samacharsecretary.com

एक घटना ने बदल दिया नजरिया: भारत की चेतावनी के बाद अमेरिका ने छेड़ा था ग्लोबल वॉर ऑन टेरर

नई दिल्ली 11 सितंबर की तारीख दुनिया के इतिहास में कई अहम घटनाक्रमों की अलग-अलग कालखंड में गवाह रही है। इसी दिन स्वामी विवेकानंद ने 1893 में अमेरिका के शिकागो में वेदांत और हिंदू दर्शन से दुनिया को अवगत कराया था। विडंबना ही है कि शांति के उपदेश की तारीख के लिए जाना गए 11 सितंबर को ही करीब एक सदी बाद 2001 में भीषण आतंकी हमला हुआ। इस हमले में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर समेत दो इमारतों को टारेगट किया गया, जिसमें 3000 से ज्यादा लोग मारे गए। अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया के इतिहास में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला था। इस हमले ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया और पहली बार पश्चिमी जगत को यह आभास कराया कि आतंकवाद कितना खतरनाक है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में 1990 के दशक से ही आतंकवादी घटनाएं तीव्र हो गई थीं। सीमा पार आतंकवाद जोर पकड़ रहा था। पाकिस्तान की ओर से छेड़े गए छद्म युद्ध का भारत शिकार हो रहा था। इसे लेकर भारत ने लगातार वैश्विक मंचों पर आवाज भी उठाई, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देश उसकी गंभीरता को समझने में नाकाम रहे। माना जाता है कि 9/11 का आतंकी हमला वह मोड़ था, जब पूरे विश्व को आभास हुआ कि जिहादी आतंकवाद कितना बड़ा संकट है। इस आतंकी हमले ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत तमाम पश्चिमी देशों की आंखें खोल दी थीं और खुलकर जिहादी आतंकवाद की बात शुरू हुई। इसके बाद ही आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका ने जंग शुरू की और उसने नाम दिया Global War on Terrorism यानी GWOT। यह एक वैश्विक सैन्य अभियान था, जिसके तहत अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमले किए। ऐसा इसलिए हुआ ताकि अलकायदा की पनाहगाह में घुसकर हमले किए जाएं। दो दशक तक यहां अमेरिका डटा रहा और अंत में तालिबान के हाथ ही सत्ता छोड़कर उसे जाना पड़ा। लेकिन इस जंग के चलते ही दुनिया में कई संघर्ष हुए। वॉर एक्सपर्ट मानते हैं कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया में यह एक नए तरह का युद्ध था, जिसे आतंक के खिलाफ जंग कहा गया। इस जंग का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक आतंकी संगठन थे, जैसे- अलकायदा, तालिबान और उनके सहयोगी। अन्य बड़े लक्ष्य इराक का बाथ़ पार्टी शासन भी था, जिसे 2003 में आक्रमण कर हटाया गया। हालांकि इसे लेकर विवाद रहा है कि इराक पर जिन हथियारों का आरोप लगाकर सद्दाम हुसैन को हटाया गया, वे कभी मिले नहीं। इसके बाद 2014 में इस्लामिक स्टेट जैसे खूंखार आतंकी संगठन का उभार हुआ। बता दें कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 16 सितंबर 2001 को पहली बार 'वार ऑन टेररिज्म' का प्रयोग किया और कुछ दिन बाद संसद में दिए औपचारिक भाषण में 'वार ऑन टेरर' कहा।  

इज़राइल की चेतावनी के बावजूद WHO का ऐलान, गाजा में डटे रहेंगे डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी

गाजा  इजरायल ने गाजा पर कब्जे के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली सेना बार-बार लोगों से क्षेत्र खाली करने को कह रही है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि उसके कर्मचारी गाजा शहर में डटे रहेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने घोषणा की कि गाजा में नागरिकों के लिए डब्ल्यूएचओ और उसके सहयोगी गाजा शहर में बने रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि गाजा शहर और इसके आसपास करीब दस लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने बताया कि गाजा पट्टी में बचे आधे कार्यशील अस्पताल गाजा शहर में हैं, और क्षेत्र की कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली इन शेष सुविधाओं में से किसी को भी खोने का जोखिम नहीं उठा सकती। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'कार्रवाई' करने की अपील की और कहा कि यह तबाही मानव निर्मित है, जिसकी जिम्मेदारी हम सभी पर है। दरअसल, इजरायली सेना गाजा शहर पर अपने हमले तेज कर रही है और शहर पर कब्जा करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इस सप्ताह उसने वहां के नागरिकों को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी दी है। इजरायली सेना ने मंगलवार को गाजा शहर में बड़े हमले से पहले शहर खाली करने का आदेश दिया और चेतावनी दी कि जो लोग रह गए हैं, उन्हें गंभीर खतरा है। इजरायली सेना के प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने कहा कि सेना इस क्षेत्र में पूरी ताकत से कार्रवाई करेगी। करीब 10 लाख निवासियों से दक्षिण में अल-मवासी की ओर जाने को कहा गया है, जिसे इजरायल ने मानवीय क्षेत्र घोषित किया है। अद्राई ने चेतावनी दी कि शहर में रहना अत्यंत खतरनाक है। यह आदेश हमास द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए गाजा युद्धविराम प्रस्ताव के बाद बातचीत शुरू करने की घोषणा के एक दिन बाद आया। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि इजरायली बलों ने हाल के दिनों में 10 से अधिक बहुमंजिला इमारतों को नष्ट किया है। हमास पर आरोप है कि उसने इन इमारतों में इजरायली सैनिकों की निगरानी के लिए कैमरे लगवाए थे। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हाल के इजरायली हमलों में 67 लोग मारे गए और 320 घायल हुए हैं। बता दें कि इजरायल अक्टूबर 2023 से गाजा में हमास के खिलाफ अभियान चला रहा है। हमास द्वारा संचालित गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल के जवाबी हमलों में 64000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं।  

राहुल गांधी की अचानक विदेश यात्राएं बनीं चिंता का कारण, CRPF ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अनशेड्यूल्ड विदेश दौरों पर आपत्ति जताई है। सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले में उन्हें एक पत्र लिखा गया है। यह पत्र CRPF के वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने जारी किया है और इसकी प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी भेजी गई है। पत्र 10 सितंबर को जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी लगातार उन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जो उनकी सुरक्षा टीम ने निर्धारित किए हैं। वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने राहुल गांधी के सुरक्षा के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। राहुल गांधी को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, जिसमें ASL (Advance Security Liaison) कवर भी शामिल है। यह देश की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में CRPF के जवान हर वक्त सुरक्षा में तैनात रहते हैं। आपको बता दें कि बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ संपन्न करने के बाद राहुल गांधी अचानक विदेश यात्रा पर चले गए। ट्विटर पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो रही थीं। हालांकि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में शामिल होने के लिए भारत वापस आ गए और पार्टी के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। बिहार में यात्रा के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा अचानक गांधी को कसकर गले लगाने और उनके कंधे पर किस करने के कुछ हफ्ते बाद यह चिंता जताई गई। राहुल गांधी भी इस घटना से क्षण भर के लिए अचंभित रह गए थे। यह घटना पूर्णिया जिले में हुई, जहां से राहुल गांधी मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने दिन के अंतिम पड़ाव अररिया के लिए रवाना हुए थे। राजद नेता तेजस्वी यादव सहित सैकड़ों बाइक सवार राहुल गांधी के साथ चल रहे थे।

5 साल में 5.55 लाख का फायदा! जानें पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम के फायदे

निवेश की दुनिया में ज्यादातर लोग अपनी जमा पूंजी को बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में लगाना पसंद करते हैं. वजह साफ है – सुरक्षित रिटर्न और गारंटीड ब्याज. लेकिन क्या आपको पता है कि FD से भी ज्यादा रिटर्न देने वाला और उतना ही सुरक्षित विकल्प पोस्ट ऑफिस में मौजूद है? यहां एक ऐसी स्कीम है, जिसमें पैसा लगाकर आप न सिर्फ सुरक्षित रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि हर महीने की इनकम भी पा सकते हैं. पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम का नाम है मंथली इनकम स्कीम (MIS). इसमें निवेशक को 5 साल की अवधि के लिए एकमुश्त निवेश करना होता है. इस निवेश पर 7.4% सालाना ब्याज दर से कमाई होती है, जो हर महीने आपके खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. यानी बैंक FD की तरह मैच्योरिटी पर इंतजार नहीं, बल्कि हर महीने आपको अतिरिक्त इनकम मिलती रहेगी. इस स्कीम में निवेश की सीमा तय है.     सिंगल अकाउंट से अधिकतम निवेश: ₹9 लाख     जॉइंट अकाउंट से अधिकतम निवेश: ₹15 लाख यानी अगर परिवार के साथ संयुक्त निवेश किया जाए तो बड़ी रकम भी सुरक्षित ढंग से लगाई जा सकती है. 5.55 लाख रुपये का ब्याज, वो भी सिर्फ 5 साल में अगर कोई निवेशक इस स्कीम में 15 लाख रुपये जॉइंट अकाउंट से निवेश करता है, तो उसे हर महीने करीब ₹9,250 रुपये ब्याज मिलेगा. यह रकम सीधे निवेशक के अकाउंट में क्रेडिट होगी. इस तरह 5 साल में कुल ₹5.55 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में मिलते हैं. मूल रकम यानी 15 लाख रुपये 5 साल बाद सुरक्षित रूप से वापस मिल जाती है. क्यों है ये स्कीम खास?     सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाला निवेश     FD से ज्यादा ब्याज दर (7.4%)     हर महीने नियमित आय का विकल्प     आपात स्थिति में ब्याज की राशि का इस्तेमाल करने की सुविधा     वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर्ड लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी बचत हर महीने आपको नियमित कमाई दे और मूल रकम पूरी तरह सुरक्षित रहे, तो पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.

लेक्चरर की हैवानियत: पत्नी के साथ सरेआम की शर्मनाक हरकत, जबरन दूसरे से सिंदूर भरवाया

भुवनेश्वर ओडिशा के पुरी में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां पेशे से शिक्षक एक शख्स ने अवैध संबंधों के शक में पत्नी और युवक पर हथौड़े से हमला कर दिया। खबर है कि हमले के बाद दोनों को अर्धनग्न हालत में सड़कों पर घुमाया गया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें  कोर्ट में पेश किया गया। कॉलेज लेक्चरर और उसके साथी ने महिला और एक अन्य शख्स पर हमला कर दिया और उन्हें व्यस्त रोड पर कपड़े फाड़कर घुमाया। घटना मंगलवार की है। खबर है कि यह हमला अवैध संबंधों के शक में हुआ है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। फिलहाल, आगे की जांच जारी है। पुलिस ने अखबार को बताया कि 37 साल की शिक्षिका काफी समय से 43 साल के पति से अलग रह रही थीं। हमलावर जगतसिंहपुर जिले के एक संस्थान में कॉमर्स का लेक्चरर है। महिला घरेलू हिंसा की शिकायत के चलते पति से अलग पुरी जिले में एक किराये के घर में अपने 14 साल के बेटे के साथ रह रही थीं। मंगलवार को लेक्चरर और उसका एक दोस्त अचानक महिला के घर पहुंचे। दोनों महिला और एक अन्य शख्स को घर में पाकर हमला कर दिया, जिसमें दोनों को गंभीर चोट आईं हैं। बर्बरता की हद पुलिस ने कहा कि आरोपी ने हमले के बाद दोनों के कपड़े फाड़ दिए। इसके बाद वह महिला को बालों से पकड़कर घसीटता हुआ ले गया। दोनों ने मिलकर महिला और उस शख्स को माला पहनाई। साथ ही उस शख्स से महिला की मांग में सिंदूर भी भरवाया। वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि दोनों को व्यस्त सड़क पर घुमाया जा रहा है और अपमानित किया जा रहा है।

सुशीला कार्की का बड़ा बयान: मोदी जी को किया नमस्कार, भारत को लेकर दिए ये संदेश

 नई दिल्ली/काठमांडू  हिंसा से जूझ रहा नेपाल धीरे-धीरे शांति की ओर बढ़ रहा है. पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की नेपाल की अंतिरम सरकार की प्रमुख बनने के लिए रजामंद हो गई हैं. नेपाल की कमान संभालने से पहले ही कार्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. कार्की ने कहा कि मैं मोदी जी को नमस्कार करती हूं. मुझ पर मोदी जी का बहुत अच्छा प्रभाव है. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं. नेपाल में हालिया मूवमेंट की अगुवाई कर रहे Gen-Z ग्रुप ने मुझ पर विश्वास जताया है कि मैं भले ही छोटी अवधि के लिए लेकिन सरकार की अगुवाई करूं. उन्होंने कहा कि मेरी पहली प्राथमिकता उन लोगों का सम्मान करने की होगी, जिन्होंने प्रदर्शनों में अपनी जान खोई है. कार्की ने कहा कि हमारा पहला काम प्रोटेस्ट के दौरान मारे गए लोगों के परिवार वालों के लिए कुछ करने का होगा.  कार्की ने नेपाल का समर्थन को लेकर भारत की भूमिका की बात करते हुए कहा कि मैं भारत का बहुत सम्मान करती हूं और उनसे प्यार करती हूं. मैं मोदी जी की कार्यशैली से प्रभावित हूं. भारत ने नेपाल की बहुत मदद की है. नेपाल के अस्थिर राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कार्की ने कहा कि नेपाल में शुरू से ही समस्याएं रही हैं. अब स्थिति मुश्किल है. हम नेपाल के विकास के लिए काम करेंगे. हम देश की नई शुरुआत करेंगे. बता दें कि कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही हैं. उन्होंने 2016 में यह पद संभाला था. लेकिन उन पर सरकार के काम में दखल देने का  आरोप लगाकर महाभियोग लाया गया था. लेकिन कार्की ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, कोर्ट ने इसके बाद उन्हें राहत देने से फैसले को पलट दिया था.  नेपाल में बवाल: जेलब्रेक के दौरान कैदियों पर सेना की फायरिंग, 2 की मौत नेपाल में उथल-पुथल और राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है. इस बीच नेपाल के रामेछाप में कैदियों ने जेल से भागने की कोशिश की, जिसके बाद सेना ने गोली चला दी. सेना की गोली लगने से दो कैदियों की मौत हो गई है. सेना से झड़प के दौरान 10 और कैदियों को गोली लगी है. नेपाल में सेना का नियंत्रण होने के बाद गोलीबारी की ये पहली घटना है.  इससे पहले काठमांडू जेल ब्रेक से भागे बांग्लादेशी नागरिक को एसएसबी ने पकड़ा. यह शख्स सोने की तस्करी के आरोप में पांच साल से नेपाल में बंद था. बिहार-नेपाल सीमा के रक्सौल सीमा की सुरक्षा में लगी SSB की 47 बटालियन ने एक बांग्लादेशी नागरिक महमद अबुल हसन ढाली को हिरासत में लिया. SSB 47वीं बटालियन के कमांडेंट संजय पांडे ने बताया कि नेपाल में तीन दिनों से बदले स्थिति को देखते हुए सीमा पर गश्त बढ़ा दी गई है. बुधवार लगभग तीन बजे दिन में संदेह के आधार पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया. जांच में महमद अबुल हसन ढली ने बताया कि यह नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित जेल में पांच साल से कैद है और नेपाल में हुए जेल ब्रेक में भाग कर यह रक्सौल पहुंचा है, जिससे आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए हरपुर थाना को सौंपा जा रहा है. बता दे कि नेपाल में ओली सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दूसरे ओर तीसरे दिन नेपाल के विभिन्न जिलों से लगभग 15000 कैदी जेल से भाग निकले हैं.

सिर्फ चार नहीं, भारत में मिलते हैं 5 पासपोर्ट: किसके लिए कौन सा पासपोर्ट ज़रूरी?

नई दिल्ली भारत में पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा का दस्तावेज नहीं बल्कि आपके पद और उद्देश्य का भी प्रतीक है। ज्यादातर लोग सिर्फ नीले रंग के पासपोर्ट के बारे में जानते हैं लेकिन भारत में चार नहीं, बल्कि 5 तरह के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं। हर पासपोर्ट का रंग अलग होता है और वह धारक को मिलने वाली सुविधाओं और उसकी पहचान को दर्शाता है। पासपोर्ट के प्रकार और उनका महत्व भारत में पांच तरह के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं जिन्हें उनके रंग से आसानी से पहचाना जा सकता है: नीला पासपोर्ट: यह सबसे आम पासपोर्ट है जो सामान्य नागरिकों को जारी किया जाता है। इसका इस्तेमाल नौकरी, पढ़ाई, पर्यटन या व्यापार के लिए विदेश यात्रा करने वाले लोग करते हैं। यह पासपोर्ट धारक की पहचान एक आम नागरिक के रूप में करता है। सफेद पासपोर्ट: यह उन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए है जो आधिकारिक काम के लिए विदेश जाते हैं। सफेद पासपोर्ट मिलने से अधिकारी को विदेश यात्रा के दौरान कुछ खास सुविधाएं मिलती हैं। इस पासपोर्ट में एक RFID चिप भी लगी होती है जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। लाल या मरून पासपोर्ट: यह पासपोर्ट राजनयिकों और भारत के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को जारी किया जाता है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य उच्च-पदस्थ सरकारी अधिकारियों के पास यही पासपोर्ट होता है। इस पासपोर्ट के धारकों को विदेश में काफी सम्मान और विशेष सुरक्षा मिलती है। नारंगी पासपोर्ट: यह पासपोर्ट ECR (इमीग्रेशन चेक रिक्वायर्ड) कैटेगरी के लोगों के लिए होता है। ऐसे लोगों को कुछ खास देशों में यात्रा करने से पहले आव्रजन अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त जांच से गुजरना पड़ता है। हरा पासपोर्ट: यह पासपोर्ट विदेशी कर्मचारियों को जारी किया जाता है जो भारत में काम करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में उनकी पहचान स्थापित करना और उनके काम को आसान बनाना है। कैसे करें आवेदन? भारत में पासपोर्ट के लिए आवेदन करना अब बहुत आसान है। आप गृह मंत्रालय के पासपोर्ट सेवा पोर्टल (www.passportindia.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया में आपको अपना अकाउंट बनाना होगा जरूरी दस्तावेज जैसे एड्रेस प्रूफ और पहचान पत्र अपलोड करने होंगे। इसके बाद आप अपनी सुविधा के अनुसार पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) में जाकर सत्यापन के लिए अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। आप ऑनलाइन अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक भी कर सकते हैं जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।  

अब दिवालिया प्रोजेक्ट में फंसे होमबायर्स को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए घर खरीदारों की बड़ी राहत दी है. कोर्ट के फैसले से उन होमबायर्स को बड़ी राहत मिली है जो दिवालिया हो चुकी हाउसिंग प्रोजेक्ट में फंसे हुए हैं. कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे खरीदारों को उनकी संपत्ति का कब्ज़ा पाने का अधिकार है, बशर्ते उनके दावे को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने वित्तीय लेनदारों की सूची में स्वीकार कर लिया हो. यह फैसला होमबायर्स के अधिकारों को सुरक्षित करता है और दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान उनके हितों को प्राथमिकता देता है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ के एक मामले में सुनवाई करते हुए पारित किया. इस केस में, दो लोगों ने मोहाली के Ireo Rise (Gardenia) प्रोजेक्ट में 2010 में एक फ्लैट बुक किया था, उन्होंने 60 लाख की पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन 2018 में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू होने के कारण उन्हें फ्लैट का कब्ज़ा नहीं मिल पाया.  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने इस मामले को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा, क्योंकि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की ऐसी व्याख्या उन होमबायर्स के साथ अन्याय होगी, जो समझौते के अपने हिस्से का सम्मान करने के बावजूद फ्लैट पर कब्जे का इंतजार कर रहे हैं. न्यायमूर्ति संजय कुमार और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा, "इस मामले के तथ्य उन आम होमबायर्स की दुर्दशा को उजागर करते हैं, जो अपने सिर पर छत पाने की उम्मीद में अपनी जीवन भर की बचत का निवेश करते हैं.' अपीलकर्ताओं ने 2011 में ही लगभग पूरी राशि का भुगतान कर दिया था, उनके दावे को सही तरह से सत्यापित और स्वीकार किए जाने के बावजूद, आज उन्हें कब्जा देने से इनकार करना, उनके साथ अनुचित और अनावश्यक अन्याय होगा. कोर्ट ने पाया कि NCLT and NCLAT  ने याचिकाकर्ताओं को गलत तरीके से क्लॉज 18.4(xi) के तहत वर्गीकृत किया. यह क्लॉज उन होमबायर्स पर लागू होता है, जिन्होंने दावा नहीं किया, देर से दावा किया या जिनका दावा बिल्डर द्वारा सत्यापित नहीं किया गया. कोर्ट ने ने माना कि इस वर्गीकरण में गलतियां थीं. कोर्ट ने बताया कि इस क्लॉज में सत्यापित दावों और देरी से या असत्यापित दावों के बीच एक स्पष्ट अंतर है, क्योंकि क्लॉज 18.4(vi)(a) उन आवंटियों के मामलों को नियंत्रित करता है जिनके दावे सत्यापित और स्वीकार कर लिए गए हैं. ये आवंटी अपने अपार्टमेंट या उसके बराबर किसी वैकल्पिक यूनिट पर कब्जा पाने के हकदार हो जाते हैं.  अपीलकर्ताओं ने 27 मई 2011 को बिल्डर के साथ समझौता किया था और लगभग 60 लाख रुपये की पूरी कीमत में से 57,56,684 रुपये का भुगतान कर दिया था. NCLAT ने अपने फैसले में कहा था कि अपीलकर्ताओं का दावा देर से आया था, क्योंकि यह उस तारीख के बाद मिला था जब 23 अगस्त 2019 को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (लेनदारों की समिति) द्वारा समाधान योजना (Resolution Plan) को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी. याचिकाकर्ताओं ने इसी फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया था.

वसीयत विवाद ने बढ़ाई टेंशन: संजय कपूर की संपत्तियों पर कानूनी जंग तेज

नई दिल्ली दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा और कियान कपूर ने अपनी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर पर आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और प्रॉपर्टी में हिस्सा मांगा था। वहीं, अब संजय की मां रीना कपूर ने अपने दिवंगत बेटे की वसीयत में हिस्सा मांगा है।   उनके वकील वैभव गग्गर ने कहा कि संजय की वसीयत से संबंधित किसी भी दस्तावेज की जानकारी उनकी मां को नहीं दी गई है। इस मामले को लेकर वकील वैभव गग्गर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, ''आज के मामले में, संजय कपूर की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर ने अपने बच्चों की ओर से दावा किया है कि उन्हें एक वसीयत दिखाई गई है, जिसके आधार पर उनके बच्चों को संजय कपूर की निजी संपत्ति से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने इस वसीयत को फर्जी बताया है।'' उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में 'इंटेस्टेट सक्सेशन' यानी बिना वसीयत के उत्तराधिकार लागू हो, जिसके अनुसार संजय कपूर की संपत्ति पांच हिस्सों में बांटी जाए, करिश्मा के दो बच्चे, संजय की पत्नी प्रिया, उनका बेटा और संजय कपूर की मां रानी कपूर के बीच संपत्ति का विभाजन हो। बता दें कि प्रिया सचदेव कपूर का दावा है कि संजय कपूर ने 21 मार्च को एक वैध वसीयत बनाई थी, जिसके अनुसार संपूर्ण संपत्ति उन्हें सौंपी गई है। इस वसीयत को लेकर विवाद और गहरा हो गया है क्योंकि करिश्मा कपूर के बच्चों ने आरोप लगाया है कि यह वसीयत सात हफ्ते तक छुपाई गई और फिर अचानक एक पारिवारिक बैठक में पेश की गई, जिससे संदेह की स्थिति पैदा हुई। वकील गग्गर ने कहा, ''मैं इस वक्त मामले की मेरिट्स पर ज्यादा नहीं बोलूंगा, क्योंकि यह मामला अदालत के विचाराधीन है, लेकिन जो केस दायर किया गया है, उसकी यही मूल भावना है।'' कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि प्रिया सचदेव कपूर को 12 जून 2025 (संजय कपूर की मृत्यु की तारीख) तक की सभी निजी संपत्तियों का विस्तृत विवरण कोर्ट में दाखिल करना होगा। साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी याचिकाएं, जवाब और कानूनी रुख लिखित में कोर्ट के समक्ष पेश करें। इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की गई है।

DGHS का निर्देश – फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं, ‘डॉक्टर’ शब्द के प्रयोग पर रोक

नई दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने एक निर्देश जारी कर फिजियोथेरेपिस्ट्स से कहा है कि वे अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' शब्द का प्रयोग न करें, क्योंकि वे मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। 9 सितंबर को लिखे एक पत्र में, डीजीएचएस डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट अगर अपने नाम के आगे 'डॉ.' का प्रयोग करेंगे तो ये भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 का कानूनी उल्लंघन होगा। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली को लिखे पत्र में शर्मा ने कहा, "फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षित नहीं होते हैं, इसलिए उन्हें 'डॉ.' प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह मरीजों और आम जनता को गुमराह करता है, जिससे संभावित रूप से धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।" उन्होंने आगे कहा, "फिजियोथेरेपिस्टों को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें केवल रेफर किए गए मरीजों का ही इलाज करना चाहिए, क्योंकि वो चिकित्सीय स्थितियों को डायग्नोज करने के लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं। उनकी अनुचित फिजियोथेरेपी सलाह मामले को बिगाड़ भी सकती है।" पत्र में पटना और मद्रास उच्च न्यायालयों और देश भर की चिकित्सा परिषदों सहित विभिन्न न्यायालयों द्वारा जारी पूर्व कानूनी घोषणाओं और सलाहकार आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें फिजियोथेरेपिस्ट/व्यावसायिक चिकित्सकों को 'डॉ.' शब्द का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया गया है। अप्रैल में, राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) ने घोषणा की थी कि फिजियोथेरेपिस्ट अब अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' और आगे 'पीटी' लगा सकते हैं। यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एनसीएएचपी द्वारा 2025 फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम के शुभारंभ के एक भाग के रूप में लिया गया है। डीजीएचएस ने कहा, "यह उल्लेख करना उचित होगा कि परिषद की आचार समिति (पैरामेडिकल एवं फिजियोथेरेपी केंद्रीय परिषद विधेयक, 2007) ने पहले निर्णय लिया था कि 'डॉक्टर' (डॉक्टर) की उपाधि का प्रयोग केवल आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा ही किया जा सकता है। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित किसी अन्य श्रेणी के चिकित्सा पेशेवरों को इस उपाधि का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।" पत्र में आगे कहा गया है कि किसी भी उल्लंघन पर "आईएमए अधिनियम की धारा 6 और 6ए के उल्लंघन के लिए धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा सकती है", क्योंकि परिषद ने मार्च 2004 में अपनी बैठक में कानूनी राय अपनाई थी। पत्र में कहा गया है, " यह निर्देश दिया जाता है कि फिजियोथेरेपी के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम, अनुमोदित पाठ्यक्रम 2025 में फिजियोथेरेपिस्ट के लिए 'डॉ.' उपसर्ग का प्रयोग तत्काल हटा दिया जाए। फिजियोथेरेपी के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए, मरीजों या जनता को अस्पष्टता पैदा किए बिना, एक अधिक उपयुक्त और सम्मानजनक उपाधि पर विचार किया जा सकता है।"