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इमरान खान के सहयोगियों में आक्रोश: ‘आसिम लॉ’ और शहबाज की कथित Puppetry पर भड़के नेता

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि इमरान खान रावलपिंडी की अडियाला जेल में बेहद खराब परिस्थितियों में रखे जा रहे हैं और उन्हें लगभग पूरी तरह से अकेलेपन में रखा गया है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के अंदरूनी सूत्रों ने दावा किया है कि खान को कई बार मारा गया है, हाई-इंटेंसिटी कॉन्फाइनमेंट में रखा गया है और हफ्तों से उनका परिवार या कानूनी टीम उनसे मिल नहीं पाई है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और विश्वासपात्र डॉ. सलमान अहमद ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने वहां के शासन-प्रशासन को सेना प्रमुख और नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की कठपुतली करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुनीर के इशारे पर जानबूझकर इमरान खान को यातना दी जा रही है। डॉ. अहमद ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान वर्तमान में असीम लॉ के तहत काम कर रहा है, जहां सेना प्रमुख का अधिकार संवैधानिक और न्यायिक ढांचे को दरकिनार करता है। डॉ. अहमद का दावा है कि देश के मुख्य लोकतांत्रिक संस्थान पूरी तरह से समझौता किए गए हैं। संसद, न्यायपालिका, पुलिस और सरकार सब आसिम मुनीर द्वारा नियंत्रित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को आसिम मुनीर की कठपुतलियों से ज्यादा कुछ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इन लोगों के पास नाममात्र की शक्ति है। हाल ही में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन को आलोचकों ने संवैधानिक तख्तापलट बताया है। इस संशोधन ने जनरल मुनीर को जीवन भर के लिए प्रतिरक्षा प्रदान की है, उन्हें फील्ड मार्शल का पद दिया है और उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में सभी तीनों सेनाओं और परमाणु शस्त्रागार पर अभूतपूर्व नियंत्रण दिया है। डॉ. अहमद के हमले का मुख्य केंद्र अडियाला जेल में इमरान खान की लंबी हिरासत और उनके साथ किया गया व्यवहार था। उन्होंने आरोप लगाया कि आसिम मुनीर इमरान खान को यातना देकर पानी माप रहे हैं और जेल में पहले दिन से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान की लगातार कैद केवल सेना प्रमुख के इमरान खान की अतुलनीय लोकप्रियता के गहरे डर को दर्शाती है, भले ही उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर गंभीर सरकारी कार्रवाई हुई हो। डॉ. अहमद ने कहा कि इमरान खान एक राजनीतिक बंदी हैं, लेकिन उन्हें एक कैदी के अधिकार भी नहीं दिए जाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री के अधिकार तो भूल ही जाइए। परिवार को क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा? इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने CNN-News18 से कहा कि सरकार इस मुद्दे को बेवजह बड़ा बना रही है. ‘हमसे मिलने देने में दिक्कत क्या है? अगर वे मिलने देते तो ये तमाम अटकलें खत्म हो जातीं,’ उन्होंने कहा. अलीमा का दावा है कि वे नहीं मानतीं कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना इमरान खान को शारीरिक नुकसान पहुंचाएगी, लेकिन सरकार का यह रवैया जनता में गुस्सा बढ़ा रहा है. क्या हालत सच में खराब है? PTI सूत्रों के मुताबिक इमरान खान की शारीरिक स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है. यह गिरावट लगातार दबाव, खराब जेल परिस्थितियों और पूरी तरह सीमित बातचीत के कारण हो रही है. पहले KP के मुख्यमंत्री उनसे मिल पाते थे, लेकिन अब उन मुलाकातों को भी रोक दिया गया है. सूत्रों का दावा है कि जो भी सेहत को लेकर अपडेट दिया जा रहा था, वह वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए था. क्या सड़कों पर विरोध शुरू हो सकता है? अलीमा खानम का कहना है कि जनता का गुस्सा अब फूटने वाला है. उन्होंने कहा, ‘ये होना ही है. सवाल कब का है. अगर इमरान खान की बहनों ने खुलकर बातें बताईं तो पूरे पाकिस्तान में विरोध भड़क सकता है’. परिवार अब कोर्ट में याचिका दायर कर रहा है कि इमरान खान को तुरंत कोर्ट के सामने पेश किया जाए.

जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ में अलर्ट: दरवाज़ा खटखटाकर आतंकियों ने मांगा खाना, पुलिस को कॉल के बाद बड़ा अभियान शुरू

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ और आसपास के इलाके में एक बार फिर से आतंकी हलचल के संकेत मिले हैं. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात बसंतगढ़ के ऊपरी इलाके में स्थित चिंगला बलोठा गांव में तीन संदिग्ध आतंकियों ने एक बकरवाल परिवार के घर का दरवाजा खटखटाया और खाना मांगा. इससे घर का मालिक घबराकर भाग गया और इस बारे में पुलिस को जानकारी दी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर का मालिक अचानक तीन अजनबी युवकों को देखकर घबरा गया और मौके का फायदा उठाकर भाग निकला. उसने तुरंत पास के पुलिस चौकी और सेना को सूचना दी. इलाके में आतंकियों के होने का इनपुट मिलने के बाद रात से ही सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), CRPF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने चिंगला बलोठा समेत ऊपरी बसंतगढ़ के घने जंगलों, गुफाओं और चोटियों को घेर लिया है. ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की जा रही है. गुरुवार सुबह तक ये सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है. बता दें कि बसंतगढ़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा (LoC) से महज कुछ किलोमीटर दूर है और पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए डोडा-किश्तवाड़ के घने जंगलों तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता रहा है. हाल के महीनों में भी इसी इलाके में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं और कई आतंकी मारे जा चुके हैं.  

आत्मनिर्भरता की ओर कदम: कोयला खनन सूची में 18 नई कंपनियां शामिल

नई दिल्ली भारत में कोयला खनन को रफ्तार देने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थाओं को भी अधिकृत एजेंसियों की सूची में शामिल कर लिया है। 26 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खान व खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की नेबेट (QCI-NABET) द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से खनिज खोज संबंधी कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया है। इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज होगी तेज सरकार का कहना है कि इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज तेज होगी, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और देश के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18 नई एजेंसियों को किया गया शामिल कोयला मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले से 18 नई एजेंसियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए अधिकृत सूची में जोड़ा गया है। इससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोस्पेक्टिंग कार्यों के लिए एजेंसी चुनने में ज्यादा लचीलापन और विकल्प मिलेंगे। नई मान्यता प्राप्त एजेंसियों में ये शामिल हैं     इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, कोलकाता;     मेरॉक्स माइनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम;     यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;     माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;      नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन – टाटा स्टील लिमिटेड, पूर्वी सिंहभूम;     माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिदवान;     रेम्को कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रपुर;     साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड, गुरुग्राम;     जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, धर्मपुरी;     नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट खासी हिल्स;     सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली;     कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची;     रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     सीएमएमसीओ टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड, हैदराबाद;     जसनी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     एपीसी ड्रिलिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, नामक्कल शामिल हैं। कोयला और लिग्नाइट की खोज को मिलेगी रफ्तार सरकार का मानना है कि अधिकृत प्रोस्पेक्टिंग एजेंसियों की संख्या बढ़ाने से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे अन्वेषण प्रक्रिया में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम कोयला और लिग्नाइट की खोज की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित एजेंसी सूची से शुरुआती चरण में ही खनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे देश में संसाधन विकास की गति तेज होगी। इसके साथ ही कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता में सुधार होगा, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आधार अपडेट: UIDAI ने पेश किए नए नियम, जानें क्या हुआ बदलाव

 नई दिल्‍ली आधार जारी करने वाली संस्‍था UIDAI ने आधार नामांकन और आधार में सुधार को लेकर कुछ नियमों में बदलाव कर दिया है. इस बदलाव से आधार कार्ड बनवाने वाले और अपडेट कराने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं. इस नियम को  Third Amendment Regulations, 2025 के तहत नोटिफाई किया गया है.  नए नियमों के तहत डॉक्‍यूमेंट्स को अपडेट किया गया है, जिसका इस्‍तेमाल पहचान, एर्डेस, रिलेशन या डेट ऑफ बर्थ के प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है. यूआईडीएआई ने यह बदलाव बच्‍चों, युवाओं और सीनियर सिटीजन के सभी आयु वर्गों के लिए किया है.  अगर आप भी अपने आधार कार्ड को अपडेट कराने या बनवाने जा रहे हैं तो इन डॉक्‍यूमेंट्स के बारे में जान लीजिए.  नाम बदलने के लिए डॉक्‍यूमेंट्स  UIDAI ने नाम सुधारन के लिए कई रह के पहचान को अप्रूव किया है. इसमें पासपोर्ट सबसे भरोसेमंद डॉक्‍यूमेंट के तौर पर होता है. इसमें आपकी फोटो, नाम, डेट ऑफ बर्थ और एड्रेस एक साथ दर्ज होते हैं. इसके अलावा PAN कार्ड, वोटर ID (EPIC), ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी पहचान पत्र और विवाह प्रमाण पत्र भी नाम में अपडेट कर सकते हैं. एड्रेस के लिए जरूरी डॉक्‍यूमेंट एड्रेस प्रूफ के लिए यूआईडीएआई ने बहुत से डॉक्‍यूमेंट्स को मान्‍य किया है . इसमें पासपोर्ट, बैंक पासबुक/बैंक स्टेटमेंट (अपडेटेड), बिजली-पानी-गैस के बिल (तीन महीने के भीतर जारी) शामिल हैं. किराए पर रहने वाले नागरिग, रेंट एग्रीमेंट दे सकते हैं. साथ ही हाउस या प्रॉपर्टी टैक्‍स की रसीद, आईडी कार्ड, राशन कार्ड भी दे सकते हैं.  डेट ऑफ बर्थ के लिए डॉक्‍यूमेंट जन्‍मतिथि अपडेट कराने के लिए नागरिकों के अभी बहुत से डॉक्‍यूमेंट देने होते हैं, जिसमें आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, या 10वीं-12वीं की मार्कशीट शामिल हैं. फिजिकल पैन कार्ड भी दिया जा सकता है. ई-पैन योग्‍य नहीं माना जाता है.  अब क्‍या हुआ बदलाव?  यूआईडीएआई ने नए नियम में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक अब  एक ही दस्तावेज जिसमें फोटो, नाम और पता तीनों हैं, आधार अपडेट के लिए पर्याप्‍त माना जाएगा. पहले अलग-अलग प्रमाण देना जरूरी होता था, लेकिन अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से प्रॉसेस पूरा किया जा सकता है. नाम बदलना, एड्रेस चेंज, डेट ऑफ बर्थ अपडेट करना या रिलेशन जोड़ना, ये सभी काम अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से बदले जा सकते हैं.  आधार कैसे अपडेट कर सकते हैं?      अगर आप आधार अपडेट करना चाहते हैं तो सबसे पहले सही डॉक्‍यूमेंट्स को तैयार रखना होगा.      अब नजदीकी आधार सेंटर्स या ऑनलाइन के लिए माई आधार ऐप पर जाना होगा.      यहां आप अपने डॉक्‍यूमेंट के साथ अपडेट करने वाला फार्मा भरकर जमा कर सकते हैं.      अगर डॉक्‍यूमेंट सही हुए तो आपका आधार कार्ड अपडेट हो जाएगा.   

सीएम ने रखा 17,440 करोड़ का अनुपूरक बजट, कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों पर खास फोकस

भुवनेश्वर ओडिशा विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 17,440 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें किसानों के कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, उद्योग, संस्कृति, कृषि, और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।अतिरिक्त बजट में राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक महत्व दिया है। प्राथमिक और उच्च शिक्षा के विकास के लिए 2,327 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस बजट से राज्य का शिक्षा विभाग और अधिक प्रगति करेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। शिक्षा के बाद कृषि और किसानों को दूसरा सबसे अधिक महत्व दिया गया है। राज्य के किसानों के लिए अतिरिक्त बजट में 1,673 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह महिला और बाल विकास विभाग के लिए 1,558 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अतिरिक्त बजट में उद्योग एवं एमएसएमई के लिए 337 करोड़ रुपये, ममता योजना के लिए 141 करोड़, गोपबन्धु जन आरोग्य के लिए 440 करोड़, आपदा प्रबंधन हेतु 171 करोड़, अनुसूचित जाति और जनजाति विकास के लिए 531 करोड़, प्रशासनिक व्यय के लिए 3,389 करोड़ रुपये, सामाजिक सेवा के लिए 5,948 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य विभाग के लिए 1,164 करोड़ रुपये, पंचायती राज विभाग के लिए 616 करोड़ रुपये, ओड़िया भाषा एवं साहित्य विभाग के लिए 363 करोड़ रुपये, सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये, नंदनकानन के विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, पर्यावरण और पर्यटन विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, वन्यजीव संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए 25 करोड़ तथा शहरी विकास के लिए 303 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन का विवरण:     प्रशासनिक व्यय: 3,389 करोड़ रुपये     कार्यक्रम व्यय: 13,716 करोड़ रुपये प्रमुख क्षेत्रों में प्रावधान: किसान कल्याण एवं खाद्य सुरक्षा:     धान खरीद रिवॉल्विंग फंड के लिए 3,000 करोड़ रुपये     पीडीएस सब्सिडी के लिए 1,325 करोड़ रुपये     समृद्ध कृषक योजना के तहत एमएसपी और इनपुट सहायता के लिए 850 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाएं:     राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 994 करोड़ रुपये     एससीबी मेडिकल कॉलेज के उन्नयन के लिए 50 करोड़ रुपये     गोपबन्धु जन आरोग्य योजना के तहत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 40 करोड़ रुपये महिला, बाल एवं आजीविका विकास:     सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये     मिशन शक्ति कार्यक्रम के लिए 405 करोड़ रुपये     राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत 426 करोड़ रुपये शिक्षा, कौशल एवं युवा विकास:     पीएम-पोषण योजना के लिए 392 करोड़ रुपये     ओडिशा आदर्श विद्यालयों के लिए 320 करोड़ रुपये     गैर-सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के लिए अनुदान     बुनियादी ढांचा, ग्रामीण एवं शहरी विकास:     सेतु बंधन योजना के लिए 120 करोड़ रुपये     मुख्यमंत्री सहरी विकास योजना के तहत शहरी बुनियादी ढांचे के लिए 100 करोड़ रुपये उद्योग, आईटी एवं कनेक्टिविटी:     एसआइडीबीआइ क्लस्टर डेवलपमेंट फंड के तहत 276 करोड़ रुपये     भारतनेट, ओएसडब्ल्यूएएन कनेक्टिविटी और पुरी में नए सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन के लिए धनराशि संस्कृति एवं पर्यटन:     बारपुत्रा ऐतिहास्य ग्राम योजना के लिए 100 करोड़ रुपये     कलामंडल के लिए 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट में प्रावधान किया गया है।  

द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द मुहर लग सकती है

नई दिल्ली  वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण इस साल के अंत तक पूरा हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों आपस के ज्यादातर मुद्दों को सुलझा लिया है। अग्रवाल के मुताबिक, भारत इस कैलेंडर ईयर में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते को लेकर देश आशावादी है। हालांकि, अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर भारत कोई समझौता नहीं कर सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में फिक्की की 98वीं वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सम्मेलन में वाणिज्य सचिव ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि उनकी प्रतिबद्धता है कि 2025 तक भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते का पहला चरण पूरा हो जाए और अब चीजें काफी आगे बढ़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय बीटीए के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है और रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर भी लंबी बातचीत हुई है। भारत अमेरिका के साथ दो फ्रंट पर बातचीत कर रहा है। पहला -द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए और दूसरा- रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने को लेकर। अग्रवाल ने कहा कि जब अमेरिका की ओर से रेसिप्रोकल टैरिफ हटा दिए जाएंगे, तो यह व्यापार समझौता भारतीय निर्यात के लिए लाभदायक होगा। अग्रवाल ने गुरुवार को संसदीय स्थायी समिति को बताया कि अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश बीटीए पर नियमित रूप से वर्चुअल वार्ता कर रहे हैं और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का पहला चरण तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने के सकारात्मक संकेत दे चुके हैं, जिससे यह उम्मीद जगी है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच जल्द ही एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह भारत पर लगाए गए "टैरिफ" को "कम" करने की योजना बना रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि व्यापार वार्ता में जल्द ही कोई सफलता मिल सकती है।

न्यूमरेशन फॉर्म वितरण में रिकॉर्ड— 99.43% कवर हुए, चुनाव आयोग का दावा

नई दिल्ली  देश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है। भारतीय चुनाव आयोग ने दैनिक बुलेटिन में बताया कि अब तक 37,77,15,220 न्यूमेरेशन फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं, जो कुल फॉर्म का 74.10 प्रतिशत है। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50,68,42,224 फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल पात्र मतदाताओं की संख्या का 99.43 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि लगभग हर मतदाता को एसआईआर के दूसरे चरण के तहत न्यूमरेशन फॉर्म मिल चुका है। यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक चल रहा है और अभी करीब एक सप्ताह शेष है यानी मतदाता अपने फॉर्म आसानी से जमा कर सकते हैं ताकि उनकी जानकारी सही तरीके से मतदाता सूची में अपडेट हो सके। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विवरण के अनुसार अंडमान-निकोबार में 99.99 प्रतिशत से अधिक वितरण के साथ लगभग 76.28 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ में 99.51 प्रतिशत फॉर्म वितरण के साथ 77.80 प्रतिशत फॉर्म को डिजिटाइज किया जा चुका है। गुजरात ने 99.80 प्रतिशत फॉर्म वितरण और 81.58 प्रतिशत डिजिटाइजेशन हासिल किया है। मध्य प्रदेश में डिजिटाइजेशन 86.47 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गोवा में 92.69 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत और राजस्थान में प्रतिशत फर्म डिजिटाइज हो चुका है। देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 99.72 प्रतिशत फॉर्म वितरित हो चुके हैं, साथ ही 54.97 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल ने भी 87.91 प्रतिशत डिजिटाइजेशन के साथ अच्छा प्रदर्शन किया है। यह अभियान 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) में समान रूप से आगे बढ़ रहा है। इस अभियान में 5,32,828 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और 11,40,598 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। आयोग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से अधिक से अधिक बीएलए नियुक्त करने की अपील भी की है ताकि प्रक्रिया और पारदर्शी बने। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपने फॉर्म जमा कर दें ताकि आगामी मतदाता सूची में उनकी सभी जानकारियां सही-सही दर्ज हो सकें। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह चरण अब अपने निर्णायक दौर में है और आयोग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में डिजिटाइजेशन का आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।

ये सिर्फ कागज़ नहीं!– गवर्नर के फैसले पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, क्यों सुनाई खरी-खरी?

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के गवर्नर की इस बात के लिए आलोचना की कि वह सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुधांशु धुलिया की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में देरी कर रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि राज्य में APJ अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर की नियुक्ति में देरी क्यों की जा रही है, जबकि जस्टिस धूलिया ने इस पर अपनी रिपोर्ट बहुत पहले जमा कर दी थी। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केरल के राज्यपाल से जस्टिस धूलिया कमेटी की सिफारिशों पर जल्द ही फैसला लेने की उम्मीद है।   दरअसल, शीर्ष अदालत ने अगस्त में, राज्य सरकार और चांसलर (गवर्नर) के बीच चल रहे गतिरोध को देखते हुए कुलपति नियुक्ति के लिए नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए जस्टिस धूलिया की अगुवाई में एक सर्च कमेटी बनाई थी। जस्टिस धूलिया ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है लेकिन उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चांसलर यानी गवर्नर को यह भी निर्देश दिया था कि वे मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार ही कुलपतियों की नियुक्ति करें। मामला क्या? कोर्ट का यह आदेश गवर्नर द्वारा टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के चांसलर के तौर पर दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन पर आया था, जिसमें केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य सरकार की सिफारिश के बिना यूनिवर्सिटी के टेम्पररी वाइस चांसलर की गवर्नर द्वारा नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद, केरल सरकार ने जस्टिस पारदीवाला की बेंच के सामने यह मामला उठाया। राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने बेंच को बताया कि जस्टिस धूलिया आयोग ने रिपोर्ट सौंप दी है, बावजूद इसके कुलाधिपाति यानी चांसलर (गवर्नर) ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। क्या चांसलर ने जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है? इस पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, "क्या चांसलर ने माननीय जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है?" जब गवर्नर के वकील ने 'नहीं' में जवाब दिया, तो जस्टिस पारदीवाला नाराज हो गए। उन्होंने पूछा, "उन्होंने अभी तक इसे क्यों नहीं देखा?" लाइव लॉ के मुताबिक, इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने चांसलर के वकील से कहा कि वे निर्देश लेने के बाद बताएं कि फैसला कब तक लिया जा सकता है। जब वकील ने आगे दलीलें देनी चाहीं, तो जस्टिस पारदीवाला ने उन्हें रोक दिया और कहा, "यह सिर्फ एक साधारण कागज का टुकड़ा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज ने इसकी जांच की है। इसलिए आपको रिपोर्ट देखनी है और समय पर सही फैसला लेना है।" जस्टिस पारदीवाला ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आप जल्द फैसला लेंगे। जब फैसला हमारे सामने रखा जाएगा, तो हम तय करेंगे कि फैसला सही है या गलत।" इसके बाद उन्होंने मामले को अगले शुक्रवार के लिए टाल दिया।  

चक्रवात ‘दित्वा’ से जूझ रहे श्रीलंका की मदद को आगे आया भारत, राहत सामग्री भेजी, PM का बड़ा बयान

नई दिल्ली  चक्रवाती तूफान 'दित्वा' का कहर झेल रहे पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत तुरंत राहत सामग्री और ज़रूरी मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) मदद भेजी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे स्थिति बदलेगी, भारत और मदद देने के लिए तैयार है। उन्होंने शुक्रवार को 'चक्रवात दित्वा' से हुई भारी तबाही और कई लोगों की जान जाने के बाद श्रीलंका के लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई।   सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “चक्रवात दित्वा के कारण श्रीलंका के जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। मैं सभी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, आराम और जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। अपने सबसे करीबी समुद्री पड़ोसी के साथ एकजुटता दिखाते हुए, भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत तुरंत राहत सामग्री और ज़रूरी HADR सपोर्ट भेजा है। जैसे-जैसे हालात बदलेंगे, हम और मदद देने के लिए तैयार हैं। भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और विज़न MAHASAGAR के हिसाब से, भारत ज़रूरत के समय में श्रीलंका के साथ मज़बूती से खड़ा है।" बता दें कि श्रीलंका में इस तूफानी चक्रवात की वजह से हुई मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है और 21 लोग अभी भी लापता हैं। श्रीलंका ने शुक्रवार को ज़रूरी सेवाओं में शामिल लोगों को छोड़कर बाकी सभी के लिए पब्लिक हॉलिडे की घोषणा की है।  

आरक्षण पर सुप्रीम मोड़: क्या महाराष्ट्र में विजेता उम्मीदवार भी हो जाएंगे बेदख़ल?

नई दिल्ली  ओबीसी आरक्षण विवाद में फंसे महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है और चुनाव का रास्ता सशर्त साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (28 नवंबर) को महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को उन स्थानीय निकायों में 50% से ज़्यादा आरक्षण को नोटिफाई करने से रोक दिया है, जहाँ अभी चुनाव की अधिसूचना होनी बाकी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन नगर परिषदों और नगर पंचायतों में पहले से 50 फीसदी से अधिक आरक्षण अधिसूचित हो चुका है, वहां चुनाव तो तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे, लेकिन उनके नतीजे रिट याचिकाओं के अंतिम फैसले से प्रभावित होंगे। CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने महाराष्ट्र लोकल बॉडीज में OBC रिजर्वेशन को चुनौती देने वाली रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है। यानी इन सीटों पर हो सकता है कि कुछ उम्मीदवारों को जीतकर भी हारना पड़ सकता है या उन्हें जीत का स्वाद चखने से वंचित रहना पड़ सकता है क्योंकि जिन सीटों पर आरक्षण रद्द होगा, वहां जीते उम्मीदवार को विजेता होने के सुख से वंचित होना पड़ सकता है। 2 दिसंबर को मतदान होने हैं राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने बेंच को बताया कि 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत हैं, जहां चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और वहां 2 दिसंबर को मतदान होने हैं। इनमें से 40 नगर परिषद और 17 नगर पंचायत ऐसी हैं, जहां आरक्षण 50% से ज़्यादा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने पीठ को बताया कि राज्य में 29 नगर परिषदों, 32 ज़िला पंचायतों और 346 पंचायत समितियों के चुनाव अभी भी नोटिफाई होने बाकी हैं। रिट पिटीशन के नतीजे से प्रभावित होंगे चुनाव परिणाम इसके बाद CJI सूर्यकांत ने इस मामले को तीन जजों की बेंच को भेज दिया और 21 जनवरी को सुनवाई की तारीख तय करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि जहां भी चुनाव अधिसूचित हो चुके हैं, वहां तय समय पर चुनाव कराए जाएं। बेंच ने आदेश दिया, "इस बीच, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव नोटिफाइड शेड्यूल के हिसाब से बिना देरी के हो सकते हैं। हालांकि, जिन नगर परिषदों, नगर पंचायतों और में आरक्षण 50% से ज़्यादा है, उनके नतीजे रिट पिटीशन के नतीजे पर निर्भर करेंगे।" समाज को जाति की रेखाओं में नहीं बांटना चाहिए सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि राज्य में केवल दो महानगरपालिकाएं ऐसी हैं, जहां आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर जाने की संभावना है। इस पर अदालत ने कहा कि इनके चुनाव भी अधिसूचित किए जा सकते हैं, लेकिन इनके परिणाम भी रिट याचिकाओं के नतीजों से प्रभावित होंगे। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हम जो भी करें, समाज को जाति की रेखाओं में नहीं बांटना चाहिए। स्थानीय निकाय चुनाव दिसंबर 2021 से अटके हुए बता दें कि महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण की वजह से स्थानीय निकाय चुनाव दिसंबर 2021 से अटके हुए हैं। दिसंबर 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इसे 'ट्रिपल-टेस्ट' को पूरा करने के बाद ही लागू किया जा सकता है। बाद में, राज्य सरकार ने लोकल बॉडी चुनावों में OBC रिज़र्वेशन के मुद्दे की जांच के लिए मार्च 2022 में जयंत कुमार बंठिया कमीशन का गठन किया था। बंठिया आयोग ने जुलाई 2022 में अपनी रिपोर्ट दी थी। मई 2025 में, कोर्ट ने बंठिया कमीशन की रिपोर्ट से पहले के कानून के हिसाब से OBC रिज़र्वेशन देकर चार महीने के अंदर चुनाव कराने का निर्देश दिया था। पिछले हफ़्ते, कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने इस आदेश का गलत मतलब निकाला है कि रिज़र्वेशन 50% से ज़्यादा हो सकता है। यह साफ़ करते हुए कि बंठिया से पहले की स्थिति के हिसाब से चुनाव कराने का निर्देश 50% की लिमिट पार करने की इजाज़त नहीं है, बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि रिज़र्वेशन तय लिमिट यानी 50 फीसदी की सीमा के अंदर ही होना चाहिए।