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रूस के बाजार में भारतीय आयुर्वेद का बोलबाला, भृंगराज-त्रिफला की बढ़ती मांग

नई दिल्ली  भारत और रूस की मित्रता काफी पुरानी है। एक-दूसरे की संस्कृति को सम्मान देने के साथ ही हर क्षेत्र में दोनों देश रूचि लेते हैं। बात आयुर्वेद की हो तो मित्र राष्ट्र इसमें भी पीछे नहीं। भृंगराज, त्रिफला से लेकर अन्य औषधियों समेत भारतीय आयुर्वेद ने रूस में खास जगह बनाई है। आयुर्वेद भारत की सदियों पुरानी पद्धति है। वात-पित्त-कफ के संतुलन, पंचकर्म, रसायन चिकित्सा और दिनचर्या पर आधारित यह विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है। आयुर्वेद को विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी मान्यता प्राप्त है। आयुर्वेद भारत में मॉडर्न मेडिसिन के समानांतर नेशनल हेल्थ सिस्टम का अभिन्न अंग बन चुका है। रूस में भी आयुर्वेद का तेजी से प्रभाव बढ़ता जा रहा है। रूस, भारत के बीच लंबे समय से साझेदारी रही है, जो समय की कसौटी पर खरा भी उतरी है। इसी कड़ी में सदियों पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को रूस में 1989 से ही आधिकारिक मान्यता और लोकप्रियता मिल रही है। यह सफर उस समय शुरू हुआ जब दुनिया के सबसे भयानक परमाणु दुर्घटनाओं में से एक चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना घटित हुई। इसके बाद सोवियत डॉक्टरों ने विकिरण से प्रभावित बच्चों और मरीजों के इलाज के लिए आयुर्वेद की ओर रुख किया। अमेरिका की रिसर्च बेस्ड नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन साइंस की ऑफिशियल वेबसाइट पर रूस में बढ़ती आयुर्वेद की लोकप्रियता को लेकर विस्तार से जानकारी मिलती है। भारत सरकार के सहयोग से 1989 में बेलारूस के मिन्स्क में पहला आयुर्वेदिक केंद्र खोला गया। भारतीय चिकित्सकों ने रूसी डॉक्टरों के साथ मिलकर विकिरण बीमारी के लक्षणों जैसे सिरदर्द, अनिद्रा, जोड़ों का दर्द, कमजोर इम्यूनिटी आदि पर सफलतापूर्वक काम किया। इसके बाद 1996-98 के बीच मास्को में 85 चेरनोबिल पीड़ितों पर किए गए आयुर्वेदिक उपचार में अधिकांश मरीजों को पूर्ण या आंशिक राहत मिली और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। साल 1990 में सोवियत स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुर्वेद को रूसी स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए अलग विभाग बनाया और मॉस्को में पहला ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया, जिसमें 250 से अधिक डॉक्टरों को आयुर्वेद के लिए ट्रेनिंग दी गई। 1991 में रूसी पारंपरिक चिकित्सा संघ की स्थापना हुई। साल 1996 से 2005 तक मॉस्को के 'नामी आयुर्वेद सेंटर में डॉक्टर नौशाद अली, डॉक्टर मोहम्मद अली और डॉक्टर उन्नीकृष्णन जैसे भारतीय विशेषज्ञों ने 15 सौ से अधिक मरीजों का इलाज किया। साल 2003 में शुरू हुई 'वश्य आयुर्वेद' परियोजना और 2005 में बने आयुर्वेद रूस-भारत संघ ने इसे और गति दी। आज रूस की पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल मेडिसिन में आयुर्वेद विभाग है। भारतीय प्रोफेसर हर साल बड़ी संख्या में रूसी डॉक्टर्स को प्रशिक्षण देते हैं। रूसी बाजार में च्यवनप्राश, त्रिफला गुग्गुलु, ब्राह्मी रसायन, मेदोहर गुग्गुलु, महामंजिष्ठादि, भृंगराज जैसी भारतीय औषधियां और आंवला, अश्वगंधा, बाला, महानारायण जैसे दर्जनों तेल उपलब्ध हैं। यही नहीं, देश में 1 हजार से अधिक स्पा सेंटर हैं जिनमें से आधे से अधिक पंचकर्म, अभ्यंगम, हर्बल स्टीम बाथ जैसी शुद्ध आयुर्वेदिक सेवाएं देते हैं। रूस के बच्चे-बूढ़े, जवान सभी शारीरिक और मानसिक समस्याओं से राहत के लिए आयुर्वेद का सहारा ले रहे हैं ।

आने वाले दो दिन ठंड की मार, राजधानी में पारा गिरने की संभावना

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आज शुक्रवार को शीत लहर के आसार हैं। मौसम विभाग ने इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, आज आसमान साफ रहेगा और सुबह हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। कुछ इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना भी जताई गई है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट के संकेत हैं। हालांकि, फिलहाल शीत लहर का अलर्ट सिर्फ शुक्रवार के लिए ही प्रभावी रहेगा। मौसम विभाग ने आज के लिए तापमान और शीत लहर को लेकर विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में करीब 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। इसके बाद, अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में लगभग 3-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं, अधिकतम तापमान अगले दो दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। कुल मिलाकर, न्यूनतम और अधिकतम दोनों तापमान सामान्य से नीचे बने रहेंगे। दिल्ली में गुरुवार को दिसंबर की अब तक की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। इस दौरान न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इससे पहले 1 दिसंबर को दर्ज हुए 5.7 डिग्री से भी कम है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार के लिए शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अनुमान जताया है कि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। IMD ने नागरिकों को सलाह दी है कि घर से बाहर निकलते समय सर्द हवाओं से बचाव करें और गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें। गुरुवार को दर्ज न्यूनतम तापमान में 3.9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई। वहीं, अधिकतम तापमान भी सामान्य से 2.2 डिग्री कम रहा और 23.1 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया। IMD का कहना है कि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 1–2 डिग्री और गिरकर करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। अधिकतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह के समय सतही सर्द हवाओं की रफ्तार 5–10 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जो दोपहर तक बढ़कर 10–15 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरी पंजाब में सक्रिय नया पश्चिमी विक्षोभ इस बदलाव की मुख्य वजह है और इसका असर दिल्ली में भी दिखाई देगा। गुरुवार सुबह राजधानी में हल्का कोहरा छाया रहा, लेकिन दोपहर में हवाएं तेज होने से आसमान साफ हुआ और धूप खिली रही। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को आसमान साफ रहेगा और सुबह हल्की धुंध छा सकती है। कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना भी बनी हुई है। विभाग ने अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट के संकेत दिए हैं। हालांकि शीतलहर का अलर्ट केवल शुक्रवार के लिए ही प्रभावी है। शनिवार से बुधवार तक शीतलहर के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। दिल्ली-NCR का AQI बेहद खराब गुरुवार सुबह दिल्ली में दिन की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे के साथ हुई। आसमान में छाई धुंध की परत के कारण विजिबिलिटी कम रही। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) के अनुसार, सुबह राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 304 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थिति दर्शाता है। बुधवार की तुलना में AQI में 38 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इस मामूली सुधार से राहत नहीं मिल पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध न केवल विजिबिलिटी प्रभावित करती है, बल्कि सांस संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देती है। ऐसे में लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलने और खुले में लंबे समय तक रुकने से बचने की सलाह दी जा रही है। गुरुवार सुबह AQI 299 के साथ हल्का सुधार दिखा था, लेकिन दोपहर तक वायु गुणवत्ता फिर बिगड़ गई। वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में ही रहने की संभावना है। दिल्ली में वायु प्रदूषण से हालात खराब सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 40 निगरानी केंद्रों में से 27 केंद्रों पर पूरे दिन ‘बेहद खराब’ श्रेणी की वायु गुणवत्ता दर्ज की गई। इनमें नेहरू नगर सबसे प्रदूषित रहा, जहां AQI 362 तक पहुंच गया। पूरे हफ्ते के रुझान पर नजर डालें तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया। 30 नवंबर को AQI 279 था, जो 1 दिसंबर को बढ़कर 304 हो गया। 2 दिसंबर को यह स्तर 372 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी की ओर बढ़ता संकेत था। इसके बाद हल्के सुधार के बावजूद गुरुवार की शाम फिर गिरावट देखी गई। 3 दिसंबर को AQI 342 दर्ज किया गया। वहीं, दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 13.7% रहा, जो स्थानीय प्रदूषण स्रोतों में सबसे अधिक है।

DGCA ने रोस्टर नियमों में ढील देकर सुलझाया IndiGo विवाद, कंपनी की गलती से देशभर में मचा था हाहाकार

 नई दिल्ली  इंडिगो को डीजीसीए ने FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस) मानदंडों के कुछ प्रावधानों से 10 फरवरी 2026 तक के लिए अस्थायी एकमुश्त छूट दी है. यह छूट रात की ड्यूटी (0000-0500) और रात की ड्यूटी को अव्यवस्थित करने वाले ऑपरेशन से संबंधित मामलों पर दी गई है. इंडिगो ने कहा है कि 5 दिसंबर 2025 को दिल्ली एयरपोर्ट (DEL) से प्रस्थान करने वाली उसकी सभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स रात 11:59 बजे तक रद्द रहेंगी. एयरलाइन ने प्रभावित ग्राहकों और हितधारकों से माफी मांगी है. डीजीसीए ने सभी पायलट एसोसिएशन्स से सहयोग करने की गुजारिश की है.  DGCA ने क्या कहा DGCA ने अपने नोटिफिकेशन में कहा कि मौजूदा हालात और एयरलाइंस की तरफ से ऑपरेशन्स को स्थिर रखने की मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। नोटिफिकेशन में साफ लिखा गया, ‘चल रहे ऑपरेशनल डिसरप्शन और एयरलाइंस से मिली अपीलों को देखते हुए यह निर्देश कि साप्ताहिक आराम की जगह कोई छुट्टी नहीं दी जा सकती। तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाता है।’ इंडिगो की उड़ानें धड़ाधड़ रुकने लगीं इंडिगो ने कहा कि अप्रत्याशित घटनाओं से उसके कस्टमर्स प्रभावित हुए हैं. एयरलाइन प्रभावित ग्राहकों को जलपान (Refreshments), उनकी पसंद के मुताबिक अगले उपलब्ध फ्लाइट ऑप्शन, होटल आवास और सामान (Luggage) फिर से प्राप्त करने में सहायता दे रही है. लागू होने पर उन्हें पूरा रिफंड भी दिया जा रहा है. एयरलाइन ने आज दिल्ली से उड़ान भरने वाले सभी यात्रियों से लगेज कलेक्शन के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टाफ से संपर्क करने की गुजारिश की है. बता दें कि FDTL नियमों के लागू होते ही इंडिगो की उड़ानें धड़ाधड़ रुकने लगी थीं। इन नियमों के तहत पायलटों की साप्ताहिक आराम अवधि 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई है। रात की ड्यूटी का समय अब रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक माना जाएगा, और पायलट अब हफ्ते में सिर्फ 2 नाइट लैंडिंग ही कर सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 6 थी। लगातार दो नाइट ड्यूटी से भी रोक लगा दी गई है। साथ ही, 00:00–06:00 के बीच आने वाली उड़ानों की अधिकतम फ्लाइट टाइम सीमा 8 घंटे तय हुई है। चूंकि इंडिगो का बिजनेस मॉडल हाई-फ्रीक्वेंसी और रेड-आई फ्लाइट्स पर चलता है, ऐसे में अचानक क्रू की उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हुई। FDTL नियमों में क्या बदला गया?     पायलटों की साप्ताहिक अनिवार्य आराम अवधि 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई।     नाइट ड्यूटी की परिभाषा बढ़ाकर अब रात 12 से सुबह 6 बजे तक कर दी गई।     पायलट अब हफ्ते में केवल 2 नाइट लैंडिंग ही कर पाएंगे (पहले यह संख्या 6 थी)।     नाइट ड्यूटी में पायलट की अधिकतम उड़ान अवधि में भी कटौती की गई है। इन बदलावों ने पायलटों की उपलब्धता को सीधे प्रभावित किया, जिससे शेड्यूल गड़बड़ा गया और बड़ी संख्या में फ्लाइट कैंसिल या लेट होने लगीं। ये भी हैं दिक्कतें किस लिए मिली है छूट? डीजीसीए ने बताया कि यह छूट सिर्फ फ्लाइट ऑपरेशन को पटरी पर लाने के लिए दी गई है. इसे सुरक्षा आवश्यकताओं में कमी नहीं समझा जाएगा. इंडिगो ने कहा कि परिचालन संबंधी चुनौतियां मुख्य रूप से संशोधित फेज-II FDTL सीमाओं के कारण उत्पन्न हुईं. क्रू प्लानिंग और रोस्टरिंग की तैयारी अपर्याप्त थी, जिसकी वजह से बड़े स्तर पर दिक्कतें सामने आईं.  डीजीसीए ने कहा कि यात्रियों को हुई असुविधा के लिए प्राथमिक जवाबदेही ऑपरेटर्स की है. ऑपरेटर ने जरूरी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में क्रू की भर्ती का संकेत दिया है. डीजीसीए की पायलटों से खास अपील डीजीसीए ने पायलटों से सहयोग करने की गुजारिश की है, क्योंकि इंडिगो से जुड़े चल रही परेशानियों की वजह से हवाई यात्रा से जुड़ा तनाव बढ़ रहा है. डीजीसीए ने कहा की यात्रा ज्यादा होने और शादी के सीजन से पहले यात्रियों की तादाद में बढ़ोतरी होने वाली है. डीजीसीए ने बेहतर ऑपरेशन, कम देरी और रद्दीकरण का आह्वान किया है. पत्र में पायलटों और एयरलाइनों के बीच कोऑर्डिनेशन की जरूरत पर जोर दिया गया है. डीजीसीए ने साफ किया है कि यह छूट 10 फरवरी 2026 तक वैध रहेगी और परिचालन डेटा और अनुपालन रिपोर्टों के आधार पर हर 15 दिनों में अनिवार्य समीक्षा के अधीन रहेगी. विमानन नियामक (Aviation Regulator) ने यात्री सुरक्षा और FDTL CAR के लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. डीजीसीए ने कहा कि स्टेबल फ्लाइंग ऑपरेशन सुनिश्चित करने के लिए पायलटों का समर्थन अहम है और उनका मुख्य मकसद यात्रियों को होने वाली असुविधा से बचना है. इससे पहले Airbus A320 के सॉफ्टवेयर एडवाइजरी ने दिक्कतें बढ़ा दी थीं। वीकेंड पर टेक्निकल अपडेट के कारण उड़ानें लेट हुईं। देर से उतरने या उड़ान भरने का सीधा मतलब था कि कई पायलटों की ड्यूटी नाइट विंडो में चली गई। नतीजतन, सोमवार से FDTL लागू होने पर बहुत-से क्रू मेंबर ऑटोमैटिकली अनिवार्य रेस्ट पीरियड में चले गए। इतनी बड़ी संख्या में क्रू अचानक उपलब्ध न होने से पूरा शेड्यूल चरमरा गया। विंटर शेड्यूल 26 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जिससे फ्लाइट्स की संख्या और बढ़ी और परेशानी भी। इंडिगो ने क्या गलत किया? अब सवाल है—इंडिगो ने क्या गलत किया? तो बता दें एयरलाइन पिछले कई दिनों से 50% से कम ऑन-टाइम परफॉर्मेंस दिखा रही थी, यात्रियों की शिकायतें बढ़ रहीं थीं, ग्राउंड स्टाफ तक कह रहा था कि 'पायलट उपलब्ध नहीं हैं।' यानी संकट साफ दिख रहा था, फिर भी कंपनी ने समय रहते फ्लाइट्स को घटाया नहीं या क्रू प्लानिंग नहीं सुधारी। एक्सपर्ट कहते हैं कि DGCA को भी विंटर शेड्यूल में अतिरिक्त उड़ानों की मंजूरी देते वक्त नए FDTL नियमों का असर ध्यान में रखना चाहिए था। कई लोग इसे ‘स्टेज मैनेज्ड’ स्थिति मान रहे हैं, लेकिन एक लिस्टेड कंपनी अपनी साख दांव पर लगाने का जोखिम नहीं लेती। असलियत यही लगती है- एक सिस्टमेटिक फेल्योर, जिसके लिए अब तुरंत सुधारात्मक कदम जरूरी हैं, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं। IndiGo की सेवाएं कब होंगी सामान्य? इंडिगो ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि अगले 48 घंटों में संचालन सामान्य होने लगेगा। कंपनी का कहना है कि उसकी टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि यात्रियों … Read more

लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल की हिरासत बढ़ाई गई, NIA ने कोर्ट में पेश किए नए सबूत

नई दिल्ली  पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष एनआईए कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई की कस्टडी बढ़ा ही है। अनमोल बिश्नोई की एनआईए कस्टडी को 7 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। हाई-प्रोफाइल और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील मामला होने के कारण एनआईए जज खुद एनआईए मुख्यालय पहुंचे और वहीं पर बंद कमरे में सुनवाई की। अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से अवैध तरीके से रहने के आरोप में हाल ही में डिपोर्ट किया गया था। भारत आने के बाद एनआईए ने उसे कड़ी सुरक्षा में हिरासत में लिया है और उससे कई गंभीर मामलों में पूछताछ जारी है। बता दें कि एनआईए ने अमेरिका से प्रत्यर्पण कर 19 नवंबर को भारत पहुंचते ही अनमोल बिश्नोई को गिरफ्तार कर लिया था। 2022 से फरार चल रहे अनमोल को एनआईए के मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। वह लॉरेंस के टेरर सिंडिकेट से जुड़ा 19वां आरोपी है। अनमोल को नवंबर 2024 में कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में अवैध प्रवेश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जहां एफबीआई ने डीएनए और वॉयस सैंपल से उसकी पहचान की थी। उसके बाद लंबी डिपोर्टेशन प्रक्रिया चली थी। इससे पहले, मार्च 2023 में एनआईए ने लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व में टेरर-गैंगस्टर साजिश मामले में अनमोल के खिलाफ 1200 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पाया गया कि 2020 से 2023 के बीच अनमोल ने गोल्डी बराड़ और लॉरेंस के इशारों पर भारत में कई आपराधिक गतिविधियां अंजाम दीं। वह अमेरिका से ही गैंग को निर्देश देता था और शूटरों को शरण, हथियार और लॉजिस्टिक सप्लाई मुहैया कराता था। पंजाब के फाजिल्का का रहने वाला अनमोल नेपाल, दुबई और केन्या के रास्ते अप्रैल 2022 में फर्जी पासपोर्ट पर अमेरिका भागा था। अनमोल का नाम कई हाई प्रोफाइल केसों से जुड़ा है। अक्टूबर 2024 में मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में वह मुख्य साजिशकर्ता था।

मोदी-पुतिन की मंच से बड़ी बात: विश्वास बना भारत-रूस रिश्तों की नींव, विकास की रफ्तार पर रूसी राष्ट्रपति की मुहर

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-रूस बिजनेस फोरम में हिस्सा लिया।भारत-रूस बिज़नेस फोरम में PM नरेंद्र मोदी ने कहा, "राष्ट्रपति पुतिन का आज इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना बहुत महत्वपूर्ण रहा। मैं आप सभी का हृदय से स्वागत करता हूँ। आप सभी के बीच आकर, इस फोरम में शामिल बनकर अपने विचार शेयर करके मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं अपने दोस्त राष्ट्रपति पुतिन का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।  भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच FTA पर बातचीत शुरू हो गई है… चाहे बिज़नेस हो या डिप्लोमेसी, किसी भी साझेदारी की नींव आपसी विश्वास है। यही विश्वास भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत है। PM नरेंद्र मोदी कहा ने "राष्ट्रपति पुतिन और मैंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के लिए $100 बिलियन के लक्ष्य को पार करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन कल से राष्ट्रपति पुतिन के साथ मेरी बातचीत और हम जो क्षमता देख रहे हैं, मुझे नहीं लगता कि हमें 2030 तक इंतजार करना होगा। हम उस लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं, और मेरा आत्मविश्वास बढ़ रहा है। टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर कम किए जा रहे हैं…पिछले 11 सालों में भारत में हमने जिस स्पीड और स्केल पर बदलाव हासिल किया है, वह पहले कभी नहीं हुआ।  रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के प्रिंसिपल पर चलते हुए, भारत तेज़ी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने की ओर बढ़ रहा है। हमारा इरादा पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है, और हम अपने लक्ष्यों की ओर बहुत कॉन्फिडेंस और तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं। GST में नेक्स्ट-जेनरेशन रिफॉर्म और कम्प्लायंस में कमी, बिज़नेस को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदम हैं। मोदी ने कहा, "डिफेंस और स्पेस को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिया गया है। इससे इन सेक्टर में नए मौके बने हैं। अब हम सिविल-न्यूक्लियर सेक्टर में भी नई संभावनाओं के दरवाज़े खोलने जा रहे हैं। यह सिर्फ़ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म नहीं है, बल्कि माइंडसेट रिफॉर्म है। इन रिफॉर्म के पीछे एकमात्र संकल्प एक डेवलप्ड इंडिया है।" "मैं हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कुछ आइडिया देना चाहूंगा। सबसे पहले, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में, आज की मीटिंग में, प्रेसिडेंट पुतिन और मैंने अपनी कनेक्टिविटी की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया। हम INSTC, या नॉर्दर्न सी रूट, यानी चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर पर आगे बढ़ने के लिए कमिटेड हैं। इस दिशा में जल्द ही प्रोग्रेस होगी। इससे ट्रांज़िट टाइम कम होगा, लागत कम होगी और बिज़नेस के लिए नए मार्केट खुलेंगे। डिजिटल टेक्नोलॉजी की पावर से, हम वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के ज़रिए कस्टम, लॉजिस्टिक्स और रेगुलेटरी सिस्टम को कनेक्ट कर सकते हैं। इससे कस्टम क्लियरेंस तेज़ होगा, पेपरवर्क कम होगा और कार्गो मूवमेंट ज़्यादा आसान होगा। इंडिया-रूस बिज़नेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "…रूसी प्रतिनिधि मंडल सिर्फ़ एनर्जी के मामलों पर बात करने और तेल और गैस की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने नहीं आया था। हम चाहते हैं कि भारत के साथ अलग-अलग क्षेत्र में हमारे कई तरह के रिश्ते बनें। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी प्राइवेट बातचीत में कई मौकों पर इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के पास कई क्षेत्रों में बड़े और बढ़ते हुए मौके हैं, लेकिन अब तक उनका उतना इस्तेमाल नहीं हुआ है जितना दोनों देश चाहते हैं। यही वजह है कि हमने यह फोरम बुलाया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि PM मोदी के नेतृत्व में भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु नीति पर चल रहा है और साथ ही बहुत अच्छे रिज़ल्ट भी पा रहा है। आज, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। PM मोदी की अच्छी आर्थिक नीति और मेक इन इंडिया प्रोग्राम जैसे बड़े ऐतिहासिक पहल की वजह से, इंडिया टेक्नोलॉजी के मामले में संप्रभु बन रहा है। भारत के IT और फार्मा सेक्टर दुनिया में प्रमुख स्थान पर हैं। भारत-रूस बिजनेस फोरम में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "रूस फरवरी 2026 में भारत में होने वाले AI समिट में भाग लेने में रुचि रखता है।"

मोदी और पुतिन की बैठक: दोनों देशों में बनी सहमति, पुतिन बोले—भारत को लगातार तेल देते रहेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों ने अपने संयुक्त बयान में आपसी संबंधों को मजबूत करने और मिलकर आतंकवाद पर प्रहार करने का संकल्प जाहिर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच की दोस्ती ध्रुव तारे की तरह है। उन्होंने कहा, पिछले आठ दशकों में विश्व में अनेक उतार चढ़ाव आए हैं। मानवता को अनेक चुनौतियों और संकटों से गुजरना पड़ा है और इन सबके बीच भी भारत–रूस मित्रता एक ध्रुव तारे की तरह बनी रही है। परस्पर सम्मान और गहरे विश्वास पर टिके ये संबंध समय की कसौटी पर हमेशा खरे उतरे हैं। जब हमारे द्विपक्षीय संबंध कई ऐतिहासिक माइलस्टोन से गुजर रही है. उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान ही साल 2000 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी शुरू हुई थी. 25 साल पहले पुतिन ने पार्टनरशिप की नींव रखी थी. इस बीच मानवता को कई संकट देखने पड़े. लेकिन भारत-रूस दोस्ती ध्रुव तारे की तरह बनी रही. पिछले 25 साल के उन्होंने अपनी लीडरशिप से हमारे संबंध मजबूत किए हैं. पुतिन की वजह से रूस-भारत का रिश्ता मजबूत हुआ.  हर परिस्थिति में उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. मैं अपने दोस्त पुतिन का दिल से आभार व्यक्त करता हूं. रूस के साथ भारत की दोस्ती ग्लोबल चैलेंज से लड़ेगी. यूक्रेन के संबंध में भारत ने शुरुआत से शांति का पक्ष रखा है. हम इस विषय के शांतिपूर्ण और स्थाई समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं. भारत सदैव अपना योगदान देने के लिए तैयार रहा है और आगे भी रहेगा.  भारत को बिना रोक-टोक तेल देते रहेंगे- पुतिन पुतिन ने कहा कि शानदार स्वागत के लिए भारत का आभार. रूस तेल-गैस का प्रमुख सप्लायर है. भारत को फ्यूल सप्लाई जारी रहेगी. भारत को बिना रोक-टोक तेल देते रहेंगे. दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाएंगे. सेनाओं के आधुनिकीकरण में सहयोग देंगे. भारत-रूस में लगातार बातचीत है. रूस तेल, कोयला, गैस का 'भरोसेमंद सप्लायर' है. भारत को एनर्जी की 'बिना रुकावट सप्लाई' देने के लिए तैयार है. पुतिन ने भारत को छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर टेक्नोलॉजी का ऑफ़र दिया.  कोऑपरेशन और माइग्रेशन पर एग्रीमेंटः भारत और रूस के बीच अहम समझौते हुए. कोऑपरेशन और माइग्रेशन पर एग्रीमेंट हुआ. हेल्थकेयर और मेडिकल एजुकेशन पर समझौता हुआ. फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स पर एग्रीमेंट, फर्टिलाइजर पर एग्रीमेंट हुआ. पोलर शिप्स और मैरिटाइम कोऑपरेशन पर समझौता हुआ.  आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर प्रहार पीएम मोदी ने कहा, क्रिटिकल मिनिरल्स को लेकर अहम सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत शुरू से ही यूक्रेन मामले में शांति के ही पक्ष में रहा है। वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस बिना किसी दबाव के भारत को फ्यूल की सप्लाई करता रहेगा।पुतिन ने अपने बयान में कहा कि रूस और भारत के बीच संबंधों को लेकर उन्होंने हर पहलू पर चर्चा की है। हम सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर प्रहार है और रूस-भारत इसके खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। पीएम मोदी ने कहा, भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता है। हम भारत-रूस आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को 2030 तक जारी रखने पर सहमत हुए हैं। भारत और रूस यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को शीघ्र पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच कौन से अहम समझौते -दोनों ने प्रवासन और आसान आवाजाही से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत एक से दूसरे देश जाकर नौकरी या बिजनेस करना आसान होगा। -स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। -प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच वार्ता के बाद भारत, रूस ने बंदरगाह और पोत परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

बाबरी मस्जिद विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हुमायूं कबीर को नहीं मिली रोक

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर उच्च न्यायलय से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण केस में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने शांति की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ दी है। कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने का ऐलान किया है। विधायक ने अदालत के फैसले पर खुशी जाहिर की है। फैसले पर कबीर ने कहा, 'मैंने पहले ही कह दिया था कि मैं नींव रखूंगा। हाईकोर्ट के जज ने जो निर्णय लिया, उससे मैं बहुत खुश हूं…। मैं हाईकोर्ट के जज को बधाई देता हूं…। यह मेरा संवैधानिक अधिकार है…। जो लोग हाईकोर्ट गए थे, उन्हें मुंहतोड़ जवाब मिला है…।' TMC पर भड़के टीएमसी ने विधायक कबीर को गुरुवार को पार्टी से निलंबित कर दिया था। पीटीआई भाषा के अनुसार, निलंबन के कुछ ही देर बाद कबीर ने घोषणा की कि वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे, इस महीने के अंत में अपनी पार्टी बनाएंगे और प्रस्तावित कार्यक्रम को बढ़ाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें ‘गिरफ्तार’ किया जाए या मार ही क्यों न दिया जाए। लंबन की खबर तब सामने आई जब कबीर बहरामपुर में मुख्यमंत्री की एसआईआर विरोधी रैली के आयोजन स्थल पर बैठे थे, जहां तृणमूल ने उन्हें पहले आमंत्रित किया था। कबीर ने इसे 'जानबूझकर किया गया अपमान' बताया और कहा कि उनके खिलाफ 'साजिश' रची गई है। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन मैं शुक्रवार या सोमवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा।' कबीर ने कहा कि उनका नया संगठन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 294 में से 135 सीट पर उम्मीदवार उतारेगा। सत्तारूढ़ पार्टी में लौटने से पहले कभी कांग्रेस, कभी तृणमूल और कभी भाजपा में रहे कबीर ने कहा कि बेलडांगा में छह दिसंबर का शिलान्यास कार्यक्रम रद्द नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा, '(शिलान्यास कार्यक्रम में) लाखों लोग शामिल होंगे। अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो एनएच-12 जाम किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराने के लिए उनकी हत्या भी की जा सकती है। कबीर ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया, तो वह धरने पर बैठेंगे और 'गिरफ्तारी देंगे'। उन्होंने कहा कि उन्हें 'न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।'  

भारत की भूमिका पर खुलकर बोले पीएम मोदी, पुतिन से कहा—हम तटस्थ नहीं हैं

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्विपक्षीय बैठक करने जा रहे हैं। इस शिखर वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है, बल्कि शांति का पक्षधर है। बैठक हैदराबाद हाउस में होने जा रही है। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति राजघाट गए थे। शिखर वार्ता से पहले राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक रूप से स्वागत किया गया। पीएम मोदी ने पुतिन के साथ शिखर वार्ता के दौरान कहा कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष में तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष संवाद और कूटनीति के माध्यम से खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।' इस दौरान पुतिन ने कहा कि रूस इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'पिछले दिनों विश्व समुदाय के सभी नेताओं से जब भी मेरी बात हुई है और उन्होंने जब भी विस्तार से चर्चा की तब मैंने कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है भारत का पक्ष है और वो पक्ष शांति का है। हम शांति के हर प्रयास का समर्थन करते हैं और इसके हर प्रयास के साथ हैं…मुझे पूरा भरोसा है हम आज कई विषयों पर चर्चा करने वाले हैं। भारत और रूस का आर्थिक संबंधों का अधिक विस्तार हो। हम नई-नई ऊंचाईयों को प्राप्त करे…।' उन्होंने कहा, 'यूक्रेन के संकट के बाद हमारी लगातार चर्चा होती रही है आपने भी समय-समय पर एक सच्चे मित्र के रूप में हमें सभी चीजों से अवगत कराया। मैं समझता हूं कि ये विश्वास बहुत बड़ी ताकत है और आपको मैंने अनेक बार इस विषय पर चर्चा की है….विश्व का कल्याण शांति मार्ग पर ही है हम सबको मिलकर शांति के राह तलाशने चाहिए और पिछले दिनों जो प्रयास चल रहे हैं मुझे पूरा विश्वास है कि विश्व फिर से एक बार शांति की दिशा में लौटेगा।' पीएम मोदी ने कहा, 'हमारी समिट कई नतीजों के साथ चल रही है। आपकी यात्रा बहुत ऐतिहासिक है। 2001 में जब आपने कार्यभार संभाला और पहली बार भारत की यात्रा हुई आज उसे 25 साल हो गए हैं। उस पहली यात्रा में ही स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की मजबूत नींव रखी गई थी। मैं पर्सनली भी बहुत खुश हूं कि पर्सनल लेवल पर आपके साथ मेरे रिश्तों ने भी 25 साल पूरे कर लिए हैं। मेरा मानना ​​है कि 2001 में आपने जो रोल निभाया, वह इस बात का शानदार उदाहरण है कि एक विजनरी लीडर कैसे होता है, वह कहां से शुरू करता है और रिश्तों को कहां तक ले जा सकता है इसका एक उत्तम उदाहरण भारत और रूस के संबंध हैं।' खास बात है कि राष्ट्रपति पुतिन 4 साल बाद भारत यात्रा पर आए हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब अमेरिका की तरफ से लगातार भारत को रूसी तेल की खरीद के कारण निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। साथ ही अमेरिका ने जी7 देशों से अपील की है कि रूसी तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई की जाए।  

हैदराबाद हाउस के निर्माता निजाम उस्मान अली खान की कहानी, जहां होता है वैश्विक मेहमानों का स्वागत

नई दिल्ली  कल यानी 4 दिसंबर की शाम से दिल्ली की हलचल भरी सड़कों पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का काफिला सरपट दौड़ रहा है। एयरपोर्ट से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निजी डिनर, फिर आज राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर, राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और अब हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता। यह दो दिवसीय दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, जहां रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर समझौते होने की उम्मीद है। लेकिन इस दौरे की खासियत सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं। पुतिन का स्वागत हो रहा है एक ऐसे ऐतिहासिक महल में, जो कभी हैदराबाद के आखिरी निजाम उस्मान अली खान की शाही ठाठ-बाट का प्रतीक था। आज यही हैदराबाद हाउस विदेशी मेहमानों की भव्य मेजबानी का केंद्र है, जहां मोदी-पुतिन की बैठक हो रही है।   मीर उस्मान अली खान, जिन्हें निजाम VII के नाम से जाना जाता है, वे ब्रिटिश भारत के सबसे धनी शासकों में शुमार थे। 1886 में हैदराबाद में जन्मे इस निजाम ने 1911 से 1948 तक हैदराबाद रियासत पर शासन किया। टाइम मैगजीन ने 1937 में उन्हें दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था – उनकी संपत्ति का अनुमान आज के मूल्य में 2 खरब डॉलर से अधिक था! हीरे-जवाहरात, सोने की ईंटें, और गोलकुंडा की खदानों से कमाई गई दौलत ने उन्हें वैभव का प्रतीक बना दिया। लेकिन निजाम सिर्फ धन-दौलत के मालिक नहीं थे; वे एक दूरदर्शी शासक भी थे। उन्होंने हैदराबाद को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई। उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना, उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल और कचिगुड़ा रेलवे स्टेशन जैसे निर्माण उनके नाम से जुड़े हैं। लेकिन दिल्ली से उनका नाता खास था। 1919 में ब्रिटिश सरकार ने रियासतों के शासकों को 'चैंबर ऑफ प्रिंसेस' में शामिल किया, जिसके लिए दिल्ली में रहना जरूरी हो गया। निजाम ने 1926 में अशोक रोड पर 8.2 एकड़ जमीन खरीदी – लागत लगभग 50 लाख रुपये (आज के मूल्य में सैकड़ों करोड़)। प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने नई दिल्ली का अधिकांश डिजाइन किया था। हैदराबाद हाउस का निर्माण 1926-28 के बीच पूरा हुआ। यह तितली के आकार का भव्य महल है, जिसमें 36 कमरे, चार जनाना (महिलाओं के लिए) कक्ष, आलीशान सीढ़ियां, फायरप्लेस, फव्वारे और मुगल-यूरोपीय शैली का मिश्रण है। ऐसा अनुमान है कि उस समय इसकी लागत लगभग 2 लाख पाउंड (आज के मूल्य में 170 करोड़ रुपये) थी। वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के अलावा यह लुटियंस द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा राजसी महल था। लेकिन विडंबना देखिए – निजाम के बेटों को यह 'बहुत पश्चिमी' लगा, इसलिए वे शायद ही कभी यहां रुके। 1948 में ऑपरेशन पोलो के बाद हैदराबाद का भारत में विलय हो गया। निजाम ने इसे कभी-कभार इस्तेमाल किया, लेकिन 1974 में यह विदेश मंत्रालय के अधीन आ गया। आज यह प्रधानमंत्री का स्टेट गेस्ट हाउस है। भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र यह हाउस आज भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र है, जहां दुनिया के सबसे महान नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की है। अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा ने यहां द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से वैश्विक साझेदारी को मजबूत किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी कई यात्राओं में रक्षा और ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो भारत-रूस संबंधों की नींव हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन तथा थेरेसा मे ने व्यापारिक समझौतों को आकार दिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन जैसे अन्य महान हस्तियां भी यहां मेजबान बनीं। कुल मिलाकर भारत के राजकीय दौरे पर आए लगभग सभी विदेशी मेहमानों की यहां मेजबानी हुई है। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी ने भी नवंबर 1983 में ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का हैदराबाद हाउस में भव्य स्वागत किया था, जहां दोनों ने न केवल राजकीय भोज में हिस्सा लिया बल्कि कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन के दौरान गोपनीय वार्ताएं भी कीं। निजाम उस्मान अली खान की बात करें तो उनकी विरासत सिर्फ इमारतों तक नहीं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कला को बढ़ावा दिया। 1967 में उनका निधन हुआ, लेकिन हैदराबाद हाउस आज भी उनकी भव्यता की गवाही देता है – एक शाही निवास से कूटनीतिक मंच तक का सफर। पुतिन का भारत दौरा: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा 2021 के बाद भारत का पहला दौरा है। यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक दबावों के बीच यह यात्रा रूस की अलगाव की नीति को तोड़ने का संकेत है। 4 दिसंबर की शाम पलम एयरपोर्ट पर उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया – गले मिलना, हाथ पकड़ना, और एक ही कार में सवार होकर 7, लोक कल्याण मार्ग पर निजी डिनर। आज सुबह 11 बजे पुतिन को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात हुई। फिर राजघाट पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए पुतिन ने फूल चढ़ाए। इसके बाद हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां मोदी ने उनका स्वागत किया।    

राष्ट्रपति से पहले बॉडीगार्ड चखता है खाना! पुतिन की प्लेट का सबसे बड़ा टॉप सीक्रेट आया सामने

नई दिल्ली  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। दुनिया के हर देश की नजर इस दौरे पर है। ऐसे में कूटनीतिक एजेंडे के इतर इस यात्रा पर लोगों की नजर पुतिन की सुरक्षा और निजता पर भी है। दूसरे देशों में एक अंश तक न छोड़ने वाले पुतिन की खाने-पीने की क्या व्यवस्था है, इसको लेकर भी सवाल है। दूसरे देशों के कई नेता जहां आसानी से दूसरे भोजों में शामिल हो जाते हैं, लेकिन पुतिन के साथ ऐसा नहीं है। पुतिन जिस भी देश में जाते हैं, वहां पर अपने भोजन के लिए एक खास व्यवस्था करके जाते हैं।   रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन जब भी किसी देश की यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ उनकी पूरी टीम जाती है। इसमें उनके निजी रसोइए भी शामिल होते हैं। इसके अलावा उनके भोजन की सामग्री को पहले जांचा जाता है, उसके बाद स्वीकृत किया जाता है। इतना ही नहीं हर डिश को पुतिन तक पहुंचने से पहले गहन सुरक्षा जांच से भी गुजरना पड़ता है। पहले से ही अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने वाले पुतिन यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद और भी ज्यादा चौकन्ना हो गए हैं। विदेश यात्राओं के दौरान पुतिन की फूड सिक्योरिटी यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन ने लंबे वक्त के लिए बहुत कम ही देशों की यात्रा की है। वह जब यात्रा पर जाते हैं, तो उनकी भोजन व्यवस्था की भी सैन्य स्तर पर सुरक्षा की जाती है। इतना ही नहीं रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन शायद ही कभी किसी मेजबान देश के शेफ द्वारा पकाया हुआ खाना खाते हैं। उनके खाने को हमेशा एक प्रशिक्षित रूसी शेफ टीम तैयार करती है, इस खाने को पकाने के बाद सुरक्षा जांच से गुजारा जाता है। इसको आसान बनाने के लिए पुतिन की टीम अपने साथ एक मोबाइल फूड-टेस्टिंग लैब लेकर चलती है, जब भी पुतिन कुछ खाते हैं। इसका इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, पुतिन के लिए जो खाना पकाया जाता है, उसका कच्चा माल या तो रूप से लाया जाता है, या फिर इसे मेजबान देश से बहुत जांच परख के इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन किसी राजभोज में बहुत कम खाना खाते है और अगर वह खाते ही हैं, तो आम तौर पर इसे उनकी टीम द्वारा ही पकाया जाता है। क्या होती है पुतिन की डाइट रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा की दृष्टि से लगातार कड़े उपायों के बीच भोजन करने वाले पुतिन की डाइट लगभग साधारण ही है। सुबह के समय वह अक्सर त्वरोग(रूसी पनीर) को शहद के साथ या दलिया के साथ खाते हैं, इसके साथ में ताजा जूस लेते हैं। इसके अलावा कभी-कभी कच्चे अंडे या ऑमलेट भी खाते हैं। उनकी डाइट में ज्यादातर खाना हाई प्रोटीन और लो फैट वाला होता है। दोपहर और रात के भोजन में वह मछली को लाल मांस से अधिक पसंद करते हैं। इसके अलावा मछली की अन्य डिश पसंद करते हैं। इसके साथ ही भोजन में ज्यादातर सलाद ही होता है, जिनमें टमाटर और बेसिक सब्जियां शामिल होती हैं।