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गर्मी में राहत देने वाला एसी कब बन सकता है सेहत के लिए खतरा

 ऑफिस हो या घर, बिना एसी के गर्मी में समय काटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग अपना अधिकतर समय एयर कंडीशनर (AC) में बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी धीरे-धीरे आपको बीमार कर सकती है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, AC का गलत इस्तेमाल शरीर के मेटाबॉलिज्म से लेकर फेफड़ों तक समस्या पैदा कर सकता है. एयर कंडीशनिंग खुद बीमारी नहीं बनाती, लेकिन बहुत तेज़ ठंड, ड्राय हवा और गंदे फिल्टर शरीर पर असर डाल सकते हैं. तो आइए वो कौन सी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक एसी में रहने से होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में जान लीजिए. AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां? एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. मीडिया  के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.  यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं. जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है. थर्मल शॉक और थकान जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे. गंदा AC भी बनता है वजह  पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.

OnePlus Pad 4 लॉन्च: 13.2 इंच डिस्प्ले और 13380mAh बैटरी वाला दमदार प्रीमियम टैबलेट

वनप्‍लस ने OnePlus Pad 4 को भारत में लॉन्‍च कर दिया है। यह कंपनी का प्रीमियम फ्लैगश‍िप टैबलेट है, जिसे ‘स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 चिपसेट’ से पैक किया गया है। टैबलेट में 13.2 इंच का 3.4K रेजॉलूशन डिस्प्ले है और 13380 एमएएच की बड़ी बैटरी दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह काफी पतला है और कंपनी दावा करती है कि इस टैबलेट के साथ यूजर्स को PC लेवल की परफॉर्मेंस मिलेगी। OnePlus Pad 4 के प्राइस और उपलब्‍धता     8GB+256GB मॉडल की कीमत 54,999 रुपये है।     12GB+512GB मॉडल के दाम 59,999 रुपये हैं।     इस टैबलेट की सेल 5 मई 2026 से Amazon, Flipkart, OnePlus.in और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू होगी। कुछ बैंक कार्ड्स पर 5000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है साथ ही 5,499 रुपये प्राइस वाला OnePlus Stylo Pro फ्री दिया जाएगा। OnePlus Pad 4 के स्‍पेस‍िफ‍िकेशंस और फीचर्स     OnePlus Pad 4 एक बड़े डिस्‍प्‍ले वाला पतला और प्रीमियम टैबलेट है।     इसमें 13.2 इंच का 3.4K डिस्प्ले, 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट और 1 हजार निट्स की ब्राइटनैस दी गई है।     टैब में 7:5 'ReadFit' आस्पेक्ट रेश्यो दिया गया है, जिससे डॉक्‍युमेंट्स पढ़ने और मल्‍टीटास्‍क‍िंग में आसानी होती है।     OnePlus Pad 4 में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज है।     यह वनप्‍लस का सबसे पावरफुल टैबलेट है और 13,380mAh बैटरी के साथ सबसे बड़े टैब्‍स में शामिल है।     इसे चार्ज करने के लिए बॉक्‍स में 80वॉट की सुपरवूक चार्जिंग मिलती है। दावा है कि फुल चार्ज के बाद यह 54 दिनों     का स्‍टैंडबाय और 20 घंटे का वीड‍ियो प्‍लेबैक दे सकता है।     हैवी परफॉर्मेंस के दौरान टैब में कोई रुकावट ना आए, इसके लिए टैब में 'Cryo-velocity Cooling System' दिया गया है, जो टैब को ठंडा रखता है।     ‘वनप्‍लस पैड 4’ रन करता है OxygenOS 16 पर। कंपनी ने इसमें माउस-कीबोर्ड शेयरिंग फीचर दिया है, जिससे यह लैपटॉप जैसा एक्‍सपीरियंस देता है। OnePlus Pad 4 के अन्‍य फीचर्स     मेटल यूनिबॉडी के साथ आने वाला OnePlus Pad 4 सिर्फ 5.94mm स्‍लीक है। इसका वेट 672 ग्राम है। इसमें 8 स्‍पीकर्स (4 वूफर्स और 4 ट्वीटर) का सेटअप है।     टैब में एआई फीचर्स दिए गए हैं। इनमें एआई राइटर, एआई समरी, एआई पेंटर, एआई क्‍लीयर कॉल आदि शामिल हैं। 50 हजार से अधिक प्राइस, क्‍या OnePlus Pad 4 खरीदना चाहिए? वनप्‍लस का प्रीमियम और फ्लैगश‍िप टैबलेट हर मोर्चे पर अडवांस, फास्‍ट और बेहतरीन नजर आता है। NBT टेक के पास यह डिवाइस मौजूद है। हम इसे र‍िव्‍यू कर रहे हैं। अब तक के एक्‍सपीरियंस में वनप्‍लस पैड 4 एक सॉलिड खिलाड़ी बनकर उभरा है। परफॉर्मेंस से लेकर डिस्‍प्‍ले और बैटरी क्षमता में यह दमदार है। वनप्‍लस का सबसे बड़ी बैटरी वाला टैब है। अगर बजट इजाजत देता है तो आप ब‍िना हिचक इसे खरीद सकते हैं।  

स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा बदलाव, OnePlus और Realme ने मिलकर बनाई नई स्ट्रैटेजी

 पिछले कुछ समय से अफवाह थी कि OnePlus बंद हो सकता है। इसे लेकर अब बड़ा अपडेट आया है। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus और Realme आपस में मर्ज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा चीन और ग्लोबल दोनों बाजारों के लिए किया गया है। ऐसे में यह एक अलग सब-प्रोडक्ट सेंटर बन गया है, जहां दोनों ब्रैंड्स की रिसर्च, डेवलपमेंट और मार्केटिंग टीमें एक साथ मिलकर काम करेंगी। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या OnePlus पूरी तरह से बंद होने वाला है, जिसका जवाब है नहीं। बताया जा रहा है कि यह विलय बदलते स्मार्टफोन मार्केट का नतीजा है। कुछ समय से स्मार्टफोन मार्केट में कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और चिप्स की कमी ने कंपनियों के लिए अस्तित्व में बने रहना मुश्किल कर दिया है। इसके अलावा बाजार में कंपटीशन की भी कमी नहीं है। यही वजह है कि बीबीके ग्रुप ने फैसला लिया है कि OnePlus और Realme एक साथ R&D, सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट का काम देखेंगे। क्या बंद हो जाएगा OnePlus? इस मर्जर की खबरें आने के बाद से लोग सोशल मीडिया पर कयास लगा रहे हैं कि क्या यह OnePlus का अंत है? रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐसा नहीं है। बताया जा रहा है कि इस मर्जर के बाद Oneplus प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर और Realme बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर फोकस करेगा। ऐसा भी बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस अब ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर दे रहा है, जो कि लागत कम करने का तरीका हो सकता है।(REF.) यूजर्स को इससे फायदा या नुकसान?     इस मर्जर से यूजर्स को कुछ फायदे होंगे, तो कुछ नुकसान भी। दरअसल:     अब दोनों ब्रांड्स की टीमें रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयर करेंगी। इससे संभव है कि पहले के मुकाबले सॉफ्टवेयर अपडेट्स और लेटेस्ट फीचर्स तेजी से यूजर्स को मिल सकें।     दोनों कंपनियों के रिसोर्स और सप्लाई चेन जुड़ने से प्रोडक्शन पर आने वाली लागत गिरेगी। कंपनी चाहे तो यह बचत ग्राहकों तक पहुंचा सकती है। Oneplus-Realme मर्जर से यूजर्स को ये नुकसान     इस मर्जर से बाजार में वैरायटी की कमी हो सकती है। दरअसल पहले ही ये ब्रैंड्स वनप्लस नॉर्ड CE6 लाइट और रियलमी P4X को एक जैसे हार्डवेयर के साथ पेश कर चुके हैं। ऐसे में आगे चलकर ऐसा और भी ज्यादा होने की संभावना है।     इस मर्जर से OnePlus की ब्रैंड वैल्यू पर फर्क पड़ सकता है। असल में OnePlus की एक प्रीमियम और अलग पहचान थी। अब Realme भी OnePlus जैसे फोन लॉन्च कर उसकी पहचान को धुंधला जरूर करेगा।     बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर देगा। ऐसे में वे यूजर्स जो ऑफलाइन फोन खरीदना पसंद करते हैं, वे OnePlus से दूर होने लगेंगे।  

ऑनलाइन शॉपिंग में नया साइबर खतरा, हजारों फर्जी अकाउंट से हो रही ठगी

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग अब जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन इसी के साथ ठगी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. अब फोन कॉल या OTP वाला पुराना स्कैम पीछे छूट रहा है. एक नया ज्यादा खतरनाक और बड़े स्तर पर होने वाला फ्रॉड OTP स्कैम से भी आगे निकल रहा है. इसे ही अब जामताड़ा स्टाइल ई-कॉमर्स फ्रॉड कहा जा रहा है, लेकिन फर्क ये है कि इस बार सब कुछ मशीनों से चल रहा है. जामताड़ा के बारे में नहीं पता तो बता दें कि ये जगह झारखंड में है. जामताड़ा नाम की वेब सीरीज भी बन चुकी है. दरअसल जामताड़ा से देश दुनिया भर में साइबर स्कैम होते आए हैं. वहां कई ऐसे ग्रुप्स हैं जो सालों से साइबर फ्रॉड कर रहे हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में सामने आया है कि ठग अब डिवाइस फार्मिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. आसान भाषा में समझें तो ये लोग एक साथ सैकड़ों-हजारों मोबाइल या वर्चुअल डिवाइस चलाते हैं. डिवाइस फार्मिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट को चूना इन डिवाइस से नकली अकाउंट बनाए जाते हैं और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स को चूना लगाया जाता है. यह पूरा काम इंसान से ज्यादा सिस्टम और ऑटोमेशन के जरिए होता है. पहले जामताड़ा में बैठकर ठग लोगों को फोन करते थे, लिंक भेजते थे और OTP लेकर पैसे निकाल लेते थे. अब वही ठग या उसी तरह के नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. फर्क बस इतना है कि अब आपको कॉल नहीं आएगा, बल्कि ठगी पर्दे के पीछे चुपचाप हो रही होगी. मान लीजिए किसी शॉपिंग ऐप पर पहले ऑर्डर पर 500 रुपये की छूट मिल रही है. एक आम यूजर इसे एक बार इस्तेमाल करेगा. लेकिन ये गैंग क्या करता है? ये हजारों फर्जी अकाउंट बनाता है. हर अकाउंट को नया यूजर दिखाया जाता है और हर बार वही 500 रुपये की छूट ली जाती है. यानी जहां एक यूजर एक बार फायदा उठाता है, वहीं ये गैंग हजारों बार वही ऑफर ले लेता है. इससे कंपनी को बड़ा नुकसान होता है और पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाता है. क्या होती है डिवाइस फार्मिंग? डिवाइस फार्मिंग दरअसल हजारों स्मार्टफोन्स का ग्रुप होता है. हजारों फोन यानी हजारों सिम और हजारों अकाउंट्स. इन अकाउंट्स के जरिए कई तरह के फर्जी काम किए जाते हैं. बॉट पंपिंग से लेकर फेक रिव्यू तक कराने के लिए स्कैमर्स इसी तरह के अकाउंट का सहारा लेते हैं. इनके जरिए फेक रिव्यू दे कर किसी प्रोडक्ट की रेटिंग को ऊपर किया जाता है. ऐसे ही किसी प्रोडक्ट की रेटिंग गिराने के लिए भी ये बल्क में कॉमेंट और डाउनवोट करते हैं. हाल ही में राघव चढ्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन किया है. उनके 1 मिलियन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कम हो गए. लेकिन इसके बावजूद इनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ने लगे. थोड़ा चेक करने के बाद पता चला कि ये काफी बॉट अकाउंट उन्हें फॉलो कर रहे हैं जो इसी महीने बनाए गए हैं.   प्रॉपर प्रोसेस होता है यूज इस फ्रॉड का स्केल इतना बड़ा है कि यह किसी छोटे ग्रुप का काम नहीं लगता. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है. कुछ लोग फर्जी सिम कार्ड जुटाते हैं, कुछ अकाउंट बनाते हैं, और कुछ लोग ऑर्डर प्लेस करके सामान को आगे बेच देते हैं. यानी यह अब ठगी नहीं, बल्कि एक पूरा बिजनेस मॉडल बन चुका है. इस पूरे खेल को जामताड़ा 2.0 इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सोच वही पुरानी है, लेकिन तरीका पूरी तरह नया है. पहले लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसा निकाला जाता था, अब सिस्टम को ही बेवकूफ बनाया जा रहा है. इसका असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है. जब इस तरह के फ्रॉड बढ़ते हैं, तो कंपनियां अपने ऑफर्स कम कर देती हैं. डिस्काउंट घट जाते हैं और असली यूजर्स को नुकसान होता है. यानी आखिर में कीमत आम लोगों को ही चुकानी पड़ती है. फ्रॉड डिटेक्शन है मुश्किल सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस तरह के फ्रॉड को पकड़ना आसान नहीं है. हर अकाउंट अलग दिखता है, हर डिवाइस नया लगता है और सब कुछ ऑटोमेटेड तरीके से चलता है. यही वजह है कि अब कंपनियां AI और एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा ले रही हैं. लेकिन यह एक तरह की दौड़ बन चुकी है. एक तरफ कंपनियां सिस्टम मजबूत कर रही हैं, तो दूसरी तरफ ठग नए तरीके निकाल रहे हैं. इस पूरे मामले से एक ये तो क्लियर है कि, जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ठगी के तरीके भी स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब खतरा सिर्फ फोन कॉल या लिंक से नहीं है, बल्कि बैकएंड में चल रहे उन सिस्टम्स से है जो दिखते नहीं, लेकिन बड़ा नुकसान कर देते हैं.

भीषण गर्मी में राहत देगा सौंफ का शरबत, शरीर को रखेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

 पिछले कुछ दिनों से भारत के ज्यादातर शहरों में चिलचिलाती तपती गर्मी और लू चल रही है. लू और गर्मी में जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो उसे हाइड्रेटेड और ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है. गर्मी में नींबू का शरबत तो सभी पीते हैं लेकिन क्या आपने कभी सौंफ का शरबत ट्राई किया है. बाजार में मिलने वाले शरबत अक्सर चीनी और प्रिजर्वेटिव्स से भरे होते हैं. ऐसे में सौफ का शरबत एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है. सौंफ की तासीर बेहद ठंडी होती है. ऐसे में बिना चीनी और बिना किसी आर्टिफिशियल मसाले वाला यह शरबत न केवल आपके शरीर को अंदर से ठंडा रखेगा बल्कि पाचन को दुरुस्त कर एसिडिटी और जलन जैसी समस्याओं को भी दूर भगाएगा. शरबत के लिए तैयार कर लें ये चीजें 1/2 कप मोटी सौंफ 2 कप पानी (भिगोने के लिए) 1/2 कप धागे वाली मिश्री मिश्री चीनी के विकल्प के रूप में जो प्रकृति में ठंडी होती है. आप चाहें तो शहद भी यूज कर सकते हैं. 8-10 ताजा पुदीने के पत्ते बर्फ के टुकड़े बिना चीनी-मसाले वाला सौंफ का शरबत कैसे बनाएं सबसे पहले सौंफ को अच्छी तरह साफ कर लें और इसे रात भर या कम से कम 4-5 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें. अब भीगी हुई सौंफ को उसी पानी के साथ मिक्सी जार में डालें. इसमें धागे वाली मिश्री और पुदीने के पत्ते डालकर एक महीन पेस्ट बना लें. तैयार पेस्ट को एक बारीक छलनी या सूती कपड़े की मदद से छान लें ताकि सौंफ के रेशे अलग हो जाएं. एक गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, तैयार सौंफ का अर्क डालें और ऊपर से ठंडा पानी मिलाएं. इसे अच्छी तरह चलाएं और ताजा पुदीने से सजाकर परोसें.

गर्मी में ककड़ी खाने के फायदे, शरीर को रखे ठंडा और हाइड्रेटेड

 गर्मियों के मौसम में शरीर को ऐसे फूड्स की जरूरत होती है जो पेट को ठंडा रखें, आसानी से पच जाएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. ककड़ी यानी लंबा खीरा एक ऐसा ही आसान और हेल्दी ऑप्शन है जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि कई तरह से फायदा भी पहुंचाता है. यह सड़क किनारे मार्केट में आसानी से मिल जाती है और सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. आप इसे ऐसे ही खा सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. आइए जानते हैं कि गर्मी के इस मौसम में ककड़ी खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. शरीर को रखे हाइड्रेट गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है लेकिन ककड़ी खाने से यह समस्या कम हो सकती है. इसमें लगभग 96% पानी होता है जो शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. धूप में बाहर रहने पर इसे खाना बहुत फायदेमंद होता है. स्किन के लिए फायदेमंद गर्मी में धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा हमारी स्किन पर पड़ता है. ऐसे में ककड़ी स्किन को अंदर से ठंडक देती है और उसे फ्रेश बनाए रखने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करने में भी मदद करते हैं. शरीर को ठंडक देता है जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे खाने की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखे. ककड़ी में नेचुरल ठंडक होती है, इसलिए यह बॉडी टेंपरेचर कम करने में मदद करती है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखती है. वजन कम करने में मददगार अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो ककड़ी एक बेहतर ऑप्शन है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है. डाइजेशन को बेहतर बनाती है अगर आपको पेट भारी लग रहा है या ब्लोटिंग की समस्या है तो ककड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है. इसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है और पेट को हल्का रखता है. यह आसानी से पच जाती है, इसलिए भारी खाना खाने के बाद भी इसे खाया जा सकता है.  

Aadhaar में DOB अपडेट रिक्वेक्ट हो गया? ऐसे करें सही और सफल अपडेट

Aadhaar कार्ड आज हर भारतीय के लिए एक जरूरी दस्तावेज है। बैंक, मोबाइल सिम हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर Aadhaar में आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) गलत हो, तो कई काम अटक सकते हैं। लोग अक्सर इसे ठीक कराने के लिए अपडेट रिक्वेस्ट डालते हैं, लेकिन कई बार यह रिक्वेस्ट रिजेक्ट भी हो जाती है। ऐसे में क्या करें यहां जानें: DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट होने पर करें ये काम UIDAI ने साफ किया है कि अगर आपकी DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो जाती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आप सीधे UIDAI की हेल्पलाइन 1947 पर कॉल कर सकते हैं या help@uidai.gov.in पर ईमेल भेजकर मदद ले सकते हैं। आगे आपको बताते हैं DOB अपडेट रिजेक्ट होने पर क्या करें, क्यों रिजेक्ट होता है और सही तरीका क्या है। क्यों होता है DOB अपडेट रिजेक्ट Aadhaar में जन्मतिथि अपडेट कराने के लिए सही डॉक्यूमेंट देना जरूरी होता है। अगर आपके द्वारा दिए गए दस्तावेज सही नहीं हैं या उनमें जानकारी मेल नहीं खाती, तो रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। कई बार डॉक्यूमेंट क्लियर नहीं होता, नाम और DOB में मिसमैच होता है या आपने गलत कैटेगरी में अपडेट डाल दिया होता है। ऐसे में सिस्टम रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर देता है। ईमेल करते समय किन बातों का रखें ध्यान जब आप UIDAI को ईमेल करें तो अपनी समस्या साफ-साफ लिखें। आपको अपनी Aadhaar संख्या (पूरी या masked), नाम, और समस्या का विवरण देना चाहिए। साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट भी अटैच करें, ताकि आपकी समस्या जल्दी समझी जा सके और समाधान मिल सके। घर बैठे Aadhaar में डेट ऑफ बर्थ बदलने का पूरा तरीका Step 1: सबसे पहले UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं और “My Aadhaar” सेक्शन में जाएं। वहां आपको “Update Your Aadhaar” का ऑप्शन मिलेगा। अब अपना 12-digit Aadhaar नंबर डालें और कैप्चा भरें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, जिसे डालकर लॉगिन करना होगा। Step 2: लॉगिन करने के बाद “Update Aadhaar Online” पर क्लिक करें। यहां आपको अलग-अलग डिटेल्स अपडेट करने का ऑप्शन मिलेगा, जिसमें Date of Birth (DOB) भी शामिल है। अब अपनी सही जन्मतिथि (DOB) भरें। ध्यान रखें कि जो DOB आप डाल रहे हैं, वही आपके डॉक्यूमेंट में भी होना चाहिए। Step 3: DOB अपडेट करने के लिए आपको वैध डॉक्यूमेंट अपलोड करना होगा, जैसे: Birth Certificate, 10th Marksheet, Passport डॉक्यूमेंट साफ और readable होना चाहिए, वरना रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। अब आपको अपडेट के लिए छोटी-सी फीस (आमतौर पर ₹50) ऑनलाइन पे करनी होती है। पेमेंट आप UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से कर सकते हैं।

जापानी लाइफस्टाइल के 5 हेल्दी राज: लंबी उम्र और फिट बॉडी का आसान फॉर्मूला

हेल्दी और फिट रहने की बात आती है तो जापानी लाइफस्टाइल को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. जापान के लोग न सिर्फ लंबी उम्र जीते हैं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी एक्टिव और एनर्जेटिक बने रहते हैं. उनकी फिटनेस का राज सिर्फ डाइट या एक्सरसाइज नहीं, बल्कि उनकी रोजाना की आदतों और लाइफस्टाइल में छुपा होता है. अगर आप भी बिना ज्यादा मेहनत के हेल्दी रहना चाहते हैं तो जापानी लोगों की कुछ आसान आदतें अपनाकर अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. धीरे-धीरे चबाकर खाएं जापानी लोग खाना बहुत आराम से और धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं. इससे खाना अच्छे से पचता है और कम खाने में ही पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह आदत ओवरईटिंग से बचाती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद करती है. खाने में वैरायटी बढ़ाएं जापान में लोग एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय अलग-अलग चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं. इससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं और खाने में वैरायटी भी बनी रहती है, जबकि ओवरईटिंग नहीं होती. खुद को एक्टिव रखें जापानी लोग अपनी डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करते हैं. वे अक्सर पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और फिटनेस बनी रहती है. भूख का 80% ही खाएं जापान में 'हारा हाची बू' नाम की परंपरा है, जिसमें लोग अपनी भूख का सिर्फ 80% ही खाते हैं. यह आदत ज्यादा खाने से रोकती है और वजन को बैलेंस रखने में मदद करती है. ग्रीन टी ग्रीन टी जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. रेगुलर ग्रीन टी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहते हैं तो इन आसान आदतों को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं. छोटी-छोटी ये आदतें आपके लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.

एलॉन मस्क vs सैम ऑल्टमैन: OpenAI को लेकर कोर्ट में हाई-प्रोफाइल जंग शुरू

दुनिया की सबसे बड़ी टेक लड़ाइयों में से एक अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और AI के धुरंधर सैम ऑल्टमैन आमने-सामने हैं. मामला सिर्फ दो बड़े नामों का नहीं है, बल्कि AI की दुनिया का डायरेक्शन तय करने वाली इस लड़ाई पर पूरी दुनिया की नजर है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल में एलॉन मस्क खुद गवाही देने कोर्ट पहुंचे. उन्होंने OpenAI पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मस्क का कहना है कि जिस मकसद से OpenAI की शुरुआत हुई थी, उसे पूरी तरह बदल दिया गया है. यहां तक की चैरिटी लूटने तक का आरोप लगा दिया. एलॉन मस्क ने ये भी बताया है कि उन्होंने ही कंपनी का नाम रखा था. इसके पीछे की कहानी बताई है. कहा है कि Open नाम इसलिए रखा गया था, क्योंकि इसे ओपन सोर्स रखने का मकसद था, गूगल की तरह इसे क्लोज सोर्स नहीं रखना था. कहां से शुरू हुई कहानी यह कहानी 2015 से शुरू होती है, जब एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर OpenAI की शुरुआत की थी. उस समय इसे एक नॉन-प्रॉफिट संस्था के तौर पर बनाया गया था. मकसद AI को सुरक्षित और इंसानों के हित में डेवेलेप करना था. मस्क ने इस प्रोजेक्ट को फंड भी किया और इसे एक मानवता के लिए AI पहल बताया गया. लेकिन समय के साथ चीजें बदलने लगीं. अब आरोप क्या हैं एलॉन मस्क का आरोप है कि OpenAI ने अपने असली मकसद से धोखा किया. उनका कहना है कि कंपनी अब एक प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी बन गई है, जबकि शुरुआत में इसे गैर-लाभकारी संस्था के रूप में बनाया गया था. मस्क ने कोर्ट में कहा कि उन्हें यह सोचकर इन्वेस्ट करने को कहा गया था कि OpenAI मानवता के लिए काम करेगा, लेकिन बाद में इसे एक बिजनेस में बदल दिया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि यह चैरिटी को लूटने जैसा है और कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह हटकर काम किया. कितना बड़ा है मामला यह सिर्फ एक सामान्य केस नहीं है. एलॉन मस्क इस केस में अरबों डॉलर का मुआवजा मांग रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रकम 130 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो इससे OpenAI के काम करना का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है. यहां तक कि कंपनी को फिर से नॉन-प्रॉफिट मॉडल में वापस लाने की मांग भी की गई है. इस पूरे केस को और बड़ा बनाता है इसमें दांव पर लगी रकम. मस्क ने OpenAI के खिलाफ करीब 100 अरब डॉलर से ज्यादा के नुकसान का दावा किया है. उनका कहना है कि उन्हें जिस मकसद के लिए निवेश करने को कहा गया था, वह पूरी तरह बदल दिया गया और इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो यह टेक इंडस्ट्री के इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक बन सकता है. OpenAI का जवाब क्या है दूसरी तरफ OpenAI और सैम ऑल्टमैन ने इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि मस्क का असली मकसद प्रतिस्पर्धा है. OpenAI का तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में टिके रहने के लिए फंडिंग और प्रॉफिट मॉडल जरूरी था. खासकर गूगल और दूसरी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा. कंपनी यह भी कह रही है कि मस्क खुद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI चला रहे हैं, इसलिए यह मामला कंपटीशन से भी जुड़ा हुआ है. कोर्ट में क्या हुआ अब तक ट्रायल के दौरान एलॉन मस्क ने खुद गवाही दी और ओपनAI के शुरुआती दिनों की कहानी बताई. उन्होंने कहा कि OpenAI एक ओपन और सुरक्षित AI बनाने के लिए शुरू किया गया था, उन्होंने गूगल के साथ AI रेस और उस समय के अंदरूनी फैसलों का भी जिक्र किया. वहीं, कोर्ट में यह भी सामने आया कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पर्सनल भी बन चुका है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह लड़ाई अब दो नेताओं के बीच की टकराव जैसी दिख रही है. AI की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा यह केस सिर्फ मस्क और ऑल्टमैन तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है. अगर मस्क जीतते हैं, तो AI कंपनियों पर ज्यादा नियम और ट्रांसपेरेंसी का दबाव बढ़ सकता है. वहीं अगर OpenAI जीतता है, तो यह साबित होगा कि AI को आगे बढ़ाने के लिए प्रॉफिट मॉडल जरूरी है. दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन कभी साथ काम करते थे. लेकिन आज वही दो लोग कोर्ट में आमने-सामने खड़े हैं. यह लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फ्यूचर कैसा होगा. क्या यह मानवता के लिए काम करेगा या कंपनियों के मुनाफे के लिए? इस पूरे मामले से एक बात साफ है. AI जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके आसपास विवाद भी बढ़ रहे हैं. एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन की यह लड़ाई आने वाले समय में यह तय कर सकती है कि AI का रास्ता कौन तय करेगा, टेक्नोलॉजी या बिजनेस.

बिजली के उतार-चढ़ाव से बचाव: क्यों जरूरी है पूरे घर के लिए वोल्टेज स्टेबलाइजर

मनोरंजन और सुकून के लिए अधिकतर लोग अपने घरों में टीवी, फ्रिज, AC,कूलर आदि रखते हैं. कुल मिलाकर एक घर में बिजली से चलने वाले सामान की कीमत से कम 2-3 लाख रुपये होती है. ये सब कुछ एक झटके में खराब हो सकता है अगर आप अपने घर में वॉल्टेज कंट्रोल करने के लिए स्टेबलाइजर का यूज नहीं करते हैं. आमतौर पर लोग AC आदि की सुरक्षा के लिए उसमें स्टेबलाइजर का यूज करते हैं. अगर आपके इलाके में बिजली फ्लकचुएट करती है तो पूरे घर के लिए एक वॉल्टेज स्टेबलाइज होना चाहिए. ईकॉमर्स मार्केट और स्थानीय मार्केट में कई स्टेबलाइजर मौजूद हैं, जो पूरे घर के लिए यूज किए जा सकते हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के मुताबिक किलोवाट चुन सकते हैं. मार्केट में 5 KVA हेवी ड्यूटी स्टेबलाइजर को भी खरीदा जा सकता है, जिसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये है. मार्केट में 3 किलोवाट से 10 किलोवाट तक का स्टेबलाइजर मौजूद घर के लिए स्टेबलाइजर अपनी जरूरत के हिसाब से चुनना चाहिए. मार्केट में 3 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट तक का स्टेबलाइजर आता है. अलग-अलग ब्रांड वारंटी भी देते हैं. बिजली का उतार-चढ़ावा क्या होता है? बिजली विभाग या कंपनी द्वारा बिजली केबल पर एक लिमिट में पावर सप्लाई होती है और कई बार ओवर डिमांड होने पर या किसी खामी की वजह से बिजली में फ्लक्चुएशन देखने को मिलता है, जिसमें वॉल्टेज आउटपुट कम या ज्यादा हो जाता है. वॉल्टेज स्टेबलाइजर कैसे काम करता है? वॉल्टेज स्टेबलाइज, असल में खंबे से आने वाली बिजली को चेक करता है और फिर उसको आगे सप्लाई करता है. यह कम होते वॉल्टेज और बढ़ते वॉल्टेज को सेंस करता है, फिर स्टेबलाइजर के अंदर ट्रांसफॉर्मर और कंट्रोल सर्किट होते हैं जो वोल्टेज को बढ़ाते और घटाने का काम करते हैं. इसको उदाहरण के रूप में समझें तो अगर अगर घर में आने वाली पावर सप्लाई का वोल्टेज 150V तक गिर जाए तो स्टेबलाइजर उसको बढ़ाकर ~220V कर देगा. वहीं, अगर पावर सप्लाई में आने वाले वॉल्टेज 260V तक बढ़ जाए तो फिर स्टेबलाइजर उसे घटाकर ~220V कर देता है.