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‘कुछ तो गलत है’—SC ने मद्रास हाई कोर्ट की कार्यवाही पर जताई गंभीर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की लिस्टिंग और सुनवाई में अपनाए जा रहे नियमों पर मद्रास हाई कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने करूर भगदड़ के बाद हाई कोर्ट की भूमिका पर अपनी जांच तेज कर दी है और कहा है कि जिस तरह से हाई कोर्ट ने इस त्रासदी से जुड़े मामलों को संभाला, उसमें कुछ गड़बड़ है। इस घटना में एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान 41 लोगों की जान चली गई थी।   जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सब्मिट की गई एक रिपोर्ट की जांच करने के बाद यह टिप्पणी की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया था कि करूर मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आने के बावजूद हाई कोर्ट की चेन्नई बेंच ने इस मामले को कैसे हैंडल किया। रिपोर्ट को पार्टियों के बीच सर्कुलेट करने का आदेश दिया गया, और बेंच ने उनसे जवाब मांगा। रजिस्ट्रार जनरल की एक्सप्लेनेशन को देखने के बाद, बेंच ने कमेंट किया: "हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है। यह सही बात नहीं है जो हाई कोर्ट में हो रही है… रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई सवाल उठाए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि चेन्नई बेंच ने करूर से जुड़े मामले में दखल क्यों दिया, उसने एक ऐसी याचिका पर पूरी तरह से तमिलनाडु पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कैसे किया, जिसमें सिर्फ राजनीतिक रैलियों के लिए गाइडलाइंस मांगी गई थीं और हाई कोर्ट की दो बेंचों से विरोधाभासी आदेश क्यों आए, जबकि मदुरै बेंच ने उसी दिन जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर करने से मना कर दिया था। तमिलनाडु की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी. विल्सन ने कोर्ट से कहा, "हमारे हाई कोर्ट में, जो भी मामला कोर्ट के सामने आता है, उससे जुड़ी हर बात पर वे आदेश देते हैं…" इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने जवाब दिया, "अगर कोई प्रैक्टिस गलत है।" बेंच ने 13 अक्टूबर के अपने आदेश के एक हिस्से में बदलाव करने की मौखिक रिक्वेस्ट को भी ठुकरा दिया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय समिति करेगी। आदेश के अनुसार, जस्टिस रस्तोगी को तमिलनाडु कैडर के दो सीनियर आईपीएस अधिकारियों को चुनना होगा जो उस राज्य के मूल निवासी न हों।  

ट्रंप का बड़ा भू-राजनीतिक दांव: कोर-5 प्लान से साथ बैठेंगे भारत, चीन, रूस और जापान

वाशिंगटन  अमेरिका अर्थव्यवस्था के मानदंडों को छोड़कर अब ऐसे देशों को साथ लाना चाहता है जिनकी आबादी ज्यादा है। इस ग्रुप को 'कोर-5' या 'सी-5' नाम दिया गया है। इस तरह का ग्रुप बनाने का उद्देश्य भारत, चीन, रूस और जापान को एक साथ लाना है। हालांकि मौजूदा परिदृश्य को देखें तो यह पानी में घी मिलाने जैसा काम है। एक तरफ भारत और चीन का 36 का आंकड़ा है तो दूसरी तरफ चीन और जापान भी प्रतिद्वंद्वी हैं। रूस और अमेरिकी की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से करीबी बढ़ाने के लिए पहल जरूर की है।   जानकारों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि ऐसे देशों का संगठन हो जो कि सेना और जनसंख्या के स्तर पर मजबूत हों। अमेरिका के प्रकाशन पॉलिटिको ने 12 दिसंबर को एक आर्टिकल में कहा कि अमेरिका को जी-7 और जी-20 जैसे फोरम नाकाफी लग रहे हैं। ऐसे में मल्टीपोलर दुनिया के लिए नए फोरम का विचार हो रहा है। इसकी पहली मीटिंग में ही मध्य एशिया में शांति स्थापित करने और इजरायल-सऊदी अरब के बीच रिश्ते सुधारने को लेकर चर्चा हो सकती है। कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप का अजेंडा यह है कि यूरोप आधारिक संगठनों को आगे बढ़ाने से अच्छा है कि उभरती हुई ताकतों का संगठन बनाया जाए। वाइट हाउस की नेशनल सिक्योरिटी का प्लान है कि इस ग्रुप का फोकस कुछ खास मुद्दों पर होगा। इसके अलावा जी-7 की ही तरह इसके शिखर सम्मेलन होंगे। हालांकि इस विचार पर अभी बहस चल रही है क्योंकि इस तरह का ग्रुप दुनियाभर में बड़ा उथल-पुथल करने वाला हो सकता है। एक पक्ष का कहना है कि अमीर और डेमोक्रेटिक देशों से इतर यह संगठन शक्ति पर आधारित होगा। सी-5 को लेकर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है। हालांकि अमेरिका की विदेश नीति से लगता है कि वह इसे धरती पर उतार सकता है। ऐसे में चीन और भारत जैसे प्रतिद्वंद्वी भी एक मंच पर दिखाई देंगे। वहीं भारत के लिए इंडो पसिफिक मुद्दों पर संबोधन के लिए यह एक अच्छा प्लैटफॉर्म हो सकता है। यह संगठन रूस को सामने रखते हुए नाटो को कमजोर करने का प्लान भी साबित हो सकता है।  

न्यायपालिका पर दबाव? जस्टिस स्वामीनाथन के समर्थन में 56 पूर्व जज, कहा—हमारी बस एक अपील…

नई दिल्ली मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश पर 56 पूर्व जजों ने ऐतराज जताया है। इन जजों की ओर से एक खुला पत्र लिखा गया है और महाभियोग की कोशिश को जजों को धमकाने का एक तरीका बताया है। इन पूर्व जजों का कहना है कि जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ प्रस्ताव लाना एक प्रयास है कि ऐसे जजों को धमकाया जाए, जो किसी खास विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखते हैं या फिर उनकी बात को ही महत्व नहीं देते हैं। इन जजों ने सांसदों, वकीलों, सिविल सोसायटी और नागरिकों से अपील की है कि ऐसे प्रस्ताव को खारिज कर दें।   पूर्व जजों ने कहा कि यह जरूरी है कि अदालतों की स्वायत्तता और अखंडता को बरकरार रखा जाए। अदालतों पर किसी तरह का दबाव डालना ठीक नहीं है। इस बयान में लिखा गया है, 'हम माननीय सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायाधीश इस बात को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हैं, जिस तरह से जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ कुछ सांसदों ने महाभियोग का प्रस्ताव रखा है। यह एक खतरनाक प्रयास है कि ऐसे जजों को धमकाया जाए, जो किसी खास विचारधारा की पक्ष में बात नहीं करते या फिर उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरते। यदि इस तरह के प्रयासों को आगे बढ़ने दिया गया तो फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ें ही कमजोर हो जाएंगी और न्यापालिका की स्वतंत्रता को भी खतरा होगा।' यही नहीं इस बयान में आपातकाल के दौर का भी जिक्र किया गया। बयान में कहा गया कि तब भी ऐसे जजों को प्रताड़ित किया गया था, जो एक पक्ष के साथ नहीं थे। एडीएम जबलपुर केस में अपनी असहमति जाहिर करने के बाद जस्टिस एच.आर. खन्ना को किनारे लगा दिया गया था। ऐसे तमाम दबावों के दौर में भी हमारी न्यायपालिका निष्पक्ष और स्वतंत्र भाव से खड़ी रही है। लेकिन एक बार फिर से उसकी स्वतंत्रता और अखंडता को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं। इससे न्यायपालिका को बचाने की जरूरत है। हमारी सभी सांसदों, समाज के लोगों से अपील है कि वे ऐसे किसी भी प्रयास के खिलाफ हों। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आदर्श गोयल, हेमंत गुप्ता शामिल हैं। इसके अलावा कई उच्च न्यायालयों के चीफ जस्टिस अनिल देव सिंह, नरसिम्हा रेड्डी शामिल हैं। एस.एन. ढींगरा, आरके गौबा, विनोद गोयल भी इन जजों में शामिल हैं।  

केवल 68 शब्द! शिवाजी महाराज का इतिहास ‘संक्षेप’ करने से महाराष्ट्र सदन में विरोध के स्वर तेज

मुंबई  छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को सीबीएसई की किताबों में केवल 68 शब्दों का स्थान मिला है। इस बात पर भड़कते हुए निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में कड़ा रोष व्यक्त किया है। सत्यजीत ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर सीबीएसई के पास छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारी नहीं है तो राज्य सरकार को इस विषय पर जानकारी देनी चाहिए।   विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए तांबे ने कहा कि केंद्रीय स्कूलों में पाठ्यक्रम में शिवाजी महाराज के पूरे इतिहास को केवल 68 शब्दों में समेट दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का इतिहास देश भर तक नहीं पहुंच रहा है। यह महाराष्ट्र सरकार और शिक्षा विभाग की विफलता है। सदन में इस मुद्दे पर आधा घंटा चर्चा की मांग करते हुए तांबे ने कहा, "महाराष्ट्र के आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास अगर देशभर के विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह राज्य के शिक्षा विभाग की विफलता है। शिवाजी महाराज ने राज्य को खड़ा किया। विविध समाज के मावलों को एक साथ लाकर बहुजन हिताय राज्य की स्थापना की। उन्होंने माता जीजाबाई और पिता शाहजी राजेके स्वराज्य के स्वप्न को साकार किया।" तांबे ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इतना प्रेरणादायक और विशाल इतिहास आखिर केवल 68 शब्दों में कैसे समेटा जा सकता है? तांबे ने आरोप लगाया कि सीबीएसई में अन्य राजाओं के इतिहास का विस्तृत वर्णन दिया गया है। कई ऐसे राजाओं के बारे में भी भर-भरकर लिखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में केवल महल बनवाए थे, तो फिर आखिर छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर राज्य सरकार उदासीन क्यों है? तांबे की बात को बाद में अन्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों का भी समर्थन मिला। सरकार की तरफ से मंत्री डॉक्टर पंकज भोयर ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, "राज्य शिक्षा आयोग को एनसीआरटी का पाठ्यक्रम बदने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इस विषय पर परिषद ने जरूरी जानकारी एनसीआरटी को भेज दी है। हम आगे भी यह जानकारी भेजते रहेंगे।"  

पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं! IMF ने रखीं कड़ी शर्तें, कर्ज मंजूरी पर मंडराया खतरा

इस्लामाबाद  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के लिए अपने 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के तहत 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। गुरुवार को जारी दूसरी समीक्षा की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में शामिल इन शर्तों के बाद पिछले 18 महीनों में लगाई गई कुल शर्तों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। नई शर्तें पाकिस्तान के सुशासन ढांचे की पुरानी खामियों, व्यापक भ्रष्टाचार जोखिमों और घाटे वाले क्षेत्रों में सुधार से जुड़ी हैं। सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि दिसंबर 2026 तक सभी उच्च स्तरीय केंद्रीय सिविल सेवकों (ग्रेड-19 और ऊपर) की संपत्ति घोषणाएं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएंगी। आईएमएफ का कहना है कि इससे आय और संपत्ति में विसंगतियों का पता लगाना आसान होगा। सरकार ने प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। बैंकिंग क्षेत्र को इन घोषणाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी। भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला आईएमएफ ने अक्टूबर 2026 तक 10 सबसे अधिक जोखिम वाले विभागों में भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करने को कहा है। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) इन योजनाओं का समन्वय करेगा। प्रांतीय एंटी-करप्शन संस्थाओं को वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने और वित्तीय अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये कदम आईएमएफ-प्रायोजित गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिसमें पाकिस्तान के कानूनी, प्रशासनिक और निगरानी ढांचे में व्यापक कमियां उजागर हुई थीं। सीमा-पार भुगतान और रेमिटेंस लागत की समीक्षा आईएमएफ ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस भेजने की लागत और बाधाओं की व्यापक समीक्षा पूरी करने को कहा है। अनुमान है कि रेमिटेंस लागत आने वाले वर्षों में 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है, जबकि यही राशि पाकिस्तान के सीमित आयातों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत है। सितंबर 2026 तक स्थानीय मुद्रा बॉन्ड मार्केट के विकास में बाधाओं की जांच कर सुधारों की रणनीतिक योजना प्रकाशित करनी होगी। चीनी उद्योग में एकाधिकार तोड़ने की कवायद जून 2026 तक कंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर राष्ट्रीय चीनी बाजार उदारीकरण नीति पर सहमति बनानी होगी। इस नीति में लाइसेंसिंग नियम, मूल्य नियंत्रण, आयात-निर्यात अनुमति, जोनिंग मानदंड और कार्यान्वयन की स्पष्ट समय-सीमा शामिल होगी। नीति को संघीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसे लंबे समय से शक्तिशाली माने जाने वाले शुगर उद्योग में प्रभाव के केंद्रीकरण को खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है। एफबीआर (FBR) की खराब कार्यक्षमता पर सख्ती दिसंबर 2025 के अंत तक एफबीआर सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र, स्टाफिंग जरूरतें, समय-सारिणी, माइलस्टोन, अपेक्षित राजस्व परिणाम और KPI शामिल होंगे। इसके बाद कम-से-कम तीन प्राथमिकता वाले सुधारों को पूरी तरह लागू करना होगा। दिसंबर 2026 तक मध्यम अवधि की टैक्स सुधार रणनीति भी प्रकाशित करनी होगी। बिजली क्षेत्र में निजीकरण की तैयारी अगले केंद्रीय बजट से पहले हैदराबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (HESCO) और सुक्कूर इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (SEPCO) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आधार तैयार करने होंगे और सात सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन समझौते पूरे करने होंगे। कंपनीज एक्ट 2017 में संशोधन संसद में पेश करने होंगे ताकि गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनुपालन जरूरतें बढ़ाई जा सकें। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के लिए कॉन्सेप्ट नोट भी जारी करना होगा। राजस्व कम हुआ तो मिनी-बजट लाना होगा आईएमएफ रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि दिसंबर 2025 के अंत तक राजस्व लक्ष्य से चूक हुई तो सरकार मिनी-बजट लाएगी। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर फेडरल एक्साइज ड्यूटी 5% बढ़ाना, उच्च चीनी वाले उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी लगाना और कई वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स दर में लाना शामिल होगा। आईएमएफ ने गवर्नेंस और भ्रष्टाचार डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में चिह्नित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना प्रकाशित करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले ही 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम के तहत कड़ी निगरानी में है और इन नई शर्तों से आर्थिक सुधारों की गति और तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

चेतावनी के 24 घंटे बाद सरकार की कार्रवाई: महाराष्ट्र विधानसभा ने अहम प्रस्ताव को दी मंजूरी

मुंबई  समाजसेवी अन्ना हजारे ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि यदि लोकायुक्त कानून को महाराष्ट्र में लागू नहीं किया गया तो वह जनवरी 2026 में आमरण अनशन शुरू करेंगे। इससे पहले उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में आंदोलन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। यही नहीं यह आंदोलन इतना बड़ा हो गया था कि इससे निकली आम आदमी पार्टी ने जब दिल्ली में चुनाव लड़ा तो उसे जीत हासिल हुई। इसी से निकली पार्टी फिलहाल पंजाब की सत्ता पर काबिज है। अन्ना हजारे ने लोकायुक्त कानून को लेकर चेतावनी दी और अगले ही दिन महाराष्ट्र की विधानसभा में इस कानून को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। विधानसभा में इस ऐक्ट के तहत आईएएस अधिकारियों को भी शामिल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस तरह महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून, 2023 को संशोधित किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। इस प्रस्ताव को सीएम देवेंद्र फडणवीस की ओर से ही विधानसभा में रखा गया, जिसे मंजूरी मिल गई। उन्होंने कहा कि अब इस संशोधन से कानून में स्पष्टता हो गई है कि आखिर कौन-कौन लोग लोकायुक्त के दायरे में आएंगे। उन्होंने कहा कि साफ है कि अब राज्य सरकार की ओर से तैनाती पाने वाले आईएएस अधिकारी भी लोकायुक्त कानून के तहत जवाबदेह होंगे। अन्ना हजारे के सवाल का अब भी नहीं मिला है जवाब हालांकि अभी यह साफ नहीं किया गया है कि लोकायुक्त कानून को कब से लागू किया जाएगा। अन्ना हजारे की यही शिकायत है कि महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू नहीं किया जा रहा है। लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 के तहत राज्य में भी लोकायुक्त की व्यवस्था लागू की गई है। कानून में नए संशोधन से क्या फायदा होगा अब नए संशोधन के अनुसार राज्य के किसी बोर्ड, निगम, समिति या अन्य संस्था में तैनात आईएएस अधिकारियों को भी इस ऐक्ट के तहत कवर किया जाएगा। इसके तहत उन सभी अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार ने की है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इससे केंद्र और राज्य सरकार के कानून में किसी तरह का टकराव नहीं होगा और नियमों को लेकर स्पष्टता रहेगी।

फैज हमीद पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में आशंकाओं की बाढ़—क्या यह बड़े सफाए की शुरुआत है?

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में पूर्व पीएम इमरान खान दो साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं। इस बीच उनके करीबी रहे आईएसआई के पूर्व चीफ फैज हमीद को 14 साल कैद की सजा दी गई है। गुरुवार को ही आए फैसले में फैज हमीद को राजनीतिक संलिप्तता रखने, अपने अधिकार का बेजा इस्तेमाल करने, लोगों को नुकसान पहुंचाने और ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में सजा दी गई है। इसमें सबसे अहम पहलू राजनीतिक संलिप्तता को माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि फैज हमीद को 9 मई को हुई हिंसा के मामले में यह सजा दी गई है। यही नहीं यदि ऐसा ही है तो फिर फैज हमीद की सजा बस एक शुरुआत भर है। इमरान खान के समर्थकों और अन्य लोगों को डर सता रहा है कि 9 मई को हुई हिंसा के मामले और भी तमाम लोगों पर मिलिट्री कोर्ट में मामले चल सकते हैं। इन लोगों को सख्त सजाएं मिल सकती हैं। पहले भी ऐसी ही चर्चाएं थीं कि मिलिट्री कोर्ट में उन लोगों के खिलाफ केस चलाए जा सकते हैं, जिन्हें लेकर कहा जा रहा है कि वे इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर हुई हिंसा में शामिल थे। पाकिस्तान की सेना ने एक बयान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि फैज हमीद को मिलिट्री लॉ के तहत सजा दी गई है। लेकिन सेना के बयान के आखिरी पैराग्राफ की बहुत चर्चा हो रही है। इस पैराग्राफ में सेना ने लिखा है कि राजनीतिक आंदोलन को उकसाने और अस्थिरता पैदा करने के मामलों की अलग से जांच हो रही है। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाएगा। सेना के बयान से साफ है कि उसने फैज हमीद और कुछ अन्य नेताओं को हिंसा का जिम्मेदार माना है। साफ है कि अभी और लोगों के खिलाफ भी ऐक्शन हो सकता है। पाकिस्तान का लंबा खूनी इतिहास रहा है, जिसमें गद्दी से हटने के बाद भी कोई शासक सुरक्षित पनाहगाह के लिए तरसता रहा है। भले ही वह जुल्फिकार अली भुट्टो हों या फिर परवेज मुशर्रफ या इमरान खान। ऐसे में एक बार फिर से आशंकाएं तेज हैं कि सेना को बेतहाशा ताकत मिलने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक विपक्षियों को चुन-चुनकर टारगेट किया जा सकता है।  

क्लब डेथ केस: मालिकों में दहशत, बोले— अब हमारी बारी है, हमें भी मार देंगे

नई दिल्ली  गोवा में 25 लोगों की जिंदगी छीन लेने वाले क्लब के मालिकों गौरव लूथरा (44) और सौरभ लूथरा को डर है कि उन्हें पीट-पीटकर मार डाला जाएगा। अदालत में दायर जमानत याचिका में दोनों भाइयों ने 'गोवा में लिंचिंग' का डर जाहिर किया। आग लगने के बाद थाइलैंड भागे दोनों भाइयों का पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद उन्हें वहां हिरासत में ले लिया गया है। भारत लाए जाने से पहले दोनों भाइयों ने अपने वकीलों के माध्यम से दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया।   अडिशनल सेशंस जज वंदना ने गुरुवार को लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि 'प्राथमिक दृष्टया अपराध की प्रकृति गंभीर है।' दोनों भाइयों को थाइलैंड में हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लूथरा भाइयों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और तनवीर अहमद मीर ने चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी। उन्होंने कहा कि भारत आने पर उनकी सुरक्षा को खतरा है और वह गोवा की अदालत में राहत की अपील के लिए जमानत चाहते हैं। रोमियो लेन चेन के मालिकों ने उनकी प्रॉपर्टीज पर हुए बुलडोजर ऐक्शन का भी जिक्र किया और यह जताने की कोशिश की कि अथॉरिटीज उनके साथ गलत ढंग से पेश आ सकती हैं। मुवक्किल की ओर से वकील ने कहा, 'मेरी सुरक्षा को सीधा खतरा है। गोवा में मेरी लिंचिंग हो जाएगी। मेरे दूसरे रेस्तरां पर सीधा बुलडोजर चला दिया गया। हम जांच में शामिल होंगे… मुझ पर मुकदमा चलाया जाए, लेकिन सताया ना जाए।' वकीलों ने कहा कि लूथरा भाइयों ने तुरंत दिल्ली की अदालत पहुंचे और बिना किसी देरी के जांच में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, 'यदि आज रात मैं इंडिया में लैंड करता हूं और जांच अधिकारी आधी रात को पेश होने को कहते हैं, मैं वहां जाऊंगा।' जज दिखाए गए उन दस्तावेजों को भी संज्ञान में लिया जिनके मुताबिक लूथरा भाइयों ने 7 दिसंबर की रात 7.17 बजे टिकट बुक की और सुबह 5.20 की फ्लाइट से देश से बाहर निकल गए। जज ने कहा कि उनके वकीलों ने तथ्य को छिपाया और यह कहा कि वे भीषण आग लगने से पहले ही थाइलैंड गए थे। आग आधी रात के पहले लगी थी इसका मतलब है कि दोनों भाइयों ने ट्रिप को लेकर प्लान बनाया और घटना की जानकारी मिलने के बाद थाइलैंड के लिए निकले। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि आवेदन के साथ दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि लाइसेंस अग्रीमेंट, ट्रेड लाइसेंस और लीज डीड पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी।

भारतीय मूल के करोड़पति विक्रम बेरी अरेस्ट: टेस्ला में आगजनी की साजिश का सनसनीखेज आरोप

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के करोड़पति व्यापारी बेरी विक्रम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक विक्रम पर आरोप है कि उन्होंने कैलिफोर्निया के बे एरिया में एक शराब की दुकान में आग लगाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहे तो टेस्ला को दूसरी गाड़ियों से टक्कर मारकर आग लगाने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम एक मानसिक स्वास्थ्य कंपनी बेटरलाइफ के संस्थापक हैं। घटना की जानकारी देते हुए सांता क्लारा काउंटी शेरिफ के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में लिखा, यह घटना साराटोगा की गैरोड फार्म्स पर हुई। इस जगह पर विक्रम ने वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने विक्रम को आग लगाने की कोशिश करते हुए पकड़ा। इसके बाद उनकी कहासुनी हो गई। इस पर गु्स्साए विक्रम ने कर्मचारियों को ऊपर वाइन से भरी बोतल फेंकी और वहां से भागने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक दुकान के बाहर खड़ी अपनी टेस्ला कार में बैठकर विक्रम ने वहां पर मौजूद दो कारों में जानबूझकर टक्कर मार दी। इसके बाद दुकान के कर्मचारियों ने पुलिस को कॉल किया। पुलिस के पहुंचने पर विक्रम ने खुद को अपनी इलेक्ट्रिक कार में बंद कर लिया और बाहर आने से इनकार कर दिया। शेरिफ कार्यालय के मुताबिक, वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने विक्रम बेरी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन उसने ऐसा करने के से इनकार कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने उसे बाहर निकालने के लिए पेपरबॉल और स्प्रे का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 42 वर्षीय विक्रम बेरी, मेनेलो पार्क निवासी के तौर पर हुई है। इस घटना के बाद उसके ऊपर घातक हथियार से हमला करने और गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया है। कौन हैं विक्रम बेरी? विक्रम की लिंक्डन प्रोफाइल के मुताबिक उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई अर्बाना-शैंपेन यूनिवर्सिटी से पूरी की और बाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम एक करोड़पति है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डेलॉयट में एक कंस्लटेंट के रूप में की और बाद में कुछ और कंपनियों में काम करके 2016 में खुद की कंपनी शुरू की। फिलहाल विक्रम को गिरफ्तार करके उनसे इस घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है।  

GCA की बड़ी कार्रवाई: इंडिगो विवाद के बीच चार इंस्पेक्टर निलंबित

नई दिल्ली  देश की विमानन व्यवस्था में जारी उथल-पुथल के बीच डीजीसीए (DGCA) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी एयरलाइन की सुरक्षा, पायलट प्रशिक्षण और परिचालन अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण कामों की निगरानी करते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स आज डीजीसीए के सामने पेश हो सकते हैं। बीते दिनों इंडिगो की भारी संख्या में उड़ानें रद्द होने का संकट गहराता गया था। पिछले सप्ताह शुक्रवार को भारत भर में इंडिगो ने 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं, जो अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान साबित हुआ। इस संकट का मुख्य कारण Flight Duty Time Limitations फेज-2 को सही तरीके से लागू करने में इंडिगो की विफलता के साथ-साथ क्रू रोस्टर और स्टाफ प्रबंधन में एयरलाइन का कुप्रबंधन था। सरकार ने भी एयरलाइन की योजना और प्रबंधन को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। जैसे-जैसे रद्द उड़ानों ने यात्रियों की यात्रा योजनाएं बिगाड़ीं, सरकार ने कई कदम उठाए। समय पर रिफंड सुनिश्चित करने के लिए सख्त समयसीमा तय की गई। अन्य एयरलाइनों को टिकट कीमतें नियंत्रित रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ानें 10% कम करने का निर्देश दिया गया। पीटीआई के अनुसार, कटौती के बाद इंडिगो 1,950 उड़ानें संचालित करेगा, जिनमें लगभग 3 लाख यात्री सफर करेंगे। सामान्यत: एयरलाइन सर्दियों में करीब 2,300 उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है। इससे पहले गुरुवार को DGCA अधिकारियों को सीधे इंडिगो के मुख्यालय भेजा गया ताकि वे स्थिति की लाइव निगरानी कर सकें। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर 200 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद को बताया कि इंडिगो ने 1 दिसंबर को हुई बैठक में किसी भी समस्या का संकेत तक नहीं दिया था, जो इस संकट को और गंभीर बनाता है।