा सकता है. इस फैसले के बाद टेक कंपनियों की स्ट्रैटिजी और कर्मचारियों की सुरक्षा, दोनों पर नई चर्चा शुरू हो गई है. पूरा मामला चीन के हांगझोउ शहर की एक कंपनी से जुड़ा है. गौरतलब है कि हांगझोउ चीन का वही शहर है जहां से दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां निकली हैं. अली बाबा और डीपसीक जैसी कंपनियां भी इसी शहर से निकली हैं. परेशान हो कर इंप्लॉइ ने किया मुकदमा इसी शहर में एक कर्मचारी का काम धीरे-धीरे AI टूल्स और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स की वजह से कम हो गया. कंपनी ने सोचा कि अब इंसान की जगह मशीन से काम लिया जा सकता है. इसके बाद उस कर्मचारी को दूसरी पोस्ट ऑफर की गई, लेकिन उस नए रोल में सैलरी काफी कम थी और काम की शर्तें भी अलग थीं. कर्मचारी ने इसे मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया. मामला कोर्ट पहुंचा और यहीं से कहानी पलट गई. अदालत ने साफ कहा कि कंपनी का ये कदम सही नहीं था. सिर्फ इस आधार पर कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वही काम कर सकता है, किसी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जा सकता. AI के नाम पर ना हों जॉब कट कोर्ट ने अपने फैसले में एक अहम बात कही, टेक्नोलॉजी बदलना कंपनी का हक है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकार उससे खत्म नहीं हो जाते. अगर कंपनी ऑटोमेशन या AI अपना रही है, तो उसे लेबर कानूनों का भी पालन करना होगा. यानी कंपनी सीधे-सीधे ये नहीं कह सकती कि 'अब AI आ गया है, तुम्हारी जरूरत नहीं है' इस फैसले का मतलब ये भी है कि कंपनियों को कर्मचारियों के साथ सही तरीके से व्यवहार करना होगा. अगर रोल बदलना है, तो जायज सैलरी और शर्तें देनी होंगी. अगर नौकरी खत्म करनी है, तो उसके लिए वैलिड वजह और प्रक्रिया जरूरी होगी. सिर्फ AI सस्ता है ये वजह काफी नहीं मानी जाएगी. दिलचस्प बात ये है कि अदालत ने कर्मचारियों के लिए भी एक संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट करना जरूरी है. यानी AI को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि इंसानों को बिना वजह बाहर कर दिया जाए. गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले 2024 में गुआंझु की एक अदालत ने इसी तरह के एक केस में कहा था टेक्नोलॉजी अपग्रेड किसी की जॉब खत्म करने की वजह नहीं बन सकता है. चीन फिलहाल कई अलग अलग फ्रंट पर प्लान कर रहा है. इसमें अलग प्रोविजन बनाए जा रहे हैं जिससे AI बूम के बावजूद लोगों की जॉब्स पर ज्यादा असर नहीं पड़़ेगा. इस फैसले की चर्चा अब चीन तक सीमित नहीं है. दुनिया भर में Microsoft, Google, Amazon जैसी कंपनियां AI पर तेजी से काम कर रही हैं. कई जगहों पर लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है. ऐसे में चीन की अदालत का ये रुख कर्मचारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या दूसरे देशों में भी ऐसा ही रुख देखने को मिलेगा? क्या भविष्य में AI और नौकरियों को लेकर नए कानून बनेंगे? क्योंकि आने वाले समय में AI का असर हर सेक्टर, मीडिया, टेक, कस्टमर सपोर्ट, यहां तक कि क्रिएटिव फील्ड्स पर पड़ने वाला है. AI बनाम नौकरी की ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन चीन के इस फैसले ने इतना जरूर तय कर दिया है कि टेक्नोलॉजी की दौड़ में इंसानों के अधिकारों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

LG ने लॉन्च की 2026 होम अप्लायंसेस रेंज, जानें नए फीचर्स और कीमतें

LG ने 2026 के लिए अपनी नई होम अप्लायंसेस रेंज लॉन्च कर दी है. कंपनी ने इस बार फोकस सिर्फ प्रीमियम सेगमेंट पर नहीं रखा, बल्कि अफोर्डेबल-प्रीमियम सेगमेंट को भी काफी मजबूत किया है. इस लॉन्च में कंपनी ने Essential Series में कुछ नए प्रोडक्ट्स ऐड किए हैं, जिसे अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था. अब इसमें ज्यादा डिजाइन, अलग-अलग कैपेसिटी और अलग प्राइस रेंज जोड़ी गई है ताकि ज्यादा लोग इसे खरीद सकें. इसके साथ ही प्रीमियम कैटेगरी में भी कई नए प्रोडक्ट्स लाए गए हैं, जो बड़े घरों और एडवांस फीचर्स चाहने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. LG का कहना है कि यह पूरा पोर्टफोलियो भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यानी ऐसे फीचर्स जो रोजमर्रा की जिंदगी में काम आएं और लंबे समय तक भरोसेमंद रहें. भारत में से एक्सपोर्ट करेगी कंपनी कंपनी अब भारत से बाहर भी इन प्रोडक्ट्स को भेजने की तैयारी में है. 2026 में Essential Series को एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के 22 देशों में एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रखा गया है. रेफ्रिजरेटर की बात करें तो Essential Series में 225 लीटर, 251 लीटर और 276 लीटर के नए ऑप्शन जोड़े गए हैं. इनमें स्मार्ट इनवर्टर कंप्रेसर दिया गया है, जिससे बिजली की खपत कम होती है और आवाज भी कम आती है. स्मार्ट मोड खुद ही यूजर के इस्तेमाल के हिसाब से कूलिंग को एडजस्ट करता है. इसके अलावा कनवर्टिबल फीचर के साथ डेयरी मोड भी दिया गया है, जिससे फ्रीजर को जरूरत के हिसाब से फ्रिज में बदला जा सकता है. टर्बो फ्रेश जोन खाने को ज्यादा समय तक ताजा रखने में मदद करता है. इनकी शुरुआती कीमत करीब ₹25,500 रखी गई है. नए फीचर्स के साथ वॉशिंग मशीन वॉशिंग मशीन में भी कंपनी ने काफी बदलाव किए हैं. Essential Series में 8 किलो से 10 किलो तक की नई टॉप लोड मशीनें आई हैं. लो प्रेशर फिल फीचर कम पानी में भी कपड़े धोने में मदद करता है, जबकि इंटेलिजेंट ऑटो स्टार्ट बिजली जाने के बाद भी मशीन को वहीं से चालू कर देता है. इको वॉश और साड़ी मोड जैसे ऑप्शन भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं. इस रेंज की कीमत ₹20,900 से शुरू होती है. इसके अलावा AX सीरीज की सेमी ऑटोमेटिक मशीनें भी लाई गई हैं, जिनकी कैपेसिटी 8 किलो से 12 किलो तक है. इसमें डुअल स्पिन शावर और रोलर जेट प्लसेटर जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कपड़ों की गहरी सफाई में मदद करते हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹17,300 है. कुकिंग अप्लायंसेस में LG ने 28 लीटर के कनवर्टिबल कन्वेक्शन ओवन पेश किए हैं. इसमें एयर फ्राइ फीचर दिया गया है, जिससे कम तेल में खाना बनाया जा सकता है. चारकोल लाइटिंग हीटर टेक्नोलॉजी खाने का स्वाद बेहतर बनाती है. इसमें 330 से ज्यादा ऑटो कुक मेन्यू दिए गए हैं, जिनमें 28 भारतीय ब्रेड मेन्यू भी शामिल हैं. इसकी कीमत करीब ₹28,700 से शुरू होती है. 1.18 लाख रुपये का फ्रिज प्रीमियम सेगमेंट में कंपनी ने फ्रेंच डोर रेफ्रिज्रेटर लॉन्च किया है, जिसकी सबसे खास बात ऑटो आइस मेकर है, जो बिना पाइप कनेक्शन के बर्फ बना सकता है. इसकी कैपेसिटी 574 लीटर से 610 लीटर तक है और इसमें InstaView Door-in-Door, Hygiene Fresh+ और AI ThinQ जैसे स्मार्ट फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹1.18 लाख है. इसके साथ साइड बाइ साइड फ्रिज भी आए हैं, जिनकी कैपेसिटी 790 लीटर तक जाती है. इनकी कीमत ₹1.09 लाख से शुरू होती है. प्रीमियम वॉशिंग मशीन में AI DD 2.0 टेक्नोलॉजी दी गई है, जो कपड़े के फैब्रिक और गंदगी को पहचानकर खुद ही सही वॉश सेटिंग चुनती है. इसमें Steam+ और माइक्रोप्लास्टि केयर जैसे फीचर्स भी हैं. इस रेंज की कीमत ₹62,900 से शुरू होती है. मिड सेगमेंट में TX सीरीज की टॉप लोड मशीनें आई हैं, जिनमें हार्ड वॉटर वॉश और स्टेन क्लीन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹32,400 है. डिशवॉशर सेगमेंट में LG ने 15 प्लेस सेटिंग वाला ट्रू स्टीम डिशवॉशर लॉन्च किया है, जो भारतीय बर्तनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें QuadWash टेक्नोलॉजी दी गई है, जिससे हर एंगल से सफाई होती है. इसकी कीमत ₹73,500 है. इसके अलावा कंपनी ने नए वॉटर प्यूरीफायर भी पेश किए हैं, जिनमें UV स्टेरिलाइजेशन और 7+ pH बैलेंस्ड पानी जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹16,600 है.

पंजाब की शाही पेड़े वाली लस्सी, गर्मी में देती है ठंडक और ऊर्जा

पंजाब अपनी मेहमाननवाजी और खानपान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां की पेड़े वाली लस्सी साधारण लस्सी से थोड़ी अलग और शाही होती है. यह लस्सी न केवल गाढ़ी और मलाईदार होती है बल्कि इसमें घुले हुए दूध के पेड़े इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं. चिलचिलाती गर्मी में एक गिलास पेड़े वाली लस्सी पीते ही शरीर को गजब की ठंडक और ऊर्जा मिलती है. पंजाब में लस्सी को सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि खुराक माना जाता है. पेड़े वाली लस्सी की शुरुआत अमृतसर और पटियाला जैसे शहरों से हुई. इसमें ताजे दही के साथ दूध को जलाकर बनाए गए खोया के पेड़े को मसलकर डाला जाता है. यह लस्सी आम लस्सी के मुकाबले काफी भारी और पौष्टिक होती है. इसमें ऊपर से डाली गई गाढ़ी मलाई की परत और सूखे मेवे इसे एक डेजर्ट जैसा अहसास देते हैं. पेड़े वाली लस्सी के लिए तैयार कर लें ये चीजें ताजा दही: 2 कप (गाढ़ा) दूध के पेड़े: 3-4 (मैश किए हुए) चीनी: 2 बड़े चम्मच (स्वादानुसार, क्योंकि पेड़ों में भी मिठास होती है) इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच ठंडा दूध: आधा कप मलाई: ऊपर से डालने के लिए (ताजी) गार्निशिंग के लिए: बारीक कटे बादाम, पिस्ता और केसर के धागे बनाने का तरीका एक बड़े बर्तन या मिक्सी जार में गाढ़ा दही और मैश किए हुए पेड़े डालें. पारंपरिक स्वाद के लिए इसे मथनी से मथें. अगर मिक्सी का उपयोग कर रहे हैं, तो बहुत कम चलाएं ताकि दही से मक्खन अलग न हो. अब इसमें चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा ठंडा दूध मिलाएं. इसे तब तक मथें जब तक कि पेड़े दही के साथ अच्छी तरह मिल न जाएं और झाग न बन जाए. लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ या लंबे स्टील के गिलास में निकालें. ऊपर से एक बड़ी चम्मच ताजी मलाई डालें, फिर कटे हुए सूखे मेवे और केसर से इसे सजाएं.

गुलाब जल आइस क्यूब से स्किन को मिलता है नेचुरल ग्लो और ठंडक

गुलाब जल सदियों से भारतीय स्किन केयर का अहम हिस्सा रहा है. लोग इसे फेस पैक में मिलाकर, टोनर के रूप में या क्लींजर की तरह इस्तेमाल करते हैं.  यह स्किन से जुड़ी समस्याओं को कम करने, उसे हाइड्रेट रखने और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है. आज हम आपको घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाने का आसान तरीका बताएंगे. ये क्यूब्स स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ उसे फ्रेश और ग्लोइंग बनाने में भी मदद करते हैं. आइए जानते हैं घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स कैसे बना सकते हैं और इसे चेहरे पर लगाने का सही तरीका क्या है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 2-3 चम्मच गुलाब जल 4-5 गुलाब के पत्तियां आइस ट्रे गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाएं कैसे?     गुलाब जल आइस क्यूब बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियों को तोड़कर अच्छे से धो लें.     इसके बाद एक बाउल लें और इसमें गुलाब जल डालें.     अब इसमें गुलाब की पंखुड़ियों को डालिए और अच्छे से मिलाएं. जरूरत हो तो थोड़ा पानी भी मिला लें.     अब इस मिश्रण को आइस ट्रे में डालें और जमाने के लिए फ्रिज में रख दें.     जब क्यूब्स अच्छी तरह जम जाएं तो आपका गुलाब जल आइस क्यूब तैयार है.     इस आइस क्यूब्स को साफ चेहरे पर लगाकर मसाज करें. गुलाब जल आइस क्यूब्स  चेहरे पर कैसे लगाएं ? गुलाब जल आइस क्यूब्स चेहरे पर लगाने से पहले फेस को अच्छे से साफ कर सुखा लें. अब एक आइस क्यूब लेकर उसे हल्के-हल्के गोल घुमाते हुए पूरे चेहरे पर मसाज करें. मसाज के बाद चेहरे को वैसे ही छोड़ दें. थोड़ी देर बाद चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगा लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में दो से तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं. इन बातों का रखें ध्यान इन आइस क्यूब्स को आप 10-15 दिन तक फ्रिज में रखकर इस्तेमाल कर सकते हैं. वैसे तो घर पर बने गुलाब जल आइस क्यूब्स बिल्कुल सेफ होते हैं. लेकिन बहुत ज्यादा सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसके अलावा, जिन लोगों को चेहरे पर पहले से पिंपल्स, एक्ने या स्किन इंफेक्शन की समस्या है, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

बाजार में मिलने वाले घी की शुद्धता पर बढ़ी चिंता, मिलावट से सेहत को खतरा

 भारत में घी सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है. लेकिन हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स में कुछ देसी घी ब्रांड्स में मिलावट सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि बाजार में मिलने वाला घी कितना शुद्ध है और इसे पहचानने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ ऐसे घरेलू तरीके भी हैं जिससे आप असली और नकली घी में फर्क कर सकते हैं. तो आइए उन तरीकों के बारे में जान लीजिए. शुद्ध घी की पहचान क्यों जरूरी? हेल्थलाइन के मुताबिक, मिलावटी या नकली घी में अक्सर वेजिटेबल ऑयल या सस्ते फैट मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे घी का सेवन दिल और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसके अलावा शुद्ध घी में हेल्दी फैट के साथ-साथ जरूरी विटामिन भी होते हैं लेकिन मिलावट कर देने पर इनके फायदे कम हो जाते हैं और नुकसान बढ़ जाते हैं. स्मेल और स्वाद (Smell and Taste) असली घी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है जबकि मिलावटी घी में तेज या अजीब सी गंध आ सकती है. स्वाद भी शुद्ध घी का हल्का मीठा और स्मूद होता है. अगर घी का स्वाद कड़वा या अटपटा लगे तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है. हाथ पर पिघल जाता है (It melts on the hand) एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली घी की कुछ बूंदें हथेली पर रखकर रगड़ें. शुद्ध घी शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है जबकि मिलावटी घी को पिघलने में समय लगता है या फिर वह चिपचिपा महसूस होता है. आयोडीन टेस्ट (Iodine Test) अगर घी में स्टाच या अन्य मिलावट का शक हो तो आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. घी में थोड़ा आयोडीन डालने पर अगर रंग नीला पड़ता है तो उसमें मिलावट मौजूद हो सकती है. यह तरीका घर पर भी आसानी से किया जा सकता है. जमने के तरीके से भी पहचान (Freezing method) घी को फ्रिज में रखकर देखें. शुद्ध घी समान रूप से जमता है, जबकि मिलावटी घी अलग-अलग लेयर में या दानेदार तरीके से जम सकता है. यह संकेत देता है कि उसमें अन्य तेल या फैट मिलाए गए हैं.

Instagram DM से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन हटने का दावा, प्राइवेसी पर उठे सवाल

अगर आप Instagram पर दोस्तों या किसी खास से चैट करते हैं, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. आज यानी 8 मई से इंस्टाग्राम के मैसेज में एन्क्रिप्शन खत्म होने वाला है. कंपनी ने पहले ही ऐलान किया था कि 8 मई से इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज यानी DM से एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म कर दिया जाएगा. अब तक इंस्टाग्राम के DM में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन दिया जाता था, जिसे यूजर खुद ऑन कर सकता था. इस फीचर के चालू होने पर चैट पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रहती थी, यानी सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता था. यहां तक कि कंपनी भी उस कंटेंट को नहीं देख सकती थी. अब एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म होने का मतलब ये है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत देख और पढ़ सकती है. कंपनी ने दलील दी है कि लोगों को अब इंस्टाग्राम में दिए जाने वाले एन्क्रिप्शन में दिलचस्पी नहीं रही और लोग इसे कम यूज कर रहे हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी यूजर्स डेटा पर AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. यूजर्स के प्राइवेट चैटे से Meta करेगा AI को ट्रेन? यही वजह है कि इस फैसले को लेकर प्राइवेसी को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एन्क्रिप्शन हटने से यूजर्स की निजी बातचीत पहले जितनी सुरक्षित नहीं रहेगी. हालांकि, इस फैसले के पीछे Meta का अपना तर्क भी है. टेक कंपनियां अक्सर यह कहती हैं कि एन्क्रिप्शन की वजह से गलत गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है. हालांकि ये कंपनी का दोहरापन दिखाता है, क्योंकि जब कंपनी ने इंस्टाग्राम में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन लाया था तो कहा था कि यूजर्स की प्राइवेसी कंपनी के लिए टॉप पर है, लेकिन अब उसका उल्टा होता हुआ दिख रहा है. रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि कंपनी AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब कंपनी के लिए यूजर्स के चैट पढ़ने और उससे AI को ट्रेन करना आसान होगा. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन की वजह से कंपनी खुद भी यूजर्स के चैट्स ऐक्सेस नहीं कर सकती थी. अब इंस्टाग्राम के चैट्स पढ़ेंगी कंपनी? कई बार अपराध या गलत कंटेंट को ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कंपनियां बैलेंस बनाने की कोशिश करती हैं, जहां सिक्योरिटी भी बनी रहे और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी मदद मिल सके. लेकिन दूसरी तरफ यूजर्स का डर भी जायज है. आज के समय में लोग सोशल मीडिया पर सिर्फ कैजुअल चैट ही नहीं करते, बल्कि कई बार निजी बातें, फोटो, वीडियो और जरूरी जानकारी भी शेयर करते हैं. ऐसे में एन्क्रिप्शन का हटना सीधे तौर पर प्राइवेसी पर असर डाल सकता है. दिलचस्प बात यह है कि WhatsApp, जो कि Meta की ही कंपनी है, वहां एंड टु एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है और कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती है. वहीं इंस्टाग्राम पर यह फीचर पहले ऑप्शनल था और अब उसे हटा दिया गया है. इंस्टाग्राम पर चैटिंग खतरे से खाली नहीं! इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि क्या अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर Meta की प्राइवेसी पॉलिसी अलग-अलग दिशा में जा रही है? टेक इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों से एन्क्रिप्शन को लेकर लगातार बहस चल रही है. एक तरफ यूजर्स अपनी प्राइवेसी चाहते हैं, तो दूसरी तरफ सरकारें और कंपनियां सिक्योरिटी के नाम पर कुछ एक्सेस चाहती हैं. इंस्टाग्राम का यह कदम उसी बहस को और तेज कर सकता है. खासकर उन यूजर्स के लिए जो अपनी चैट को पूरी तरह निजी रखना चाहते हैं, यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब हैकर्स के लिए भी इंस्टाग्राम यूजर्स की चैट पढ़ना आसान हो जाएगा. क्योंकि बिना इस गोल्ड स्टैंडर्ड वाले एन्क्रिप्शन के इन दिनों हैकिंग आसानी से हो सकती है.