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SIR फाइनल लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 28 फरवरी तय तारीख; बंगाल में ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की होगी तैनाती

कोलकातानई दिल्ली पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच गतिरोध को देखते हुए यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि वे अभी सेवारत और कुछ पूर्व एडीजे रैंक के न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर प्रकिया में लोगों की ओर से पेश आपत्तियों और दावों पर फैसला लेने में मदद करने के लिए लगाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए और कहा कि उनके काम करने के लिए माहौल बनाएं। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली ममता बनर्जी सरकार के बीच दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप पर खेद जताते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश जारी किये। बेंच ने तार्किक विसंगति सूची में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया। न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का दिया आदेश इसने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पश्चिम बंगाल में एसआईआर के काम में सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों को मुक्त करने और पूर्व न्यायाधीशों को खोजने के लिए कहा। बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए ‘ए’ श्रेणी के पर्याप्त अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने पर कड़ा रुख अपनाया। कब पब्लिश होगी SIR की फाइनल लिस्ट सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक राज्य में मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी और साथ ही निर्वाचन आयोग को बाद में पूरक सूचियां जारी करने की भी अनुमति दी। बेंच ने राज्य के जिलाधिकारियों और एसपी को निर्देश दिया कि वे जारी एसआईआर कवायद के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करें और साथ ही यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियोंकी ओरसे पारित आदेशों को न्यायालय के आदेश के समान माना जाएगा। कोलकाता हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ और राज्य सरकार के अधिकारियों की ओर से सहायता प्रदान की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी समेत सभी हितधारकों की शनिवार तक बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया। वर्ष 2002 की मतदाता सूची से संतानों के संबंध में तार्किक विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना और मतदाता और उनके माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर होना शामिल है। मामले की अगली सुनवाई कब? भड़काऊ और धमकी भरे भाषणों के मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में ये (भड़काऊ) सभी बयान चुनाव के दौरान दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का एक बुरा माहौल है, जो दो संवैधानिक संस्थाओं चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच भरोसे की कमी दिखाता है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को अब तक मिली शिकायतों और उठाए गए कदमों की जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में मार्च के पहले हफ्ते में अगली सुनवाई होगी।

संस्कृति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मंथन, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आज बड़ा समिट

हरिद्वार हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज में ‘एआई इम्पेक्ट समिट 2026’ के अंतर्गत ‘एआई फॉर संस्कृति’ विषय पर आज एक विशेष समिट का आयोजन किया जा रहा है। इस समिट में एआई विशेषज्ञों के साथ विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय विद्वान संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में एआई की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के अनुसार, भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में सैकड़ों लोक कलाएँ, परंपराएँ और सांस्कृतिक विधाएँ विद्यमान हैं, जिनमें से कई लुप्त होने के कगार पर पहुँच रही हैं। समिट में इन लोक विधाओं के संरक्षण हेतु एआई के माध्यम से डिजिटल आर्काइव तैयार करने, सांस्कृतिक धरोहर के डिजिटलीकरण तथा वैश्विक स्तर पर उनके प्रसार जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यह समिट विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित होगी। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया एआई मिशन (भारत सरकार) और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। समिट का उद्देश्य तकनीक और परंपरा के समन्वय से सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाना तथा आने वाली पीढिय़ों के लिए उसे सुरक्षित और सुलभ बनाना है।

ट्रेड फ्रंट पर भारत की तेजी: US डील अप्रैल से शुरू, UK और ओमान समझौते पर अपडेट

नई दिल्ली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील मार्च में साइन हो सकती है और यह अप्रैल में लागू हो सकती है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से शुक्रवार को दी गई। साथ ही, गोयल ने कहा कि यूएस के साथ अंतरिम व्यापार समझौते के लीगल टेक्सट को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों की बैठक 23 फरवरी को शुरू होगी। इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते पर साझा बयान जारी किया था। इसमें अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन और ओमान के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) अप्रैल में लागू होने की संभावना है। न्यूजीलैंड के साथ हुआ समझौता सितंबर में लागू होने की उम्मीद है। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में गोयल ने कहा कि ग्लोबल ट्रेड का लाभ हर एमएसएमई, प्रत्येक कारोबारी और हर छोटे-बड़े स्टार्टअप तक पहुंचना चाहिए। हमारी कोशिश नए निर्यातकों को आगे बढ़ाना है। साथ ही, हमारे उत्पादों और सर्विसेज को दुनिया के कई देशों और महाद्वीपों पर पहुंचाना है। बीते हफ्ते, गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता संप्रभुता को छोड़े बिना उपभोक्ता हितों और निर्यात-आधारित विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए तैयार किया गया है। गोयल ने कहा कि 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने के चलते हमने इस समझौते में मजबूत स्थिति में डील की है और अपने देश के आत्मनिर्भर सेक्टर्स को सुरक्षित रखा है। उन्होंने आगे कहा कि चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा और दुग्ध जैसे "संवेदनशील" कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि इस ट्रेड डील का कोई नकारात्मक असर न हो। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, "अमेरिका को दुग्ध, मुर्गी पालन, मांस, गेहूं, चावल, मक्का और सोयाबीन पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है।"उन्होंने कहा,  "भारत ने केवल उन वस्तुओं के लिए चुनिंदा पहुंच की अनुमति दी है जिनकी उसे आवश्यकता है या जिनका वह अधिशेष उत्पादन नहीं करता है, जैसे अखरोट, पिस्ता और कुछ विशेष प्रकार की शराब, जिन पर न्यूनतम आयात मूल्य लागू है।"

मौसम विभाग की चेतावनी: इन इलाकों में तेज बारिश और आंधी का खतरा, रहें सतर्क

नई दिल्ली कम दबाव के क्षेत्र की वजह से दक्षिण भारत में कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 21 व 22 फरवरी को दक्षिण तमिलनाडु, दक्षिण केरल में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने वाली है। अगले सात दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, 21 व 22 फरवरी को दक्षिण तमिलनाडु, केरल, माहे में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। 20 फरवरी को अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में, 21 और 22 फरवरी को तमिलनाडु, केरल, माहे में गरज के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना है। 22 फरवरी को उत्तराखंड, 23 फरवरी को विदर्भ में, 23 और 24 फरवरी को छत्तीसगढ़, ओडिशा में, 20 और 23 फरवरी को केरल, माहे में, 21 से 24 फरवरी को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में, 22 से 24 फरवरी को तटीय और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में गरज और बिजली गिरने की संभावना है। इसके अलावा, 22 व 23 फरवरी को जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, 22-24 फरवरी को उत्तराखंड में छिटपुट बारिश व बर्फबारी होने वाली है। महाराष्ट्र में अगले चार दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने वाला नहीं है। उसके बाद इसमें दो से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। गुजरात में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उसके बाद इसमें दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। देश के बाकी हिस्सों में मिनिमम टेम्प्रेचर में भी कोई बड़ा बदला नहीं आएगा। दिल्ली का कैसा रहा मौसम दिल्ली में वायु गुणवत्ता शुक्रवार को 'खराब' श्रेणी में रही क्योंकि समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समीर ऐप के अनुसार, 19 स्टेशन ने वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में दर्ज की। सीपीसीबी वर्गीकरण के अनुसार, शून्य से 50 के बीच का एक्यूआई 'अच्छा', 51 से 100 'संतोषजनक', 101 से 200 'मध्यम', 201 से 300 'खराब', 301 से 400 'बहुत खराब' और 401 से 500 'गंभीर' माना जाता है। वहीं न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। स्टेशनवार आंकड़े के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.1 डिग्री कम है। लोधी रोड पर न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.2 डिग्री कम है।  

‘भैरव देव’ की झांकी जल्द शुरू, श्रद्धा और उत्साह का संगम; क्या है इसकी खासियत

जम्मू कश्मीर भक्ति, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम राजौरी में एतिहासिक भैरव बाबा की भव्य झांकी 25 फरवरी से होने जा रही है। राजौरी की अनोखी होली के रूप में प्रसिद्ध इस आयोजन का युवाओं को हर साल बेसब्री से इंतजार रहता है। राजौरी जिले में होली का पर्व हर साल पूरे हर्षोल्लास और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इस बार भी होली का उत्सव 25 फरवरी से भैरव देव की झांकी के साथ शुरू होगा। भैरव कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि 25, 27 फरवरी 02 और 04 मार्च को नगर के मुख्य बाजार में भैरव देव की भव्य झांकी निकाली जाएगी। वहीं, जवाहर नगर में भी 26, 28 फरवरी, 01 और 04 मार्च को रोजाना दोपहर 1.30 बजे से शाम तक झांकी का आयोजन होगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। जिन मार्गों से झांकी गुजरेगी वहां वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहती है।   ऐसे हुई थी परंपरा की शुरूआत राजौरी में होली के अवसर पर भैरव देव की झांकी निकालने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। मान्यता के अनुसार एक समय राजौरी में काले बुखार (एक घातक बीमारी) का प्रकोप फैला जिससे कई लोगों की मृत्यु हो गई थी। तभी एक साधु ने सुझाव दिया कि होली के अवसर पर भैरव देव की झांकी नगर में निकाली जाए, जिससे यह महामारी खत्म हो जाएगी। इसके बाद से हर वर्ष यह परंपरा निभाई जा रही है। युवाओं की खास भागीदारी आज भी झांकी में भैरव देव के रूप में सजे व्यक्ति के हाथों में चिमटा रहता है, जिससे मार खाने को लोग प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं। मान्यता है कि इससे व्यक्ति को जीवन में कभी बुखार नहीं होता। यही कारण है कि राजौरी के युवा, जो अन्य राज्यों में पढ़ाई या नौकरी के लिए गए होते हैं, वे भी इस उत्सव में शामिल होने के लिए विशेष रूप से लौटते हैं। होली के इस खास आयोजन को लेकर नगरवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

ओवरटेक के दौरान बड़ा हादसा: स्कूल बस के पास से निकलते वक्त बाइक नहर में गिरी

रामनगर उत्तराखंड के रामनगर में शुक्रवार को बड़ा हादसा हुआ है। जहां छोई-नाथुपुर क्षेत्र में एक ट्रैक्टर और स्कूल बस को ओवरटेक करते समय बाइक अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई। घटना में दो लोगों के घायल होने की सूचना मिली है। बताया गया कि बाइक सवार युवक अपनी बहना को ड्यूटी पर छोड़ने जा रहा था। तभी उनके साथ यह भयानक हादसा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना छोई-नाथुपुर क्षेत्र में हुई है। जहां शुक्रवार सुबह एक बाइक हादसे का शिकार हुई है। सूत्रों के मुताबिक बाइक सवार युवक अपनी बहन को छोई क्षेत्र में स्थित एक रिसोर्ट में ड्यूटी पर छोड़ने जा रहा था। इसी दौरान संकरी सड़क पर सामने से आ रही स्कूल बस और पास में चल रहे ट्रैक्टर के बीच से निकलने की कोशिश की। तभी बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नहर में नीचे जा गिरी। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और दोनों घायलों को नहर से बाहर निकाला। इसी बीच क्षेत्र पंचायत सदस्य पर्वत लटवाल भी मौके पर पहुंचे और मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार हादसे में युवक के पैर में फ्रैक्चर आया है, जबकि युवती को भी शरीर में कई जगह चोटें आई हैं। फिलहाल दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

रोते-बिलखते दिखे पाकिस्तानी सैनिक, BLA के वीडियो ने खोली अंदर की सच्चाई

इस्लामाबाद बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में पाकिस्तानी सैनिक हिरासत में नजर आ रहे हैं। वह पाकिस्तानी सरकार और सेना से अपनी जान बचाने लिए गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। इसमें सैनिक रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सर्कुलेट हो रहा है। गौरतलब है कि बीएलए ने दावा किया है कि उसने सात पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में ले रखा है। इन सैनिकों को छोड़ने के लिए समय सीमा भी तय की गई थी। हालांकि आलोचकों ने इस वीडियो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। किसने शेयर किया वीडियो बलूचिस्तान क्षेत्र के इंडिपेंडेंट ऑनलाइन न्यूज पोर्टल बलूचिस्तान पोस्ट ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर किया है। इसमें बीएलए के ऑफिशियल चैनल हक्काल का हवाला दिया गया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि कुछ लोग घुटनों के बल बैठे हुए हैं। उनके हाथों में एक कार्ड है। बताया जा रहा है कि यह पाकिस्तानी सैनिकों का ऑफिशियल सर्विस कार्ड और राष्ट्रीय पहचान पत्र है। वीडियो में यह लोग पाकिस्तानी अधिकारियों से अपने लिए अपील करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में क्या इन लोगों का दावा है कि उन्हें आधिकारिक ढंग से नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें सरकारी पहचान पत्र भी जारी किया गया और पोस्टिंग की गई। अब इन लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि आखिर पाकिस्तानी सरकार उन्हें पहचानने से इनकार क्यों कर रही है। वीडियो में एक पाकिस्तानी सैनिक पाकिस्तानी सेना से मदद की गुहार लगाता नजर आ रहा है। वह कह रहा है कि पाकिस्तानी सेना यह कैसे कह सकती है कि हम उसके आदमी नहीं हैं। आखिर यह कार्ड किसका है। (वह एक आई कार्ड दिखाता है।) वह आगे कहता है कि यह आर्मी का नहीं है? इसके बाद वह कहता है कि ऊपरवाले का वास्ता है। मेरे पिता की हालत ठीक नहीं है और मैं घर का सबसे बड़ा हूं। यह कहकर अन्याय मत करो कि हम पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं। क्या है पूरा मामला बता दें कि पहले बीएलए का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने उसके लोगों को कैद कर रखा है। इसके बाद उसने पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लेकर कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उसने सात दिन की समय-सीमा भी तय कर रखी थी। नए वीडियो में बीएलएल ने कहा है कि उसकी समय-सीमा में तीन दिन का समय अभी बचा है। ग्रुप ने इसे ऑपरेशन हीरोफ 2.0 का नाम दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं, सेना की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है।  

एलजी मनोज सिन्हा बोले: गद्दारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई, इतिहास में रहेगी उनकी निंदा

जम्मू उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चेतावनी दी है कि देश के खिलाफ गद्दारी करने वालों और आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े सभी मामलों की गंभीरता से जांच करेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वीरवार को कश्मीरी पंडितों की सम्मान के साथ घर वापसी को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। कहा कि कश्मीरी पंडितों की पूरी इज्जत और सुरक्षा के साथ वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा है। उन्होंने कहा, अपनी धरती पर अजनबी बन जाना दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है। कश्मीरी पंडितों की सम्मान और सुरक्षा के साथ वापसी पीएम मोदी का वादा : एलजी उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को कश्मीरी पंडितों की सम्मान के साथ घर वापसी को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। कहा कि कश्मीर पंडितों की पूरी इज्जत और सुरक्षा के साथ वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा है। एलजी प्रो. अशोक कौल की किताब कश्मीर-नेटिविटी रीगेंड के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। जम्मू विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह सभागार में हुए कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि अपनी धरती पर अजनबी बन जाना दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है। अपनी जड़ों से उजड़ जाने का दर्द आज भी बेघर हुए परिवारों की रगों में कांटों की तरह चुभता है। समय का मरहम भी कश्मीरी पंडितोंं के नरसंहार का गहरा दर्द नहीं भर सका। युवा याद रखें कि आतंकियों ने हजारों कश्मीरी मुसलमानों का खून बहाया एलजी ने कहा कि युवा पीढ़ी को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों का भी खून बहाया है। कई मामले इतने हृदयविदारक होते हैं कि उन्हें दोहराते समय शब्द लड़खड़ा जाते हैं। पिछले साल से उन परिवारों को न्याय मिलना शुरू हो गया है और अन्य आवश्यक चीजों के साथ-साथ उनकी रोजगार की जरूरतों को पूरा करने के प्रयास चल रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने से जड़ों की ओर लौटने का भरोसा जगा उपराज्यपाल ने कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह भरोसा पैदा हुआ कि कश्मीरी पंडित समुदाय की युवा पीढ़ी बिना किसी डर के अपनी जड़ों की ओर फिर से लौट सकती है। समारोह में डीन रिसर्च स्टडीज जम्मू यूनिवर्सिटी डाॅ. नीरज शर्मा, मंडलायुक्त रमेश कुमार, आईजीपी जम्मू भीमसेन टूटी सहित कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्य मौजूद थे। मुश्किल समय में संस्कृति व परंपराओं को बचाए रखा जम्मू विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह सभागार में पुस्तक विमोचन समारोह में मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की जबरदस्त भावना को मैं सलाम करता हूं। हर विस्थापित परिवार अपने अंदर चिंगारी लिए हुए था। इसके बावजूद संघर्ष और मुश्किलों के दौर में उन्होंने दर्शन, अध्यात्म, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बचाए रखा। नई ऊंचाइंयों को छुआ। एलजी ने कहा कि कश्मीर माइग्रेंट वेब पोर्टल भी लांच किया गया था। यह उनके लिए था जिनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया था। मैं कश्मीरी पंडितों को उस दर्द को महसूस कर सकता हूं जब 1989-90 में उन्हें रातों-रात घर छोड़ना पड़ा था। यह महज किताब नहीं, हमेशा रहने वाली तबाही को दिखाती है एलजी ने कहा कि प्रो. कौल की किताब कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी बताती है। उन बुरे दिनों के डर और पुरखों की जड़ों से छिन जाने की हमेशा रहने वाली तबाही को दिखाती है। यह साहित्यिक कोशिश नहीं बल्कि दशकों से हमारी सामूहिक चेतना पर छाई चुप्पी को तोड़ने की कोशिश भी है। जनता के सपनों को बर्बाद करने की साजिश हुई नाकाम एलजी ने कहा कि वर्ष 2019 से जम्मू-कश्मीर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। यूटी के लोगों के सपनों और किस्मत को बर्बाद करने की दुश्मन की नापाक साजिश को पूरी तरह से नाकाम किया गया है। बहुत कोशिशों से इस जमीन की पुरानी शान वापस लाई गई है और विकास तेज हुआ है। बहुत जल्द इस जमीन को आतंकवाद के खतरे से पूरी तरह से मुक्त करेंगे। आतंकवाद से जुड़ी हर घटना को खोला जाएगा एलजी ने कहा, आतंकवाद से जुड़ी हर घटना को खोलने की कोशिश की जाएगी। जनता के सपनों को बर्बाद करने वालों को मिट्टी में मिलाया जाएगा। आतंकवाद से जुड़े हर व्यक्ति को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। एेसे लोगों की सजा एसी होनी चाहिए कि आतंक का ईको सिस्टम रहम की भीख मांगता दिखाई दे। हम उन आतंकियों व उनके मददगारों को कभी माफ कर सकते हैं जिन्होंने आतंक फैलाया।  

वलसाड में भीषण एक्सीडेंट से मातम, परिवार के सात सदस्यों की मौके पर ही जान गई

वलसाड. गुजरात के वलसाड जिले में कपारड़ा–नानापोंढा हाईवे पर कुंभघाट के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मृतक कपारड़ा तालुका के अंबा जंगल गांव के निवासी थे। हादसे के समय कार में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं। यह दुर्घटना कुंभघाट के उस तीखे मोड़ पर हुई, जिसे अधिकारी पहले से ही दुर्घटना-प्रवण क्षेत्र बताते रहे हैं। ट्रक और कार की आमने-सामने टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसे की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य में जुट गए। आपातकालीन सेवाओं की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक, पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो गंभीर रूप से घायल पुरुषों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या सात हो गई। इंस्पेक्टर सूरजसिंह वसावा ने आईएएनएस से कहा, “हादसे के समय कार में सात लोग सवार थे, जिनमें पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। पांच लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दो पुरुषों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी भी मृत्यु हो गई। यह मार्ग पहले भी दुर्घटनाओं के लिए जाना जाता है और ज्यादातर मामलों में ट्रक शामिल रहे हैं।” हादसे में ट्रक चालक भी घायल हुआ है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि अभी उसका बयान दर्ज नहीं किया गया है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई या किसी अन्य कारण से। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जांच पर न्यायिक नजर; ममता बनर्जी की फटकार

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रही SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार और इलेक्शन कमिशन के बीच चल रहे विवाद को लेकर आपत्ति जताई। इसके साथ ही अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इसके लिए कलकत्ता हाई कोर्ट को आदेश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करे। अदालत ने कहा कि वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन को लेकर चल रहे अभियान पर जिस तरह का विवाद राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।