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रोते-बिलखते दिखे पाकिस्तानी सैनिक, BLA के वीडियो ने खोली अंदर की सच्चाई

इस्लामाबाद बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में पाकिस्तानी सैनिक हिरासत में नजर आ रहे हैं। वह पाकिस्तानी सरकार और सेना से अपनी जान बचाने लिए गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। इसमें सैनिक रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सर्कुलेट हो रहा है। गौरतलब है कि बीएलए ने दावा किया है कि उसने सात पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में ले रखा है। इन सैनिकों को छोड़ने के लिए समय सीमा भी तय की गई थी। हालांकि आलोचकों ने इस वीडियो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। किसने शेयर किया वीडियो बलूचिस्तान क्षेत्र के इंडिपेंडेंट ऑनलाइन न्यूज पोर्टल बलूचिस्तान पोस्ट ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर किया है। इसमें बीएलए के ऑफिशियल चैनल हक्काल का हवाला दिया गया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि कुछ लोग घुटनों के बल बैठे हुए हैं। उनके हाथों में एक कार्ड है। बताया जा रहा है कि यह पाकिस्तानी सैनिकों का ऑफिशियल सर्विस कार्ड और राष्ट्रीय पहचान पत्र है। वीडियो में यह लोग पाकिस्तानी अधिकारियों से अपने लिए अपील करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में क्या इन लोगों का दावा है कि उन्हें आधिकारिक ढंग से नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें सरकारी पहचान पत्र भी जारी किया गया और पोस्टिंग की गई। अब इन लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि आखिर पाकिस्तानी सरकार उन्हें पहचानने से इनकार क्यों कर रही है। वीडियो में एक पाकिस्तानी सैनिक पाकिस्तानी सेना से मदद की गुहार लगाता नजर आ रहा है। वह कह रहा है कि पाकिस्तानी सेना यह कैसे कह सकती है कि हम उसके आदमी नहीं हैं। आखिर यह कार्ड किसका है। (वह एक आई कार्ड दिखाता है।) वह आगे कहता है कि यह आर्मी का नहीं है? इसके बाद वह कहता है कि ऊपरवाले का वास्ता है। मेरे पिता की हालत ठीक नहीं है और मैं घर का सबसे बड़ा हूं। यह कहकर अन्याय मत करो कि हम पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं। क्या है पूरा मामला बता दें कि पहले बीएलए का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने उसके लोगों को कैद कर रखा है। इसके बाद उसने पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लेकर कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उसने सात दिन की समय-सीमा भी तय कर रखी थी। नए वीडियो में बीएलएल ने कहा है कि उसकी समय-सीमा में तीन दिन का समय अभी बचा है। ग्रुप ने इसे ऑपरेशन हीरोफ 2.0 का नाम दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं, सेना की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है।  

एलजी मनोज सिन्हा बोले: गद्दारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई, इतिहास में रहेगी उनकी निंदा

जम्मू उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चेतावनी दी है कि देश के खिलाफ गद्दारी करने वालों और आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े सभी मामलों की गंभीरता से जांच करेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वीरवार को कश्मीरी पंडितों की सम्मान के साथ घर वापसी को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। कहा कि कश्मीरी पंडितों की पूरी इज्जत और सुरक्षा के साथ वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा है। उन्होंने कहा, अपनी धरती पर अजनबी बन जाना दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है। कश्मीरी पंडितों की सम्मान और सुरक्षा के साथ वापसी पीएम मोदी का वादा : एलजी उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को कश्मीरी पंडितों की सम्मान के साथ घर वापसी को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। कहा कि कश्मीर पंडितों की पूरी इज्जत और सुरक्षा के साथ वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा है। एलजी प्रो. अशोक कौल की किताब कश्मीर-नेटिविटी रीगेंड के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। जम्मू विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह सभागार में हुए कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि अपनी धरती पर अजनबी बन जाना दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है। अपनी जड़ों से उजड़ जाने का दर्द आज भी बेघर हुए परिवारों की रगों में कांटों की तरह चुभता है। समय का मरहम भी कश्मीरी पंडितोंं के नरसंहार का गहरा दर्द नहीं भर सका। युवा याद रखें कि आतंकियों ने हजारों कश्मीरी मुसलमानों का खून बहाया एलजी ने कहा कि युवा पीढ़ी को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों का भी खून बहाया है। कई मामले इतने हृदयविदारक होते हैं कि उन्हें दोहराते समय शब्द लड़खड़ा जाते हैं। पिछले साल से उन परिवारों को न्याय मिलना शुरू हो गया है और अन्य आवश्यक चीजों के साथ-साथ उनकी रोजगार की जरूरतों को पूरा करने के प्रयास चल रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने से जड़ों की ओर लौटने का भरोसा जगा उपराज्यपाल ने कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह भरोसा पैदा हुआ कि कश्मीरी पंडित समुदाय की युवा पीढ़ी बिना किसी डर के अपनी जड़ों की ओर फिर से लौट सकती है। समारोह में डीन रिसर्च स्टडीज जम्मू यूनिवर्सिटी डाॅ. नीरज शर्मा, मंडलायुक्त रमेश कुमार, आईजीपी जम्मू भीमसेन टूटी सहित कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्य मौजूद थे। मुश्किल समय में संस्कृति व परंपराओं को बचाए रखा जम्मू विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह सभागार में पुस्तक विमोचन समारोह में मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की जबरदस्त भावना को मैं सलाम करता हूं। हर विस्थापित परिवार अपने अंदर चिंगारी लिए हुए था। इसके बावजूद संघर्ष और मुश्किलों के दौर में उन्होंने दर्शन, अध्यात्म, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बचाए रखा। नई ऊंचाइंयों को छुआ। एलजी ने कहा कि कश्मीर माइग्रेंट वेब पोर्टल भी लांच किया गया था। यह उनके लिए था जिनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया था। मैं कश्मीरी पंडितों को उस दर्द को महसूस कर सकता हूं जब 1989-90 में उन्हें रातों-रात घर छोड़ना पड़ा था। यह महज किताब नहीं, हमेशा रहने वाली तबाही को दिखाती है एलजी ने कहा कि प्रो. कौल की किताब कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी बताती है। उन बुरे दिनों के डर और पुरखों की जड़ों से छिन जाने की हमेशा रहने वाली तबाही को दिखाती है। यह साहित्यिक कोशिश नहीं बल्कि दशकों से हमारी सामूहिक चेतना पर छाई चुप्पी को तोड़ने की कोशिश भी है। जनता के सपनों को बर्बाद करने की साजिश हुई नाकाम एलजी ने कहा कि वर्ष 2019 से जम्मू-कश्मीर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। यूटी के लोगों के सपनों और किस्मत को बर्बाद करने की दुश्मन की नापाक साजिश को पूरी तरह से नाकाम किया गया है। बहुत कोशिशों से इस जमीन की पुरानी शान वापस लाई गई है और विकास तेज हुआ है। बहुत जल्द इस जमीन को आतंकवाद के खतरे से पूरी तरह से मुक्त करेंगे। आतंकवाद से जुड़ी हर घटना को खोला जाएगा एलजी ने कहा, आतंकवाद से जुड़ी हर घटना को खोलने की कोशिश की जाएगी। जनता के सपनों को बर्बाद करने वालों को मिट्टी में मिलाया जाएगा। आतंकवाद से जुड़े हर व्यक्ति को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। एेसे लोगों की सजा एसी होनी चाहिए कि आतंक का ईको सिस्टम रहम की भीख मांगता दिखाई दे। हम उन आतंकियों व उनके मददगारों को कभी माफ कर सकते हैं जिन्होंने आतंक फैलाया।  

वलसाड में भीषण एक्सीडेंट से मातम, परिवार के सात सदस्यों की मौके पर ही जान गई

वलसाड. गुजरात के वलसाड जिले में कपारड़ा–नानापोंढा हाईवे पर कुंभघाट के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मृतक कपारड़ा तालुका के अंबा जंगल गांव के निवासी थे। हादसे के समय कार में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं। यह दुर्घटना कुंभघाट के उस तीखे मोड़ पर हुई, जिसे अधिकारी पहले से ही दुर्घटना-प्रवण क्षेत्र बताते रहे हैं। ट्रक और कार की आमने-सामने टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसे की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य में जुट गए। आपातकालीन सेवाओं की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक, पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो गंभीर रूप से घायल पुरुषों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या सात हो गई। इंस्पेक्टर सूरजसिंह वसावा ने आईएएनएस से कहा, “हादसे के समय कार में सात लोग सवार थे, जिनमें पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। पांच लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दो पुरुषों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी भी मृत्यु हो गई। यह मार्ग पहले भी दुर्घटनाओं के लिए जाना जाता है और ज्यादातर मामलों में ट्रक शामिल रहे हैं।” हादसे में ट्रक चालक भी घायल हुआ है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि अभी उसका बयान दर्ज नहीं किया गया है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई या किसी अन्य कारण से। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जांच पर न्यायिक नजर; ममता बनर्जी की फटकार

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रही SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार और इलेक्शन कमिशन के बीच चल रहे विवाद को लेकर आपत्ति जताई। इसके साथ ही अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इसके लिए कलकत्ता हाई कोर्ट को आदेश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करे। अदालत ने कहा कि वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन को लेकर चल रहे अभियान पर जिस तरह का विवाद राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।  

India-US Trade Deal: फाइनल एग्रीमेंट का इंतजार, किन देशों को मिलेगा फायदा?

नई दिल्ली वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच मार्च में अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, जिसे अप्रैल से लागू किया जाएगा। इसके अलावा अप्रैल में यूके और ओमान के साथ भी FTA लागू होने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक 'अंतरिम व्यापार समझौते' पर इस साल मार्च में हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है और इसे अप्रैल के महीने से पूरी तरह लागू (ऑपरेशनल) कर दिया जाएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस समझौते के कानूनी मसौदे (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से अमेरिका में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक शुरू होने जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि इस अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पहले ही तय कर ली गई है। समझौते की प्रमुख शर्तों में कहा गया है कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं एवं अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। साथ ही भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। 'समृद्ध भविष्य की राह' शीर्षक वाले खंड में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ा रहे हैं। साथ ही आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं को कम कर रहे हैं। इसमें कहा गया- भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क बनाए रखे हैं, जहां कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क है। भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी गैर-शुल्क बाधाएं लगाने का भी रहा है जिनके कारण अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे हैं।' दस्तावेज के अनुसार- आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में अंतरिम समझौते पर काम करेंगे।' ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन (UK) और ओमान के साथ भी भारत के बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) अप्रैल महीने में लागू होने की पूरी उम्मीद है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता: इसके अलावा, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले व्यापार समझौते के भी इसी साल सितंबर महीने तक लागू होने की संभावना जताई गई है। इन सभी व्यापारिक समझौतों के लागू होने से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नई गति मिलने और निर्यात के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

अजान और लाउडस्पीकर विवाद पर मंत्री दानिश अंसारी का पलटवार, बोले- मुस्लिमों को गुमराह कर रही सपा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में रमजान के पवित्र महीने से पहले लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर सियासत गरमा गई है। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी (सपा) इसे पाबंदी के तौर पर पेश कर रही है, वहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम सबके लिए समान हैं। योगी सरकार के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दल मुसलमानों को डराकर और गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है। कहा कि लाउडस्पीकर पर कोई मनाही नहीं है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत कल विधानसभा में हुई, जब सपा विधायक कमाल अख्तर ने मांग की कि रमजान के दौरान सहरी और इफ्तार की सूचना देने के लिए मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बजाने की विशेष अनुमति दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि त्योहारों पर सरकार छूट देती है। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ही धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतारे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाउडस्पीकर की परंपरा उस दौर की है जब घड़ियां नहीं होती थीं, अब इसकी वैसी आवश्यकता नहीं है। दानिश अंसारी का सपा पर प्रहार आज इस मुद्दे पर सफाई देते हुए मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि लाउडस्पीकर पर कोई पूर्ण पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी के नेताओं को भ्रामक बयान देने में मज़ा आता है। मैं जिम्मेदारी से कहता हूं कि मानक के अनुसार और प्रशासन से विधिवत अनुमति लेकर मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्च, सभी जगहों पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति है।" दानिश अंसारी ने उदाहरण देते हुए कहा, "हम अभी विधानसभा परिसर में खड़े हैं। अगर आप शाम को लोकभवन के सामने मुख्य गेट पर जाएंगे, तो आपको मगरिब की अजान साफ़ सुनाई देगी। यह इस बात का प्रमाण है कि लाउडस्पीकर बज रहे हैं, लेकिन वे तय मानकों और डेसिबल सीमा के भीतर हैं।" सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार केवल सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन कर रही है, जो रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के शोर को प्रतिबंधित करती है। उन्होंने कहा कि हर धार्मिक स्थल इन नियमों का पालन कर रहा है। सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज यूपी का मुसलमान खुशहाल और समृद्ध है, लेकिन सपा उन्हें काल्पनिक डर दिखाकर विकास की मुख्यधारा से दूर रखना चाहती है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे सपा के बहकावे में न आएं और प्रदेश की शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना है।  

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलन में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे समुद्री क्षेत्र में लगातार जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों का आपसी सम्मान और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समाधान करने के लिए सामूहिक रूप से काम करें। बृहस्पतिवार को यहां 'अभ्यास मिलन' के उद्घाटन समारोह के दौरान 74 देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि जल दस्यु, समुद्री आतंकवाद, अवैध रूप से मछली पकड़ने, तस्करी जैसे पारंपरिक खतरे के साथ साथ अब साइबर खतरे और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जैसी उभरती हुई चुनौतियों भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ा रहा है जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान दिनों दिन अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं। कल रात जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में सिंह के हवाले से कहा गया है, ''अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना में नौसेनाओं की भूमिका समय के साथ बढ़ती ही गई है। पिछले कुछ दशकों में तीव्र आर्थिक विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन में भारी वृद्धि हुई है। जलडमरूमध्य और जलमार्गों पर स्वामित्व के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, जिससे कभी-कभी संघर्ष की आशंका भी पैदा हो जाती है।'' उन्होंने कहा कि जलमग्न संसाधनों, विशेषकर दुर्लभ खनिजों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ने से तनाव में एक नया आयाम जुड़ रहा है। सिंह ने देशों और क्षेत्रों में फैल रही आतंकवादी गतिविधियों से जलक्षेत्रों की सुरक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी नौसेना चाहे कितनी भी सक्षम क्यों न हो, वह उभरती चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। उन्होंने एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए नौसेनाओं के बीच बेहतर सहयोग के महत्व पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से संबंधित मामलों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) द्वारा प्रदान किए गए मजबूत कानूनी ढांचे पर प्रकाश डाला जिसे एक व्यापक वैश्विक नौसेना संरचना के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। सिंह के अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के निवारण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय-परीक्षित तंत्र प्रदान करता है, और व्यापक वैश्विक नौसैनिक वास्तुकला सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के लिंक की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी। उन्होंने कहा, ''जब हमारे जहाज एक साथ यात्रा करते हैं, जब हमारे नाविक एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं और जब हमारे कमांडर एक साथ विचार-विमर्श करते हैं, तो हम एक साझा समझ विकसित करते हैं जो भूगोल और राजनीति से परे होती है और सहयोग के इस विचार पर मंथन का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करती है।'' उनके अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के समाधान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला तंत्र प्रदान करता है। यह व्यापक वैश्विक नौसैनिक संरचना सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के माध्यमों की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी। सिंह ने कहा कि स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है। उन्होंने कहा कि मिलन जैसे मंच पेशेवर विशेषज्ञता को साथ लाते हैं, आपसी विश्वास का निर्माण करते हैं, अंतर-संचालनीयता को बढ़ाते हैं और सामान्य चुनौतियों के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाते हैं। समुद्री सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास योजना (सागर) की परिकल्पना से प्रेरित होकर देशों का दृष्टिकोण अब संपूर्ण क्षेत्र की समग्र सुरक्षा एवं विकास (महासागर) की परिकल्पना में बदल गया है। उन्होंने कहा, ''सागर से महासागर की ओर यह बदलाव इस क्षेत्र और उससे परे के क्षेत्रों के साझेदारों के साथ जुड़ने की भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता दर्शाता है।'' राजनाथ सिंह ने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026' विश्व की नौसेनाओं के बीच सद्भावना, व्यावसायिकता और पारस्परिक सम्मान की स्पष्ट पुष्टि है।  

शिवाजी जयंती जुलूस बना विवाद की वजह: 3 राज्यों में झड़प, कई जगह आगजनी

नई दिल्ली देश के तीन अलग-अलग राज्यों कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले 24 घंटों के भीतर सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं। शिवाजी जयंती के जुलूस और धार्मिक प्रार्थनाओं के दौरान हुई इन झड़पों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी के कारण किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं है और वर्तमान में तीनों स्थानों पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। MP में मंदिर परिसर में तोड़फोड़ के बाद बवाल जबलपुर के संवेदनशील सिहोरा तहसील में गुरुवार रात उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक दुर्गा मंदिर परिसर में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर में शाम की आरती और पास की मस्जिद में नमाज का समय एक ही था। एक युवक ने कथित तौर पर मंदिर की ग्रिल को नुकसान पहुंचाया, जिससे दो समूहों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और पत्थरबाजी शुरू हो गई। जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी संपत उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक ढांचे को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और अब तक 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। कर्नाटक में जुलूस पर पथराव, एसपी घायल कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी जयंती के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी। जब यह जुलूस पंका मस्जिद के सामने से गुजर रहा था, तब कथित तौर पर पथराव किया गया। पथराव के दौरान बागलकोट के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ गोयल के सिर में मामूली चोट आई है। उन्होंने बताया कि मस्जिद की ओर से दो पत्थर फेंके गए थे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद के पास डीजे पर 'मंदिर बनाएंगे' जैसे गाने बजाने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद तनाव बढ़ा। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है और शहर में अगले चार दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। आंध्र प्रदेश में नारेबाजी पर विवाद हैदराबाद के अंबरपेट इलाके में भी शिवाजी जयंती के जुलूस और रमजान की प्रार्थना के दौरान झड़प देखने को मिली। जब जुलूस एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था, तब वहां मौजूद लोगों ने तेज संगीत और नारेबाजी पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। अंबरपेट की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया। किसी के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है। शुक्रवार को एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।  

दुनिया के सबसे बड़े AI गठबंधन में भारत शामिल, चीन-पाकिस्तान रह गए किनारे

वाशिंगटन भारत ने AI समिट से इतर शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica अलायंस को जॉइन कर लिया है। यह समझौता नई दिल्ली में हुआ और इसके साथ ही भारत सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया के सबसे बड़े गठबंधन का हिस्सा बन गया है। इस संगठन का उद्देश्य यह है कि सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ्स मैटीरियल्स की सप्लाई किसी भी तरह से बाधित ना हो। खासतौर पर ऐसे देशों पर निर्भरता कम की जा सके, डो इस अलायंस का हिस्सा नहीं हैं। किसी का नाम इस समझौते में नहीं लिया गया है, लेकिन संगठन के मकसद से साफ है कि इशारा चीन की ओर है। पाकिस्तान भी इसका हिस्सा नहीं है। अमेरिका और भारत के अलावा Pax Silica में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। इस समझौते के तहत यह तय हुआ है कि संबंधित देश सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और एक अच्छा ग्लोबल टेक ईकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। AI समिट के आखिरी दिन इस समझौते पर साइन किए गए हैं। 5 दिन के इस आयोजन में दुनिया भर के टेक लीडर्स पहुंचे हैं। इसके अलावा AI सेक्टर में काम करने वाले करीब 600 स्टार्टअप्स भी इसका हिस्सा बने हैं। इस समझौते की जानकारी देते हुए आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'दुनिया का भारत पर भरोसा है। हमारे पास एक बड़ा टैलेंट पूल है। इसके साथ ही हम ऐसी विदेश नीति अपनाते हैं, जिससे लोगों में भरोसा पैदा होता है। हमने Pax Silica में शामिल होने पर सहमति दी है। यह ग्रुप सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिजाइन के लिहाज से अहम है।' उन्होंने कहा कि इसका हिस्सा बनने से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। अश्विनी वैष्णव बोले- 10 प्लांट तैयार, बननी शुरू होगी चिप वैष्णव ने कहा कि देश में 10 प्लांट तैयार हो चुके हैं। जल्दी ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा। फिलहाल भारत में सबसे अडवांस नैनोमीटर चिप्स को डिजाइन किया जा रहा है। भारत में तेजी से AI और सेमीकंडक्टर बिजनेस में ईकोसिस्टम खड़ा हो रहा है और Pax Silica समझौता इस दिशा में अहम कड़ी है। इस समझौते के साइन होने के मौके पर अमेरिकी राजदूत सेरजियो गोर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हम इसमें भारत का स्वागत करते हैं। Pax Silica एक ऐसा समझौता है, जो फ्री सोसायटी तैयार करेगा। इसके माध्यम से कहीं भी आविष्कार हो, सभी लोग साथ होंगे और सप्लाई चेन में किसी भी तरह से प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि एआई समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई यदि अहम है तो उसकी दिशा में भारत और अमेरिका का समझौता मायने रखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की पार्टनरशिप से AI का फायदा हर किसी को मिल सकेगा। पिचाई ने कहा कि गूगल को इस बात पर गर्व है कि हम दोनों देशों के बीच संबंधों में एक सेतु बने हैं।  

ट्रैफिक से छुटकारा! भारत में एयर टैक्सी की एंट्री, AI समिट में दिखा फ्यूचर ट्रांसपोर्ट

नई दिल्ली माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट में कई अलग-अलग चीजें दुनिया को देखने को मिली हैं। यहां चीनी रोबोडॉग को अपना बताने के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सवाल उठे तो वहीं कुछ ऐसे प्रयोग भी सामने आए हैं, जिनकी काफी सराहना हो रही है। इनमें से ही एक AI संचालित एयर टैक्सी का एक मॉडल है। इसे लेकर माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे लेकर कंपनी का कहना है कि भारी जाम वाले शहरों में इसके इस्तेमाल से राहत मिल सकेगी। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी तरह के रनवे की भी जरूरत नहीं होगी। कंपनी का दावा है कि 8 मिनट में यह टैक्सी 36 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। हालांकि इसका किराया थोड़ा अधिक रहेगा। कंपनी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि यदि बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यूबी सिटी जाना हो तो दो घंटे का वक्त लगता है। सड़क से जाने पर कैन का किराया 1000 रुपये देना होता है। लेकिन इस एयरटैक्सी से यह सफर महज 8 मिनट में ही पूरा होगा। इसके लिए 1700 रुपये किराये के तौर पर चुकाने होंगे। एक बार की चार्जिंग पर लगा सकेगी कई राउंड इसके अलावा एक बड़ा फीचर यह भी बताया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद यह कई ट्रिप मार सकती है। इसका नाम कंपनी ने (e-VTOL) रखा है, जिसका अर्थ है- इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ ऐंड लैंडिंग। आमतौर पर एयरप्लेन और हेलिकॉप्टर जब उड़ान भरते हैं तो काफी आवाज आती है, लेकिन इसमें ऐसा नहीं होगा। इसकी आवाज 120 डेसिबल से कम ही होगी। यहां तक कि नीचे चल रहे लोगों को यह भी अहसास नहीं होगा कि ऊपर कोई एयर टैक्सी उड़ रही है। इसका उड़ान भरना बेहद आसान होगा और उसकी लैंडिंग में भी कोई समस्या नहीं होगी। बैटरी से ही चलेगी यह टैक्सी, खर्च भी काफी कम; डिजाइन मंजूर कंपनी के फाउंडर विकल्प मित्तल का कहना है कि इसका संचालन बैटरी से ही होगा। इसके चलते इसकी परिवहन लागत भी कम होगी। हेलिकॉप्टर्स का संचालन काफी महंगा होता है क्योंकि उनमें तेल काफी खर्च होता है। मित्तल के अनुसार इस एयरटैक्सी को पूरी तरह भारत में ही मद्रास आईआईटी में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि चिप्स और मोटर जैसी जरूरी चीजों को भारत में ही डिजाइन किया गया है। बस उनकी मैन्युफैक्चरिंग बाहर हुई थी। मित्तल ने कहा कि उड्डयन महानिदेशालय से इसके डिजाइन के लिए अप्रूवल लिया था और उसके बाद ही इसे तैयार करने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहला प्रोडक्शन मॉडल जब तैयार हो जाएगा तो इसकी टेस्टिंग की जाएगी।