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अब नहीं चलेगा ORS नाम वाला जूस! फ्रूट ड्रिंक्स पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली  खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उन सभी फ्रूट-बेस्ड ड्रिंक्स, रेडी-टू-सर्व बेवरेज, एनर्जी ड्रिंक्स और इलेक्ट्रोलाइट पेयों पर शिकंजा कस दिया है, जिनके नाम में ‘ORS’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है। अथॉरिटी ने जारी आदेश में ऐसे सभी उत्पादों को तुरंत बाजार से हटाने का निर्देश दिया है। पहले ही रोक थी, फिर भी चल रही थी बिक्री FSSAI ने कहा कि कई कंपनियां रिटेल स्टोर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऐसे ड्रिंक्स बेच रही थीं, जबकि 14 अक्टूबर के आदेश और 15 अक्टूबर की स्पष्टीकरण में ‘ORS’ शब्द के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है। किसी भी फूड प्रोडक्ट—चाहे वह जूस हो, नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक हो या रेडी-टू-ड्रिंक—को अपने नाम में ‘ORS’ रखने की अनुमति नहीं है। FSSAI ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 का सीधा उल्लंघन है।   तुरंत निरीक्षण के आदेश अथॉरिटी ने अपने अधिकारियों को देशभर में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल दुकानों पर तत्काल जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया है। लक्ष्य उन सभी गैर-अनुपालन उत्पादों की पहचान करना जो ‘ORS’ शब्द का गलत उपयोग कर रहे हैं। उल्लंघन मिलने पर: ऐसे उत्पादों को तुरंत बिक्री से हटाया जाए संबंधित कंपनियों पर नियामकीय कार्रवाई की जाए पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट FSSAI को भेजी जाए साथ ही FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया कि WHO द्वारा अनुशंसित असली ORS दवा उत्पादों के वितरण या बिक्री में किसी भी तरह की बाधा न आए। गलत लेबलिंग पर सख्त कार्रवाई अथॉरिटी ने कहा कि यह कार्रवाई केवल उन फूड प्रोडक्ट्स पर केंद्रित होगी जो ORS नाम का दुरुपयोग कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट का भी समर्थन बीते 31 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी FSSAI के इस प्रतिबंध में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि नकली या भ्रामक ORS लेबल वाले उत्पाद सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए व्यापारिक हितों से पहले जनता की सेहत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मामला Dr. Reddy's Laboratories की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें कंपनी ने ORS नाम वाले अपने पेयों पर लगी रोक को चुनौती दी थी।   सिर्फ WHO-स्टैंडर्ड वाले ORS को मंजूरी FSSAI का कहना है कि ‘ORS’ शब्द सिर्फ उन्हीं फॉर्मूलेशन के लिए मान्य है जो WHO द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और चिकित्सकीय उपयोग के लिए स्वीकृत हों—बेवरेज मार्केटिंग के लिए नहीं।

राष्ट्रपति–राज्यपाल विवाद पर SC का फैसला, CM स्टालिन का तीखा बयान — क्या कहा?

तमिलनाडु  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय को लेकर शुक्रवार को कहा कि राज्य के अधिकारों और वास्तविक संघीय ढांचे के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। स्टालिन का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आया है जिसमें उसने कहा था कि अदालत राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर कोई समयसीमा नहीं थोप सकती, लेकिन राज्यपालों के पास विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखने की “असीम” शक्तियां भी नहीं हैं।   राष्ट्रपति द्वारा इस विषय पर सलाह मांगे जाने पर, सीजेआई बी. आर. गवई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपनी सर्वसम्मति वाली राय में कहा कि राज्यपालों द्वारा “अनिश्चितकालीन विलंब” की सीमित न्यायिक समीक्षा का विकल्प खुला रहेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि राज्यपालों के पास लंबित विधेयकों की मंजूरी के लिए समयसीमा तय करने के वास्ते संविधान में संशोधन होने तक उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की यह राय तमिलनाडु बनाम राज्यपाल मामले में अप्रैल 2025 में दिए गए फैसले को प्रभावित नहीं करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की राय इस बात की पुष्टि करती है कि राज्य में निर्वाचित सरकार ही मुख्य भूमिका में होनी चाहिए और सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि न्यायालय की राय स्पष्ट करती है कि राज्यपाल किसी विधेयक पर फैसला लेने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकते और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान की मर्यादाओं में रहकर ही काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यपाल के पास किसी विधेयक को रद्द करने या ‘पॉकेट वीटो’ लगाने जैसा कोई चौथा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अदालत का रुख कर सकती हैं और राज्यपाल की जानबूझकर की गई देरी या निर्णय न लेने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहरा सकती हैं। स्टालिन ने 1974 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह परामर्श उतना ही प्रभावी है जितनी कानून अधिकारियों की राय होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी लड़ाई के जरिए “हमने उन राज्यपालों को भी सरकार के अनुरूप काम करने पर मजबूर किया, जो निर्वााचित सरकारों से अलग कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा, “कोई भी संवैधानिक अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।” स्टालिन ने कहा, “जब कोई उच्च पद धारी संविधान का उल्लंघन करता है, तो संवैधानिक न्यायालय ही एकमात्र उपाय होते हैं। अदालतों के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।” मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सुनिश्चित करेंगे कि हर संवैधानिक संस्थान संविधान के अनुसार ही काम करे।” उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर राज्यपाल के ‘पॉकेट वीटो’ के सिद्धांत और यह दावा खारिज कर दिया है कि राजभवन किसी विधेयक को रोककर रद्द कर सकता है  

लाल किला धमाका केस में नया मोड़: फरीदाबाद से मिली आतंकियों की खतरनाक मशीन

नई दिल्ली/फरीदाबाद लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में आतंकियों की 'बम बनाने वाली मशीन' बरामद की गई है। धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल ने आटा पीसने वाली चक्की को केमिकल वर्कशॉप में बदल दिया था। फरीदाबाद के एक टैक्सी ड्राइवर के घर से इन मशीनों को बरामद किया गया है, जिनका इस्तेमाल बम के लिए सामग्री तैयार करने में किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल शकील गनई एक आटा चक्की का इस्तेमाल विस्फोटकों के लिए केमिकल तैयार करने में करता था। आटा चक्की, ग्राइंडर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि एक टैक्सी ड्राइवर के घर से इन सामानों को बरामद किया गया है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाले गई को लाल किले धमाके से ठीक पहले गिरफ्तार किया गया था। वह इन मशीनों का इस्तेमाल अपने किराये के कमरे में किया करता था, जहां से पुलिस ने 9 नवंबर को 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फटकों को बरामद किया था। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल आटा चक्की का इस्तेमाल यूरिया पीसने और केमिकल तैयार करने के लिए करता था। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर रहे गनई ने पूछताछ में बताया है कि वह लंबे समय से इन मशीनों का इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने में कर रहा था। वह पहले मशीनों को यह कहते हुए ड्राइवर के घर ले गया कि यह उसकी बहन की शादी के लिए तोहफा है। बाद में वह उन्हें अपने किराये वाले घर में ले गया। एनआईए की टीम ने टैक्सी ड्राइवर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। ड्राइवर ने बताया कि गनई से उसकी मुलाकात पहली बार तब हुई जब वह चार साल पहले अपने बेटे को इलाज के लिए अल-फलाह मेडिकल कॉलेज ले गया। गनई और उसके साथ गिरफ्तार दो अन्य डॉक्टर शाहीन सईद और अदील अहमद राथर भी यहीं डॉक्टर थे। लाल किले के पास धमाका करने वाला उमर नबी भी अल फलाह का ही डॉक्टर था।  

तालिबान मंत्री का US पर निशाना: कहा- भारत ने रोके अरबों डॉलर, अब अफगानिस्तान शुरू करेगा कार्गो फ्लाइट

नई दिल्ली  अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री अल-हज नूरुद्दीन अजीजी ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान अमेरिका पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए अफगानिस्तान के लगभग 9 अरब डॉलर के विदेशी भंडार को तत्काल लौटाने की मांग की। साथ ही उन्होंने अमेरिका से मांग करते हुए कहा कि वह भारत के आधीन ईरानी चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंधों से छूट दे। अजीजी ने कहा- अमेरिका ने हमारे 9 अरब डॉलर वापस नहीं किए हैं, पाकिस्तान के साथ बॉर्डर बंद है और जब हम म के रास्ते नया रास्ता ढूंढते हैं, तो वे बैन लगा देते हैं। चाबहार के लिए बैन में छूट मिलनी चाहिए। भारत-अफगनिस्तान के लिए जरूरी है पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार पोर्ट भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है। क्योंकि यह पाकिस्तान के रास्ते से पूरी तरह बचता है। भारत ने 2016 में ईरान और अफगानिस्तान के साथ त्रिपक्षीय समझौते के तहत शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को विकसित करने के लिए 500 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है और 2024-25 तक भारत पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने 120 मिलियन डॉलर अतिरिक्त निवेश की घोषणा भी की है। इस पोर्ट के जरिए भारत अफगानिस्तान को गेहूं, दालें, दवाइयां और मशीनरी जैसी जरूरी वस्तें भेजता है, जबकि अफगानिस्तान से सूखे मेवे (बादाम, पिस्ता, अंजीर), कालीन और लैपिस लाजुली जैसे उत्पाद भारत आते हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच कार्गो फ्लाइट की घोषणा भारत और अफगानिस्तान के बीच हवाई माल ढुलाई यानी कार्गो फ्लाइट सेवाएं बहुत जल्द शुरू होंगी। भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के व्यापार मंत्री अल-हज नूरुद्दीन अजीजी की भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश ने कहा- मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि काबुल-दिल्ली और काबुल-अमृतसर मार्गों पर हवाई माल ढुलाई गलियारा सक्रिय हो गया है। इन क्षेत्रों पर मालवाहक उड़ानें बहुत जल्द शुरू होंगी। उन्होंने कहा कि इससे उनके बीच संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा हमारे व्यापारिक एवं वाणिज्यिक संबंध और मजबूत होंगे।’’ अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार सहयोग की निगरानी और समर्थन के लिए एक-दूसरे के दूतावास में एक व्यापार अताशे की नियुक्ति पर भी बृहस्पतिवार को सहमत हुए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व्यापार, वाणिज्य एवं निवेश पर संयुक्त कार्य समूह को पुनः सक्रिय किया जाएगा। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव ने कहा- द्विपक्षीय व्यापार लगभग एक अरब डॉलर का है। हालांकि, इसमें और वृद्धि की पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। इस संदर्भ में हमने व्यापार, वाणिज्य और निवेश पर संयुक्त कार्य समूह को पुनः सक्रिय करने का निर्णय लिया है। इस विशेष संयुक्त कार्य समूह की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत एवं अफगानिस्तान व्यवसायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।

संजौली चौक पर प्रदर्शन, मस्जिद में पढ़ी गई नमाज; सुक्खू सरकार ने हिंदू संगठनों की बात मानी

शिमला हिमाचल प्रदेश में शिमला के संजौली में मस्जिद को लेकर विवाद फिर बढ़ गया. दो दिन से देवभूमि संघर्ष समिति के सदस्य अनशन पर बैठे थे. संगठन ने कल संजौली में बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी. समिति के लोगों ने कहा कि प्रशासन ने अभी तक उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया, जिसके बाद अनशन खत्म हो गया. अब इस मामले को लेकर 29 नवंबर को मीटिंग होनी है. हिमाचल प्रदेश के शिमला के संजौली में एक बार फिर से हिंदू संगठनों ने अवैध मस्जिद के विरोध में प्रदर्शन किया. हिंदू समाज के लोग अवैध मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने का विरोध कर रहे थे. हालांकि, पुलिस और प्रशासन के बीच प्रदर्शनकारियों की बीती रात को वार्ता हुई औऱ मांगों पर सहमति बन गई. हालांकि लिखित में आश्वासन ना मिलने के बाद असमंजस की स्थिति बनी रही. उधर, मस्जिद में शुक्रवार को लोगो की आवाजाही होती रही और चर्चाएं हैं कि यहां नमाज पढ़ी गई. हालांकि, मौलवी ने इंकार किया है. दरअसल, हिंदू संघर्ष समिति ने संजौली में शुक्रवार को प्रदर्शन का ऐलान किया था. इस दौरान सुबह तो संजौली में अधिक हलचल नहीं दिखी. लेकिन बाद में संजौली थाने के बाद चल पर आमरण अनशन में प्रदर्शनकारी पहुंचे. इस दौरान लगातार भूखहड़ताल पर बैठे विजय शर्मा की तबीयत खऱाब हो गई और उन्हें फिर आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. उधर, प्रदर्शनकारी प्रशासन की ओर से लिखित में मांगें मानने का इंतजार करते रहे. 50 के करीब प्रदर्शनकारियों ने संजौली थाने के बाहर ही खाना खाया औऱ फिर नारेबाजी शुरू कर दी. आश्वासन मिलने के बाद खत्म किया अनशन हिंदू संघर्ष समिति और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की जॉइंट कमेटी बनाई गई है. इस मामले में अगली मीटिंग 29 नवंबर को होगी. आमरण अनशन पर बैठे लोगों ने एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसे के बाद अनशन तोड़ दिया है. हिंदू संघर्ष समिति के कमल गौतम ने कहा कि हमें एडमिनिस्ट्रेशन से भरोसा मिला है. एक कमेटी बन गई है और अब अगली मीटिंग 29 नवंबर को होगी. तब तक हम मस्जिद की तरफ नहीं बढ़ेंगे और न ही प्रोटेस्ट करेंगे. हम इस मस्जिद का बिजली और पानी का कनेक्शन कटवाने और ढांचे को गिराने की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. हिंदू लोगों की बनेगी कमेटी हिंदू रक्षा मंच के अध्यक्ष कमल गौतम ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई बातचीत पूरी तरह सकारात्मक रही. प्रशासन ने सभी मांगें सुनी हैं और उन्हें लागू करने के लिए प्रशासन और हिंदू संघर्ष समिति की संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी. इस कमेटी की बैठक 29 तारीख को होगी. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि तीन मुख्य मांगों पर कार्रवाई की जाएगी और सभी विषयों पर सहमति बन गई है. इन्हें जल्द पूरा करने का भरोसा दिया गया है. उन्होंने कहा कि आज आमरण अनशन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन क्रमिक अनशन जारी रहेगा, प्रदर्शन स्थल पर लोग फिलहाल बैठे रहेंगे, जब तक कि निर्णायक निर्णय नहीं आ जाता. कमल गौतम ने बताया कि 29 तारीख की बैठक पहली और अंतिम होगी. कुछ निर्णय पहले ही लागू किए जाएंगे, जिन पर अभी चर्चा संभव नहीं है. ये थी प्रदर्शनकारियों की मांगें दरअसल, हाल ही में नमाज पढ़ने से रोका था. इस पर छह लोगों पर केस दर्ज किया था. प्रदर्शनकारियों की  मुख्य मांगों में अवैध ढांचों को बिजली-पानी सप्लाई काटना, लोगों पर दर्ज की गई झूठी FIR को तुरंत निरस्त करना और कोर्ट द्वारा अवैध निर्माण हटाने के आदेश को जल्द लागू करना शामिल है. उन्होंने कहा कि प्रशासन का रुख सकारात्मक रहा और जल्द कार्रवाई की उम्मीद है. मस्जिद में होती रही नमाज उधर, हिंदू संगठन के लोग मस्जिद से करीब 100 मीटर दूर संजौली थाने के पास प्रदर्शन करते रह गए. वहींस संजौली मस्जिद में जुमे की नमाज होती रही. मुस्लिम लोगों का यहां पर आना जाना लगा रहा.  मस्जिद के मौलवी ने कहा कि प्रशासन या पुलिस की तरफ से उन्हें को निर्देश नहीं मिला था. अब सिलसिलेवार पढ़े क्या है पूरा मामला…     2 गुटों में लड़ाई से सुर्खियों में आया था मामला: बीते साल 31 अगस्त को शिमला के मैहली में 2 गुटों में लड़ाई के बाद सुर्खियों में आया। इसके बाद, पूरे प्रदेश में बवाल मचा। मारपीट करने वाले एक समुदाय के लोग संजौली मस्जिद में छिप गए। इससे गुस्साए लोगों ने 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद शिमला के अन्य स्थानों पर भी हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। शिमला के बाद प्रदेश के अलग- अलग क्षेत्रों में भी लोग सड़कों पर उतरे।     11 सितंबर 2024 को संजौली में उग्र प्रदर्शन: 11 सितंबर को शिमला के संजौली में फिर उग्र प्रदर्शन हुआ। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने बल प्रयोग और पानी की बौछार की। इससे हिंदू संगठन भड़क गए। संजौली में मस्जिद तोड़ने की मांग उठने लगी। इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम कमिश्नर कोर्ट पहुंची और अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। इसके बाद मामला शांत हुआ।     निगम आयुक्त ने पहले तीन मंजिल तोड़ने के आदेश दिए: बीते साल 5 अक्टूबर को निगम आयुक्त ने मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिल तोड़ने के आदेश दिए। इसके बाद, मस्जिद को तोड़ने का काम शुरू हुआ। ऊपर की दो मंजिल तोड़ दी गई।     इस साल 3 मई को पूरी मस्जिद गिराने के आदेश: 3 मई 2025 को निगम आयुक्त ने पूरी मस्जिद को अवैध करार देते हुए पूरा ढांचा तोड़ने के आदेश दिए। 17 मई 2025 को वक्फ बोर्ड और संजौली मस्जिद कमेटी ने मस्जिद तोड़ने के नगर निगम आयुक्त के आदेशों को जिला अदालत में चुनौती दी। 30 अक्टूबर को जिला अदालत ने वक्फ बोर्ड और संजौली मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज किया और नगर निगम आयुक्त के आदेशों को सही ठहराया।     14 नवंबर को मुस्लिमों को मस्जिद जाने से रोका: बीते 14 नवंबर को मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे। मगर देवभूमि संघर्ष समिति ने बाहरी राज्यों से आए मुस्लिमों को मस्जिद में जाने से रोका। इस पर पुलिस ने छह लोगों पर … Read 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CJI गवई का विदाई उपहार: न्यायालय में सुविधा बढ़ाने वाला नया सिस्टम लॉन्च

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई 23 नवंबर को अपने पद से सेवानिवृत हो रहे हैं। आज (शुक्रवार को) उनका अंतिम कार्य दिवस है। इसलिए उनके सम्मान में सेरिमोनियल बेंच का आयोजन किया गया, जिसमें साथी जजों, अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल से लेकर अन्य कानूनविदों और वकीलों ने उनके सेवाकाल की तारीफ की और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। इससे पहले जस्टिस गवई ने गुरुवार को वकीलों और केस लड़ने वालों यानी वादियों को बड़ा तोहफा दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल का नया वर्जन लॉन्च किया। इस पोर्टल के जरिए वकील ऑनलाइन भी पेश हो सकेंगे। CJI गवई ने गुरुवार की सुबह के सेशन में पायलट बेसिस पर शुरू किए गए इस नए वर्जन के लॉन्च की घोषणा की। CJI ने जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस के विनोद चंद्रन के साथ बैठकर यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि नया सिस्टम कई डिजिटल सर्विसेज को एक इंटरफेस में मिला देगा। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म एक ही लॉग-इन के जरिए हाइब्रिड ऑप्शन के साथ ई-फाइलिंग, सर्टिफाइड कॉपी और फिजिकल हियरिंग की भी सुविधा देता है। मौजूदा फाइलिंग सिस्टम नए सिस्टम के साथ काम करता रहेगा लाइव लॉ के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इसे धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा ताकि कोर्ट धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ा सके। CJI गवई ने कहा कि इस बदलाव के दौरान मौजूदा फाइलिंग सिस्टम नए सिस्टम के साथ काम करता रहेगा और साथ-साथ चलेगा। जस्टिस गवई के मुताबिक, यह पहल डिजिटल प्रक्रियाओं को आसान बनाने और एक ही फ्रेमवर्क में अलग-अलग ऑनलाइन सर्विसेज की एक्सेस बढ़ाने की कोर्ट की कोशिशों को दिखाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने की भी कोशिश उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि नई सिस्टम लॉन्च करने का मकसद वकीलों और केस लड़ने वालों यानी वादियों की सुविधा बढ़ाना है। उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट धीरे-धीरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने की भी कोशिश कर रहा है।  

एक बार फिर अदालत में चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

केरल केरल, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में मतदाता सूचियों के SIR के निर्वाचन आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इससे जुड़ी याचिकाओं के एक बैच पर एससी ने सुनवाई के लिए शुक्रवार को सहमति जताई। जज सूर्यकांत, जज एसवीएन भट्टी और जज जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न आधार पर एसआईआर की कवायद को चुनौती देने वाली विभिन्न नेताओं की सभी नई याचिकाओं पर आज सुनवाई की।   केरल में SIR को चुनौती देने वाले एक याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव भी होने हैं। इसलिए इस मामले में तत्काल विचार की आवश्यकता है। पीठ ने निर्देश दिया कि केरल में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 26 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। दूसरे राज्यों में इस कवायद को चुनौती देने वाली बाकी याचिकाओं पर दिसंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में सुनवाई होगी। फैसले की वैधता को चुनौती शीर्ष अदालत पहले ही पूरे भारत में SIR कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही है। उसने गत 11 नवंबर को द्रमुक, माकपा, पश्चिम बंगाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर आयोग से अलग-अलग जवाब मांगे थे। इन याचिकाओं में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के एसआईआर को चुनौती दी गई थी। SIR पर कांग्रेस के सवाल दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों का SIR आदिवासियों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने की सुनियोजित साजिश है। पार्टी के आदिवासी विभाग के प्रमुख विक्रांत भूरिया ने यह भी कहा कि आदिवासियों के लिए एक प्रवासन नीति बननी चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में सिविल जज परीक्षा-2022 के परिणाम को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक भी आदिवासी का चयन नहीं किया गया, जो आरक्षण खत्म करने का एक तरीका है।  

एयर शो हादसा: दुबई में तेजस फाइटर जेट जमीन पर क्रैश होकर जल उठा

दुबई दुबई एयर शो के दौरान ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान LCA तेजस अपनी डेमोंस्ट्रेशन फ्लाइट के दौरान अचानक क्रैश हो गया. यह घटना स्थानीय समय के अनुसार दोपहर के 2:10 बजे हुई, जब हजारों दर्शक विमान के करतब देख रहे थे.सबसे बुरी खबर है कि इस हादसे में पायलट की मौत हो गई है. भारतीय वायुसेना ने दुबई एयर शो के दौरान हुए तेजस विमान हादसे की जांच के आदेश दिए  विमान हवा में शानदार मोड़ ले रहा था, तभी अचानक उसने नियंत्रण खो दिया. कुछ ही सेकंड में तेजस नीचे झुकता दिखा और सीधा जमीन की ओर बढ़ गया. उसके टकराते ही जोरदार धमाका हुआ और अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ऊपर काले धुएं का गुबार उठ गया.  सबसे बड़ी चिंता पायलट की स्थिति को लेकर बनी हुई है. यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने समय रहते इजेक्ट किया या नहीं. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस जानकारी की पुष्टि की जा रही है. दुबई एयर शो दुनिया के प्रमुख एविएशन आयोजनों में से एक है, जहां दुनियाभर की एयरलाइंस और सैन्य उत्पादक अपनी तकनीक दिखाते हैं. इस हादसे से एयर शो की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं. आयोजन स्थल पर आपातकालीन दल तुरंत सक्रिय हुआ और विमानन अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है. एयर डिफेंस तकनीक और उड़ान से जुड़ी उन्नत खोजों का प्रदर्शन करते हैं. यही नहीं, बड़े-बड़े रक्षा सौदे, सहयोग समझौते और भविष्य की साझेदारियां भी इसी मंच पर तय होती हैं. IAF ने कहा है कि वह इस अपूरणीय क्षति पर गहरा शोक व्यक्त करती है और इस कठिन समय में पायलट के परिवार के साथ खड़ी है. वायुसेना ने हादसे के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन करने का फैसला लिया है. कब-कब क्रैश हो चुका है तेजस विमान? भारतीय वायुसेना का तेजस विमान दुबई के पहले अब तक बस एक और बार क्रैश हुआ है. साल 2024 में राजस्थान के जैसलमेर में तेजस क्रैश हुआ था. इस हादसे के पीछे इंजन फेल होने की वजह बताई गई. अच्छी बात ये रही थी कि दुर्घटना के दौरान पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकल गए.  तेजस विमान क्या है? भारतीय वायुसेना के तेजस विमान एक ऐसा लड़ाकू विमान है जिसे पूरी तरह भारत में बनाकर तैयार किया गया है. इसे हल्का और तेज़ बनाया गया है, ताकि हवा में ज्यादा फुर्ती से उड़ सके और साथ ही कई तरह के युद्ध के काम कर सके.  इसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने विकसित किया है. यह 4.5 पीढ़ी का विमान है, मतलब इसमें बहुत नई तकनीकें लगी हैं. तेजस छोटा और हल्का है, जिसे सुपरसोनिक यानि ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने वाला कहा जाता है.  Dubai Air Show 2025 बना ग्लोबल एविएशन फेस्ट दुबई एयर शो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली एयरोस्पेस आयोजनों में से एक है, लेकिन इसकी शुरुआत उतनी भव्य नहीं थी. 1986 में जब इसे “अरब एयर” के नाम से शुरू किया गया था, तब यह सिर्फ एक छोटा-सा नागरिक विमानन व्यापार मेला था. 1989 में पहली बार इसे दुबई एयरपोर्ट पर आयोजित किया गया, जहां केवल 200 प्रदर्शक और 25 विमान पहुंचे थे. किसी ने तब नहीं सोचा था कि यही आयोजन आगे चलकर दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल एयरोस्पेस शो बनेगा. 2025 का दुबई एयर शो इस विकास का सबसे शानदार उदाहरण रहा. यह आयोजन 17 से 21 नवंबर तक दुबई वर्ल्ड सेंटर में हुआ और इसमें दुनिया का लगभग पूरा एयरोस्पेस उद्योग एक ही जगह इकट्ठा होता दिखा. शो में 1,500 से अधिक प्रदर्शक शामिल हुए, 200 से ज्यादा उन्नत विमान पेश किए गए और 115 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे. खास बात यह रही कि इस बार 440 नए प्रतिभागियों ने भी अपनी तकनीकें प्रदर्शित कीं. साथ ही, 12 बड़े सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें रक्षा, एयरोस्पेस, अनुसंधान, नई तकनीकों और भविष्य की विमानन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. दुबई एयर शो का महत्व क्यों बढ़ रहा है? इस आयोजन को आज दुनिया के रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जाता है. यहां देश अपने नए लड़ाकू विमान, ड्रोन, हेलीकॉप्टर, मिसाइल प्रणाली, एयर डिफेंस तकनीक और उड़ान से जुड़ी उन्नत खोजों का प्रदर्शन करते हैं. यही नहीं, बड़े-बड़े रक्षा सौदे, सहयोग समझौते और भविष्य की साझेदारियां भी इसी मंच पर तय होती हैं. दुबई एयर शो सिर्फ तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने वाला एक विशाल पुल है – जहां विचार भी उड़ान भरते हैं और भविष्य की रणनीतिक दिशा भी तय होती है. हादसा 2 बजकर 10 मिनट के आस-पास बताया जा रहा है. विमान हादसा क्यों हुआ? कैसे हुआ? इसको लेकर अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. पायलट भी विमान हादसे से पहले विमान से बाहर निकला या नहीं इसकी भी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है. लेकिन जैसे ही विमान जमीन से टकराया वैसे ही आग के बड़े गोले में तब्दील हो गया. इसका धुआं भी उठता हुआ देखा जा सकता है. 

डोनाल्ड ट्रंप की पहल: हमास से छूटे यहूदियों का किया सम्मान, दी भावनात्मक सौगात

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद से छूटे इजरायलियों से मुलाकात की है। वाइट हाउस में ही इन लोगों को बुलाया गया था और डोनाल्ड ट्रंप ने इनसे सीधी बात करते हुए कहा कि अब आप लोग बंधक नहीं हैं बल्कि आजाद हैं। आप लोग हमारे हीरो हैं। ट्रंप से मिलने आए पूर्व बंधकों में कुल 26 लोग शामिल थे, जिनमें से 17 तो वे हैं, जिन्हें अक्तूबर में ही हमास ने अपनी कैद से एक डील के तहत रिहा किया था। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद में रहे मैटन अंगरेस्ट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अंगरेस्ट ने हमास की कैद में रहते हुए भी बड़ी बहादुरी दिखाई और हिम्मत से काम लिया। उन्होंने कहा कि मैटन को कई बार पीटा गया।   इतनी पिटाई हुई कि वे बेहोश तक हो जाते थे। वह सबसे अलग कैद में रख गए थे और ऐसा वक्त उनके लिए बेहद खराब गुजरा था, फिर भी वह मजबूती से डटे रहे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज का मैटन हिस्सा रहे थे और हमास के आतंकियों ने उन्हें इसी बात की सजा दी थी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'तमाम अत्याचारों के बाद भी मैटन टूटे नहीं। आज वह हमारे बीच हैं और हमास के अत्याचारों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैटन इस बात के प्रतीक हैं कि यहूदी कितने बहादुर और मजबूत दिल के होते हैं। आप हम सभी एक लिए एक प्रेरणा की तरह हैं।' डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद से छूटे लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारे लिए सम्मान की बात है कि आपसे बात हो रही है। मैं आपमें से कुछ लोगों को पहले से ही जानता हूं। कुछ लोगों से अब परिचय हो रहा है। मैं आप लोगों से बात कर रहा हूं। आप लोग शानदार हैं और देश से प्यार करने वाले हैं। इस दौरान ट्रंप ने हर बंधक से बात की और उन्हें एक विशेष सिक्के से भी नवाजा गया। ये लोग राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सम्मान के तौर पर कुछ गिफ्ट भी लेकर आए थे। इस दौरान दो जुड़वा भाई गली और जिव बर्मन भी मौजूद थे। ये लोग हमास की ओर से 7 अक्तूबर 2023 को लगाई गई आग से बच निकले थे। लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बाद ये लोग अस्पताल से 13 अक्तूबर को ही डिस्चार्ज हुए थे। इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप दो बार हमास की कैद से छूटे लोगों से मुलाकातें कर चुके हैं। बता दें कि हमास की कैद से लोगों को छुड़वाने का श्रेय भी डोनाल्ड ट्रंप लेते रहे हैं।  

तालिबान-पाकिस्तान टकराव बढ़ा: इस्लामाबाद की कड़ी चेतावनी, बैकडोर साजिशों से बढ़ी हलचल

इस्लामाबाद  अफगानिस्तान से तनाव के बीच अब पाकिस्तान तालिबान को सत्ता परिवर्तन की गीदड़भभकी देने लगा है। पाकिस्तान ने कहा है कि अगर अफगानिस्तान सुलह के रास्ते पर नहीं आता और सुरक्षा से संबंधित उसकी सारी मांगें नहीं मानता है तो वह सत्ता परिवर्तन के लिए तैयार रहे। पाकिस्तान ने कहा है कि काबुल में सत्ता को चुनौती देने वाली ताकत का वह समर्थन करेंगा।   सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने वाले तुर्की के अधिकारियों के माध्यम से तालिबान को यह धमकी दी है। बता दें कि पाकिस्तान कहता है कि अफगान धरती पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जगह ना दी जाए। वहीं अफगानिस्तान पहले ही टीटीपी से किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर चुका है। अफगानिस्तान का कहना है कि वह अपनी धऱती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होने देता है। इसीलिए किसी भी तरह के लिखित समझौते पर अफगानिस्तान ने हस्ताक्षर नहीं किए। पूर्व राष्ट्रपतियों से संपर्क साधने लगा पाक? पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान को रुख उसके लिए खतरा बन गया है। शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तान की खुफइया एजेंसियां अब अफगान की पूर्व सरकार के नेताओं से संपर्क साधने लगी हैं। इनमें पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजाई, अशरफ गनी, अहमद मसूद जैसे नेता शामिल हं। इसके अलावा अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट और नॉर्दर्न अलायंस के अब्दुल राशिद दोस्तम से भी संपर्क साधा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने इन नेताओं को पनाह देने का वादा किया है ताकि वे पाकिस्तान की धऱती से अफगानिस्तान की सत्ता परिवर्तन को हवा दे सकें। क्या है पाकिस्तान की मांग बता दें कि तुर्की और कतर की मध्यस्थता में तीन बार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वार्ता हो चुकी है। हालांकि इसका कोई परिणाम नहीं निकला। इस्लामाबाद की मांग है कि तालिबान टीटीपी पर सख्त ऐक्शन ले और टीटीपी के आतंकियों को उसके हवाले कर दे। इसके अलावा टूरंड लाइन पर बफर जोन बनाया जाए। इसी बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने गैर-कानूनी अफगान निवासियों पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, और सिर्फ इस महीने में ही 6,000 से ज़्यादा लोगों को अफगानिस्तान वापस भेज दिया। एक मंत्री ने यह जानकारी दी। पंजाब सरकार ने उन पाकिस्तानियों को ‘‘नकद इनाम’’ भी दिया है, जिन्होंने 13 करोड़ की आबादी वाले इस प्रांत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे अफगानों के बारे में जानकारी दी।