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अमित शाह का बयान: बांग्लादेशी घुसपैठिए कांग्रेस के लिए वोट बैंक, असम को मुक्त करने के लिए पांच साल और दें

बोरदुवा  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है. चुनाव वाले राज्य असम के अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विरोधी कांग्रेस पर कड़ा हमला किया. उन्होंने कांग्रेस को बांग्लादेशी घुसपैठियों का रक्षक बताया. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने की पॉलिसी ने असम के मूल निवासियों, उनकी पहचान और उनकी पुरखों की जमीनों को खतरा पैदा कर दिया है. हां नागांव जिले के बोरदुवा (बटद्रवा) में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र न केवल असम से बल्कि पूरे भारत से भी पड़ोसी देश से आने वाले सभी अवैध अप्रवासियों की पहचान करेगा. शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल असम के लोगों की सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि राज्य के हर तरह के विकास पर भी ध्यान दिया है. बता दें कि, गृह मंत्री अमित शाह ने यहां नागांव जिले में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान, बटद्रवा थान के 227 करोड़ रुपये के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया. इस दौरान शाह ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है कि श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान को 'अतिक्रमण से मुक्त' कर दिया गया है. शाह ने आगे कहा कि, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की नेतृत्व वाली असम सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से 1 लाख बीघा से ज्यादा जमीन मुक्त करवाया है. असम में 2026 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए शाह ने लोगों से भाजपा को वोट देने की अपील करने का मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने रैली में लोगों से कहा, "असम को घुसपैठियों से मुक्त बनाने के लिए भाजपा को और पांच साल दीजिए." उन्होंने कहा, ''हम न सिर्फ असम से बल्कि पूरे भारत से भी सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करेंगे.'' शाह ने आगे कहा कि शंकरदेव ने 'एक भारत' का नारा दिया था, जिसे अब प्रधानमंत्री मोदी पालन कर रहे हैं. इस बात पर जोर देते हुए कि असम पूर्वोत्तर का ग्रोथ इंजन बन गया है और इस इलाके को विकास की ओर ले जा रहा है, शाह ने बताया कि इन 11 सालों में पीएम मोदी 80 बार पूर्वोत्तर इलाकों का दौरा किया, जिसमें से मोदी 36 बार वे असम आए हैं, जिससे पता चलता है कि भाजपा सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर ध्यान दे रही है. रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने असम में शांति और विकास पक्का करने के लिए कदम उठाए हैं, जो सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि हकीकत है. उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा सरकार ने राज्य में अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप के साथ शांति समझौते किए हैं और इन समझौतों के 92 प्रतिशत क्लॉज पूरे किए गए हैं.

चीन ने बनाई दुनिया की सबसे लंबी टनल, 4 घंटे की यात्रा अब सिर्फ 20 मिनट में पूरी होगी

बीजिंग  चीन ने इंजीनियरिंग और तकनीक के क्षेत्र में एक बार फिर वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करते हुए दुनिया की सबसे लंबी एक्सप्रेस-वे टनल का निर्माण पूरा कर लिया है। शिनजियांग प्रांत में स्थित इस 'तियानशान शेंगली टनल' की कुल लंबाई 22.13 किलोमीटर है। इस सुरंग के शुरू होने से दुर्गम पर्वतीय रास्तों पर होने वाला 4 घंटे का सफर अब मात्र 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। समय और दूरी में भारी कटौती यह विशाल टनल 324 किलोमीटर लंबे उरुमकी-युली एक्सप्रेस-वे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने से उरुमकी और कोरला के बीच लगने वाला समय भी 7 घंटे से घटकर केवल 3 घंटे रह गया है। करीब 60 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट चीन की ढांचागत शक्ति का प्रमाण है। अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा इस निर्माण के साथ चीन ने अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले दुनिया की सबसे लंबी एक्सप्रेस-वे टनल का खिताब चीन की ही 18.04 किलोमीटर लंबी सुरंग के नाम था। वर्ष 2020 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अपनी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चर्चा में रहा, लेकिन पाँच साल के कड़े परिश्रम के बाद अब यह यातायात के लिए तैयार है।  

भारतीय समुदाय के लिए खतरा: बांग्लादेश में हादी के साथियों ने जारी किया 24 दिन का अल्टीमेटम

ढाका  इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की मौत के मामले में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घर में ही घिर गई है। अब मंच ने 24 दिनों में हत्या का ट्रायल पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही तीन मांग भी रखी हैं, जिनमें बांग्लादेश में रहकर काम कर रहे भारतीयों के परमिट रद्द करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अंतरिम सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। द डेली स्टार के अनुसार, इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने रविवार को ढाका के शाहबाग से यूनुस सरकार को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, 'हत्यारे, मास्टरमाइंड, सहयोगी, भागने में मदद करने वालों और पनाह देने वालों समेत पूरे स्क्वॉड का ट्रायल अगले 24 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश की संप्रभुता को बचाने के लिए भारतीयों को जारी वर्क परमिट भी रद्द किए जाने चाहिए।' मंच की मांग है कि अगर भारत शरण पाए दोषियों को लौटाने से इनकार करता है, तो उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में केस दर्ज कराया जाए। हत्यारों के भारत में प्रवेश के दावे खारिज मेघालय की सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश पुलिस के उन दावों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया कि हादी के हत्यारे भारतीय राज्य में दाखिल हो गए हैं। मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रमुख, महानिरीक्षक (IG) ओ पी उपाध्याय ने कहा कि ये दावे निराधार और भ्रामक हैं। उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किसी व्यक्ति ने हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की हो। बीएसएफ को ऐसी किसी घटना की न तो सूचना मिली है और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट मिली है।' मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गारो पर्वतीय क्षेत्र में संदिग्धों की मौजूदगी के दावे की पुष्टि करने के लिए 'कोई जानकारी या खुफिया प्रमाण नहीं' है। अधिकारी ने कहा कि स्थानीय पुलिस इकाइयों को इस तरह की किसी गतिविधि की सूचना नहीं मिली है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। ढाका महानगर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिन में दावा किया था कि हादी हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्ध 'स्थानीय सहयोगियों की मदद से' हलुआघाट सीमा के रास्ते मेघालय में प्रवेश कर गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का कहर: पाकिस्तानी सेना फुल-स्केल वॉर के डर से कांपी, जरदारी को मिली बंकर में जाने की सलाह

इस्लामाबाद   पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबर नहीं पा रहा है। समय-समय पर उसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा किए गए हमलों की याद आ जाती है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना है कि 10 मई की सुबह भारत ने उसके नूर खान एयरबेस पर हमला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर कितने करारे हमले किए थे, इसकी भी डार ने खुद जानकारी दी। डार ने बताया कि 36 घंटे में भारत ने 80 ड्रोन से हमले किए थे। डार ने यह भी कहा कि मई के संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने पाकिस्तान और भारत के बीच मीडिएशन के लिए रिक्वेस्ट नहीं की थी, लेकिन दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने नई दिल्ली से बात करने की इच्छा जताई थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें पहलगाम हमले के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।  पाक‍िस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि आस‍िफ अली जरदारी ने एक द‍िन पहले कहा क‍ि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. वे अपनी शेखी बघार रहे थे क‍ि इतने विकट हालात के बावजूद वे बंकर में नहीं गए. लेकिन इसी बीच उन्‍होंने पाक‍िस्‍तान के डर का भी खुलासा कर द‍िया. तो आख‍िर ऐसा हुआ क्‍या?. इससे साफ पता चलता है क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना को भारत की ओर से एक बड़े और चौतरफा (Full-scale) हमले का डर सता रहा था. इस खौफ के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) में हड़कंप मच गया था. पाकिस्तानी सेना को आशंका थी कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ आतंकी कैंपों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्हें डर था कि यह हवाई ताकत, साइबर ऑपरेशन, गुप्त कार्रवाई और जमीनी हमलों के साथ एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. यह घबराहट पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व तक में महसूस की गई थी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुद खुलासा किया है कि मई में तनाव बढ़ने पर उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, जरदारी ने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया था और चेतावनी दी थी कि “जंग शुरू हो चुकी है” क्योंकि भारतीय बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले शुरू कर दिए थे.     जरदारी ने कहा, मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझसे कहा कि युद्ध शुरू हो गया है और सुझाव दिया कि हम बंकरों में चले जाएं. मैंने मना कर दिया. अगर शहादत लिखी है, तो यहीं होगी. नेता बंकरों में नहीं मरते. मुझे कई दिन पहले ही इस संघर्ष का आभास हो गया था. सेना का सरकार पर अविश्वास राष्ट्रपति को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की सलाह पाकिस्तान के सत्ता ढांचे के उस जाने-पहचाने पैटर्न को दिखाती है, जहां सरकार को छिपा द‍िया जाता है और सारे फैसले आर्मी करती है. जरदारी का बंकर में जाने से मना करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि नागरिक सत्ता की धमक के तौर पर देखा गया. राष्ट्रपति को कभी-कभी सेना की सलाह के खिलाफ फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जो पाकिस्तान के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है. एटॉमिक ‘रेड-लाइन’ और आर्थिक तबाही का डर     सिर्फ जवाबी हमले का ही डर नहीं था, पाकिस्तानी सेना आंतरिक अस्थिरता को लेकर भी चिंतित थी. उन्हें डर था कि देश की इकॉनमी बर्बाद हो सकती है. जनता विद्रोह कर सकती है और राज्‍यों में फूट पड़ सकती है. इस सैन्य कार्रवाई ने रावलपिंडी को अपनी न्‍यूक्‍ल‍ियर रेड लाइन की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि भारत पाकिस्तान की परमाणु सीमा से ठीक नीचे रहकर भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है.     पाकिस्तानी आर्मी लीडरश‍िप इस बात से सबसे ज्‍यादा डरा हुआ था क‍ि कहीं भारत अटैक के साथ साथ इंफॉर्मेशन वॉरफेयर न करने लगे. क्‍योंक‍ि इससे निपटने के ल‍िए उसके पास कोई इंतजाम नहीं थे.     बंकर वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाक सेना के अंदर रणनीतिक डर पैदा किया, बल्कि दबाव के समय देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनके भरोसे की कमी को भी उजागर कर दिया. क्या था ऑपरेशन सिंदूर? 7 मई की सुबह, इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए थे. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. पहला चरण: अपने शुरुआती चरण में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया. इन हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिवार वालों और चार करीबी सहयोगियों सहित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. दूसरा चरण: लेकिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना सहित जवाबी सैन्य कार्रवाई का प्रयास किया, तो भारत ने हमले तेज कर दिए. 9-10 मई की रात को अंजाम दिए गए दूसरे निर्णायक चरण में, भारतीय बलों ने नूर खान, सरगोधा, जैकोबाबाद, मुरीद और रफीकी सहित कई प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला बोल दिया. इसमें पाकिस्तान को इतना नुकसान हुआ कि इस्लामाबाद आज भी सार्वजनिक रूप से उसका हिसाब देने में संघर्ष कर रहा है. यह संघर्ष चार दिनों तक चला था, जिसमें फाइटर जेट, मिसाइल और तोपखाने का जमकर इस्तेमाल हुआ था.

राजस्थान में बवंडर, दिल्ली में झमाझम बारिश—कई राज्यों में बदलेगा मौसम का मिज़ाज

नई दिल्ली  भारत के अधिकांश राज्यों में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसी बीच अब IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, संभावनाएं जताई जा रही हैं कि आने वाले तीन दिनों में उत्तर पश्चिम भारत को ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। राजधानी दिल्ली सोमवार को भी कोहरे की चादर में छिपी रही। IMD ने सोमवार को बताया है कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक बारिश के आसार हैं। वहीं, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में 29 दिसंबर को बारिश और 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इस दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बर्फबारी या बारिश की संभावनाएं हैं। नए साल के जश्न में ‘रंग में भंग’ पड़ सकता है. मौसम विभाग ने दो दिन पहले ही इसको लेकर चेतावनी जारी कर दी है. दरअसल, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान है. मौसम विभाग ने बताया कि 31 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश होने की संभावना है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इससे दिल्ली को भारी प्रदूषण से राहत मिलेगी. अब सवाल उठता है कि अचानक बारिश का पूर्वानुमान क्यों जारी किया गया है? दरअसल, एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की वजह से बारिश का यह अलर्ट जारी हुआ है. मौसम विभाग जयपुर ने बताया कि राजस्थान में एक नया और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है. इसका प्रभाव 31 दिसंबर और 1 जनवरी तक रहने की संभावना है. विभाग के अनुसार, इसके असर से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बारिश हो सकती है. बीकानेर और शेखावाटी संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या ‘मावठ’ का असर दिखने भी लगा है. बता दें कि यह बेमौसम बरसात रबी की फसलों के लिए वरदान मानी जाती है और यह किसानों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से होगी बारिश IMD ने बताया है कि पश्चिमी हिमालयी इलाके में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव हो रहा है. इस सिस्टम की वजह से, 31 दिसंबर की शाम को दिल्ली NCR में हल्के बादल छाए रहने की उम्मीद है. ये बादल 1 जनवरी तक बने रहने की उम्मीद है. कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जिससे बाहर नए साल के जश्न पर असर पड़ सकता है. ये राज्य झेलेंगे ठंड और कोहरे की दोहरी मार 31 दिसंबर तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश में सुबह और रात में घना कोहरा छा सकता है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी तक ऐसा मौसम बना रह सकता है। 30 दिसंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और 1 जनवरी तक उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और ओडिशा में घना कोहरा छाया रहेगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 29 दिसंबर को शीत दिवस के आसार हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक शीत दिवस की संभावनाएं हैं। IMD ने बताया है कि 30 दिसंबर को पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से शीत लहर का सामना कर सकते हैं। दिल्ली को प्रदूषण से मिलेगी राहत? दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बुरा हाल है. पिछले हफ्ते में दो दिनों के लिए दिल्ली में वायु प्रदूषण से राहत मिली थी. पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जहां AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया है. कोहरे और शीत लहर के साथ प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश प्रदूषित कणों को धोकर हटा सकती है, जिससे अस्थायी तौर पर एयर क्वालिटी में सुधार हो सकता है. हालांकि, यह सुधार लंबे समय तक नहीं रह सकता है. साल के अंत में बारिश इस मौसमी बदलाव का सबसे ज्यादा असर उत्तर और पश्चिमी राजस्थान में देखने को मिलेगा. जहां साल के अंत में बारिश की संभावना है, वहीं, जनवरी के पहले हफ्ते में इन इलाकों में मौसम का मिजाज फिर बदलेगा. घना कोहरा छाने के आसार हैं. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सुबह और रात के समय घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम हो सकती है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है.

रिंग रोड विवाद: अनुमति के बिना बनी सड़क, उग्रवादियों के नाम पर नामकरण, NGT ने किया रोक लगा

इंफाल मणिपुर में बिना राज्य सरकार की अनुमति के बनाई जा रही एक ‘रिंग रोड’ का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और सरकार में हड़कंप मच गया है. यह सड़क राज्य के छह जिलों से होकर गुजरती बताई जा रही है और रिपोर्ट्स के अनुसार इसके कुछ हिस्सों को स्थानीय स्तर पर जर्मन रोड और टाइगर रोड कहा जा रहा है, जिनका नाम कुकी उग्रवादियों के उपनामों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सड़क निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है.  रिंग रोड के निर्माण कार्य पर रोक: NGT रिपोर्ट के मुताबिक, 23 दिसंबर को एनजीटी ने मणिपुर सरकार को आदेश दिया कि इस रिंग रोड पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य आगे न बढ़ाया जाए. साथ ही एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि ये सड़क जिन 6 जिलों से होकर गुजरती है वहां जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के सख्त अनुपालन के लिए निर्देश जारी करें. बताया गया है कि यह सड़क स्थानीय वन क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है और यह इंफाल में एशियाई विकास बैंक की सहायता से बन रही अधिकृत रिंग रोड से अलग है जिसे राज्य सरकार की मंजूरी प्राप्त है. एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विवादित सड़क को किसी भी तरह से आधिकारिक परियोजना से नहीं जोड़ा जा सकता. बता दें, ये पूरा मामला तब उजागर हुआ जब मणिपुर के मैतेई समुदाय के नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कोलकाता स्थित एनजीटी कार्यालय में याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया गया कि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में बिना किसी पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक प्रभाव आकलन के सड़क निर्माण किया जा रहा है जो कानून का गंभीर उल्लंघन है. याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी से मांग की कि इस अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. एनजीटी ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद इस मामले को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है. एनजीटी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि चुराचांदपुर, कांगपोकपी, नोनी और उखरूल सहित कई जिलों के वन और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण कुकी समुदाय के कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा था. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है. स्थानीय गांव के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मणिपुर में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. उनका कहना था कि बिना किसी सरकारी अनुमति के सड़कें बनाई जा रही हैं और उन्हें उग्रवादियों के नाम से जोड़ा जा रहा है, जिससे आम लोगों में गुस्सा और असंतोष बढ़ रहा है. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस सड़क का निर्माण मणिपुर संकट के दौरान शुरू हुआ था और इसकी जानकारी सबसे पहले सोशल मीडिया के जरिए सामने आई थी. सोशल मीडिया पर  उद्घाटन की तस्वीरें, एक विधायक की मौजूदगी और टाइगर रोड नाम से बने गेट की तस्वीरें भी सामने आई थीं. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस सड़क का इस्तेमाल गुप्त आवाजाही के लिए किया जा सकता है. इसके जरिए अवैध ड्रग्स, तस्करी, छोटे हथियार, गोला-बारूद और अवैध प्रवासियों की आवाजाही की आशंका जताई गई है. एनजीटी ने इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. फिलहाल, एनजीटी के आदेश के बाद सड़क निर्माण पर रोक लगा दी गई है और राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. 

अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न, पुराने आदेश पर रोक लगाकर नई समिति गठित करने का निर्देश

नई दिल्ली अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20 नवंबर को सुनाया गया फैसला अगली सुनवाई तक लागू नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा कि अरावली पहाड़ियों के अध्ययन और सर्वे के लिए एक नई समिति बनाई जाएगी। सीजेआई ने कहा कि इसपर पुनः विचार किया जाना है कि क्या 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानने से अवैध खनन तो नहीं शुरू हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उस इलाके की पहचान करने के लिए परिभाषा तय करनी है जो कि अरावली का हिस्सा नहीं हैं। बता दें कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक जैसी परिभाषा को स्वीकार करते हुए मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली इस पर्वत श्रृंखला में विशेषज्ञों की रिपोर् आने तक खनन पट्टों पर रोक लगा दी थी। अरावली को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी भौगोलिक सीमा और परिभाषा को लेकर है। पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण कई बार निर्माण कार्यों और खनन को लेकर नियमों का उल्लंघन होता है। इससे पहले, न्यायालय ने अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के खिलाफ निर्णय लिया था। न्यायालय का मानना था कि इस तरह का निषेध अवैध खनन गतिविधियों को जन्म दे सकता है। क्या थी नई परिभाषा? अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति के अनुसार, ‘‘अरावली पहाड़ी’’ को उन चिह्नित अरावली जिलों में मौजूद किसी भी भू-आकृति के रूप में परिभाषित किया जाएगा, जिसकी ऊंचाई स्थानीय निचले बिंदु से 100 मीटर या उससे अधिक हो। वहीं, ‘‘अरावली पर्वतमाला’’ एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह होगा।  

मस्जिद में विस्फोट के बाद सीरिया में फैल गया सांप्रदायिक तनाव, दर्जनों घायल और मरे

होम्स सीरिया के होम्स शहर में धार्मिक अल्पसंख्यक अलवी समुदाय के प्रदर्शनकारियों और विरोधी पक्ष के बीच झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। होम्स शहर में एक अलवी मस्जिद में नमाज के दौरान हुए बम धमाके में आठ लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की घटना के दो दिन बाद ये झड़प हुईं। हजारों प्रदर्शनकारी लजीकिया, तरतूस और अन्य स्थानों पर एकत्र हुए थे। सीरिया के सरकारी टेलीविजन ने खबर दी है कि तरतूस क्षेत्र में थाने पर हथगोला फेंके जाने से सुरक्षा बलों के दो सदस्य घायल हो गए। वहीं लजीकिया में सुरक्षा बलों की गाड़ियों में आग लगा दी गई। बाद में सरकारी समाचार एजेंसी सना ने खबर दी कि सुरक्षा बल का एक सदस्य गोलीबारी में मारा गया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में तीन लोग मारे गए और 60 अन्य घायल हुए। अलवी संप्रदाय के लोगों को निशाना बनाना चाहते थे कट्टरपंथी अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि शुक्रवार के बम हमले में होम्स की मस्जिद में विस्फोटक उपकरण लगाए गए थे, लेकिन संदिग्ध की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। मृतकों के अंतिम संस्कार शनिवार को किए गए। खुद को सराया अंसार अल-सुन्ना कहने वाले कम चर्चित समूह ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक बयान में हमले की जिम्मेदारी ली, जिसमें यह संकेत दिया गया कि हमला अलवी संप्रदाय के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। गाड़ियों में लगा दी गई आग  प्रदर्शन का आह्वान विदेश में रहने वाले अलवी शेख गजल गजल ने किया था। वह 'सुप्रीम अलवाइट इस्लामिक काउंसिल' के प्रमुख हैं। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के एक फोटोग्राफर ने लजीकिया में देखा कि सरकार समर्थक प्रतिपक्षी प्रदर्शनकारी अलवी प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंक रहे थे। सुरक्षा बलों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की और उन्हें तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं। झड़पों में प्रदर्शनकारी घायल हुए, लेकिन यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि कितने लोग घायल हुए। सीरिया के सरकारी टेलीविजन ने खबर दी है कि तरतूस क्षेत्र में थाने पर हथगोला फेंके जाने से सुरक्षा बलों के दो सदस्य घायल हो गए। वहीं लजीकिया में सुरक्षा बलों की गाड़ियों में आग लगा दी गई।

मेक्सिको ट्रेन हादसा: 13 की मौत, 100 से ज्यादा यात्री गंभीर रूप से घायल

मेक्सिको  दक्षिण मेक्सिको के ओक्साका राज्य में एक भीषण रेल दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रशांत महासागर और मेक्सिको की खाड़ी को जोड़ने वाले  रेल मार्ग पर एक यात्री ट्रेन अचानक पटरी से उतर गई। इस हादसे में अब तक 13 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि लगभग 100 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। आधी रात के बाद मचा कोहराम हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार के साथ दौड़ रही थी। अचानक हुए इस पटरी विचलन (Derailment) के कारण ट्रेन की बोगियां एक के ऊपर एक चढ़ गईं और पलट गईं। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय प्रशासन और मेक्सिकन नौसेना (Mexican Navy) ने मोर्चा संभाला। नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार: कुल यात्री: 241 लोग सफर कर रहे थे। कर्मचारी: 9 क्रू मेंबर्स ड्यूटी पर तैनात थे। रेस्क्यू: 13 शव बरामद किए जा चुके हैं और 100 घायलों का शहर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सत्ता के गलियारों में शोक मेक्सिको की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से नौसेना सचिव को घटनास्थल पर रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं। क्या सुरक्षित है यह नया रेल नेटवर्क? यह दुर्घटना उस महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट पर हुई है जिसका उद्घाटन साल 2023 में पूर्व राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर ने किया था। इस रूट का उद्देश्य मेक्सिको के दक्षिण-पूर्वी हिस्से का आर्थिक कायाकल्प करना था।

टाटानगर–एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो डिब्बों में भीषण आग, AC बोगियों में मची अफरा-तफरी

 एलामंचिली टाटा-एर्नाकुलम एक्‍सप्रेस ट्रेन में आग लग गई. इस हादसे में एक यात्री की मौत हो गई. आंध्र प्रदेश के एलामंचिली के पास रविवार को आधी रात के बाद टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस में भीषण आग लग गई. यह ट्रेन हादसा रात करीब 1:30 बजे हुआ, जब ट्रेन एलामंचिली के नजदीक से गुजर रही थी. ट्रेन के पैंट्री कार से सटे B-1 और M-2 AC कोच में अचानक आग की लपटें उठने लगीं. रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन के लोको पायलटों ने धुआं और आग देखकर तुरंत ट्रेन को रोक दिया. हालांकि, दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचतीं, उससे पहले ही दोनों AC कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गए. आग के कारण कोचों में घना धुआं भर गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. कई यात्री अपनी जान बचाने के लिए घबराकर ट्रेन से नीचे उतर आए. इस हादसे में एक पैसेंजर की जिंदा जलने से मौत हो गई. दमकल विभाग की टीमें पास के फायर स्टेशनों से मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. रेलवे अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की और एहतियात के तौर पर एंबुलेंस भी बुलाई गईं. हादसे के बाद करीब 2,000 यात्री स्टेशन पर फंस गए, जिन्हें ठंड में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. इस दर्दनाक हादसे में विजयवाड़ा के 70 वर्षीय चंद्रशेखर सुंदर की मौत हो गई. वे B-1 AC कोच में यात्रा कर रहे थे और आग की चपेट में आकर जिंदा जल गए. इसके अलावा आग से प्रभावित दोनों कोचों में यात्रियों का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया. कोहरे ने बढ़ाई आफत आग की लपटें बढ़ते ही धुआं बोगियों में फैल गया था, जिसके चलते यात्री घबरा गए और प्लेटफॉर्म पर उतर गए। कई यात्री समझ ही नहीं सके कि आखिर क्या हुआ था। चश्मदीदों का कहना है कि घने कोहरे के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके चलते कन्फ्यूजन और डर बढ़ गया था। इस हादसे में जान गंवाने वाले शख्स की उम्र 70 वर्ष थी। क्या थी वजह रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन तय समय से 4 घंटे देरी से अनकपल्ली पहुंची। रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अनकपल्ली से ट्रेन के रवाना होने के बाद नरसिंहबल्ली चिंगारियां और लपटें देखी गई थीं। माना जा रहा है कि इसकी वजह बी1 एसी कोच के ब्रेक के गर्म होना और आग पकड़ना थी। मौके पर आग बुझाने पहुंची अनकपल्ली, एलमान्चिली और नक्कापल्ली की टीमों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी दो कोच पूरी तरह से जल चुके थे और वहां मौजूद यात्रियों का सामान भी तबाह हो गया था। ट्रेन सेवाओं पर असर घटना का असर विशाखापत्तनम–विजयवाड़ा रेल मार्ग पर भी पड़ा. इस रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों को रोकना पड़ा या देरी से चलाया गया. बाद में यात्रियों को अन्य कोचों में शिफ्ट किया गया और जले हुए कोच हटाने के बाद ट्रेन को आगे के सफर के लिए रवाना किया गया. रेलवे प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है. यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है. बिहार में भी हादसा बिहार के जमुई जिले में शनिवार देर रात बड़ा रेल हादसा हो गया था. मालगाड़ी की 19 बोगियां बेपटरी हो गई थीं, जिनमें से 10 पुल के नीचे गिर गई थीं. इस वजह से नई दिल्‍ली-पटना-किउल-झाझा-हावड़ा रेलखंड पर ट्रेन सर्विस बुरी तरह से प्रभावित हुई है. दर्जनों ट्रेनों को डावर्ट करना पड़ा. इससे हजारों की तादाद में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है. सोमवार 29 दिसंबर 2025 तक भी इस रेलखंड पर सेवाएं सामान्‍य नहीं हो पाईं. रेलवे के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग पर ट्रेन ऑपरेशन को जल्‍द ही बहाल कर दिया जाएगा.