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क्या खत्म होगा फ्री 5G डेटा? टेलीकॉम कंपनियों के बड़े बदलाव के संकेत

भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो चुका है और करोड़ों यूजर्स अब हाई-स्पीड इंटरनेट का फायदा उठा रहे हैं. लेकिन जल्द ही वह दौर खत्म हो सकता है जब टेलीकॉम कंपनियां अनलिमिटेड 5G डेटा मुफ्त में देती थीं. हालिया इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और टेलीकॉम एक्सपर्ट्स की राय से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में 5G डेटा के लिए अलग चार्ज लिया जा सकता है या मौजूदा रिचार्ज प्लान्स में बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में करोड़ों मोबाइल यूजर्स के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब फ्री 5G डेटा की सुविधा बंद होने वाली है? क्यों उठ रही है फ्री 5G डेटा बंद करने की मांग? टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखने वाले फिनांशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियां अब भी बड़ी मात्रा में 5G डेटा मुफ्त उपलब्ध करा रही हैं, जबकि नेटवर्क पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान में ज्यादातर कंपनियां रोजाना 2GB या उससे ज्यादा डेटा वाले प्लान्स पर अनलिमिटेड 5G ऐक्सेस देती हैं. इससे यूजर्स को फायदा जरूर मिल रहा है, लेकिन कंपनियों के लिए नेटवर्क निवेश की लागत वसूलना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि 5G इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश के बाद कंपनियां अब उससे बेहतर कमाई करना चाहती हैं. ऐसे में फ्री डेटा मॉडल लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल माना जा रहा है. 5G यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी देश में 5G नेटवर्क की पहुंच बढ़ने के साथ इसका इस्तेमाल भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. बड़ी संख्या में स्मार्टफोन यूजर्स अब 5G नेटवर्क पर शिफ्ट हो चुके हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार कई टेलीकॉम ऑपरेटर्स के आधे से ज्यादा ग्राहक अब 5G सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं. तेज इंटरनेट स्पीड की वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्लाउड सर्विसेज और वायरलेस ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि प्रति यूजर मासिक डेटा खपत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. क्या रिचार्ज प्लान्स महंगे हो सकते हैं? टेलीकॉम कंपनियों की कमाई बढ़ाने के लिए सबसे बड़ा पैमाना ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व माना जाता है. कंपनियां लंबे समय से इसे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में 5G डेटा के लिए अलग श्रेणी के प्लान्स पेश किए जा सकते हैं या मौजूदा रिचार्ज पैक्स की कीमतों में बदलाव किया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में इस कीमत वृद्धि की वजह पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को बताया जा रहा है. चूंकि मोबाइल टावर चलाने की कुल परिचालन लागत में बिजली और ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है. ऐसे में डीजल की बढ़ती कीमतें टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, क्योंकि कई मोबाइल टावरों में बैकअप पावर के लिए अब भी डीजल का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नेटवर्क संचालन का खर्च बढ़ने की आशंका है, जिसका असर भविष्य में टेलीकॉम कंपनियों की लागत और रणनीति पर पड़ सकता है. दुनिया के कई देशों में ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है. जबकि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में यूजर्स अनलिमिटेड 5G डेटा का लाभ उठा रहे हैं. ऐसे में टेलीकॉम कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मॉडल की तरफ बढ़ सकती हैं. Jio, Airtel और Vi पर क्या होगा असर? अगर फ्री 5G डेटा बंद करने या सीमित करने का फैसला लिया जाता है तो इसका असर सबसे पहले उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो भारी मात्रा में इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और वायरलेस ब्रॉडबैंड सेवाओं पर निर्भर यूजर्स को नए प्लान्स चुनने पड़ सकते हैं. हालांकि फिलहाल किसी भी टेलीकॉम कंपनी ने आधिकारिक तौर पर फ्री 5G डेटा बंद करने की घोषणा नहीं की है. लेकिन इंडस्ट्री में चल रही चर्चाएं यह संकेत जरूर दे रही हैं कि आने वाले महीनों में रिचार्ज प्लान्स और 5G ऑफर्स में बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल ग्राहकों को मौजूदा योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन भविष्य में 5G सेवाओं के लिए अलग कीमत चुकानी पड़े तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. टेलीकॉम सेक्टर की अगली बड़ी रणनीति अब इसी दिशा में जाती दिखाई दे रही है.

Motorola Edge 70 Pro+ Review: 50MP कैमरा और 6500mAh बैटरी के साथ आया पावरफुल ऑलराउंडर फोन

Motorola ने अपने नये मॉडल Motorola Edge 70 Pro+ में सिर्फ बड़े-बड़े स्पेसिफिकेशन्स देने पर फोकस नहीं किया है, बल्कि इसे एक ऐसा ऑलराउंडर स्मार्टफोन बनाने की कोशिश की है जो नॉर्मल इस्तेमाल से लेकर मल्टीमीडिया और फोटोग्राफी तक हर चीज में अच्छा एक्सपीरियंस दे. आकर्षक डिजाइन, बेहतरीन डिस्प्ले और दमदार हार्डवेयर के साथ यह फोन अपने प्राइस सेगमेंट में मजबूत दावेदारी पेश करता नजर आ रहा है. आइए जानते हैं इसके बारे में. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिजाइन Motorola Edge 70 Pro+ की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रीमियम डिजाइन है. फोन का Satin-Luxe फिनिश लुक देता है, जबकि इसका डीप रेड कलर इसे भीड़ से अलग पहचान देता है. खास बात यह है कि फोन में बड़ी 6500mAh बैटरी होने के बावजूद इसकी थिकनेस सिर्फ 7.19mm है. क्वाड-कर्व्ड डिजाइन और पतले बॉडी प्रोफाइल की वजह से यह फोन देखने में काफी आकर्षक लगता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: डिस्प्ले फोन में 6.8 इंच का क्वाड-कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1.5K रेजोल्यूशन, 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. स्क्रीन पर वीडियो, गेम्स और सोशल मीडिया कंटेंट काफी शार्प और कलरफुल दिखाई देंगे. अककगी पीक ब्राइटनेस के कारण तेज धूप में भी डिस्प्ले अच्छे से दिखाई देगी. वहीं फोन में दिए गए स्टीरियो स्पीकर्स मल्टीमीडिया एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: कैमरा फोटोग्राफी के लिए फोन में तीन 50MP रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. खास बात यह है कि इसमें 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस भी मौजूद है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करता है. सेल्फी के लिए भी 50MP का ऑटोफोकस कैमरा दिया गया है. इस कीमत के स्मार्टफोन्स में इतनी हाई-रिजोल्यूशन सेल्फी कैमरा और पेरिस्कोप लेंस कम ही देखने को मिलता है. Motorola Edge 70 Pro+ Review: परफॉर्मेंस Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर दिया गया है. यह 12GB LPDDR5X RAM और 256GB UFS 4.1 स्टोरेज को सपोर्ट करता है. फोन गेमिंग, मल्टीटास्किंग और भारी ऐप्स को आसानी से संभाल सकता है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में सोशल मीडिया, मल्टीटास्किंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान फोन बिना किसी लैग के काम करेंगे. Motorola Edge 70 Pro+ Review: सॉफ्टवेयर मॉडल Android 16 पर बेस्ड Hello UI पर काम करेगा. साथ ही कंपनी की ओर से तीन बड़े Android अपडेट्स 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा किया गया है. इसमें Moto AI, Circle to Search, Gemini इंटीग्रेशन और कैमरा व नोट्स से जुड़े कुछ काम के फीचर्स मिलते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं. Motorola Edge 70 Pro+ Review: बैटरी और चार्जिंग Motorola Edge 70 Pro+ में 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है. फोन नॉर्मल इस्तेमाल में अच्छा खासा बैकअप देता है. खरीदें या नहीं? करीब 48,000 रुपये की कीमत में Motorola Edge 70 Pro+ एक बेहद बैलेंस्ड स्मार्टफोन दिखाई देता है. जहां इस प्राइस रेंज में कई फोन सिर्फ कैमरा या परफॉर्मेंस पर फोकस करते हैं, वहीं Motorola ने एक ऐसा पैकेज पेश करने की कोशिश की है, जो लगभग हर फीचर्स में मजबूत है. ऐसे में अगर आपको 50 हजार से कम में ऐसा ऑलराउंडर प्रीमियम बजट स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें बड़ी बैटरी स्मूद डिस्प्ले, बढ़िए डिजाइन और फास्ट परफॉर्मेंस हो तो फिर मोटोरोला का यह स्मार्टफोन आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन हो सकता है.

झुर्रियों और फाइन लाइन्स से छुटकारा, चावल-अलसी का मास्क देगा त्वचा को निखार

 बढ़ती उम्र, प्रदूषण और तनाव के कारण चेहरे पर समय से पहले महीन रेखाएं (Fine Lines) और झुर्रियां नजर आने लगती हैं. ऐसे में त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है और स्किन ढीली पड़ने लगती है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं और अपनी त्वचा को फिर से जवां, कसावदार और गुलाबी निखार से भरपूर बनाना चाहते हैं, तो एक सही स्किन केयर आपके रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा होना चाहिए. रात के समय हमारी त्वचा खुद को रिपेयर करती है, इसलिए इस दौरान सही पोषण मिलने से त्वचा तेजी से रिकवर होती है. चावल और अलसी का मास्क करेगा कमाल हमारी त्वचा धूप, धूल और प्रदूषण से लड़ती है. ऐसे में अगर आप रेगुलर चावल और अलसी से बना मास्क या क्रीम अपने चेहरे पर यूज करते हैं तो इसके एक्टिव इंग्रीडिएंट्स त्वचा की गहरी परतों में जाकर ढीली हो चुकी कोशिकाओं में कसाव लाते हैं और महीन रेखाओं को धीरे-धीरे कम करते हैं. बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका इसके लिए सबसे पहले एक कटोरी में पानी गर्म करें. फिर इसमें चावल का आटा डालें. इसके बाद अलसी के बीज मिलाएं और सभी को अच्छी तरह उबालें. चेहरे को किसी माइल्ड क्लींजर या फेस वॉश से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद चेहरे पर ये मास्क ठंडा करके लगाएं. मास्क जब सूख जाए तो हल्का पानी लेकर अपने चेहरे और गर्दन पर ऊपर की दिशा में हल्के हाथों से मसाज करें. नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने पर कुछ ही हफ्तों में त्वचा टाइट होने लगती है और चेहरे पर गुलाबी चमक दिखाई देने लगती है.

मूंग दाल पकौड़े बनेंगे खस्ता और कम तेल वाले, जानें सीक्रेट ट्रिक

बारिश का मौसम हो या शाम की चाय, गरमा-गरम पकौड़े मिल जाएं तो मजा आ जाता है. लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि मूंग दाल के पकौड़े या तो बहुत ज्यादा तेल सोख लेते हैं या फिर कढ़ाई से निकलते ही मुलायम पड़ जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो अब चिंता छोड़ दीजिए. आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दाल के बैटर में मिलाते ही आपके पकौड़े एकदम करारे, खस्ता और ऑयल-फ्री बनेंगे. आइए जानते हैं क्या है वो सीक्रेट चीज और कैसे बनाएं परफेक्ट मूंग दाल पकौड़े. ये है वो सीक्रेट चीज अगर आप बैटर में चावल का आटा या बारीक सूजी मिलाते हैं तो इससे ये करारे बनते हैं. इसके अलावा बैटर में थोड़ा सा गर्म तेल मिलाने से भी पकौड़े तेल नहीं पीते और लंबे समय तक क्रिस्पी रहते हैं. सामग्री धुली या छिलके वाली मूंग दाल – 1 कप (3-4 घंटे भीगी हुई) चावल का आटा या सूजी – 2 बड़े चम्मच (सीक्रेट सामग्री) हरी मिर्च – 2-3 (बारीक कटी हुई) अदरक – 1 इंच टुकड़ा (घिसा हुआ) हरा धनिया – आधा कप (बारीक कटा हुआ) साबुत धनिया और सौंफ – 1 छोटा चम्मच (दरदरा कुटा हुआ) हींग – 1 चुटकी लाल मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच गरम तेल – 1 बड़ा चम्मच (बैटर में मिलाने के लिए) नमक – स्वादानुसार तेल – तलने के लिए बनाने का तरीका भीगी हुई मूंग दाल का पूरा पानी निकालकर उसे मिक्सर में बिना पानी (या सिर्फ 1-2 चम्मच पानी) डाले दरदरा पीस लें. ध्यान रहे, पेस्ट को एकदम बारीक नहीं करना है. पिसी हुई दाल को एक बड़े बर्तन में निकालें और 3-4 मिनट तक एक ही दिशा में अच्छी तरह फेंटें. इससे दाल हल्की हो जाएगी और पकौड़े अंदर से जालीदार बनेंगे. अब इस बैटर में 2 चम्मच चावल का आटा मिलाएं. साथ ही इसमें 1 बड़ा चम्मच गर्म तेल डालें. यह ट्रिक पकौड़ों को बाहर से क्रिस्पी बनाएगी और वह एक्स्ट्रा तेल नहीं सोखेंगे. अब बैटर में कटी हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, कुटा हुआ साबुत धनिया-सौंफ, हींग, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. एक कढ़ाई में तेल गरम करें. तेल मध्यम से तेज गरम होना चाहिए. अब हाथों से या चम्मच से छोटे-छोटे पकौड़े तेल में डालें. पकौड़ों को मीडियम आंच पर अलट-पलट कर सुनहरा और करारा होने तक तल लें. आंच को बहुत धीमा न रखें, नहीं तो पकौड़े तेल सोख सकते हैं. तैयार हैं आपके एकदम करारे, बिना तेल पिए और क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े. इन्हें तीखी हरी चटनी और गरम चाय के साथ सर्व करें.

Women’s T20 World Cup 2026: Doodle से लेकर लाइव स्ट्रीमिंग तक, जानें पूरी डिटेल्स

ICC Women’s T20 World Cup शुरू होने से पहले Google ने एक खास Doodle जारी किया है. 12 जून को लॉन्च किए गए इस रंग-बिरंगे डूडल में क्रिकेट स्टंप्स, बेल्स और गेंद को दिखाया गया है, जो टूर्नामेंट के पहले दिन का जश्न मनाते हैं. Google ने डूडल के साथ बताया कि 2026 ICC Women’s T20 World Cup शुरू हो चुका है. टी20 क्रिकेट की एनर्जी और रोमांच से जुड़ा है. यह डूडल उन जरूरी क्रिकेट के सामान को दर्शाता है, जिनके साथ दुनिया की बेहतरीन टीमें खिताब जीतने की कोशिश करेंगी. इन देशों में दिखेगा Doodle यह खास डूडल भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा. इनमें श्रीलंका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, जमैका, गुयाना, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, त्रिनिदाद और टोबैगो, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस, एंटीगुआ और बारबुडा और डोमिनिका शामिल हैं. Google का यह डूडल महिला क्रिकेट के सबसे बड़े मंच की शुरुआत को और भी खास बना रहा है. इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच होगा टूर्नामेंट का पहला मुकाबला 12 जून को यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर होगा. टूर्नामेंट का पहला मैच इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा. यह मुकाबला एजबेस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा, लेकिन मैच शुरू होने से पहले दर्शकों को शानदार ओपनिंग सेरेमनी का भी मजा मिलेगा. इस खास मौके पर मशहूर वेस्ट एंड म्यूजिकल ‘Wicked’ की 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया जाएगा. म्यूजिकल की कलाकार एम्मा किंग्स्टन और जिजी स्ट्रेलन, जो एल्फाबा और ग्लिंडा की भूमिका निभाती हैं, पूरी कास्ट के साथ शानदार परफॉर्मेंस देंगी. टूर्नामेंट के आगाज से पहले सभी 12 टीमों के कप्तानों ने लंदन के ऐतिहासिक वाटरलू ब्रिज पर आयोजित ‘कैप्टेन्स कार्निवल’ में हिस्सा लिया. मैच स्थानीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा, जबकि भारतीय क्रिकेट फैंस इस मुकाबले का लुत्फ रात 11:00 बजे से उठा सकेंगे. भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मैच कहां देखें? अगर आप भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मुकाबलों का मजा लेना चाहते हैं, तो मैचों का लाइव टेलीकास्ट Star Sports के चैनलों पर देखा जा सकता है. वहीं, मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर लाइव स्ट्रीमिंग के लिए JioHotstar ऐप सबसे आसान ऑप्शन रहेगा. भारतीय टीम अपना पहला मैच 14 जून को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगी. इसके बाद टीम इंडिया ग्रुप स्टेज में कई अहम मैच खेलेगी, जबकि उसका आखिरी ग्रुप मुकाबला 28 जून को लंदन के आइकोनिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होगा.

गर्मी में चावल या रोटी? एक्सपर्ट्स ने बताया दोपहर के लिए क्या है बेहतर विकल्प

देश में गर्मी अभी भी अपने चरम पर है और उमस भी लगातार बनी हुई है. गर्मी में अक्सर लोगों का डाइजेशन कमजोर या सुस्त हो जाता है और ऐसे में लोग चाहते हैं कि वो हल्का भोजन करें इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स गर्मियों में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाने की सलाह देते हैं. भारतीय घरों में चावल और रोटी, दोनों ही थाली का अहम हिस्सा हैं. लेकिन जब बात भयंकर गर्मी की हो तो अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि क्या खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं चावल और रोटी में से क्या खाना अधिक बेहतर है. डाइजेशन में क्या बेहतर? गर्मियों में भारी भोजन पचाना शरीर के लिए एक बड़ा टास्क होता है. मेडिकल रिपोर्ट्स का कहना है कि चावल में फाइबर की मात्रा गेहूं की रोटी के मुकाबले काफी कम होती है. कम फाइबर होने की वजह से चावल को पचाना आसान है. ऐसे लोग जिन्हें गर्मी के दिनों में ब्लोटिंग, गैस या बदहजमी की शिकायत रहती है, उनके लिए दोपहर के समय चावल खाना रोटी की तुलना में अधिक हल्का साबित होता है. वॉटर कंटेंट और बॉडी टेम्परेचर हेल्थलाइन का कहना है कि पानी से भरपूर फूड्स शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं. चावल को पकाते समय वह पानी की भारी मात्रा को सोखता है. दोपहर में चावल खाने से शरीर को थोड़ा एक्स्ट्रा हाइड्रेशन मिलता है जबकि रोटी सूखी होती है और इसे पचाने के लिए शरीर को अपने अंदर के पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसलिए वॉटर कंटेंट के मुताबिक, चावल खाना सही माना जाता है. न्यूट्रिशन और फाइबर भले ही चावल पचाने में आसान हो लेकिन न्यूट्रिशन वैल्यू के मामले में रोटी को कम नहीं आंका जा सकता. हेल्थलाइन का कहना है साबुत गेहूं की रोटी में फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स जैसे फास्फोरस और मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होते हैं. रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चावल से कम होता है यानी कि यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक नहीं बढ़ाती. हालांकि, गर्मी के लंच में अगर आप चावल खा रहे हैं तो इसके साथ दाल और हरी सब्जियां जरूर खाएं ताकि न्यूट्रिशन बैलेंस बना रहे. दोपहर के लिए क्या है बेस्ट? समर सीजन में दोपहर के खाने के लिए स्लीपिंग और हेल्थ एक्सपर्ट्स चावल को थोड़ा बेहतर मानते हैं क्योंकि यह पेट को ठंडक देता है. लेकिन अगर आप वेट लॉस जर्नी पर हैं या डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको चावल की मात्रा पर कंट्रोल रखना होगा. आप चाहें तो दोपहर में ब्राउन राइस का ऑपशन भी चुन सकते हैं. सबसे बेस्ट तरीका यह है कि आप अपनी फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से डाइट तय करें, लेकिन गर्मियों के लंच को जितना हो सके हल्का खाना खाएं.

भारतीय पुरुषों में बढ़ती तोंद का बड़ा कारण, खराब डाइट और लाइफस्टाइल जिम्मेदार

भारत में पुरुषों का मोटापा और बाहर निकली हुई तोंद आज के समय में काफी कॉमन समस्या बन चुकी है. जहां पहले कुछ लोग ही ओवरवेट होते थे, वहीं आजकल कम उम्र के लोगों में भी पेट बाहर आने की समस्याएं दिख रही हैं, जबकि वेस्टर्न देशों के पुरुष बढ़ती उम्र में भी काफी फिट और मस्कुलर नजर आते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कोई जेनेटिक जादू नहीं बल्कि हमारी रोजाना की खराब आदतें और डाइट पैटर्न जिम्मेदार हैं. यदि समय रहते इन गलत आदतों को सुधार लिया गया तो आप भी तोंद कम कर सकते हैं और बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन उससे पहले भारतीयों की तोंद निकलना का कारण समझ लीजिए. कम प्रोटीन और ज्यादा कार्ब्स की आदत भारतीय पुरुषों के मोटे होने का सबसे बड़ा कारण उनका खानपान है. दरअसल, भारतीयों की डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे रोटी, चावल) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. वहीं इसके विपरीत वेस्टर्न पुरुष हाई प्रोटीन और एक बैलेंस्ड डाइट को फॉलो करते हैं. इसके अलावा भारतीय पुरुष दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट और नमकीन खाते हैं जो शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी स्टोर करता है. वेस्टर्न लाइफस्टाइल में प्रोसेस्ड फूड और मीठे का सेवन काफी सीमित मात्रा में किया जाता है. खराब ईटिंग टाइमिंग और सिटिंग लाइफस्टाइल भारतीय वर्किंग कल्चर में ज्यादातर पुरुषों की लाइफस्टाइल बैठने वाली हो चुकी है जिसमें फिजिकल मूवमेंट बहुत कम होता है. सबसे बड़ी गड़बड़ी रात के खाने के समय में होती है. भारतीय घरों में अक्सर देर रात 10 या 11 बजे हैवी डिनर किया जाता है और लोग तुरंत सो जाते हैं. वहीं, वेस्टर्न देशों में लोग शाम को 7 से 8 बजे तक अपना लाइट डिनर पूरा कर लेते हैं. देर से खाने और कम एक्टिविटी के कारण कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और वह सीधे पेट के आसपास फैट के रूप में जमा होने लगती है. कम नींद, भारी स्ट्रेस और पानी की कमी मोटापे का सीधा कनेक्शन मेंटल हेल्थ और स्लीपिंग पैटर्न से भी है. भारतीय पुरुष अक्सर काम के प्रेशर में ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं और मात्र 5-6 घंटे की अधूरी नींद लेते हैं, जिससे हार्मोनल इंबैलेंस होने लगता है. वहीं वेस्टर्न लाइफस्टाइल में बेहतर स्ट्रेस मैनेजमेंट और 7-8 घंटे की गहरी नींद को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा भारतीय पुरुषों की डाइट में फाइबर और पानी की भारी कमी देखी जाती है जिससे डाइजेशन सुस्त हो जाता है. तोंद कम करने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट्स का कहना है, यदि आप भी बाहर निकलती तोंद को अंदर करना चाहते हैं तो सिर्फ क्रैश डाइट करने से काम नहीं चलेगा. इसके लिए आपको अपनी आदतें बदलनी होंगी. हर मील में अंडे, पनीर या दाल जैसे प्रोटीन के ऑप्शंस शामिल करें. रोजाना कम से कम 8 से 10 हजार स्टेप्स पैदल चलने की आदत डालें. चीनी, मीठी चाय और जंक फूड को अपनी लाइफ से तुरंत कम करें. रात का डिनर हर हाल में 7-8 बजे तक खत्म कर लें और 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें. इसके साथ ही हफ्ते में 4 से 5 दिन वर्कआउट जरूर करें.

सोशल मीडिया और AI पर सख्ती: कनाडा लाएगा नया डिजिटल सेफ्टी विधेयक

अब एक और देश बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से बचाना चाहता है, जिसके लिए वह एक नया कानून ला रहा है. इस देश का नाम कनाडा है और वहां की सरकार ने एक नया डिजिटल सुरक्षा विधेयक पेश किया है. नए विधेयक के तहत 16 साल से कम उम्र के किशोर और बच्चों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित किया जाएगा. हालांकि नए कानून के तहत उन प्लेटफॉर्म को छूट भी मिल सकती है, जो कुछ सेफ्टी रूल्स को फॉलो करते हैं. AI चैटबॉट्स भी होंगे रेगुलाइज जानकारी के मुताबिक, नया विधेयक AI चैटबॉट्स को भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एक डिजिटल रेगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जो असल में सेफ्टी रूल्स को तैयार करेगा. डिजिटल सेफ्टी एक्ट का विधेयक लाने के साथ ही कनाडा भी उन देशों की सूची में शामिल किया जा चुका है, जो बच्चों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त कानून लेकर आ रहे हैं.   कनाडा के मंत्री मार्क मिलर ने कहा है कि उन्होंने देखा है कि ऑनलाइन नुकसान कितने गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की सुरक्षा को टाला नहीं जा सकता है. नियम ना मानने पर लगेगी पैनल्टी कनाडा के प्रस्तावित विधेयक में पेनल्टी को भी मेंशन किया है, जहां बताया गया है कि अगर कोई कंपनी नियम का पालन नहीं करती हैं तो उनपर ग्लोबल रेवेन्यू या 3 परसेंट या 1 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग 68 करोड़ रुपये) तक का हर्जाना लगाया जा सकता है, जो अधिक हो. विधेयक Bill C-34 के प्रस्ताव में कनाडा सरकार ने कहा कि ऑनलाइन नुकसान केवल नागरिकों से नहीं बल्कि डिजिटल सेवाओं के डिजाइन और ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से भी होते हैं.   सुरक्षा संबंधित बातों को ध्यान में रखते हुए विधेयक सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स के लिए नए सुरक्षा नियम लागू करना चाहता है. इसके साथ ही कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर संभावित जोखिमों की पहचान करनी होगी और उन्हें कम करने की दिशा में काम करना होगा. ऑस्ट्रेलिया बन चुका है पहला देश   बीते साल के दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन किया जा चुका है. कानून लागू होने के बाद एक महीने के अंदर कंपनियों ने सामूहिक रूप से 50 लाख टीनएजर्स के अकाउंट को डिएक्टिवेट कर दिया था. और भी देश कर रहे हैं तैयारी कनाडा ही नहीं और भी देश बच्चों पर सोशल मीडिया की वजह से पड़ने नकारात्मक नुकसान को कम करना चाहते हैं. इसके लिए वे देश भी सोशल मीडिया उपयोग पर लगने वाले नियमों को सख्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ग्रीस कर चुका है ऐलान ग्रीस अप्रैल में ऐलान कर चुका है कि वह जनवरी 2027 से 15 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करेगा.

Airtel की ‘Fast Lane’ सर्विस क्या है? रीब्रांड के बाद फिर छिड़ी नेट न्यूट्रैलिटी की बहस

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर बहस छिड़ गई है. एयरटेल ने अपने ‘Priority Postpaid’ प्लान को रीब्रांड करके अब ‘Fast Lane’ नाम दे दिया है. नाम बदलने के साथ ही यह सर्विस फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इसे लेकर पहले ही यूजर्स में काफी नाराजगी देखी गई थी. दरअसल Airtel ने कुछ समय पहले ‘Priority’ नाम से एक पोस्टपेड सर्विस शुरू की थी. कंपनी का दावा था कि इस प्लान में पोस्टपेड यूजर्स को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में प्रीपेड यूजर्स के मुकाबले ज्यादा स्पीड मिलेगी और बेहतर नेटवर्क एक्सपीरियंस मिलेगा. हालांकि, जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि क्या अब बेहतर नेटवर्क स्पीड पाने के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे? अब कंपनी ने उसी सर्विस को नए नाम ‘Fast Lane’ के साथ पेश किया है. Airtel ने सिर्फ नाम बदला है, जबकि प्लान और इसकी सुविधाएं लगभग पहले जैसी ही हैं. कंपनी इसे एक प्रीमियम एक्सपीरियंस के तौर पर पेश कर रही है. कंपनी के मुताबिक नया पोस्टपेड प्लान रीब्रांड कर दिया गया है. दरअसल कंपनी नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी का यूज करके बेहतर 5G एक्सपीरिएंस देने की बात कह रही है. एयरटेल के मुताबिक फास्ट लेन नाम इस प्लान के हिसाब से सही है, इसलिए प्रायॉरिटी प्लान की जगह ये नया नाम दिया गया है. Fast Lane है क्या? आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी सर्विस है जिसमें कुछ यूजर्स को नेटवर्क पर प्रायॉरिटी दी जाती है. यानी जब नेटवर्क पर ज्यादा भीड़ होती है, तब Fast Lane वाले यूजर्स को बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी मिल सकती है. यही वजह है कि इसे लेकर नेट न्यूट्रैलिटी की बहस फिर शुरू हो गई है. नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब होता है कि सभी यूजर्स को इंटरनेट पर बराबर का एक्सेस मिले. लेकिन अगर कुछ यूजर्स को पैसे देकर ‘फास्ट लेन’ मिलती है, तो बाकी यूजर्स के लिए अनुभव खराब हो सकता है. कंपनी का स्टैंड है कि इस तरह की सर्विस से नेट न्यूट्रैलिटी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो रहा है. दूसरी कंपनियों ने भी कहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग पहले से यूज होता आया है. कंपनी का कहना है कि यह सर्विस नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है, जो 5G के साथ आती है. इसका मतलब यह है कि नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग यूजर्स को अलग अनुभव दिया जा सकता है. कंपनी यह भी दावा करती है कि इससे बाकी यूजर्स पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा. यानी फास्ट लेन लेने वालों को फायदा मिलेगा, लेकिन बाकी लोगों की स्पीड कम नहीं होगी. लेकिन टेक एक्सपर्ट्स इस दावे को पूरी तरह से मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर नेटवर्क लिमिटेड है और कुछ यूजर्स को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसका असर बाकी यूजर्स पर जरूर पड़ेगा, खासकर भीड़ वाले इलाकों में. कुछ यूजर्स का कहना है कि यह टेलीकॉम इंडस्ट्री में एक खतरनाक शुरुआत हो सकती है, जहां फ्यूचर में हर बेहतर सर्विस के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे. वहीं कुछ लोग इसे प्रीमियम सर्विस मानते हैं, जैसे एयरपोर्ट पर फास्ट ट्रैक या टोल पर फास्टैग. यानी जो ज्यादा पैसे देगा, उसे बेहतर और तेज अनुभव मिलेगा.. अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में बाकी टेलीकॉम कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं. इसका मतलब यह होगा कि इंटरनेट का अनुभव अब पूरी तरह समान नहीं रहेगा. फिलहाल Airtel ने साफ किया है कि प्लान्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है, सिर्फ ब्रांडिंग बदली गई है.

बेसन और कच्चे दूध से बने नेचुरल फेस वॉश से पाएं चमकती त्वचा

खूबसूरत, बेदाग और चमकती त्वचा पाना हर किसी का सपना होता है जिसके लिए लोग बाजार में मिलने वाले महंगे से महंगे फेस वॉश और साबुन पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स में मौजूद हानिकारक केमिकल्स आपकी त्वचा का नेचुरल ऑयल छीन लेते हैं जिससे चेहरा समय से पहले रूखा, बेजान और बूढ़ा दिखने लगता है. अगर आप भी इस केमिकल के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर त्वचा पर असली और परमानेंट ग्लो चाहते हैं तो आपको महंगे पार्लर या महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं है. आपकी रसोई में ही कुछ ऐसी जादुई चीजें मौजूद हैं जो त्वचा को अंदर से साफ कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर ही सिर्फ 2 प्राकृतिक चीजों से एक बेहतरीन नेचुरल फेस वॉश बनाने का तरीका और उसके इस्तेमाल का तरीका बताने जा रहे हैं. इससे रोजाना सिर्फ 5 मिनट मसाज करने से केवल 10 दिनों के भीतर आपकी त्वचा में ऐसा चमत्कारी बदलाव आएगा कि चेहरा हीरे जैसा चमकने लगेगा. फेस वॉश बनाने और इस्तेमाल करने की डिटेल्स बेसन: 1 बड़ा चम्मच (यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और अतिरिक्त तेल सोखता है). कच्चा दूध या गुलाब जल: आवश्यकताानुसार (यह त्वचा को मॉइश्चराइज करता है और रंगत निखारता है). नोट: अगर त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई है तो आप इसमें आधा चम्मच शहद भी मिला सकते हैं. बनाने का तरीका एक छोटी कटोरी में एक चम्मच बेसन लें. अब इसमें आवश्यकताानुसार कच्चा दूध या गुलाब जल मिलाकर एक स्मूथ और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. आपका केमिकल-फ्री, 100% नेचुरल फेस वॉश तैयार है. इस्तेमाल और मसाज की विधि सबसे पहले अपने चेहरे को नॉर्मल पानी से हल्का सा गीला कर लें. अब तैयार किए गए इस होममेड फेस वॉश को अपने पूरे चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह लगाएं. अपने दोनों हाथों की उंगलियों से सर्कुलर मोशन में चेहरे की कम से कम 5 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें. माथे, नाक और ठुड्डी के आसपास थोड़ा अच्छे से मसाज करें ताकि ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स निकल जाएं. 5 मिनट की मसाज के बाद चेहरे को साफ और ठंडे पानी से धो लें.