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ईरान को मदद के आरोपों पर घिरा श्रीलंका? अमेरिकी दबाव की खबरों पर मंत्री का जवाब

कोलंबो श्रीलंका ईरान के नाविकों के साथ अंतराष्ट्रीय कानून के तहत व्यवहार करेगा। अमेरिकी हमले के शिकार हुए ईरानी जहाज पर सवार यह नाविक फिलहाल श्रीलंका में रुके हुए हैं। श्रीलंका के एक मंत्री शनिवार को यह जानकारी दी। ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका, श्रीलंका पर दबाव डाल रहा है कि इन ईरानी नाविकों को उनके देश वापस न लौटने दे। हालांकि जब श्रीलंकाई मंत्री से अमेरिकी दबाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बता दें कि ईरानी जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था। इस हमले में कुछ नाविक मारे गए थे और कुछ घायल भी हुए थे। दूसरे युद्धपोत को भी सुरक्षा विदेश मंत्री विजिथा हिराथ ने नई दिल्ली में एक सम्मेलन को बताया कि श्रीलंका ईरानी फ्रिगेट आइरिस डेना के 32 नाविकों का कोलंबो की अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत ख्याल रख रहा है। उन्होंने कहाकि हमने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार सभी कदम उठाए हैं। श्रीलंका ने एक दूसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस बुशेहर, को भी सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। डेना पर हमले के एक दिन बाद इसके 219 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इंजन समस्याओं से जुड़ी रिपोर्ट के बाद जहाज को श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित त्रिनकोमाली ले जाया गया। इस बीच, भारत ने शनिवार को कहा कि उसने तीसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस लावान, को भी अपने किसी बंदरगाह पर मानवीय आधार पर ठहरने की अनुमति दी थी, क्योंकि उसने भी परिचालन समस्याओं की सूचना दी थी। तीन जहाज भारत द्वारा मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने से पहले आयोजित की गई एक बहु-राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू का हिस्सा थे। भारतीय प्रधानमंत्री एस जयशंकर ने कहाकि मुझे लगता है कि यह मानवीय काम था और हम इसके तहत ही काम कर रहे थे।  

संघर्ष से सफलता तक: ट्रक ड्राइवर की बेटी ने UPSC में हासिल की बड़ी रैंक

हरिद्वार  फातिमा अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और फिलहाल वह दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर काम कर रही हैं। वे रग्बी खेलने की शौकीन हैं। पिता चलाते हैं ट्रक, इकलौती बेटी ने UPSC में लहराया परचम; हासिल की इतनी रैंक यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम 2025 में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की फैरुज फातिमा ने भी परचम लहराया है। फातिमा ने एग्जाम में ऑल इंडिया 708वीं रैंक हासिल की है। 27 वर्षीय फातिमा ने तीसरे प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की है। परिवार में खुशी की लहर है और बधाईयों का ताता लगा हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में गर्व और खुशी का माहौल है। रुड़की के पिरान कलियर की रहने वाली फातिमा के पिता इकबाल अहदम (52) पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं जबकि मां हाउस वाइफ हैं। फातिमा अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और फिलहाल वह दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर काम कर रही हैं। वे रग्बी खेलने की शौकीन हैं। फातिमा ने ये साबित कर दिया है कि हालात कैसे भी हों मेहनत करने वालों से सफलता कोई नहीं छिन सकता। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है। माता-पिता की मेहनत ने ही फातिमा को हौसला दिया। 8 साल से तैयारी कर रही थीं फातिमा सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने फातिमा को पढ़ाई में हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बेटी ने भी माता-पिता की ख्वाहिशों को ध्यान रखा और सफलता की सीढ़ी चढ़ती गईं। वे करीब 8 साल से तैयारी कर रही थीं और पिछले दो एग्जाम में असफल होने के बावजूद हार नहीं मानी। इन उम्मीदवारों ने भी हासिल की सफलता टिहरी की मीनल नेगी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 66वीं रैंक हासिल की है। मीनल के पिता स्कूल टीचर हैं और उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में एग्जाम पास किया है। वहीं चंपावत के बाराकोट ब्लॉक के छुलापे गांव के अनुज पंत ने 69वीं रैंक हासिल की है। पिथौरागढ़ के राई क्षेत्र के आदित्य पाठक ने 189वीं रैंक हासिल की। बनाल पट्टी के गुलाडी गांव के होनहार युवा आशुतोष नौटियाल ने 398वीं रैंक हासिल की है हालांकि उनका चयन इंडियन पुलिस सर्विस में हुआ है। वहीं उत्तरकाशी के पुरोला स्थित सुनाली गांव के ऋषभ नौटियाल ने 552वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन इंडियन सिविल सर्विस के लिए हुआ है।

ईरान का बदला रुख: राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले– पड़ोसी देशों पर हमले नहीं होंगे, मांगी माफी

तेहरान पेजेशकियन ने कहा कि सैन्य बलों को एक आदेश दिया गया है। अब से, पड़ोसी देशों पर तब तक हमला न करें जब तक कि उन पर पहले हमला न हो। जो लोग इस मौके का फायदा उठाकर ईरान पर हमला करने की सोच रहे हैं, उन्हें साम्राज्यवाद की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा है कि अब ईरान उन देशों पर हमला नहीं करेगा। पेजेशकियान ने ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में कहा, "मुझे लगता है कि उन पड़ोसी देशों से माफी मांगना जरूरी है जिन पर हमला हुआ है।" उन्होंने कहा, "हमारा पड़ोसी देशों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। हम शांति और सुकून कायम करने के लिए इलाके में सहयोग की अपील करते हैं।" पेजेशकियन ने कहा, "सैन्य बलों को एक आदेश दिया गया है। अब से, पड़ोसी देशों पर तब तक हमला न करें जब तक कि उन पर पहले हमला न हो।" उन्होंने कहा, "जो लोग इस मौके का फायदा उठाकर ईरान पर हमला करने की सोच रहे हैं, उन्हें साम्राज्यवाद की कठपुतली नहीं बनना चाहिए।" उन्होंने कहा कि इजरायल या अमेरिका का समर्थन करना इज्जत और आजादी का रास्ता नहीं है। सऊदी अरब ने दी थी ईरान को चेतावनी इससे पहले, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने देश के सैन्य ठिकानों और तेल केंद्रों पर हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ईरान को 'गलतफहमी और गलत आकलन' से बचने की कड़ी चेतावनी दी थी। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौजूदगी वाले एक एयर बेस और एक प्रमुख तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किये गये हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजधानी रियाद के दक्षिण-पूर्व स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गयी एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। सऊदी प्रेस एजेंसी ने मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से पुष्टि की है कि इसी एयर बेस पर एक और मिसाइल हमला हुआ, जिसे भी विफल कर दिया गया। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात की सीमा के पास स्थित शयबाह तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए कई ड्रोन हमलों और रियाद के पूर्व में एक अन्य ड्रोन हमले को भी सेना ने नाकाम कर दिया है।  

मैच देखने जाना हुआ आसान! दिल्ली-साबरमती के बीच रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन

अहमदाबाद अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को होने वाले हाई-वोल्टेज टी-20 फाइनल मुकाबले को लेकर देशभर में क्रिकेट का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है। प्रशंसकों के इसी जबरदस्त उत्साह और अहमदाबाद जाने वाली उड़ानों के आसमान छूते किरायों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा राहतकारी फैसला लिया है। उत्तर रेलवे ने दिल्ली और एनसीआर के प्रशंसकों के लिए 'साबरमती टी-20 स्पेशल' ट्रेन चलाने की घोषणा की है। महंगी फ्लाइट और वेटिंग टिकटों से मिलेगी निजात फाइनल मैच के कारण दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और हवाई टिकटों की कीमतों में तीन से चार गुना बढ़ोतरी देखी जा रही थी। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए रेलवे ने नई दिल्ली से साबरमती के बीच विशेष ट्रेन (संख्या 04062) के संचालन का निर्णय लिया है।      इस बड़े खेल आयोजन के मद्देनजर नियमित ट्रेनों और फ्लाइट्स पर भारी दबाव था। यह स्पेशल ट्रेन उन प्रशंसकों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प साबित होगी जो स्टेडियम में बैठकर फाइनल का आनंद लेना चाहते हैं।- हिमांशु शेखर उपाध्याय, CPRO, उत्तर रेलवे ट्रेन का शेड्यूल और स्टॉपेज क्रिकेट प्रशंसकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन का समय इस प्रकार निर्धारित किया गया है कि यात्री मैच शुरू होने से पहले आराम से साबरमती पहुंच सकें।     प्रस्थान (नई दिल्ली): शनिवार रात 11:45 बजे।     आगमन (साबरमती): रविवार दोपहर 2:30 बजे।     प्रमुख स्टॉपेज: दिल्ली कैंट, गुरुग्राम, रेवाड़ी और जयपुर। 19 कोचों वाली 'क्रिकेट स्पेशल' की खासियत रेलवे ने इस विशेष ट्रेन में कुल 19 कोच लगाए हैं। यात्रियों की आरामदायक यात्रा के लिए इसमें सेकेंड एसी (2AC) और थर्ड एसी (3AC) श्रेणी के डिब्बे शामिल किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीटों की संख्या पर्याप्त रखी गई है ताकि अधिक से अधिक क्रिकेट प्रेमी इस सुविधा का लाभ उठाकर रविवार शाम को होने वाले महामुकाबले का गवाह बन सकें। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए तत्काल प्रभाव से अपनी टिकट बुक करा लें। यह ट्रेन न केवल दिल्ली बल्कि गुरुग्राम और जयपुर के प्रशंसकों के लिए भी अहमदाबाद पहुंचने का सबसे सुलभ जरिया बनेगी। इस पहल से उन हजारों युवाओं और प्रशंसकों के चेहरे खिल गए हैं जो बजट के कारण अपनी यात्रा को लेकर असमंजस में थे। अब 'साबरमती स्पेशल' के जरिए दिल्ली का जोश सीधे अहमदाबाद के मैदान पर नजर आएगा।  

नेपाल में शांतिपूर्ण चुनाव पर Narendra Modi की बधाई, लोकतंत्र की सराहना

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल को सफलतापूर्वक चुनाव कराने के लिए बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत करीबी दोस्त और पड़ोसी नेपाल के साथ काम करने को तैयार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने नेपाल की जनता और सरकार को बधाई दी। उन्होंने लिखा, "मैं नेपाल के लोगों और सरकार को चुनावों के सफल और शांतिपूर्ण तरीके से होने पर दिल से बधाई देना चाहता हूं। अपने नेपाली भाइयों और बहनों को अपने डेमोक्रेटिक अधिकारों का इतने जोश के साथ इस्तेमाल करते देखना बहुत अच्छा लग रहा है।” उन्होंने 'इस ऐतिहासिक कामयाबी को नेपाल की डेमोक्रेटिक यात्रा में गर्व का पल बताया।' पीएम मोदी ने आगे लिखा, "करीबी दोस्त और पड़ोसी होने के नाते, भारत नेपाल के लोगों और उनकी नई सरकार के साथ मिलकर शांति, तरक्की और खुशहाली की नई ऊंचाइयों को हासिल करने लिए काम करने को तैयार है।" नेपाल में आम चुनाव की काउंटिंग जारी है। 165 सीटों पर रैपर और काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आरएसपी ने शाम छह बजे तक 60 सीटें जीत ली हैं। यह एक ऐसी पार्टी है जो सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी। देश के बड़े नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा सीट पर 43 हजार मतों से पीछे चल रहे थे। उनका हारना और यहीं से बालेन शाह का जीतना लगभग तय माना जा रहा है। ओली ने झापा-5 सीट से दो बार विजय हासिल की है। एक 2017 में और दूसरी 2022 में बड़ी जीत हासिल की थी। नेपाल में बाकी 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर तय होती हैं। इसमें वोटर किसी प्रत्याशी को नहीं बल्कि पार्टी को वोट देते हैं। पूरे देश में दल को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीट मिलती है।

भूल भारी पड़ गई! पूजा सामग्री के साथ नहर में बह गए 2 लाख कैश, बाद में आया ध्यान

गुजरात  सूरत के पूना रोड इलाके के एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने पूजा के प्रसाद के साथ 2 लाख रुपए की रकम गलती से नहर में बहा दी। गामीमत रही कि जैसे ही घटना का पता चला तो तुरंत डुंभाल फायर स्टेशन को सूचित किया गया। फायर स्टेशन की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कड़ी मशक्कत के बाद नहर में गोता लगाकर 2 लाख रुपए की रकम को बरामद किया और परिवार को सुरक्षित वापस लौटा दिया। इस तलाशी अभियान के दौरान दो फायर ब्रिगेड कर्मी घायल हो गए। पूजा समग्री के साथ नहर में बहाए 2 लाख रुपए पूनागाम रोड पर निजानंद सोसाइटी में रहने वाले लिम्बा परिवार ने कुछ पहले अपने घर पर धार्मिक अनुष्ठान किया था। पूजा के बाद अनुष्ठान का सामान और फूल तिजोरी के पास एक अलमारी में रखे थे। परिवार के सदस्यों ने पूजा के बाद का सामान एक थैली में रखा और उसे पूना रोड पर नहर में विसर्जित कर दिया। घर पर तिजोरी की जांच करने पर पता चला यह पता चलने पर परिवार परेशान हो गया और तुरंत फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। अलर्ट मिलने के बाद डुंभाल फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के दो जवान हुए घायल फायर अधिकारी, सुनील चौधरी ने बताया कि फायर ब्रिगेड के मार्शलों ने नहर में पानी में उतरकर तलाशी शुरू कर दी थी। पानी के बहाव के बीच भी टीम ने धैर्य के साथ सर्च ऑपरेशन जारी रखा। थोड़ी कोशिश के बाद उन्हें 500 रुपये के नोटों के चार बंडल मिले, जिनकी कुल कीमत 2 लाख रुपये थी। फायर ब्रिगेड की टीम ने बरामद यह कैश लिम्बा परिवार को सुरक्षित लौटा दिया। हालांकि, इस तलाशी के दौरान कांच लगने से फायर ब्रिगेड के दो जवान घायल हो गए। परिवार के सदस्यों ने इस मुश्किल समय में मदद के लिए डुंभाल फायर ब्रिगेड स्टाफ का आभार जताया और उनके काम की तारीफ की।  

अमित शाह का बड़ा बयान: केदारनाथ से कन्याकुमारी तक घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करेंगे

हरिद्वार. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर भारत से बाहर किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तराखंड सरकार के 4 साल पूरे होने पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लगभग 10 हजार से अधिक अतिक्रमण उखाड़कर फेंक दिए हैं। यह सिर्फ अतिक्रमण की बात नहीं है। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं कि पूरे देश में जहां-जहां घुसपैठिए हैं, केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर हम भारत के बाहर निकालने का काम करेंगे।" इस दौरान शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची से कटना चाहिए। भाजपा चुनाव आयोग की प्रक्रिया का पूरा समर्थन कर रही है, क्योंकि जिस देश में लोकतंत्र को संभालने वाली इकाई, यानी मतदाता सूची शुद्ध न हो, उस देश का लोकतंत्र कभी सलामत नहीं रह सकता है। राहुल गांधी को जितना विरोध करना है, उतना कर लें। वे एसआईआर का भी विरोध करते हैं। उन्हें हर चीज में नकारात्मकता दिखाई देती है।" धामी सरकार के 4 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा, "आज पुष्कर सिंह धामी सरकार के 4 साल पूरे होने का अवसर है, लेकिन इसके साथ ही आज भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने का भी मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आए थे। यहां राज्य के 25 साल पूरे होने का महोत्सव शुरू करके गए। मैं कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड की जनता को बताना चाहता हूं कि एक जमाना था जब उत्तराखंड की भूमि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थी। उत्तराखंड की संस्कृति बचाने के लिए यहां के युवा मैदान में उतरे थे। उस समय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सहन न करने वाला दमन हमारे युवाओं पर किया था।" अमित शाह ने कहा, "अनेक युवाओं को गोली लगी। उन्होंने बलिदान दिया। रामपुर तिराहा की घटना आज भी उत्तराखंड वासी भूले नहीं हैं। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड की रचना की थी। कांग्रेस के शो कॉल्ड विद्वान कर रहे थे कि छोटे राज्य कैसे टिकेंगे और अर्थव्यवस्थाएं कैसे चलेंगी। अटल जी ने 3 छोटे राज्य बनाए थे जिनमें उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। ये तीनों राज्यों विकास के रास्ते पर आगे बढ़ गए हैं। जब हमारी सरकार के 9 साल पूरे हो रहे हैं।" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब पहले कार्यक्रम में मैंने हिस्सा लिया था। तब मैंने कहा था कि 'अटल जी ने बनाया है, पीएम नरेंद्र मोदी संवारने का काम करेंगे। ये 9 साल उत्तराखंड के विकास के थे। पिछले 4 साल के अंदर पुष्कर सिंह धामी ने एक-एक समस्या को चुन-चुनकर समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके कारण उत्तराखंड विकास के रास्ते पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि आज 1132 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन हो रहा है। यहां पर नई न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन हो रहा है। राज्य के वकील मित्रों को आग्रह है कि वे ये प्रदर्शनी जरूर देखें। पीएम मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों की ओर से बनाए गए 150 साल पुराने कानून समाप्त करके नागरिकों की सुरक्षा के लिए न्याय संहिताएं बनाई गई हैं। अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों को 2028 में पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। उसके बाद कोई भी नागरिक पुलिस थाने में जाकर एफआईआर कराएगा तो तीन साल में सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्याय प्रणाली समाप्त हो जाएगी। अब समय पर न्याय मिलेगा। ये दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय संहिताएं हैं। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2026 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। 2027 का उद्घाटन उत्तराखंड की जनता को करना है। यहां फिर से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनानी है।

ईरानी जहाज विवाद पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक, कहा— भारत का फैसला सही था

नई दिल्ली.  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच ईरानी नौसैनिक पोत को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति देने के फैसले का बचाव किया है। जयशंकर ने ईरानी जहाजों से जुड़ी घटनाओं को लेकर कहा कि भारत ने यह कदम कानूनी जटिलताओं से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर उठाया है। दरअसल, भारत की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से मिला संदेश विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लग गए और फिर वे कोच्चि में रुके। उनमें कई युवा कैडेट थे। जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे, और फिर वे किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।" ईरानी जहाजों को लेकर टिप्पणी बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की ये टिप्पणियां तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों के संदर्भ में आई हैं, जिनमें मार्च के पहले सप्ताह में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के केंद्र में आ गए थे। ये जहाज- आईरिस डेना, आईरिस लवन और आईरिस बुशहर- हिंद महासागर में परिचालन कर रहे थे और फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग ले चुके थे। मैनें जो किया वो सही… विदेश मंत्री जयशंकर इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण मानवीय विचारों से प्रेरित है। जयशंकर ने कहा, "श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने वही फैसला लिया जो उन्होंने लिया और दुर्भाग्य से उनमें से एक की जान नहीं बच पाई… हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के नजरिए से इस स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।" बताते चले के कि बीते 4 मार्च को, श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया गया था। इस हमले के कारण जहाज डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचा लिया गया और उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का समर्थन करेगी TMC

नई दिल्ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब ममता बनर्जी की टीएमसी भी सहमत हो गई है। सूत्रों की मानें तो टीएमसी इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का साथ देने को तैयार है। इससे पहले पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने से इनकार कर दिया था। सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़ा होना होगा और फिर नोटिस स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव होगा पराजित? आगामी सोमवार के लिए तय एजेंडा पेपर के अनुसार, यह प्रस्ताव ही दिन के कामकाज के रूप में सूचीबद्ध एकमात्र विषय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में "पीटीआई-भाषा" को बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के समक्ष आएगा । नोटिस तीन कांग्रेस सदस्यों मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया जाएगा। प्रस्तावित प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देने और "विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित आरोप लगाने" के लिए अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोक महत्व के मुद्दे उठाने पर आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई "अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों" पर उन्हें नहीं टोका गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला अब सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। उनके पक्षपातपूर्ण रवैये से सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और ऐसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिरला "सभी विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल का पक्ष लेते हैं" और यह सब सदन के सुचारु संचालन तथा जनता की चिंताओं और शिकायतों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान सदन में उनके बैठने को लेकर हालांकि नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वे संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।

इस्लामिक नाटो बनाकर ईरान पर हमला करने अचानक सऊदी पहुंचे मुनीर

तेहरान. मध्य पूर्व में लगातार बदल रहे हालात के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्री ने 'एक्स' पर असीम मुनीर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे 'संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते' के ढांचे के भीतर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष समझदारी दिखाएगा और किसी भी गलत कदम से बचेगा। रणनीतिक महत्व और 'इस्लामिक नाटो' की सुगबुगाहट इस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले तुर्की ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर त्रिकोणीय 'इस्लामिक नाटो' जैसा रक्षा गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका उद्देश्य अशांत मध्य पूर्व और उसके बाहर सुरक्षा समीकरणों को फिर से आकार देना है। पाकिस्तान का समर्थन हाल ही में जब सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर ईरानी हमले हुए, तो पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रियाद और अन्य खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की थी। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया केवल 'मौखिक निंदा' तक सीमित रहेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने '2025 रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत 'एक देश पर हमला मतलब दोनों देशों पर हमला' माना जाएगा। नाटो के 'अनुच्छेद 5' जैसा क्लॉज इस समझौते में नाटो के 'आर्टिकल 5' के समान एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया है कि इस रक्षा व्यवस्था में तुर्की को शामिल करने पर बातचीत अंतिम चरण में है। यह संभावित विस्तार दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है। सैन्य हस्तक्षेप या कूटनीति: क्या करेगा पाकिस्तान? भले ही इस समझौते में एक पर हमला, सब पर हमला जैसी बात कही गई हो, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान पारंपरिक सैन्य सहयोग जैसे- संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और ड्रोन तकनीक पर ही केंद्रित हैं; इसमें कोई परमाणु प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत में पूर्ण एकजुटता तो दिखाई है, लेकिन सैन्य तैनाती के बजाय शांति प्रयासों का समर्थन किया है।जानकारों का मानना है कि अपनी सेना भेजने से पाकिस्तान एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है, जिससे उसकी पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आतंरिक सुरक्षा स्थिति और बिगड़ जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के बजाय सऊदी अरब का समर्थन केवल कूटनीति, रसद और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने तक ही सीमित रखेगा।