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समंदर में ‘फर्जी आईलैंड’ मिशन! पाकिस्तान की दिन-रात ड्रिल पर सवाल, क्या ट्रंप का बड़ा दांव?

कराची  भारी आर्थिक तंगी और आटे-चावल के लिए भी बदहाली से जूझ रहा पड़ोसी देश पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक उकसावे पर जुनूनी हो गया है। पाकिस्तान में कथित तौर पर तेल भंडार होने के ट्रंप के दावे और दिलचस्पी दिखाने के कुछ महीने बाद, पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (PPL) अरब सागर में तेल और गैस की खोज करने के लिए एक कृत्रिम द्वीप बनाने में जुट गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सिंध के तट से करीब 30 किलोमीटर दूर सुजावल के पास एक कृत्रिम द्वीप बना रहा है। यह द्वीप सिंधु नदी के पास है और पाकिस्तान के मुख्य कमर्शियल हब कराची से करीब 130 किलोमीटर दूर है।   रिपोर्ट में कहा गया है कि जब से डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के तेल भंडार में रुचि जताई है, तब से ही पाकिस्तान सुनहरे सपने देखने लगा है। यही वजह है कि इस्लामाबाद में बैठी कठपुतली सरकार ने अपने ड्रिलिंग प्रयास तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां बिना रुके-थके, चौबीसों घंटे ड्रिलिंग का काम हो रहा है। यह स्ट्रक्चर छह फीट ऊंचा होगा ताकि ऑपरेशन को हाई टाइड से बचाया जा सके। फरवरी 2026 तक काम होगा पूरा PPL के जनरल मैनेजर अरशद पालेकर के हवाले से ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि आइलैंड का कंस्ट्रक्शन अगले साल फरवरी तक पूरा हो जाने की संभावना है। इसके बाद तुरंत वहां ड्रिलिंग ऑपरेशन शुरू हो जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में PPL का लक्ष्य करीब 25 कुओं की खुदाई करना है। अरब सागर के सिंध बेसिन में जहां ये द्वीप बनाया जा रहा है उसकी भारत से दूरी करीब 60-70 KM ही है। अबू धाबी से सीखा नकली द्वीप बनाना ड्रिलिंग के लिए समुद्र से मिट्टी निकालकर आर्टिफिशियल आइलैंड बनाना पाकिस्तान के लिए एक कठिन और दुरूह काम है। यह प्रोजेक्ट देश के लिए पहला है। हालाँकि, यह कॉन्सेप्ट नया नहीं है, और UAE जैसे देशों ने प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए पारंपरिक ऑफशोर रिग की जगह ऐसे आइलैंड बनाए हैं। PPL ने भी अबू धाबी के ड्रिलिंग और कृत्रिम द्वीप बनाने के के सफल प्रयोग से बड़ी सीख ली है और यह प्रोजेक्ट शुरू किया है। बता दें कि ऐसे आइलैंड मिट्टी, रेत या दूसरे कंस्ट्रक्शन मटीरियल को तब तक जमा करके बनाए जाते हैं जब तक पानी की सतह अंदर तक न पहुँच जाए और एक आइलैंड की सतह न बन जाए। इसका एक बड़ा फ़ायदा यह है कि लोग एक ही आइलैंड पर रह सकते हैं और काम कर सकते हैं, जिससे काम की जगह तक आने-जाने का खर्च और समय कम हो जाता है, जिससे कार्य क्षमता बढ़ जाती है।

18 लोगों को खोने का दर्द: सैयद राशिद बोले—सब लोग साथ नहीं जाते तो कुछ बच जाते

हैदराबाद  9 नवंबर 2025 को सऊदी अरब के लिए रवाना करते समय सैयद राशिद ने अपने परिवार को हवाई अड्डे पर अलविदा कहा था। उन्हें कहां पता था कि यह आखिरी मुलाकात होगी और वे उन्हें दोबारा कभी नहीं देख पाएंगे। दरअसल, सऊदी अरब में उमराह यात्रियों से भरी एक बस मक्का से मदीना जाते समय डीजल टैंकर से टकरा गई थी। हादसा इतना भयावह था कि बस में सवार एक को छोड़ सभी जलकर राख हो गए। इस हादसे में कुल 45 भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जिनमें एक ही परिवार के 18 सदस्य शामिल थे। परिवार के सैयद राशिद के लिए यह जीवन का सबसे बड़ा सदमा था। मदीना के पास हुए भयानक हादसे में उन्होंने अपने परिवार के कुल 18 सदस्यों को एक साथ खो दिया। मृतकों में उनके 65 वर्षीय पिता शेख नसीरुद्दीन (सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी), 60 वर्षीय मां अख्तर बेगम, 38 वर्षीय बड़ा भाई, 35 वर्षीय भाभी और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे शामिल थे। इसके अलावा अमेरिका में रहने वाले चचेरे भाई सिराजुद्दीन, उनकी पत्नी सना और उनके तीन बच्चे, रिश्तेदार अमीना बेगम और उनकी बेटी, शमीना बेगम और उनका बेटा, और रिजवाना बेगम और उनके दो बच्चे भी इस हादसे में चल बसे। काश मेरी बात मान ली होती हैदराबाद के विद्यानगर में सीपीआई(एम) मार्क्स भवन के पास रहने वाले राशिद ने बताया कि 9 नवंबर को उमराह के लिए जा रहे परिवार को उन्होंने खुद हैदराबाद एयरपोर्ट पर विदा किया था। उस वक्त उन्होंने सबको समझाया था कि इतने सारे लोग और खासकर छोटे बच्चे एक साथ न जाएं। हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए राशिद ने रोते हुए कहा कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं उन्हें जिंदगी में आखिरी बार देख रहा हूं। काश उन्होंने मेरी बात मान ली होती, तो शायद उनमें से कुछ तो बच जाते। इसी परिवार के एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने भी अपने पांच परिजनों को खो दिया है। मृतकों में दो बहनोई, सास और एक भतीजी। वे बोले कि जब सऊदी अधिकारियों ने फोन पर कहा कि बस में सवार सभी लोग मर चुके हैं, तो मैं सदमे में आ गया। मैं भारत सरकार से गुजारिश करता हूं कि हमारे अपनों के शव जल्द से जल्द भारत लाए जाएं। 9 नवंबर को सऊदी गए थे बाजारघाट की अल मक्का ट्रैवल्स की सहयोगी कंपनी अल मीना ट्रैवल्स के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके ग्रुप के 20 यात्री 9 नवंबर को सऊदी अरब गए थे। मक्का में जियारत के बाद 16 लोग मदीना वापस लौट रहे थे। पहले एजेंसी को उनके ठिकाने की कोई खबर नहीं थी, लेकिन बाद में सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की कि बस में मौजूद सभी यात्री मारे गए।

SUV 400 फीट नीचे समाई, 6 की जान गई; ड्रोन से घंटों चलती रही तलाश

रायगढ़  महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के तम्हिनी घाट क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक थार SUV करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिसमें छह युवाओं की मौत हो गई। यह दुर्घटना मंगलवार सुबह हुई, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी गुरुवार सुबह प्राप्त हुई। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन कैमरे की मदद से ही गाड़ी की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सका। मृतकों की उम्र 18 से 22 वर्ष के बीच बताई गई है। सभी युवक सोमवार देर रात पुणे से थार SUV में निकले थे। तम्हिनी घाट, जो रायगढ़ और पुणे जिलों को जोड़ने वाली एक खूबसूरत पहाड़ी सड़क है, अक्सर लोगों के लिए लोकप्रिय पिकनिक स्थल रहा है।   ड्रोन से खोजी गई दुर्घटनाग्रस्त SUV अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह से ही इन लड़कों का परिजनों से संपर्क टूट गया था। चिंता बढ़ने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने युवकों के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की, जो तम्हिनी घाट के आसपास पाई गई। इसके बाद मानगांव पुलिस स्टेशन की टीम ने गुरुवार सुबह खोज अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान सड़क के एक मोड़ पर टूटी सुरक्षा रेलिंग दिखाई दी, जिससे आशंका हुई कि वाहन खाई में गिरा हो सकता है। इसके बाद पुलिस ने ड्रोन की सहायता ली और SUV घाटी में नीचे एक पेड़ में अटकी हुई मिली। चालक के नियंत्रण खोने की आशंका हालांकि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि सड़क के मोड़ पर वाहन चालक का नियंत्रण गाड़ी से हट गया होगा, जिसके कारण यह हादसा हुआ। रायगढ़ पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों की एक संयुक्त टीम ने गुरुवार दोपहर सभी छह शवों को खाई से बाहर निकाला। मृतकों की पहचान पूरी कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि शवों को सरकारी अस्पताल में भेजा गया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

AI का बढ़ता खतरा? Google CEO ने खुद बताया— क्यों वे अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं

नई दिल्ली  Google के CEO सुंदर पिचाई ने हाल ही में एक बड़ी दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि AI इतना तेज हो रहा है कि एक दिन CEO की नौकरी भी मशीन कर सकती है। यह सुनकर हर कोई चौंक गया, क्योंकि कंपनी चलाना आसान काम नहीं होता। पिचाई का कहना है कि AI सिर्फ छोटे-मोटे काम नहीं करेगा, बल्कि आने वाले समय में कंपनियों के लिए बड़े फैसले भी ले सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ काम ऐसे होते हैं जो नियमों पर चलते हैं जैसे रिपोर्ट पढ़ना, डेटा समझना, प्लान बनाना और फैसले लेना। और यह सब काम AI पहले से ही बहुत अच्छी तरह कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगले 12 महीनों में AI इतना तेज हो जाएगा कि वह इंसानों की तरफ से कई “जटिल काम” खुद कर देगा। यानी आपको सिर्फ बोलना होगा और AI आपके लिए पूरा टास्क कर देगा। अब सवाल उठता है कि क्या ये अच्छी बात है या खराब? पिचाई का कहना है कि AI नई नौकरियां भी बनाएगा, लेकिन कुछ नौकरियां खत्म भी होंगी। इसीलिए लोग जितनी जल्दी AI को समझेंगे और सीखेंगे, उतनी ही जल्दी वे इस नए दौर में आगे बढ़ पाएंगे। AI इतना आगे बढ़ गया है कि CEO का काम भी कर सकता है: पिचाई Google के CEO सुंदर पिचाई ने हाल ही में कहा कि AI एक दिन CEOs की नौकरी भी ले सकता है। यह सुनकर बहुत लोग हैरान रह गए। क्योंकि CEO कंपनी का सबसे बड़ा बॉस होता है। लेकिन पिचाई का कहना है कि AI में अब इतना दिमाग आ गया है कि वह बड़े से बड़ा फैसला भी सोच-समझकर कर सकता है। क्यों कहा “CEO का काम AI के लिए आसान”? पिचाई ने बहुत सिंपल भाषा में समझाया कि कंपनी का CEO जो काम करता है, उसमें से कई काम AI बहुत आसानी से कर सकता है। जैसे डेटा का विश्लेषण, रिपोर्ट पढ़ना, नंबर समझना, किस चीज से कंपनी को फायदा होगा, इसका अंदाजा लगाना, कौन सा प्रोजेक्ट अच्छा है, कौन सा नहीं, ये सब काम AI पहले ही कर रहा है। इसलिए उन्होंने कहा कि हो सकता है भविष्य में AI “CEO की कुर्सी” तक पहुंच जाए। अगले 12 महीनों में AI और भी तेज हो जाएगा सुंदर पिचाई ने कहा कि आने वाले एक साल में AI “एजेंट” बन जाएगा। मतलब ऐसे सिस्टम जो सिर्फ जवाब नहीं देंगे, बल्कि आपके लिए पूरा काम खुद कर देंगे। जैसे ईमेल खुद लिखना, मीटिंग शेड्यूल करना, कंपनी के लिए पूरा प्लान बनाना, बड़े फैसले लेना, ये सब काम एक CEO करता है। इसलिए पिचाई का कहना है कि AI इस दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। क्या इंसानों की नौकरी जाएगी? यह डर हर किसी के मन में है। पिचाई ने साफ कहा AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा, पर उतनी ही नई नौकरियां भी बनाएगा। उन्होंने कहा कि लोग अगर AI को ठीक से समझ लें, इसे सीख लें और इसे अपना साथी बना लें, तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं। बल्कि AI उनके काम को आसान कर देगा। AI इंसानों की तरह गलतियां भी कर सकता है पिचाई ने ये भी माना कि AI पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। AI से गलतियां भी हो सकती हैं जैसे गलत डेटा देना या गलत सलाह देना। इसलिए उन्होंने कहा कि असली ताकत तब है जब इंसान + AI साथ-साथ काम करें। यही भविष्य है।  

शिंदे की दिल्ली दौड़ पर उद्धव का कटाक्ष: ‘परेशान होकर शाह के पास गए’

मुंबई  महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर तंज कसा है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि एकनाथ शिंदे अब महायुति में मची कलह से परेशान हो गए हैं। इसी के चलते वह बुधवार रात को दिल्ली जाकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे फिलहाल असहाय नजर आते हैं। शिवसेना-यूबीटी की टीचर्स विंग शिक्षक सेना को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब दूसरे दल जनता के लिए कोई कदम उठाते हैं तो ये लोग रेवड़ी बोलते हैं, लेकिन खुद करते हैं तो उसे जनहित में बताते हैं। उन्होंने कहा कि अब तो ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। कोई दिल्ली भागता है तो कोई किसी और के पास जाता है। आखिर ये लोग इतने असहाय क्यों हो गए हैं।   महायुति में भाजपा, शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। शिवसेना के मंत्रियों ने इसी मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। इस बैठक में अकेले एकनाथ शिंदे ही गए थे और चुपचाप बैठे रहे। अन्य सभी मंत्री मुख्यमंत्री कार्यालय में देवेंद्र फडणवीस का इंतजार कर रहे थे। मीटिंग खत्म होने के बाद फडणवीस जब ऑफिस पहुंचे तो वहां शिवसेना के मंत्री पहले से मौजूद थे। इस दौरान मंत्रियों ने कहा कि भाजपा ने डोंबिवली में हमारे कार्य़कर्ताओं को पार्टी में शामिल किया है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर फडणवीस ने कहा कि आखिर इस तरह के दलबदल अभियान की शुरुआत तो आपने ही की थी। फडणवीस ने कहा था कि कई इलाकों में भाजपा के लोगों को शिवसेना जॉइन कराई गई है। यदि आप लोगों ऐसा करना बंद कर देंगे तो फिर हम भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे। माना जा रहा है कि मंत्रियों ने इस पर सहमति जताई और फिर आपस में समझौता हुआ है कि एक-दूसरे के दलों के नेताओं को शामिल नहीं कराएंगे। इसके बाद बुधवार को ही एकनाथ शिंदे दिल्ली आए और अमित शाह से मिले। मंगल को बहस और बुधवार को शाह से मिले एकनाथ शिंदे कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में चल रही खींचतान को लेकर ही एकनाथ शिंदे ने अमित शाह से मुलाकात की थी। ठाकरे ने कहा कि आज तो रेवड़ी एक नियम जैसा बन गया है। पर इन लोगों की राजनीति यह है कि खुद बांटो तो कल्याण और दूसरा दे तो रेवड़ी कहा जाएगा। बता दें कि कई चुनाव में फ्री वाली स्कीमों की भाजपा ने आलोचना की थी और इसे रेवड़ी कल्चर का नाम दिया गया था।  

नेपाल में उथल-पुथल तेज: युवाओं के प्रदर्शन से हालात बिगड़े, सरकार ने लगाया कर्फ्यू

नेपाल  भारत से सटे नेपाल के बारा जिले के कुछ इलाकों में ‘जेन-जी’ युवाओं और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद बुधवार को कर्फ्यू लगा दिया गया। बारा जिला प्रशासन ने बताया कि सिमरा हवाई अड्डे के 500 मीटर के दायरे में दोपहर 12:30 बजे से रात 8 बजे तक कर्फ्यू रहेगा। दरअसल, सैकड़ों ‘जेन-जी’ युवा वहां नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीएन-यूएमएल के खिलाफ नारे लगाते हुए जमा हो गए थे।   बताया जा रहा है कि गुरुवार को भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। सुबह से ही सिमरा की सड़कों पर लोग जमा होने लगे और पुलिस के साथ उनकी झड़पें शुरू हो गईं। इस घटना के बाद प्रशासन ने स्थिति को काबू में करने के लिए दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी छविराम सुबेदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को फोन पर बताया कि पुलिस के साथ झड़प होने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी, इसलिए फिर से कर्फ्यू लगाना पड़ा। क्या है पूरा मामला पुलिस के अनुसार, झड़प तब शुरू हुई जब बुद्ध एयर का एक विमान सीपीएन-यूएमएल के महासचिव शंकर पोखरेल और पार्टी के युवा नेता महेश बस्नेत को लेकर काठमांडू से सिमरा के लिए उड़ान भरने वाला था। दोनों नेताओं को वहां सरकार-विरोधी रैली को संबोधित करना था। जैसे ही उनके सिमरा आने की खबर फैली, जेन-जी प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच गए और उनका विरोध करने लगे। विरोध प्रदर्शन के बीच मौजूद स्थानीय सीपीएन-यूएमएल कार्यकर्ताओं से उनकी भिड़ंत हो गई। और देखते ही देखते मामला गंभीर हो गया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाला और सबको वहां से हटाया। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद बुद्ध एयरलाइंस ने काठमांडू से सिमरा की सभी घरेलू उड़ानें रद्द कर दी। गौरतलब है कि सीपीएन-यूएमएल पूरे नेपाल में विरोध प्रदर्शन कर रही है और 12 सितंबर को भंग की गई प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने की मांग कर रही है। बता दें कि जेन-जी आंदोलन के कारण ही नेपाल में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी।

US ने खोले एडवांस्ड वेपन्स के दरवाजे: भारत की रक्षा क्षमता में होगी बड़ी छलांग

वाशिंगटन  अमेरिका ने भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा रक्षा सौदा मंजूर कर दिया है। वॉशिंगटन ने भारत को एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड प्रोजेक्टाइल और एफजीएम-148 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम के साथ विभिन्न सहायक उपकरणों की बिक्री को हरी झंडी दे दी है। इस रक्षा पैकेज की कुल अनुमानित कीमत 90 मिलियन डॉलर (750 करोड़ रुपये से अधिक) बताई जा रही है।   DSCA ने कांग्रेस को सौंपी रिपोर्ट अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने दो अलग-अलग प्रस्तावों को मंजूरी दी है लगभग 47.1 मिलियन डॉलर के 216 M982A1 Excalibur प्रोजेक्टाइल और संबंधित उपकरण, लगभग 45.7 मिलियन डॉलर के 100 Javelin मिसाइलों, 25 कमांड-लॉन्च यूनिट्स, ट्रेनिंग एड्स, सिमुलेशन राउंड्स, स्पेयर पार्ट्स और लाइफसाइकल सपोर्ट,  इसके साथ ही तकनीकी सहायता, ‘पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक फायर कंट्रोल सिस्टम’, इम्प्रूव्ड प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन किट, मरम्मत सेवाएं और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है।   अमेरिका बोला-भारत क्षेत्र में ‘स्थिरता की महत्वपूर्ण शक्ति’ DSCA ने कहा कि यह बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है। भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया में स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण शक्ति बताया गया।एजेंसी के मुताबिक, यह हथियार भारत की सटीक हमला क्षमता बढ़ाएंगे और उसे वर्तमान एवं भविष्य के खतरों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे। इसके अलावा, यह खरीद भारतीय ब्रिगेड की "फर्स्ट स्ट्राइक एक्यूरेसी" को भी मजबूत करेगी।रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय सशस्त्र बलों को इन हथियारों और उपकरणों को एकीकृत करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि इस संभावित बिक्री से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कौन होंगे प्रमुख ठेकेदार? अमेरिकी सरकार ने कहा कि इस सौदे से उनकी रक्षा तैयारियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और भारत को उपकरण भेजने में किसी अतिरिक्त सरकारी या ठेकेदार प्रतिनिधि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।  

अमेरिका से जैवलिन मिसाइल खरीदने की मंजूरी, भारत की रक्षा क्षमता होगी और मजबूत

नई दिल्ली अमेरिका और भारत के बीच एक धमाकेदार डिफेंस डील हुई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को जैवलिन मिसाइल सिस्टम बेचने की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है. इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 45.7 मिलियन डॉलर यानि ₹4,04,90,31,425 बताई जा रही है. इसके साथ जरूरी उपकरण और सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होंगे, जवलिन एक उन्नत एंटी-टैंक मिसाइल है जो जमीन पर दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और किलेबंद ठिकानों को निशाना बनाने में इस्तेमाल होती है. इसके अलावा अमेरिका की ओर से भारत को एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स बेचने की संभावित सैन्य बिक्री को भी मंजूरी दी है. इस सौदे की अनुमानित कीमत 47.1 मिलियन डॉलर यानि ₹4,17,38,30,085 है. एक्सकैलिबर एक सटीक निशाना लगाने वाला आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल है, जिसे लंबी दूरी पर भी सटीक निशाने के लिए जाना जाता है. भारतीय सेना में ये शामिल हुआ तो इससे इससे भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता और घातक हो जाएगी. क्या -क्या भारत को देगा अमेरिका? अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के मुताबिक अमेरिका ने करीब 45.7 मिलियन डॉलर के FGM-148 Javelin एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है. भारत ने अमेरिका से 100 जैवलिन मिसाइलें, 1 टेस्ट फ्लाई-टू-बाय मिसाइल, 25 कमांड-लॉन्च यूनिट, ट्रेनिंग सिस्टम, सिमुलेशन राउंड, स्पेयर पार्ट्स और पूरी लाइफ-साइकल सपोर्ट की मांग की थी. DSCA का कहना है कि यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता को वर्तमान और भविष्य की खतरों से निपटने में मदद करेगा और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका ने भारत के साथ लगभग 93 मिलियन डॉलर (लगभग 775 करोड़ रुपये) के दो अहम रक्षा सौदों को मंजूरी दी है. इन सौदों से भारत की सटीक मारक क्षमता और एंटी-टैंक/एंटी-आर्मर ताकत और मजबूत होगी. क्या है जैवलिन मिसाइल की खासियत? क्या है जैवलिन (FGM-148 Javelin) एंटी टैंक मिसाइल? FGM-148 Javelin दुनिया के सबसे उन्नत एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम में से एक माना जाता है. इसकी खासियतों की बात करें तो ये टैंकों को उड़ाने में माहिर है और एक बार छूटने के बाद इसके टार्गेट की चिंता करने की जरूरत नहीं होती.     जैवलिन मिसाइल छोड़ने के बाद ऑपरेटर को लक्ष्य की ओर देखने की जरूरत नहीं रहती.     यह टैंक के ऊपर वाले हिस्से पर हमला करती है, जो सबसे कमजोर होता है.     लक्ष्य को लॉक करने के लिए उन्नत IR सीकर का इस्तेमाल करती है, जिससे जामिंग कम प्रभावी होती है.     आधुनिक टैंकों और आर्मर्ड व्हीकल्स के खिलाफ बेहद प्रभावी.     2,500 मीटर से अधिक रेंज – सुरक्षित दूरी से हमला करने की क्षमता.     ये इतना हल्का है कि दो सैनिक इसे आसानी से ले जा सकते हैं.     इससे रात में भी पूरी तरह सटीक निशाना लगा सकते हैं.     इसे छोटे स्थानों, इमारतों या कवर के पीछे से भी दागा जा सकता है.     लक्ष्य चूकने की संभावना बेहद कम होती है.     टैंक, बंकर, भवन, हेलिकॉप्टर जैसे कई लक्ष्यों पर काम करती है. भारत को कितना फायदा? जैवलिन मिसाइल और एक्सकैलिबर दोनों हथियार पहले से ही सीमित स्तर पर भारतीय सेना में उपयोग किए जा रहे हैं. यह नए सौदे भारत के मौजूदा स्टॉक बढ़ाएंगे,युद्धक्षमता बेहतर करेंगे और अमेरिका-निर्मित हथियार प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत करेंगे.

दिल्ली धमाके की जांच में बड़ा खुलासा, चार डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया

नई दिल्ली दिल्ली के लाल क‍िले के बाहर 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच में एनआईए ने सबसे बड़ा खुलासा करते हुए चार नए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. यह चारों वही लोग हैं जिन्होंने ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई i20 कार का इंतजाम, मूवमेंट और सुरक्षित ट्रांसफर कराया था. सबसे हैरान करने वाली बात है क‍ि चारों डॉक्टर हैं. इनमें से एक मुफ्ती का भी काम करता था. एनआईए ने इन चारों को श्रीनगर में गिरफ्तार किया. इनकी गिरफ्तारी के बाद साफ हो गया है कि ब्लास्ट में इनकी भूमिका बेहद प्रमुख थी. एनआईए के मुताबिक, पुलवामा से डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, अनंतनाग से डॉ. अदील अहमद राथर, लखनऊ डॉ. शाहीना सईद और शोपियां से मुफ्ती इरफान अहमद वगाय को पकड़ा गया था. इन चारों ने i20 कार को हासिल करने, उसे उपयोग के लिए तैयार रखने, उसकी मूवमेंट तय करने और मॉड्यूल तक पहुंचाने में कोर ऑपरेशन संभाला था. कैसे डॉक्टरों की टीम बनी कार ऑपरेशन की मास्टरमाइंड?     NIA की जांच में सामने आया है कि ये चारों मॉड्यूल की सबसे रणनीतिक टीम थे. इनकी भूमिका सिर्फ “मदद” नहीं, बल्कि कार ऑपरेशन का पूरा प्रबंधन थी. सूत्रों के मुताबिक, कागजी तौर पर कार किसी और के नाम थी, लेकिन असल में कार की खरीद, लाने, छुपाने और सुरक्षित रखवाने का पूरा काम इन्हीं चारों ने संभाला.     कार की मूवमेंट और रूट प्लानिंग इन्‍होंने ही रची. कार को कहां से उठाना है. किस रास्ते से दिल्ली लाना सुरक्षित रहेगा. बीच में कितनी देर कहां रुकना है. कार कब ‘एक्टिवेशन पॉइंट’ पर पहुंचाई जाए. यह पूरा ब्लूप्रिंट डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर राथर ने तैयार किया था.     मेडिकल कवर और कम्युनिकेशन सिस्टम इन्‍हीं के हवाले था. सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ की डॉक्टर शाहीना ने फंड चेन, मेडिकल विज‍िट की आड़ में मीटिंग की. सुरक्षित कम्युनिकेशन जैसे रणनीतिक काम संभाले.     मॉड्यूल को आइडियोलॉजिकल सपोर्ट मुफ्ती इरफान अहमद वगाय ने दिया. यह सदस्यों को जोड़ता था. उन्हें मानसिक रूप से तैयार करता था और विदेश लिंक के लिए संपर्क सूत्र था. यह गिरफ्तारी क्यों बड़ी है? इससे पहले एनआईए ने दो आरोपी पकड़े थे, जिनका नाम आमिर राशिद अली था. कार इसी के नाम पर रजिस्टर थी. फ‍िर एनआईए ने जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को दबोचा, जो तकनीकी विस्फोटक सेटअप में मददगार साबित हुआ था. लेकिन कार कैसे आई? किसने लाई? किसने मूव कराई? किसने उसे सुरक्षित रखा? इन चारों डॉक्टरों ने ही वह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संभाला था. यानी कार के बिना ब्लास्ट हो ही नहीं सकता था. और कार को ऑपरेशन में लाने वाले यही चारों थे. मुजम्मिल और शकील को द‍िल्‍ली लेकर आई पुल‍िस इस बीच एनआईए आतंकी डॉ मुजम्मिल और शकील को दिल्ली लेकर आई. उसे कभी भी पटियाला हाउस कोर्ट में पेश क‍िया जा सकता है. जांच एजेंसी के सूत्र के मुताबिक शाहीन,आदिल समेत चार आरोपियों को कोर्ट में आज थोड़ी देर बाद पेश किया जाएगा.

SC ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर कहा—राज्यपाल विधेयक लंबित नहीं रख सकते, समयसीमा तय नहीं

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने प्रेसिडेंशियल रफेरेंस पर फैसला सुनाते हुए कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा चुनी हुई सरकार कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए, ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है. बता दें प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता सुप्रीम कोर्ट ने कहा गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता. ज्यूडिशियल रिव्यू तभी होता है जब बिल एक्ट बन जाता है. तमिलनाडु फैसला  न्याय के दायरे में नहीं आता.  सबसे कठोर सिद्धांत यह है कि बिल के स्टेज पर कोई भी  मंज़ूरी को चुनौती दे सकता है.  हम यह भी साफ़ करते हैं कि जब बिल आर्टिकल 200 के तहत गवर्नर द्वारा रिज़र्व किया जाता है तो प्रेसिडेंट रिव्यू मांगने के लिए बाउंड नहीं हैं. अगर बाहरी विचार में, प्रेसिडेंट रिव्यू मांगना चाहते हैं, तो वह मांग सकते हैं, हालांकि, जो सवाल उठता है वह यह है कि जब गवर्नर मंज़ूरी नहीं देते हैं तो क्या समाधान है. जबकि कार्रवाई की मेरिट्स पर विचार नहीं किया जा सकता. कोर्ट द्वारा जांच किए जाने पर, लंबे समय तक, अनिश्चित, बिना किसी कारण के कार्रवाई न करने पर सीमित न्यायिक जांच होगी. सरकार को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ के निर्णय के मुताबिक चुनी हुई सरकार यानी कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए. ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते. लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंजूरी दे सकता है. बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है.  विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा कि विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है. गवर्नर की ओर से बिलों को मंजूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है.  SC ने कहा- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है' सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्यपाल के लिए समयसीमा तय करना संविधान की ओर से दी गई लचीलेपन की भावना के खिलाफ है. पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के पास केवल तीन संवैधानिक विकल्प हैं- बिल को मंजूरी देना, बिल को दोबारा विचार के लिए विधानसभा को लौटाना या उसे राष्ट्रपति के पास भेजना. राज्यपाल बिलों को अनिश्चितकाल तक रोककर विधायी प्रक्रिया को बाधित नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि न्यायपालिका कानून बनाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन यह स्पष्ट किया कि- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है.' जानें सुुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा राष्ट्रपति और राज्यपाल को अपने पास पेंडिंग बिल पर फैसला लेने के समयसीमा में बांधने के मसले पर राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंसियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला इस तरह है- 1. SC ने कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती.  2. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. 3.SC ने कहा चुनी हुई सरकार- कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए– ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते…लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. 4. आर्टिकल 142 प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता। यह राज्यपाल और राष्ट्रपति का अधिकार क्षेत्र में आता है. 5. SC ने कहा कि विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल अगर अपने पास रख लेता है, वह संघवाद के खिलाफ होगा. हमारी राय है कि राज्यपाल को विधेयक को दोबारा विचार के लिए लौटाना चाहिए. 6. सामान्य तौर पर राज्यपाल को मंत्रिमण्डल की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन विवेकाधिकार से जुड़े मामले में वह खुद भी फैसला ले सकता है. 7. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है 8. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है। 9. जब गवर्नर काम न करने का फैसला करते हैं, तो संवैधानिक  कोर्ट ज्यूडिशियल रिव्यू कर सकते हैं। कोर्ट मेरिट पर कुछ भी देखे बिना गवर्नर को काम करने का लिमिटेड निर्देश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा- समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोक कर नहीं रख सकते, लेकिन समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा।     कोर्ट ने कहा, "राज्यपाल अनंतकाल तक विधेयक रोककर नहीं बैठ सकते। समयसीमा लागू नहीं की जा सकती। संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 में लचीलापन रखा गया है। इसलिए किसी समयसीमा को राज्यपाल या राष्ट्रपति पर थोपना संविधान के ढांचे के खिलाफ है। यह शक्तियों के पृथक्करण के खिलाफ है।"      1. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है।     2. चुनी हुई सरकार को ड्राइवर सीट पर होना चाहिए। इस सीट पर 2 लोग नहीं हो सकते। हालांकि, राज्यपाल की भूमिका केवल औपचारिक … Read more