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SC का बड़ा आदेश: महाराष्ट्र में 31 जनवरी तक पूरे हों नगर निकाय चुनाव

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (16 सितंबर) को महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर अहम सुनवाई हुई. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जनवरी, 2026 तक राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि 31 जनवरी के बाद कोई और समय सीमा नहीं दी जाएगी. चुनाव टालने के राज्य चुनाव आयोग के अनुरोध को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इसके बाद वह तारीख आगे बढ़ाने पर विचार नहीं करेगा. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को SC द्वारा निर्धारित पूर्व समय-सीमा के मुताबिक कदम न उठाने पर फटकार लगाई. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को इस साल 10 अक्टूबर तक राज्य में परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि लंबित परिसीमन 31 अक्टूबर तक पूरा किया जाए इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएग. ‘परिसीमन प्रक्रिया चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं’ कोर्ट ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं होगी. चूंकि स्कूल बोर्ड परीक्षाएं मार्च 2026 में होंगी, इसलिए हम चुनाव स्थगित करने के इस आधार को अस्वीकार करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्य सचिव आवश्यकतानुसार रिटर्निंग अधिकारियों और अन्य सहायक कर्मचारियों के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों को तुरंत तैनात करें. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि 6 मई को जारी उसके आदेश, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना चार सप्ताह के अंदर और चुनाव चार महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया गया था के बावजूद राज्य चुनाव आयोग इस संबंध में जल्द कार्रवाई करने में विफल रहा. सुप्रीम कोर्ट ने किए सवाल जस्टिस सूर्यकांत ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा- क्या चुनाव हो चुके हैं?. इस पर सरकार के वकील ने कहा कि प्रक्रिया चल रही है. मई में आदेश पारित हुआ था. चुनाव 4 महीने में होने थे. परिसीमन हो चुका है और राज्य चुनाव आयोग कुछ समय विस्तार की मांग कर रहा है. एक अंतरिम अर्जी दायर की गई है. कोर्ट ने लगाई फटकार सरकार के वकील का जवाब सुनकर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम आपको जनवरी तक का समय क्यों दें?. सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि 29 नगर निगम हैं. पहली बार एक साथ चुनाव हो रहे हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-आपकी निष्क्रियता अक्षमता को दर्शाती है. हमें मौखिक रूप से कारण बताएं. इस पर वकील ने कहा कि हमारे पास 65 हजार EVM मशीनें हैं, 50 हजार और चाहिए, हमने ऑर्डर दे दिए हैं. दरअसल, मई में सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया था, जो ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने से संबंधित मुकदमेबाजी के कारण 2022 से रुके हुए थे.  

भक्तों के लिए खुशखबरी: दुबारा खुल रहे हैं माता वैष्णो देवी के द्वार

जम्मू कई सप्ताह के इंतजार के बाद माता वैष्णो देवी यात्रा पुनः शुरू हो गई है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित इस पवित्र तीर्थस्थल का रास्ता, जो भारी भूस्खलन के कारण लगभग 22 दिनों तक बंद रहा था, अब श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह फैसला नवरात्रि के शुभ अवसर से ठीक पहले आया है, जिससे देश-विदेश से लाखों भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई है। भूस्खलन से यात्रा मार्ग हुआ था बाधित अगस्त के अंत में अर्धकुंवारी इलाके में भारी लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में 34 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई और कई लोग घायल हो गए थे। इसके चलते माता वैष्णो देवी की यात्रा मार्ग को सुरक्षा कारणों से तत्काल बंद कर दिया गया। तब से संबंधित विभागों ने लगातार मार्ग की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य में जुटे रहे। दोबारा शुरू हुई तीर्थयात्रा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने बुधवार, 17 सितंबर 2025 से यात्रा मार्ग को फिर से खोलने की घोषणा की। बोर्ड ने भक्तों से आग्रह किया है कि वे यात्रा के संबंध में आधिकारिक जानकारी और अपडेट्स के लिए केवल आधिकारिक चैनलों पर ही भरोसा करें। यात्रा के फिर से शुरू होने के फैसले से कटरा के आधार शिविर पर भारी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए और रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लंबी कतारें लगीं। श्रद्धालुओं की मांग और विरोध प्रदर्शन मार्ग खुलने से पहले कुछ श्रद्धालुओं ने यात्रा फिर से शुरू करने की मांग को लेकर कटरा में विरोध प्रदर्शन भी किया था। सुरक्षा कारणों से यात्रा पहले स्थगित की गई थी, लेकिन लगातार बढ़ती भक्तों की भीड़ और उनकी मांगों को देखते हुए श्राइन बोर्ड ने अंतिम रूप से यात्रा की अनुमति दे दी। हालांकि, बोर्ड ने यात्रियों को सतर्क रहने और नियमों का पालन करने की भी सलाह दी है। मौसम की भूमिका और सावधानियां जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई तेज बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने पूरे इलाके में तबाही मचाई थी, जिसका असर माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भी पड़ा था। फिलहाल मौसम अनुकूल है, लेकिन अधिकारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर यात्रा के दौरान विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। श्रद्धालुओं के लिए उत्साह का माहौल यात्रा मार्ग खुलते ही श्रद्धालुओं में जोश और उत्साह का माहौल है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर माता के दर्शन का सौभाग्य पाने के लिए देश-विदेश से भक्त कटरा पहुंच रहे हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-शांति और मनोबल भी बढ़ाती है।  

पराली मुद्दे पर सख्त CJI गवई, बोले – किसानों को जेल भेजने से सुधरेगी स्थिति

नई दिल्ली जैसे ही पराली के सीजन की हलचल शुरू हुई है वैसे ही एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर डिबेट शुरू हो गई है. इसी कड़ी में एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने  सुनवाई के दौरान कहा कि किसानों का सम्मान किया जाता है क्योंकि वे हमारे अन्नदाता हैं. मगर किसी को भी पर्यावरण को प्रदूषित करने की छूट नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पराली जलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. क्या कुछ किसानों को जेल भेजना सही मैसेज नहीं देगा?  शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर पराली जलाने वाले कुछ को जेल भेजा तो सब ठीक हो जाएंगे क्योंकि यह मिसाल कायम करेगा। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई चाहता है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को तीन महीने के भीतर सभी रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया। दिल्ली-एनसीआर में हर साल अक्टूबर में होने वाले वायु प्रदूषण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को कहा कि कुछ किसानों को पराली जलाने के लिए जेल भेजना दूसरों के लिए एक कड़ा संदेश हो सकता है। उन्होंने पूछा कि किसानों पर कार्रवाई करने से कतरा क्यों रहे हैं? तीन महीने के भीतर भरें रिक्तियां सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में रिक्तियों को लेकर राज्यों को फटकार भी लगाई और दिल्ली से सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब को तीन महीने के भीतर रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण रोकने के उपायों पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से तीन हफ्ते में रिपोर्ट भी मांगी है। इसके अलावा कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से वायु प्रदूषण रोकने के लिए विचार-विमर्श कर योजनाएँ बनाने को कहा है। न्यायमित्र ने क्या कहा? इससे पहले, मामले में न्यायमित्र नियुक्त अपराजिता सिंह ने CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को सब्सिडी और उपकरण दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन किसानों की भी यही कहानी है। पिछली बार, किसानों ने कहा था कि उन्हें ऐसे समय पराली जलाने के लिए कहा गया था, जब उपग्रह उस क्षेत्र से नहीं गुज़र रहा था। मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि 2018 से सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक आदेश पारित किए हैं, और वे आपके सामने केवल लाचारी जताते हैं।” पराली का इस्तेमाल ईंधन बनाने के लिए हो सकता है? CJI ने पूछा इस पर CJI ने सवाल किया कि अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दंडात्मक प्रावधानों पर विचार क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर कुछ लोग सलाखों के पीछे जाएंगे, तो इससे सही संदेश जाएगा। आप किसानों के लिए दंडात्मक प्रावधानों के बारे में क्यों नहीं सोचते? अगर पर्यावरण की रक्षा करने का आपका सच्चा इरादा है, तो फिर आप क्यों पीछे हट रहे हैं?" CJI ने आगे कहा, "किसान हमारे लिए खास हैं, और हम उनकी बदौलत खा रहे हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकते।" सीजेआई बीआर गवई ने इस दौरान ये भू पूछा कि क्या जलाई जाने वाली पराली का इस्तेमाल ईंधन बनाने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ अखबारों में ऐसा पढ़ा है।” हर साल अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली की हवा हो जाती है जहरीली बता दें कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण साल अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है और प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। किसान खेतों से पराली को हटाने के लिए उसे जला देते हैं। इसके विकल्प के तौर पर खेतों को साफ़ करने के लिए विशेष मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। किसानों का तर्क है कि ये विकल्प काफ़ी महंगे हैं। इसलिए पराली जलाने की घटनाएँ हर साल सामने आती रहती हैं, हालाँकि दर्ज मामलों में कमी आई है।

भारत फिर करेगा ताकत का प्रदर्शन, बंगाल की खाड़ी में बड़ी मिसाइल टेस्टिंग की तैयारी

नई दिल्ली भारत जल्द ही बंगाल की खाड़ी में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मिसाइल परीक्षण करने जा रहा है. इसके लिए 24 और 25 सितंबर के बीच एक NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया गया है, जिसमें बंगाल की खाड़ी के एक हिस्से को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है.  यह परीक्षण 1400 km से ज्यादा दूरी तक हो सकता है, जो दर्शाता है कि यह शक्तिशाली और लंबी दूरी की मिसाइल हो सकती है. यह परीक्षण ओडिशा तट पर अब्दुल कलाम द्वीप से होगा.  क्या है यह मिसाइल परीक्षण? रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) इस बड़े मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है. यह मध्यम या लंबी दूरी की मिसाइल हो सकती है, जिसमें अग्नि-प्राइम (Agni-P) का नाम सामने आ रहा है. अग्नि-प्राइम एक नई पीढ़ी की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 1000 से 2000 किलोमीटर तक है. NOTAM में बताई गई 1,400 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी इस बात का संकेत देती है कि यह एक रणनीतिक और शक्तिशाली मिसाइल होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह NOTAM दर्शाता है कि हम एक बहुत ही रणनीतिक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहे हैं, जो शायद लंबी दूरी की हो. यह भारत की रक्षा को और मजबूत करने की दिशा में DRDO का एक बड़ा कदम है.  भारत की मिसाइल ताकत बढ़ रही है पिछले कुछ सालों में DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के विकास में जबरदस्त प्रगति की है. इससे भारत की क्षेत्रीय ताकत और सैन्य क्षमता मजबूत हुई है. एक अन्य सूत्र ने बताया कि आने वाले हफ्तों में कई और मिसाइल परीक्षण होने वाले हैं. इनमें अलग-अलग रणनीतिक भूमिकाओं के लिए मिसाइलें शामिल हैं. हमारा लक्ष्य है कि हमारा हथियार भंडार आधुनिक और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो. ये मिसाइल परीक्षण क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक ताकत को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी हैं. हाल के सफल परीक्षण पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने तीन उन्नत मिसाइल सिस्टमों का सफल परीक्षण किया है…     अग्नि-5 (20 अगस्त 2025): यह 5,000 किलोमीटर तक की रेंज वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में ITR से किया गया. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इसने सभी तकनीकी और परिचालन मानकों को पूरा किया. अग्नि-5 पूरे एशिया, उत्तरी चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों को अपने दायरे में ला सकती है.     पृथ्वी-II: यह परमाणु-सक्षम छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका पिछले महीने सफल परीक्षण हुआ.     अग्नि-I: यह भी परमाणु-सक्षम छोटी दूरी की मिसाइल है, जिसका हाल ही में परीक्षण हुआ. ये परीक्षण DRDO के निरंतर प्रयासों का हिस्सा हैं, जो भारत की आक्रामक और रक्षात्मक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं. अग्नि-प्राइम: नई पीढ़ी की मिसाइल इस बार परीक्षण होने वाली मिसाइल अग्नि-प्राइम हो सकती है. यह मिसाइल हल्की, तेज और ज्यादा सटीक है. यह पुरानी अग्नि मिसाइलों की तुलना में उन्नत तकनीक से लैस है. अग्नि-प्राइम की रेंज 1000-2000 km है, जो इसे क्षेत्रीय रक्षा के लिए प्रभावी बनाती है. इसका छोटा आकार और गतिशीलता इसे लॉन्च करने में आसान बनाती है. क्यों जरूरी है यह परीक्षण? भारत के आसपास सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं. पड़ोसी देशों की सैन्य गतिविधियों और वैश्विक तनाव के बीच भारत को अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है. अग्नि-प्राइम और अन्य मिसाइलें भारत को रणनीतिक ताकत देती हैं, जिससे वह किसी भी खतरे का जवाब दे सकता है. ये परीक्षण भारत के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो स्वदेशी तकनीक पर जोर देता है. सुरक्षा और सावधानियां परीक्षण के लिए सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल और तैयारियां पूरी की जा रही हैं. नो-फ्लाई जोन सुनिश्चित करेगा कि नागरिक और वाणिज्यिक उड़ानों में कोई रुकावट न आए. परीक्षण के बाद मिसाइल के प्रकार और उसकी क्षमताओं के बारे में और जानकारी दी जाएगी. भारत का यह मिसाइल परीक्षण उसकी बढ़ती सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. अग्नि-प्राइम जैसे उन्नत हथियार भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाते हैं. DRDO के लगातार प्रयासों से भारत का मिसाइल भंडार और रक्षा प्रणाली दिन-ब-दिन और सशक्त हो रही है. 24-25 सितंबर का यह परीक्षण भारत की रक्षा यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित होगा.

इजरायल का UN पर निशाना, गाजा रिपोर्ट को खारिज किया; एक दिन में 150 हमले, हालात बिगड़े

तेल अवीव संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट को इजरायल ने खारिज कर दिया है, जिसमें 'फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार' का आरोप लगाया गया था। इजरायल ने इसे 'विकृत और झूठा' करार दिया और लेखकों को 'हमास प्रॉक्सी' बताकर खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की 72 पृष्ठों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल गाजा में नरसंहारकारी कृत्य कर रहा है। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से हमास के झूठ पर आधारित है, जिसे दूसरों ने दोहराया और प्रचारित किया। इजरायल इस विकृत और झूठी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और इस जांच आयोग को तत्काल समाप्त करने की मांग करता है। मंत्रालय ने आयोग के लेखकों पर यहूदी-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि तीनों सदस्यों ने जुलाई में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी, जबकि अध्यक्ष नवी पिल्लै का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इजरायल विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इजरायल नागरिक हताहतों से बचने की कोशिश करता है और हमास पर गैर-लड़ाकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट के झूठ के विपरीत, हमास ने ही इजरायल में नरसंहार की कोशिश की, 1200 लोगों की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किया, परिवारों को जिंदा जलाया और हर यहूदी को मारने के अपने लक्ष्य की खुलेआम घोषणा की। इजरायली विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को झूठे दावों की पुनरावृत्ति बताकर खारिज किया, जिन्हें स्वतंत्र शोध, जिसमें सितंबर की शुरुआत में जारी एक अध्ययन शामिल है, पहले ही खारिज किया जा चुका है। बार-इलान विश्वविद्यालय के बेगिन-सादात सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि नरसंहार के दावे त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर आधारित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र आयोग ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल में हुए हमले क्रूर युद्ध अपराध थे, लेकिन इनसे इजरायल के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं था। इजरायल अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन इसके तरीकों में यह तथ्य ध्यान में रखना होगा कि उसने बलपूर्वक फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा किया है और अवैध रूप से बस रहा है, जिससे फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन हो रहा है। गाजा में धमाकों के बीच गुजरी रात; 4 लाख भागे इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार भीषण हमले जारी हैं।  रात को इजरायल ने कुल 50 हमले गाजा पर किए हैं। इसके साथ ही बीते एक दिन के अंदर इजरायल ने गाजा पर 150 से ज्यादा हमले किए हैं। हालात ऐसे हैं कि गाजा से कुछ दिनों के अंदर ही 4 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। गाजा की आबादी 10 लाख के करीब थी और वहां से लगभग 4 लाख लोग पलायन कर गए हैं। स्पष्ट है कि करीब 40 फीसदी आबादी गाजा से पलायन कर चुकी है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीते दो दिनों के अंदर ही 150 ठिकानों पर गाजा में हमले किए गए हैं। बीती रात में ही 12 लोगों की इजरायली हमलों से मौत हो गई है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने अपने हमलों में सुरंगों को टारगेट किया है तो वहीं कई इमारतों को भी निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि इन इमारतों में हमास के आतंकी छिपे हुए थे। इजरायली सेना ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल लगातार आतंकियों को खत्म कर रहे हैं। अब तक आतंकी संगठन के कई ढांचों को ध्वस्त किया जा चुका है। गाजा को हमास का शक्ति केंद्र माना जाता है। ऐसे में इजरायल का कहना है कि हमास को खत्म करने के लिए गाजा को टारगेट करना होगा। सोमवार से ही इजरायल की सेना ने गाजा पर जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं। इससे पहले बीते सप्ताह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला कर दिया था। इस हमले के बाद से मुसलमान देशों में गुस्सा है। मंगलवार को दोहा में 60 मुसलमान देशों की मीटिंग थी, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इस मीटिंग में आने वाले देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और बहरीन जैसे मुस्लिम देश शामिल थे। इस दौरान मौजूद नेताओं ने कहा कि इजरायल के खिलाफ एकजुट होना होगा। यही नहीं पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने तो इस्लामिक नाटो की स्थापना की भी बात की। हालांकि किसी चीज पर सहमति नहीं बनी है बल्कि एक निंदा प्रस्ताव ही पारित किया जा सका। आरोपों पर नई बहस आयोग के तीन सदस्यों (नवी पिल्लै, क्रिस सिडोटी और मिलून कोठारी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इजरायल-विरोधी पूर्वाग्रह के आरोपों पर नई बहस छेड़ दी है। 2014 में अमेरिकी कांग्रेस के 100 से अधिक सदस्यों ने उनके नेतृत्व की निंदा करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि परिषद इजरायल के प्रति पूर्वाग्रह का पैटर्न दर्शाता है और इसे मानवाधिकार संगठन के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। कोठारी 2022 में विवाद के केंद्र में थे, जब उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया 'काफी हद तक यहूदी लॉबी द्वारा नियंत्रित' है और इजरायल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर सवाल उठाया। उनके बयान की यहूदी-विरोधी बताकर निंदा की गई। पिल्लै ने इस प्रतिक्रिया को 'दिखावा' बताकर खारिज किया और यहूदी-विरोधी चिंताओं को 'झूठ' करार दिया। सिडोटी की भी यहूदी समूहों पर यहूदी-विरोधी आरोपों को 'शादी में चावल की तरह' उछालने के लिए आलोचना हुई। 2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा स्थापित इस आयोग को इजरायल और फिलिस्तीनी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की जांच का कार्य सौंपा गया था। लेकिन इसके निष्कर्षों ने मुख्य रूप से इजरायल को निशाना बनाया, जिसके कारण यरुशलम, दुनिया भर के यहूदी संगठनों और कई पश्चिमी सरकारों ने इसकी निंदा की। यह आयोग अभूतपूर्व था, क्योंकि इसकी कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं थी और यह परिषद की सर्वोच्च स्तर की जांच थी।

भारतीय आईटी सेक्टर को एआई से मिलेगी रफ्तार, राजस्व में 6% तक की बढ़ोतरी का अनुमान

नई दिल्ली भारतीय आईटी सर्विस कंपनियों के राजस्व में वित्त वर्ष 27 में 5-6 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि कार्य की मात्रा में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यह जानकारी बुधवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आईटी कंपनियां अमेरिका की मजबूत व्यापक आर्थिक पृष्ठभूमि से लाभान्वित होने के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनके टॉप अमेरिकी क्लाइंट्स ने कई वर्षों में अपनी सबसे मजबूत तिमाहियों में से एक दर्ज की है। रिसर्च फर्म के विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह गति कॉर्पोरेट विश्वास को बढ़ाएगी और 2025 तक उच्च टेक्नोलॉजी खर्च को बढ़ावा देगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई एजेंट मल्टी-एजेंट सिस्टम में विकसित हो रहे हैं, जिससे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर के रिडिजाइन को बढ़ावा मिल रहा है। यह बदलाव भारतीय आईटी फर्मों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में उद्योग के अनुमानों का हवाला दिया गया है, जो बताते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होने पर अगले तीन से चार वर्षों में एआई आईटी सेवाओं के मूल्य को 8-10 प्रतिशत तक कम कर सकता है, जिसका मतलब है कि 2025-27 में इसका वार्षिक प्रभाव 3-4 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि, भारतीय आईटी कंपनियों ने कहा कि उन्होंने अब तक ग्राहकों से प्राप्त परियोजनाओं की संख्या बढ़ाकर इसकी भरपाई की है और इसलिए कुल राजस्व में वृद्धि जारी है। एचएसबीसी ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि 2026 में इस अपस्फीतिकारी प्रभाव और व्यापक अनुकूल परिस्थितियों के बीच खींचतान होगी।" कंपनी ने एजेंटिक एआई या एडवांस्ड मल्टी-एजेंट सिस्टम पर चिंताओं को खारिज कर दिया, जो संभावित रूप से सॉफ्टवेयर उद्योग को खत्म कर सकते हैं और लंबी अवधि में आईटी सर्विस को प्रभावित कर सकते हैं। भारत की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने अगस्त में अपने लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन संशोधन की घोषणा की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कंपनी 2025 में लगभग 12,000 कर्मचारियों, यानी अपने वर्कफोर्स के 2 प्रतिशत की छंटनी करने की तैयारी कर रही है।

बिहार के अनुभव के बाद दिल्ली में SIR की दिशा में चुनाव आयोग की पहल

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मामला गरमाया हुआ है। आरजेडी और कांग्रेस ​सहित सभी विपक्ष दल चुनाव आयोग और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। चुनाव आयोग SIR को देशभर में लागू करने का विचार कर रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि बिहार के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इसको लागू किया जाएगा। आयोग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक इसके लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। लेकिन जमीनी स्तर पर सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यह कदम राष्ट्रीय राजधानी के लाखों मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। तैयारियों का जायजा चुनाव आयोग ने सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर अधिकारियों (BLOs) की नियुक्ति पूरी कर ली है। जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और BLOs को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। BLOs अब घर-घर जाकर जनगणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरवाएंगे, जो दो प्रतियों में वितरित किए जाएंगे। यह प्रक्रिया 2002 के SIR की तर्ज पर हो रही है, जिसमें 2002 की मतदाता सूची और वर्तमान सूचियों का मिलान किया जाएगा।   दस्तावेजों की आवश्यकता जनता से अपील की गई है कि वे CEO दिल्ली की वेबसाइट पर 2002 की मतदाता सूची और विधानसभा क्षेत्रों का मिलान (Mapping) देखें। लिंक उपलब्ध हैं: https://www.ceodelhi.gov.in/ElectoralRoll_2002.aspx (2002 सूची) और https://ceodelhi.gov.in/SIR2025.aspx (मिलान के लिए)। यदि किसी का नाम 2002 और 2025 दोनों सूचियों में है, तो गणना प्रपत्र के साथ 2002 सूची का अंश जमा करना होगा। अगर नाम 2002 में नहीं है लेकिन माता-पिता का है, तो पहचान पत्र, गणना प्रपत्र और माता-पिता की 2002 सूची का अंश आवश्यक है। दस्तावेजों के बिना प्रपत्र अमान्य माना जाएगा। फर्जी वोटिंग पर लगेगी लगाम यह SIR मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। BLOs के दौरे से घर-घर पहुंच सुनिश्चित होगी, खासकर बुजुर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और फर्जी वोटिंग रुकेगी। CEO दिल्ली कार्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। जनता से आग्रह है कि नाम, पिता/माता का नाम सत्यापित करें। यह संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है, जो दिल्ली के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भारत-इंडोनेशिया के बीच अहम नौसैनिक बातचीत

नई दिल्ली भारत व इंडोनेशिया के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण वार्ता आयोजित की गई। दोनों देशों के बीच यह एक नौसैनिक वार्ता थी। इस वार्ता में भारत व इंडोनेशिया ने हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुरक्षा व सहयोग पर चर्चा की। भारत व इंडोनेशिया के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने दोनों देशों द्वारा संयुक्त द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों को लेकर भी बातचीत की है। नौसेना के मुताबिक भारत और इंडोनेशिया के बीच यह 13वीं नौसैनिक स्टाफ वार्ता थी जो नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। बुधवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए नौसेना ने बताया कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना की ओर से रियर एडमिरल निर्भय बापना ने की। वहीं भारत आए इंडोनेशियाई नौसेना के प्रतिनिधि मंडल की ओर से रियर एडमिरल रेटियोनो कुंटो ने इस वार्ता की सह-अध्यक्षता की है। भारत-इंडोनेशिया नौसैनिक वार्ता के दौरान दोनों देशों ने संचालनात्मक सहयोग बढ़ाने, द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों को और अधिक सुदृढ़ करने तथा प्रशिक्षण सहयोग के नए अवसरों को तलाशने पर विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामुद्रिक सुरक्षा को सहयोगात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए ठोस तंत्र विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। इस अवसर पर भारत-इंडोनेशिया संबंधों को “मैत्री का सेतु” बताया गया। वहीं दूसरी ओर भारत और म्यांमार के बीच त्रिदलीय सैन्य-सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम की शुरुआत भी हुई। दोनों देशों के बीच यह तीसरा तीन-दिवसीय पारस्परिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय वायुसेना का आईएल-76 विमान 120 तीनों सेनाओं के भारतीय जवानों व अधिकारियों को लेकर म्यांमार की राजधानी नेपीडाॅ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा। वहीं, म्यांमार सशस्त्र बलों का प्रतिनिधिमंडल भी इसी विमान से भारत के बोधगया पहुंचा है। जहां विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यह द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को एक नए सांस्कृतिक आयाम के साथ मजबूत करेगा और दोनों सेनाओं के बीच विश्वास और सहयोग को और प्रगाढ़ बनाएगा। इन दो सैन्य पहलों के साथ भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के अपने रणनीतिक साझेदार देशों—इंडोनेशिया और म्यांमार—के साथ रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। 

जन्मदिन पर पुतिन की शुभकामनाओं के लिए पीएम मोदी ने किया आभार व्यक्त

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर देश-दुनिया के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं। इसके लिए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का आभार जताया। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन, मेरे 75वें जन्मदिन पर आपके फोन कॉल और हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। हम अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर संभव योगदान देने के लिए तैयार है। वहीं, डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, "डोमिनिका की सरकार और जनता की ओर से मैं भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। हम महामारी के दौरान जीवन रक्षक सहायता सहित भारत के निरंतर सहयोग और जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर हमारे सहयोग की बहुत कद्र करते हैं। मैं कामना करता हूं कि आप दूरदर्शिता और समर्पण के साथ अपने राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए निरंतर स्वस्थ, प्रसन्न और सफल रहें। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, प्रधानमंत्री स्केरिट। भारत, डोमिनिका राष्ट्रमंडल के साथ मित्रता और एकजुटता के मजबूत संबंधों को गहराई से संजोए हुए है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकानाएं दीं। इसके बाद पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री लक्सन, आपकी हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं हमारी मित्रता को बहुत संजोता हूं। विकासशील भारत 2047 की दिशा में भारत की यात्रा में न्यूजीलैंड एक महत्वपूर्ण साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, "मेरे मित्र प्रधानमंत्री अल्बानीज, आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी और हमारे लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने की आशा करता हूं।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी – पराली जलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई कब होगी?

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि इस मामले में पराली जलाने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान क्यों नहीं की जा रही है। सरकार कार्रवाई से कतरा क्यों रही है? कुछ लोगों को जेल भेजने से सही संदेश जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि हम किसानों का सम्मान करते हैं, क्योंकि वे हमें खाना देते हैं, लेकिन किसी को भी पर्यावरण को दूषित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप किसानों के लिए कुछ दंडात्मक प्रावधानों के बारे में क्यों नहीं सोचते? अगर कुछ लोग जेल में हैं, तो इससे सही संदेश जाएगा। अगर पर्यावरण की रक्षा करने का आपका सच्चा इरादा है, तो फिर आप एक्शन लेने से क्यों डर रहे हैं? अदालत ने सरकार से कहा कि देश में किसानों का एक विशेष स्थान है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इसका फायदा उठाएं। सरकार इस पर फैसला ले, नहीं तो अदालत आदेश जारी करेगी। गलती करने वाले अधिकारियों की तो बात छोड़िए, क्योंकि हर किसान पर नजर रखना अधिकारियों के लिए मुश्किल है। मुख्य न्यायाधीश ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट से पूछा, "आप पराली जलाने वाले किसानों के लिए दंडात्मक प्रावधान लाने पर विचार क्यों नहीं करते हैं?" यह बातें सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआई से संबंधित राज्यों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में खाली पदों को नहीं भरे जाने पर अवमानना नोटिस पर सुनवाई के दौरान कहीं। दिल्ली के पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हर साल अक्टूबर और नवंबर में पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं। पराली जलाने की वजह से दिल्ली एनसीआर की हवा जहरीली हो जाती है। इन राज्यों के किसान पराली को खेतों से हटाने के बजाय जला देते हैं। पराली जलाने की घटनाएं हर साल सामने आती रहती हैं।