samacharsecretary.com

WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने वाला ऐप नहीं रहना चाहता. कंपनी अब इसे एक प्रीमियम प्लेटफॉर्म में बदलने की तैयारी कर रही है. अब कंपन WhatsApp Plus ला रही है. ये दरअसल एक सब्सक्रिप्शन सर्विस है जिसके लिए यूजर्स को पैसे देने होंगे. फिलहाल ये सब्सक्रिप्शन प्लान चुनिंदा आईफोन यूजर्स के लिए रोलआउट होना शुरू हो गया है. पिछले कई महीनों से इसकी चर्चा बीटा वर्जन में हो रही थी, लेकिन अब पहली बार कुछ यूजर्स को इसका एक्सेस मिलने लगा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि काफी समय तक एक फर्जी WhatsApp Plus वायरल होता रहा था. ये ऐप यूजर्स को एक्स्ट्रा फीचर्स दिलाने का दावा करता था, लेकिन बाद में य स्कैम ऐप निकला. लेकिन अब कंपनी खुद ही WhatsApp Plus ला रही है. कंपनी खुद ही लोगों को पहले WhatsApp Plus यूज करने से मना करती रही. कई यूजर्स के अकाउंट परमानेंट ब्लॉक भी हो गए. बहरहाल, कंपनी का नया WhatsApp Plus फीचर सिर्फ कुछ आईफोन यूजर्स को दिख रहा है और धीरे-धीरे बाकी लोगों तक पहुंचाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के पास WhatsApp का लेटेस्ट iOS वर्जन है, उन्हें सेटिंग्स में इसका ऑप्शन दिख सकता है. पैसे देकर मिलेगा क्या? व्हाट्सऐप प्लस का पूरा फोकस ऐप को ज्यादा पर्सनल और कस्टमाइज्ड बनाने पर है. यानी मैसेजिंग और कॉलिंग जैसी बेसिक सुविधाएं अभी भी मुफ्त रहेंगी, लेकिन जो लोग ऐप का लुक और फीचर्स बदलना चाहते हैं, उन्हें एक्स्ट्रा चीजें मिलेंगी. इस नए प्लान में यूजर्स को 18 नए थीम कलर मिलेंगे. अभी व्हाट्सऐप का ज्यादातर इंटरफेस हरे रंग का होता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन के बाद लोग पर्पल, ब्लू, रेड, यलो और कई दूसरे रंग चुन पाएंगे. ऐप के आइकन भी बदले जा सकेंगे. कंपनी करीब 14 नए ऐप आइकन देने वाली है. नए थीम्स, नए स्टिकर्स इसके अलावा प्रीमियम स्टिकर्स भी मिलेंगे जिनमें एनिमेटेड इफेक्ट होंगे. यानी स्टिकर भेजने का एक्सपीरियंस थोड़ा ज्यादा इंटरैक्टिव और विजुअल होगा. कंपनी नए रिंगटोन भी दे रही है ताकि व्हाट्सऐप कॉल बाकी ऐप्स से अलग महसूस हो. एक बड़ा बदलाव पिन चैट्स में देखने को मिलेगा. अभी आम यूजर्स सिर्फ 3 चैट पिन कर सकते हैं, लेकिन WhatsApp Plus लेने के बाद 20 चैट तक पिन की जा सकेंगी. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा काम या बिजनेस चैट्स होती हैं, उनके लिए यह फीचर उपयोगी माना जा रहा है. व्हाट्सऐप ग्रुपिंग और चैट मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ऑफिस नाम से एक चैट लिस्ट बनाई है, तो वह एक साथ सभी ऑफिस चैट्स का थीम, नोटिफिकेशन साउंड और कॉल ट्यून बदल सकेगा. अभी यह सब अलग-अलग करना पड़ता है. 300 रुपये प्रति माह सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप में इसकी कीमत करीब 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है. यानी भारतीय रुपये में लगभग 280 रुपये के आसपास. अलग-अलग देशों में कीमत अलग हो सकती है. कुछ जगहों पर कंपनी ट्रायल भी दे सकती है. हालांकि अभी भारत में इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है. लेकिन टेक रिपोर्ट्स मान रही हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में यह ज्यादा यूजर्स तक पहुंच सकता है. दिलचस्प बात यह भी है कि मेटा अब धीरे-धीरे अपने सभी प्लेटफॉर्म पर पेड फीचर्स बढ़ा रहा है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पहले से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. अब व्हाट्सऐप भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है. फ्यूचर में जरूरी फीचर्स भी पेड कर सकती है कंपनी इस नए मॉडल को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि आज थीम और स्टिकर्स पैसे में मिल रहे हैं, लेकिन फ्यूचर में कहीं जरूरी फीचर्स भी पेड न हो जाएं. आम तौर पर कंपनियां पैसे कमाने के लिए ये स्ट्रैटिजी अपनाती आई हैं. नया सब्सक्रिप्शन ला कर फ्री में मिलने वाले जरूरी फीचर्स पेड कर देती हैं.

AI डीपफेक पर सरकार सख्त, 2 घंटे में कंटेंट हटाने का नया नियम लागू

दरअसल पिछले कुछ सालों में AI डीपफेक और फर्जी इंटीमेट तस्वीरों का मामला तेजी से बढ़ा है. कई लोगों की तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए गए. सरकार सख्त, लेकिन कंपनियां अब भी कर रहीं हैं लापरवाही! खासकर महिलाओं और लड़कियों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. कई मामलों में ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक उत्पीड़न तक की शिकायतें सामने आईं. AI टूल्स की वजह से अब किसी की तस्वीर लेकर कुछ ही मिनटों में नकली वीडियो या फोटो बनाना आसान हो गया है. इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने 2026 में आईटी रूल्स को और सख्त किया. नए नियमों के तहत अगर कोई यूजर किसी प्लेटफॉर्म पर गैर-सहमति वाली इंटीमेट फोटो या डीपफेक कंटेंट की शिकायत करता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को बहुत तेजी से कार्रवाई करनी होगी. कई मामलों में 2 घंटे के अंदर कंटेंट हटाने की बात कही गई है, जबकि सरकारी या कोर्ट ऑर्डर वाले मामलों में 3 घंटे के अंदर एक्शन लेना पड़ सकता है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक सराकरी ऑफिशियल्स ने कहा है कि अब करीब 75% ऐसे कंटेंट को शिकायत मिलने के दो घंटे के अंदर हटाया जा रहा है. पहले यही प्रक्रिया कई बार 24 घंटे से लेकर कई दिनों तक चलती थी. अब प्लेटफॉर्म्स को तेज मॉडरेशन सिस्टम, AI डिटेक्शन टूल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनानी पड़ रही है. सरकार ने AI कंटेंट पर लेबल भी किया था मैंडेटरी नए नियम सिर्फ कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं हैं. सरकार चाहती है कि AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल भी किया जाए ताकि लोग समझ सकें कि फोटो या वीडियो असली नहीं है. कई नियमों में यह भी कहा गया है कि सिंथेटिक या AI जनरेटेड मीडिया पर मार्किंग जरूरी होगी. एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. अगर कोई कंपनी शिकायत के बाद भी ऐसे कंटेंट को हटाने में लापरवाही करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. भारत सरकार का फोकस अब पहले हटाओ, बाद में जांच करो वाले मॉडल पर दिख रहा है क्योंकि डीपफेक कंटेंट बहुत तेजी से वायरल हो जाता है. रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पुराने नियमों में दिया गया समय बहुत लंबा था और तब तक ऐसा कंटेंट तेजी से वायरल हो जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और दूसरे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी मॉडरेशन टीम और AI सिस्टम को और मजबूत किया है ताकि डीपफेक, मॉर्फ्ड फोटो और रिवेंज पोर्न जैसे कंटेंट को जल्दी पकड़ा जा सके. सरकार का फोकस खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले कंटेंट पर है. अधिकारियों ने यह भी माना कि सिर्फ AI पर भरोसा करना आसान नहीं है क्योंकि कई मामलों में गलत तरीके से भी कंटेंट फ्लैग हो सकता है. इसलिए कुछ मामलों में मानव समीक्षा भी की जाती है, जिससे थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन सरकार चाहती है कि ज्यादातर मामलों में तुरंत कार्रवाई हो ताकि पीड़ित को कम से कम नुकसान पहुंचे. ब्रिटेन में कंपनियों पर जुर्माना का प्रोविजन सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश अब इस तरह के कंटेंट पर सख्ती बढ़ा रहे हैं. ब्रिटेन में भी सरकार ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर रिवेंज पोर्न या डीपफेक इंटीमेट कंटेंट को तय समय में नहीं हटाया गया तो भारी जुर्माना या प्लेटफॉर्म ब्लॉक तक हो सकता है. एक और बड़ी चिंता यह है कि AI टूल्स अब आम लोगों तक पहुंच चुके हैं. रिसर्च में सामने आया है कि हजारों ऐसे मॉडल इंटरनेट पर मौजूद हैं जिनसे किसी की फर्जी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं. कई टूल इतने आसान हो चुके हैं कि बिना टेक्निकल जानकारी वाला व्यक्ति भी इन्हें इस्तेमाल कर सकता है. यही वजह है कि सरकारें अब सोशल मीडिया कंपनियों से सिर्फ शिकायत सुनने की उम्मीद नहीं कर रहीं, बल्कि पहले से ऐसे कंटेंट को पकड़ने वाली टेक्नोलॉजी लगाने का दबाव बना रही हैं. आने वाले समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर AI आधारित मॉनिटरिंग और ज्यादा बढ़ सकती है. हालांकि इस पर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत तेजी से कंटेंट हटाने के नियम का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है और इससे फ्री स्पीच पर असर पड़ सकता है. लेकिन दूसरी तरफ साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डीपफेक और गैर-सहमति वाले इंटीमेट कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं क्योंकि इस

प्याज-अदरक शैंपू नहीं रोकते बाल झड़ना, जावेद हबीब ने बताई असली वजह

मार्केट में आजकल हेयर फॉल कंट्रोल करने के नाम पर अदरक, प्याज और नींबू वाले शैंपू की बाढ़ आई हुई है. हम लोग इन विज्ञापनों के झांसे में आकर महंगे प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं क्योंकि वो सोचने लगते हैं कि शैंपू में नेचुरल तत्व मिले हुए हैं जिससे रातों-रात बालों का झड़ना बंद हो सकता है. हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने इस बारे में एक पॉडकास्ट में बताया है कि क्या सच में ऐसे शैंपू काम करते हैं? उनके मुताबिक, अगर आप सही तरीके से बाल धोते हैं तो कोई भी प्रोडक्ट यूज कर सकते हैं. क्या कहते हैं जावेद हबीब? जावेद हबीब के अनुसार, लोग अक्सर यह गलती कर बैठते हैं कि किसी शैंपू में प्याज या अदरक है तो वह जादुई असर करेगा.लेकि बाल गिरना तब रुकता है जब आपका स्कैल्प साफ हो. यदि आप इन महंगे शैंपू की जगह साधारण साबुन का इस्तेमाल भी सही तरह से करें तो भी वैसा ही असर दिखेगा. आप बालों की नियमित सफाई करें भले ही आप महंगा शैंपू इस्तेमाल करें या सस्ता, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. फर्क पड़ता है कि आप अपने बालों को कितना साफ रखते हैं. क्या कहती हैं रिसर्च? इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स और रिसर्च भी जावेद हबीब की बात से काफी हद तक एग्री करती हैं. बालों के झड़ने के पीछे अक्सर स्कैल्प पर जमी गंदगी, तेल और इंफेक्शन होता है. जब आप बाल धोते हैं तो यह लेयर हट जाती है जिससे फॉलिकल्स बेहतर तरीके से सांस ले पाते हैं. Healthline के अनुसार, हालांकि क्लिनिकल स्टडीज में सीधे स्कैल्प पर प्याज का रस लगाने से बालों के दोबारा उगने की संभावना देखी गई है, लेकिन शैंपू जैसे धोए जाने वाले प्रोडक्ट्स में एक डाइल्यूटेड इंग्रीडिएंट के रूप में इसकी प्रभावशीलता पर एकमत नहीं है. अधिकतर शैंपू स्कैल्प पर इतने समय तक नहीं टिकते कि ऐसे तत्व गहराई तक जा सकें. Medical News Today के अनुसार, रिसर्चर्स का सुझाव है कि शैंपू का प्राइमरी फंक्शन स्कैल्प को साफ करना है. बालों का झड़ना अक्सर जेनेटिक्स, हार्मोन या मेडिकल कंडीशंस से जुड़ा होता है. सरफेस-लेवल के सफाई वाले प्रोडक्ट्स केवल तभी मदद कर सकते हैं जब समस्या स्कैल्प की हाइजीन या डैंड्रफ से जुड़ी हो. सफाई है असली चाबी अंत में, जावेद हबीब का मैसेज साफ है कि स्कैल्प की हेल्थ ही हेयर हेल्थ है. किसी भी चमत्कारिक इंग्रीडिएंट के पीछे भागने के बजाय, अपने बालों को रेगुलर धोने और उन्हें साफ रखने पर ध्यान दें. यदि आपका स्कैल्प साफ है तो बालों की जड़ें मजबूत रहेंगी. किसी भी शैंपू को चुनने से पहले यह देखें कि वह आपके बालों से धूल-मिट्टी और एक्स्ट्रा तेल को कितनी अच्छी तरह निकाल पा रहा है, न कि उसमें कौन सा मसाला डाला गया है.

खरबूजे के बीज नहीं कचरा, जानें ‘मगज’ के फायदे और कीमत

अक्सर ज्यादातर लोग फल खाते समय उसके छिलकों और बीजों को कचरा समझकर फेंक देते हैं. चाहे कोई तरबूज खा रहा हो या फिर खरबूजा उसके छिलकों और बीजों को फेंक ही देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरबूजे के जिन बीजों को आप डस्टबिन के हवाले कर देते हैं, वे असल में वाइट गोल्ड हैं? जी हां, बाजार में यही बीज 'खरबूजे के मगज' के नाम से 600 से 800 रुपये किलो तक बिकते हैं. इन बीजों को मिठाइयों से लेकर ग्रेवी बनाने तक में इस्तेमाल किया जाता है. इनका इस्तेमाल करके मिठाइयों और सब्जी की ग्रेवी में एक रॉयल टेक्शचर आता है, जो स्वाद को दोगुना कर देता है. ऐसे में खरबूजे के मगज को मिठाइयों और ग्रेवी की शान कहा जाता है. जिन बीजों को आप साफ करना झंझट भरा काम समझते हैं, उन्हें घर पर साफ करना बेहद आसान है. चलिए जानते हैं कि आप कैसे बेकार समझे जाने वाले इन बीजों से मगज बनाकर आप अपनी रसोई के खर्च को कम कर सकते हैं और पकवानों का स्वाद बढ़ा सकते हैं.   खरबूजे के बीजों से मगज निकालने का आसान तरीका घर पर मगज तैयार करने का तरीका बहुत आसान है, बस आपको इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा: 1. बीजों को इकट्ठा करें: खरबूजा काटते समय चम्मच की मदद से बीजों वाले हिस्से को एक अलग कटोरे में निकाल लें. इसमें थोड़ा गूदा लगा रहे तो घबराएं नहीं, जब आप इन्हें साफ करेंगे तो वो आसानी से निकल जाएगा. 2. पानी से चिपचिपाहट दूर करें: बीजों वाले बर्तन में पानी भरें और हल्के हाथों से मसलकर उन्हें धोएं. हाथों से मसलने पर गूदा पानी के ऊपर तैरने लगेगा और बीज नीचे बैठ जाएंगे. इसके बाद बीजों को एक बारीक छलनी में डालकर नल के नीचे अच्छी तरह धोएं ताकि उनकी पूरी चिपचिपाहट खत्म हो जाए. 3. धूप में सुखाना है सबसे जरूरी: धुले हुए बीजों को एक सूती कपड़े या बड़ी प्लेट पर फैला दें. इन्हें कम से कम 1 से 2 दिन तक तेज धूप में सुखाएं. बीज जितने अच्छे से सूखेंगे, उनका छिलका उतनी ही आसानी से उतरेगा. 4. छिलका उतारने की जादुई ट्रिक: जब बीज सूखकर एकदम कड़क हो जाएंगे, तो उन्हें एक साफ कपड़े के बीच में रख लें. अब बेलन की मदद से बहुत हल्का दबाव देते हुए उन पर बेलन चलाएं. ध्यान रहे कि जोर नहीं लगाना है, वरना अंदर का मगज चूरा हो जाएगा. बस इतना दबाव दें कि ऊपर का छिलका चटक जाए. 5. मगज को करें स्टोर: छिलके हटाने के बाद उन्हें थाली में लेकर फटक लें. हल्का छिलका उड़ जाएगा और आपके पास सफेद मगज बच जाएंगे. इसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए हल्का सा ड्राई रोस्ट कर लें और एयरटाइट डिब्बे में भर कर रखें. मगज को इस तरह करें इस्तेमाल शाही ग्रेवी: अगर आप होटल जैसी गाढ़ी और क्रीमी ग्रेवी तैयार करना चाहते हैं, तो काजू के साथ इन बीजों को पीसकर डालें. ये शाही पनीर और मलाई कोफ्ता का स्वाद दोगुना कर देती है. हलवाई जैसी मिठाइयां: बेसन के लड्डू हों या गाजर का हलवा, अगर आप ऊपर से खरबूजे के बीज डालें तो उसे देखने और खाने दोनों में लाजवाब बना देते हैं. देसी एनर्जी ड्रिंक: गर्मियों में ठंडाई या शेक बनाते समय इसमें मगज पीसकर डालें, ये शरीर को ठंडक और ताकत देता है. रोस्टेड स्नैक्स: हल्का नमक और काली मिर्च डालकर भुने हुए मगज एक बेहतरीन और हेल्दी स्नैक का काम करते हैं.

खांसी-जुकाम बढ़ा रही है आपकी डाइट?

सर्दियों का मौसम आते ही सर्दी-खांसी, जुकाम, कंजेशन और कमजोर इम्युनिटी की शिकायत आम हो जाती है। ऐसे में सिर्फ गर्म कपड़े पहनना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही डाइट चुनना भी बेहद जरूरी है। कई ऐसे फूड्स हैं जो गर्मियों में बेहद फायदेमंद होते हैं लेकिन सर्दियों में शरीर को ठंडा करके नुकसान पहुंचा सकते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा के अनुसार, सर्दियों में सिर्फ 'हेल्दी' खाना ही काफी नहीं, बल्कि 'मौसम के अनुकूल' खाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे 4 आम फूड्स जिन्हें सर्दियों में खाने से बचना चाहिए और क्यों। 1. सत्तू (Sattu): सत्तू की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बेहतरीन माना जाता है। लेकिन सर्दियों में इसका सेवन शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम कर सकता है। इससे सर्दी-खांसी, गले में खराश और कफ बढ़ने की संभावना रहती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को सर्दियों में सत्तू से खासतौर पर बचना चाहिए। 2. सौंफ का पानी (Fennel Water): सौंफ का पानी पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इसकी तासीर भी ठंडी होती है। सर्द मौसम में इसका नियमित सेवन शरीर में ठंडक बढ़ाकर नाक बहने, कंजेशन और साइनस जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। सर्दियों में इसकी जगह अदरक या जीरा पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। 3. दही के साथ ठंडी स्मूदी: दही और ठंडी स्मूदी का कॉम्बिनेशन सर्दियों में सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, यह कफ बढ़ाता है और पाचन को धीमा करता है। इससे छाती में भारीपन, बलगम और बार-बार खांसी की समस्या हो सकती है, खासतौर पर ठंडे मौसम में। 4. नारियल पानी (Coconut Water): नारियल पानी एक नेचुरल कूलेंट है जो शरीर का तापमान कम करता है। सर्दियों में इसका ज्यादा सेवन इम्युन सिस्टम को कमजोर कर सकता है और सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ा सकता है। ठंडे मौसम में नारियल पानी को सीमित मात्रा में या पूरी तरह अवॉइड करना बेहतर रहता है। क्या करें? सर्दियों में शरीर को गर्म रखने वाले फूड्स जैसे अदरक, हल्दी, घी, गर्म सूप और हर्बल ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करें। सही खानपान से ना सिर्फ इम्युनिटी मजबूत होगी, बल्कि सर्दी-खांसी से भी बचाव होगा। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।

भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक हेयर केयर टिप्स: लंबे और घने बालों का राज

 भारत की महिलाएं सदियों से अपने खूबसूरत बालों के लिए जानी जाती हैं, लंबे घने बाल महिलाओं की सुंदरता से जोड़ा जाता है और इसलिए हर महिला चाहती है कि उसका बाल काले, घने और लंबे हो. हालांकि भारत में हर राज्य की क्लाइमेट और खानपान अलग है, लेकिन बालों की देखभाल के उनके ट्रेडिशनल तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं. अगर आप भी नेचुरल तरीके से अपने बालों को हेल्दी बनाना चाहती हैं, तो देशभर के इन आसान हेयर केयर टिप्स को जरूर अपनाएं. क्योंकि एक तो यह केमिकल फ्री होते हैं और इनसे बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता है. आप भारत के जिस राज्य से हैं अब आपको अपने बालों की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप अपने प्रदेश की जलवायु के मुताबिक सही हेयर केयर चुन सकते हैं. वैसे भी ज्यादातर गलती लोग गलत हेयरकेयर चुनने में ही करते हैं. केरल: नारियल तेल और हर्बल मास्क केरल की महिलाएं अपने घने और लंबे बालों के लिए मशहूर हैं. अगर आप भी उनकी तरह बाल चाहती हैं तो उनका सबसे बड़ा राज है नारियल तेल से नियमित मालिश. नारियल तेल के अलावा वो थाली नाम का एक खास हेयर मास्क लगाती हैं, जो गुड़हल (हिबिस्कस), खसखस, मूंग दाल और भृंगराज से मिलकर बनता है. यह बालों को पोषण देता है और उन्हें मजबूत बनाता है. आप इसमें मेथी दाना भी मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं. राजस्थान: गर्मी में ठंडक देने वाले उपाय राजस्थान की तेज गर्मी के बावजूद वहां की महिलाओं के बाल लंबे और हेल्दी भी होते हैं, क्योंकि वो लोग अपने बालों का खास ख्याल रखती हैं. राजस्थानी महिलाएं लौकी यानी घिया को पीसकर स्कैल्प पर लगाती हैं, जो ठंडक देता है. इसके अलावा वे मुल्तानी मिट्टी, शिकाकाई और रीठा से बाल धोती हैं, जिससे बाल साफ और मुलायम रहते हैं. उत्तर प्रदेश: लकड़ी की कंघी का फायदा उत्तर प्रदेश में महिलाएं पीढ़ियों से लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करती आ रही हैं. यह कंघी बालों में फ्रिज कम करती है, स्कैल्प की हल्की मसाज करती है और बालों में नेचुरल ऑयल को समान रूप से फैलाती है. लकड़ी की कंघी से बालों को सुलझाने से बाल कम टूटते हैं और आसानी से सुलझ जाते हैं. पश्चिम बंगाल सरसों तेल और मुलायम कपड़ा बंगाल की महिलाएं अपने बालों में सरसों का तेल लगाना पसंद करती हैं, यह बालों को मजबूती और चमक देता है. बाल धोने के बाद वो मुलमल के कपड़े से बाल सुखाती हैं, जिससे बाल उलझते नहीं और फ्रिज भी कम होता है. तमिलनाडु: गुड़हल और नारियल तेल केरल की तरह तमिलनाडु की महिलाएं भी लंबे और मजबूत बालों के लिए जानी जाती हैं. तमिलनाडु की महिलाएं नारियल तेल में गुड़हल मिलाकर लगाती हैं, यह मिक्सर बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और उन्हें घना बनाता है. अगर आप तेजी से बाल बढ़ाना चाहती हैं, तो आप भी यह देसी नुस्खा आजमा कर देख सकते हैं. पंजाब: घी से मिलती है चमक और सॉफ्टनेस पंजाबी महिलाओं के घने और चमकदार बालों का एक राज घी भी है, वे इसे खाने के साथ-साथ बालों में भी लगाती हैं. देसी घी बालों को कंडीशन करता है, उन्हें सॉफ्ट बनाता है और उलझने से बचाता है.

आंखों में जलन और ड्राईनेस को न करें नजरअंदाज, जानें इसके बड़े कारण

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या एक आम बात हो गई है। स्क्रीन के इस्तेमाल के बाद हल्की जलन कभी-कभी नॉर्मल लग सकती है, लेकिन अगर आपकी आंखों में बार-बार रेडनेस, ड्राईनेस या ऐसा महसूस होता है जैसे आंखों में कुछ चला गया है, तो यह गंभीर समस्या हो सकती है। आइए डॉ. रश्मि मित्तल (सीनियर कंसल्टेंट, ऑप्थैलमोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कि आंखों में इरिटेशन के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हैं। आंसू की परत पतली होना हमारी आंखों की सतह पानी, ऑयल और म्यूकस की एक पतली परत से सुरक्षित रहती है, जिसे टियर फिल्म कहा जाता है। यह परत आंखों को नम रखने और बाहरी इन्फेक्शन से बचाने का काम करती है। जब यह सुरक्षात्मक परत अस्थिर हो जाती है, तो आंखें सीधे हवा के कॉन्टेक्ट में आती हैं, जिससे ड्राईनेस और जलन शुरू हो जाती है। डिजिटल आई स्ट्रेन और पलकें झपकाने में कमी आजकल आंखों की जलन का सबसे बड़ा कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम है। जब हम लंबे समय तक स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें झपकाने की दर 50-60% तक कम हो जाती है। कम पलकें झपकाने से आंसू जल्दी सूख जाते हैं, जिससे आंखों में ड्राईनेस और चुभन महसूस होने लगती है। इसके कारण मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन की समस्या भी हो सकती है। इसमें पलकों क ऑयल ग्लैंड्स भी ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े कारण भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। हवा में मौजूद प्रदूषण, धुआं और केमिकल सीधे हमारी आंखों की पुतली को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों की सतह पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है। एलर्जी और बीमारियां धूल, पोलन, पालतू जानवरों के बाल या मोल्ड अक्सर एलर्जी का कारण बनते हैं। इसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है, जिसमें शरीर हिस्टामाइन रिलीज करता है, जिससे आंखों में तेज खुजली, सूजन और पानी आने लगता है। इसके अलावा, विटामिन-ए की कमी, डायबिटीज, साइनस एलर्जी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर भी आंखों की जलन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बचाव के उपाय ज्यादातर लोग राहत के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के आई-ड्रॉप्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। स्टेरॉयड-बेस्ड आई-ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल करना मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी खतरनाक स्थितियों को जन्म दे सकता है। स्वस्थ आंखों के लिए कुछ जरूरी टिप्स     20-20-20 नियम- हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड के लिए देखें।     हाइड्रेशन और नींद- शरीर में पानी की कमी न होने दें और पूरी नींद लें।     पलकें झपकाएं- काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाने की कोशिश करें।     डॉक्टरी सलाह- अगर जलन हफ्तों तक बनी रहे या आंखों में दर्द हो, तो घरेलू इलाज के बजाय किसी आई स्पेशेलिस्ट से पूरी जांच कराएं।  

खाली पेट चाय पीने से किडनी पर क्या असर पड़ता है? जानें रिस्क और सच्चाई

सुबह उठते ही एक कप गरमा-गरम चाय मिल जाए तो दिन बन जाता है. भारत में 'बेड टी' का कल्चर काफी पुराना है लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाली पेट चाय पीने की यह आदत से धीरे-धीरे किडनी पर भी असर हो सकता है? रिसर्च बताती है कि चाय में मौजूद कैफीन और ऑक्सालेट्स खाली पेट शरीर में जाने पर डिहाइड्रेशन और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ा देते हैं इसलिए हमेशा चाय खाली पेट पीने की सलाह नहीं दी जाती. इस बारे में मेडिकल रिपोर्ट्स क्या कहती हैं, ये भी जान लीजिए. किडनी पर कैसे पड़ता है असर? चाय में प्राकृतिक रूप से ऑक्सालेट्स (Oxalates) पाए जाते हैं. ऐसे में जब कोई खाली पेट चाय पीता है तो ये कंपाउंड्स सीधे किडनी तक पहुंच जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सालेट्स कैल्शियम के साथ मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं जो बाद में किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं. इसके अलावा, चाय एक डिउरेटिक है यानी कि चाय ऐसी चीज है जो शरीर से पानी बाहर निकालती है. यदि कोई खाली पेट चाय पीता है तो उससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है जिससे किडनी को ब्लड फिल्टर करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है. कैफीन और एसिडिटी हेल्थलाइन का कहना है, चाय में मौजूद कैफीन खाली पेट पीने पर ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकता है जो लंबे समय में किडनी की छोटी ब्लड वेसिल्स को नुकसान पहुंचाता है. इसके साथ ही चाय एसिडिक होती है और खाली पेट इसका सेवन पेट में पित्त जूस को डिस्टर्ब हो जाता है जिससे डाइजेशन पर नेगेटिव असर होता है. चाय में मौजूद टैनिन्स खाली पेट मतली और जलन पैदा कर सकते हैं जो इनडायरेक्टली किडनी के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं. ब्लैक टी या मिल्क टी, क्या अधिक खतरनाक? रिसर्च के मुताबिक, अगर आप पहले से ही किडनी की किसी बीमारी (CKD) से जूझ रहे हैं तो चाय का समय बहुत मायने रखता है. किडनी न्यूट्रिशन इंस्टीट्यूट का कहना है, किडनी के मामले में दूध वाली चाय थोड़ी कम रिस्की हो जाती है. इसका कारण यह है कि दूध में मौजूद कैल्शियम, चाय के ऑक्सालेट्स के साथ पेट और आंतों में ही जुड़ जाता है. इससे ऑक्सालेट्स किडनी तक पहुंचने से पहले ही शरीर के टॉक्सिन्स के साथ बाहर निकल जाते हैं. भोजन या डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ ऑक्सालेट वाली चीजें लेना किडनी स्टोन के खतरे को कम करता है.  

चीन ने 6G रेस में बढ़ाई रफ्तार, 6GHz बैंड ट्रायल को मिली मंजूरी

रोबोट और एआई के बाद अब चीन 6G की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी में है। ऐसा हम इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर ने एक अहम कदम उठाया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6G के मोबाइल संचार सिस्टम के लिए टेस्ट फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। MIIT के अनुसार, उसने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करने का परमिट दे दिया है। इससे चीन के चुनिंदा इलाकों में तकनीकी ट्रायल किए जा सकेंगे। इस मंजूरी का मकसद चीन में 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च और औद्योगिक लेवल पर उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 6G डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा Xinhua न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। इनमें बहुत हाई डेटा स्पीड, बहुत कम लेटेंसी (देरी), बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग शामिल हैं। इस फेज में डेवलपर्स तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे। MIIT ने एक बयान में कहा कि इन टेस्ट फ्रीक्वेंसी को मिली मंजूरी से चीन में 6G के हाई क्वालिटी वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। चीन IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप के जरिए 6G रिसर्च को तेजी से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप एक खास इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म है, जिसमें बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर, इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां, शिक्षण संस्थान और रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। ये नए ट्रायल लाइसेंस चीन द्वारा पहले 5G लॉन्च करने और अभी चल रहे 5G एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद एक अहम पड़ाव हैं। 6G का मतलब सिर्फ हाई स्पीड इंटरनेट नहीं- ज्योतिरादित्य सिंधिया भारत की बात करें तो मार्च में टेलीकॉम मानकीकरण पर एक इंटरनेशनल वर्कशॉप में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 6G सिर्फ तेज स्पीड और कम लेटेंसी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम कनेक्टिविटी से पावर्ड "इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग" को संभव बनाएगा उनका कहना था कि 6G का मतलब सिर्फ स्पीड और लेटेंसी में जबरदस्त बढ़ोतरी करना ही नहीं है। यह इंटेलिजेंस, इमर्सिवनेस और असीमित संभावनाओं की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। भारत में किस बात का इंतजार मंत्री ने कहा कि भारत 6G के विकास में खुद को सबसे आगे रखने के लिए एक्टिव होकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 6G IPR में सबसे आगे है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 6G स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला ITU और 3GPP करेंगे। यह फैसला अभी बाकी है और मानकीकरण की प्रोसेस पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।  

30 हजार से कम में लॉन्च हुआ फ्लिप फोन! Ai+ Nova Flip 5G ने मचाई हलचल

 क्या आप काफी समय से एक फ्लिप फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं? लेकिन इसकी ज्यादा कीमत की वजह से रुक रहे थे तो अब आपके पास शानदार मौका है। एक महीने के इंतजार के बाद, Ai+ Nova Flip 5G फोन अब भारत में खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया है। जी हां, आप इसे 30 हजार रुपये से कम कीमत में खरीद सकते हैं। कंपनी ने 2025 में Ai+ के पहले फ्लिप फोन के तौर पर टीज किया था। वहीं कुछ ही वक्त पहले कंपनी ने इसे भारत में लॉन्च किया है। अब आप बेझिझक इस फोन को खरीद सकते हैं। ये डिवाइस शानदार फीचर्स से लैस है जो महंगे स्मार्टफोन को भी टक्कर दे रहा है। फोन में MediaTek प्रोसेसर, 50-मेगापिक्सल कैमरा और AMOLED डिस्प्ले है। चलिए इसकी कीमत और इसके मुख्य फीचर्स पर एक नजर डालते हैं। Ai+ Nova Flip 5G की कीमत और ऑफर कीमत की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G की कीमत इसके एकमात्र मॉडल के लिए 29,999 रुपये है जिसमें आपको 8GB/256GB वेरिएंट मिलता है। Ai+ ने कन्फर्म किया है कि ये कीमत एक शुरुआती लॉन्च ऑफर का हिस्सा है। डिवाइस सिर्फ Flipkart पर ही खरीदने के लिए उपलब्ध है। फोन को आप सिंगल कलर Glacier White में खरीद सकते हैं।     Ai+ Nova Flip 5G के स्पेसिफिकेशन स्पेसिफिकेशन की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G में अंदर की तरफ 6.9-इंच की AMOLED मेन स्क्रीन मिलती है। इसका रिफ्रेश रेट 120Hz और PPI डेंसिटी 443 है। साथ ही डिवाइस में 1,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिल रही है। बाहर की तरफ फोन में 3-इंच की OLED डिस्प्ले मिल रही है। हालांकि इसका रिफ्रेश रेट 60Hz तक है और ब्राइटनेस 900 निट्स तक जा सकती है। फोन की मोटाई ओपन करने पर सिर्फ 7.2mm और वजन 193 ग्राम है। इसका बाहरी पैनल Nubia Flip 2 जैसा ही दिखाई देता है, जिसमें एक गोल कवर डिस्प्ले, डुअल-कैमरा रिंग और LED फ्लैश मिल रही है। इसका डिजाइन जाने-पहचाने, कॉम्पैक्ट और फोल्डेबल लेआउट पर बेस्ड है। साथ ही फोन का फ्रेम भी काफी पतला और हल्का है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें MediaTek का 4nm Dimensity 7300X चिपसेट मिल रहा है। साथ ही इसमें ARM Cortex-A78 कोर पर बेस्ड ऑक्टा-कोर CPU है। डिवाइस 8 GB तक RAM और 256 GB इंटरनल स्टोरेज ऑफर कर रहा है। इसके अलावा फोन में 4,325mAh की बैटरी मिल रही है। Ai+ Nova Flip 5G के कैमरा स्पेक्स कैमरा की बात करें तो फोन में 50 MP का प्राइमरी रियर कैमरा और उसके साथ 2 MP का सेकेंडरी लेंस मिल रहा है। जबकि सामने की तरफ फोन में प्राइमरी डिस्प्ले पर एक होल-पंच कटआउट के अंदर 32 MP का सेल्फी कैमरा मिल रहा है। सुरक्षा के लिए फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट है, जिससे फोन को जल्दी से एक्सेस किया जा सकता है।