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संविधान में ‘समाजवादी’ जोड़ने के खिलाफ थे बाबा साहेब आंबेडकर? जानिए ‘सेक्युलर’ पर उनका स्पष्ट रुख

नई दिल्ली  संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'पंथ निरपेक्ष' इन दो शब्दों को निकालने को लेकर आज भी बहस होती रहती है। यह बहस कोई नई नहीं है। संविधान निर्माण के समय जब केटी शाह ने आर्टिकल 1 में इन दोनों शब्दों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था तो इसपर चर्चा के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया था। बाद में यह संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गया था। केटी शाह ने 15 नवंहर 1948 को प्रस्ताव पेश किया था कि भारत एक पंथ निरपेक्ष, संघ और समाजवादी राज्यों का संघ होगा। वह चाहते थे कि आर्टिकल 1 में समाजवादी, संघीय और पंथ निरपेक्ष शब्दों को जोड़ा जाए।   उनका तर्क था कि देश में जिस तरह से जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर भेदभाव हुआ है वह आगे भी हो सकता है और इसलिए आर्टिकल 1 में ही पंथ निरपेक्ष शब्द शामिल करना जरूरी है। उनका कहना था कि समाजवाद शब्द देश में सबको बराबर अवसर दिलाने और बराबरी का अधिकार दिलाने का प्रतीक होगा। डॉ. आंबेडकर की क्या थी प्रतिक्रिया डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 'समाजवाद' शब्द को शामिल करने का विरोध किया था। हालांकि उन्होंने पंथ निरपेक्ष शब्द पर कोई आपत्ति जाहिर नही की थी। डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि हो सकता है कि बहुत सारे लोग समाजवादी सोसइटी को पूंजीवादी समाज से अच्चा मानते हों। हालंकि इस सयम जो भी समाजवादी संगठन सक्रिय हैं, हो सकता है कि भविष्य में उनमें बदलाव आए। यह भी हो सकता है कि भविष्य के संगठन ज्यादा अच्छे हों। उन्होंने कहा कि संविधान में पहले से ही मौलिक अधिकारों की बात कही गई है। इसके अलावा नीति निर्देश सिद्धांतों को भी बाकायदा उल्लेख है। ऐसे में अब समाजवादी शब्द की क्या जरूरत है, यह मेरी समझ से परे है। जानकारों का कहना है कि डॉ. आंबेडकर ने पंथ निरपेक्ष शब्द पर इसलिए मौन रखना स्वीकार किया क्योंकि उन्हें पता था कि इस शब्द से धर्म को मानने की आजादी नहीं मिलने वाली है। वहीं बाद में 1976 में 42 संशोधन अधिनियम के जरिए प्रस्तावन में 'समाजवादी' और 'पंथ निरपेक्ष' दोनों शब्द जोड़ दिए गए। अब बस चल रही है कि कि आखिर सा क्यों किया गया था। आरएसएस के सर कार्यवाहक दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि इन दोनों शब्दों को प्रस्तावना से हटाने पर चर्चा होनी चाहिए।  

शिलान्यास से पहले बयान ने मचाया सियासी हलचल, हमायूं का ऐलान— ‘मेरे साथ है बंगाल पुलिस’

मुर्शिदाबाद  मुर्शिदाबाद में आज निलंबित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक हमायूं कबीर ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता के बीच विवादास्पद बाबरी शैली की मस्जिद के शिलान्यास का कार्यक्रम आयोजित किया। जिले में तनाव की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट घोषित किया गया है। हमायूं कबीर ने पहले ही ऐलान किया था इस मस्जिद का मॉडल बाबरी मस्जिद की तर्ज पर तैयार होगा। दिलचस्प बात ये है कि आज 6 दिसंबर यानी जिस दिन बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी उसी दिन को शिलान्यास कार्यक्रम के लिए चुना गया है।  कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए हमायूं कबीर ने कहा- सब कुछ ठीक है। 12 बजे तक इंतजार कीजिए; पहले कुरान का पाठ होगा, फिर शिलान्यास रखा जाएगा। मुझे प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है। मुर्शिदाबाद पुलिस और राज्य पुलिस मेरे साथ हैं। मैं उनका धन्यवाद करता हूं। सुरक्षा चाक-चौबंद बेलडांगा स्थित कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। कबीर का दावा है कि इस समारोह में तीन लाख लोगों की भीड़ जुट सकती है। इसे देखते हुए क्षेत्र को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया, जहां रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), जिला पुलिस और केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। NH-12 के दोनों ओर सुरक्षा बलों की तैनाती रही। यह सुरक्षा व्यवस्था कलकत्ता हाई कोर्ट के शुक्रवार के आदेश के बाद और बढ़ा दी गई। अदालत ने कार्यक्रम को मंजूरी तो दी, लेकिन साफ कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। राजनीतिक संदेश और शक्ति–प्रदर्शन हुमायूं कबीर की बात करें तो वह कांग्रेस से भाजपा और फिर टीएमसी तक का राजनीतिक सफर तय कर चुके हैं। उनके लिए यह समारोह राजनीतिक ताकत दिखाने का भी मंच बन गया। टीएमसी ने उन्हें गुरुवार को सांप्रदायिक राजनीति के आरोप में निलंबित कर दिया था। पहले भी वे विवादित बयानों के कारण पार्टी का कोपभाजन बनते रहे हैं। कबीर ने ऐलान किया है कि वह इस महीने के अंत तक विधायक पद से इस्तीफा देंगे और अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। मेले जैसा आयोजन- विशाल मंच, हजारों मेहमान, भव्य तैयारी बेलडांगा में तैयारियां एक बड़े मेले जैसी दिखाई दे रही थीं। NH-12 के पास धान के खेतों पर 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा विशाल मंच बनाया गया है, जिसमें लगभग 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था है। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दो सऊदी अरब के धर्मगुरु कोलकाता से विशेष काफिले में पहुंचेंगे। खानपान की तैयारी भी बड़े स्तर पर की गई है- मुर्शिदाबाद की सात कैटरिंग एजेंसियों को शाही बिरयानी बनाने का जिम्मा दिया गया है। करीब 40,000 पैकेट मेहमानों के लिए और 20,000 पैकेट स्थानीय लोगों के लिए बनाए जाएंगे। कबीर के एक करीबी सहयोगी के अनुसार, सिर्फ भोजन पर ही ₹30 लाख से अधिक खर्च होने का अनुमान है, जबकि पूरे आयोजन का बजट ₹70 लाख तक पहुंच सकता है।

दिल्ली पुलिस का नोटिस: नेशनल हेराल्ड मामले में कर्नाटक डिप्टी CM डी.के. शिवकुमार से मांगी वित्तीय जानकारी

 नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने नेशनल हेराल्ड केस की जांच के तहत कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डी के शिवकुमार को नोटिस जारी किया है. पुलिस ने उनसे नेशनल हेराल्ड केस की जांच के तहत फाइनेंशियल और ट्रांजैक्शनल डिटेल्स मांगी हैं. इस बात की जानकारी खुद दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि शिवकुमार के पास इस साल 3 अक्टूबर को कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ रजिस्टर्ड नेशनल हेराल्ड केस से जुड़ी ज़रूरी जानकारी होने की बात कही गई है. 29 नवंबर को जारी किए गए नोटिस में, EOW ने शिवकुमार से 19 दिसंबर तक पेश होने या मांगी गई जानकारी देने को कहा है. इन्वेस्टिगेटर्स ने उनके पर्सनल बैकग्राउंड, कांग्रेस पार्टी से उनके जुड़ाव और उनके या उनसे जुड़ी एंटिटीज़ द्वारा यंग इंडियन को कथित तौर पर ट्रांसफर किए गए फंड्स का पूरा ब्योरा मांगा है. कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर के करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्हें BJP के साथ मिलकर न चलने के लिए टारगेट किया जा रहा है, और यह इस बात पर ज़ोर देता है कि वह कांग्रेस के लिए हिट झेलने वाले खास लीडर्स में से हैं. उन्होंने आगे कहा कि शिवकुमार कांग्रेस नेताओं में सबसे ज़्यादा सताए गए हैं, लेकिन BJP उन्हें तोड़ने में कामयाब नहीं होगी. नोटिस में कहा गया है, 'आपको यह बताया जाता है कि EOW, दिल्ली पुलिस ऊपर बताए गए केस की FIR की जांच कर रही है और माना जा रहा है कि आपके पास ऊपर दिए गए केस के बारे में ज़रूरी जानकारी है.' EOW के सवालों में शिवकुमार के बैंक ट्रांसफर का मकसद, इन फंड्स का सोर्स, उनके और यंग इंडियन या AICC (ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी) के अधिकारियों के बीच किसी भी बातचीत की डिटेल्स, क्या पेमेंट किसी के कहने पर किए गए थे, और क्या उन्हें फंड के इस्तेमाल के बारे में पता था, ये सब शामिल हैं. पीटीआई के अनुसार, EOW ने इनकम टैक्स रिकॉर्ड, फाइनेंशियल स्टेटमेंट और पेमेंट के संबंध में जारी किए गए किसी भी डोनेशन सर्टिफिकेट के लिए भी कहा है. नेशनल हेराल्ड केस, जो असल में BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की एक प्राइवेट शिकायत से शुरू हुआ था, उन आरोपों पर आधारित है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 988 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति यंग इंडियन ने 2010 में AICC से जुड़े एक ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए 50 लाख रुपये में खरीदी थी. EOW ने जो FIR एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की शिकायत के आधार पर दर्ज की है, उसमें AJL की संपत्ति यंग इंडियन को ट्रांसफर करने के संबंध में क्रिमिनल साज़िश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट का आरोप लगाया गया है. यंग इंडियन एक ऐसी कंपनी है जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कुल मिलाकर 76 परसेंट हिस्सेदारी है.

‘गेम चेंजर’ की तलाश में CJI सूर्यकांत, डिजिटल अरेस्ट को लेकर दिया अहम संदेश

नई दिल्ली  भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को 23वें हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) में कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल बड़े-बड़े लोगों या वीवीआईपी के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए भी है। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा- मैं एक बहुत साफ और मजबूत संदेश देना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए भी बना है। सीजेआई ने न्यायपालिका में मौजूद संरचनात्मक कमजोरियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुकदमेबाजी एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कुछ खास तरह के मुकदमों को प्राथमिकता देना और मध्यस्थता (मीडिएशन) को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा- मैं वाकई मध्यस्थता को एक शक्तिशाली गेम चेंजर के रूप में देखना चाहता हूं। पिछले लगभग एक साल से, खासकर पिछले छह महीनों में मैंने ‘मीडिएशन फॉर द नेशन मिशन’ शुरू किया है। मध्यस्थता के पक्ष में सीजेआई के प्रमुख तर्क मुख्य न्यायाधीश ने मध्यस्थता को बढ़ावा देने के कई कारण गिनाए: कम खर्चीला- मध्यस्थता अन्य वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्रों की तुलना में बहुत-बहुत कम खर्चीली है। वकीलों की जरूरत नहीं- इसमें वकीलों की अलग श्रेणी की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें कम समय लगता है और समाज के हर क्षेत्र का व्यक्ति मध्यस्थ बन सकता है। रिटायर्ड लोग भी मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं। दोनों पक्षों के लिए जीत की स्थिति- यह एक दुर्लभ तरीका है जिसमें दोनों पक्ष मुस्कुराते हुए मध्यस्थता केंद्र से बाहर निकलते हैं। यह विन-विन स्थिति बनाता है। सामाजिक सौहार्द बनाए रखता है- यह सामाजिक सद्भाव लाता है, सामाजिक ताने-बाने को मजबूत रखता है और आम आदमी की भाषा में बात करता है- यही सबसे बड़ी बात है। सीजेआई ने चेतावनी भी दी कि मध्यस्थता तभी सफल होगी जब मध्यस्थ न्याय चाहने वाले आम व्यक्ति की भाषा बोलना शुरू करेंगे। उन्होंने कहा- हमारा उद्देश्य वहां तक पहुंचना है और उन्हें एक वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराना है। भारतीय लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के प्रति आशावादी जब उनसे पूछा गया कि भारत के कानूनी और लोकतांत्रिक भविष्य को लेकर उन्हें उम्मीद कहां से मिलती है, तो सीजेआई ने कहा- मैं बहुत आशावादी व्यक्ति हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय लोकतंत्र और भारतीय न्याय वितरण प्रणाली दोनों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने इसके तीन मुख्य कारण बताए- भारतीय जनता का संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति पूर्ण समर्पण, कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतंत्र के प्रति अटूट निष्ठा। युवाओं पर भरोसा न्यायपालिका के भविष्य को लेकर अपना भरोसा जताते हुए सीजेआई ने कहा- जब मैं इस देश के युवाओं को देखता हूं- उनके पास ज्ञान का खजाना है, दुनिया भर में हो रही घटनाओं की सूचना है, प्रतिक्रिया की त्वरित क्षमता है, नवोन्मेषी न्यायिक न्यायशास्त्र विकसित करने की चमक है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में भारतीय न्यायपालिका बहुत सुरक्षित हाथों में रहेगी। सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत का यह संबोधन न्यायिक सुधारों, खासकर मध्यस्थता को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट को न्यायपालिका के समक्ष उभरती नई चुनौतियां भारत के मुख्य न्यायाधीश ने डिजिटल अरेस्ट को न्यायपालिका के समक्ष उभरती नई चुनौतियां बताया है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों का यह नया रूप, जहां धोखेबाज वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराकर पैसे ऐंठते हैं, यह न केवल आम नागरिकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी जटिल बना रहा है। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए भी है और उनकी प्राथमिकता लंबित मामलों को कम करना तथा मध्यस्थता को बढ़ावा देना है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डिजिटल अरेस्ट, स्कैम और दूसरे साइबर क्राइम की नई चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को बदलना होगा। CJI ने कहा- ऐसे मामलों में, पीड़ित भारत में हो सकता है लेकिन अपराधी भारत से बाहर। वह किसी आइलैंड पर हो सकता है, हमें नहीं पता कि वह कहां है। उन्होंने लीडरशिप समिट में बोलते हुए आगे कहा कि जब तक हम यह पता नहीं लगा लेते और समझ नहीं लेते कि इस तरह का अपराध कैसे किया जाता है, तब तक न्यायपालिका ऐसे मामलों से निपट नहीं पाएगी और न्याय नहीं दे पाएगी। इसके लिए न्यायपालिका का खुद को बदलना और सीखना जरूरी है। CJI ने कहा- किसी ने नहीं सोचा था कि डिजिटल अरेस्ट के मामले भी होंगे। हमें रेगुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने होंगे, और अपने ज्यूडिशियल अधिकारियों को नई चुनौतियों और उनसे सही तरीके से निपटने के तरीकों के बारे में अपडेट करना होगा। CJI के तौर पर अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक के बारे में बात करते हुए, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह सिस्टम में टाइमलाइन और प्रेडिक्टेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी को सेंसिटाइज करने की दिशा में काम करेंगे। CJI ने कहा- इसके लिए, हम ज्यूडिशियल एकेडमी प्लेटफॉर्म और हाई कोर्ट प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने का प्लान बना रहे हैं।  

पूर्व पेंटागन अधिकारी का ट्रंप सरकार को अल्टीमेटम: भारत से माफी मांगो, मुनीर पर कार्रवाई करो

वाशिंगटन  अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में पिछले लगभग एक साल में काफी बदलाव आया है। ट्रंप प्रशासन के रवैये ने भारत में लोगों को बहुत नाराज किया है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि अमेरिका ने जो दुर्व्यवहार भारत के साथ किया है उसको लेकर माफी मांगनी चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी चीफ को गिरफ्तार करने की भी मांग करते हुए कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाला देश घोषित करना चाहिए।   एएनआई से बात करते हुए माइकल रुबिन ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान का साथ देने में कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका का पाकिस्तान का रणनीतिक रूप से अपनाने के फैसले का कोई तर्क नहीं है। पाकिस्तान को आतंकवाद का राज्य प्रायोजक घोषित किया जाना चाहिए। अगर पाकिस्तानी सेना का प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका में आता है, तो उसका सम्मान नहीं करना चाहिए, उसे गिरफ्तार करके जेल में डाल देना चाहिए। भारत से माफी मांगे अमेरिका: रुबिन जॉर्ज बुश के कार्यकाल में पेंटागन में बड़ी भूमिका निभाने वाले रुबिन ने कहा कि अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने पिछले एक साल में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ काफी दुर्व्यवहार किया है। इसे लेकर उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें पर्दे के पीछे शांत कूटनीति की जरूरत है, और शायद किसी समय, संयुक्त राज्य को इस बात पर खुलकर माफी मांगनी चाहिए कि हमने भारत के साथ कैसे व्यवहार किया। मुझे मालूम है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप माफी मांगना पसंद नहीं करते, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक देशों के हित किसी एक व्यक्ति के अहंकार से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।" अमेरिका-भारत तनाव जनवरी 2025 में ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ऐसा लगा था कि दोनों देशों के संबंधों में काफी सुगमता आ जाएगी। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बिगड़ना शुरू हो गईं। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लेना शुरू कर दिया। इसके बाद भारत का रुख भी बदल गया। अमेरिका ने आसिम मुनीर को वाइट हाउस का न्यौता दिया और पाकिस्तान के साथ व्यापार करने की कसमें भी खाईं, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए अड़ा रहा। अमेरिका की तरफ से लगातार भारत को चेतावनी देते हुए रूसी तेल खरीद को बंद करने के लिए कहा जाता रहा, लेकिन भारत ने अपने हिसाब से चीजें करनी शुरू की। इसके बाद ट्रंप ने भारत के ऊपर टैरिफ लगा दिए। भारत ने इसका विरोध किया, लेकिन रूस के साथ अपने संबंधों में कोई गिरावट नहीं होने दी।

ब्रिटेन की सख्त कार्रवाई: खालिस्तानी नेटवर्क की कमर तोड़ी, संपत्ति जब्त और कंपनियों पर प्रतिबंध

लंदन  भारत के दबाव के बीच ब्रिटेन ने खालिस्तानी आतंकवादी समूहों के खिलाफ बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। ब्रिटिश सरकार ने 4 दिसंबर को गुरप्रीत सिंह रेहल नामक एक व्यक्ति और बब्बर अकाली लहर संगठन पर आतंकवाद से जुड़े आरोपों के तहत प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई खासतौर पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल नामक प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन से इनकी सांठगांठ के लिए की गई है। इस कदम से ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले चरमपंथियों को झटका लगेगा और भारत-ब्रिटेन के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।   ब्रिटेन सरकार ने काउंटर-टेररिज्म (सैंक्शंस) (ईयू एग्जिट) रेगुलेशंस 2019 के तहत इन प्रतिबंधों को लागू किया है। मुख्य कार्रवाइयों में शामिल हैं- संपत्ति फ्रीज: रेहल, बब्बर अकाली लहर और इनसे जुड़ी कंपनियों की ब्रिटेन में स्थित सभी संपत्तियों, फंड्स और आर्थिक संसाधनों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। ब्रिटिश नागरिकों या संस्थाओं को इन संसाधनों से कोई सौदा करने, या इन्हें कुछ भी उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है, जब तक कि एचएम ट्रेजरी से लाइसेंस न मिले। कंपनियों पर असर: रेहल से जुड़े संगठन सेविंग पंजाब सीआईसी, वाइटहॉक कंसल्टेशंस लिमिटेड और अनइनकॉर्पोरेटेड संगठन लोहा डिजाइन्स पर भी प्रतिबंध लगे हैं। निदेशक पद पर प्रतिबंध: गुरप्रीत सिंह रेहल को किसी कंपनी का निदेशक बनने या उसके प्रबंधन में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेने से रोक दिया गया है। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद या 10 लाख पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय के मूल्यांकन के अनुसार, यह पहली बार है जब घरेलू काउंटर-टेररिज्म रिजीम का इस्तेमाल खालिस्तानी मिलिटेंट ग्रुप्स के फंडिंग को बाधित करने के लिए किया गया है। खालिस्तानी आतंक से जुड़े आरोप: भर्ती, फंडिंग और हथियार खरीद गुरप्रीत सिंह रेहल पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त संगठनों से जुड़ने का आरोप है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि वह बब्बर खालसा और बब्बर अकाली लहर की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। इन आतंकी संगठनों की गतिविधियों में समूहों का प्रचार-प्रसार और प्रोत्साहन, भर्ती अभियान चलाना, वित्तीय सेवाएं प्रदान करना, हथियारों और अन्य सैन्य सामग्री की खरीद में सहायता और ऐसे ही संगठनों को समर्थन और सहयोग देना शामिल है। बब्बर अकाली लहर को बब्बर खालसा का सहयोगी संगठन माना जाता है, जो इसकी भर्ती, प्रचार और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जो खालिस्तान आंदोलन के नाम पर हिंसा और घृणा फैलाने के लिए फेमस है। ब्रिटेन सरकार की ये कार्रवाइयां भारत में हो रही आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वाले नेटवर्क को निशाना बनाती है। ब्रिटिश अधिकारियों के बयान: 'आतंकवाद के फंडिंग को कुचलेंगे' आर्थिक सचिव लूसी रिग्बी केसी एमपी ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जब आतंकवादी ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का शोषण करेंगे तो हम चुपचाप नहीं देखेंगे। यह ऐतिहासिक कदम दर्शाता है कि हम हर उपलब्ध टूल का इस्तेमाल करके आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए तैयार हैं- चाहे वह कहीं भी हो। ब्रिटेन उन शांतिपूर्ण समुदायों के साथ दृढ़ता से खड़ा है, जो हिंसा और घृणा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ हैं। भारत-ब्रिटेन सहयोग को मिली मजबूती: वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा यह कदम भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते आतंकवाद विरोधी सहयोग का प्रतीक है। ब्रिटेन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह विदेशी मिट्टी पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खालिस्तानी चरमपंथियों के वैश्विक फंडिंग चैनलों पर असर पड़ेगा। इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। बब्बर खालसा का इतिहास और खतरा बब्बर खालसा 1980 के दशक में खालिस्तान आंदोलन के दौरान उभरा। यह भारत में कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। यह संगठन हथियार तस्करी, विस्फोटक हमले और राजनीतिक हत्याओं में लिप्त रहा है। ब्रिटेन में इसके समर्थक लंदन और अन्य शहरों में सक्रिय हैं, जहां वे फंडिंग और प्रचार के जरिए गतिविधियां चलाते हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने ब्रिटेन से ऐसे नेटवर्क्स पर कार्रवाई की मांग की थी, और यह संयुक्त घोषणा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कार्रवाई ब्रिटेन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो वैश्विक आतंकवाद को फंडिंग रोकने पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में और प्रतिबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ रहा है।

दिल्ली से सीधे साजिश तक! भारत से लौटते ही पुतिन के खिलाफ यूरोप और G7 की बड़ी चाल

मॉस्को  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा अभी-अभी समाप्त हुई है, जहां उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। लेकिन मॉस्को लौटते ही पुतिन को एक बड़ा झटका लग सकता है। दुनिया की सबसे संपन्न लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं रूस के समुद्री तेल व्यापार पर अपने अब तक के सबसे कठोर कदम की तैयारी में लग गई हैं। दरअसल यूरोपीय संघ (EU) और G7 देश रूस के खिलाफ एक नई 'महासाजिश' रच रहे हैं जिसके तहत ये देश रूसी तेल निर्यात पर पूर्ण समुद्री बैन लगाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सीधा निशाना बनाएगा, क्योंकि तेल रूस के केंद्रीय बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मुहैया कराता है। एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना रूसी तेल की कीमत सीमा (प्राइस कैप) को पूरी तरह समाप्त कर देगी और पश्चिमी टैंकरों, बीमा तथा झंडियों के उपयोग पर रोक लगा देगी। क्या यह वैश्विक तेल बाजार में भूचाल लाएगा? आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।   G7 देशों और यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के लिए समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम पश्चिमी जहाजों और बीमा सेवाओं को रोक देगा, जो अभी भी रूस के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा ढो रहे हैं। यह जानकारी सीधे तौर पर बातचीत से जुड़े छह सूत्रों ने Reuters को दी। रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल का खेल 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद G7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान) और EU ने रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन पूरी तरह बंद करने के बजाय, उन्होंने एक चालाक तंत्र अपनाया- 'प्राइस कैप'। इसके तहत रूसी कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रखने पर पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इससे रूस को तेल बेचने में दिक्कत तो हुई, लेकिन पूरी तरह रुकावट नहीं लगी। समय के साथ रूस ने इसे चकमा दिया। मॉस्को ने 'शैडो फ्लीट' नामक एक गुप्त जहाजी बेड़ा विकसित किया- पुराने, बिना पश्चिमी नियमन वाले टैंकर जो ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से प्रेरित हैं। अक्टूबर 2025 तक, रूसी तेल निर्यात का 44% इसी शैडो फ्लीट से होता है, जबकि 38% अभी भी G7/EU/ऑस्ट्रेलिया के टैंकरों से। लेकिन अब यह प्राइस कैप 'कागजी शेर' साबित हो रहा है। सितंबर 2025 में EU और कनाडा ने इसे घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल कर दिया, लेकिन अमेरिका ने समर्थन नहीं किया। ट्रंप प्रशासन प्राइस कैप के प्रति संशयपूर्ण रहा है। नई योजना: समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि G7 और EU अब प्राइस कैप को ताक पर रखकर 'पूर्ण समुद्री सेवाओं प्रतिबंध' (फुल मारिटाइम सर्विसेज बैन) लाने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब? रूसी तेल या ईंधन को ले जाने वाले किसी भी जहाज को पश्चिमी टैंकर, बीमा या पंजीकरण सेवाएं नहीं मिलेंगी – चाहे वह कहीं भी जा रहा हो। यह योजना मुख्य रूप से रूस के एशियाई बाजारों को निशाना बनाएगी। रूस का एक-तिहाई से अधिक तेल निर्यात (मुख्यतः भारत और चीन को) अभी भी ग्रीस, साइप्रस और माल्टा जैसे EU देशों के टैंकरों से होता है। क्यों यह कदम रूस के लिए बड़ा झटका हो सकता है? प्रस्तावित प्रतिबंध मौजूदा प्राइस-कैप सिस्टम को खत्म कर देगा और उस समुद्री व्यापार को निशाने पर लेगा जिसमें रूस भारी मुनाफा कमाता है। रूस अभी भी अपने तेल का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा पश्चिमी देशों के स्वामित्व वाले जहाजों और सेवाओं के माध्यम से भेजता है। यदि G7-EU इस प्रतिबंध को मंजूरी देते हैं, तो रूस को मजबूरन अपने शैडो फ्लीट- यानी पुराने, कम निगरानी वाले, अस्पष्ट स्वामित्व वाले जहाजों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। प्रतिबंध लगने पर रूस को अपना शैडो फ्लीट दोगुना करना पड़ेगा, जो पहले से ही 1,423 जहाजों का जाल है (जिनमें 921 प्रतिबंधित हैं)। अगले EU प्रतिबंध पैकेज में शामिल हो सकता है प्रस्ताव EU के 27 सदस्य देश इसे अपनी अगली (20वीं) प्रतिबंध पैकेज में शामिल करना चाहते हैं, जो 2026 की शुरुआत में लागू हो सकती है। लेकिन पहले G7 की व्यापक सहमति जरूरी है। ब्रिटेन और अमेरिका इसकी अगुवाई कर रहे हैं। यूरोपीय आयोग चाहता है कि यह फैसला G7 की सहमति से लिया जाए ताकि इसे औपचारिक प्रस्ताव में शामिल करना आसान हो। ब्रिटेन और अमेरिका के अधिकारी इस मुद्दे पर तकनीकी स्तर पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय अमेरिकी नीति पर निर्भर करेगा, खासकर इस बात पर कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन रूस-यूक्रेन शांति वार्ता के बीच कौन-सी रणनीति अपनाता है। चार सूत्र बताते हैं कि फिलहाल अमेरिकी रुख अनिश्चित है। अगर यह प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो यह 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूस के तेल पर लगाया गया सबसे कड़ा कदम होगा। रूस की ‘शैडो फ्लीट’ तेजी से बढ़ रही है प्राइस कैप से बचने के लिए रूस ने अपना अधिकांश तेल एशियाई बाजारों की ओर मोड़ दिया है। रूस अक्सर अपने ही जहाजों का उपयोग करते हुए ऐसा कर रहा है। इनमें से कई टैंकर पश्चिमी बीमा के बिना, अस्पष्ट मालिकों के साथ और कम सुरक्षा मानकों पर चलते हैं। ऊर्जा और स्वच्छ हवा पर अनुसंधान केंद्र (CREA) के अनुसार: अक्टूबर में रूस ने 44% तेल प्रतिबंधित शैडो फ्लीट पर भेजा और 18% गैर-प्रतिबंधित शैडो जहाजों पर। इसके अलावा, 38% पश्चिमी देशों (G7, EU, ऑस्ट्रेलिया) से जुड़े जहाजों पर भेजा। वहीं लंदन की कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस का कहना है कि रूस, ईरान और वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल ढोने वाली शैडो फ्लीट अब 1423 टैंकरों तक पहुंच गई है। बाइडेन प्रशासन का तर्क रहा है कि रूस को पुराने जहाज बदलने पर मजबूर करना उसके युद्ध को वित्तपोषित करने की क्षमता को कमजोर करेगा। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने प्राइस कैप को कड़ा करने में कम दिलचस्पी दिखाई है और 2025 में इसे 60 डॉलर से घटाकर 47.60 डॉलर करने के प्रस्ताव का भी समर्थन नहीं किया। बहस की दिशा: बाजार स्थिरता बनाम रूस की आय पश्चिमी सरकारें मानती हैं कि लक्ष्य रूस की युद्धकालीन आय कम करना है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार को झटका दिए बिना। अगर … Read more

हवाई किराए में मनमानी पर ब्रेक, इंडिगो संकट के बीच सरकार ने लागू किया कैप

नई दिल्ली इंडिगो संकट के कारण सैकड़ों की संख्या में उड़ानें प्रभावित हुई हैं. इस बीच, कई एयरलाइंस द्वारा हवाई किरायों में जबरदस्त बढ़ोतरी किए जाने पर उड्डयन मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय ने सभी प्रभावित रूटों पर फेयर कैप लागू कर दिया है, ताकि एअरलाइंस किसी भी तरह की मनमानी या मौकापरस्ती वाली कीमत ना वसूल सकें. इसके साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इंडिगो को निर्देश दिया कि सभी पेंडिंग यात्री रिफंड बिना देरी के निपटाए जाएं. दरअसल, परिचालन गड़बड़ियों के चलते इंडिगो की कई उड़ानें रद्द या देरी से चल रही हैं. इससे यात्रियों की मांग बढ़ी है और कुछ एअरलाइंस ने कई रूटों पर अत्यधिक किराये वसूलने शुरू कर दिए. इस पर उड्डयन मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया है. मंत्रालय ने साफ कहा है कि किसी भी परिस्थिति में यात्रियों से मनमानी या अवसरवादी तरीके से किराया वसूलना स्वीकार नहीं किया जाएगा. मंत्रालय ने अपने नियामकीय अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सभी प्रभावित रूटों पर फेयर कैप लागू कर दिया है. इसके तहत एअरलाइंस को तय अधिकतम सीमा से ऊपर किराया लेने की अनुमति नहीं होगी. मंत्रालय ने सभी एअरलाइंस को इसके लिए आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं. आदेश में कहा गया है कि एअरलाइंस को बिना किसी अपवाद के तय किए गए फेयर कैप का कड़ाई से पालन करना होगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये किराया सीमा स्थिति पूरी तरह स्थिर होने तक लागू रहेगी. MoCA का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मार्केट में मूल्य अनुशासन बनाए रखना, संकट में फंसे यात्रियों के शोषण को रोकना और उन नागरिकों को राहत देना है जिन्हें तुरंत यात्रा करनी पड़ती है. जैसे वरिष्ठ नागरिक, छात्र, और मरीज. मंत्रालय ने कहा कि इन वर्गों को भारी किराया वसूली के कारण आर्थिक बोझ में नहीं धकेला जा सकता. उड्डयन मंत्रालय रियल टाइम डेटा के आधार पर किरायों की निगरानी कर रहा है. इसके अलावा एयरलाइंस और ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ लगातार समन्वय भी किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि तय मानकों से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी.

रेलवे का बड़ा ऐलान: यात्रियों के लिए दिसंबर से कई नई स्पेशल ट्रेनें शुरू

नई दिल्ली दिसंबर महीने में भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने जा रहा है। छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और यूपी के रूट पर दर्जनों स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। वहीं रांची–अजमेर साप्ताहिक स्पेशल के परिचालन की अवधि भी बढ़ा दी गई है। गाड़ी संख्या 09619 अजमेर–रांची स्पेशल 5 से 26 दिसंबर तक चलेगी, जबकि 09620 रांची–अजमेर स्पेशल 7 से 28 दिसंबर तक संचालित होगी। दिसंबर में 14 स्पेशल ट्रेनें जानें पूरा टाइमटेबल रेवाड़ी–रींगस स्पेशल (09633 / 09634) 09633: 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 29, 30, 31 दिसंबर रेवाड़ी से 10:50 बजे प्रस्थान, रींगस 1:35 बजे आगमन वापसी: 5, 7, 8, 14, 15, 16, 21, 22, 26, 28, 29, 30, 31 दिसंबर और 1 जनवरी रींगस 2:20 बजे, रेवाड़ी 5:20 बजे 09634 भी इन ही तारीखों पर चलेगी, रेवाड़ी से 11:45 बजे और रींगस वापसी 3:05 बजे। मार्ग में ठहराव: अटेली, नारनौल, डाबला, नीम का थाना, कावंट, श्रीमाधोपुर। बिलासपुर–वलसाड शीतकालीन स्पेशल (08243 / 08244) 08243: बिलासपुर से 18 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक, हर गुरुवार 08244: वलसाड से 19 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक, हर शुक्रवार चेन्नई सेंट्रल–बनारस विशेष (06007 / 06008) ➤ 06007: 6 दिसंबर को 4:15 बजे MGR चेन्नई सेंट्रल से प्रस्थान ➤ नागपुर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, प्रयागराज होते हुए ➤ अगले दिन 23:15 बजे बनारस पहुंच ➤ 06008: 11 दिसंबर को 23:00 बजे बनारस से ➤ तीसरे दिन 23:30 बजे चेन्नई सेंट्रल पहुंच कोयम्बटूर–जयपुर साप्ताहिक स्पेशल (06181 / 06182) 06181: 18 से 25 दिसंबर, गुरुवार को 2:30 बजे कोयम्बटूर से शनिवार 13:25 बजे जयपुर आगमन 06182: 21 से 28 दिसंबर, रविवार 22:05 बजे जयपुर से बुधवार 8:30 बजे कोयम्बटूर पहुंच कागजनगर–कोल्लम और नांदेड़–कोल्लम स्पेशल सीरीज 07117, 07119, 07121, 07123, 07118, 07120, 07122, 07124 13, 15, 17, 19, 20, 22, 24, 26, 31 दिसंबर और 2 जनवरी को अलग-अलग ट्रिप संचालित होंगी। कई ट्रेनें दिसंबर से फरवरी तक रद्द पूरा विवरण रद्द की गई बड़ी ट्रेनें: ➤ 15620 कामाख्या–गया एक्सप्रेस: 8, 15, 22, 29 दिसंबर और जनवरी-फरवरी की कई तारीखों में रद्द ➤ 15619 गया–कामाख्या एक्सप्रेस: दिसंबर से 24 फरवरी तक हर शनिवार रद्द ➤ छत्तीसगढ़ क्षेत्र की कई MEMU और पैसेंजर ट्रेनें 6–8 दिसंबर को रद्द ➤ 22198 झांसी–कोलकाता एक्सप्रेस: 5 दिसंबर 2025 से 27 फरवरी 2026 तक रद्द ➤ 22197 कोलकाता–झांसी एक्सप्रेस: 7 दिसंबर 2025 से 1 मार्च 2026 तक रद्द ➤ 14003 मालदा टाउन–नई दिल्ली एक्सप्रेस: 6 दिसंबर से 28 फरवरी तक रद्द ➤ भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन: जनवरी से दक्षिण भारत यात्रा ➤ IRCTC की भारत गौरव पर्यटक ट्रेन 18 जनवरी 2026 को बिहार के बेतिया से चलेगी। किस-किस स्टेशन से चढ़ सकेंगे यात्री? बेतिया, रक्सौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पटना, बख्तियारपुर, किऊल, जसीडीह। यात्रा में दर्शन होंगे: तिरुपति बालाजी पद्मावती मंदिर रामेश्वरम का रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग मीनाक्षी अम्मन मंदिर (मदुरै) कन्याकुमारी मंदिर, विवेकानंद रॉक पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम) मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग जगन्नाथ धाम, पुरी टूर पैकेज — 14 रात, 15 दिन ➤ इकॉनमी: ₹27,535 (स्लीपर + नॉन-AC होटल + भोजन + नॉन-AC बस) ➤ स्टैंडर्ड: ₹37,500 (3AC ट्रेन + AC होटल + भोजन + नॉन-AC बस) ➤ कम्फर्ट: ₹51,405 (2AC ट्रेन + AC होटल + भोजन + AC बस)

लखनऊ, बेंगलुरु से दिल्ली तक: रेलवे ने 14 स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया शुरू

 नई दिल्ली त्योहारों और वेकेशन सीजन में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए सेंट्रल रेलवे ने 14 स्पेशल ट्रेनों की घोषणा कर दी है. ये ट्रेनें विभिन्न राज्यों के प्रमुख शहर लखनऊ, नागपुर, बेंगलुरु, गोरखपुर, मदगांव और दिल्ली के बीच चलाई जाएंगी. इन ट्रेनों में सभी क्लास के कोच होंगे, ताकि हर श्रेणी के यात्रियों को यात्रा में सुविधा मिल सके. सेंट्रल रेलवे का कहना है कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए 14 स्पेशल ट्रेन सेवाओं की घोषणा की गई है. ये ट्रेनें त्योहारों, गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों को भीड़ से राहत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं. रेलवे का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा को आसान बनाने के लिए विभिन्न रूटों पर ऑन-डिमांड स्पेशल ट्रेनें प्लान की गई हैं. इन स्पेशल ट्रेनों में एसी फर्स्ट क्लास, एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकंड क्लास- सभी तरह के कोचों की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इससे हर तरह के यात्री वर्ग को बेहतर विकल्प मिलेगा. स्पेशल ट्रेनें किन रूटों पर, किस समय चलेंगी… – लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से लखनऊ: 6 दिसंबर को दोपहर 12:15 बजे – छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) मुंबई से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली): 6 दिसंबर की शाम 05:15 बजे – पुणे से बेंगलुरु: 6 दिसंबर को शाम 7:00 बजे – नागपुर से CSMT मुंबई: 6 दिसंबर को रात 10:10 बजे – LTT से मदगांव: 7 दिसंबर को सुबह 11:10 बजे – CSMT मुंबई से नागपुर: 7 दिसंबर की दोपहर 3:30 बजे – LTT से हैदराबाद: 7 दिसंबर को शाम 5:20 बजे – पुणे से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली): 7 दिसंबर को रात 8:20 बजे रेलवे ने यह भी कहा है कि यात्रियों की जरूरत के अनुसार और भी स्पेशल ट्रेनें प्लान की जा रही हैं. जल्द ही इनके बारे में भी जानकारी शेयर की जाएगी.