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SIR प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के 14 लाख नाम कटने के अंदेशा, फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख एक हफ्ते में

 कोलकाता चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक करीब 14 लाख SIR गिनती के फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' के तौर पर पहचाने गए हैं. एक अधिकारी ने कहा कि ये फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' हैं क्योंकि वोटर या तो गैर-हाज़िर थे, डुप्लीकेट थे, मर चुके थे या हमेशा के लिए कहीं और चले गए थे. सोमवार को यह आंकड़ा 10.33 लाख था. उन्होंने कहा, " दोपहर तक, यह संख्या 13.92 लाख थी. हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे और अपडेट आएंगे, यह आंकड़ा रोज़ बढ़ता रहेगा." पूरे राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) को घरों से डेटा इकट्ठा करने का काम सौंपा गया है. वे फॉर्म बांटने और ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करने में एक्टिव रूप से लगे हुए हैं. अब तक 3 बीएलओ की मौत अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रिवीजन के काम के लिए 80,600 से ज़्यादा BLOs, करीब 8,000 सुपरवाइज़र, 3,000 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को लगाया गया है. अभी तक, चल रहे SIR के बीच राज्य में तीन BLOs की मौत हो चुकी है. बीजेपी को ममता बनर्जी की चेतावनी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को BJP पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी सेंट्रल पोल बॉडी को अपनी शर्तें थोप रही है और आने वाले SIR प्रोसेस में लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम हटाने के खिलाफ चेतावनी दी. बीजेपी के बिहार कैंपेन की ओर इशारा करते हुए, ममता ने आरोप लगाया कि वहां कोई भी पड़ोसी राज्य में पार्टी के 'गेम' को नहीं देख सकता और कहा कि बंगाल में ऐसा नहीं होगा. उन्होंने BJP को यह भी चेतावनी दी कि अगर बंगाल में उन्हें या उनके लोगों को टारगेट किया गया तो वह पूरे देश में सड़कों पर उतरेंगी और पूरे देश को हिला देंगी. उन्होंने कहा, "अगर आप मुझे बंगाल में टारगेट करते हैं और मैं अपने लोगों पर किसी भी हमले को पर्सनल अटैक मानती हूं, तो मैं पूरे देश को हिला दूंगी. मैं चुनाव के बाद पूरे देश का दौरा करूंगी."

सरकार ने 29 श्रम कानूनों को घटाकर 4 नए कोड किए लागू, कर्मचारियों को मिलेगा अतिरिक्त मुनाफा

 नई दिल्‍ली भारत में नए कानूनों को लागू कर दिया गया है, जिसके बाद सबसे बड़ी चर्चा सैलरी को लेकर शुरू हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी घट जाएगी, लेकिन सोशल सिक्‍योरिटी जैसे- पीएफ, ग्रेच्‍युटी और पेंशन आदि में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ जाएगा.  इसी को लेकर टैक्सबडी डॉट कॉम के संस्थापक सुजीत बांगर ने बताया है कि कैसे आपकी सैलरी प्रभावित हो सकती है और PF में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ने से आपका रिटायरमेंट फंड करोड़ों रुपये में बदल जाएगा. लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बांगर ने बताया कि किस प्रकार नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के वेतन संरचना को बदल रहे हैं, जिससे भविष्य निधि (PF) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) योगदान के माध्यम से कर्मचारियों को बढ़ावा मिल रहा है. अपनी पोस्‍ट में एक्‍सपर्ट ने कहा कि पहले बेसिक सैलरी कंपनी की कुल कॉस्‍ट (CTC) का करीब 35 फीसदी होता था, जिससे एक बड़ा हिस्‍स टैक्‍स अनुकूल अलाउंस में जाता था, जबकि पीएफ और एनपीएस कटौती कम रहती थी. बांगर ने कहा कि पुराने इंफ्रा में जानबूझकर पीएफ कम रखा जाता था.  लेकिन संशोधित नियमों के बाद अब बेसिक सैलरी सीटीसी का कम से कम 50% होना चाहिए, जिससे पीएफ और एनपीएस दोनों का योगदान बढ़ जाएगा, क्योंकि दोनों की गणना बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जाती है.  कैसे बन जाएंगे करोड़ों रुपये?  ₹12 लाख सीटीसी वाले 30 वर्षीय कर्मचारी के लिए, मंथली पीएफ कंट्रीब्‍यूशन (नियोक्ता और कर्मचारी दोनों की ओर से) करीब ₹7,200 से बढ़कर ₹12,000 हो जाएगा. यह ₹4,800 मंथली ग्रोथ, 30 साल में चक्रवृद्धि होने पर, ₹1.24 करोड़ की अतिरिक्त पीएफ बचत में बदल जाती है. रिटायरमेंट में कुल पीएफ अमाउंट 3.11 करोड़ रुपये हो जाएगा.  इसी तरह, एनीपीएस में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ेगा यानी 30 साल में ₹1.07 करोड़ और जुड़ेगा . कुल मिलाकर, कुल रिटारमेंट फंड 30 सालों में अनुमानित ₹3.46 करोड़ से बढ़कर ₹5.77 करोड़ हो जाता है. लॉन्‍गटर्म सेफ्टी देती है ये योजना  बांगर ने जोर देकर कहा कि रिटायरमेंट फंड का यह चक्रवृद्धि ब्याज ज्‍यादातर बचत योजनाओं से बेहतर है. उन्होंने लिखा कि म्यूचुअल फंड एसआईपी आमतौर पर 3-5 साल में टूट जाते हैं. एफडी का भुगतान हो जाता है, लेकिन पीएफ और एनपीएस, अनिवार्य, कटौती-आधारित हैं और इसीलिए वे जीवन भर की संपत्ति बनाते हैं. हालांकि शॉट टर्म में घर ले जाने वाले वेतन में कमी आ सकती है, लेकिन बांगर का तर्क है कि नई व्यवस्था लागू बचत अनुशासन के माध्यम से दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है.

समझौते पर भी नहीं लगी मरहम: महाराष्ट्र में BJP ने तोड़े शिंदे के तीन नेताओं से रिश्ते

मुंबई महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के दो घटक दलों यानी भाजपा और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के बीच कलह थमना मुश्किल नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं और नेताओं की खरीद-फरोख्त को लेकर दोनों दलों के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव टकराव की चल रहा था, जिसे अमित शाह के दखल के बाद माना जा रहा था कि तनाव का दौर खत्म हो जाएगा लेकिन भाजपा ने फिर से शिवसेना के तीन नेताओं को तोड़कर मिला लिया है। इससे दोनों साथी दलों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। दरअसल, दोनों दलों के बीच पिछले ही दिनों यह समझौता हुआ था कि कोई भी दल एक-दूसरे के नेताओं के अपनी पार्टी में सामिल नहीं कराएगा। बावजूद इसके BJP ने सोमवार को शिवसेना के तीन नेताओं को अपने साथ मिला लिया। इनमें से एक शिवसेना नेता अंबरनाथ से और दो संभाजीनगर से हैं। अंबरनाथ में जो नेता शिवसेना छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, वह एक बिजनेसमैन हैं और पुराने शिव सैनिक रहे हैं। रूपसिंह धाल की पहचान ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट के तौर पर भी रही है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष की मौजूदगी में हुए शामिल अब वह BJP में शामिल हो चुके हैं। उन्हें महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में पार्टी में शामिल कराया गया। दूसरी तरफ संभाजीनगर जिले में, फुलंबरी नगर पंचायत के लिए शिवसेना चीफ और शिवेसना के उम्मीदवार रहे आनंदा ढोके भी भाजपा में शामिल हो गए। संभाजीनगर में ही शिवसेना की महिला विंग की हेड शिल्पारानी वाडकर भी BJP में शामिल हो गईं हैं। इससे शिवसेना की भौहें तन गई हैं। शिवसेना बोली- नतीजे भुगतने होंगे BJP के इस नए कदम पर शिवसेना के कैबिनेट मिनिस्टर और संभाजीनगर जिले के गार्जियन मिनिस्टर संजय शिरसाट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। शिरसाट ने कहा, "अगर BJP ने हमारे नेताओं को अपनी तरफ खींचना बंद नहीं किया तो उसे नतीजे भुगतने होंगे। हम बदला लेने के लिए सही कदम उठाएंगे।" BJP मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान महायुति के अंदर सभी मतभेद 3 दिसंबर को चुनाव नतीजों के बाद सुलझा लिए जाएंगे। महायुति संग चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं शिवसेना के टकराव बढ़ाने के लिए तैयार होने का संकेत देते हुए शिरसाट ने कहा कि यदि शिवसेना कार्यकर्ताओं को (भाजपा में) अपनी बढ़त साबित करने के लिए शामिल किया जा रहा है तो उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी भी उचित कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, “इससे शिवसेना कार्यकर्ताओं में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। यह (शिवसेना उम्मीदवारों को भाजपा में शामिल करना) बंद होना चाहिए, अन्यथा महायुति के रूप में चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है।” शिरसाट ने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति आगामी नगर निगमों और जिला परिषदों के चुनावों को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वरिष्ठ नेताओं को इस पर विचार करना चाहिए।" उन्होंने भाजपा नेता और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक कार्यकर्ता विकल्प तलाशते रहते हैं।  

पाकिस्तान का एंटी-शिप मिसाइल परीक्षण: जानें इसकी खूबियां और भारत पर संभावित असर

इस्लामाबाद  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हर मोर्चे पर मात खाया पड़ोसी देश पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार हथियारों की होड़ में शामिल है। दो महीने पहले जमीन से लॉन्च किए जाने वाले फतह-4 क्रूज मिसाइल के परीक्षण के बाद अब पाकिस्तानी नौसेना ने एक स्वदेश विकसित पोत रोधी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल समुद्र और धरती, दोनों स्थानों पर लक्ष्य भेदने में सक्षम है। पाक सेना ने यह जानकारी दी है लेकिन इस मिसाइल का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।   इसे दुश्मन के युद्धपोत को समंदर में ही डुबोने वाली एंटी शिप मिसाइल कहा जा रहा है। पाकिस्तान की मिलिट्री प्रेस विंग ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह परीक्षण मंगलवार को स्थानीय स्तर पर निर्मित नौसैन्य प्लेटफॉर्म से किया गया, जिससे देश की रक्षा क्षमताएं बढ़ी हैं। ISPR ने कहा है कि यह मिसाइल समुद्र और जमीन, दोनों जगहों पर काफी सटीकता से हमला करने में सक्षम है। साथ ही, यह उन्नत तकनीक से लैस है। पाक पीएम-राष्ट्रपति गदगद पाकिस्तानी नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह सफल परीक्षण देश की बढ़ती प्रौद्योगिकीय विशेषज्ञता को दर्शाता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी’ के अध्यक्ष जनरल साहिर शमशाद मिर्जा और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने इस उपलब्धि में शामिल सभी इकाइयों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। परीक्षण में सटीक निशाना साधा भारत के साथ मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से पाकिस्तान अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। बता दें कि दो महीने पहले सितंबर 2025 में पाकिस्तानी सेना ने अपनी नव विकसित फतह-4 का परीक्षण किया था, जो जमीन से जमीन पर 750 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल है। अब पाकिस्तान ने पानी से पानी या सतह पर मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसने सटीक निशाना साधा है। भारत के लिए कितना टेंशन? क्या खूबियां? यह भारत समेत अन्य दुश्मनों के युद्धपोतों को एक मिनट के अंदर डुबोने में सक्षम है। यह मिसाइल पहले हवा में बहुत ऊपर जाती है, फिर सीधे नीचे गोता लगाकर टारगेट पर निशाना साधती है। इसे दुश्मन का रडार आसानी से नहीं पकड़ सकता है। इसीलिए पाकिस्तान कह रहा है कि उसकी नौसेना अब ज्यादा ताकतवर हो गई है। यह पाकिस्तान द्वारा पूरी तरह से स्वदेश निर्मित है। इस मिसाइल को समंदर में नेवी के जहाज से लॉन्च किया जाता है। यानी यह नेवी के जहाज पर लगी होती है। यह बहुत तेज उड़ती है और आसमान में ही दिशा बदल सकती है। दुश्मन के रडार सिस्टम से बचने में सक्षम है। यह तेजी से गोता लगाकर दुश्मन के टारगेट पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

इमरान खान जिंदा या नहीं? अफवाहों के बीच दो बुज़ुर्ग बहनों पर हमला, तनाव बढ़ा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के बारे में अफवाहों का बाजार गर्म है। पाकिस्तान की राजनीति में पूर्व राष्ट्राध्यक्षों की हत्या और फांसी दिए जाने जैसी चीजें आम रही हैं। इस बीच इमरान खान की जेल में ही हत्या कराए जाने की चर्चा है, जिससे पाकिस्तान में उनके समर्थकों के बीच उबाल है। यही नहीं इमरान खान की तीन बहनों ने दावा किया है कि वे तीन सप्ताह से अपने भाई से नहीं मिल सकी हैं। यही नहीं जब उनकी ओर से भाई से मुलाकात कराने की मांग की गई तो पुलिस ने उन पर बर्बरता से लाठियां बरसाईं। इमरान खान की बहनों नूरीन खान, अलीमा खान और उज्मा खान ने दावा किया है कि पुलिस ने उनकी पिटाई की।   रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल के बाहर इमरान खान के समर्थक बड़ी संख्या में जुटे और नारेबाजी की। यही नहीं कुछ और जगहों से ऐसे वीडियोज आए हैं, जिनमें इमरान खान के समर्थन सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी करते दिख रहे हैं। इमरान खान 2023 से ही जेल में बंद हैं। इमरान खान की पार्टी के नेता और उनकी बहनें अकसर मुलाकात करती रही हैं, लेकिन बीते तीन सप्ताह से किसी की उनसे मीटिंग नहीं हुई है। उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि जब इमरान खान के समर्थक और बहनें जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तो पुलिस ने उनकी बुरी तरह से पिटाई की। पार्टी ने इस मामले की निष्पक्षता से जांच किए जाने की मांग की है। बहनों ने पुलिस चीफ को लिखा- इस उम्र में बाल पकड़कर घसीटा गया इमरान खान की बहनों ने पंजाब पुलिस के चीफ उस्मान अनवर को लिखे लेटर में कहा है कि उनकी और समर्थकों की बिना किसी उकसावे की बुरी तरह से पिटाई की गई। नूरीन नियाजी ने लिखा, 'हम इमरान खान की सेहत को लेकर चिंतित हैं। इसी के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, जो शांतिपूर्ण था। हमने ना तो कोई रास्ता बंद किया और ना ही जनता को कोई असुविधा हुई। इसके अलावा कोई गैरकानूनी हरकत भी नहीं हुई। फिर भी पुलिस ने हमारे लोगों को बिना किसी उकसावे के ही पीटना चालू कर दिया। यह बेहद क्रूर हमला था, जो पंजाब की पुलिस ने किया।' उन्होंने कहा कि मुझे 71 साल की उम्र में बाल पकड़ कर घसीटा गया और चोट लगी हैं। वकील बोले- मेरी भी मुलाकात नहीं हो पा रही नूरीन नियाजी ने कहा कि मेरे अलावा भी कुछ और महिलाओं को पीटा गया है। दरअसल अफगानिस्तान की मीडिया में भी इमरान खान की हत्या होने की आशंका वाली खबरें लगी हैं। हालांकि अब तक पाकिस्तान की सरकार, सेना या जेल प्रशासन की ओर से कोई बयान जारी नहीं हुई है। ऐसे में आशंकाएं गहराती जा रही हैं कि आखिर इमरान खान की सेहत कैसी है। वे जीवित भी हैं या नहीं। यही नहीं इमरान खान के वकीलों की भी शिकायत है कि वे अपने मुवक्किल से मिल नहीं पाए हैं। वकील खालिद युसूफ चौधरी का भी कहना है कि उनकी मुलाकात इमरान खान से नहीं हो सकी है। उन तक जरूरी चीजें भी नहीं पहुंचने दी जा रहीं।  

मुंबई हमलों की बरसी पर अमेरिका का संदेश: पीड़ितों को नमन, भारत के साथ खड़े रहने की पुष्टि

नई दिल्ली भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को आज पूरा देश याद कर रहा है। दुनिया के अन्य देश भी इस आतंकी हमले की निंदा कर रहे हैं और मृतकों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने भी 26/11 हमले की आलोचना की। भारत में अमेरिकी दूतावास ने 26/11 की 17वीं बरसी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों की 17वीं बरसी है। हम मारे गए लोगों की याद में सम्मान दिखाते हैं और बचे हुए लोगों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।  अमेरिका ने लंबे समय से भारत की उन कोशिशों का समर्थन किया है ताकि इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके। एक बड़ा कदम उठाते हुए, अमेरिका ने इस साल तहव्वुर हुसैन राणा को भारत को सौंप दिया।" अमेरिकी दूतावास ने आगे लिखा कि राणा पर 2008 के भयानक मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में उसकी भूमिका का आरोप है। इस हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोगों की दुखद मौत हो गई थी। राणा का प्रत्यर्पण उन पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक जरूरी कदम है जो इन भयानक हमलों में मारे गए थे। अमेरिकी दूतावास ने लिखा, "जब हम 26/11 के पीड़ितों को याद करते हैं, तो हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर आतंकी हमलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का अपना पक्का इरादा दोहराते हैं।" इससे पहले भारत में इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने भी दुख जाहिर किया। इजरायल ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में, अजार ने कहा कि इस हमले में हर समुदाय, देश और धर्म के लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इजरायल आतंकवाद में मासूम लोगों की जान जाने का दर्द समझता है और हिम्मत और पक्के इरादे से इसका जवाब दे रहा है। अजार ने कहा, "आज, जब भारत 26/11 के भयानक मुंबई आतंकी हमलों की बरसी मना रहा है, मैं और इजरायल के लोग, भारत के लोगों के साथ खड़े हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम उस काले दिन और उसके बाद हर साल खड़े थे। 26/11 सिर्फ मुंबई पर हमला नहीं था, यह इंसानियत पर हमला था।" उन्होंने कहा कि इसने हर समुदाय, हर देश, हर धर्म, भारतीयों और इजरायलियों को एक ही तरह से टारगेट किया। बदकिस्मती से, इजरायल इस दर्द को जानता है। हम जानते हैं कि आतंकी घटनाओं में मासूम लोगों की जान जाने का क्या मतलब होता है। भारत और इजरायल के मिले-जुले अनुभव ही 'गहरी और हमेशा रहने वाली साझेदारी' की नींव हैं। आज, हम 26/11 के पीड़ितों को याद करते हैं। हम उन बहादुर अधिकारियों, सुरक्षा बलों और फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स का सम्मान करते हैं, जिन्होंने बहुत बड़ी कुर्बानी देकर शहर की रक्षा की, और हम उन परिवारों के साथ खड़े हैं, जिनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

ड्रग्स मामले में बड़ी कार्रवाई: 252 करोड़ के केस में ओरी से एंटी नारकोटिक्स सेल की पूछताछ

मुंबई  बहुचर्चित 252 करोड़ रुपए के ड्रग्स मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ओरहान अवत्रमाणी उर्फ ओरी बुधवार को मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) की घाटकोपर यूनिट पहुंचे। ओरी को ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद वह निर्धारित समय पर ऑफिस पहुंचे। मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) ने इस बड़े ड्रग्स केस की जांच के सिलसिले में ओरी को दूसरा समन जारी किया था। पहला समन 20 नवंबर को भेजा गया था, लेकिन ओरी ने बताया कि वह 25 नवंबर तक उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। इसके बाद एएनसी ने 21 नवंबर को दूसरा समन जारी कर उन्हें 26 नवंबर को घाटकोपर यूनिट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। ओरी बुधवार को समय पर वहां पहुंचे। इसके बाद उनका बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। ओरी के अलावा अभिनेता शक्ति कपूर के बेटे सिद्धांत कपूर को भी समन जारी किया गया। सिद्धांत 25 नवंबर को अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दोनों से संबंधित जानकारी मुख्य आरोपी के बयानों में सामने आई थी। 252 करोड़ रुपए की ड्रग्स का मामला पिछले साल मार्च से शुरू हुआ। महाराष्ट्र के सांगली जिले में पुलिस ने मेफेड्रोन ड्रग्स बनाने की एक अवैध फैक्ट्री पकड़ी थी। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी कीमत विदेशी बाजार में करीब 252 करोड़ रुपए थी। जांच में पता चला कि फैक्ट्री मालिक मुख्य आरोपी सुहैल शेख और ताहिर डोला हैं। ये दोनों भारत और विदेशों में रेव पार्टियां आयोजित करते थे। इन पार्टियों में यही मेफेड्रोन और दूसरे नशीले पदार्थ सप्लाई किए जाते थे। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क को ढूंढने में जुटी है।

प्रकृति का कहर: अचानक आई बाढ़-भूस्खलन में इंडोनेशिया में 13 लोगों ने गंवाई जान

जकार्ता इंडोनेशिया में बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई है। जानकारी के अनुसार, इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा के सात इलाकों और शहरों में बाढ़ और लैंडस्लाइड से 13 लोगों की मौत हो गई है। प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (बीपीबीडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बीपीबीडी के हवाले से बताया कि उत्तरी सुमात्रा में इमरजेंसी हैंडलिंग, इक्विपमेंट और लॉजिस्टिक्स के हेड वाह्युनी पंचसिलावती ने बताया कि मृतकों में दक्षिणी तपनौली रीजेंसी में नौ और केंद्रीय तपनौली रीजेंसी में चार लोग शामिल हैं। सिन्हुआ के अनुसार 22 से 25 नवंबर तक लगातार भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर आ गईं। इसकी वजह से सेंट्रल तपनौली, सिबोल्गा, मंडेलिंग नटाल, साउथ तपनौली, उत्तरी तपनौली, दक्षिणी नियास और पदांगसिडिम्पुआन में बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं हुई हैं। सिन्हुआ ने अधिकारी के हवाले से बताया कि दक्षिण तपनौली में 37 लोग घायल हुए और तीन लोग लापता हैं, जबकि केंद्रीय तपनौली में नुकसान का डेटा अभी इकट्ठा किया जा रहा है। इन आपदाओं से सैकड़ों घरों, स्कूलों और पब्लिक जगहों को भी नुकसान हुआ और हजारों लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ रहा है। इससे पहले सिन्हुआ ने जानकारी दी थी कि उत्तरी सुमात्रा में लैंडस्लाइड और अचानक आई बाढ़ में चार लोगों की मौत हो गई और 34 लोग घायल हो गए। इसे लेकर प्रांतीय डिजास्टर मैनेजमेंट और मिटिगेशन एजेंसी के हेड तुहता रामाजया सारागिह ने कहा कि मंगलवार को केंद्रीय तपनौली रीजेंसी के एक गांव में भारी बारिश की वजह से लैंडस्लाइड हुआ, जिससे एक घर तबाह हो गया और उसमें रहने वाले चार लोगों की मौत हो गई। उन्होंने फोन पर सिन्हुआ को बताया, "चारों लाशों को मौके से निकाल लिया गया है।" इसके अलावा, अधिकारी के मुताबिक, भारी बारिश के बाद दो नदियों में पानी बढ़ जाने से बटांग टोरू सब-डिस्ट्रिक्ट के कुछ हिस्से अचानक आई बाढ़ में डूब गए, जिससे 34 लोग घायल हो गए। सारागिह ने आगे कहा कि अचानक आई बाढ़ के बाद सभी पीड़ितों को निकाल लिया गया है, और अधिकारियों ने एक फूड एड सेंटर बनाया है।

ट्रेनों में हलाल मीट परोसने की शिकायत पर NHRC सख्त, रेलवे से मांगा जवाब

नई दिल्ली  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हाल ही में रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उस शिकायत पर की गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन में केवल हलाल प्रमाणित मांस का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग ने प्रथमदृष्टया इस प्रथा को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कनूंगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने कहा कि रेलवे में केवल हलाल मांस के प्रयोग का चलन न केवल भोजन विकल्पों को सीमित करता है, बल्कि यह कुछ समुदायों की आजीविका पर भी प्रभाव डालता है। पीठ ने कहा कि इससे विशेष रूप से उन अनुसूचित जाति के हिंदू समुदायों और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के हित प्रभावित होते हैं, जो परंपरागत रूप से मांस व्यापार से जुड़े हैं। एनएचआरसी के नोटिस में कहा गया है- शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे प्रतीत होते हैं, क्योंकि केवल हलाल मांस बेचने की प्रथा हिंदू एससी समुदायों, अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही, सरकारी एजेंसी के रूप में रेलवे को सभी धार्मिक आस्थाओं से जुड़े लोगों के भोजन के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, जो भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप है। भोजन विकल्पों में भेदभाव का आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रेलवे की यह नीति अनुचित भेदभाव पैदा करती है, क्योंकि इससे वे समुदाय प्रभावित होते हैं जिनकी धार्मिक मान्यताओं में हलाल मांस स्वीकार्य नहीं है। शिकायत में कहा गया कि हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन विकल्प नहीं मिलते। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव-निषेध), 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है। एनएचआरसी ने 12(ए) के तहत लिया संज्ञान आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। आगे क्या? इस मामले पर अब रेलवे बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि ट्रेनों में मांस की खरीद और प्रमाणन संबंधी नीति क्या है, क्या खाने में विविध विकल्पों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है और क्या केवल हलाल मांस पर निर्भरता वास्तव में भेदभाव या आजीविका पर प्रभाव डालती है।

चुनाव आयोग का सख्त रुख: SC में बोला— SIR को लेकर राजनीतिक दल अनावश्यक भय फैला रहे

नई दिल्ली  चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बिहार, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक दल अनुचित भय और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में SIR की वैधता को चुनौती दी गई है और कुछ पक्षों ने इसे स्थगित करने की मांग की है।   केरल सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के समानांतर SIR चलाने से प्रशासन पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की याचिकाएं: अलग-अलग तारीखें तय सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की भी तारीखें तय की हैं-     तमिलनाडु SIR पर सुनवाई- 4 दिसंबर     पश्चिम बंगाल SIR पर सुनवाई- 9 दिसंबर वाम दल और IUML नेता भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट केरल सरकार के अलावा, CPI(M), CPI, और IUML नेता पी.के. कुन्हलिकुट्टी ने भी SIR की वैधता को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। इन पर अदालत ने 21 नवंबर को नोटिस जारी किया था। बिहार से शुरू हुआ था विवाद ECI ने जून 2025 में सबसे पहले बिहार में SIR शुरू करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, लेकिन अदालत ने प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, जिसके चलते बिहार में SIR पूरा हो चुका है। इसके बावजूद, 27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने SIR का दायरा बढ़ाते हुए इसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल सहित कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी SIR को कानूनी चुनौती दी गई, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को नोटिस जारी किया था। ECI का रुख: कोई तात्कालिक खतरा नहीं सुप्रीम कोर्ट में ECI ने कहा कि SIR एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग ने यह भी तर्क दिया कि राजनीतिक दल तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित कर रहे हैं और इससे मतदाताओं के बीच अनावश्यक भय पैदा हो रहा है।