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IAS पदों पर IPS नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने तेलंगाना सरकार से पूछा कारण

हैदराबाद IAS यानी भारतीय प्रशासनिक सेवा कैडर के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नियुक्ति पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत में एक रिट याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह की नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने इस तरह के फैसलों के पीछे कानूनी वजह बताने के लिए कहा है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर तारीख तय की गई है। हैदराबाद के एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता वाडला श्रीकांत ने एक रिट याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता के वकील विजय गोपाल का कहना है कि सरकार का फैसला और खासतौर से जीओ 1342 (जारी 26 सितंबर) जारी करना और उन केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन है, जो दो भारतीय सेवाओं की अलग-अलग भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में बताते हैं। इस याचिका में विशेष रूप से तीन अधिकारियों का जिक्र किया गया है। ये IPS अधिकारी उन पदों को संभाल रहे हैं, जो आमतौर पर IAS कैडर के पास होते हैं। इनमें IPS स्टीफन रविंद्र हैं, जो सिविल सप्लाइज कमिश्नर और एक्स ऑफिशियो प्रधान सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। इनके अलावा IPS शिखा गोयल, जो विजिलेंस एंड एनफोर्समेंट में महानिदेशक हैं। साथ ही हैदराबाद के पूर्व आयुक्त सीवी आनंद का नाम है, जो गृह विभाग का विशेष मुख्य सचिव बनाया गया है। एडवोकेट गोपाल का कहना है कि इस तरह की क्रॉस कैडर नियुक्तियां IAS (Fixation of Cadre Strength) Regulations, 2016 जैसे नियमों का उल्लंघन करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IPS अधिकारियों की प्रधान सचिव रैंक पर नियुक्तियों की प्रथा साल 2014 में बीआरएस सरकार के समय से चली आ रही है। सरकार की तरफ से पेश हुए वकील राहुल रेड्डी ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की थी।

आसाराम की जमानत पर सवाल, पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी कार्रवाई

शाहजहांपुर  यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी कथावाचक आसाराम इलाज के लिए जमानत पर छूटा है. आसाराम की जमानत के खिलाफ शाहजहांपुर के रहने वाले पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पीड़िता के पिता का आरोप है कि आसाराम के गुर्गे उन्हें और उनके परिवार को धमका रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. मामले में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है. पीड़ित परिवार का क्या कहना? पीड़िता के पिता का कहना है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रचा जा सकता है. पीड़िता के पिता का कहना है कि आसाराम जब भी जेल से छूटता है तो वह गवाहों को गोली मरवाता है या फिर उन्हें गायब करवा देता है. पिता के पिता का कहना है कि आसाराम सुरेशानंद, भोलानंद और मुख्य गवार राहुल सचान को गायब करवा चुका है, जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है.  पीड़ित परिवार की सुरक्षा में 6 पुलिसकर्मी तैनात पीड़िता के पिता का कहना है कि वह बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर निकलता है और गवाहों और उनके परिवार को अपने गुर्गों के जरिए धमकता है. अगर वह बीमार है तो जेल के अंदर रहकर ही उसका इलाज हो सकता है जैसे बाकी कैदियों का होता है. उन्होंने कहा कि आसाराम को इलाज के नाम पर विशेष ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. पीड़िता के पिता ने आशंका जाहिर की है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार को जान का बड़ा खतरा हो सकता है. हालांकि पीड़िता के परिवार की सुरक्षा के लिए 6 पुलिसकर्मी तैनात हैं. कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा बता दें कि शाहजहापुर की पीड़िता ने दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी. जिस पर कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई. हाल ही में आसाराम को इलाजे के लिए 6 महीने की जमीनत मिली है. इसके बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आया है. इसी के बाद पीड़िता के पिता ने खतरे की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आसाराम की जमानत रद्द करने की मांग की है. 

के.के. मुहम्मद का विवादित बयान—ज्ञानवापी पर मुस्लिम दावा खत्म करने और हिंदू पक्ष से नई मांग न करने की अपील

नई दिल्ली आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व रीजनल डायरेक्टर केके मुहम्मद ने मंदिर-मस्जिद विवादों में संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि चर्चा के सेंटर में अब सिर्फ तीन जगहें- राम जन्मभूमि, मथुरा और ज्ञानवापी होनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि मुसलमानों को अपनी मर्जी से ये जगहें सौंप देनी चाहिए. केके मुहम्मद ने हिन्दुओं से कहा कि वे अब नया दावा न करें. ​​उन्होंने जोर देकर कहा कि दावों को बढ़ाने से सिर्फ और अधिक दिक्कतें पैदा होंगी. केके मुहम्मद की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़ी कई याचिकाएं देश भर की अदालतों में पेंडिंग हैं.  मुहम्मद ने बताया कि राम जन्मभूमि के अलावा मथुरा और ज्ञानवापी दो और जगहें हैं जो "हिंदू समुदाय के लिए उतनी ही ज़रूरी हैं जितनी मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना हैं." अयोध्या विवाद लेफ्ट प्रोपेगैंडा की वजह से पैदा हुआ: केके मुहम्मद अयोध्या विवाद पर बात करते हुए केके मुहम्मद ने 1976 में बीबी लाल की अगुआई में बाबरी मस्जिद की खुदाई में खुद के शामिल होने के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि यह विवाद एक कम्युनिस्ट इतिहासकार के असर की वजह से बढ़ा. उनके मुताबिक कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने मुस्लिम कम्युनिटी को इस बात के लिए मनाया कि वे मस्जिद के नीचे मंदिर होने के सबूत को खारिज कर दें.  मुहम्मद के मुताबिक ज्यादातर मुसलमान शुरू में विवादित जगह पर मंदिर बनाने की इजाजत देकर मामले को सुलझाने के पक्ष में थे.  मुहम्मद ने कहा कि इतिहासकार आर्कियोलॉजिस्ट नहीं थे और खुदाई के किसी भी स्टेज पर वह उस जगह पर नहीं गया थे. उन्होंने झूठी बातें फैलाने की आलोचना की और उस समय लोगों की राय पर असर डालने वालों के बीच सीधी जानकारी की कमी की ओर इशारा किया.   "उस बहुत जरूरी समय में एक कम्युनिस्ट इतिहासकार ने इन सब चीजों में दखल दिया और फिर मुस्लिम समुदाय को यकीन दिलाया कि प्रोफेसर लाल ने उस जगह की खुदाई की थी और उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे मंदिर के पहले से होने का पता चले. तो यह उनकी बनाई हुई चीज थी. इसलिए मुसलमानों के पास कोई और रास्ता नहीं था." उन्होंने कहा, "वे कभी उस जगह पर नहीं गए थे, न खुदाई से पहले, न खुदाई के दौरान और न ही खुदाई के बाद. इसलिए बिना सब्जेक्ट जाने, वे इस तरह की झूठी कहानियां फैला रहे थे. इसलिए किसी को तो इसका जवाब देना ही था. इसलिए पहली बार प्रोफेसर बीबी लाल जिन्होंने टीम को लीड किया था, ने इसका करारा जवाब दिया." मंदिर-मस्जिद बहस के बड़े मुद्दे पर केके मुहम्मद ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा, "हमें बहुत सावधान रहना चाहिए." उन्होंने राम जन्मभूमि के साथ-साथ मथुरा और ज्ञानवापी को हिंदू समुदाय के लिए खास महत्व वाली जगहों के तौर पर पहचाना और मुसलमानों के लिए उनकी अहमियत मक्का और मदीना जितनी बताई.  उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मुसलमानों को अपनी मर्जी से ये तीन जगहें सौंप देनी चाहिए." धार्मिक जगहों से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के बारे में सवालों के जवाब में केके मुहम्मद ने कहा, "इन तीनों के अलावा हिंदू समुदाय की तरफ से कोई और मांग नहीं आनी चाहिए." उन्होंने चेतावनी दी कि और दावे करने से समस्या हल नहीं होगी और आगे टकराव का खतरा रहेगा.  केके मुहम्मद ने कहा, "देश में एकता लाने का एकमात्र हल यह होना चाहिए कि ये तीनों जगहें हिंदू समुदाय को दे दी जाएं और हिंदू आगे से जगहों की लंबी लिस्ट लेकर आना बंद कर दें. इससे समस्या हल नहीं होगी." उन्होंने दोनों समुदायों से संयम और समझौते की जरूरत पर जोर दिया.  उन्होंने ऐसी मांगों को लेकर अंदरूनी कंट्रोल की कमी पर भी कमेंट किया और कहा, "हिंदू समुदाय के अंदर की समस्या को कंट्रोल करने वाला कोई नहीं है." उन्होंने ताजमहल के बारे में कुछ हिंदू ग्रुप्स के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और उन्हें "पूरी तरह से झूठा" बताया. मुहम्मद ने जगह के ऐतिहासिक ट्रांसफर के बारे में विस्तार से बताया, यह देखते हुए कि यह असल में राजा मान सिंह का महल था, जिसे बाद में जय सिंह और फिर शाहजहां को ट्रांसफर कर दिया गया और इसके सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स बीकानेर और जयपुर म्यूज़ियम में सुरक्षित रखे गए हैं. उन्होंने ऐसे दावों को कट्टर हिंदू ग्रुप्स की यह दावा करने की एक और कोशिश बताया कि सब कुछ उनका है.  'BJP के 11 साल ASI के लिए एक काला युग' सांस्कृतिक विरासत के बचाव पर केके मुहम्मद ने कहा कि सरकार से जो उम्मीदें थीं खासकर जगहों की सुरक्षा को लेकर, वे "पूरी नहीं हुईं." उन्होंने मौजूदा समय को "आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया का काला युग" बताया, और खास तरक्की न होने की आलोचना की. उन्होंने आगे कहा कि चंबल में बटेश्वर मंदिर कॉम्प्लेक्स में उनका अपना रेस्टोरेशन का काम हाल के सालों में काफी धीमा हो गया है, काफी कोशिशों के बावजूद पिछले ग्यारह सालों में सिर्फ दस मंदिरों का ही रिस्टोरेशन किया जा सका है.   

मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग, हैदराबाद से कुवैत जा रही इंडिगो फ्लाइट को बम की धमकी मिलने के बाद

मुंबई  हैदराबाद से कुवैत जा रही इंडिगो की फ्लाइट की मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है. बताया जा रहा है कि फ्लाइट में 'बम' की धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फ्लाइट की मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग करा ली. सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं. विमान को एयरपोर्ट के आइसोलेशन बे (Isolation Bay) में भेज दिया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह इंडिगो की एक फ्लाइट ने हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुवैत के लिए उड़ान भरी थी. फ्लाइट के उड़ान भरने के बाद हैदराबाद एयरपोर्ट को एक धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसमें विमान में बम होने की धमकी थी. इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने फ्लाइट को तुरंत मुंबई डायवर्ट कर दिया, जहां फ्लाइट की सुरक्षित लैंड हो चुकी है और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि लैंडिंग के बाद विमान को आइसोलेशन पार्क (अलग पार्किंग) में ले जाया गया, जहां बम डिस्पोजल स्क्वायड, सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और अन्य सुरक्षा टीमों ने पूर्ण जांच शुरू कर दी. प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला है.

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी—दिसंबर में बारिश का कहर, कई इलाकों में कड़ाके की ठंड

नई दिल्ली  मौसम विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवात दित्वा (Cyclone Dithwa) के कारण बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी और उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी क्षेत्र में मौसम बिगड़ गया है। विभाग ने 1 दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तेलंगाना में भारी बारिश (Weather Update Heavy Rain) की संभावना जताई है। उत्तरी तमिलनाडु में गरज, बिजली और 70-80 किमी/घंटा की तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि दक्षिणी तमिलनाडु में 60–70 किमी/घंटा की हवा और बिजली-गरज के साथ बारिश का अनुमान है। 1 से 4 दिसंबर के बीच तमिलनाडु, तटीय आंध्र, यनम और रायलसीमा में तथा 2 से 4 दिसंबर तक केरल और माहे क्षेत्र में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।   MP में शीतलहर दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में लगातार दूसरे दिन भी शीतलहर का असर बना रहा। प्रदेश में हवाओं का रुख उत्तरी और उत्तर-पूर्वी रहने से न्यूनतम तापमान गिर रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह स्थिति अगले दो-तीन दिन बने रहने की संभावना है। नौगांव में प्रदेश का न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि भोपाल सहित 10 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।   बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान दितवाह सक्रिय बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान दित्वा तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट के आसपास सक्रिय है, जो उत्तर दिशा में आगे बढ़ सकता है। साथ ही उत्तरी हरियाणा के पास हवा के ऊपरी स्तर पर पश्चिमी विक्षोभ भी बना हुआ है। IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में अगले 48 घंटों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, परंतु उसके बाद तीन दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। मध्य भारत में दो दिनों तक तापमान 2–3 डिग्री बढ़ सकता है, उसके बाद यह स्थिर रहेगा। वहीं उत्तर-पूर्व भारत में अगले 48 घंटों तक तापमान स्थिर रहने के बाद तीन दिनों में 3 से 4 डिग्री की गिरावट आ सकती है।  गुजरात में अगले चार दिनों तक तापमान 2–3 डिग्री तक गिर सकता है। महाराष्ट्र के उत्तरी हिस्सों में भी आगामी दो दिनों में तापमान में 2–3 डिग्री की कमी दर्ज हो सकती है। UP में करवट लेगा मौसम उत्तर प्रदेश में भी मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। मंगलवार से न्यूनतम तापमान में 1–2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह के समय हल्का कोहरा या धुंध छाए रहने की संभावना है। रविवार को अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 8.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सीजन में पहली बार 25 डिग्री से नीचे रहा। 27 नवंबर को तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो चार वर्षों में नवंबर का सबसे कम तापमान था। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि कड़ाके की ठंड दिसंबर के मध्य से शुरू होगी। 15 दिसंबर के बाद मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे, जिससे बर्फीली हवाएं मैदानों की ओर बढ़ेंगी।

एयरपोर्ट चार्ज होगा महंगा: दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी

नई दिल्ली दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरना अब यात्रियों के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। दोनों प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यूजर चार्जेस में 22 गुना तक की भारी बढ़ोतरी की आशंका है। यह स्थिति टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) के हालिया आदेश के बाद बनी है, जिसमें 2009 से 2014 की अवधि के लिए टैरिफ गणना का तरीका बदल दिया गया है। नई गणना के अनुसार, इन पांच वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। अब यह नुकसान यात्रियों से वसूले जाने वाले चार्जेज जैसे UDF, लैंडिंग और पार्किंग फीस के जरिए पूरा किया जा सकता है। इससे हवाई किराए पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और टिकटों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इस फैसले के खिलाफ AERA, घरेलू एयरलाइंस और लुफ्थांसा, एयर फ्रांस और गल्फ एयर जैसी विदेशी एयरलाइंस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, सुनवाई बुधवार को होगी। सूत्रों के मुताबिक, आदेश लागू होने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों से वसूला जाने वाला यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) 129 रुपए से बढ़कर 1,261 रुपए हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यह फीस 650 रुपए से बढ़कर 6,356 रुपए तक जा सकती है। मुंबई एयरपोर्ट में भी तस्वीर बेहद चिंताजनक है- घरेलू यात्रियों की UDF 175 रुपए से बढ़कर 3,856 रुपए, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की फीस 615 रुपए से बढ़कर 13,495 रुपए तक पहुंच सकती है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या पर गंभीर असर पड़ेगा। एक अधिकारी के अनुसार, “एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के बीच कानूनी विवादों का खामियाजा यात्रियों को नहीं भुगतना चाहिए।” विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद करीब दो दशक पुराना है। 2006 में एयरपोर्ट्स के निजीकरण के दौरान एसेट्स के मूल्यांकन से जुड़े कई बिंदुओं पर विवाद शुरू हुआ था। AERA हर पांच साल में एयरपोर्ट टैरिफ तय करता है, जिसमें ऑपरेटर के निवेश और कमाई को आधार माना जाता है लेकिन AERA का गठन 2009 में हुआ, जबकि दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट की जिम्मेदारी उससे तीन साल पहले DIAL (GMR समूह) और MIAL (तब GVK, अब अडानी समूह) को सौंप दी गई थी। उस समय उपलब्ध एसेट्स का डेटा विश्वसनीय नहीं था। इसलिए सरकार और निजी ऑपरेटरों के बीच Hypothetical Regulatory Asset Base (HRAB) पर सहमति बनी, जो संपत्ति का काल्पनिक मूल्य निर्धारित करता है ताकि टैरिफ तय किया जा सके। किस मुद्दे पर टकराव? FY09–14 की टैरिफ गणना में AERA ने केवल एरोनॉटिकल एसेट्स—जैसे रनवे, टर्मिनल, चेक-इन काउंटर—को शामिल किया लेकिन ऑपरेटर DIAL और MIAL का कहना था कि नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स, जैसे ड्यूटी फ्री दुकानें, लाउंज और पार्किंग, का मूल्य भी शामिल होना चाहिए। AERA के इस फैसले को 2018 में TDSAT और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। बाद में ऑपरेटरों ने मंत्रालय की 2011 की चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार का आवेदन दिया। कोर्ट ने मामला फिर से TDSAT को भेज दिया। TDSAT का पलटा हुआ आदेश जुलाई में TDSAT ने अपना पुराना फैसला बदलते हुए ऑपरेटरों के पक्ष में निर्णय दिया और कहा कि टैरिफ निर्धारण में नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया कि दोनों एयरपोर्ट्स को FY09–14 के दौरान 50,000 करोड़ रुपए अधिक कमाने चाहिए थे, जिसकी भरपाई अब UDF बढ़ाकर की जा सकती है। भले ही मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन एयरपोर्ट शुल्कों में तेजी से बढ़ोतरी संसद में भी चिंता का विषय रही है। एक संसदीय समिति ने इस साल की शुरुआत में मंत्रालय को तलब कर कहा था कि निजीकरण के बाद एयरपोर्ट चार्जेज कई गुना बढ़े हैं, जिससे यात्रियों पर भारी बोझ पड़ रहा है।

फॉरेन में पासपोर्ट गायब? जानें इंडियन ट्रैवलर्स के लिए सबसे आसान रिटर्न रास्ता

विदेश में अपने पासपोर्ट का खो जाना किसी ट्रैवलर के लिए सबसे डरावना अनुभव हो सकता है। आपकी पूरी यात्रा संकट में पड़ सकती है और तनाव का स्तर बढ़ सकता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं—यदि आप सही स्टेप्स फॉलो करें, तो यह परेशानी जल्दी हल हो सकती है। तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं जैसे ही आपको पता चले कि आपका पासपोर्ट खो गया है या चोरी हो गया है, तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाकर रिपोर्ट दर्ज कराएँ। पुलिस रिपोर्ट आपको लीगल सुरक्षा और आधिकारिक प्रमाण देती है कि आपका पासपोर्ट गुम या चोरी हो चुका है। इस रिपोर्ट की कॉपी आगे की हर प्रक्रिया में जरूरी होगी। इंडियन एंबेसी या हाई कमीशन से संपर्क करें पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद नज़दीकी इंडियन एंबेसी या हाई कमीशन से संपर्क करें। यही संस्था विदेश में आपकी पहचान को वैरीफाई कर सकती है और आपको भारत वापस लौटने में मदद कर सकती है। इमरजेंसी सर्टिफिकेट: देश वापसी का सबसे तेज़ रास्ता अगर समय बहुत कम है और आपको जल्दी से इंडिया लौटना है, तो एंबेसी इमरजेंसी सर्टिफिकेट (EC) जारी कर सकती है। यह एक बार का ट्रेवल डॉक्यूमेंट होता है और पासपोर्ट की जगह नहीं लेता, लेकिन सीधे भारत लौटने का सबसे तेज़ तरीका है। इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए आपको चाहिए: पुलिस रिपोर्ट आधार कार्ड या पैन कार्ड पासपोर्ट फोटो एप्लीकेशन फीस टेंपरेरी पासपोर्ट: यात्रा जारी रखने का विकल्प यदि आपकी ट्रिप अभी खत्म नहीं हुई और आप यात्रा जारी रखना चाहते हैं, तो एंबेसी टेंपरेरी पासपोर्ट भी जारी कर सकती है। इसमें इमरजेंसी सर्टिफिकेट से अधिक समय लगता है क्योंकि आपकी पहचान की अधिक विस्तृत जांच की जाती है। फ्लाइट बुकिंग और इमीग्रेशन इमरजेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद आप फ्लाइट बुक कर सकते हैं। एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन अधिकारियों द्वारा EC और पुलिस रिपोर्ट की क्रॉस‑वेरिफिकेशन की जाएगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि आप सुरक्षित और कानूनी रूप से अपने देश लौट सकें। एक्सपर्ट टिप्स: डिजिटल और फिजिकल कॉपी साथ रखें हमेशा अपने पासपोर्ट की फोटोकॉपी साथ रखें। या पासपोर्ट की डिजिटल कॉपी ईमेल या क्लाउड स्टोरेज में सेव करें। यह छोटी तैयारी एंबेसी वेरिफिकेशन और इमरजेंसी सिचुएशन में आपकी मदद कर सकती है।  

आसिम मुनीर की स्थिति पर उठे सवाल: CDF पद नहीं मिला, सेना प्रमुख का कार्यकाल भी पूरा—क्या बदला राजनीतिक समीकरण?

CDF नियुक्ति और सेना प्रमुख पद पर बदलाव के बाद आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल—क्या शहबाज़ सरकार का रुख बदला? आसिम मुनीर की स्थिति पर उठे सवाल: CDF पद नहीं मिला, सेना प्रमुख का कार्यकाल भी पूरा—क्या बदला राजनीतिक समीकरण? पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व में बदलाव से बढ़ी चर्चाएँ, आसिम मुनीर को लेकर शहबाज़ सरकार की रणनीति पर सवाल लाहौर   हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सत्ता की लड़ाई बिल्कुल अलग होती है. यहां पर सिर्फ नेता प्रधानमंत्री बनने के लिए आमने-सामने नहीं होते, इसका एक और पहिया होता है- सेना. कोई कितने भी बहुमत से यहां सरकार बना ले, उसे हमेशा डर तख्तापलट का लगा रहता है. इसका सीधा उदाहरण इस वक्त पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद इमरान खान हैं. यही वजह है कि शहबाज शरीफ ने सेना से कोई पंगा लेने के बजाय आसिम मुनीर से बनाकर चलते रहे. भारत-पाकिस्तान के बीच जब मई में जंग जैसे हालात बन गए, तो युद्धविराम के बाद खुद ही आसिम मुनीर ने जीत घोषित कर दी और इसका सेहरा भी अपने सिर बांध लिया. शहबाज शरीफ इस पूरे मामले में सिर्फ उनके लिए तालियां ही बजाते रहे. उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दे दी गई और विदेश दौरे पर भी आसिम मुनीर अकेले ही जाने लगे. कुल मिलाकर मान लिया गया था कि उन्हें सिर्फ एक ऑफिशियल टाइटल की जरूरत है बाकी सत्ता उनकी मुट्ठी में है. क्या बदल गया है शहबाज शरीफ का मूड? पाकिस्तान में विवादित 27वें संविधान संशोधन के जरिये आसिम मुनीर की ताकत को बढ़ाया गया. उनके लिए सीडीएफ नाम का नया पद गढ़ा गया, जिस पर बैठने के बाद वे ताउम्र पाकिस्तान के अघोषित तानाशाह बने रहेंगे. इस बात का नोटिफिकेशन जारी होकर ये काम जल्द से जल्द होना था, लेकिन इसी बीच अटकलें ये लगाई जा रही हैं कि शहबाज शरीफ का मूड बदल गया है. दरअसल पाकिस्तान के उपचुनाव का रिजल्ट हाल ही आया और उनकी पार्टी PMLN की ताकत बढ़ने के बाद वे इस काम में देरी कर रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि उनके भाई नवाज शरीफ भी इसमें सलाह-मशविरा दे रहे हैं कि अगर आसिम मुनीर को अल्टीमेट पावर मिली, तो उनकी औकात कुछ नहीं रह जाएगी. आसिम मुनीर -शहबाज शरीफ. आसिम मुनीर कब बनेंगे CDF ? आसिम मुनीर को 29 नवंबर, 2022 को सेना प्रमुख बनाया गया था. इस हिसाब से 29 नवंबर को उनका तीन साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है. अब तक नए सेना प्रमुख के तौर पर उनके नाम का नोटिफिकेशन भी नहीं आया है. वैसे तो पाकिस्तानी संसद ने सेना प्रमुख के कार्यकाल को 5 साल कर दिया था, ऐसे में वे पद पर तो बने रहेंगे लेकिन इसका नोटिस अब तक नहीं आया है. वहीं पिछले महीने हुए संविधान संशोधन में पाकिस्तान में CJCSC की जगह CDF पद बनाया गया जो तीनों सेनाओं के बीच तालमेल रखेगी. इस पर आसिम मुनीर को बैठना है. CJCSC शाहिद शमशाद मिर्जा का भी रिटायरमेंट 27 नवंबर को हो गया, पर मुनीर का नया पद अस्तित्व में नहीं आ पाया है. जब होना ही है, तो देरी क्यों? हालांकि इस मामले में तस्वीर साफ करने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ आए और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक्स अकाउंट से लिखा – ‘CDF की नोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होगी.’ इस मामले में हो रही देरी को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा. इसी बीच यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने भी 27वें संविधान संशोधन में देरी को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर पाकिस्तान बौखला गया था.  

India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर

ट्रंप टैरिफ की हवा निकाल दी! मोदी सरकार के प्लान-B ने बचाई भारतीय अर्थव्यवस्था—जानें कैसे हुआ कमाल India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर मोदी सरकार का प्लान-B आया काम, ट्रंप टैरिफ का असर किया बेअसर—भारत ने ऐसे पलट दिया खेल   नई दिल्ली यह कहना कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव पूरी तरह असफल हो गया, थोड़ी जल्दबाजी होगी. लेकिन ये तो अब कहा ही जा सकता है कि भारत ने अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल लिया है. दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर ट्रंप की दबाव नीति काम नहीं आई.  दरअसल, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2% रही, जो कि उम्मीद से बढ़कर है. क्योंकि RBI ने 6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने भी 7.0-7.6 फीसदी के बीच जीडीपी ग्रोथ रहने का भरोसा जताया था, यानी हर पैमाने पर भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहतर करती दिख रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में 9.1% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7.2% उछाल देखने को मिली है. सर्विस-सेक्टर का भी शानदार प्रदर्शन रहा है. अमेरिका ने थोपा एकतरफा टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीति अब फेल होती नजर आ रही है, ट्रंप ने भारत में एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया, उन्हें लगा है कि टैरिफ के दबाव में भारत झुक जाएगा, और वो अपनी बातें मनवाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और अब उसका परिणाम भी दिख रहा है कि ट्रंप की दबाव नीति की हवा निकल चुकी है. बड़ेबोले ट्रंप ने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डैड इकोनॉमी' तक करार दे दिया था.  लेकिन हकीकत में भारतीय अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए ट्रंप ने चाल चली थी, उसे सरकार ने अपने प्लान-बी से फ्लॉप कर दिया, और भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े ट्रंप की दबाव नीति को करारा जवाब है. कहा तो ये भी जा रहा है कि तीसरी तिमाही में और बेहतर जीडीपी के आंकड़े आ सकते हैं.  क्या है भारत का प्लान-B अब आइए जानते हैं कि आखिर भारत ने ऐसा क्या किया, जिससे ट्रंप टैरिफ बेअसर हो गया. दुनिया जानती है कि खपत के लिहाज भारत आज के दौर में सबसे बड़ा बाजार है, हर कोई इस बाजार में प्रवेश करना चाहता है. क्योंकि भारत में डिमांड बनी हुई है. यही देश की सबसे बड़ी ताकत है.  दरअसल, बात बेनतीजा होने के बाद अमेरिका ने जिस तरह से भारत पर रूसी तेल खरीदने का बहाना बनाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया, उसी दिन से भारत ने अपना प्लान-B को जमीन पर उतारने के लिए काम करना शुरू कर दिया. टैरिफ के शुरुआत असर को कम करने के लिए भारत ने काफी हद तक घरेलू मांग, निवेश और नीतियों पर फोकस किया. इसी कड़ी में आयकर में छूट (12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं) की व्यवस्था लागू की गई.  टैरिफ से विदेशी मांग थोड़ी मंद पड़ी, लेकिन इस बीच घरेलू खपत, निर्माण और सेवाएं तेज हो रही हों, जिससे GDP में कम असर दिखना स्वाभाविक है. टैरिफ को बेअसर करने के लिए सरकार ने खपत, कैपेक्स और रिफॉर्म पर जबरदस्त काम किया, जिसे आप Plan-B कह सकते हैं.  एकसाथ उठाए गए कई कदम सरकार की रणनीति दोतरफा रही, एक घरेलू मांग को बरकरार रखना और निवेश को प्रोत्साहित करना. अमेरिकी टैरिफ से निर्यात सेक्टर प्रभावित हुआ, जो अभी भी कुछ हद तक जूझ रहे हैं. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस की ताकत से GDP मजबूत बनी हुई है. अमेरिकी टैरिफ का इकोनॉमी पर कम प्रभाव के लिए ब्याज दरों में कटौती, और जीडीपी दरों में बदलाव जैसे भी कदम उठाए गए, जिससे घरेलू डिमांड को ताकत मिली.  बता दें, सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की गई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपना एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है.  अमेरिकी विकल्प के तौर पर करीब 50 नए देशों से भारत की बातचीत चल रही है.  

चुनावी संकट गहराया: जमात का दावा—बांग्लादेश में स्वतंत्र मतदान पर खतरा

ढाका  बांग्लादेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज है। यूनुस की अंतरिम सरकार के आने के बाद से देश में राजनीतिक संकट गहराया हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और विरोध के मामले सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब तो यूनुस के समर्थक भी बगावत पर उतर आए हैं। दरअसल, कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने फरवरी 2026 के चुनाव की निष्पक्षता पर शक जताया है। राजशाही जिले में आठ इस्लामी पार्टियों की एक रैली को संबोधित करते हुए, जमात नेता मिया गुलाम पोरवार ने कहा कि सभी पार्टियां आने वाले चुनाव में हिस्सा लेने के लिए सहमत हो गई हैं। हालांकि, चुनाव की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल अभी भी बना हुआ है। खुलना कोर्ट गेट पर हुई हत्याओं को लेकर जमात नेता पोरवार ने कहा, "जिस देश में कोर्ट के सामने हत्याएं हो सकती हैं, वहां इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऐसे प्रशासन के तहत पोलिंग स्टेशनों पर वोटिंग में धांधली या हत्याएं नहीं होंगी।" रविवार को मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज कोर्ट के बाहर दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। किसी खास पार्टी का नाम लिए बिना, जमात नेता ने कहा कि जमात की बैठकें, अभियान और सभाओं के दौरान एक समूह ने हमले, मारपीट और तोड़फोड़ किए, जिसमें महिलाओं पर भी हमले शामिल हैं। इसके साथ ही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए, पोरवार ने कहा, "अगर अधिकारी ऐसे हमलों को नहीं रोक सकते, तो उनकी देखरेख में हुए चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकते। सबको बराबर मौका नहीं दिया गया है। कई अधिकारियों की पोस्टिंग में चुपके से हेरफेर करके प्रशासन से समझौता किया गया है, जिससे एक पार्टी को फायदा हो रहा है।" जमात नेता ने कहा कि चुनाव से पहले, हर पार्टी को बराबर मौका मिलना चाहिए। यह जरूरी है। इस बीच, द बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आरोप लगाया है कि एक राजनीतिक दल बीएनपी और देश दोनों के खिलाफ साजिश कर रही है। रविवार को ढाका में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मिर्जा अब्बास ने जमात पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें देश और विदेश के साथियों का समर्थन है और वे इस देश के लोगों को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। वे लोगों के साथ ही हमारी माताओं-बहनों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”