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क्याकिंग और केनोइंग में मप्र के खिलाड़ियों ने दिखाया दम, खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रीनगर (कश्मीर) की डल झील में हो रहे देश के पहले 'खेलो इंडिया जल-खेल महोत्सव-2025' में मध्यप्रदेश की खिलाड़ी सुडॉली विश्नोई ने कयाकिंग स्पर्धा की (के-1) 500 मीटर महिला वर्ग में स्वर्ण पदक और इसी स्पर्धा की (के-2) 500 मीटर में सुनिहारिका सिंह और सुचंद्रकला ने स्वर्ण पदक हासिल कर प्रदेशवासियों को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीनों बेटियों को इस स्वर्णिम उपलब्धि के लिए बधाई देकर इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां और सभी खिलाड़ी हमारा गौरव हैं। इन्हें पदक मिलने से पूरा प्रदेश गौरवान्वित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इसी खेल महोत्सव में मध्यप्रदेश के मंजीत मैतेई और आदित्य सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष वर्ग की (के-2) 500 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बधाई देकर इनके उज्ज्वल भविष्य कामना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी खेल महोत्सव में मध्यप्रदेश के सुधीर कुमार और प्रिंस गोस्वामी ने कैनो स्पर्धा की (सी-2) 500 मीटर पुरुष वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल करने पर इन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एथलीट अर्जुन वास्कले को दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चेन्नई में हो रहे 64वें राष्ट्रीय प्रादेशिक सीनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ी अर्जुन वास्कले द्वारा पुरूष स्पर्धा के 1500 मीटर इवेंट में कांस्य पदक जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वास्कले निरंतर आगे बढ़ते रहें और नए-नए कीर्तिमान रचते रहें।  

अश्विन के शो में द्रविड़ ने बताया अपना पसंदीदा चुनौतीपूर्ण गेंदबाज

नई दिल्ली  ये दीवार टूट क्यों नहीं रही है…है तो ये एक सीमेंट कंपनी के विज्ञापन की टैगलाइन लेकिन राहुल द्रविड़ अपने दौर में भारत के लिए ऐसी ही दीवार थे। गेंदबाज ऐसे सिर खुजाते थे जैसे कह रहे हों- ये दीवार टूट क्यों नहीं रही। लेकिन भारत की इस 'दीवार' को किस गेंदबाज को खेलना चुनौतीपूर्ण लगता था? रविचंद्रन अश्विन के साथ बातचीत में राहुल द्रविड़ ने इसका जवाब दिया है। राहुल द्रविड़ ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 164 टेस्ट, 344 वनडे और 1 टी20 मैच खेला। 1996 से 2012 तक उन्होंने दुनिया के एक से बढ़कर एक खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया। वसीम अकरम से लेकर वकार यूनुस और शोएब अख्तर तक; शेन वॉर्न से लेकर ग्लेन मैकग्रा और ब्रेट ली तक; मुथैया मुरलीधरन से लेकर चामिंडा वास तक; कोर्टनी वाल्स से लेकर कोर्टनी एंब्रोज तक; जेम्स एंडरसन से लेकर स्टुअर्ट ब्रॉड तक; एलन डोनाल्ड से लेकर मखाया एंटिनी तक…उन्होंने तमाम वर्ल्ड क्लास गेंदबाजों के खिलाफ खेला। 'कुट्टी स्टोरीज विद एश' शो में आर अश्विन ने राहुल द्रविड़ से पूछा कि उन्हें कौन सा तेज गेंदबाज सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण लगा। जवाब में द्रविड़ ने ग्लेन मैकग्रा का नाम लिया। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ने कहा, 'तेज गेंदबाज की बात करूं तो ग्लेन मैकग्रा। वैसे मैंने वसीम (अकरम) और वकार (यूनुस) को भी उनके करियर के आखिरी वक्त में खेला है। इसलिए यह सही नहीं होगा…जिन लोगों ने वसीम को पहले खेला था वे कहते हैं कि वह एक अलग ही किस्म के थे और वीडियो देखकर मैं कल्पना कर सकता हूं…और यहां तक कि अपने करियर के आखिरी दिनों में गेंदबाजी करने वक्त वह बहुत ही अच्छे थे। लेकिन मैंने मैकग्रा को उनके पीक के वक्त खेला है। वह जबरदस्त गेंदबाज थे। उन्होंने मेरे ऑफ स्टंप को किसी भी अन्य गेंदबाज से कहीं ज्यादा चुनौती दी…मैंने उनसे भी ज्यादा तेज गेंद फेंकने वालों को भी खेला है, लेकिन निरंतरता और कौशल के मामले में वह सबसे मुश्किल गेंदबाज थे, जिनका मैंने सामना किया है।' किस स्पिनर को खेलना उन्हें सबसे मुश्किल लगता था, इसके जवाब में द्रविड़ ने मुथैया मुरलीधरन का नाम लिया। उन्होंने कहा, 'स्पिनर की बात करें करें तो मैं जिनके खिलाफ खेला, उनमें मुथैया मुरलीधरन सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज थे। खासकर तब जब वह राउंड द विकेट आते थे और दूसरा फेंकते थे। वह ऐसे गेंदबाज रहे जो कभी नहीं थकते थे और लंबे स्पेल फेंकते थे। वह जबरदस्त स्पिनर थे।'  

दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्‍ट्रेलिया को दूसरे वनडे में 84 रन से दी मात, बना अनोखा रिकॉर्ड

नई दिल्‍ली दक्षिण अफ्रीका ने शुक्रवार को ऑस्‍ट्रेलिया को दूसरे वनडे में 84 रन से मात दी। इसी के साथ दक्षिण अफ्रीका ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बनाई। प्रोटियाज टीम ने पहला वनडे 98 रन से जीता था। बता दें कि मैके में खेले गए दूसरे वनडे में दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्‍लेबाजी की और पूरी टीम 49.1 ओवर में 277 रन बनाकर ऑलआउट हुई। जवाब में ऑस्‍ट्रेलियाई टीम 37.4 ओवर में 193 रन पर ढेर हो गई। प्रोटियाज टीम की जीत के हीरो लुंगी एनगिडी रहे, जिन्‍होंने 8.4 ओवर में एक मेडन सहित 42 रन देकर पांच विकेट झटके। महाराज-लुंगी का रिकॉर्ड याद दिला दें कि केशव महाराज ने पहले वनडे में घातक गेंदबाजी करते हुए 33 रन देकर पांच विकेट झटके थे। अब एनगिडी ने पांच विकेट चटकाए। इन दोनों गेंदबाजों ने मिलकर एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वनडे प्रारूप में यह पहला मौका है, जब ऑस्‍ट्रेलियाई जमीन पर कंगारू टीम के खिलाफ एक द्विपक्षीय सीरीज में मेहमान टीम के दो गेंदबाजों ने पारी में पांच विकेट चटकाए हैं। इससे पहले किसी टीम के गेंदबाज ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ इस तरह की कामयाबी हासिल नहीं कर सके थे। एनगिडी की बड़ी सफलता लुंगी एनगिडी ने दूसरे वनडे में पांच विकेट लेकर एक और उपलब्धि अपने नाम की। एनगिडी उन चुनिंदा गेंदबाजों के क्‍लब में शामिल हुए, जिन्‍होंने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में एक से ज्‍यादा बार पारी में पांच विकेट चटकाए। यह दूसरा मौका रहा, जब एनगिडी ने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ पांच विकेट झटके। इससे पहले 2020 में उन्‍होंने 58 रन देकर पांच विकेट लिए थे। ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच में सबसे ज्‍यादा बार एक पारी में पांच विकेट लेने का रिकॉर्ड वेस्‍टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कर्टली एंब्रोज और न्‍यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बांड के नाम संयुक्‍त रूप से दर्ज है। एंब्रोज और बांड ने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच में तीन-तीन बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया है। ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में पारी में ज्‍यादा बार पांच विकेट लेने वाले गेंदबाज     3 – कर्टली एंब्रोज (वेस्‍टइंडीज)     3 – शेन बांड (न्‍यूजीलैंड)     2 – लुंगी एनगिडी (दक्षिण अफ्रीका)     2 – ट्रेंट बोल्‍ट (न्‍यूजीलैंड)  

जो-जो कंपनियां टीम इंडिया की जर्सी पर थीं, अब वही हो रही हैं हटाई गई

मुंबई  भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर जगह पाना किसी भी कंपनी के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात होती है. मगर अजीब इत्तेफाक ये है कि 21वीं सदी में जिन कंपनियों ने टीम इंडिया की जर्सी की मुख्य स्पॉनशरशिप हासिल की, वे किसी कानूनी या वित्तीय विवाद में फंसीं. साथ ही वो कंपनी अर्श से फर्श पर भी आई. अब इसमें नया नाम ड्रीम11 (Dream11) का जुड़ चुका है. ऑनलाइन गेमिंग बिल के संसद से पारित होने के बाद ड्रीम11 भी अपना बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी कर रहा है. बता दें कि 21 अगस्त (गुरुवार) को प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 राज्यसभा से पास हो गया था. लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका था, ऐसे में अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ये बिल कानून का रूप ले लेगा. इस बिल में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी गेमिंग ऐप जिसमें पैसे का लेन-देन होता हो, उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा. इसमें किस्मत आधारित और स्किल आधारित गेम भी शामिल हैं. चूंकि ड्रीम11 भी स्किल-बेस्ड कैटेगरी में आता है. ऐसे में बिल के कानून बनते ही ड्रीम11 के मौजूदा ऑपरेशन्स भारत में पूरी तरह बंद हो जाएंगे. ड्रीम11 से पहले  बायजू, ओप्पो, स्टार इंडिया और सहारा ने बीसीसीआई के साथ करार किया था, लेकिन इन सभी का सफर मुश्किलों भरा रहा… सहारा (2001-2013): पहले बात सहारा की करते हैं, भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर सबसे लंबे समय तक अगर किसी ब्रांड का नाम जुड़ा रहा, तो वह था सहारा ग्रुप का. 12 सालों तक सहारा भारतीय टीम की जर्सी का मुख्य स्पॉन्सर रहा. इस दौरान भारतीय टीम 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल में हारी, वहीं टी20 वर्ल्ड 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 की वो विजेता बनी. टीम इंडिया के साथ इतनी लंबी साझेदारी के बावजूद सहारा का कारोबार धीरे-धीरे डगमगाने लगा. सहारा ग्रुप ने अपने दो हाउसिंग बॉन्ड्स के जरिए निवेशकों से लगभग 24,000 करोड़ रुपये जुटाए थे. हालांकि SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) का मानना था कि यह पैसा गलत तरीके से और नियमों का उल्लंघन करते हुए जुटाया गया. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को यह पूरा पैसा निवेशकों को वापस करने का आदेश देते हुए इसे SEBI के पास जमा करने के लिए कहा. सहारा ने कोर्ट के आदेशों का पालन ठीक से नहीं किया. 2014 में ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय को गिरफ्तार कर लिया गया. 2023 में सुब्रत रॉय का निधन हो गया, मगर अभी तक निवेशकों को पैसों की वापसी की प्रक्रिया जारी है. स्टार इंडिया (2014–2017): सहारा के बाद भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने स्टार इंडिया (Star India) के साथ डील किया. 2014-17 का वो दौर विराट कोहली और रोहित शर्मा के लिए काफी खास था और उन्होंने इस पीरियड में रनों का अंबार लगाया. हालांकि इसी बीच स्टार इंडिया की मुश्किलें बढ़ती गईं. वॉल्ट डिज्नी के स्वामित्व वाले स्टार पर मार्केट डॉमिनेंस के दुरुपयोग का आरोप लगा. आगे चलकर इस कंपनी की पकड़ कमजोर होती गई और इसे जियो के साथ मर्जर करना पड़ा. ओप्पो (2017–2020): चीनी कंपनी ओप्पो (Oppo) ने बीसीसीआई के साथ 1079 करोड़ रुपये का भारी-भरकम सौदा किया, जो पांच सालों के लिए था. हालांकि ओप्पो को उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं हुआ और स्पॉन्सरशिप का खर्च कंपनी को भारी पड़ने लगा. इस दौरान Nokia और InterDigital के साथ पेटेंट विवादों ने कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं. नतीजा ये हुआ कि ओप्पो ने ये करार बीच में ही तोड़ दिया. बायजू (2020-22): साल 2020 में भारतीय टीम की जर्सी के मुख्य स्पॉन्सर के तौर पर ओप्पो की जगह बायजू (BYJU'S) ने ली. लेकिन जल्द ही कंपनी अर्श से फर्श पर आ गई. इसकी वेल्यू 2022 तक 22 अरब डॉलर डॉलर थी, जो बाद में शून्य हो गई. कंपनी के पास बीसीसीआई को भुगतान करने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे. BCCI ने 158 करोड़ रुपये की वसूली के लिए NCLT (राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण) का दरवाजा खटखटाया था. ड्रीम11 (2023 से अब तक): फिर ड्रीम11 ने साल 2023 में 3 सालों के लिए भारतीय टीम की किट के लिए स्पॉन्सरशिप राइट्स हासिल किए. बीसीसीआई के साथ ड्रीम 11 की ये डील 358 करोड़ रुपये में हुई थी. शुरुआत में इसे एक बेहतरीन डील माना गया क्योंकि ड्रीम11 फैंटेसी गेम खेलने वाले यूजर्स के बीच बेहद पॉपुलर हो चुका था और क्रिकेट से उसका सीधा कनेक्शन भी था.  2021–22 में ड्रीम11 पर 1200 करोड़ रुपये की GST टैक्स चोरी का आरोप लगा. इस विवाद ने ड्रीम11 की छवि और भरोसे पर गहरा असर डाला. अब नया ऑनलाइन गेमिंग बिल इसके बिजनेस मॉडल पर सीधा प्रहार है. इससे न सिर्फ कंपनी की कमाई पर असर पड़ेगा, बल्कि टीम इंडिया की जर्सी से इसका नाम भी हट सकता है. देखा जाए तो ड्रीम11 की मौजूदा वैल्यू करीब 8 अरब डॉलर है और यह भारत की 3.8 बिलियन डॉलर की गेमिंग इंडस्ट्री में सबसे बड़ा खिलाड़ी है. लेकिन अगर यह मॉडल बंद होता है, तो कंपनी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खो देगी. फिर बीसीसीआई के साथ की गई 358 करोड़ रुपये की डील को निभाना मुश्किल होगा. बीसीसीआई के इन स्पॉनशर्स की कहानी कुछ वैसी ही है जैसे बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की. पहले शाहरुख, सलमान, आमिर की फिल्म लगभग हिट हो जाती थी. लेकिन अब उनकी कई फिल्में फ्लॉप हुईं. जैसे- ठग्स ऑफ हिंदोस्तान, लाल सिंह चड्ढा, ट्यूबलाइट, किसी का भाई किसी की जान. सुपरस्टार होने से लोकप्रियता मिलती है, लेकिन हमेशा सफलता की गारंटी नहीं रहती. ठीक ऐसा ही जर्सी स्पॉन्सर्स के साथ हुआ है. नाम मिलता है, पहचान मिलती है, लेकिन अक्सर नतीजा खास नहीं होता है. BCCI के लिए आगे बड़ा चैलेंज ये होगा कि उसे ऐसा ब्रांड मिले, जो प्रेशर और पब्लिसिटी को झेल पाए.

बीसीसीआई ने सीनियर पुरुष, महिला और जूनियर पुरुष चयन समितियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए

मुंबई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अपने पुरुष (सीनियर और जूनियर) तथा महिला चयन समितियों के लिए कई पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। बीसीसीआई की अधिसूचना के अनुसार, उसने सीनियर पुरुष चयन समिति के लिए दो राष्ट्रीय चयनकर्ता पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ये चयनकर्ता टीम इंडिया (सीनियर पुरुष) का चुनाव सभी प्रारूपों में करेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर शाम 5 बजे तक है। चुने गए उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा सकता है। सभी पदों पर बीसीसीआई के नियमों और आचार संहिता का पालन जरूरी होगा। सीनियर पुरुष चयनकर्ता बनने के लिए खिलाड़ी को कम से कम 7 टेस्ट या 30 प्रथम श्रेणी मैच या 10 वनडे और 20 प्रथम श्रेणी मैच खेले होने चाहिए। साथ ही, खिलाड़ी को खेल से कम से कम 5 साल पहले संन्यास लिया होना चाहिए। जो व्यक्ति बीसीसीआई की किसी क्रिकेट समिति का कुल 5 साल सदस्य रहा है, वह इस पद के लिए योग्य नहीं होगा। इस मानक के अनुसार, दक्षिण क्षेत्र से जुड़े चयनकर्ता श्रीधरन शरत का कार्यकाल खत्म हो सकता है। उन्होंने इससे पहले 2021 में जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और 2023 की शुरुआत में उन्हें वरिष्ठ चयन पैनल में पदोन्नत किया गया था। उनके साथ सुब्रतो बनर्जी या शिव सुंदर दास को भी रिप्लेस किया जा सकता है। महिला चयन समिति के सदस्य टीम इंडिया (सीनियर महिला) का चयन करेंगे। इसके अलावा, वे कोच और सपोर्ट स्टाफ की समीक्षा करेंगे, रिपोर्ट तैयार करेंगे, और नई खिलाड़ियों की बेंच स्ट्रेंथ बनाने पर ध्यान देंगे। महिला राष्ट्रीय टीम की ओर से खेलने वाली और कम से कम 5 साल पहले संन्यास ले चुकी खिलाड़ी इन पदों के लिए आवेदन कर सकती हैं। यहां भी वही शर्त लागू है कि जो व्यक्ति बीसीसीआई की किसी क्रिकेट समिति का कुल 5 साल सदस्य रहा है, वह आवेदन नहीं कर सकता। वर्तमान चयनकर्ता नीतू डेविड, आरती वैद्य, रेणु मार्ग्रेट और वेंकटचर कल्पना के पद छोड़ने की संभावना है, क्योंकि उन्हें सितंबर 2020 में नियुक्त किया गया था और उनका पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। हालांकि, श्यामा शॉ अपनी जगह बरकरार रख सकती हैं, क्योंकि वह जून 2023 में समिति में शामिल हुई थीं। जूनियर पुरुष चयन समिति का काम अंडर-22 तक की टीमों का चुनाव करना होगा। इसमें कैम्प, टूर्नामेंट, कप्तान और सपोर्ट स्टाफ का चयन भी शामिल है। इसके अलावा युवा खिलाड़ियों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना भी जिम्मेदारी का हिस्सा होगा। इस समिति में वही पूर्व खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने कम से कम 25 प्रथम श्रेणी मैच खेले हों और 5 साल पहले खेल से संन्यास लिया हो। कोई भी व्यक्ति जो किसी भी क्रिकेट समिति (जैसा कि बीसीसीआई के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन और नियमों व विनियमों में परिभाषित है) का कुल 5 वर्षों तक सदस्य रहा हो, जूनियर क्रिकेट समिति का सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं होगा। मौजूदा सदस्यों में रानादेव बोस, हरविंदर सिंह सोढ़ी, पथिक पटेल और कृष्ण मोहन को रिप्लेस किया जा सकता है, क्योंकि वे 2021 से इस समिति में हैं। वर्तमान अध्यक्ष तिलक नायडू, जो जून 2023 में जुड़े थे, फिलहाल बने रह सकते हैं।  

क्रिकेट चयन समिति में बड़ा फेरबदल, BCCI ने सेलेक्टर्स के लिए निकाली वैकेंसी

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने सीनियर मेन्स, वूमेन्स और जूनियर मेन्स चयन समिति में सेलेक्टर्स के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. कुल 7 पद खाली हैं जिसके लिए योग्य उम्मीदवार आवेदन कर पाएंगे. 10 सितंबर 2025 की शाम 5 बजे तक इन पदों के लिए आवेदन किया जा सकता है. शॉर्टलिस्टिंग और स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. बीसीसीआई की ओर से आवदेन करने के लिए लिंक भी शेयर किया गया है. मेन्स सेलेक्शन कमेटी में 2 पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इस समिति में शामिल सदस्य का काम भारतीय पुरुष टीम का चयन करना होता है. इस पद के लिए वही खिलाड़ी आवदेन कर सकते हैं, जिन्होंने 7 टेस्ट मैच या 30 फर्स्ट-क्लास मैच खेले हों. या 10 वनडे और 20 फर्स्ट-क्लास मैच. साथ ही कम से कम 5 साल पहले संन्यास लिया हो और बीसीसीआई की किसी क्रिकेट समिति में सदस्य के तौर पर 5 साल से ज्यादा का कार्यकाल नहीं रहा हो. वर्तमान में मेन्स सेलेक्शन पैनल में चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर, शिवसुंदर दास, सुब्रतो बनर्जी, अजय रात्रा और एस शरत शामिल हैं. इनमें मुख्य चयनकर्ता अगरकर का कार्यकाल जून 2026 तक बढ़ाया गया है. उधर महिला चयन समिति में 4 पद के लिए बोर्ड की ओर से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इस सेलेक्शन पैनल का मुख्य काम महिला टीम का चयन करना है. इसके साथ ही चयन समिति का काम कोच और सपोर्ट स्टाफ की जांच, मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करना और मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार करना होता है. इसके लिए वहीं प्लेयर अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का प्रतिनिधित्व किया हो. साथ ही कम से कम 5 साल पहले संन्यास लिया हो. इसके अलावा बीसीसीआई की किसी क्रिकेट समिति में कुल मिलाकर 5 साल से अधिक का कार्यकाल नहीं रहा हो. जूनियर मेन्स सेलेक्टर के लिए क्या है योग्यता? बीसीसीआई की तरफ से जूनियर मेन्स क्रिकेट समिति में 1 पद के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. जूनियर क्रिकेट समिति का सदस्य अंडर-22 लेवल तक की टीमों का चयन करेगा. इसके सदस्य का काम जूनियर टूर्नामेंट्स का आयोजन करना, कप्तान और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति करना और युवा खिलाड़ियों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना होता है.  जूनियर मेन्स क्रिकेटर समिति में सेलेक्टर पद के लिए वही खिलाड़ी आवेदन कर पाएंगे, जिन्होंने कम से कम 25 फर्स्ट-क्लास मैच खेले हों. साथ ही कम से कम 5 साल पहले क्रिकेट से संन्यास लिया हो. इसके अलावा बीसीसीआई की किसी क्रिकेट समिति में 5 से ज्यादा समय तक सदस्य नहीं रहा हो.

दादा के आशीर्वाद से गूंजी दुनिया: तपस्या गहलावत ने जीता वर्ल्ड खिताब

झज्जर  हरियाणा की बेटी तपस्या गहलावत कुश्ती के अंडर-20 मुकाबलों में नई विश्व चैंपियन बन गई हैं।  बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 19 वर्षीय तपस्या ने महिलाओं के 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में नॉर्वे की फेलिसिटास डोमजेवा को 5-2 से हराया। मूलरूप से झज्जर के गांव खानपुर कलां की रहने वाली तपस्या ने दादा के सपनों और पिता की जिद को हकीकत में बदलते हुए कुश्ती की दुनिया में भारत का परचम लहराया है। हालांकि इस प्रतियोगिता के समय उनके घर में दुख का माहौल था क्योंकि उनके दादा सेवानिवृत्त सैनिक राम मेहर सिंह का पिछले हफ्ते निधन हो गया था। वह सोनीपत के युद्धवीर अखाड़ा की बेटी है।  एक सप्ताह पहले दादा का हुआ निधन, कहा था-चैंपियन बनकर ही लौटना तपस्या के दादा का एक सप्ताह पहले दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय वह दिल्ली कैंप में विश्व चैंपियनशिप की तैयारी कर रही थीं। प्रशिक्षक शक्षक कुलबीर राणा ने बताया कि तपस्या को तब इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। दादा ने तपस्या से कहा था कि विश्व चैंपियन बनकर लौटना। तपस्या ने इसे सच कर दिखाया है। तपस्या के पिता परमेश गहलावत खुद एक अच्छे पहलवान रहे हैं। पर चोट के कारण उनका करियर अधूरा रह गया। बेटी को वही मुकाम दिलाने के लिए ही उन्होंने उनका नाम तपस्या रखा। पिता ने बताया कि विदेशी धरती पर राष्ट्रगान बजने की उपलब्धि हासिल करना उनके दादा चौधरी हजारी लाल के बाद उनका भी सपना था। इस सपने को उनकी परपोती तपस्या ने पूरा कर दिया।

महिला विश्व कप: शेड्यूल में बड़ा बदलाव, बेंगलुरु की जगह बदला वेन्यू

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आगामी महिला वनडे विश्व कप के लिए बेंगलुरु को आयोजन स्थल से हटाने का फैसला किया है। बीसीसीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले मैच मुंबई में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) द्वारा मैचों की मेजबानी के लिए पुलिस की मंजूरी प्राप्त करने के लिए बीसीसीआई की बार-बार दी गई समय-सीमा को पूरा ना कर पाने के कारण बेंगलुरु में होने वाले महिला विश्व कप मैचों को मुंबई में स्थानांतरित कर दिया गया है।   आईसीसी के चेयरमैन जय शाह ने कहा, ‘‘हालांकि अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हमें कार्यक्रम में बदलाव करते एक स्थान बदलना पड़ा, लेकिन अब हमें खुशी है कि हमारे पास पांच विश्वस्तरीय स्थान हैं, जहां महिला क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ मैच देखने को मिलेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मंच तैयार है और मुझे विश्वास है कि यह टूर्नामेंट कल्पनाओं को नए पंख लगाएगा और प्रशंसकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।‘‘ आठ टीमों के इस टूर्नामेंट के अन्य स्थानों में गुवाहाटी, इंदौर, विशाखापत्तनम और कोलंबो शामिल हैं। पाकिस्तान से जुड़े सभी मैचों और पहले सेमीफाइनल की मेजबानी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो को मिली है। जून में आईसीसी ने टूर्नामेंट की तारीखों की घोषणा करते हुए बेंगलुरु को पांच आयोजन स्थलों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया था। मेजबान भारत के साथ टूर्नामेंट के पहले मैच के अलावा बेंगलुरु को 30 अक्टूबर को एक सेमीफाइनल और संभवतः 2 नवंबर को फाइनल की मेजबानी भी करनी थी। (अगर पाकिस्तान फाइनलिस्टों में से एक नहीं होता)। बीसीसीआई को यह फैसला इसी साल 4 जून को घरेलू टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) द्वारा पहली बार आईपीएल जीतने के बाद स्टेडियम के आसपास मची भगदड़ के कारण इस स्टेडियम को बड़े आयोजनों के लिए 'असुरक्षित' करार दिए जाने के बाद लेना पड़ा है। कर्नाटक सरकार द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय समिति ने स्टेडियम को बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजनों के लिए "असुरक्षित" माना है। जिसके बाद कर्नाटक पुलिस ने केएससीए को वहां कोई भी मैच आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके कारण केएससीए को महाराजा टी20 को बेंगलुरु से मैसूर स्थानांतरित करना पड़ा था। बीसीसीआई के इस नए फैसले ने अब आईसीसी को संभावित कार्यक्रम में बदलाव के लिए मजबूर कर दिया है।  

700 करोड़ की डील के बाद मुंबई इंडियंस की टीम का नाम बदलने की तैयारी, रिपोर्ट में दावा

मुंबई  मुंबई इंडियंस फ्रैंचाइजी विदेशों में भी खूब सारा पैसा इन्वेस्ट कर रही है. कुछ सप्ताह पहले ही MI फ्रैंचाइजी ने द हंड्रेड लीग की ओवल इन्विंसिबल्स टीम में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है. अब एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ओवल इन्विंसिबल्स को 'MI London' नाम से जाना जाएगा. यह नया नाम अगले सीजन से लागू होगा. बता दें कि ओवल इन्विंसिबल्स ऐसी छठी टीम बनी थी, जिसका मालिकाना हक मुंबई इंडियंस के पास है. द टेलीग्राफ के मुताबिक द हंड्रेड सीजन 2026 से पहले ओवल इन्विंसिबल्स का नाम बदल कर 'MI London' कर दिया जाएगा. 2025 सीजन शुरू होने से पहले द हंड्रेड टीमों की कम से कम 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बोली लगनी शुरू हुई थी. इनमें से MI फ्रैंचाइजी ने ओवल इन्विंसिबल्स टीम के लिए बोली लगाई थी, जिसकी वैल्युएशन 123 मिलियन पाउंड्स बताई गई थी. चूंकि मुंबई इंडियंस ने 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है, जिसके लिए उसे करीब 60 मिलियन पाउंड्स से ज्यादा रकम चुकानी होगी. जो भारतीय मुद्रा में करीब 700 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी. ओवल इन्विंसिबल्स की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी अब मुंबई इंडियंस के पास है, बाकी 51 प्रतिशत का मालिक अब भी सरे काउंटी क्लब है. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक सरे चाहता था कि ओवल इन्विंसिबल्स को उसी का नाम मिले, इसके बावजूद अगले सीजन से टीम का नाम MI लंदन कर दिया जाएगा. मुंबई इंडियंस की कुल 6 टीम मुंबई इंडियंस फ्रैंचाइजी की अब दुनियाभर में कुल 6 टीम हो गई हैं. BCCI द्वारा संचालित इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में मुंबई इंडियंस टीम खेलती हैं. अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में MI न्यू यॉर्क का मालिकाना हक मुंबई इंडियंस के पास है. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका की SA20 में MI केपटाउन, इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) में MI एमिरेट्स और इंग्लैंड की द हंड्रेड लीग में ओवल इन्विंसिबल्स, इन सभी की मालिक MI फ्रैंचाइजी है.

वनडे कप्तानी को लेकर उठे सवाल, श्रेयस का नाम चर्चा में, BCCI सचिव ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली  पिछले कुछ दिनों से भारतीय क्रिकेट में हंगामा मचा हुआ है. रोहित शर्मा के टेस्ट और टी20 से संन्यास के बाद उनके वनडे खेलने पर भी सवाल उठाया जा रहा है. खबरें यहां तक आई कि एशिया कप से बाहर रखे गए श्रेयस अय्यर को उनकी जगह पर वनडे टीम का कप्तान बनाया जा सकता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने श्रेयस अय्यर के अगले वनडे कप्तान बनने की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी है.  कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि श्रेयस अय्यर जिन्हें एशिया कप 2025 की टीम से बाहर रखा गया था. रोहित शर्मा के बाद भारत के अगले वनडे कप्तान बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं.  सूत्रों ने बताया कि रोहित जो अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर हैं, उनको BCCI कप्तानी के बोझ से मुक्त करने के इच्छुक है. श्रेयस अय्यर को एशिया कप के लिए भारतीय टीम में नहीं चुना गया है.  बात करते हुए सैकिया ने सभी अफवाहों को खारिज कर दिया और कहा कि BCCI मैनेजमेंट ने इस मामले पर कोई चर्चा नहीं की है. उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए नई खबर है. ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है.” अय्यर तब से चर्चा में हैं जब से उन्हें अगले महीने एशिया कप के लिए चयनकर्ताओं द्वारा नजरअंदाज किया गया था. भारत के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने टीम की घोषणा के दौरान श्रेयस की अनुपस्थिति के बारे में बताया. पत्रकारों से कहा, “श्रेयस के मामले में अगर हम बात करें तो यह न तो उनकी गलती है और न ही हमारी. आप 15 खिलाड़ियों को चुन सकते हैं और फिलहाल आपको उनके मौके का इंतजार करना होगा.” श्रेयस अय्यर चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. कुल मिलाकर दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे. उन्होंने पांच मैचों में 48.60 की औसत से 243 रन बनाए इसमें दो अर्धशतक और 79 का सर्वश्रेष्ठ स्कोर शामिल है.