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गर्भवती महिलाओं के लिए हीट अलर्ट! गर्मी और उमस से प्रभावित हो सकता है शिशु का विकास

 नई दिल्ली ज्यादा गर्मी और उमस भरा मौसम गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नुकसान कर सकता है. इसका सीधा असर उसके शारीरिक विकास पर पड़ने का खतरा है. इससे बच्चा ठिगनेपन का शिकार हो सकता है. जर्नल Science Advances में पब्लिश हुई स्टडी में यह दावा किया गया है. स्टडी में कहा गया है कि केवल बढ़ती गर्मी ही नहीं बल्कि उमस भी होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बड़ा खतरा है. अगर इसको काबू करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो साल 2025 तक दक्षिण एशिया में होने वाले बच्चों में ठिगनेपन के मामले लाखों में बढ़ सकते हैं।  यह रिसर्च दक्षिण एशिया के लगभग दो लाख बच्चों पर की गई है. इसमें अधिकतर बच्चे भारत के थे. रिसर्च में प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा गर्मी और उमस का संबंध बच्चों में होने वाली स्टंटिंग ( ठिगनेपन) से पाया गया है। . क्या है स्टंटिंग? ये क्यों होती है  दिल्ली AIIMS में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि जब किसी बच्चे का शारीरिक विकास ठीक तरीके से नहीं होता है तो इसको स्टंटिंग कहते हैं. इसमें बच्चे की लंबाई उसके उम्र के हिसाब से कम रह जाती है. इसको आम भाषा में ठिगनापन भी कहते हैं. ये समस्या सिर्फ शारीरिक विकास तक ही सीमित नहीं रहती है, बल्कि इसमें बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और उसकी सीखने की क्षमता भी सामान्य बच्चों की तुलना में कम रहती है. इसका कारण कुपोषण होता है।  गर्मी और उमस का प्रेग्नेंसी पर असर रिसर्च में बताया गया है कि जब कोई गर्भवती महिला बहुत उमस और गर्मी वाले तापमान में रहती है तो उसके शरीर पर इसका असर पड़ता है. इससे डिहाइड्रेशन से लेकर हीट स्ट्रोक का रिस्क होता है. लंबे समय तक गर्म तापमान में रहने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए काफी मेहनत करता है.इससे शरीर पर ज्यादा प्रेशर पड़ने लगता है।  इसका एक असर महिला के प्लेसेंटा पर होता है. शरीर पर बढ़े प्रेशर के कारण प्लेसेंटा में ब्लड सर्कुलेशन सामान्य की तुलना में कम होने लगता है. इससे गर्भ में पल रहे बच्चे तक जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता और ऑक्सीजन भी कम जाता है. इससे उसकी ग्रोथ पर असर पड़ता है क्योंकि बच्चे को जरूरत के हिसाब से पोषण नहीं मिल पाता है।  गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में सबसे ज्यादा खतरा इस रिसर्च में दावा किया गया है कि प्रेग्नेंसी की आखिरी तीमाही यानी 28 वें हफ्ते से लेकर 40 वें हफ्ते तक गर्मी का असर बच्चे पर ज्यादा होता है. क्योंकि ये वो समय होता है जब बच्चे को पोषण की जरूरत ज्यादा होती है और उसका विकास हो रहा होता है.अगर इसी समय जरूरत के हिसाब से पोषण न मिले तो इसका असर बच्चे पर होता है।  भारत के इन राज्यों पर ज्यादा असर स्टडी में पाया गया कि भारत में बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में रहने वाली महिलाओं में ये रिस्क अधिक है.ऐसा इसलिए क्योंकि इन इलाकों में उमस और गर्मी अधिक रहती है. रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अभी तक जलवायु परिवर्तन का असर केवल आम लोगों पर देखा जा रहा था, लेकिन अब गर्भ में पल रहे बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।  इस समस्या से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान भी बताया है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस समस्या से बचने के लिए पहला कदम यह है कि गर्भवती महिलाओं को ज्यादा गर्म और उमस भरे वातावरण से बचाएं, साथ ही तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर ऐसा न किया गया तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ी पर होगा. साल 2025 तक दक्षिए एशिया में ठिगनेपन के लाखों मामले बढ़ जाएंगे। 

6 महीने के बच्चों की डाइट गाइड: लिक्विड फूड से करें सॉलिड फूड की शुरुआत

नवजात बच्चों को आमतौर पर 6 महीने के बाद ही धीरे-धीरे सॉलिड फूड खिलाना शुरू किया जाता है. जब किसी का बच्चा 6 महीने का हो जाता है तो पेरेंट्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब उसे मां के दूध के अलावा खाने में क्या दिया जाए? इस उम्र में बच्चे का पाचन तंत्र नाजुक होता है इसलिए शुरुआत हमेशा हल्की और आसानी से पचने वाली चीजों से करनी चाहिए. डॉक्टर्स के मुताबिक, शिशु को सीधे ठोस आहार देने के बजाय लिक्विड डाइट से शुरुआत करना सबसे सुरक्षित और सही तरीका माना जाता है. तो बच्चे के लिए क्या फूड ऑपशंस हो सकते हैं, इस बारे में जान लीजिए. लिक्विड डाइट से करें शुरुआत मैक्स हेल्थकेयर के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर अंकुर सेठी ने एक इंटरव्यू में बताया, बताते हैं कि 6 महीने के बच्चे के लिए सबसे पहले क्लियर सूप, सब्जियों की प्यूरी और फलों की प्यूरी बेहतरीन ऑपशंस हैं. अगर आपके घर में रोजाना दाल बनती है, तो आप बच्चे के लिए दाल पकाते समय उसमें 2 सीटी एक्स्ट्रा लगा लें. इसके बाद दाल को अच्छी तरह मैश करके, उसमें थोड़ा सा घी या तेल मिलाकर बिल्कुल पतला सूप जैसा बना लें. यह दाल का पानी या सूप बच्चे के लिए बेहद पौष्टिक और पचाने में आसान होता है. उम्र के साथ बदलें खाना जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वैसे-वैसे उसकी डाइट और खाने के टेक्सचर को भी बदलना चाहिए. डॉक्टर के अनुसार, जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो आप उसे दाल-चावल मिक्स करके अच्छी तरह मैश करके दे सकते हैं. जब बच्चा 9 महीने का हो जाता है, तब उसे सॉफ्ट सॉलिड फूड यानी थोड़ा गाढ़ा और मसला हुआ खाना देना शुरू करना चाहिए. इस स्टेज पर आप बच्चे को मैश किया हुआ केला, उबला और मैश किया हुआ आलू या बिल्कुल सॉफ्ट पराठा दे सकते हैं. 1 साल के बच्चे की डाइट जब बच्चा एक या सवा साल का हो जाता है तब तक वह खाना चबाने के लिए पूरी तरह ट्रेन हो चुका होता है. इस उम्र में आप उसे थोड़ा और सॉलिड खाना देना शुरू कर सकते हैं. डॉक्टर सेठी का कहना है कि हमारा अल्टीमेट टारगेट यही होना चाहिए कि जब तक बच्चा डेढ़ से 2 साल का हो, वह घर के बाकी सदस्यों की तरह ही नॉर्मल खाना खाने लगे. ध्यान रखें कि हर बच्चा अलग होता है इसलिए उसकी पसंद और क्षमता के हिसाब से धीरे-धीरे डाइट बदलें.

iOS 27 में मिलेगा फास्ट स्पीड और AI फीचर्स का तगड़ा अपग्रेड

ऐपल ने अपने सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस WWDC 2026 की शुरुआत कर दी है. WWDC 2026 के कीनोट के दौरान कंपनी ने कई बड़े-बड़े ऐलान किए हैं. कंपनी ने आईओएस के न्यू वर्जन iOS 27 का भी ऐलान किया है और बताया है कि यह किन-किन आईफोन को इसका सपोर्ट मिलेगा. जबकि लाखों पुराने हैंडसेट को इसका सपोर्ट नहीं मिलेगा. WWDC 2026 कीनोट के दौरान कंपनी ने बताया है कि iPhone 11 और उसके बाद लॉन्च हुए न्यू हैंडसेट को iOS 27 का सपोर्ट मिलेगा. जबकि iPhone 11 से पहले लॉन्च हुए हैंडसेट को iOS 27 का सपोर्ट नहीं मिलेगा. डेवलपर कॉन्फ्रेंस के दौरान कंपनी iOS 27 को मिलने वाले फीचर्स के बारे में ऑफिशियली तौर पर जानकारी दी. iOS 27 से अपडेट के बाद यूजर्स को कई नए फीचर्स देखने को मिलेंगे. इस दौरान कंपनी का मुख्य फोकस ऐपल इंटेलीजेंस को लेकर रहा. कई ऐप्स के साथ इंटीग्रेशन किया गया है. साथ ही परफॉर्मेंस को भी बेहतर करने की कोशिश की है. इन iPhone को iOS 27 का सपोर्ट मिलेगा iPhone 11 iPhone 11 Pro iPhone 11 Pro Max iPhone SE (2nd gen+) iPhone 12 mini iPhone 12 iPhone 12 Pro iPhone 12 Pro Max iPhone 13 mini iPhone 13 iPhone 13 Pro iPhone 13 Pro Max iPhone 14 iPhone 14 Plus iPhone 14 Pro iPhone 14 Pro Max iPhone 15 iPhone 15 Plus iPhone 15 Pro iPhone 15 Pro Max iPhone 16e iPhone 16 iPhone 16 Plus iPhone 16 Pro iPhone 16 Pro Max iPhone 17e iPhone 17 iPhone Air iPhone 17 Pro iPhone 17 Pro Max iOS 27 सपोर्ट नहीं मिलेगा iPhone XS iPhone XS Max iPhone XR iPhone X iPhone 8 / 8 Plus iPhone 7 सीरीज और उससे पुराने मॉडल iOS 27 के तहत डेली टास्क आसान होगा और बेहतरीन एक्सपीरियंस मिलेगा iOS 27 से अपडेट करने के बाद iPhone यूजर्स को कई यूजफुल और बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा. कई फीचर्स ऐसे हैं, जो यूजर्स के लिए डेली काम आते हैं. iOS 27 से अपडेट के बाद मिलेगी फास्ट स्पीड कंपनी ने बताया है कि नए सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद ऐप्स पहले की तुलना में 30 परसेंट ज्यादा फास्ट तरीके से लॉन्च होंगे. साथ ही नई खींची गई तस्वीर, अब Photos ऐप में 70परसेंट तक तेजी से दिखाई देंगी. वहीं AirDrop ट्रांसफर की स्पीड 80 परसेंट तक बढ़ सकेगी. स्मार्ट स्विचिंग का फायदा होगा iOS 27 से हैंडसेट अपडेट करने के बाद Wi-Fi और सेल्युलर नेटवर्क के बीच स्मार्ट स्विचिंग होगी. साथ ही कंपनी ने बेहतर सर्च इंफ्रास्ट्रक्चरऔर अधिक रिस्पॉन्सिव CPU शेड्यूलर को भी शामिल किया है. कंपनी ने बताया है कि इन सुधारों का फायदा पुराने iPhone मॉडल्स को भी मिलेगा. iOS 27 के साथ और भी नए फीचर्स को शामिल किया है, जिसमें एंड्रॉयड और विंडोज यूजर्स के लिए iCloud Shared Albums में कॉन्ट्रीब्यूशन देने की सुविधा है. हेल्थ ऐप में मेनोपॉज और पेरिमेनोपॉज ट्रैकिंग को भी शामिल किया है. AirPods के लिए कस्टम EQ सेटिंग्स को शामिल किया है.

Apple WWDC 2026: नया Siri AI और iOS 27 के बड़े फीचर्स लॉन्च

ऐपल ने अपने सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस 2026 की शुरुआत करते हुए कई बड़े ऐलान किए. इस बार कंपनी का पूरा फोकस ऐपल इंटेलीजेंस और AI बेस्ड फीचर्स पर रहा. कंपनी ने अपने बहु प्रतीक्षित न्यू वॉयस असिस्टेंट Siri को लॉन्च किया है. साथ ही कंपनी ने न्यू iOS 27, वॉच ओएस 27, पैड ओएस 27 आदि को भी अनवील किया है. कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नए मोड का ऐलान किया. Apple WWDC 2026 कीनोट की शुरुआत कंपनी के मौजूदा सीईओ टिम कुक ने की और इवेंट के आखिर में एक विदाई भाषण के साथ समाप्त किया. कंपनी में अगर सब कुछ ठीक रहा तो सितंबर में कुक की जगह  जॉन टर्नस सीईओ की भूमिका निभाएंगे. दोबारा Apple WWDC 2026 के दौरान हुए बड़े ऐलान पर लौटते हैं. कंपनी ने लिक्विड ग्लास को बेहतर किया है. ऐपल ने इसको बीते साल Liquid Glass इंटरफेस को लॉन्च किया था, जिसके बाद बहुत से यूजर्स ने रिपोर्ट की थी कि आइकन की ट्रांस्पेरेंसी की वजह से उनको देखने में मुश्किल हो रही है. इस बार कंपनी ने लिक्विड ग्लास को ज्यादा बेहतर करके पेश किया है. परफॉर्मेंस को बेहतर करने पर जोर Apple ने परफॉर्मेंस में सुधार करते हुए स्क्रीन रिस्पॉन्स, मोबाइल ऐप लॉन्चिंग स्पीड, फाइल ट्रांसफर, सर्च इंडेक्सिंग और Wi-Fi स्विचिंग जैसी कई चीजों को बेहतर किया है.     नए अपडेट के तहत अब ऐप्स पहले से तेज खुलेंगे.     फाइल इंपोर्ट, कॉपी और ट्रांसफर बेहतर हो जाएगा.     अब सर्च रिजल्ट्स ज्यादा सटीक होंगे.     Wi-Fi नेटवर्क के बीच स्विच करना ज्यादा स्मार्ट होगा.     CPU Scheduler को ऑप्टिमाइज किया है, जो iPhone 11 तक सपोर्ट करेगा. AI फीचर्स, टास्क और AI एजेंट्स को प्रोसेसिंग पावर देने के लिए CPU शेड्यूलिंग बेहद अहम भूमिका अदा करते हैं. न्यू Siri का सबको इंतजार ऐपल ने वॉयस असिस्टेंट सिरी को Siri AI के रूप में पेश किया है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि ऐपल ने इस बार iPhone, Mac या iPad के अलग-अलग फीचर्स पर कम और पूरे इकोसिस्टम में काम करने वाले AI पर ज्यादा जोर दिया है. Siri की आवाज को कस्टमाइज किया जा सकेगा, जिसमें बोलने की स्पीड और इमोशनल टोन को कस्टमाइज किया जा सकेगा. प्राइवेसी फर्स्ट की रणनीति ऐपल ने बताया है कि उनके AI सिस्टम का सिद्धांत प्राइवेसी फर्स्ट का है. कंपनी ने पहली बार बाहरी ऑडिट को भी मेंशन किया है, जो AI की ट्रांस्परेंसी बढ़ाने का काम करेगा. Safari में AI आधारित नए फीचर्स कंपनी ने बताया है कि Safari ब्राउजर में अब खुद ब कुद टैब्स विषय के आधार पर ग्रुप तैयार हो सकेंगे और संबंधित नए टैब्स भी उसमें कनेक्ट किए जा सकेंगे. एक और फीचर Vibe Extension Creation को भी दिया है, जिसकी मदद से यूजर केवल एक्सटेंशन की डिटेल्स देगा और Safari AI की मदद से उसे तैयार कर सकेगा. Apple Passwords ऐप अब पासवर्ड्स को खुद ब खुद अपडेट भी कर सकेगा. हालांकि नए पासवर्ड को किस आधार पर चुना जाएगा, उसको लेकर ज्यादा डिटेल्स शेयर नहीं की गई है. macOS 27 Golden Gate के फीचर्स ऐपल ने macOS 27 में Siri AI के लिए एक डाइनेमिक आइलैंड जैसा इंटरफेस कनेक्ट किया है. इसे स्वाइप डाउन करके एक्सेस किया जा सकेगा.     WWDC 2026 में और भी कई बड़े ऐलान किए हैं. बाकी फीचर्स कुछ इस प्रकार से हैं.     Image Playground में नए स्टाइल और अधिक फोटोरियलिस्टिक इमेज जनरेशन शामिल की है.     Visual Intelligence की काबिलियत को बढ़ाया गया है. इससे कैमरे या Vision Pro के जरिए दिखाई देने वाली वस्तुओं के बारे में जानकारी और खरीदारी संबंधी सुझाव मिल सकेंगे.     Home ऐप में एक ही एक्सेसरी से जुड़े कई नोटिफिकेशन को एक साथ दिखाया जाएगा. साथ ही रिकॉर्डेड वीडियो क्लिप्स को कंटेंट के आधार पर सर्च भी किया जा सकेगा. अब यूजर्स को फोटोज ऐप में इमेज बैकग्राउंड एक्सटेंड करने की सुविधा मिलेगी. यूजर्स चाहें तो फोटो से अनचाहे ऑब्जेक्ट को हटा सकेंगे. Spatial Reframing फीचर से फोटो का व्यूइंग एंगल भी बदला जा सकेगा.

16 डिग्री पर AC चलाना पड़ सकता है भारी, सेहत के लिए खतरे की घंटी

उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है. ऐसे में थका देने वाली धूप से घर लौटते ही हर कोई एसी (Air Conditioner) को सबसे कम तापमान यानी 16 या 17 डिग्री पर सेट कर देता है ताकि कमरा तुरंत ठंडा हो जाए. हम सोचते हैं कि इससे हमें जल्दी राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत में यह तरीका सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. दरअसल, इतने कम तापमान पर लगातार एसी चलाना न केवल आपके घर का बिजली बिल रॉकेट की तरह बढ़ाता है, बल्कि आपको बीमार कर अस्पताल के लंबे-चौड़े बिल का भुगतान करने पर भी मजबूर कर देता है. आइए जानते हैं कि यह आदत हमारे शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचाती है. थर्मल शॉक और इम्युनिटी पर हमला जब आप बाहर के 40 से 45 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान से सीधे आकर 16 डिग्री वाले एकदम ठंडे कमरे में बैठते हैं तो आपकी बॉडी को एक गंभीर 'थर्मल शॉक' लगता है. अचानक होने वाले इस बड़े टेम्परेचर चेंज को हमारा शरीर आसानी से झेल नहीं पाता. इसके कारण ब्लड वेसल्स अचानक सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर बुरा असर पड़ता है. शरीर की इम्युनिटी होने लगती है. यही वजह है कि ऐसे माहौल में रहने वाले लोगों को बार-बार सर्दी, जुकाम, खांसी और गले में इन्फेक्शन की शिकायत होने लगती है. जोड़ों का दर्द, मसल्स में अकड़न लगातार बेहद कम तापमान में बैठने या सोने से शरीर के मसल्स और नसें बुरी तरह प्रभावित होती हैं. 16-17 डिग्री की ठंडी हवा सीधे शरीर पर लगने से जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या बढ़ जाती है. खासकर जिन लोगों को पहले से ही आर्थराइटिस या साइनस की शिकायत है, उनके लिए यह स्थिति बेहद दर्दनाक हो सकती है. इसके अलावा ठंडी हवा के कारण सिरदर्द की समस्या भी आम हो जाती है जो धीरे-धीरे माइग्रेन का रूप ले सकती है. स्किन और आंखों में सूखापन कम टेम्परेचर पर चलने वाला एसी कमरे की हवा से पूरी नमी यानी मॉइश्चर को सोख लेता है. हवा ड्राई होने के कारण आपकी स्किन और आंखों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है. लगातार ठंडी और सूखी हवा में रहने से त्वचा में ड्राईनेस और खुजली होने लगती है. साथ ही आंखों का मॉइश्चर खत्म होने से ड्राई आइज की प्रॉब्लम हो जाती है जिससे आंखों में जलन और रेडनेस की शिकायत शुरू हो जाती है. क्या है एसी चलाने का सही तरीका? डॉक्टरों और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के अनुसार, इंसानी शरीर के लिए 24 से 26 डिग्री का तापमान सबसे बेस्ट और हेल्दी माना जाता है. इस टेम्परेचर पर एसी चलाने से बॉडी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता और कमरे में बेहतर कूलिंग भी बनी रहती है. सबसे बड़ी बात यह है कि 24 डिग्री पर एसी चलाने से बिजली की खपत भी काफी कम होती है, जिससे आपका बिजली बिल कंट्रोल में रहता है.

कॉपर बॉटल में लेमन और गर्म पानी क्यों हो सकता है खतरनाक?

कॉपर बॉटल में पानी पीने का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में बड़े स्तर पर फॉलो हो रहा है. आयुर्वेद में 'ताम्र जल' को सेहतमंद बताया गया है, लेकिन आज लोग इसे गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. कॉपर बॉटल में लेमन वॉटर, जीरा वॉटर या गर्म पानी पी रहे हैं. कई लोग तो इसमें ये चीजें घंटों तक भरे रखते हैं तो कुछ लोग रात भर के लिए. लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. यदि आप भी उन लोगों में से हैं तो ये आर्टिकल जरूर पढ़ें. लेमन वॉटर और जीरा वॉटर क्यों खतरनाक? लेमन जूस और जीरा में एसिडिकेटी होती है जो कॉपर के साथ क्रिया करके टॉक्सिक कॉपर सॉल्स बनाती है. ये सॉल्स पानी में घुलकर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. डॉक्टरों और न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि कॉपर बॉटल में सिर्फ सादा पानी स्टोर करना चाहिए लेकिन कोई भी एसिडिक लिक्विड नहीं डालना चाहिए. एसिडिक लिक्विड कॉपर लेचिंग बढ़ाते हैं यानी कॉपर ज्यादा मात्रा में पानी में घुल जाता है. गर्म पानी भी कॉपर बॉटल में नहीं डालें गर्म या बूइंग पानी कॉपर बॉटल में डालने पर कॉपर लेचिंग बढ़ जाती है. इससे कॉपर टॉक्सिसिटी का रिस्क बढ़ता है. डॉक्टर्स का कहना है कि गर्म पानी कॉपर बॉटल में डालना सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. गर्म पानी में कॉपर तेजी से घुलता है और पानी में टॉक्सिक लेवल बढ़ जाता है. हरे निशानों का मतलब क्या है? कॉपर बॉटल में दिख रहे हरे निशान कॉपर के ऑक्सीडेशन का संकेत हैं. ये कॉपर कार्बोनेट होते हैं, जो बाहरी पतनी नहीं टॉक्सिक नहीं हैं, लेकिन अगर ये बॉटल के इनसाइड हैं तो उन्हें अच्छी तरह क्लीन करना जरूरी है. डॉक्टर्स का कहना है कि ग्रीन लेयर ऑक्सीडेशन का रिजल्ट है और बॉटल को अच्छी तरह क्लीन करना जरूरी है. कॉपर टॉक्सिसिटी के सिम्प्टम कॉपर टॉक्सिसिटी के सिम्प्टम नौजिया, वॉमिटिंग, स्टमक क्रम्प्स, डायरिया और दस्त हैं. बच्चों में यह रिस्क ज्यादा है क्योंकि उनके शरीर का साइज छोटा होता है. कैसे करें सही तरीके से कॉपर बॉटल इस्तेमाल     बॉटल में सिर्फ सादा पानी स्टोर करें     पानी को 6-12 घंटे कॉपर बॉटल में रखें     लेमन, जीरा, विनेगर नहीं डालें     गर्म पानी नहीं डालें     बॉटल को अच्छी तरह क्लीन करें  

मलाई से पाएं नेचुरल ग्लो, जानें आसान फेस पैक रेसिपी

खूबसूरत और आकर्षक दिखना हर कोई चाहता है. सुंदर दिखने के लिए सिर्फ अच्छे कपड़े और जूते पहनना ही जरूरी नहीं होता है. उसके लिए स्किन का अच्छा होना भी बहुत जरूरी है. ऐसे में चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए लोग अक्सर महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन वैसा रिजल्ट नहीं मिल पाता है जैसा वो लोग चाहते हैं.    हालांकि, वो लोग ये बात नहीं जानते हैं कि स्किन पर ग्लो लाने के लिए जिस चीज की की तलाश वो लोग महंगे प्रोडक्ट्स में कर रहे हैं. वो कई बार घर की रसोई में मौजूद चीजों में ही मिल जाती है. जी हां, स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए कई बार घर में रखी चीजें ही कमाल कर जाती हैं. खासकर मलाई से बने फेस पैक स्किन को गहराई से नमी देने के साथ-साथ उसे मुलायम और चमकदार बनाने में मदद करते हैं. अगर आपकी स्किन रूखी या बेजान दिखने लगी है, तो आप मलाई से बनाने वाले कुछ फेस पैक्स का इस्तेमाल करके उसे ग्लोइंग और चमकार बना सकते हैं. मलाई क्यों है स्किन के लिए फायदेमंद? मलाई स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होती है. इसमें नेचुरल फैट और पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो स्किन को मॉइश्चराइज करने में मदद करते हैं. इसे चेहरे पर लगाने से स्किन सॉफ्ट दिखती है और रूखापन भी कम होता है. इसके साथ ही ये चेहरे की खोई चमक वापस लाने में भी मददगार मानी जाती है. 1. मलाई और शहद का फेस पैक अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ड्राई रहती है, तो मलाई में शहद मिलाकर लगाना आपके लिए वरदान साबित हो सकता है. इसके लिए एक चम्मच मलाई में थोड़ा सा शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें. अब इसे चेहरे और गर्दन पर लगाकर करीब 15 मिनट छोड़ दें. इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. इससे स्किन में नमी बनी रहती है और चेहरा फ्रेश नजर आता है. 2. मलाई और हल्दी से मिलेगा इंस्टेंट निखार हल्दी न केवल शरीर में लगी चोट को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाती है, बल्कि इसे पुराने समय से स्किन केयर के लिए बढ़िया माना जाता रहा है. एक चम्मच मलाई में चुटकीभर हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं. करीब 10 से 15 मिनट बाद चेहरा साफ कर लें. ये फेस पैक चेहरे की डलनेस कम करने और स्किन को चमकदार दिखाने में मदद कर सकता है. 3. मलाई और बेसन वाला पैक अगर चेहरे पर टैनिंग या डेड स्किन जमा हो गई है, तो मलाई और बेसन का फेस पैक ट्राई किया जा सकता है. इसके लिए एक चम्मच मलाई में थोड़ा बेसन मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर हल्के हाथों से रगड़ते हुए पानी से धो लें. इससे स्किन साफ और मुलायम महसूस हो सकती है. 4. मलाई और गुलाबजल वाला पैक अगर आपकी स्किन बेजान दिखने लगी है तो मलाई और गुलाबजल का पैक आपके लिए अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. दोनों चीजों को मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद साफ पानी से धो लें. इससे स्किन को ठंडक मिलती है और चेहरा फ्रेश दिखता है. बरतें ये सावधानियां मलाई का कोई भी फेस पैक लगाने से पहले इस बात जरूर ध्यान रखें कि चेहरा अच्छी तरह से साफ होना बहुत जरूरी है. अगर आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें. साथ ही हफ्ते में 2 से 3 बार ही इन पैक्स का इस्तेमाल करें, ताकि स्किन पर ज्यादा असर न पड़े.

सिर्फ बोलकर उड़ाए Instagram अकाउंट! Meta AI चैटबॉट के जरिए 20 हजार यूजर्स हुए शिकार

  नई दिल्ली इंस्टाग्राम को Meta के AI ने ही हैक कर डाला. ये सुनने में अटपटा सा लग सकता है, लेकिन ऐसा ही हुआ है. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों नहीं, बल्कि 20,000 से ज्यादा इंस्टाग्राम अकाउंट्स एक नए तरह के साइबर हमले का शिकार हुए हैं।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार हैकिंग का तरीका पुराना नहीं, बल्कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा हुआ है. दरअसल हैकर्स ने Meta AI को मैनिपुलेट करके इंस्टाग्राम अकाइंट हैक कर लिया।  MetaAI यूज करके हैक हुए इंस्टाग्राम अकाउंट्स Meta ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके AI सिस्टम से जुड़ी एक कमजोरी का फायदा उठाकर हैकर्स ने यूजर्स के अकाउंट्स तक पहुंच बना ली. यह मामला इसलिए और बड़ा हो जाता है क्योंकि इंस्टाग्राम, जो कि Meta के तहत आता है, दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक है और करोड़ों लोग इस पर रोज एक्टिव रहते हैं।  यह साइबर अटैक किसी पासवर्ड चोरी या लिंक क्लिक करने जैसा नॉर्मल मामला नहीं था. रिपोर्ट्स के मुताबिक हैकर्स ने Meta AI चैटबॉट सिस्टम का इस्तेमाल करके सिक्योरिटी लेयर्स को बायपास किया।  आसान भाषा में कहें तो उन्होंने सिस्टम को इस तरह से ट्रिक किया कि AI खुद ही उन्हें जरूरी एक्सेस दे बैठा. यानी इंसान नहीं, बल्कि मशीन से ही गलती करवाई गई।  AI ने दे दिया अकाउंट का सेंसिटिव डेटा इस घटना ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जिस AI को कंपनियां फ्यूचर का सबसे सुरक्षित और स्मार्ट सिस्टम बता रही थीं, क्या वही अब सबसे बड़ा खतरा बन रहा है? कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हैकर्स ने सीधे एआई से ऐसे सवाल पूछे या ऐसे कमांड दिए, जिससे सिस्टम ने अनजाने में अकाउंट से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी शेयर कर दी।  यह तरीका ट्रेडिशनल हैकिंग से बिल्कुल अलग है. यहां कोड तोड़ा नहीं गया, बल्कि सिस्टम को समझाकर या बहकाकर उससे काम निकलवाया गया।  यही वजह है कि इस तरह के हमले को AI मैनिपुलेशन या प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसा नाम दिया जा रहा है. इसमें हैकर सिस्टम को सीधे हैक नहीं करता, बल्कि उसे ऐसे कमांड देता है जिससे वह खुद ही नियम तोड़ देता है।  इंस्टाग्राम भेज रहा है लोगों को सिक्योरिटी अलर्ट इस घटना के बाद इंस्टाग्राम ने यूजर्स को अलर्ट जारी करना शुरू कर दिया है. कई यूजर्स को सिक्योरिटी नोटिफिकेशन भी मिले हैं, जिनमें उनसे पासवर्ड बदलने और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करने को कहा गया है. लेकिन असली चिंता यह है कि अगर सिस्टम लेवल पर ही खामी है, तो सिर्फ पासवर्ड बदलने से कितना फर्क पड़ेगा? टेक इंडस्ट्री के अंदर भी इसको लेकर हलचल तेज हो गई है. क्योंकि अब तक AI को लेकर जो चर्चा हो रही थी, वह ज्यादातर उसकी ताकत और संभावनाओं पर थी. लेकिन इस हैकिंग से लगता है कि मामला उल्टा पड़ा तो करोड़ों अकाउंट्स एक साथ ही हैक हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक AI के जरिए सैकड़ों हाई प्रोफाइल इंस्टाग्राम अकाइउंट को हैक करके उनका डेटा डार्क वेब पर बिक्री के लिए लगा दिया गया. मेटा ने कहा है कि इस प्रॉब्लम को अब फिक्स कर दिया गया है।  हालांकि भले ही इश्यू फिक्स हो गया हो, लेकिन AI चैटबॉट को मैनिपुलेट करके हैकिंग का ये जरिए लगातार बढ़ रहा है और आगे भी ऐसी समस्या आ सकती हैं। 

6500mAh बैटरी और 50MP कैमरा के साथ दमदार प्रीमियम स्मार्टफोन

Motorola ने अपने नये मॉडल Motorola Edge 70 Pro+ में सिर्फ बड़े-बड़े स्पेसिफिकेशन्स देने पर फोकस नहीं किया है, बल्कि इसे एक ऐसा ऑलराउंडर स्मार्टफोन बनाने की कोशिश की है जो नॉर्मल इस्तेमाल से लेकर मल्टीमीडिया और फोटोग्राफी तक हर चीज में अच्छा एक्सपीरियंस दे. आकर्षक डिजाइन, बेहतरीन डिस्प्ले और दमदार हार्डवेयर के साथ यह फोन अपने प्राइस सेगमेंट में मजबूत दावेदारी पेश करता नजर आ रहा है. आइए जानते हैं इसके बारे में. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिजाइन Motorola Edge 70 Pro+ की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रीमियम डिजाइन है. फोन का Satin-Luxe फिनिश लुक देता है, जबकि इसका डीप रेड कलर इसे भीड़ से अलग पहचान देता है. खास बात यह है कि फोन में बड़ी 6500mAh बैटरी होने के बावजूद इसकी थिकनेस सिर्फ 7.19mm है. क्वाड-कर्व्ड डिजाइन और पतले बॉडी प्रोफाइल की वजह से यह फोन देखने में काफी आकर्षक लगता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिस्प्ले फोन में 6.8 इंच का क्वाड-कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1.5K रेजोल्यूशन, 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. स्क्रीन पर वीडियो, गेम्स और सोशल मीडिया कंटेंट काफी शार्प और कलरफुल दिखाई देंगे. अककगी पीक ब्राइटनेस के कारण तेज धूप में भी डिस्प्ले अच्छे से दिखाई देगी. वहीं फोन में दिए गए स्टीरियो स्पीकर्स मल्टीमीडिया एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: कैमरा फोटोग्राफी के लिए फोन में तीन 50MP रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. खास बात यह है कि इसमें 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस भी मौजूद है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करता है. सेल्फी के लिए भी 50MP का ऑटोफोकस कैमरा दिया गया है. इस कीमत के स्मार्टफोन्स में इतनी हाई-रिजोल्यूशन सेल्फी कैमरा और पेरिस्कोप लेंस कम ही देखने को मिलता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: परफॉर्मेंस Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर दिया गया है. यह 12GB LPDDR5X RAM और 256GB UFS 4.1 स्टोरेज को सपोर्ट करता है. फोन गेमिंग, मल्टीटास्किंग और भारी ऐप्स को आसानी से संभाल सकता है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में सोशल मीडिया, मल्टीटास्किंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान फोन बिना किसी लैग के काम करेंगे. Motorola Edge 70 Pro+ Review: सॉफ्टवेयर मॉडल Android 16 पर बेस्ड Hello UI पर काम करेगा. साथ ही कंपनी की ओर से तीन बड़े Android अपडेट्स 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा किया गया है. इसमें Moto AI, Circle to Search, Gemini इंटीग्रेशन और कैमरा व नोट्स से जुड़े कुछ काम के फीचर्स मिलते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: बैटरी और चार्जिंग Motorola Edge 70 Pro+ में 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है. फोन नॉर्मल इस्तेमाल में अच्छा खासा बैकअप देता है. खरीदें या नहीं? करीब 48,000 रुपये की कीमत में Motorola Edge 70 Pro+ एक बेहद बैलेंस्ड स्मार्टफोन दिखाई देता है. जहां इस प्राइस रेंज में कई फोन सिर्फ कैमरा या परफॉर्मेंस पर फोकस करते हैं, वहीं Motorola ने एक ऐसा पैकेज पेश करने की कोशिश की है, जो लगभग हर फीचर्स में मजबूत है. ऐसे में अगर आपको 50 हजार से कम में ऐसा ऑलराउंडर प्रीमियम बजट स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें बड़ी बैटरी स्मूद डिस्प्ले, बढ़िए डिजाइन और फास्ट परफॉर्मेंस हो तो फिर मोटोरोला का यह स्मार्टफोन आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन हो सकता है.

Siri से iOS 27 तक बड़ा बदलाव, WWDC में Apple दिखा सकता है AI का नया चेहरा

आज रात 10:30 बजे होने वाला WWDC 2026 सिर्फ एक टेक इवेंट नहीं है, बल्कि इस बार यह Apple के लिए एक बड़ी परीक्षा जैसा माना जा रहा है. पिछले एक साल में जिस तरह AI ने पूरी टेक इंडस्ट्री को बदल दिया है, उसी के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि ऐपल इस रेस में खुद को कैसे पेश करता है. बता दें कि ये इवेंट ऐपल के सीईओ के तौर पर टिम कुक का आखिरी इवेंट होगा. चूंकि कंपनी के नए सीईओ का ऐलान पहले ही हो चुका है. जॉन टर्नस कंपनी के नए सीईओ होंगे. हालांकि WWDC का कीनोट मौजूदा सीईओ टिम कुक ही पेश करेंगे और ये उनका आखिरी इवेंट होगा. हालांकि वो ऐपल के बोर्ड में बने रहेंगे, लेकिन सितंबर में होने वाला iPhone लॉन्च का कीनोट इस बार कंपनी के नए सीईओ जॉन टर्नस ही पेश करने वाले हैं. चूंकि ऐपल कई साल से अपने इवेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र कर रहा है, लेकिन फोन में दिया गया AI सतही नजर आता है. कई प्रॉमिस भी कंपनी के फेल रहे हैं. इसलिए इस बार लोगों को इस इवेंट से ज्यादा ही उम्मीदे हैं. इस बार का सबसे बड़ा फोकस साफ दिख रहा है, और वो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. रिपोर्ट्स और लीक के मुताबिक ऐपल अपने वॉयस असिस्टेंट Siri को पूरी तरह से नए अंदाज में पेश कर सकता है. Siri में होगा बड़ा बदलाव कहा जा रहा है कि Siri अब पहले से ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा नेचुरल और ज्यादा पर्सनल हो जाएगा. यानी अब सिर्फ कमांड समझने वाला असिस्टेंट नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम जो आपके सवालों को समझकर कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से जवाब देगा. ऐपल इस AI को सीधे iPhone, iPad और Mac के सिस्टम में जोड़ सकता है, जिससे यूजर को अलग से किसी ऐप की जरूरत ही न पड़े. iOS 27 इस इवेंट में सबसे ज्यादा चर्चा iOS 27 को लेकर है. उम्मीद है कि ऐपल इसमें बड़ा डिजाइन बदलाव ला सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इंटरफेस ज्यादा क्लीन, स्मूद और विजुअली मॉडर्न होगा. साथ ही AI फीचर्स को सिस्टम के अंदर ही गहराई से जोड़ा जाएगा. मतलब आप मैसेज लिख रहे हों, फोटो एडिट कर रहे हों या नोट्स बना रहे हों, हर जगह AI आपकी मदद करता दिखेगा. ऐपल का एक और बड़ा फोकस प्राइवेसी पर हो सकता है. जहां बाकी कंपनियां क्लाउड पर AI चला रही हैं, वहीं ऐपल कोशिश कर सकता है कि ज्यादा से ज्यादा AI प्रोसेसिंग डिवाइस के अंदर ही हो. इससे यूजर का डेटा ज्यादा सुरक्षित रहेगा. यही ऐपल की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजी भी हो सकती है, क्योंकि प्राइवेसी हमेशा से उसकी पहचान रही है. इसके अलावा macOS, watchOS और visionOS में भी अपडेट देखने को मिल सकते हैं. खासकर Vision Pro के लिए नए फीचर्स और ऐप्स का ऐलान हो सकता है, क्योंकि ऐपल इस प्रोडक्ट को आगे बढ़ाने में काफी जोर लगा रहा है. हार्डवेयर लॉन्च नहीं हार्डवेयर की बात करें तो इस बार उम्मीद कम है कि ऐपल कोई बड़ा नया डिवाइस लॉन्च करेगा. लेकिन कुछ लोग मान रहे हैं कि छोटे-मोटे अपडेट या नए एक्सेसरीज दिख सकते हैं. फिर भी असली गेम सॉफ्टवेयर और AI का ही रहने वाला है. इस बार का WWDC इसलिए भी खास है क्योंकि ऐपल अब तक AI रेस में थोड़ा पीछे माना जा रहा था. Google और Microsoft पहले ही अपने AI प्रोडक्ट्स के साथ काफी आगे निकल चुके हैं. ऐसे में ऐपल पर दबाव है कि वह कुछ ऐसा दिखाए जो सिर्फ नया ही नहीं, बल्कि यूजफुल भी हो. एक और दिलचस्प बात यह है कि ऐपल शायद एआई को बहुत ज्यादा दिखावे के साथ पेश नहीं करेगा. उसकी कोशिश हो सकती है कि AI को बैकग्राउंड में रखकर उसे रोजमर्रा के काम का हिस्सा बनाया जाए. यानी यूजर को अलग से एआई इस्तेमाल करने की जरूरत न पड़े, बल्कि वह खुद ही हर जगह काम करता रहे. कुल मिलाकर देखा जाए तो WWDC 2026 Apple के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. अगर कंपनी इस बार सही तरीके से AI को अपने इकोसिस्टम में फिट कर पाती है, तो वह फिर से गेम बदल सकती है. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह साफ हो जाएगा कि AI की इस नई दुनिया में ऐपल को अभी और मेहनत करनी पड़ेगी