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बिहार और बंगाल को काटकर बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश?

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार के सीमांचल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बिहार के बड़े अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक की। इसके बाद इस बात की अटकलें लगने लगी कि बिहार के कुछ जिलों और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों के मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। इन अटकलों को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने और हवा दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है। इन अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। इसे महज एक अफवाह करार दिया। आपको बता दें कि अटकलों में दावा किया जा रहा है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) और पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों (मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जोड़कर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाया जाएगा। पीआईबी का कहना है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह पूरी तरह से एक अफवाह है। गृह मंत्रालय (MHA) या किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस तरह की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऐसी अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा न करें जो क्षेत्रीय भावनाओं या राजनीतिक तनाव को भड़का सकती हैं। अफवाह क्यों फैली? यह अफवाह तब और तेज हो गई जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ सुरक्षा व्यवस्था, घुसपैठ और ड्रग तस्करी रोकने के लिए बैठकें की थीं। वहीं, भारतीय सेना ने हाल ही में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल में नई चौकियां स्थापित की हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने इन सुरक्षा कदमों को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी के रूप में प्रचारित किया, जिसका सरकार ने अब खंडन कर दिया है। आपको बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित भूमि की एक संकीर्ण पट्टी (20-22 किमी चौड़ी) है जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। सरकार यहां एक अंडरग्राउंड रेलवे प्रोजेक्ट (40 किमी) बनाने की योजना जरूर बना रही है ताकि युद्ध या आपदा के समय पूर्वोत्तर से संपर्क न टूटे, लेकिन इसके लिए किसी भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव का कोई इरादा नहीं है।

अमृतसर में पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट-पीटकर हत्या

अमृतसर. अमृतसर के राजासांसी क्षेत्र के गांव जगदेव कलां में पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। रिश्तेदारों ने घर पर हमला कर लोहे की रॉड और डंडों से कांस्टेबल से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल को परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। मृतक की पहचान गांव जगदेव कलां निवासी जगजीत सिंह के रूप में हुई है। वह गुरदासपुर में एक डीएसपी के सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। मृतक की भतीजी जतिंदर कौर ने बताया कि गांव निवासी बलराज सिंह उनका रिश्तेदार है और उसके साथ कुछ समय से विवाद चल रहा है। बलराज सिंह, उसका भाई, बेटा चन्नप्रीत सिंह, पत्नी कोमल, सुखराज सिंह, मनजीत सिंह, गज्जन सिंह और गुरलाल सिंह सहित 8-10 लोग दो गाड़ियों में सवार होकर उनके घर आ पहुंचे। आरोप है कि सभी ने मिलकर जगजीत सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान जगजीत सिंह के सिर पर लोहे की रॉड लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। परिजन घायल जगजीत सिंह को अमृतसर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घटना से इलाके में सनसनी इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह मामला पारिवारिक रंजिश का है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बना दी हैं और उनकी धरपकड़ के लिए रेड की जा रही है।

ट्रंप की हत्या की पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ईरान से पैसा लेने वाला आतंकी आसिफ दोषी करार

तेहरान. ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे 'मर्डर-फॉर-हायर' (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया। जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को 'धमकी' दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024 में एफबीआई के खुफिया कैमरों ने क्वींस के फ्लोरल पार्क मोटर लॉज में मर्चेंट को अपने एक साथी (जो वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था) के साथ रिपब्लिकन रैली में ट्रंप को मारने की योजना बनाते हुए कैद किया था। कागज और वेप से समझाया प्लान: मर्चेंट ने एक नोटबुक के पन्ने पर आयताकार बॉक्स बनाकर भीड़ और स्टेज को दर्शाया। फिर उसने एक तीर के निशान के ऊपर क्रीमसिकल रंग का वेप रखते हुए कहा- यह टारगेट है। यह कैसे मरेगा? एडवांस पेमेंट और गिरफ्तारी: पूर्व बैंकर रह चुके मर्चेंट ने भाड़े के हत्यारे (हिटमैन) बने दो अंडरकवर एफबीआई एजेंटों को 5000-5000 डॉलर का एडवांस भी दिया था। उसे अगस्त 2024 में अमेरिका से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया था। आसिफ मर्चेंट को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी अदालत के दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान दी गई गवाही के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में रहकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया था। इसी अवधि में उसे 'ट्रेडक्राफ्ट' (जासूसी और खुफिया काम करने के तरीके) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी या खुफिया एजेंसियों से बचने की तकनीक) की ट्रेनिंग मुख्य रूप से शामिल थी। मर्चेंट ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद, 2023 में उसे ऐसे संभावित IRGC रंगरूटों की तलाश करने के लिए अमेरिका भेजा गया था, जो वहां रहकर संगठन के लिए काम कर सकें। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान मर्चेंट अपने IRGC हैंडलर से मिलने और निर्देश प्राप्त करने के लिए बार-बार ईरान की यात्रा भी करता रहा था। मकसद और अदालत में दलीलें मर्चेंट ने अदालत में गवाही दी कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका भेजा था। उसके हैंडलर ने स्पष्ट रूप से किसी एक का नाम नहीं लिया था, बल्कि तीन संभावित लक्ष्य बताए थे- डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली। इस काम के लिए उसे दस लाख डॉलर तक मिलने की उम्मीद थी। बचाव पक्ष का दावा: मर्चेंट के वकील एवी मोस्कोविट्ज ने इस साजिश को हास्यास्पद बताया और कहा कि मर्चेंट को लगा कि ईरान में उसका परिवार खतरे में है, इसलिए उसने केवल इस योजना का हिस्सा होने का नाटक किया। अदालत में 'नदीम अली' के नाम से गवाही देने वाले मुखबिर की टिप पर एफबीआई ने यह पूरा जाल बिछाया था। सरकारी वकीलों का पलटवार: एफबीआई एजेंट ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद मर्चेंट ने किसी धमकी का जिक्र नहीं किया था। इसके बजाय, उसने पैसे और 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की बात स्वीकार की थी। यह मुकदमा एक ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है। अमेरिका और इजरायली सेनाओं के एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और दर्जनों अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिससे युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद, अब सजा सुनाए जाने पर आसिफ मर्चेंट को अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर चॉपर में धुआं भरने पर इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की शनिवार को लखनऊ एयरपोर्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वह हेलिकॉप्टर से ला मार्टस् से कौशांबी जा रहे थे, तभी तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ से कौशांबी के लिए रवाना हुए थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही ला मार्टिनियर ग्राउंड से उड़ान भरी, तभी पायलट को तकनीकी खराबी का अहसास हुआ। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के भीतर अचानक धुआं भरने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई हेलिकॉप्टर की लैंडिंग पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और हेलिकॉप्टर को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। एयरपोर्ट पर पुख्ता इंतजामों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। वही, चॉपर में सवार सभी यात्री सही सलामत हैं। इस घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर की जांच में जुट गई है।

ईरान के हफ्ते भर के संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तेहरान. ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज एक सप्ताह पूरा हो रहा है। एक सप्ताह में ही इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में पड़ा है। एक तरफ यूरोप से लेकर एशिया तक की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं तो दूसरी ओर खाड़ी देशों में हमले भी खूब हुए हैं जिनमें जान और माल दोनों का नुकसान हुआ है। खाड़ी देशों में फंसे पर्यटक अब भी संकट का सामना कर रहे हैं। ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। संघर्ष बढ़ता ही जा रहा इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल युद्ध के सातवें दिन शुक्रवार को भी इजरायल के लड़ाकू विमान मंडराते रहे। समंदर में हजारों तेल के जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 36 जहाज भारत के भी हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो वर्षों में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। तेहरान में तेज हो गए हमले ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार तड़के कई विस्फोट हुए, जिनसे आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इस बीच अमेरिका ने चेतावनी दी कि जल्द ही बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू किया जा सकता है, जिसे अधिकारी सप्ताह भर से जारी संघर्ष का अब तक का सबसे तीव्र हमला बता रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप सख्त क्षेत्र में लड़ाई खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इज़राइल को 15.1 करोड़ डॉलर के नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ''बिना शर्त आत्मसमर्पण'' करने तक उससे कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ''हर जरूरी कदम'' उठाएगा। एक वीडियो फुटेज में पश्चिमी तेहरान के ऊपर विस्फोटों से धुएं के गुबार दिखाई दिए, जबकि इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक हमलों का नया दौर शुरू किया है। इजराइली सेना ने कहा कि वह ईरान से दागी गई नयी मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। ईरान के हमलों के बाद बहरीन में शनिवार सुबह सायरन बजे। सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने विशाल शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन नष्ट कर दिए और प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। इस बीच अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना जताई। ईरान में 1200 से ज्यादा मौतें इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में करीब 12 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ''कुछ देशों'' ने मध्यस्थता के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।

11 महीने बाद MP में घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। वहीं, 19 KG वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। बढ़ी हुई कीमतें आज 7 मार्च से ही लागू हो गई हैं। मध्य प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो अब भोपाल में 918 रुपए, इंदौर में 941 रुपए, ग्वालियर में 996 रुपए, जबलपुर में 919 रुपए और उज्जैन में 972 रुपए में एलपीजी सिलेंडर मिलेगा। सबसे महंगी घरेलू गैस नर्मदापुरम में 1035 रुपए की मिलेगी। इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बढ़ाए गए थे। हालांकि, 8 मार्च 2024 को महिला दिवस पर केंद्र सरकार ने इसके दाम में 100 रुपए की कटौती भी की थी। इसी महीने बढ़े थे कॉमर्शियल गैस के रेट इससे पहले 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। अब घरेलू गैस सिलेंडर के रेट भी बढ़ गए हैं। सरकार ने एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी ऐसे वक्त की है, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई जा रही है। किल्लत रोकने LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश केंद्र सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 क्या है सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 (ESMA) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके जारी किया है। इससे पहले सरकार ने यूक्रेन युद्ध के बाद तेल क्षेत्र में ESMA के नियमों को लागू किया था। तब रिफाइनिंग कंपनियों से कहा गया था कि वे देश में फ्यूल की कमी न होने दें और इसे बाहर एक्सपोर्ट न करें, क्योंकि उस समय भारी मार्जिन मिलने की वजह से तेल बाहर बेचना काफी फायदे का सौदा बन गया था। कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत तेल कंपनियां हर महीने पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय मूल्यों, एक्सचेंज रेट और अन्य लागतों के आधार पर LPG की बेस प्राइस तय करती हैं। इसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन जोड़कर खुदरा मूल्य निकाला जाता है। सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए सरकार अंतर की भरपाई करती है जबकि गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की पूरी कीमत ग्राहक चुकाता है।

बालेन शाह की RSP की ‘सुनामी’ में उड़े नेपाल के कई दिग्गज

नई दिल्ली. नेपाल के संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने दक्षिण एशिया की राजनीति को स्तब्ध कर दिया है। 150 निर्वाचन क्षेत्रों में जारी मतगणना में रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली RSP ने अभूतपूर्व बढ़त बना ली है। नेपाल की युवा पीढ़ी ने पारंपरिक पार्टियों नेपाली कांग्रेस (NC) और UML को पूरी तरह नकारते हुए बदलाव के पक्ष में वोट दिया है। 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 108 सीटों पर आगे है। नेपाली कांग्रेस (NC) और CPN-UML 12-12 सीटों पर आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP – संयुक्त मोर्चा) के खाते में फिलहाल सिर्फ 9 सीटें जाती दिख रही हैं। सबसे बड़ी खबर झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आ रही है, जहां 35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री और UML अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली पर एक मजबूत बढ़त बना ली है। के.पी. ओली के अलावा, शेर बहादुर देउबा की कांग्रेस के शेखर कोइराला, अरबपति विनोद चौधरी, विष्णु पौडेल, राजेंद्र लिंगदेन और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गज अपनी सीटों पर पिछड़ रहे हैं। पुराने नेताओं में केवल पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ही अपनी साख बचाते दिखे हैं। उन्हें पूर्वी रुकुम सीट से विजयी घोषित किया गया है। RSP की जीत के मायने भारत सरकार के रणनीतिक गलियारों में इस जीत को बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-नेपाल संबंध सीमा विवाद और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। बालेन शाह और रवि लामिछाने की जोड़ी को व्यावहारिक और राष्ट्रवादी माना जाता है। भारत यह देखेगा कि क्या बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल अपनी "पड़ोसी पहले" नीति को फिर से संतुलित करेगा या चीन के साथ अपने संबंधों को और गहरा करेगा। नेपाल की संसद की 165 सीटें 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' (प्रत्यक्ष चुनाव) के तहत आती हैं, जिनके परिणाम शनिवार तक स्पष्ट हो जाएंगे। शेष 110 सीटें 'समानुपातिक प्रतिनिधित्व' प्रणाली के माध्यम से भरी जाएंगी, जहां पार्टियों को मिलने वाले कुल वोटों का प्रतिशत उनकी अंतिम ताकत तय करेगा।

मोजतबा खामेनेई नहीं बनेंगे सुरक्षा कारणों से ईरान के सुप्रीम लीडर?

तेहरान. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि जल्द ही उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की इसी पद पर ताजपोशी हो जाएगी। हालांकि अब इसमें देरी होती दिख रही है। जानकारों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से फिलहाल ईरान की सुरक्षा परिषद ऐसा करने से बच रही है। अमेरिकी की निगाह इसी पर है कि जैसे ही कोई सुप्रीम लीडर नियुक्त किया जाए, वह उसके पीछे पड़ जाए। ईरान के अधिकारियों के मुतबिक मोजतब खामेनेई अयातुल्लाह अली खामेनेई के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। कुछ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें एक सुरक्षित जगह पर रखा गया है। इजरायल ने भी कहा है कि खामेनेई की जगह जिसे भी नेता चुना जाएगा, पहला लक्ष्य वही होगा। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर के अलावा कई कमांडर भी मारे गए हैं। कौन हैं मोजतबा खामेनेई मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जिन्होंने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' के रूप में देखा जाता रहा है। समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध। साल 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे। ईरान के संविधान के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता का चयन 88 सदस्यीय धार्मिक निकाय 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' करती है। यह निकाय संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक, राजनीतिक और नेतृत्व संबंधी योग्यता का मूल्यांकन करता है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि व्यवहार में यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र नहीं मानी जाती और सत्ता प्रतिष्ठान का इसमें महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।

दिल्ली के उत्तम नगर मर्डर मामले में 4 और गिरफ्तार

नई दिल्ली. दिल्ली के उत्तम नगर में एक युवक की हत्या करने के मामले में पुलिस ने 4 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। घटना को लेकर इलाके में तीसरे दिन भी तनाव जारी रहा। पुलिस ने बताया कि उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में होली के दौरान एक नाबालिग लड़की द्वारा फेंके गए पानी से भरे गुब्बारे को लेकर दो अलग-अलग समुदायों के दो परिवारों के बीच हुई झड़प में 26 साल के एक युवक की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के दो दिन बाद शुक्रवार को चार और लोगों को गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। दो वाहनों में आग लगाई इस बीच, इलाके में तीसरे दिन भी तनाव जारी रहा। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दो वाहनों में आग लगा दी और दो अन्य वाहनों की खिड़कियां तोड़ दीं। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को एक हिंदू परिवार की 11 साल की लड़की अपनी छत पर होली मना रही थी और नीचे खड़े लोगों पर पानी के गुब्बारे फेंक रही थी। इनमें से एक गुब्बारा एक मुस्लिम महिला को लगा, जिसने आपत्ति जताई। जांचकर्ताओं के अनुसार, कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला किया। झड़प में हिंदू परिवार के तीन सदस्यों समेत कम से कम चार लोग घायल हो गए। 26 साल के तरुण कुमार ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। उनके परिवार ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि पड़ोसियों ने उन्हें घेर लिया और बल्ले, लाठी और पत्थरों से उन पर हमला किया। हिंदू राजनीतिक संगठन का प्रदर्शन शुक्रवार को उस समय सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया जब एक हिंदू राजनीतिक संगठन के सदस्यों ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए इलाके में आगजनी की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने दो वाहनों में आग लगा दी। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने घटनास्थल से मिली सूचना की पुष्टि की जहां एक कार और एक मोटरसाइकिल जलकर खाक हो गई थी। उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन, थाना और हस्तसाल कॉलोनी के बाहर लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। लोगों ने सड़कों को जाम कर दिया। कई स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। आरोपियों के घर पर हमला करने की कोशिश एक दिन पहले तरुण कुमार के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने एक हिंदू राजनीतिक संगठन के सदस्यों के साथ उत्तम नगर थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मुस्लिम परिवार के घर पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन की मांग मृतक के चाचा रमेश ने बताया कि 11 साल की लड़की ने परिवार के सदस्यों पर गुब्बारे फेंके, लेकिन एक गुब्बारा जमीन पर फट गया और एक महिला के बुर्के पर छींटे पड़ गए। मैंने माफी मांगी और लड़की से भी माफी मंगवाई। हम और क्या कर सकते थे? उन्होंने पहले हमें पीटा। मेरे सिर, छाती और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। डॉक्टरों ने 8 टांके लगाए। मुझे अभी भी दर्द हो रहा है। उन्होंने बताया कि तरुण आधे घंटे बाद आया। इससे पहले कि वह अपनी बाइक पार्क कर पाता, उन्होंने उस पर हमला कर दिया। अब वह आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन की मांग करते हैं। उन्होंने पहले भी इसी परिवार के साथ झड़पों का आरोप लगाया। कहा कि यह पहली बार नहीं है। उन्होंने करीब 12 साल पहले भी होली के दौरान हम पर हमला किया था। दोनों परिवार मूलरूप से राजस्थान के तरुण के घायल दादा मान सिंह ने बताया कि दोनों परिवार 1960 के दशक से एक-दूसरे को जानते हैं। वे उत्तम नगर के पास की झुग्गियों में साथ रहते थे, फिर हस्तसाल कॉलोनी में रहने लगे। दोनों परिवार मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये परिवार दशकों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और मारपीट होती रहती है। डिजिटल मार्केटिंग में डिप्लोमा कर रहा था तरुण अधिकारी ने कहा कि यह पूरी तरह से सांप्रदायिक मामला नहीं है। ये परिवार हमेशा से कूड़े, पानी, पार्किंग और अन्य छोटी-मोटी बातों पर लड़ते रहे हैं। वे आपस में हाथापाई भी करते हैं और फिर बाद में मामले सुलझा लेते हैं। हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं। तरुण के चाचा मेमराज ने बताया कि तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा तरुण इंटीरियर डिजाइनिंग और डिजिटल मार्केटिंग में डिप्लोमा कर रहा था। वह महत्वाकांक्षी था। वह गुरुग्राम की किसी कंपनी में काम करना चाहता था।

पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम HC से बरी

नई दिल्ली. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष सीबीआई (CBI) अदालत द्वारा राम रहीम को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद आया है। यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने 2019 की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने राम रहीम की सजा को रद्द करते हुए उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। जेल में ही रहेगा गुरमीत राम रहीम हालांकि अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है। इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुरमीत राम रहीम व अन्य दोषियों ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वह फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। यानी इस मामले में बरी होने के बावजूद, राम रहीम बलात्कार सहित अन्य मामलों में मिली सजा के कारण फिलहाल जेल में ही रहेगा। क्या था पूरा मामला? अक्टूबर 2002 में सिरसा में अपना स्थानीय समाचार पत्र 'पूरा सच' चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। दरअसल, पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित खबरें प्रमुखता से छापी थीं। इन रिपोर्टों में एक ऐसा गुमनाम पत्र भी शामिल था जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी के बाद राम रहीम के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा था। शुरुआती जांच के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और अन्य को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के इस फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के 46 वर्षीय बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है और इसे एक बड़ा झटका करार दिया है। अंशुल ने स्पष्ट किया कि वे हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा- हम शीर्ष अदालत का रुख करेंगे। हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और हम सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। अदालत द्वारा अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखने पर अंशुल ने कहा- हमारी लड़ाई डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ थी। मेरे पिता की दुश्मनी उन शूटरों या डेरा मैनेजर से नहीं थी। उस समय मेरे पिता केवल राम रहीम की ही पोल खोल रहे थे। अगर मुख्य आरोपी को ही बरी कर दिया गया है, तो निश्चित रूप से यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। 25 साल का संघर्ष अपनी लंबी कानूनी लड़ाई को याद करते हुए उन्होंने कहा- पिछले लगभग 25 वर्षों से मैं यह कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। इतने प्रभावशाली व्यक्ति से टक्कर लेना कभी आसान नहीं होता। ट्रायल शुरू होने से पहले भी हमने ऐसे झटके सहे थे। हालांकि निचली अदालत ने हमें राहत दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे; मेरी उम्मीदें अभी भी कायम हैं।