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‘फिर होगा 26/11 जैसा हमला’—पहलगाम के मास्टरमाइंड का जहरीला बयान, बढ़ी चिंता

नई दिल्ली बीते साल मई महीने में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर जिस तरह आतंकियों को करारा सबक सिखाया था, उससे आतंकी सरगना अब तक बौखलाए हुए हैं। है। हाल ही में इसके सबूत देखने को मिले हैं। पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के नंबर दो के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। इस दौरान उसने भारत में 26/11 जैसे हमले की धमकी भी दी है। बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में स्थित खूबसूरत बैसरन की घाटी में 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। आतंकियों ने इस दौरान लोगों को धर्म पूछकर उनपर गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले का मास्टरमाइंड कसूरी को ही माना जाता है। कसूरी अक्सर अपनी भारत विरोधी बयानबाजियों के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में सैफुल्लाह कसूरी ने 2008 के मुंबई हमले की याद दिलाते हुए एक चेतावनी दी है। इसमें उसने समुद्री रास्ते से भारत में फिर से 26/11 जैसा हमला करने की धमकी दी है। वीडियो में, कसूरी कहता है कि पाकिस्तान ने 2025 में हवा पर कब्जा कर लिया था और अब 2026 में वे समुद्र पर कब्जा कर लेंगे। कथित तौर पर कसूरी ने कहा कि जमीन, हवा या समुद्र, दुश्मन के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। वीडियो में कसूरी मुरीदके और बहावलपुर पर भारत के किए हमलों से बहुत बौखलाया लग रहा है। कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए भारत पर वॉटर टेररिज्म का आरोप लगाया, और धमकी दी कि कश्मीर पर दबाव का जवाब बलूचिस्तान समेत दूसरी जगहों पर अशांति से दिया जाएगा।  

होली पर सूखा जाम: जानें मार्च में कितने दिन नहीं मिलेगी शराब

नई दिल्ली मार्च त्योहारों का महीना है, यह महिना होली से राम नवमी और ईद-उल-फितर के साथ पूरा होगा। लेकिन, शराब प्रेमीयों के लिए यह महीना थोड़ा सख्त होने वाला है। अगर आप त्योहारों पर शराब के साथ जश्न मनाने का प्लान बना रहे हैं, तो तैयार रहिए इस बार ऐसे मौके काफी सीमित हैं। ड्राई डे क्या है? 'ड्राई डे' का मतलब सिर्फ शराब की बिक्री पर रोक है। रेस्टोरेंट, लग्जरी बार, होटल या कोई भी लाइसेंस्ड दुकान ग्राहकों को शराब नहीं परोस सकती। हालांकि, घर पर पहले से रखी शराब पीना पूरी तरह वैध रहता है। देशभर में होली, दिवाली, गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती जैसे बड़े त्योहारों और चुनावी दिनों को ड्राई डे घोषित किया जाता है। इस साल मार्च में कुल पांच दिन शराब नहीं बिकेगी। इनमें प्रमुख त्योहार शामिल हैं: 4 मार्च (बुधवार): होली 21 मार्च (शुक्रवार): ईद-उल-फितर 23 मार्च (सोमवार): शहीद दिवस (केवल महाराष्ट्र में) 26 मार्च (शुक्रवार): राम नवमी 31 मार्च (मंगलवार): महावीर जयंती 2026 के बाकी 'ड्राई डे' मार्च के बाद सालभर में और कई मौके हैं जहां शराब प्रेमियों को इंतजार करना पड़ेगा। 2026 में ड्राई डे की सूची अप्रैल: गुड फ्राइडे (3 अप्रैल) अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) मई: बुद्ध पूर्णिमा व महाराष्ट्र दिवस (1 मई) बकरीद (27 मई) जुलाई: आषाढ़ी एकादशी (25 जुलाई) गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) अगस्त: स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) ईद-ए-मिलाद सितंबर: जन्माष्टमी गणेश चतुर्थी अनंत चतुर्दशी अक्टूबर: गांधी जयंती दशहरा नवंबर: दिवाली (दिल्ली-एनसीआर में) दिसंबर: क्रिसमस (25 दिसंबर) महाराष्ट्र सरकार की सफाई हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि महाराष्ट्र सरकार ने होली, मुहर्रम और गांधी जयंती पर शराब दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन राज्य सरकार ने तुरंत सफाई जारी कर इन खबरों को खारिज कर दिया। महाराष्ट्र एक्साइज डिपार्टमेंट ने साफ कहा कि किसी भी त्योहार पर शराब बिक्री की रोक में कोई ढील नहीं दी गई है।  

तानाशाह के बाद कौन? किम जोंग उन की बहन के बढ़ते कद से नए पावर गेम के संकेत

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया में किम परिवार की सत्ता और मजबूत हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तानाशाह किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया में बड़ी पदोन्नति मिली है। यूं कहें तो उनका कद और पावर बढ़ गया है। अब उन्हें उप-विभाग निदेशक से पूर्ण विभाग निदेशक (Department Director) बनाया गया है, जो मिनिस्टीरियल स्तर का पद माना जाता है। यह फैसला हाल ही में हुई पार्टी की नौवीं कांग्रेस के दौरान लिया गया, जहां किम जोंग उन को एक बार फिर पार्टी महासचिव चुना गया। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने मंगलवार को रिपोर्ट किया कि किम यो जोंग, जो पहले सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की केंद्रीय समिति में डिप्टी डिपार्टमेंट डायरेक्टर थीं, अब एक विभाग की डिपार्टमेंट डायरेक्टर नियुक्त कर दी गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें किस विभाग का नेतृत्व सौंपा गया है। उत्तर कोरिया में पांच वर्षों बाद हो रही इस पार्टी कांग्रेस के दौरान यह पदोन्नति हुई है। प्योंगयांग में चल रहे इस बहुचर्चित सम्मेलन में लगभग 5000 प्रतिनिधि शामिल हैं। यह सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ था और इसमें किम जोंग उन को पार्टी के महासचिव के रूप में दोबारा चुना गया। माना जा रहा है कि यह किम राजवंश के शासन के निरंतर बने रहने का एक और संकेत है। वहीं, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी के इस महीने के आकलन के अनुसार, उत्तर कोरिया पर 1940 के दशक से किम परिवार का ही शासन है। साथ ही, नेता किम की नाबालिग बेटी किम जू ऐ को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। किम यो जोंग शासन की प्रमुख आवाज बन चुकी हैं और दक्षिण कोरिया के खिलाफ धमकियों व उकसावे वाली बयानबाजी की एक श्रृंखला का नेतृत्व कर रही हैं। हालांकि, हाल ही में सीमा पार ड्रोन हमलों पर सियोल द्वारा खेद व्यक्त करने के संदर्भ में उनकी टिप्पणी में दुर्लभ सकारात्मकता दिखी थी। वह किम परिवार के उन चुनिंदा सदस्यों में से हैं जिन्होंने प्रमुख स्थान बनाए रखा है। राज्य मीडिया में उनका जिक्र होता रहता है, जबकि उत्तर कोरिया जैसे देश में नेता के भाई-बहनों का प्रदर्शन अक्सर अच्छा नहीं रहा है। गौरतलब है कि किम जोंग उन पर 2017 में अपने सौतेले बड़े भाई किम जोंग नाम की हत्या का आदेश देने का आरोप लगा था, जो उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। पूर्व नेता किम जोंग इल के एक भाई की बचपन में डूबने से मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य सौतेले भाई को दशकों तक निर्वासित रखा गया।  

अंडमान में बड़ा हादसा टला: पवन हंस का हेलिकॉप्टर समंदर में क्रैश, सभी 7 यात्रियों को बचाया गया

नई दिल्ली अंडमान में पवन हंस हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। जानकारी के मुताबिक उड़ान भरत ही यह समंदर में गिर गया। हेलिकॉप्टर में कम से कम सात लोग सवार थे जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है। जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी की वजह से समंदर में इसकी क्रैश लैंडिंग करवानी पड़ी। घटना अंडमान सागर में हुई जहां पायलट ने सूझबूझ दिखाई और समंदर में इसकी क्रैश लैंडिंग करवा दी। हेलिकॉप्टर में दो क्रू मेंबर्स समेत कुल सात लोग थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद तुरंत बचाव दल मौके पर पहुंचा और क्रू मेंबर्स व पैसेंजर्स को बाहर निकाला गया। जानकारी के मतुाबिक यह हेलिकॉप्टर पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर जा रहा था। उड़ान के बाद ही पायलट को तकनीकी खामी के बारे में पता चला। ऐसे में उसके पास समंदर में क्रैश लैंडिंग कराने का अच्छा विकल्प भी था। पवन हंस के प्रवक्ता ने बताया कि घटना सुबह 9.30 बजे करीब की है। यह हेलिकॉप्टर शॉर्ट लैंडिंग का शिकार हुआ है। घटना में यात्रियों और क्रू मेंबर्स को छोटी-मोटी चोटें आई हैं। कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। बता दें कि पवन हंस देश की सबसे बड़ी सरकारी हेलिकॉप्टर कंपनी है। दुर्गम इलाकों में जाने के लिए इसके बनाए हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बड़े नेता भी पवन हंस की सेवा का इस्तेमाल करते हैं। 1985 में इस कंपनी की स्थापना की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के दुर्गम स्थानों को जोड़ना है। चतरा में एक दिन पहले ही विमान हादसा झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना के खसियातु करम टांड जंगल में रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस सोमवार को क्रैश हो गया था। इस विमान में कुल 7 लोग मारे गए। इनमें दो पायलट,एक डॉक्टर, एक नर्स और एक मरीज के साथ उनके दो सहयोगी शामिल थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बीचक्राफ्ट (बीई9एल) विमान वीटीएजेवी ने रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन उड़ान के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। बारामती विमान हादसे में चली गई थी अजित पवार की जान बीते महीने 28 तारीख को बारामती में एक विमान हादसा हुआ था जिसमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पायलट्स की जान चली गई थी। इस हादसे को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। एनसीपी नेताओं का कहना है कि घटना की जांच गहराई से होनी चाहिए क्योंकि इस घटना के बीछे साजिश की बू आ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है।  

हाईकोर्ट की तल्ख नसीहत: आस्था पर आपत्ति है तो धर्म छोड़ने की बात क्यों नहीं?

मद्रास यदि कोई व्यक्ति 'जाति और पंथ' का उल्लेख किसी प्रमाण पत्र में नहीं चाहता है तो फिर उसे अपना धर्म त्यागना होगा। इसके बाद ही उसे 'नो कास्ट, नो रिलीजन' वाला प्रमाण पत्र मिल पाएगा। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक केस की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। जस्टिस कृष्णन रामस्वामी ने कहा कि हिंदू परंपरा के अनुसार जब तक कोई धर्म त्याग नहीं करता है, तब तक जाति और पंथ के उल्लेख के बिना प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। ऐसी मांग को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। यही नहीं जस्टिस रामस्वामी ने यह भी कहा कि जब कोई इस प्रकार धर्म का त्याग कर देगा तो फिर ऐसे किसी प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं रहेगी। इस मामले में एक शख्स ने अर्जी दाखिल की थी। उसका कहना था कि तमिलनाडु के तिरुपत्तूर तालुक के तहसीलदार ने ऐसा प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया है, जिसमें धर्म और जाति का उल्लेखन न हो। तहसीलदार के आदेश को उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याची का कहना था कि भले ही मेरे माता-पिता हिंदू धर्म से ताल्लुक रखते थे। लेकिन मुझे ऐसा प्रमाण पत्र चाहिए, जिसमें जाति और धर्म का उल्लेख न हो। उसकी इस मांग को तहसीलदार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में कोई सरकारी आदेश नहीं है। याचिका की सुनवाई करते हुए बेंच ने शख्स से पूछा था कि क्या आपने अपना वह धर्म त्याग दिया, जिसमें आपका जन्म हुआ था। इस पर याची ने कहा कि उसने अपना धर्मत्याग नहीं किया है। जस्टिस रामस्वामी ने कहा कि याची जब तक हिंदू धर्म के अनुसार अपना पंथ नहीं त्यागता है, तब तक उसकी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि शख्स ने अपना धर्म त्यागने के संबंध में कोई प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसी स्थिति में अदालत की ओर से तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा जाता है। बेंच ने अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत बोली- धर्म छोड़ने का सबूत लाओ, फिर मिलेगा प्रमाण पत्र इसके साथ ही अदालत ने शख्स को यह राहत भी दी कि वह अपना धर्म छोड़ सकता है और उसका सबूत अथॉरिटी को सौंप सकता है। यदि ऐसे सबूत देते हुए आवेदन किया गया तो फिर विचार किया जा सकता है कि इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी किया जाए। यह अपने आप में दिलचस्प मामला था, जिसके तहत शख्स सर्टिफिकेट में जाति और धर्म का उल्लेख नहीं चाहता था।  

ISRO रॉकेट फेल होने पर बड़ा एक्शन, डोभाल के निर्देश के बाद अब साजिश की पड़ताल

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के हालिया मिशनों में आई तकनीकी बाधाओं और विफलता की खबरों ने देश के सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया इसरो दौरे के बाद अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ को शामिल करते हुए इस विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी PSLV की लगातार विफलताओं के पीछे के 'प्रणालीगत मुद्दों' और संगठनात्मक समस्याओं की जांच करेगी। हालिया विफलताएं जिनका होगा विश्लेषण     PSLV-C62 (12 जनवरी, 2026): यह मिशन 16 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा। रॉकेट का तीसरा चरण प्रज्वलित नहीं हो सका, जिसके कारण यह समुद्र में जा गिरा।     PSLV-C61 (18 मई, 2025): ठीक इसी तरह की समस्या इस मिशन में भी देखी गई थी। इसमें भी तीसरा चरण काम नहीं कर पाया था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार की रणनीतिक जरूरतों के लिए बनाया गया EOS-09 सैटेलाइट नष्ट हो गया था। जांच का दायरा और समिति का उद्देश्य रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर तकनीकी समितियां यह पता लगाती हैं कि कौन सा पुर्जा खराब हुआ, लेकिन यह नई समिति मैन्युफैक्चरिंग, खरीद और रॉकेट के विभिन्न घटकों को असेंबल करने की प्रक्रियाओं की भी गहराई से जांच करेगी। भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम में अब कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं। इसलिए, समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या जवाबदेही तय करने के लिए कोई उचित प्रक्रिया मौजूद है और इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। समिति के सदस्य (जो इसरो के बाहर के विशेषज्ञ हैं) अप्रैल से पहले वर्तमान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 3 फरवरी को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया था, जो संभवतः PSLV-C62 मिशन की विफलता से ही जुड़ा था। पुरानी जांच प्रक्रियाओं में बदलाव रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना: ऐतिहासिक रूप से, इसरो रॉकेट विफलताओं के कारणों की जांच के लिए एक 'विफलता विश्लेषण समिति' (FAC) बनाता है और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करता है। हालांकि, PSLV-C61 और PSLV-C62 दोनों मामलों में यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। PMO को रिपोर्ट: 18 मई (PSLV-C61) की दुर्घटना की FAC रिपोर्ट PSLV-C62 के प्रक्षेपण से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन इसके विवरण गुप्त रखे गए हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि इसरो के भीतर विश्लेषण करने की पूरी विशेषज्ञता है, लेकिन इस बार जनता और स्टेकहोल्डर्स का विश्वास बनाए रखने के लिए तीसरे पक्ष का मूल्यांकन किया जा रहा है। अगला लक्ष्य: इसरो समस्या को पूरी तरह से ठीक करने के बाद जून में अपने अगले प्रक्षेपण की महत्वाकांक्षी योजना बना रहा है। आगामी मिशन: इस वर्ष 18 प्रक्षेपण निर्धारित हैं, जिनमें से 6 में निजी क्षेत्र के सैटेलाइट शामिल हैं। विदेशी लॉन्च: अगले साल जापान, अमेरिका और फ्रांस के 3 बड़े विदेशी सैटेलाइट भी लॉन्च होने हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी देश या कंपनी ने अपने प्रक्षेपण अनुरोध को वापस नहीं लिया है, जो दर्शाता है कि दुनिया भर में इसरो की विश्वसनीयता और उस पर भरोसा अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। गौरतलब है कि 1993 से PSLV की सफलता दर 90% से अधिक रही है और इसने लगभग 350 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उनकी कक्षाओं में स्थापित किया है।  

कुंभ 2027 को भव्य बनाने की तैयारी, सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल के सामने रखीं अहम मांगें

देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से मुलाकात की। इस दौरान सीएम ने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ की तैयारियों और नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार कुंभ 2027 के सफल, सुव्यवस्थित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सतत आयोजन को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ₹408.82 करोड़ की परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनवरी से अप्रैल 2027 तक आयोजित होने वाले इस महाआयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है, जिसके दृष्टिगत गंगा की निर्मलता, स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों हेतु ₹253 करोड़ के प्रस्तावों की स्वीकृति, जल जीवन मिशन के अंतर्गत अतिरिक्त राशि जारी करने करने के साथ ही इकबालपुर नहर प्रणाली, कनखल एवं जगजीतपुर नहर की क्षमता विस्तार का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे असिंचित भूमि की सिंचाई के लिए 665 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो सकेगा। जिससे हरिद्वार जिले के भगवानपुर और लक्सर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। परियोजना से लगभग 13 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। साथ ही क्षेत्र में पेयजल समस्या का समाधान भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हरिद्वार कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा तथा गंगा संरक्षण के लक्ष्य को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। बता दें कि सीएम धामी दिल्ली दौरे पर हैं। इस दौरान सीएम धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू किया जाना एक ऐतिहासिक निर्णय है। इस कानून के तहत पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में भी 153 लोगों को नागरिकता प्रदान की गई है। यह कदम न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है, बल्कि "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना को भी चरितार्थ करता है, साथ ही विश्व भर में रह रहे हिंदुओं को राष्ट्र गौरव से जोड़ता है।  

इमरान खान की तबीयत बिगड़ी! आधी रात अस्पताल ले जाने से मचा हड़कंप

इस्लामाबाद इमरान खान को रात दो बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लाया गया था। उनकी आंख में समस्या है और इलाज के लिए उन्हें लाया गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्हें तीन इंजेक्शन लगने हैं। यह दूसरा इंजेक्शन था। उनकी दाईं आंख की रोशनी 15 फीसदी ही बची है। पाकिस्तान में सत्ता से हटने के बाद नेताओं के लिए जिंदगी आसान नहीं रही है। पूर्व पीएम इमरान खान 3 साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं और उनके परिवार या समर्थकों को मिलने तक की परमिशन नहीं है। यही नहीं उनके निजी डॉक्टर और वकीलों तक को मिलने नहीं दिया जा रहा है। इस बीच मंगलवार को पाकिस्तान में उस वक्त हलचल मच गई, जब उनके समर्थकों को तड़के ही पता चला कि इमरान खान को रात दो बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लाया गया था। उनकी आंख में समस्या है और इलाज के लिए उन्हें लाया गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्हें तीन इंजेक्शन लगने हैं। यह दूसरा इंजेक्शन था। जानकारी मिल रही है कि उनकी दाईं आंख की रोशनी 15 फीसदी ही बची है। अब तीसरा इंजेक्शन 24 मार्च को लगाया जाएगा। उन्हें रात 2 बजे अस्पताल ले जाने के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसी को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता बैरिस्टर गोहर खान ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मुझे रात को 2 बजे यह पता चला कि इमरान खान को लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह चोरी-छिपे आखिर कौन सा इलाज हो रहा है। गोहर खान ने कहा कि इमरान खान के इलाज की जानकारी उनके समर्थकों को मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका इलाज शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में होना चाहिए। उनका इलाज तभी हो, जब उनके निजी डॉक्टर मौजूद रहें। इसके अलावा परिवार के सदस्य भी मौके पर हों। यह अस्पताल भी इस्लामाबाद में ही है। डॉक्टरों का कहना है कि इमरान खान की हालत स्थिर है। इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी निगरानी की गई और देखरेख में रखे जाने के बाद जब सब सामान्य दिखा तो उन्हें छोड़ा गया। इस संबंध में संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इमरान खान को अस्पताल लाया गया था। इस दौरान कड़ी सुरक्षा रखी गई। इसके अलावा सभी कानूनी और मानवीय सहायता भी उन्हें दी गई।' मंत्री ने यह भी बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि इमरान खान की नजर में सुधार हो रहा है। उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर दिख रहा है। हमें सरकार के किसी इलाज या रिपोर्ट पर भरोसा नहीं: इमरान की बहन उन्हें इलाज के बाद अदियाला जेल में भी शिफ्ट कर दिया गया है। इस मामले में इमरान खान की बहन अलीमा ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, 'हम सरकार के इलाज या उनकी टेस्ट रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं करते।' हमें खबरों से पता चला कि इमरान खआन को आधी रात में अस्पताल लाया गया। अलीमा ने कहा कि कानून कहता है कि यदि किसी कैदी का कोई इलाज होता है तो परिवार को बताया जाता है। हमें इस संबंध में कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि हमें सरकारी इलाज पर भरोसा नहीं है। अलीमा ने कहा कि डॉक्टरों को धमकियां दी गई हैं कि यदि उन्होंने कुछ भी लीक किया तो खैर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार रिपोर्ट्स को पब्लिक भी करती है तो हमें उन पर भरोसा नहीं होगा।  

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इडली की कीमत ₹315, यात्रियों ने जताई नाराजगी

बेंगलुरु    बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सामने आए एक बिल ने एयरपोर्ट पर खाने की कीमतों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. टर्मिनल-1 पर स्थित रामेश्वरम कैफे में एक यात्री ने घी पोड़ी इडली की एक प्लेट के लिए ₹315 चुकाए. बिल की रसीद सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या एयरपोर्ट पर खाने-पीने की कीमतों पर कोई नियंत्रण होता है. कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब एक यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपने खाने का बिल शेयर किया. यात्री ने बताया कि वह बेंगलुरु एयरपोर्ट पर स्थित रामेश्वरम कैफे गया था. वहां उसने एक प्लेट घी पोड़ी इडली ऑर्डर की, जिसका बिल 315 रुपये आया. यात्री ने इस बिल की रसीद पोस्ट करते हुए लिखा कि शहर के अंदर इसी कैफे के दूसरे आउटलेट्स पर इसी इडली की कीमत लगभग 90 रुपये होती है. यानी एयरपोर्ट के अंदर उससे करीब चार गुना ज्यादा दाम वसूले गए. यात्री ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या एयरपोर्ट अथॉरिटी इन कीमतों पर कोई लगाम लगाती है या रेस्टोरेंट अपनी मर्जी से दाम तय करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं. वायरल हो रही इस रसीद ने यात्रियों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर खाने-पीने की चीजों की कीमतों की कोई ऊपरी सीमा होनी चाहिए? यात्री का कहना था कि चार गुना कीमत वसूलना किसी भी तर्क से सही नहीं लगता. लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि जब वही ब्रांड शहर में कम कीमत पर सामान बेचता है, तो एयरपोर्ट की बाउंड्री के अंदर घुसते ही ऐसा क्या बदल जाता है कि कीमतें आसमान छूने लगती हैं? सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पोस्ट के आते ही लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. इंटरनेट की जनता इस मुद्दे पर दो गुटों में बंट गई है. एक पक्ष उन लोगों का है जो इस बढ़ी हुई कीमत को सरासर गलत मान रहे हैं. उनका तर्क है कि भोजन एक बुनियादी जरूरत है और एयरपोर्ट जैसी जगह पर इसका इतना महंगा होना उन यात्रियों के लिए मुश्किल पैदा करता है जो बजट में सफर करते हैं. एक यूजर ने लिखा कि अगर लागत बढ़ती भी है, तो वह 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़नी चाहिए, न कि सीधे चार गुना. वहीं, दूसरा पक्ष उन लोगों का है जो बिजनेस के नजरिए से इसे सही ठहरा रहे हैं. उनका कहना है कि हवाई अड्डे के अंदर दुकान चलाने का हिसाब बिल्कुल अलग होता है. एक यूजर ने कमेंट किया, "एयरपोर्ट पर दुकान का किराया शहर के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है. इसके अलावा दुकान को 24 घंटे खुला रखना पड़ता है, सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन करना होता है और सामान को टर्मिनल के अंदर लाने का लॉजिस्टिक्स खर्च भी बहुत अधिक होता है. इन सब खर्चों को निकालने के बाद ही दुकानदार अपना मुनाफा देख पाता है." रामेश्वरम कैफे बेंगलुरु का एक बहुत ही लोकप्रिय नाम है. इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इनके आउटलेट्स पर एक समय के भोजन की औसत कीमत लगभग 200 रुपये के आसपास रहती है. 

इंडिया दौरे से पहले कनाडा पीएम का बड़ा कदम, भारत के दुश्मन को देंगे ‘बेमुल्क’

 नई दिल्ली मुंबई आतंकी हमले का एक खूंखार किरदार अब बेमुल्क हो जाएगा. इस आतंकी का नाम तहव्वुर राणा है. मुंबई हमले की साजिश रहने वाला आतंकी तहव्वुर राणा कनाडा का निवासी है. लेकिन कनाडा ने अब पाकिस्तान में जन्मे इस टेररिस्ट की नागरिकता छीनने का फैसला किया है. कनाडा ने ये फैसला वहां के पीएम मार्क कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले लिया है.  तहव्वुर राणा पर 2008 के मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने का आरोप है. 64 साल का आतंकी राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साज़िश करने वालों में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाऊद गिलानी का करीबी साथी है. डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाऊद गिलानी अमेरिकी नागरिक है.   ग्लोबल न्यूज़ को मिले डॉक्यूमेंट्स के हवाले से लिखा है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने राणा को बताया है कि वे उसकी 2001 में मिली कनाडाई नागरिकता छीनने जा रहे हैं.  राणा 1997 में कनाडा आया था और बाद में उसे डेनमार्क के एक अखबार के स्टाफ पर हमला करने की साजिश रचने के लिए US में दोषी ठहराया गया था. 26/11 हमले का अहम किरदार  26/11 हमले का मास्टरमाइंड राणा ने मुंबई हमले का अहम किरदार था. इस हमले में 166 लोग मारे गए थे. आतंकी राणा को अप्रैल 2025 में यूनाइटेड स्टेट्स से भारत लाया गया था. नई दिल्ली पहुंचते ही उसे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया था.  रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अपने फैसले में इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिज़नशिप कनाडा (IRCC) ने लिखा कि राणा की सिटीजनशिप आतंकवाद की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए रद्द की जा रही है क्योंकि उसने अपने एप्लीकेशन फॉर्म में झूठ बोला था.  शिकागो में रहने की बात छिपाई IRCC ने एक रिपोर्ट में लिखा कि जब राणा ने 2000 में सिटीज़नशिप के लिए अप्लाई किया था, तो उसने दावा किया था कि वह पिछले चार साल से ओटावा और टोरंटो में रह रहा है, और देश से सिर्फ़ छह दिन बाहर रहा है. हालांकि, RCMP की जांच में पता चला कि उसने असल में लगभग पूरा समय शिकागो में बिताया था, जहां उसकी कई प्रॉपर्टी और बिज़नेस था, जिसमें एक इमिग्रेशन फर्म और एक किराने की दुकान भी शामिल थी. रद्द करने के फैसले में उस पर "एक गंभीर और जानबूझकर धोखा" देने का आरोप लगाया गया है. कहा गया है कि उसने "कनाडा के सिटीज़नशिप कानूनों का सम्मान नहीं किया" और इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे गलत तरीके से सिटीज़नशिप दे दी थी.  तुमने जानबूझकर कनाडा से अपनी गैर-मौजूदगी नहीं बताई IRCC ने 31 मई, 2024 को उसे लिखा, "तुम्हारा मामला ऐसा है जिसमें ऐसा लगता है कि तुमने नागरिकता के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस के दौरान कनाडा में अपने रहने की जगह के बारे में गलत जानकारी दी, क्योंे कि तुमने जानबूझकर कनाडा से अपनी गैर-मौजूदगी नहीं बताई." "तुम्हारी गलत जानकारी की वजह से फैसला लेने वालों को लगा कि तुमने नागरिकता के लिए रहने की जरूरतें पूरी कर ली हैं, जबकि ऐसा लगता है कि ये सच नहीं था" कनाडा की फेडरल कोर्ट करेगी फैसला सरकार ने कहा कि वह उसके केस को फेडरल कोर्ट को भेज रही है, जिसका इस बारे में आखिरी फैसला होगा कि नागरिकता "गलत जानकारी या धोखाधड़ी या जानबूझकर ज़रूरी हालात छिपाकर" ली गई थी या नहीं.ग्लोबल रिपोर्ट में कहा गया है कि तहव्वुर राणा का केस लड़ रहे टोरंटो के एक इमिग्रेशन वकील ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है और कहा है कि यह गलत था और उनके अधिकारों का उल्लंघन था. पिछले हफ्ते फेडरल कोर्ट में नागरिकता रद्द करने से जुड़ी एक सुनवाई हुई थी. सरकारी वकीलों ने 19 दिसंबर को कोर्ट से केस से सेंसिटिव नेशनल सिक्योरिटी जानकारी छिपाने की इजाज़त मांगी थी. इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के एक स्पोक्सपर्सन ने ग्लोबल न्यूज़ को बताया कि गलत जानकारी के लिए नागरिकता रद्द करना "कनाडाई नागरिकता की इंटेग्रिटी बनाए रखने का एक ज़रूरी तरीका है." मैरी रोज़ सबेटर ने कहा कि यह पक्का करने के लिए कि प्रोसेस फेयर हो, फेडरल कोर्ट ऐसे मामलों में आखिरी फैसला लेता है.